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Gill Reacts After GT’s Big Loss

GT vs MI: मिडिल ओवर्स में महंगी पड़ी गेंदबाजी, 99 रन की हार के बाद बोले कप्तान Shubman Gill

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Shubman Gill reacts after Gujarat Titans lose heavily to Mumbai Indians in IPL match
GT vs MI IPL Match Gill Reaction

आईपीएल मुकाबले में Mumbai Indians ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए Gujarat Titans को 99 रनों से करारी शिकस्त दी। मैच के बाद गुजरात के कप्तान Shubman Gill ने हार की बड़ी वजह टीम की कमजोर गेंदबाजी, खासकर मिडिल ओवर्स में लुटे रन को बताया।

तिलक वर्मा का तूफानी शतक, मुंबई ने खड़ा किया बड़ा स्कोर

मुंबई इंडियंस की ओर से Tilak Varma ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 45 गेंदों में नाबाद 101 रन ठोक दिए। उनकी पारी में आठ चौके और सात छक्के शामिल रहे।
उन्होंने Hardik Pandya (15 रन) के साथ पांचवें विकेट के लिए 81 रन और Naman Dhir (45 रन) के साथ चौथे विकेट के लिए 52 रन की अहम साझेदारी निभाई।
इस दमदार प्रदर्शन के दम पर मुंबई ने 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 199 रन बनाए।

100 रन पर ढही गुजरात की बल्लेबाजी

लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुजरात टाइटंस की टीम शुरुआत से ही दबाव में दिखी और नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही। पूरी टीम 15.5 ओवर में सिर्फ 100 रन पर सिमट गई।
मुंबई के गेंदबाजों में Ashwani Kumar ने 4 विकेट, Allah Ghazanfar ने 2 विकेट और Mitchell Santner ने भी 2 विकेट लेकर मैच को पूरी तरह एकतरफा बना दिया।

हार के बाद क्या बोले शुभमन गिल

मैच के बाद Shubman Gill ने साफ कहा कि उनकी टीम ने मिडिल ओवर्स में जरूरत से ज्यादा रन दे दिए, जो मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
उन्होंने माना कि इस पिच पर 160-170 रन का स्कोर पर्याप्त हो सकता था, लेकिन खराब लेंथ और अस्थिर गेंदबाजी के कारण विपक्ष बड़ा स्कोर खड़ा करने में सफल रहा।

गिल ने आगे कहा कि टीम को अपनी गेंदबाजी रणनीति में सुधार करना होगा, खासकर सही लेंथ पर लगातार गेंद डालने की जरूरत है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बल्लेबाजी में भी सुधार की गुंजाइश थी, खासकर ओस के बावजूद टीम लक्ष्य का पीछा करने में नाकाम रही।

कप्तान ने इसे “झटका” बताया, लेकिन भरोसा जताया कि आने वाले मुकाबलों में टीम वापसी करेगी, भले ही मैच विरोधी टीमों के घरेलू मैदान पर क्यों न हों।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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आईपीएल 2026 में Mumbai Indians की Gujarat Titans पर बड़ी जीत के बाद ऑरेंज और पर्पल कैप की रेस और भी रोमांचक हो गई है। जहां एक ओर Shubman Gill टॉप पर पहुंचने का मौका गंवा बैठे, वहीं Kagiso Rabada ने गेंदबाज़ी में अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। ऑरेंज कैप: गिल से चूकी नंबर 1 की कुर्सी इस मुकाबले में Tilak Varma ने शानदार शतक जड़ा–जो इस सीजन का तीसरा शतक रहा (पहले Sanju Samson और Quinton de Kock यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं)। इसके बावजूद तिलक अभी टॉप 10 से काफी दूर हैं। ऑरेंज कैप की रेस में स्थिति इस प्रकार है: नंबर 1: Heinrich Klaasen – 283 रन नंबर 2: शुभमन गिल – 265 रन नंबर 3: Virat Kohli इसके बाद: Vaibhav Sooryavanshi, Rajat Patidar टॉप 10 में आगे: Cooper Connolly, Yashasvi Jaiswal, Ishan Kishan, Priyansh Arya और Prabhsimran Singh शामिल हैं। गिल के पास टॉप पर लौटने का सुनहरा मौका था, लेकिन 14 रन की छोटी पारी उन्हें पीछे ही रख गई। पर्पल कैप: रबाडा की धमाकेदार वापसी गेंदबाज़ी में पर्पल कैप की लड़ाई भी बेहद कड़ी हो गई है। नंबर 1: Anshul Kamboj – 13 विकेट नंबर 2: Prasidh Krishna – 12 विकेट इस मुकाबले में 3/33 का प्रदर्शन कर रबाडा 10 विकेट के आंकड़े तक पहुंच गए हैं और अब टॉप कंटेंडर्स में शामिल हो गए हैं। उनके साथ 10 विकेट लेने वाले गेंदबाज़: Bhuvneshwar Kumar Ravi Bishnoi वहीं Prince Yadav, जो हाल ही में टॉप 3 में पहुंचे थे, अब पीछे खिसक गए हैं। अन्य अहम आंकड़े इस सीजन में सिर्फ रन और विकेट ही नहीं, बल्कि कई अन्य दिलचस्प आंकड़े भी चर्चा में हैं: सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट वाले बल्लेबाज़ सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले खिलाड़ी सबसे किफायती गेंदबाज़ (इकोनॉमी रेट) बेस्ट बॉलिंग स्ट्राइक रेट ये आंकड़े दिखाते हैं कि आईपीएल 2026 सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि प्रदर्शन की निरंतरता का भी इम्तिहान है।  

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IPL 2026: ‘हम एक-दूसरे से सीखते हैं’–कोनोली ने बताया आर्या के साथ बैटिंग का सीक्रेट, PBKS की सफलता का फॉर्मूला आया सामने

इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में Punjab Kings के लिए इस सीजन एक नई ताकत बनकर उभरे Cooper Connolly ने अपनी सफलता और टीम की लय का राज खोल दिया है। लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ शानदार जीत के बाद कोनोली ने बताया कि वह और Priyansh Arya एक-दूसरे से सीखते हुए लगातार बेहतर बनने की कोशिश कर रहे हैं। आर्या-कोनोली की जोड़ी का धमाका रविवार को खेले गए मुकाबले में कोनोली ने 46 गेंदों में 87 रन की बेहतरीन पारी खेली, जबकि आर्या ने 37 गेंदों में 93 रन ठोककर सुर्खियां बटोरीं। दोनों ने मिलकर सिर्फ 80 गेंदों में 182 रन की साझेदारी कर टीम को इस सीजन का सबसे बड़ा स्कोर खड़ा करने में मदद की। मैच के बाद कोनोली ने कहा कि हर खिलाड़ी की अपनी शैली होती है और वही उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है। “हम एक-दूसरे के खेल से छोटी-छोटी चीजें सीखते हैं। यही हमें बेहतर बनाता है और टीम को मजबूत करता है,” उन्होंने कहा। कोनोली की स्थिरता बनी ताकत अपने पहले ही IPL सीजन में कोनोली ने 223 रन बनाकर टीम के टॉप स्कोरर के रूप में खुद को स्थापित कर लिया है। उन्होंने Prabhsimran Singh, Shreyas Iyer और आर्या जैसे खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है। कोनोली का मानना है कि सफलता का असली मंत्र अपनी ताकत को पहचानना और उसी पर टिके रहना है। उन्होंने कहा कि हर बल्लेबाज को यह समझना चाहिए कि कौन-सी गेंदों पर वह हावी हो सकता है और किन कमजोरियों पर काम करना है। रिकी पोंटिंग का बड़ा रोल PBKS के कोच Ricky Ponting ने कोनोली को टीम में लाने में अहम भूमिका निभाई है। अनुभवी खिलाड़ी Faf du Plessis के अनुसार, पोंटिंग जैसे दिग्गज के साथ काम करना किसी भी युवा खिलाड़ी के करियर को तेजी से आगे बढ़ा सकता है। पोंटिंग- अय्यर की जोड़ी से बदली टीम की तस्वीर PBKS की सफलता के पीछे कोच पोंटिंग और कप्तान Shreyas Iyer की जोड़ी का बड़ा योगदान माना जा रहा है। कोनोली ने बताया कि टीम फिलहाल भविष्य के बजाय हर मैच पर फोकस कर रही है और लगातार सुधार की कोशिश कर रही है। उन्होंने कप्तान अय्यर की तारीफ करते हुए कहा कि वह उदाहरण बनकर टीम को आगे बढ़ाते हैं और हर खिलाड़ी को सहज महसूस कराते हैं। PBKS का लक्ष्य साफ टीम का माहौल सकारात्मक है और सभी खिलाड़ी एक ही लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं–IPL ट्रॉफी जीतना। कोनोली के मुताबिक, टीम में खुलापन और सीखने की संस्कृति ही उनकी असली ताकत है।  

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रबाडा का कमाल: ‘एक्स्ट्रा बाउंस’ बना हथियार, 3 विकेट लेकर GT को दिलाई अहम जीत

  अहमदाबाद: Kagiso Rabada ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सही रणनीति और हालात की समझ से मैच का रुख बदला जा सकता है। Gujarat Titans के इस तेज गेंदबाज ने Kolkata Knight Riders के खिलाफ शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट झटके और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। पिच ने बदला गेम प्लान मैच के बाद रबाडा ने खुलासा किया कि टीम ने पिच को ध्यान में रखते हुए खास रणनीति बनाई थी। पावरप्ले में ही उन्होंने और Mohammed Siraj ने 3-3 ओवर डाले, जो आमतौर पर कम ही देखने को मिलता है। रबाडा के मुताबिक, पिच में नमी थी और गेंद थोड़ी दो-तरफा व्यवहार कर रही थी, जिससे बल्लेबाज खुलकर शॉट नहीं खेल पाए। इसका फायदा गेंदबाजों को मिला और पावरप्ले में ही KKR 37/3 पर सिमट गई। ‘एक्स्ट्रा बाउंस’ बना ताकत रबाडा ने कहा कि उनके करियर में हमेशा से ‘एक्स्ट्रा बाउंस’ उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उनका मानना है कि हर गेंदबाज की अपनी खासियत होती है–जहां सिराज लो बाउंस पिच पर खतरनाक साबित होते हैं, वहीं उछाल वाली पिचें रबाडा के लिए ज्यादा फायदेमंद होती हैं। इस मैच में भी पिच पर मौजूद अतिरिक्त उछाल ने उन्हें विकेट लेने में मदद की और उन्होंने 3/29 का शानदार प्रदर्शन किया। डेथ ओवर्स में कसी लगाम गुजरात टाइटंस के गेंदबाजों ने आखिरी ओवरों में बेहतरीन नियंत्रण दिखाया। जहां KKR का स्कोर 200 के पार जाता दिख रहा था, वहीं आखिरी चार ओवरों में सिर्फ 23 रन देकर उन्हें 180 पर रोक दिया गया। जीत सबसे जरूरी, रनरेट बाद में हालांकि GT को 181 रन का लक्ष्य हासिल करने में 19.4 ओवर लग गए, जिससे नेट रनरेट पर सवाल उठे। लेकिन रबाडा का मानना है कि टीम के लिए सबसे अहम जीत होती है, न कि रनरेट। उन्होंने कहा, “सबसे जरूरी जीत है। नेट रनरेट अपने आप बेहतर हो जाएगा। टूर्नामेंट अभी लंबा है और आगे सुधार का पूरा मौका है।” आगे की रणनीति रबाडा ने भरोसा जताया कि टीम के पास तेज रन बनाने की क्षमता है और सही समय पर टीम अपनी गति भी बढ़ाएगी। उनका कहना है कि बल्लेबाजों को अपनी प्राकृतिक खेल शैली पर भरोसा करना चाहिए।  

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