Iraq News

Iraqi desert region amid reports of alleged secret Israeli military bases and mysterious shepherd killing investigation.
Litton Das और Mushfiqur Rahim ने पाकिस्तान को किया परेशान

सिलहट टेस्ट में बांग्लादेश की पकड़ मजबूत, बढ़त पहुंची 249 रन Litton Das और Mushfiqur Rahim की शानदार बल्लेबाज़ी के दम पर Bangladesh national cricket team ने पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में मजबूत स्थिति बना ली है। सिलहट में खेले जा रहे मुकाबले के तीसरे दिन लंच तक बांग्लादेश ने दूसरी पारी में चार विकेट के नुकसान पर 203 रन बना लिए और कुल बढ़त 249 रन तक पहुंचा दी। टीम के अभी छह विकेट बाकी हैं, जिससे पाकिस्तान पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। लिटन और मुशफिकुर की साझेदारी बनी पाकिस्तान की सबसे बड़ी चुनौती लिटन दास 48 रन बनाकर नाबाद लौटे, जबकि मुशफिकुर रहीम 39 रन पर टिके रहे। दोनों बल्लेबाज़ों ने पांचवें विकेट के लिए अब तक 88 रन की नाबाद साझेदारी की है। इस साझेदारी ने पाकिस्तान के गेंदबाज़ों को पूरी तरह थका दिया और मैच को बांग्लादेश की तरफ मोड़ दिया। पहली पारी में 126 रन की शानदार शतकीय पारी खेलने वाले लिटन एक बार फिर बेहतरीन लय में दिखे। उन्होंने खराब मौसम और धीमे आउटफील्ड के बावजूद संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। सुबह के सत्र में पाकिस्तान को मिली शुरुआती सफलता बादलों से घिरे मौसम और तेज़ हवा का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज़ Khurram Shahzad ने दिन की शुरुआत में शानदार गेंदबाज़ी की। उन्होंने बांग्लादेश के कप्तान Najmul Hossain Shanto को LBW आउट कर टीम को शुरुआती सफलता दिलाई। शांतो 46 गेंदों में सिर्फ 15 रन बना सके। खुर्रम लगातार ऑफ स्टंप के बाहर गेंद को मूव करा रहे थे और बल्लेबाज़ों को परेशान कर रहे थे। धीरे-धीरे संभली बांग्लादेश की पारी सुबह के शुरुआती आठ ओवर तक बांग्लादेश कोई बाउंड्री नहीं लगा सका, लेकिन इसके बाद लिटन दास ने कवर ड्राइव के जरिए शानदार चौका जड़कर दबाव कम किया। उन्होंने पुल शॉट पर भी बेहतरीन चौका लगाया। दूसरी ओर मुशफिकुर रहीम शुरुआत में सतर्क रहे, लेकिन बाद में उन्होंने स्पिनर Sajid Khan के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने लॉन्ग-ऑन के ऊपर शानदार छक्का लगाकर पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा दीं। पाकिस्तान ने गंवाया बड़ा मौका लिटन दास को एक अहम जीवनदान भी मिला। 47वें ओवर में वह रन लेने के दौरान मिड-पिच पर फंस गए थे। मुशफिकुर ने उन्हें देर से वापस भेजा, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान के पास रन आउट का आसान मौका था। हालांकि Babar Azam सीधे स्टंप पर थ्रो नहीं लगा सके और लिटन बच गए। उस समय लिटन 38 रन पर बल्लेबाज़ी कर रहे थे। यह मौका पाकिस्तान को भारी पड़ सकता है। पहले दिन से ही बांग्लादेश का पलड़ा रहा भारी इससे पहले दूसरे दिन बांग्लादेश ने पाकिस्तान को पहली पारी में 232 रन पर ऑल आउट कर 46 रन की बढ़त हासिल की थी। बांग्लादेश की ओर से Nahid Rana और Taijul Islam ने तीन-तीन विकेट झटके। वहीं Mehidy Hasan Miraz और Taskin Ahmed को दो-दो सफलताएं मिलीं। पाकिस्तान की ओर से बाबर आज़म ने 68 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली और Salman Agha के साथ 63 रन की साझेदारी की। महमुदुल हसन जॉय ने भी दिखाई दमदार बल्लेबाज़ी बांग्लादेश की दूसरी पारी में Mahmudul Hasan Joy ने तेज़ अर्धशतक लगाकर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। उन्होंने Mominul Haque के साथ दूसरे विकेट के लिए 76 रन की अहम साझेदारी की। इस साझेदारी ने पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाया और बांग्लादेश को बड़ी बढ़त की दिशा में पहुंचा दिया। पाकिस्तान के लिए बढ़ी मुश्किलें तीसरे दिन लंच तक मुकाबला पूरी तरह बांग्लादेश के नियंत्रण में नजर आया। अगर लिटन दास और मुशफिकुर रहीम की साझेदारी लंबे समय तक जारी रहती है, तो पाकिस्तान के लिए इस टेस्ट मैच में वापसी करना बेहद मुश्किल हो सकता है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Iraqi desert region amid reports of alleged secret Israeli military bases and mysterious shepherd killing investigation.
चरवाहे ने देख लिया था इजराइल का कथित सीक्रेट सैन्य ठिकाना: इराक में गुप्त कैंप के दावों से मचा हड़कंप

Iraq के पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके में एक चरवाहे की रहस्यमयी मौत ने कथित तौर पर Israel के गुप्त सैन्य अड्डों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। 29 वर्षीय अवाद अल-शम्मारी अपनी पिकअप गाड़ी से सामान लेने निकला था, लेकिन कुछ घंटों बाद उसकी गोलियों से छलनी और जली हुई गाड़ी रेगिस्तान में मिली। स्थानीय लोगों का दावा है कि एक हेलिकॉप्टर उसका पीछा कर रहा था और लगातार फायरिंग कर रहा था। परिवार का आरोप है कि अवाद गलती से इजराइल के एक कथित सीक्रेट सैन्य ठिकाने तक पहुंच गया था, जहां उसने हेलिकॉप्टर, सैनिक और अस्थायी हवाई पट्टी देखी थी। परिवार का दावा- सेना को फोन करने के बाद हुई हत्या परिजनों के मुताबिक अवाद ने कथित सैन्य गतिविधियों की सूचना तुरंत इराकी सेना के क्षेत्रीय कमांड को दी थी। परिवार का मानना है कि इसी के बाद उसे निशाना बनाया गया। Israel Defense Forces (IDF) ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। रिपोर्ट में दो गुप्त सैन्य अड्डों का दावा अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल पिछले एक साल से अधिक समय से इराक के पश्चिमी रेगिस्तान में दो गुप्त सैन्य अड्डे चला रहा था। बताया जा रहा है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल Iran के खिलाफ सैन्य अभियानों के समर्थन के लिए किया जा रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक ठिकाना वही था जिसे अवाद ने कथित तौर पर देख लिया था। अमेरिका पर भी उठे सवाल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कम से कम एक कथित अड्डे की जानकारी United States को पहले से थी। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका ने इराक से यह जानकारी छिपाई कि उसकी जमीन पर एक विदेशी सेना सक्रिय थी। इराकी सांसद Waad al-Qaddo ने इसे इराक की संप्रभुता का उल्लंघन बताया। इराकी सेना को पहले से था शक इराकी सेना के यूफ्रेट्स यूनिट कमांडर Ali al-Hamdani ने कहा कि स्थानीय बेदुइन समुदाय कई हफ्तों से रेगिस्तान में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दे रहा था। लोगों ने हेलिकॉप्टरों की आवाजाही, सैनिकों की मौजूदगी और अस्थायी ढांचे देखे थे। उन्होंने कहा कि सेना को शक था कि वहां विदेशी सैन्य गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन सीधे कार्रवाई करने के बजाय निगरानी का फैसला लिया गया। जांच के लिए पहुंची सेना पर भी हमला अवाद की सूचना के बाद इराकी सेना ने इलाके में जांच के लिए टुकड़ी भेजी थी। मेजर जनरल हमदानी के अनुसार, सैनिक जैसे ही इलाके के करीब पहुंचे उन पर हमला हुआ। इस हमले में एक सैनिक की मौत हो गई जबकि दो अन्य घायल हो गए। सेना की गाड़ियों पर भी बमबारी की गई, जिसके बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा। सरकार की चुप्पी पर सवाल रिपोर्ट के मुताबिक इराकी सरकार ने अब तक आधिकारिक तौर पर इजराइली अड्डों की मौजूदगी स्वीकार नहीं की है। United States Central Command (CENTCOM) ने भी इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे से इराक के सामने गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या उसकी सुरक्षा एजेंसियों को विदेशी सैन्य मौजूदगी की जानकारी नहीं थी या फिर उन्होंने इसे नजरअंदाज किया। ईरान-इजराइल तनाव के बीच बढ़ी चिंता  यदि इराक में इजराइल की गुप्त मौजूदगी के दावे सही साबित होते हैं, तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है।इससे Iran समर्थित समूहों को इराक में और सक्रिय होने का बहाना मिल सकता है, जबकि Iraq के लिए अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाए रखना और कठिन हो जाएगा।  

surbhi मई 18, 2026 0
Viral video shows US F-15 chasing alleged Iranian drone amid Middle East conflict and explosion visuals
सस्ते ईरानी ड्रोन ने अमेरिकी F-15 को दिया चकमा?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को ईरानी ड्रोन का पीछा करते हुए दिखाया गया है। दावा किया जा रहा है कि कम कीमत वाला ईरानी ड्रोन अमेरिकी जेट को चकमा देने में सफल रहा। हालांकि, इस वीडियो की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। क्या दिख रहा है वायरल वीडियो में? आसमान में अमेरिकी F-15 फाइटर जेट ईरान के कथित शाहेद ड्रोन का पीछा इसके बाद जमीन पर जोरदार धमाका और धुएं का गुबार सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स का दावा है कि अमेरिकी जेट ड्रोन को रोकने में नाकाम रहा, जिससे सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। एरबिल में तेल प्लांट पर हमला रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना इराक के एरबिल शहर में एक ब्रिटिश कंपनी के मोटर ऑयल प्लांट पर हुए हमले से जुड़ी हो सकती है। प्लांट में भीषण आग लगी आसमान में काला धुआं फैल गया सुबह के समय तीन ड्रोन से हमला किए जाने की बात बताया जा रहा है कि यह प्लांट एक ब्रिटिश ब्रांड का था, जिसे सरदार ग्रुप संचालित करता है। आधिकारिक पुष्टि नहीं अब तक अमेरिका, ब्रिटेन या किसी सहयोगी देश की ओर से इस हमले या वायरल वीडियो की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में दावों की सत्यता पर सवाल बने हुए हैं। इराक में बढ़ता तनाव मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर इराक पर भी साफ दिख रहा है: अमेरिका और ईरान समर्थित समूहों के बीच टकराव बढ़ा कई सैन्य ठिकानों पर हमले इराक सरकार संतुलन बनाने की कोशिश में इराक ने कुछ समूहों को आत्मरक्षा की अनुमति दी है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि अमेरिकी हितों पर हमले करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। क्या संकेत देता है यह मामला? यदि वायरल दावे सही साबित होते हैं, तो यह दिखाता है कि कम लागत वाले ड्रोन भी बड़ी सैन्य चुनौती बन सकते हैं पारंपरिक फाइटर जेट्स के सामने नई रणनीतिक चुनौतियां उभर रही हैं

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Smoke rising near US Embassy in Baghdad after suspected missile or drone attack.
बगदाद में United States दूतावास पर मिसाइल/ड्रोन हमला, इलाके में मचा हड़कंप

  Iraq की राजधानी Baghdad में स्थित United States के दूतावास पर हमले की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दूतावास परिसर को निशाना बनाकर मिसाइल या ड्रोन से हमला किया गया, जिसके बाद इलाके में धुआं उठता देखा गया। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक एक मिसाइल दूतावास की इमारत से टकराई, जिसके बाद परिसर से धुआं उठता दिखाई दिया। हालांकि इस हमले में हुए नुकसान या हताहतों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं Associated Press की रिपोर्ट के अनुसार मिसाइल दूतावास परिसर के भीतर बने हेलिपैड पर गिरी। दूसरी ओर Agence France-Presse (AFP) ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि दूतावास पर एक ड्रोन के जरिए हमला किया गया। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में बगदाद में हुए एक अन्य हमले में Iran समर्थित दो लड़ाकों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। माना जा रहा है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यह घटना हालात को और ज्यादा गंभीर बना सकती है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां हमले की जांच में जुटी हैं और दूतावास के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
US Air Force KC-135 Stratotanker refueling aircraft flying during aerial refueling mission before Iraq crash incident
हवा में रिफ्यूलिंग के दौरान अमेरिकी सैन्य विमान इराक में क्रैश, जांच शुरू

  पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच United States को एक और बड़ा झटका लगा है। Iraq के पश्चिमी हिस्से में अमेरिकी वायुसेना का एक रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह घटना 12 मार्च 2026 को उस समय हुई जब विमान हवा में दूसरे सैन्य विमान को ईंधन भरने के मिशन पर था। इस हादसे की जानकारी अमेरिकी सैन्य कमान United States Central Command (CENTCOM) ने दी। कमान के मुताबिक दुर्घटना के समय दो KC-135 रिफ्यूलिंग विमान मिशन में शामिल थे, जिनमें से एक क्रैश हो गया जबकि दूसरा विमान सुरक्षित लैंड करने में सफल रहा।   दुश्मन के हमले से नहीं हुआ हादसा सेंटकॉम के अनुसार यह दुर्घटना किसी दुश्मन के हमले या फ्रेंडली फायर का परिणाम नहीं थी। हादसा उस समय हुआ जब दोनों विमान मित्र क्षेत्र (फ्रेंडली एयरस्पेस) में ऑपरेशन के दौरान उड़ान भर रहे थे। यह मिशन अमेरिकी सैन्य अभियान Operation Epic Fury के तहत चल रहा था, जो क्षेत्र में ईरान से जुड़े सैन्य तनाव के बीच संचालित किया जा रहा है। दुर्घटना के बाद तुरंत बचाव और राहत अभियान शुरू कर दिया गया।   KC-135 रिफ्यूलिंग विमान की खासियत दुर्घटनाग्रस्त विमान Boeing KC-135 Stratotanker अमेरिकी वायुसेना का एक प्रमुख एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान है। यह विमान पिछले 60 वर्षों से अधिक समय से सेवा में है।   इसमें सामान्यतः तीन सदस्यीय क्रू होता है – पायलट, को-पायलट और बूम ऑपरेटर।   बूम ऑपरेटर उड़ान के दौरान दूसरे विमानों में ईंधन भरने की प्रक्रिया नियंत्रित करता है।   आवश्यकता पड़ने पर यह विमान लगभग 37 यात्रियों को भी ले जा सकता है।     युद्ध के दौरान चौथा अमेरिकी विमान हादसे का शिकार ईरान से जुड़े संघर्ष के दौरान यह कम से कम चौथा अमेरिकी सैन्य विमान है जो दुर्घटना का शिकार हुआ है। इससे पहले F-15E Strike Eagle लड़ाकू विमान फ्रेंडली फायर की घटना में मार गिराए गए थे। बताया गया था कि उस घटना के दौरान क्षेत्र में ईरानी विमानों, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से खतरा बना हुआ था, जिसके कारण भ्रम की स्थिति पैदा हुई और गलती से अपने ही विमान निशाना बन गए। हालांकि उस घटना में सभी क्रू सदस्य सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे थे।   युद्ध में बढ़ रहा नुकसान रिपोर्टों के अनुसार ईरान से जुड़े इस सैन्य टकराव में अब तक सात अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 140 सैनिक घायल बताए जा रहे हैं। इनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि दुर्घटना की विस्तृत जांच जारी है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, उससे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0