पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच United States को एक और बड़ा झटका लगा है। Iraq के पश्चिमी हिस्से में अमेरिकी वायुसेना का एक रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह घटना 12 मार्च 2026 को उस समय हुई जब विमान हवा में दूसरे सैन्य विमान को ईंधन भरने के मिशन पर था।
इस हादसे की जानकारी अमेरिकी सैन्य कमान United States Central Command (CENTCOM) ने दी। कमान के मुताबिक दुर्घटना के समय दो KC-135 रिफ्यूलिंग विमान मिशन में शामिल थे, जिनमें से एक क्रैश हो गया जबकि दूसरा विमान सुरक्षित लैंड करने में सफल रहा।
सेंटकॉम के अनुसार यह दुर्घटना किसी दुश्मन के हमले या फ्रेंडली फायर का परिणाम नहीं थी। हादसा उस समय हुआ जब दोनों विमान मित्र क्षेत्र (फ्रेंडली एयरस्पेस) में ऑपरेशन के दौरान उड़ान भर रहे थे।
यह मिशन अमेरिकी सैन्य अभियान Operation Epic Fury के तहत चल रहा था, जो क्षेत्र में ईरान से जुड़े सैन्य तनाव के बीच संचालित किया जा रहा है। दुर्घटना के बाद तुरंत बचाव और राहत अभियान शुरू कर दिया गया।
दुर्घटनाग्रस्त विमान Boeing KC-135 Stratotanker अमेरिकी वायुसेना का एक प्रमुख एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान है।
ईरान से जुड़े संघर्ष के दौरान यह कम से कम चौथा अमेरिकी सैन्य विमान है जो दुर्घटना का शिकार हुआ है। इससे पहले F-15E Strike Eagle लड़ाकू विमान फ्रेंडली फायर की घटना में मार गिराए गए थे।
बताया गया था कि उस घटना के दौरान क्षेत्र में ईरानी विमानों, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से खतरा बना हुआ था, जिसके कारण भ्रम की स्थिति पैदा हुई और गलती से अपने ही विमान निशाना बन गए। हालांकि उस घटना में सभी क्रू सदस्य सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे थे।
रिपोर्टों के अनुसार ईरान से जुड़े इस सैन्य टकराव में अब तक सात अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 140 सैनिक घायल बताए जा रहे हैं। इनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि दुर्घटना की विस्तृत जांच जारी है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, उससे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान को शुक्रवार तड़के कड़ी सुरक्षा के बीच रावलपिंडी की अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया। यह कदम पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि जेल में बंद इमरान खान को व्यापक मेडिकल जांच और इलाज के लिए दो दिनों के भीतर राजधानी के एक निजी अस्पताल में ले जाया जाए। इमरान खान 2023 से जेल में हैं और तोशाखाना मामले में 14 साल की सजा काट रहे हैं। अस्पताल के बाहर कड़ी सुरक्षा इमरान खान के अस्पताल पहुंचने के बाद इस्लामाबाद के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस सैयद अली नासिर रिजवी ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। प्रशासन, पुलिस, जेल अधिकारियों और रेंजर्स के अधिकारी भी अस्पताल में मौजूद रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के लिए विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के 800 से अधिक जवान तैनात किए गए हैं। इमरान खान को जेल से अस्पताल ले जाने और सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए राजधानी पुलिस और प्रशासन की विशेष टीमें भी गठित की गई थीं। सेहत को लेकर सामने आईं कई परेशानियां सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले अदियाला जेल के सुपरिटेंडेंट ने इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर अदालत में रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) के डॉक्टर ने 1 अगस्त को उनकी जांच की थी। रिपोर्ट में अनियंत्रित और उतार-चढ़ाव वाले ब्लड प्रेशर, तेज धड़कन, सिरदर्द और बेचैनी जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान ने अपनी परेशानी के लिए पत्नी, परिवार और परिचितों से कम मुलाकात के अलावा अखबार और टीवी की अनुपलब्धता को भी वजह बताया था। आरिफ अल्वी ने जताई खुशी इमरान खान को अस्पताल ले जाने के फैसले पर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे उम्मीद की किरण बताया। उन्होंने इमरान खान के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया। वहीं, PTI नेतृत्व ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और अस्पताल के बाहर भीड़ नहीं जुटाने की अपील की है, ताकि इमरान खान की मेडिकल जांच और इलाज की प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा न आए।
तेल अवीव, एजेंसियां। इजरायली सेना ने पहली बार स्वीकार किया है कि उसके सैनिकों ने जनवरी 2024 में गाजा में 5 वर्षीय फिलिस्तीनी बच्ची हिंद रजब और उसके परिवार को ले जा रही कार पर गोलीबारी की थी। सेना ने इस मामले में अब आपराधिक जांच शुरू करने का आदेश दिया है। इससे पहले इजरायली सेना ने क्षेत्र में अपने सैनिकों की मौजूदगी से इनकार किया था। परिवार के छह सदस्यों की भी हुई थी मौत हिंद रजब अपने परिवार के साथ कार में थी, जब उस पर गोलीबारी हुई। हिंद कई घंटों तक घायल अवस्था में कार के अंदर फंसी रही और फिलिस्तीनी रेड क्रिसेंट के बचावकर्मियों से फोन पर मदद की गुहार लगाती रही। बाद में हिंद और उसके परिवार के सदस्यों के शव बरामद हुए। बचाव के लिए भेजी गई एंबुलेंस भी बनी निशाना हिंद को बचाने के लिए फिलिस्तीनी रेड क्रिसेंट की एंबुलेंस भेजी गई थी। इजरायली सेना की आंतरिक समीक्षा में सैनिकों की ओर से कार पर गोलीबारी और बचाव अभियान के दौरान एंबुलेंस पर हुए हमले से जुड़े गंभीर सवाल सामने आए हैं। इस घटना में दो पैरामेडिक्स की भी मौत हुई थी। पांच घटनाओं की समीक्षा के बाद कार्रवाई इजरायली सेना ने गाजा युद्ध से जुड़ी करीब 150 घटनाओं की समीक्षा के बाद पांच प्रमुख मामलों के निष्कर्ष जारी किए। इनमें हिंद रजब की मौत और 2025 में 15 फिलिस्तीनी मेडिकल एवं राहतकर्मियों की मौत से जुड़े मामलों में आपराधिक जांच शुरू करने का फैसला किया गया है। परिवार ने जांच पर जताया अविश्वास हिंद रजब के परिवार ने इजरायली सेना की आंतरिक जांच को स्वीकार नहीं किया है। उसकी दादी ने स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है। मानवाधिकार संगठनों ने भी सवाल उठाया है कि इजरायली सैन्य जांच से वास्तविक जवाबदेही सुनिश्चित होगी या नहीं।
वॉशिंगटन: गुजरात सरकार राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बुधवार को वॉशिंगटन में World Bank की एक बैठक के दौरान गुजरात में AI आधारित परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग की मांग रखी। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि समेत कई क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल बढ़ाना चाहता है। मुख्यमंत्री ने World Bank से गुजरात की परियोजनाओं के लिए रियायती वित्त उपलब्ध कराने पर विचार करने का आग्रह किया। इसके साथ ही उन्होंने गुजरात के GIFT City में World Bank की मौजूदगी स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा। प्रशासन से खेती तक AI का विस्तार World Bank में आयोजित राउंडटेबल बैठक में भूपेंद्र पटेल ने कहा कि गुजरात सरकार AI को अपनाने को लेकर प्रतिबद्ध है और विभिन्न क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने खास तौर पर प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि को AI के प्रमुख उपयोग वाले क्षेत्रों के रूप में बताया। सरकार का जोर तकनीक के जरिए सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने, निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावी करने और विभिन्न क्षेत्रों में नई तकनीकों को लागू करने पर है। वित्तीय अनुशासन के आधार पर फंडिंग की मांग भूपेंद्र पटेल ने World Bank से गुजरात की विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने की अपील करते हुए राज्य के वित्तीय अनुशासन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जो राज्य वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हैं, World Bank उनके प्रोजेक्ट्स की फंडिंग में अतिरिक्त लाभ देने पर विचार कर सकता है। मुख्यमंत्री ने गुजरात के वित्तीय प्रबंधन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली वित्तीय अनुशासन की दिशा से भी जोड़ा। हालांकि, बैठक में World Bank की ओर से गुजरात को किसी विशेष परियोजना के लिए फंड मंजूर किए जाने की घोषणा नहीं की गई। GIFT City में World Bank की मौजूदगी का प्रस्ताव मुख्यमंत्री ने गुजरात के GIFT City में World Bank की उपस्थिति स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा। उनका कहना है कि इससे गुजरात में वैश्विक वित्तीय संस्थानों और निवेशकों के साथ सहयोग को और बढ़ावा मिल सकता है। GIFT City को गुजरात सरकार अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और कारोबारी गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित कर रही है। ऐसे में World Bank की मौजूदगी राज्य की वैश्विक वित्तीय पहचान को और मजबूत कर सकती है। World Bank की बैठक में कई बड़े अधिकारी मौजूद इस राउंडटेबल में गुजरात के मुख्य सचिव एमके दास, GIFT City के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्रुप CEO संजय कौल समेत World Bank और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। World Bank के दक्षिण एशिया के उपाध्यक्ष Johannes Zutt, IFC के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के उपाध्यक्ष Riccardo Puliti और MIGA के उपाध्यक्ष Junaid Kamal Ahmad समेत कई अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। अमेरिका दौरे में टेक कंपनियों पर भी फोकस भूपेंद्र पटेल का अमेरिका दौरा केवल World Bank तक सीमित नहीं है। उन्होंने सैन फ्रांसिस्को में Google, Micron और Perplexity AI जैसी टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। मुख्यमंत्री अगले दो दिनों में न्यूयॉर्क का दौरा करेंगे, जहां उनकी कारोबारी जगत के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। उनके अमेरिकी दौरे का मुख्य फोकस तकनीक, निवेश, वैश्विक साझेदारी और गुजरात में नई औद्योगिक संभावनाओं को बढ़ावा देना है। गुजराती प्रवासियों से भी मिले मुख्यमंत्री वॉशिंगटन में भारत के अमेरिका स्थित राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भी मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गुजराती प्रवासी समुदाय के सदस्यों के लिए कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान गुजरात में मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर में वैश्विक साझेदारी बढ़ाने तथा प्रवासी भारतीयों के साथ संबंध मजबूत करने पर चर्चा हुई। अमेरिका में गुजरात की नई टेक्नोलॉजी रणनीति भूपेंद्र पटेल का अमेरिकी दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब गुजरात AI, डिजिटल टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। World Bank से संभावित वित्तीय सहयोग और GIFT City में वैश्विक संस्थानों की मौजूदगी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।