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Imran Khan death rumor sparks panic in Pakistan as military denies reports and journalist clarifies unverified claim
इमरान खान की जेल में मौत की खबर से मचा हड़कंप, पाकिस्तानी सेना ने किया खारिज; पत्रकार ने भी दी सफाई

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान की जेल में मौत होने की खबर ने बुधवार को पाकिस्तान समेत भारत में भी हलचल पैदा कर दी। एक पत्रकार की रिपोर्ट में दावा किया गया कि जेल में हिरासत के दौरान इमरान खान की मौत हो गई है। हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे गलत और अफवाह बताया है। विवाद बढ़ने के बाद रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले पत्रकार वजाहत सईद खान ने भी अपनी रिपोर्ट को लेकर सफाई दी। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके सूत्रों ने इमरान खान की मौत की पुष्टि नहीं की थी। उनके मुताबिक, सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने इमरान खान की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जरूर जताई थी, लेकिन उनके पास उनकी मौत का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं था। तीन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का हवाला वजाहत सईद खान के मुताबिक, पाकिस्तान सेना के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने इमरान खान की हालत और उनके भविष्य को लेकर चिंता जताई थी। अधिकारियों की बातचीत से ऐसी आशंका जरूर सामने आई थी कि स्थिति गंभीर हो सकती है। लेकिन पत्रकार के अनुसार, इन अधिकारियों ने इमरान खान की मौत की पुष्टि नहीं की थी। बाद में वजाहत ने स्पष्ट किया कि उनकी रिपोर्ट का उद्देश्य सेना पर यह दबाव बनाना था कि वह इमरान खान के जीवित होने का स्पष्ट प्रमाण सामने रखे। इस सफाई के बाद मौत की खबर को लेकर फैली अटकलों पर फिलहाल विराम लगा है। पाकिस्तानी सेना ने क्या कहा? मामला सामने आने के बाद पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने इमरान खान की मौत की खबरों को खारिज कर दिया। सेना ने पत्रकार की रिपोर्ट को गलत बताया और इमरान खान की मौत से जुड़े दावों को खारिज किया। इसके बाद वजाहत सईद खान ने भी कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि ISPR ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी। इस घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिस रिपोर्ट ने इमरान खान की मौत को लेकर सवाल खड़े किए थे, उसके लेखक ने बाद में स्वयं यह स्पष्ट किया कि उनके पास मौत की पुष्टि करने वाला कोई सबूत नहीं था। इमरान खान की जेल में स्थिति पर फिर उठे सवाल मौत की खबर भले ही खारिज कर दी गई हो, लेकिन इस पूरे विवाद ने इमरान खान की जेल में स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। इमरान खान लंबे समय से जेल में बंद हैं और उनके समर्थक लगातार उनकी रिहाई की मांग करते रहे हैं। उनकी हिरासत और स्वास्थ्य को लेकर समय-समय पर तरह-तरह के दावे और राजनीतिक आरोप सामने आते रहे हैं। ऐसे माहौल में किसी वरिष्ठ राजनीतिक नेता की मौत की अपुष्ट खबर का तेजी से फैलना पाकिस्तान के राजनीतिक और सूचना तंत्र की संवेदनशीलता को भी दिखाता है। कई मामलों में फंसे हैं पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की राजनीतिक मुश्किलें अप्रैल 2022 में उनकी सरकार गिरने के बाद तेज हुईं। इसके बाद उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए। मई 2023 में उनकी गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में व्यापक राजनीतिक तनाव देखने को मिला। अगस्त 2023 में उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया गया और तब से अलग-अलग मामलों के कारण उनकी जेल से रिहाई नहीं हो सकी। कुछ मामलों में उन्हें राहत मिली, लेकिन अन्य मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी रही। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल वह अल-कादिर ट्रस्ट मामले में 14 साल की सजा काट रहे हैं। अफवाह ने क्यों पकड़ा जोर? इमरान खान पाकिस्तान के सबसे प्रभावशाली और विवादित राजनीतिक नेताओं में से एक हैं। लंबे समय से जेल में रहने और उनकी स्थिति को लेकर सीमित सार्वजनिक जानकारी के बीच सोशल मीडिया पर किसी भी अपुष्ट दावे के तेजी से फैलने की संभावना ज्यादा रहती है। इस मामले में भी एक पत्रकार की रिपोर्ट के बाद मौत की खबर तेजी से चर्चा में आ गई। लेकिन सेना के खंडन और पत्रकार की बाद की सफाई ने स्पष्ट कर दिया कि मौत की पुष्टि करने वाला विश्वसनीय प्रमाण सामने नहीं आया था। इसलिए फिलहाल इमरान खान की मौत की खबर को अफवाह और अपुष्ट दावा ही माना जाना चाहिए। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री की स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी को लेकर पारदर्शिता कितनी है। आने वाले दिनों में इमरान खान की स्थिति पर कोई आधिकारिक और विश्वसनीय जानकारी सामने आती है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।  

surbhi अगस्त 13, 2026 0
Pakistan military spokesperson addresses a press conference on India-Taliban relations and regional security.
भारत-तालिबान संबंधों पर पाकिस्तान की तीखी टिप्पणी, ISPR ने BJP-RSS और तालिबान को लेकर दिया विवादित बयान

India-Taliban Relations: भारत और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के बीच बढ़ते राजनयिक और व्यापारिक संबंधों पर पाकिस्तान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने BJP, RSS और तालिबान के संबंधों पर विवादित टिप्पणी करते हुए इसे "मालिक और गुलाम" का रिश्ता बताया। रावलपिंडी में आतंकवाद विरोधी अभियानों और बलूचिस्तान की सुरक्षा स्थिति पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने यह बयान दिया। पाकिस्तान के सरकारी प्रसारक PTV ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ हिस्से सोशल मीडिया पर साझा किए हैं। धार्मिक संदर्भ देकर तालिबान पर साधा निशाना प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अहमद शरीफ चौधरी ने धार्मिक आयतों का हवाला देते हुए तालिबान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जो लोग गैर-मुस्लिमों को अपना मित्र या संरक्षक बनाते हैं, उनका इस्लामी मूल्यों से कोई संबंध नहीं रह जाता। उन्होंने कहा, "क्या मौजूदा तालिबान शासन का कोई भी आचरण इस्लामी मूल्यों को दर्शाता है? महिलाओं और बच्चों के साथ उनका व्यवहार, घर बैठे फतवे जारी करना और मुसलमानों के खून-खराबे को जायज ठहराना—इन सबका इस्लाम से कोई संबंध नहीं है।" अफगान मंत्री के बयान के बाद बढ़ा विवाद पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब हाल ही में अफगानिस्तान के कृषि मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी भारत दौरे पर आए थे। नई दिल्ली में आयोजित भारत-अफगानिस्तान व्यापार एवं उद्योग संवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत सरकार और विदेश मंत्रालय की मेहमाननवाजी की सराहना करते हुए कहा था कि भारत आकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे अपने ही लोगों के बीच हों। उन्होंने अपने संबोधन में कहा था, "भारत की धरती पर कदम रखते ही जो अपनापन मिला, उससे लगा कि यह हमारा अपना देश है और हमारा डीएनए एक जैसा है।" भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर पाकिस्तान की नजर हाल के महीनों में भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार, मानवीय सहायता और राजनयिक संपर्कों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियों पर पाकिस्तान लगातार नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान के साथ भारत के बढ़ते संपर्क को पाकिस्तान अपनी क्षेत्रीय रणनीति के लिए चुनौती के रूप में देख रहा है। हालांकि भारत ने अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन मानवीय सहायता, व्यापार और राजनयिक संवाद के जरिए दोनों पक्षों के बीच संपर्क लगातार बढ़ रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान की ओर से आई यह टिप्पणी क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस का कारण बन गई है।  

kalpana अगस्त 3, 2026 0
Pakistani security forces conduct anti-terror operation in Balochistan targeting militant hideouts and armed groups.
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना का बड़ा ऑपरेशन, 35 आतंकवादी ढेर

Pakistan के अशांत Balochistan प्रांत में सुरक्षा बलों ने बड़ा आतंकवाद विरोधी अभियान चलाते हुए 35 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है। इसके साथ ही तीन वरिष्ठ कमांडरों को भी गिरफ्तार किया गया है। बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता Shahid Rind ने रविवार रात क्वेटा में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह ऑपरेशन मंगला जरघून क्षेत्र में 13 मई से चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि पिछले चार दिनों में सुरक्षा बलों ने कई ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए आतंकियों के बेस कैंप भी नष्ट कर दिए। TTP और प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ कार्रवाई प्रवक्ता के मुताबिक यह अभियान प्रतिबंधित संगठन Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) और बलूचिस्तान में सक्रिय उसके प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ चलाया गया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों कमांडर “हाई-प्रोफाइल” और संगठन के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। रिंद ने कहा कि यह कार्रवाई पहले गिरफ्तार किए गए आतंकवादियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर की गई। कई आतंकी ठिकाने तबाह सुरक्षा बलों ने मंगला जरघून इलाके में आतंकवादियों के कई ठिकानों और बेस कैंपों को भी नष्ट कर दिया। प्रवक्ता ने बताया कि प्रांत के अन्य हिस्सों में भी अतिरिक्त अभियान जारी हैं। इन अभियानों का मकसद आतंकवादी नेटवर्क के संचालकों, वित्तीय समर्थकों और उनके सहयोगियों तक पहुंचना है। पाकिस्तानी सेना की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान हालांकि, Pakistan Army ने अब तक इस ताजा अभियान पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इससे पहले 12 मई को बलूचिस्तान के बरखान जिले में एक अन्य सैन्य अभियान के दौरान एक मेजर समेत पांच पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा Inter-Services Public Relations (ISPR) के अनुसार, उस कार्रवाई में कम से कम सात आतंकवादी भी मारे गए थे। बलूचिस्तान में लगातार बढ़ रही हिंसा बलूचिस्तान लंबे समय से अलगाववादी गतिविधियों और आतंकवादी हमलों से प्रभावित रहा है। पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार इस क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में बढ़ती हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों के कारण पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में सैन्य और खुफिया अभियानों को और तेज कर दिया है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Pakistan ISPR chief Ahmed Sharif Chaudhry faces backlash after remarks targeting Indian Army press briefing
भारतीय सेना पर तंज कसना पड़ा भारी, पाकिस्तान में ही घिरे ISPR प्रमुख; लोगों ने कहा- उर्दू सिर्फ जनता को बहकाने के लिए

पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का भारतीय सेना पर किया गया तंज अब उन्हीं पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली बरसी पर भारतीय सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर टिप्पणी करने के बाद पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर ही उनकी जमकर आलोचना हो रही है. दरअसल, 7 मई को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पहलगाम आतंकी हमले के बाद की रणनीतिक स्थिति और सैन्य तैयारियों पर जानकारी दी थी. इस दौरान अधिकारियों ने अंग्रेजी भाषा में मीडिया को संबोधित किया, जिस पर पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग ISPR के प्रमुख अहमद शरीफ चौधरी ने सवाल उठाए. “अंग्रेजी में क्यों बोले?” : पाक प्रवक्ता का तंज अहमद शरीफ चौधरी ने भारतीय अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा, “आपको अंग्रेजी में बोलने के लिए किसने कहा? क्या आप दुनिया को अपनी कहानी सुनाना चाहते हैं?” उन्होंने दावा किया कि भारतीय सैन्य अधिकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैरेटिव बनाने के लिए अंग्रेजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन उनका यह बयान पाकिस्तान में ही विवाद का कारण बन गया. पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी ने खोली पोल पाकिस्तानी सेना के पूर्व अधिकारी और वर्तमान पत्रकार मेजर आदिल फारूक राजा (रिटायर्ड) ने ISPR प्रमुख के बयान को “पाखंड” बताया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सेना में उच्च स्तर से लेकर निचले स्तर तक अधिकांश आधिकारिक संचार अंग्रेजी में ही होता है. मेजर राजा ने कहा, “उर्दू का इस्तेमाल सिर्फ पाकिस्तान की जनता को भ्रमित करने और प्रोपोगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है. असल रणनीतिक दस्तावेज और सूचनाएं अंग्रेजी में तैयार होती हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में अंग्रेजी एक “लिंक लैंग्वेज” के तौर पर इस्तेमाल होती है, इसलिए सैन्य ब्रीफिंग अंग्रेजी में देना कोई असामान्य बात नहीं है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर उठाए सवाल मेजर आदिल राजा ने पाकिस्तान सेना से यह भी पूछा कि वह “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान हुए नुकसान की पूरी जानकारी जनता से क्यों छिपा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सेना केवल “एकतरफा कहानी” पेश कर रही है और जनता को वास्तविक स्थिति नहीं बताई जा रही. सोशल मीडिया पर भी कई पाकिस्तानी यूजर्स ने सेना से सवाल किए कि आखिर नुकसान और विफलताओं को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा. सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस अहमद शरीफ चौधरी के बयान के बाद पाकिस्तान में भाषा, सैन्य पारदर्शिता और मीडिया नैरेटिव को लेकर बहस तेज हो गई है. कई यूजर्स ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों और सैन्य कूटनीति में अंग्रेजी का इस्तेमाल सामान्य बात है, इसलिए इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है. वहीं कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान सेना वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भाषा जैसे विषयों को उछाल रही है.  

surbhi मई 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 11, 2026 0