भारत समेत वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर साफ दिखाई देने लगा है। एक दिन की राहत भरी तेजी के बाद बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों की चिंता बढ़ने से शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 800 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,300 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 803.13 अंक यानी 1.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,846.71 अंक पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 209.35 अंक यानी 0.89 प्रतिशत गिरकर 23,274.20 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद मंगलवार को बाजार में मामूली रिकवरी देखने को मिली थी, लेकिन वैश्विक तनाव ने फिर से निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। आईटी शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट बाजार की गिरावट में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 27 लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। आईटी दिग्गज कंपनियों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। सबसे अधिक गिरावट टीसीएस के शेयर में दर्ज की गई, जो 4 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया। इसके अलावा इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, आईटीसी, बजाज फाइनेंस और अन्य बड़े शेयरों में भी बिकवाली का दबाव रहा। हालांकि कुछ शेयरों ने बाजार को सीमित सहारा देने की कोशिश की। भारती एयरटेल, टाटा स्टील और एशियन पेंट्स में मजबूती देखने को मिली, लेकिन यह बढ़त समग्र बाजार की कमजोरी को संतुलित नहीं कर सकी। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में केवल बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी कमजोरी का माहौल रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में करीब 0.67 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स में आईटी सबसे कमजोर रहा, जहां 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा रियल्टी और पीएसयू बैंकिंग शेयरों में भी दबाव बना रहा। दूसरी ओर मेटल सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। रुपया भी कमजोर, डॉलर के मुकाबले फिसला शेयर बाजार में गिरावट के साथ-साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव दिखाई दिया। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी के साथ खुला और 95.45 के स्तर पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में भी रुपया 17 पैसे की गिरावट के साथ 95.36 पर बंद हुआ था। आखिर बाजार में गिरावट की वजह क्या है? बाजार की इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के बयान ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। उनके अनुसार ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बड़े हिस्से में माइन बिछा दी है और कुछ वाणिज्यिक जहाजों पर फायरिंग की घटनाएं भी सामने आई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। ऐसे में वहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल तनाव बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 96.90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई, व्यापार घाटे और कॉर्पोरेट मुनाफे पर दबाव बढ़ा सकती हैं। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। आगे निवेशकों की नजर किस पर रहेगी? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम बाजार की चाल तय करेंगे। यदि तनाव और बढ़ता है तो शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। वहीं किसी सकारात्मक कूटनीतिक समाधान की खबर बाजार को राहत दे सकती है।
घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत मजबूती के साथ हुई। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और चुनिंदा सेक्टर्स में खरीदारी के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में खुले। शुरुआती कारोबार में बैंकिंग, फार्मा और मेटल शेयरों में तेजी देखने को मिली, जबकि आईटी सेक्टर पर दबाव बना रहा। बीएसई सेंसेक्स 339 अंकों की तेजी के साथ 74,947.12 के स्तर पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 118 अंकों की बढ़त लेकर 23,530.25 पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही निवेशकों का रुझान चुनिंदा स्टॉक्स में खरीदारी की ओर दिखा, जिससे कई शेयरों में जोरदार हलचल रही। फार्मा शेयरों में खरीदारी, IT सेक्टर दबाव में शुरुआती कारोबार में फार्मा सेक्टर ने बाजार को सपोर्ट दिया। सिप्ला समेत कई दवा कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की गई, जिसके चलते निफ्टी फार्मा इंडेक्स करीब 1.26 फीसदी मजबूत हुआ। दूसरी ओर आईटी शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। HCL Tech, TCS, Tech Mahindra और Infosys जैसे बड़े आईटी स्टॉक्स में बिकवाली हावी रही। निफ्टी IT इंडेक्स करीब 0.83 फीसदी तक फिसल गया। डॉलर के मुकाबले हल्की कमजोरी के साथ खुला रुपया विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले हल्की कमजोरी के साथ खुला। गुरुवार को रुपया 95.73 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.71 पर बंद हुआ था। यानी शुरुआती कारोबार में रुपये में 2 पैसे की गिरावट दर्ज की गई। CNG महंगी होते ही MGL शेयर में तेजी महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने मुंबई महानगर क्षेत्र में CNG की कीमत में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नई दरें लागू होने के बाद अब मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में CNG की कीमत 84 रुपये प्रति किलो हो गई है। इस फैसले का असर कंपनी के शेयर पर भी दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में MGL का स्टॉक करीब 1.5 फीसदी उछलकर 1,059 रुपये के आसपास पहुंच गया। Kaynes Technology के शेयर में भारी गिरावट आज के कारोबार में Kaynes Technology के शेयर निवेशकों के लिए चिंता का कारण बने रहे। कंपनी के मार्च तिमाही नतीजे बाजार की उम्मीदों से कमजोर रहने के बाद स्टॉक में बड़ी गिरावट आई। करीब 10 बजे तक कंपनी का शेयर लगभग 18 फीसदी टूटकर 3,431.70 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं, वैश्विक ब्रोकरेज फर्म JPMorgan द्वारा रेटिंग घटाने से भी निवेशकों की धारणा कमजोर हुई। वेदांता के शेयर में जोरदार उछाल मेटल सेक्टर की दिग्गज कंपनी वेदांता के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में स्टॉक 3 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 335 रुपये के पार पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कमोडिटी कीमतों में सुधार और मजबूत मांग के संकेतों से मेटल शेयरों को सपोर्ट मिल रहा है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में फिलहाल सकारात्मक माहौल बना हुआ है, लेकिन सेक्टर आधारित उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। फार्मा और मेटल शेयरों में फिलहाल मजबूती दिख रही है, जबकि आईटी सेक्टर पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक संकेत, डॉलर की चाल और कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।
शुरुआती तेजी के बाद बाजार में बिकवाली भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को शुरुआती बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं सकी। कारोबार के दौरान BSE Sensex दिन के उच्च स्तर से करीब 450 अंक नीचे फिसल गया, जबकि NIFTY 50 23,400 के अहम स्तर से नीचे आ गया। बाजार में गिरावट ऐसे समय आई है जब पिछले चार कारोबारी सत्रों में दोनों प्रमुख इंडेक्स लगभग 4 प्रतिशत तक कमजोर हो चुके हैं। क्यों लाल निशान में आया बाजार? मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक बाजार में कमजोरी के पीछे कई बड़े कारण हैं। 1. विदेशी निवेशकों की बिकवाली Foreign Institutional Investors (FII) लगातार मुनाफावसूली कर रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और ऊंचे वैल्यूएशन के चलते विदेशी फंड्स फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं। 2. कमजोर मार्केट मोमेंटम हाल के दिनों में आई तेज तेजी के बाद बाजार में थकावट दिखाई देने लगी है। कई निवेशक अब प्रॉफिट बुकिंग कर रहे हैं, जिससे इंडेक्स दबाव में आ गए। ट्रेडर्स का कहना है कि जब तक NIFTY 50 23,400 के ऊपर मजबूत पकड़ नहीं बनाता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। 3. ग्लोबल संकेत भी बने दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मिलेजुले संकेतों और ब्याज दरों को लेकर जारी चिंताओं का असर भी भारतीय बाजार पर देखने को मिला। निवेशक फिलहाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित नीति और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए हुए हैं। किन सेक्टर्स में ज्यादा दबाव? बाजार गिरावट के दौरान बैंकिंग, IT और ऑटो शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। वहीं कुछ डिफेंसिव सेक्टर्स में सीमित खरीदारी दिखाई दी। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने सतर्कता दिखाई। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार काफी संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। यदि वैश्विक संकेत और विदेशी निवेशकों का रुख कमजोर बना रहता है, तो आने वाले सत्रों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
भारत की अग्रणी आईटी कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) के शेयरों में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट देखने को मिली। कंपनी के वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों के बाद निवेशकों की मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आई, जिसके चलते शेयर करीब 2% तक फिसल गया। शुरुआती कारोबार में गिरावट शुक्रवार सुबह TCS का शेयर लगभग 2.03% गिरकर 2,536.40 रुपये के स्तर पर ट्रेड करता दिखाई दिया। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब कंपनी के नतीजे अनुमान के करीब रहे, लेकिन भविष्य की ग्रोथ को लेकर बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। Q4 नतीजे: उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन TCS ने मार्च तिमाही में संतुलित प्रदर्शन दर्ज किया: रेवेन्यू 5.4% बढ़कर 70,698 करोड़ रुपये पहुंचा, जो अनुमान से बेहतर रहा नेट प्रॉफिट 29% की मजबूत बढ़त के साथ 13,718 करोड़ रुपये रहा ऑपरेटिंग मार्जिन स्थिर बना रहा कुल डील विन्स 12 बिलियन डॉलर के मजबूत स्तर पर दर्ज किए गए ये आंकड़े दिखाते हैं कि कंपनी की ऑपरेशनल मजबूती बनी हुई है, खासकर बड़े डील्स हासिल करने की क्षमता में। ब्रोकरेज फर्म्स का मिला-जुला नजरिया बाजार विशेषज्ञों और ब्रोकरेज हाउस की राय TCS को लेकर पूरी तरह एकमत नहीं है: सकारात्मक रुख: CLSA, JPMorgan, Nomura और Goldman Sachs जैसे संस्थानों ने TCS पर भरोसा जताया है इनका मानना है कि मजबूत डील पाइपलाइन, बेहतर डिमांड आउटलुक और AI आधारित सेवाओं का बढ़ता योगदान भविष्य में ग्रोथ को सपोर्ट करेगा साथ ही, मौजूदा वैल्यूएशन को आकर्षक बताया गया है सतर्क और नकारात्मक संकेत: HSBC ने “Hold” रेटिंग दी है, और मध्यम गति से स्थिर ग्रोथ की उम्मीद जताई है Jefferies ने “Underperform” रेटिंग देते हुए BFSI सेक्टर में कमजोरी, डील्स में सुस्ती और AI निवेश के कारण मार्जिन पर दबाव की आशंका जताई है AI बना सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर TCS के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भविष्य की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरा है। AI-आधारित सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे कंपनी को नए अवसर मिल रहे हैं। हालांकि, इन टेक्नोलॉजी में निवेश के कारण अल्पकाल में मार्जिन पर दबाव भी पड़ सकता है। लंबी अवधि बनाम अल्पकालीन चिंता ब्रोकरेज फर्म्स का मानना है कि: लॉन्ग टर्म में: AI, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और मजबूत डील पाइपलाइन TCS के लिए सकारात्मक संकेत हैं शॉर्ट टर्म में: ग्रोथ की रफ्तार धीमी रह सकती है और मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है एक साल में कमजोर प्रदर्शन TCS का स्टॉक पिछले एक साल में करीब 20% तक गिर चुका है, जबकि Nifty 50 ने इसी अवधि में लगभग 4.2% की बढ़त दर्ज की है। यह अंतर आईटी सेक्टर में ग्रोथ को लेकर जारी चिंताओं को दर्शाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।