Jairam Ramesh

National Stakeholder Consultation
दिल्ली में मौजूद थे वित्त मंत्री, लेकिन स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन से रहे गायब

रांची। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर दिल्ली दौरे पर होने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया। हालांकि वित्त मंत्री ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम की कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी और न ही इससे संबंधित कोई पत्र प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि वह पिछले दो दिनों से रांची से बाहर हैं, इसलिए कार्यक्रम की जानकारी भी उन्हें नहीं मिल सकी।   वहीं, सरकार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेस कोटे से मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और डॉ. इरफान अंसारी शामिल हुए। दूसरी ओर, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की भी कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकीं। ऐसे में वरिष्ठ मंत्री की गैरमौजूदगी को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।   कांग्रेस नेतृत्व से की मुलाकात सरकारी कार्यक्रम से दूर रहने के बावजूद वित्त मंत्री ने दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय का दौरा किया। यहां उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान संगठन और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय, विकास योजनाओं की प्रगति तथा चुनावी घोषणा-पत्र में किए गए वादों को लागू करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार और संगठन मिलकर विकास कार्यों को गति दे रहे हैं तथा जनहित से जुड़े वादों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।   विभागीय पत्राचार पर भी उठाया सवाल वित्त मंत्री ने हाल ही में सरकारी वाहन लौटाने को लेकर विभाग के संयुक्त सचिव पंकज सिंह द्वारा भेजे गए पत्र पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने इस संबंध में विभागीय सचिव से स्थिति स्पष्ट करने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन अब तक उन्हें कोई आधिकारिक जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में विभागीय स्तर पर समन्वय और संवाद को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Muzaffarpur BDO Suicide Case
मुजफ्फरपुर BDO सुसाइड केस: कथित प्रेम संबंध और मानसि प्रताड़ना के बीच पत्नी की मौत, जांच तेज

पटना, एजेंसियां। बिहार के मुजफ्फरपुर से सामने आए चर्चित बीडीओ सुसाइड केस ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जाले प्रखंड के बीडीओ मनोज कुमार की पत्नी अमृता कुमारी की जहरीला पदार्थ खाने से मौत के मामले में पुलिस कथित प्रेम संबंध, मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों की जांच कर रही है। मामले में बेगूसराय में तैनात महिला दारोगा अनु कुमारी का नाम भी सामने आया है। पुलिस दोनों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।   2020 में शुरू हुआ कथित संबंध, शादी के बाद बढ़ा विवाद पुलिस जांच के अनुसार, मनोज कुमार और अनु कुमारी की मुलाकात वर्ष 2020 में मुजफ्फरपुर की एक कोचिंग संस्था में हुई थी, जिसके बाद दोनों के बीच कथित रूप से नजदीकियां बढ़ीं। इसी दौरान मनोज कुमार ने दिसंबर 2022 में अमृता कुमारी से विवाह किया। परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद अमृता को पति के कथित संबंधों की जानकारी मिली, जिसके बाद परिवार में लगातार तनाव बना रहा।   वीडियो कॉल और डिजिटल सबूत जांच के केंद्र में मृतका के परिजनों का आरोप है कि घटना वाले दिन बीडीओ और महिला दारोगा ने अमृता से वीडियो कॉल पर बात की और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। आरोप है कि लगातार तनाव और अपमान के कारण अमृता ने जहरीला पदार्थ खा लिया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।   परिजनों ने पुलिस को एक पेन ड्राइव भी सौंपी है, जिसमें कथित चैट, तस्वीरें और वीडियो कॉल से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड होने का दावा किया गया है। पुलिस इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच करा रही है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल सबूतों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।

anjali kumari जुलाई 9, 2026 0
Jairam Ramesh
जयराम रमेश का केंद्र पर हमला, बोले- ''वोट से लेकर चंदे तक सबकी हो रही चोरी'

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इंडिया ब्लॉक ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) प्रक्रिया को लेकर चिंता जताते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश को संयुक्त पत्र भेजा है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली निष्पक्ष नहीं है और इससे चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है।   'चुनावी व्यवस्था पर लोगों का भरोसा घट रहा' जयराम रमेश ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विपक्ष की गंभीर आपत्तियां हैं। उनका दावा है कि देश में चुनावी व्यवस्था पर लोगों का विश्वास लगातार कम हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि चुनाव परिणाम पहले से तय होते हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि नतीजे पहले ही तय हैं, तो चुनाव कराने का उद्देश्य क्या रह जाता है।   'ट्रिपल इंजन सरकार' पर साधा निशाना कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह "ट्रिपल इंजन सरकार" है, जहां वोटों की चोरी, सीटों की चोरी और चंदे की चोरी हो रही है। उन्होंने इन आरोपों को कथित राम जन्मभूमि चंदा विवाद से भी जोड़ते हुए सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया।   जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों में चुनाव आयोग का रवैया निष्पक्ष नहीं रहा और आयोग केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार काम करता दिखाई देता है।   इंडिया ब्लॉक ने CJI से की हस्तक्षेप की मांग यह बयान ऐसे समय आया है जब आम आदमी पार्टी, डीएमके सहित इंडिया ब्लॉक के 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने संयुक्त रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर एसआईआर प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग की है। फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

anjali kumari जुलाई 4, 2026 0
Congress's Strategic Meeting
TMC में हलचल के बीच कांग्रेस की बड़ी रणनीतिक बैठक, विपक्षी एकजुटता पर हुआ मंथन

नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय इंदिरा भवन में गुरुवार को कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने की। इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi, महासचिव Priyanka Gandhi Vadra, संगठन महासचिव K. C. Venugopal, जयराम रमेश समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य प्रभारी शामिल हुए।   आपात बैठक क्यों बुलाई गई? यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब देश की राजनीति में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों, विपक्षी दलों में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों और तृणमूल कांग्रेस (TMC) में कथित अंदरूनी खींचतान के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने स्थिति की समीक्षा की। बताया जा रहा है कि बैठक में कुछ टीएमसी सांसदों के अलग रुख अपनाने और विपक्षी एकजुटता पर पड़ने वाले संभावित असर पर भी चर्चा हुई।   भाजपा के अभियान का जवाब देने की तैयारी बैठक में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे प्रचार अभियान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड से जुड़े राजनीतिक विमर्श का जवाब देने की रणनीति पर भी विचार किया गया। कांग्रेस नेतृत्व ने जनता के बीच अपनी राजनीतिक और वैचारिक बात प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर जोर दिया।   INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर फोकस बैठक में विपक्षी गठबंधन INDIA को और मजबूत बनाने, क्षेत्रीय दलों के साथ समन्वय बढ़ाने तथा दल-बदल की बढ़ती घटनाओं पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं ने राज्यों में सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने की जरूरत पर बल दिया। गौरतलब है कि हाल ही में INDIA गठबंधन की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि सभी सहयोगी दल हर दो महीने में बैठक करेंगे। गठबंधन की अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में प्रस्तावित है। इसके अलावा विपक्ष ने मतदाता सूची, चुनावी अनियमितताओं, NEET और CBSE से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है।

abhishek singh जून 11, 2026 0
Congress leader Jairam Ramesh criticizes Modi government over India’s stance on Israel and West Asia conflict
इज़राइल मुद्दे पर कांग्रेस  महासचिव जयराम रमेश  का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला

कांग्रेस ने इज़राइल और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी का इज़राइल के प्रति कथित रूप से एकतरफा समर्थन भारत की पारंपरिक विदेश नीति, मानवीय मूल्यों और ऐतिहासिक रुख के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांति, संवाद और फिलिस्तीनी अधिकारों के समर्थन की नीति पर चलता रहा है, लेकिन मौजूदा सरकार इस परंपरा से दूर जाती दिखाई दे रही है। नेतन्याहू के कथित बयान का हवाला देकर कांग्रेस ने उठाए सवाल यह राजनीतिक विवाद उस समय और बढ़ गया जब जयराम रमेश ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक कथित बयान का हवाला दिया। कांग्रेस नेता के अनुसार, नेतन्याहू ने एक सम्मेलन में कहा था कि दुनिया के कई देशों में इज़राइल की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन भारत अब भी उसके समर्थन में खड़ा है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इज़राइल के सबसे मजबूत वैश्विक समर्थकों में शामिल नजर आते हैं। कांग्रेस ने लगाया गाजा और ईरान मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व की लक्षित हत्या की कभी सार्वजनिक निंदा नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि गाजा में जारी इज़राइली सैन्य अभियान, लेबनान पर हमलों और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के कथित विस्थापन जैसे मुद्दों पर भी केंद्र सरकार ने खुलकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जयराम रमेश ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण की अपेक्षा की जाती है। फरवरी 2026 की मुलाकात का भी किया जिक्र कांग्रेस नेता ने अपने बयान में प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की फरवरी 2026 में हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस मुलाकात के कुछ समय बाद इज़राइल और अमेरिका ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। कांग्रेस ने सीधे तौर पर इन घटनाओं के बीच किसी संबंध का दावा नहीं किया, लेकिन सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल जरूर उठाए। ‘यह पूरे भारत की राय नहीं’, कांग्रेस ने कहा जयराम रमेश ने कहा कि नेतन्याहू का यह कहना कि भारत इज़राइल के समर्थन में खड़ा है, पूरी तरह सही नहीं है। उनके मुताबिक, यह प्रधानमंत्री मोदी और उनके राजनीतिक तंत्र का नजरिया हो सकता है, लेकिन देश के करोड़ों लोग फिलिस्तीनी जनता के प्रति सहानुभूति रखते हैं और पश्चिम एशिया में शांति तथा न्यायपूर्ण समाधान के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि भारत की जनता हमेशा मानवाधिकार, शांति और संतुलित कूटनीति के साथ खड़ी रही है। केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख बताने की मांग कांग्रेस ने केंद्र सरकार से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, गाजा की स्थिति, ईरान-इज़राइल तनाव और फिलिस्तीनी मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि भारत को अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखना चाहिए और किसी भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष में मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता देनी चाहिए। सरकार की ओर से अभी नहीं आया जवाब कांग्रेस के आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत की विदेश नीति को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।  

surbhi मई 29, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0