jamdani saree

Nita Ambani wearing an ivory Jamdani saree with Lord Krishna motifs, gold-silver threadwork and elegant diamond jewelry.
Nita Ambani ने पहनी भगवान श्रीकृष्ण की आकृतियों वाली खूबसूरत Jamdani साड़ी, गोल्ड-सिल्वर कढ़ाई ने खींचा सबका ध्यान

भारतीय हस्तशिल्प और पारंपरिक हथकरघा कला को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने वाली नीता अंबानी एक बार फिर अपने शानदार एथनिक लुक को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में अपने आवास पर आयोजित एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उन्होंने एक बेहद खूबसूरत आइवरी-शैम्पेन रंग की Jamdani साड़ी पहनी, जिसने अपनी बारीक कारीगरी और आध्यात्मिक डिज़ाइन से सभी का ध्यान आकर्षित किया। इस साड़ी की सबसे खास बात इसमें उकेरी गई भगवान श्रीकृष्ण की आकृतियां, उनके दोनों ओर बनी गायें और नारियल के पेड़ों के खूबसूरत मोटिफ थे, जिन्हें बेहद कलात्मक ढंग से सजाया गया था। गोल्ड और सिल्वर थ्रेडवर्क से सजी अनोखी कारीगरी साड़ी पर बने भगवान श्रीकृष्ण और अन्य मोटिफ्स को सोने और चांदी के धागों (Gold & Silver Threadwork) से उभारा गया था। इसके साथ ही गुलाबी, नीले, हरे और सफेद रंगों की बारीक बीडवर्क ने इस पारंपरिक परिधान को और भी आकर्षक बना दिया। पूरी साड़ी में सुनहरे फूलों की बेल (Floral Vine Motif) बुनी गई थी, जबकि पीच रंग की स्कैलप्ड बॉर्डर ने इसके लुक को बेहद शाही अंदाज दिया। सीधा पल्लू स्टाइल में किया ड्रेप नीता अंबानी ने इस साड़ी को पारंपरिक सीधा पल्लू (Seedha Pallu) अंदाज में ड्रेप किया। इसके साथ उन्होंने मैचिंग शैम्पेन रंग का ब्लाउज पहना, जिसकी स्लीव्स पर गोटा पट्टी और गोल्ड थ्रेड एम्ब्रॉयडरी की गई थी। डायमंड ज्वेलरी ने बढ़ाई शाही खूबसूरती अपने लुक को पूरा करने के लिए उन्होंने— लेयर्ड डायमंड नेकलेस डायमंड स्टड ईयररिंग्स डायमंड बैंगल्स स्टेटमेंट रिंग पहनकर क्लासिक और रॉयल अंदाज पेश किया। सिंपल मेकअप और फ्लोरल हेयरस्टाइल नीता अंबानी ने इस पारंपरिक लुक के साथ बेहद सॉफ्ट और एलिगेंट मेकअप चुना। उन्होंने— काजल से सजी आंखें हल्की गुलाबी लिपस्टिक लाल बिंदी के साथ अपने लुक को पूरा किया। वहीं सेंटर-पार्टेड बन को गुलाबी, सफेद और हरे रंग के फूलों से सजाया गया, जिसने उनके पूरे लुक में पारंपरिक भारतीय खूबसूरती का शानदार स्पर्श जोड़ दिया। भारतीय हथकरघा को लगातार दे रही हैं बढ़ावा नीता अंबानी लंबे समय से भारतीय बुनकरों और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देती रही हैं। वर्ष 2023 में शुरू किए गए उनके Swadesh पहल के जरिए वे देशभर के कारीगरों की कला को दुनिया के सामने ला रही हैं। इससे पहले भी वे कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय हस्तकरघा की शानदार साड़ियां पहन चुकी हैं। न्यूयॉर्क के TIME100 Summit में उन्होंने पश्चिम बंगाल के पद्मश्री सम्मानित बुनकर बिरेन कुमार बसाक द्वारा बुनी गई जामदानी साड़ी पहनी थी। वहीं गुजरात और वेनिस जैसे आयोजनों में भी उन्होंने भारतीय टेक्सटाइल विरासत को अपनी पसंद के जरिए दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। नीता अंबानी का यह नया लुक एक बार फिर भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और पारंपरिक शिल्पकला का सुंदर संगम बनकर सामने आया है।  

surbhi जुलाई 22, 2026 0
Elegant soft cotton sarees in breathable fabrics styled for office wear, brunch, festive occasions, and everyday comfort.
Soft Cotton Sarees: ऑफिस से वीकेंड तक स्टाइलिश लुक के लिए बेस्ट हैं ये कॉटन साड़ियां, जानें कैसे करें स्टाइल

अगर आप ऐसी साड़ी की तलाश में हैं जिसे ऑफिस, फैमिली फंक्शन, ब्रंच या वीकेंड आउटिंग हर जगह आसानी से पहना जा सके, तो सॉफ्ट कॉटन साड़ी एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। हल्के वजन, आरामदायक फैब्रिक और एवरग्रीन लुक की वजह से ये साड़ियां रोजमर्रा की वॉर्डरोब का अहम हिस्सा बनती जा रही हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें साधारण तरीके से भी स्टाइल किया जा सकता है और एक्सेसरीज़ के साथ आसानी से पार्टी लुक भी दिया जा सकता है। सॉफ्ट कॉटन साड़ी खरीदते समय किन फैब्रिक्स पर दें ध्यान? अलग-अलग फैब्रिक अपनी अलग खूबसूरती और उपयोगिता रखते हैं। अपनी जरूरत के अनुसार इनमें से विकल्प चुन सकते हैं। मलमल (Mulmul): बेहद मुलायम, हल्की और गर्मियों के लिए आदर्श। जामदानी कॉटन: पारंपरिक बुनाई और खूबसूरत टेक्सचर। चंदेरी-कॉटन ब्लेंड: हल्की चमक के साथ एलिगेंट लुक। कोटा कॉटन: पतला, हवादार और बेहद आरामदायक। खादी कॉटन: टेक्सचर वाला फैब्रिक, जो ऑफिस और फॉर्मल लुक के लिए उपयुक्त माना जाता है। रंग और डिजाइन कैसे चुनें? रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए हल्के और क्लासिक रंग सबसे बेहतर माने जाते हैं। सफेद इंडिगो ब्लू हल्का गुलाबी हल्दी पीला पत्तों जैसा हरा मिट्टी जैसा भूरा मदर रेड स्ट्राइप्स, चेक्स और पतले बॉर्डर वाली साड़ियां भी काफी बहुउपयोगी होती हैं और आसानी से अलग-अलग मौकों पर पहनी जा सकती हैं। ब्लाउज से बदल सकता है पूरा लुक एक ही कॉटन साड़ी को अलग-अलग ब्लाउज के साथ पहनकर नया स्टाइल बनाया जा सकता है। मैचिंग ब्लाउज से क्लासिक लुक रिब्ड टैंक टॉप के साथ मॉडर्न स्टाइल कॉलर वाली शर्ट के साथ पावर ड्रेसिंग ब्लैक स्लीवलेस ब्लाउज के साथ ऑफिस से डिनर तक का लुक स्टाइलिंग के आसान टिप्स सिल्वर ज्वेलरी के साथ पहनें। फ्लैट सैंडल या कोल्हापुरी चप्पल चुनें। मिनिमल मेकअप और बिंदी से एथनिक लुक निखारें। हैंडलूम बैग या स्लिंग बैग के साथ स्टाइल पूरा करें। पहली बार खरीद रहे हैं तो इन बातों का रखें ध्यान अगर पहली बार कॉटन साड़ी खरीद रहे हैं, तो बहुत ज्यादा स्टार्च वाली या भारी बॉर्डर वाली साड़ियों से बचें। सॉफ्ट कॉटन साड़ियों की खूबसूरती उनकी सहजता और आराम में होती है। समय के साथ ये और भी मुलायम हो जाती हैं और पहनने में ज्यादा आरामदायक महसूस होती हैं।  

surbhi जुलाई 8, 2026 0
Women wearing stylish soft cotton sarees in pastel shades perfect for summer fashion and daily comfort
गर्मियों के लिए परफेक्ट हैं ये 8 सॉफ्ट कॉटन साड़ियां, हर वॉर्डरोब में जरूर होनी चाहिए

गर्मियों के मौसम में जब भारी कपड़े पहनना मुश्किल लगने लगता है, तब सॉफ्ट कॉटन साड़ियां सबसे आरामदायक और स्टाइलिश विकल्प बनकर सामने आती हैं। हल्की, सांस लेने वाली और पूरे दिन आराम देने वाली ये साड़ियां अब सिर्फ पारंपरिक पहनावे तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि मॉडर्न फैशन का भी बड़ा हिस्सा बन चुकी हैं। ऑफिस, ब्रंच, पूजा या कैजुअल आउटिंग—हर मौके पर कॉटन साड़ी बिना ज्यादा मेहनत के एलिगेंट लुक देती है। आजकल फैशन की दुनिया में मुलमुल, जामदानी, खादी, कोटा कॉटन और चंदेरी-कॉटन ब्लेंड साड़ियों का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इनकी खासियत यह है कि ये शरीर पर हल्की महसूस होती हैं और गर्मी में भी स्टाइल बनाए रखती हैं। कौन-सी कॉटन साड़ियां हैं सबसे ज्यादा ट्रेंड में? मुलमुल कॉटन साड़ी मुलमुल फैब्रिक बेहद सॉफ्ट और हल्का होता है। इसकी फ्लोई फॉल और आरामदायक टेक्सचर इसे समर वॉर्डरोब का फेवरेट बनाते हैं। यह डे-टाइम लुक के लिए परफेक्ट मानी जाती है। जामदानी कॉटन साड़ी जामदानी साड़ियों की खूबसूरत बुनाई और मिनिमल डिजाइन इन्हें क्लासी लुक देते हैं। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन ऑप्शन है जो ट्रेडिशनल और मॉडर्न स्टाइल का मिश्रण चाहते हैं। कोटा कॉटन कोटा कॉटन अपनी शीयर और एयरि फील के लिए जानी जाती है। गर्म मौसम में यह बेहद आरामदायक रहती है और एलिगेंट लुक भी देती है। खादी और हैंडलूम कॉटन अगर आप थोड़ा स्ट्रक्चर्ड और फॉर्मल लुक चाहती हैं, तो खादी और हैंडलूम कॉटन साड़ियां शानदार विकल्प हो सकती हैं। ये ऑफिस वियर के लिए खास पसंद की जाती हैं। रंग और डिजाइन भी बनाते हैं खास सॉफ्ट कॉटन साड़ियों में इंडिगो, हल्का गुलाबी, हल्दी पीला, मिट्टी जैसा भूरा, सफेद और हरा जैसे रंग काफी पसंद किए जा रहे हैं। वहीं स्ट्राइप्स, चेक्स और मिनिमल बॉर्डर डिजाइन इन्हें और ज्यादा वर्सेटाइल बनाते हैं। इन साड़ियों को सिर्फ ट्रेडिशनल ब्लाउज के साथ ही नहीं, बल्कि टैंक टॉप, कॉलर शर्ट, क्रॉप जैकेट या प्लेन टी-शर्ट के साथ भी स्टाइल किया जा सकता है। यही वजह है कि Gen-Z फैशन में भी कॉटन साड़ी की एंट्री तेजी से बढ़ रही है। पहली बार खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान अगर आप पहली बार कॉटन साड़ी खरीद रही हैं, तो बहुत ज्यादा स्टार्च वाली या भारी बॉर्डर वाली साड़ी लेने से बचें। सॉफ्ट कॉटन साड़ियों की असली खूबसूरती उनकी सहजता और आराम में होती है। समय के साथ ये और ज्यादा मुलायम और खूबसूरत हो जाती हैं। क्यों बढ़ रही है सॉफ्ट कॉटन साड़ियों की लोकप्रियता? आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग ऐसे कपड़े चाहते हैं जो स्टाइलिश होने के साथ आरामदायक भी हों। सॉफ्ट कॉटन साड़ियां इसी जरूरत को पूरा करती हैं। यही कारण है कि अब ये सिर्फ पारंपरिक पहनावे तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि मॉडर्न फैशन स्टेटमेंट बन चुकी हैं।  

surbhi मई 20, 2026 0
Nita Ambani wearing handcrafted Jamdani saree at TIME100 Summit showcasing traditional Indian weaving
नीता अंबानी की खास जामदानी साड़ी: 24 महीनों में तैयार कारीगरी, हर धागे में बसी कहानी

न्यूयॉर्क: TIME100 Summit में Nita Ambani का लुक एक बार फिर भारतीय हस्तशिल्प की बारीकी और खूबसूरती का शानदार उदाहरण बनकर सामने आया। उन्होंने Swadesh की जामदानी साड़ी पहनी, जिसे Biren Kumar Basak ने करीब 24 महीनों में बुना। साड़ी में बसी कहानियां यह जामदानी साड़ी पारंपरिक अंदाज से अलग थी। आमतौर पर जहां पल्लू को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है, वहीं इस साड़ी में डिजाइन पूरे ड्रेप में फैला हुआ था। घुड़सवार, जानवर, पेड़ और मानव आकृतियां बॉर्डर से लेकर साड़ी के मुख्य हिस्से तक बारीकी से बुनी गई थीं, जो इसे एक चलती-फिरती कहानी जैसा रूप देती हैं। साड़ी का बेस सॉफ्ट बेज रंग में रखा गया, जिससे गुलाबी, हरे और हल्के नीले रंग के मोटिफ्स उभरकर सामने आएं। किनारों पर छोटे-छोटे पैटर्न्स की रिपीटिंग बॉर्डर इसे संतुलन और फ्रेम देती है। पल्लू और डिटेलिंग की खासियत पल्लू में स्ट्राइप्स और घने पैटर्न का इस्तेमाल किया गया, जो बाकी साड़ी के फैले हुए डिजाइन के साथ सुंदर कंट्रास्ट बनाता है। करीब से देखने पर हर मोटिफ और बुनाई में वही बारीकी नजर आती है, जो इस पूरे डिजाइन को एकसाथ जोड़कर रखती है। ज्वेलरी और स्टाइलिंग का संतुलन नीता अंबानी ने इस साड़ी को लंबे पर्ल स्ट्रैंड्स, एमराल्ड स्टड्स, डायमंड रिंग और मैचिंग ब्रेसलेट्स के साथ स्टाइल किया। उनका मेकअप और हेयरस्टाइल भी साड़ी के अनुरूप सादगी भरा था– सेंटर-पार्टेड खुले बाल हल्का स्मोकी आई मेकअप न्यूड लिप और हरे रंग की बिंदी, जो साड़ी और ज्वेलरी से मेल खाती थी ब्लाउज पर पर्ल डिटेलिंग ने पूरे लुक में एक सूक्ष्म लेकिन रिच एलिमेंट जोड़ा, जो साड़ी से ध्यान हटाए बिना उसे और खास बनाता है। फैशन एक्सपर्ट की राय फैशन विशेषज्ञों के अनुसार, जब भी आप इस तरह के एम्ब्रॉयडरी या हैंडक्राफ्टेड आउटफिट पहनें, तो उसे ही फोकस में रखें और बाकी स्टाइलिंग को मिनिमल रखें।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Explosion reported in Iran after US airstrikes near Bandar Abbas
दुनिया

ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी बम, बंदर अब्बास समेत कई शहरों में धमाके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 21, 2026 0