जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सात साल पूरे, राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग फिर चर्चा में श्रीनगर, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान हटाए जाने के आज सात साल पूरे हो गए हैं। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही तत्कालीन राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम के दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किया गया था। राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग तेज सात साल पूरे होने के मौके पर जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। क्षेत्रीय राजनीतिक दल लंबे समय से केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की मांग करते रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के बाद निर्वाचित सरकार बनने के बावजूद राज्य का दर्जा बहाल नहीं होने का मुद्दा राजनीतिक बहस में बना हुआ है। 5 अगस्त 2019 को हुआ था बड़ा संवैधानिक बदलाव 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष संवैधानिक प्रावधानों को प्रभावी रूप से समाप्त करने का निर्णय लिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटा गया। इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश बना, जहां विधानसभा का प्रावधान है, जबकि लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य का दर्जा महत्वपूर्ण मुद्दा अनुच्छेद 370 से जुड़े मामले में सुप्रीम Court ने दिसंबर 2023 में केंद्र के फैसले को बरकरार रखा था। अदालत ने जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने और 30 सितंबर 2024 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए और निर्वाचित सरकार का गठन हुआ। अब राजनीतिक दलों की प्रमुख मांगों में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना शामिल है। केंद्र के फैसले पर राजनीतिक बहस जारी अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सात साल बाद भी इस फैसले को लेकर राजनीतिक मतभेद कायम हैं। केंद्र सरकार इसे जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा में और मजबूती से जोड़ने वाला कदम बताती रही है, जबकि कई क्षेत्रीय दल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में 5 अगस्त की तारीख जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बनी हुई है।
श्रीनगर, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश के बीच कई इलाकों में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ ने तबाही मचा दी है। सोमवार को कश्मीर घाटी के कई हिस्सों में बादल फटने की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। बाढ़ के पानी ने कई इलाकों को प्रभावित किया और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा। कई इलाकों में फ्लैश फ्लड से हालात बिगड़े पहल्गाम, बांदीपोरा और कुपवाड़ा समेत घाटी के कई हिस्सों में बादल फटने के बाद अचानक बाढ़ की स्थिति बनी। कुपवाड़ा के लोलाब इलाके में एक महिला के बाढ़ के पानी में बह जाने की खबर है। वहीं कई अन्य लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। पुंछ, राजौरी और पहलगाम में भी फ्लैश फ्लड के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क बाधित होने और पुलों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। कई जगह सड़क और पुल क्षतिग्रस्त भारी बारिश और तेज बहाव के कारण जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में सड़कें और पुल प्रभावित हुए हैं। कुछ मार्गों पर आवाजाही रोकनी पड़ी है, जबकि पर्यटकों और स्थानीय लोगों के फंसने की भी सूचना है। प्रशासन और राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने और नदी-नालों के पास जाने से बचने की सलाह दी गई है। राहत और बचाव अभियान जारी बादल फटने और फ्लैश फ्लड के बाद प्रशासन, पुलिस और बचाव दलों ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और सड़क संपर्क बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मौसम की स्थिति को देखते हुए अगले कुछ समय तक पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
पुलवामा, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में सुरक्षा बलों ने एक व्यक्ति को ग्रेनेड के साथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई कुलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद घाटी में बढ़ाई गई सुरक्षा और तलाशी अभियान के दौरान की गई। गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां आरोपी से पूछताछ कर रही हैं और उसके संभावित आतंकी संपर्कों की जांच की जा रही है। तलाशी अभियान के दौरान गिरफ्तारी सुरक्षा बलों और पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों की सूचना के बाद पुलवामा के कुछ इलाकों में तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा गया। तलाशी में उसके पास से एक ग्रेनेड बरामद होने की बात सामने आई है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान और उसके खिलाफ दर्ज कानूनी धाराओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी जांच पूरी होने के बाद सामने आने की उम्मीद है। कुलगाम हमले के बाद बढ़ाई गई चौकसी कुलगाम में आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। पुलिस और सुरक्षाबल संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ संभावित आतंकी नेटवर्क और उनके मददगारों की पहचान करने में जुटे हैं। पुलवामा में हुई यह गिरफ्तारी इसी सुरक्षा अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि बरामद ग्रेनेड आरोपी तक कैसे पहुंचा। आतंकी कनेक्शन की जांच गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ के जरिए उसके संपर्कों, गतिविधियों और ग्रेनेड रखने के उद्देश्य की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उसका किसी आतंकी संगठन या उसके सहयोगी नेटवर्क से कोई संबंध है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घाटी में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कुलगाम हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने घाटी के संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं और प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा जांच भी कड़ी की गई है। पुलवामा में ग्रेनेड के साथ गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में सतर्कता और बढ़ा दी है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
Security in Jammu Kashmir: 15 अगस्त से पहले किसी भी संभावित घुसपैठ या आतंकी साजिश को नाकाम करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने चौकसी बढ़ा दी है। इसी क्रम में जम्मू पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संयुक्त एंटी-टनल सर्च ऑपरेशन चलाया। इस अभियान के दौरान किसी भी संदिग्ध गतिविधि या सुरंग का पता नहीं चला। स्वतंत्रता दिवस से पहले बढ़ाई गई निगरानी भारत अगले सप्ताह 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। इसे देखते हुए देशभर में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। खासकर पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों की आशंका को देखते हुए निगरानी और तलाशी अभियान तेज कर दिए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चला एंटी-टनल सर्च ऑपरेशन जम्मू पुलिस और BSF ने संयुक्त रूप से बॉर्डर पुलिस पोस्ट अल्लाह के अधिकार क्षेत्र में आने वाले बॉर्डर आउट पोस्ट (BOP) पीतल इलाके में एंटी-टनल सर्च ऑपरेशन चलाया। अभियान का उद्देश्य सीमा के आसपास जमीन के नीचे बनी संभावित सुरंगों और किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता लगाना था, जिनका इस्तेमाल घुसपैठ के लिए किया जा सकता है। नहीं मिला कोई संदिग्ध सुराग सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र की गहन तलाशी ली। अभियान के दौरान कोई सुरंग, संदिग्ध गतिविधि या अवैध घुसपैठ का संकेत नहीं मिला। अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ और सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य बनी हुई है। नियमित रूप से चलाए जाते हैं ऐसे अभियान जम्मू पुलिस, BSF और अन्य सुरक्षा एजेंसियां सीमा क्षेत्रों में लगातार संयुक्त अभियान चलाती रहती हैं। इन अभियानों का उद्देश्य सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, हथियारों की तस्करी और अन्य सुरक्षा खतरों को समय रहते रोकना है। दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में भी सुरक्षा कड़ी स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित देश के कई महत्वपूर्ण शहरों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। सार्वजनिक स्थानों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा जांच और निगरानी बढ़ा दी गई है।
Pakistan Occupied Kashmir: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर भारत ने अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अखबार द्वारा अपनी रिपोर्ट में PoK को 'Pakistani Kashmir' लिखे जाने पर भारत ने इसे भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है। अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने स्पष्ट कहा कि "कोई पाकिस्तानी कश्मीर नहीं है, केवल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pakistan Occupied Kashmir - PoK) है।" भारतीय दूतावास ने क्या कहा? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में भारतीय दूतावास ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और हमेशा रहेंगे। दूतावास ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा कर रखा है और वहां रहने वाले लोगों के खिलाफ हिंसा तथा दमन की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। भारत ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सही और आधिकारिक शब्दावली का इस्तेमाल करना चाहिए। किस रिपोर्ट पर उठा विवाद? दरअसल, द न्यूयॉर्क टाइम्स ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हालिया चुनाव और हिंसा को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। रिपोर्ट में मीरपुर में सुरक्षा बलों और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प का उल्लेख किया गया था। अखबार ने बताया कि इस घटना में कम से कम दो लोगों की मौत हुई, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, रिपोर्ट में JAAC की ओर से पुलिस कार्रवाई में कई लोगों के मारे जाने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होने का भी उल्लेख किया गया था। भारत ने दोहराया अपना पुराना रुख भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है, जबकि पाकिस्तान कुछ क्षेत्रों पर अवैध कब्जा किए हुए है। इसी नीति के तहत भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों से अपेक्षा की है कि वे इस क्षेत्र का उल्लेख करते समय 'Pakistan Occupied Kashmir (PoK)' जैसी मान्य और तथ्यात्मक शब्दावली का ही उपयोग करें। भारत का कहना है कि गलत भौगोलिक शब्दों का इस्तेमाल न केवल तथ्यों को विकृत करता है, बल्कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भ्रम भी पैदा करता है।
Amarnath Yatra Bus Accident: जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में मंगलवार (28 जुलाई) को अमरनाथ यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं से भरी एक बस हादसे का शिकार हो गई। यह दुर्घटना कंगन क्षेत्र के हरिगंवन इलाके में हुई, जहां एक तीखे मोड़ पर चालक बस से नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद बस सड़क से फिसलकर एक मकान से जा टकराई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग तथा सुरक्षा बल तुरंत राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। टला बड़ा हादसा अधिकारियों के मुताबिक, बस मकान से टकराने के बाद सिंध नदी की ओर बढ़ गई थी, लेकिन सौभाग्य से वह नदी में गिरने से पहले ही रुक गई। यदि बस नदी में गिर जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। दुर्घटना के समय मकान में कोई मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ी जनहानि टल गई। हालांकि, मकान को काफी नुकसान पहुंचा है। कई श्रद्धालु हुए घायल हादसे में बस में सवार कई श्रद्धालु घायल हुए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अधिकांश यात्रियों को मामूली चोटें आई हैं, जबकि कुछ को गंभीर चोट लगने की भी सूचना है। स्थानीय लोगों, पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों ने तुरंत बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला और एंबुलेंस की मदद से उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। घायलों का इलाज जारी है और सभी की स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं। पीटीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किया पोस्ट घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसे न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया है। वीडियो में दुर्घटनाग्रस्त बस, मौके पर मौजूद सुरक्षा बल और राहत-बचाव अभियान साफ देखा जा सकता है। अमरनाथ यात्रा जारी, 3,823 श्रद्धालुओं का नया जत्था रवाना दूसरी ओर, अमरनाथ यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है। सोमवार (27 जुलाई) को जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से 12वां जत्था रवाना हुआ। इस जत्थे में 3,823 श्रद्धालु शामिल थे, जिन्हें 140 वाहनों के काफिले के साथ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में बालटाल मार्ग के लिए रवाना किया गया। श्रद्धालुओं ने यात्रा के दौरान 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे लगाए। अधिकारियों के अनुसार, अब तक जम्मू आधार शिविर से 1.27 लाख से अधिक श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हो चुके हैं। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। हादसे के बाद भी यात्रा सामान्य रूप से जारी है, जबकि दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।
India Pakistan: पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन भारत ने उसके आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए आतंकवाद पर कड़ा जवाब दिया। मनीला में आयोजित आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) की मंत्रिस्तरीय बैठक में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत पर सवाल उठाए। इसके जवाब में भारत ने कहा कि पाकिस्तान बहुपक्षीय मंचों का इस्तेमाल झूठ फैलाने और सीमा-पार आतंकवाद से ध्यान भटकाने के लिए कर रहा है। इशाक डार ने क्या कहा? एआरएफ की बैठक में इशाक डार ने कहा कि सिंधु जल संधि के निलंबन से जुड़े मुद्दे का समाधान बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किया जाना चाहिए। उन्होंने कश्मीर का मुद्दा भी उठाते हुए भारत के फैसलों पर सवाल खड़े किए। भारत का कड़ा जवाब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के आरोपों को बेबुनियाद और भ्रामक बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल झूठ फैलाने, सरकार-प्रायोजित दुष्प्रचार करने और सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के अपने रिकॉर्ड से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए कर रहा है। जायसवाल ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और पाकिस्तान को इस विषय पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। सिंधु जल संधि पर भारत का रुख भारत ने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि का निलंबन तब तक जारी रहेगा, जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को विश्वसनीय और स्थायी रूप से समर्थन देना बंद नहीं करता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले और लगातार जारी आतंकवादी गतिविधियों के बाद भारत ने यह फैसला लिया था। आतंकवाद पर पाकिस्तान को नसीहत भारत ने पाकिस्तान पर आधिकारिक स्तर पर गलत सूचना फैलाने और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस्लामाबाद को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने के बजाय अपने देश में मौजूद आतंकवादी ढांचे को खत्म करने पर ध्यान देना चाहिए। रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अपने आंतरिक संकटों और वैश्विक आतंकवादी नेटवर्क के लिए सुरक्षित ठिकाना होने की छवि से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों पर आरोप लगाने के बजाय पाकिस्तान को पहले अपने घर की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। भारत ने दोहराया अपना रुख भारत ने साफ कर दिया कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और भरोसेमंद कदम नहीं उठाता, तब तक सिंधु जल संधि पर भारत का मौजूदा रुख बरकरार रहेगा।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद और सिंधु जल संधि के मुद्दे पर कड़ा जवाब दिया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने स्पष्ट कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति के रूप में बढ़ावा देता रहेगा, तब तक सिंधु जल संधि को बहाल करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा। पाकिस्तान ने उठाया सिंधु जल संधि का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में "प्राकृतिक संसाधन प्रशासन: शांति, सुरक्षा और समृद्धि की नींव" विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के दौरान पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने सिंधु जल संधि और जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने एकतरफा तरीके से सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया है। भारत का जवाब- आतंकवाद के बीच सहयोग संभव नहीं भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सिंधु जल संधि आपसी विश्वास और सहयोग की भावना पर आधारित थी, लेकिन जब एक देश लगातार सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो ऐसे माहौल में सामान्य सहयोग संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत का इस मुद्दे पर रुख पहले भी स्पष्ट था और आज भी वही है। जम्मू-कश्मीर पर दो टूक संदेश भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। पी. हरीश ने कहा कि पाकिस्तान इस संवैधानिक और कानूनी सच्चाई को जानबूझकर नजरअंदाज करता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा वास्तविक लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया था फैसला भारत ने पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। इस हमले में 24 लोगों की मौत हुई थी। भारत ने हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस समय कहा था कि "पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते", जिसके बाद पाकिस्तान के साथ कई द्विपक्षीय कदमों की समीक्षा की गई। UN प्रस्ताव का भी किया जिक्र भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 21 अप्रैल 1948 के प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि उसमें पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर से अपनी सेना हटाने, घुसपैठ रोकने और सशस्त्र समूहों को समर्थन बंद करने को कहा गया था। भारत ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबा रहा है और हाल के महीनों में कई लोगों की मौत हुई है। भारत का स्पष्ट संदेश भारत ने संयुक्त राष्ट्र में दोहराया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कदम नहीं उठाता, तब तक सामान्य संबंधों और सिंधु जल संधि जैसे सहयोगी समझौतों की बहाली संभव नहीं है। साथ ही भारत ने जम्मू-कश्मीर पर अपने पुराने और स्पष्ट रुख को फिर दोहराया।
जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के दौरान शनिवार को एक सड़क हादसा हो गया। उधमपुर जिले में बालटाल जा रही श्रद्धालुओं की कार सड़क किनारे खड़े एक डंपर से टकरा गई। हादसे में कम से कम चार श्रद्धालु घायल हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, यह दुर्घटना जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर संगूर चौक के पास हुई। बालटाल की ओर जा रही टोयोटा इनोवा सड़क किनारे खड़े डंपर से पीछे से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी हादसे के बाद स्थानीय पुलिस और राहत टीम ने तुरंत बचाव अभियान चलाया। सभी चार घायल श्रद्धालुओं को उधमपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। फिलहाल सभी घायलों की स्थिति पर डॉक्टरों की निगरानी रखी जा रही है। हादसे की जांच में जुटी पुलिस पुलिस ने घटना का मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, कार सड़क किनारे खड़े डंपर से पीछे से टकराई, हालांकि हादसे की सटीक वजह का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन लगातार सतर्क है। इस हादसे के बाद भी अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से सावधानीपूर्वक वाहन चलाने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की है।
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सुरक्षाबलों और एक युवक के बीच हुई झड़प के दौरान गोली चलने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि विशेष अभियान समूह (एसओजी) के तीन जवान घायल हो गए। घटना उस समय हुई जब युवक ने कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों की सरकारी राइफल छीनने की कोशिश की। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद एसओजी की टीम गुरुवार रात भद्रवाह कस्बे से करीब 35 किलोमीटर दूर जाइ-गंडोह मार्ग पर घात लगाकर तैनात थी। राइफल छीनने की कोशिश के दौरान चली गोली अधिकारियों ने बताया कि रात करीब 11:30 बजे टीम ने एक युवक को पूछताछ के लिए रोका। इसी दौरान उसने सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर उनकी सरकारी राइफल छीनने का प्रयास किया। हाथापाई के बीच एसओजी के एक जवान की गोली चल गई, जिसमें युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। इस झड़प में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए। इलाज के दौरान युवक की मौत घायलों को पहले भद्रवाह के सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल ले जाया गया। बाद में सभी को बेहतर इलाज के लिए डोडा के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान चिका गांव निवासी 30 वर्षीय आरिफ हुसैन की मौत हो गई। धार्मिक उपदेशक हिरासत में, जांच जारी पुलिस ने इस मामले में एक धार्मिक उपदेशक को हिरासत में लिया है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि घटना में उसकी भूमिका क्या है, इसकी जांच की जा रही है और फिलहाल उसके संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई घटना के बाद एहतियातन भद्रवाह शहर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं। वहीं, सेना ने जाइ क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
जम्मू: श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई चांदी के प्रबंधन को लेकर दायर याचिका पर जम्मू की एक अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच को 29 जुलाई तक पूरा रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है। मामला मंदिर में चढ़ाई गई चांदी में कथित गड़बड़ी और जांच में देरी से जुड़ा है। अदालत ने मांगा जांच का पूरा रिकॉर्ड मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने क्राइम ब्रांच से जांच से जुड़े सभी दस्तावेज और कार्रवाई का विवरण अदालत में पेश करने को कहा है। यह निर्देश याचिकाकर्ता अधिवक्ता दीपक शर्मा द्वारा पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने के बाद दिया गया। याचिका में 500 करोड़ रुपये की चांदी में अनियमितता का आरोप याचिकाकर्ता अधिवक्ता दीपक शर्मा का आरोप है कि श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में वर्षों के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई करीब 20 टन चांदी, जिसकी अनुमानित कीमत 500 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है, उसके प्रबंधन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। याचिका में दावा किया गया है कि इस मामले में गबन और मिलावट की आशंका है तथा अब तक इस संबंध में प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है। नकली और मिलावटी चांदी के आरोप याचिकाकर्ता ने अदालत में यह भी दावा किया कि मंदिर में जमा चांदी का बड़ा हिस्सा कथित रूप से मिलावटी या नकली हो सकता है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या देशभर से आने वाले लाखों श्रद्धालु नकली चांदी चढ़ा सकते हैं। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित मिलावटी चांदी में कैडमियम जैसी धातु मौजूद होने की आशंका है। हालांकि, इन दावों की अभी तक किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी या अदालत द्वारा पुष्टि नहीं हुई है। FIR दर्ज न होने पर उठाए सवाल दीपक शर्मा का कहना है कि उन्होंने 9 मई को क्राइम ब्रांच से मामले की जांच की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाद में क्राइम ब्रांच ने अदालत को बताया कि शिकायत को दूसरे पुलिस प्राधिकरण के पास भेज दिया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि क्राइम ब्रांच स्वयं इस तरह के मामलों की जांच करने के लिए अधिकृत एजेंसी है, इसलिए उसे शिकायत मिलने पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करनी चाहिए थी। 29 जुलाई की सुनवाई पर टिकी नजर अब इस मामले में अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। अदालत के निर्देश के अनुसार क्राइम ब्रांच को उस दिन जांच से संबंधित पूरा रिकॉर्ड और अब तक की गई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करना होगा। अदालत के समक्ष पेश होने वाली रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी। गौरतलब है कि फिलहाल ये आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और मामले में अदालत की अंतिम टिप्पणी या किसी भी पक्ष की जिम्मेदारी अभी तय नहीं हुई है।
रामबन: जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में एक सरकारी स्कूल की गंभीर लापरवाही सामने आई है। ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने से पहले सातवीं कक्षा का एक छात्र स्कूल की कक्षा में सो गया। स्कूल बंद करते समय किसी कर्मचारी ने उसकी मौजूदगी की जांच नहीं की और कक्षा पर ताला लगाकर पूरा स्टाफ घर चला गया। छात्र करीब चार घंटे तक कमरे में बंद रहा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने पूरे स्कूल स्टाफ को निलंबित कर दिया है। बनिहाल के सरकारी स्कूल में हुई घटना यह मामला रामबन जिले के बनिहाल क्षेत्र स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय, कड़वाह का है। जानकारी के अनुसार, स्कूल में 15 दिन की ग्रीष्मकालीन छुट्टियों की घोषणा के बाद छात्र कक्षा में ही सो गया था। छुट्टी होने पर स्कूल कर्मचारियों ने बिना सभी कमरों की जांच किए स्कूल में ताला लगा दिया। चार घंटे तक कक्षा में फंसा रहा छात्र पुलिस सूत्रों के मुताबिक, छात्र करीब चार घंटे तक बंद कमरे में फंसा रहा। जब वह जागा तो उसने मदद के लिए आवाज लगानी शुरू की। संयोग से वहां से गुजर रहे एक राहगीर ने उसकी आवाज सुनी और स्थानीय लोगों की मदद से कक्षा का ताला खुलवाकर छात्र को सुरक्षित बाहर निकाला। राहगीर ने पूरी घटना का वीडियो भी रिकॉर्ड किया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन की बड़ी कार्रवाई घटना सामने आने के बाद रामबन के मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्कूल के सभी नौ कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि छात्रों की सुरक्षा से जुड़ी इस तरह की लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति यह पता लगाएगी कि छात्र को कक्षा में बंद छोड़ने की जिम्मेदारी किसकी थी और स्कूल बंद करने से पहले सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी कर्मचारियों के खिलाफ आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर लोगों में नाराजगी घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कई लोगों ने इसे बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्कूलों में सुरक्षा प्रक्रियाओं की समीक्षा भी की जाएगी।
श्रीनगर: कश्मीर में वर्ष 1990 के चर्चित नर्स सरला भट्ट अपहरण और हत्या मामले में 36 साल बाद जांच ने महत्वपूर्ण मोड़ लिया है। जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने 29 जून को श्रीनगर की विशेष अदालत में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में तत्कालीन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) प्रमुख यासीन मलिक समेत पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि सरला भट्ट का अपहरण कर उन्हें प्रताड़ित किया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। एजेंसी के अनुसार, यह घटना कश्मीरी पंडित समुदाय में भय का माहौल बनाने की एक बड़ी आतंकी साजिश का हिस्सा थी। कौन थीं सरला भट्ट? सरला भट्ट 27 वर्षीय नर्स थीं और श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) के नियोनेटोलॉजी विभाग में कार्यरत थीं। 19 अप्रैल 1990 को उनका शव श्रीनगर के मल्लाबाग-ओमर कॉलोनी रोड पर मिला था। उस समय यह घटना पूरे कश्मीर में चर्चा का विषय बनी थी और कश्मीरी पंडितों पर बढ़ते हमलों के बीच इसे एक गंभीर घटना माना गया था। 36 साल बाद चार्जशीट में क्या कहा गया? SIA की जांच के अनुसार, सरला भट्ट का अपहरण, यातना और हत्या JKLF के सदस्यों द्वारा की गई थी। एजेंसी का कहना है कि यह वारदात आतंक फैलाने और कश्मीरी पंडित समुदाय को निशाना बनाने की सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। मार्च 2024 में यह मामला SIA को सौंपा गया था, जिसके बाद एजेंसी ने दोबारा जांच शुरू की और विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर साक्ष्य जुटाए। किन लोगों को बनाया गया आरोपी? चार्जशीट में निम्न लोगों के नाम शामिल किए गए हैं— यासीन मलिक (तत्कालीन JKLF प्रमुख) खुर्शीद अहमद चाल्कू अब्दुल हामिद शेख गुलाम मोहम्मद टपलू मोहम्मद यूसुफ सूफी उर्फ इदरीस इनमें से अब्दुल हामिद शेख, गुलाम मोहम्मद टपलू और मोहम्मद यूसुफ सूफी की मृत्यु हो चुकी है, जबकि यासीन मलिक फिलहाल एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला? आरोपियों के खिलाफ आतंकवादी एवं विध्वंसक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (TADA), 1987 तथा भारतीय शस्त्र अधिनियम, 1959 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसी ने क्या कहा? अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में चार्जशीट दाखिल होना आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। SIA ने पिछले दो वर्षों में जुटाए गए दस्तावेजों, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत में आरोपपत्र पेश किया है। अब इस बहुचर्चित मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया विशेष अदालत में चलेगी।
Poonch Infiltration Attempt: जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर एक घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए एक पाकिस्तानी नागरिक को गिरफ्तार किया है। सेना ने उसे भारतीय सीमा में प्रवेश करते ही हिरासत में ले लिया। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं और उसके भारत में प्रवेश के उद्देश्य का पता लगाने में जुटी हैं। बालाकोट सेक्टर में हुई गिरफ्तारी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई पुंछ जिले के मेंढर सब-डिवीजन के बालाकोट सेक्टर में की गई। सेना के जवान सीमा पर नियमित निगरानी के दौरान सतर्क थे। इसी दौरान एक व्यक्ति को नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करते देखा गया, जिसके बाद जवानों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। पाकिस्तानी नागरिक की हुई पहचान अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान रईस खान (31) के रूप में हुई है। वह पाकिस्तान के राजल पख्तून क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है और बाजिया जादा खान का बेटा है। प्रारंभिक पूछताछ में उसकी पहचान की पुष्टि की गई है, जबकि उसके भारत में आने के मकसद की जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां कर रहीं गहन पूछताछ गिरफ्तारी के बाद आरोपी को सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर दिया गया है। खुफिया और सुरक्षा अधिकारी उससे विस्तृत पूछताछ कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह गलती से सीमा पार कर आया था या किसी सुनियोजित घुसपैठ या अन्य गतिविधि के तहत भारतीय क्षेत्र में प्रवेश किया था। सुरक्षा एजेंसियां उसके संपर्कों, यात्रा मार्ग और संभावित नेटवर्क की भी जांच कर रही हैं। LoC पर हाई अलर्ट हाल के महीनों में नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा बलों ने निगरानी और गश्त को और मजबूत किया है। सेना आधुनिक निगरानी उपकरणों और नियमित गश्त के जरिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर लगातार नजर रख रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी महेश दीक्षित को देश की प्रमुख खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का नया प्रमुख नियुक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) ने उनके नाम को मंजूरी दे दी है। वह मौजूदा आईबी प्रमुख तपन डेका का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है। महेश दीक्षित की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब देश के सामने आतंकवाद, सीमा सुरक्षा, साइबर खतरे और आंतरिक सुरक्षा जैसी कई बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में उनके अनुभव को एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महेश दीक्षित कौन हैं? महेश दीक्षित 1993 बैच के IPS अधिकारी हैं और आंध्र प्रदेश कैडर से संबंध रखते हैं। वर्तमान में वह इंटेलिजेंस ब्यूरो में स्पेशल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं, जो एजेंसी का दूसरा सबसे वरिष्ठ पद माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि पुलिस सेवा में आने से पहले वह पेशे से डॉक्टर थे। बाद में उन्होंने सिविल सेवा की राह चुनी और भारतीय पुलिस सेवा में शामिल होकर देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आंतरिक सुरक्षा में लंबा अनुभव महेश दीक्षित को खुफिया अभियानों और आंतरिक सुरक्षा मामलों का व्यापक अनुभव है। उन्होंने कई संवेदनशील क्षेत्रों में काम किया है और लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर में राज्य खुफिया ब्यूरो के प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके अलावा वह श्रीनगर में सहायक आसूचना ब्यूरो (Subsidiary Intelligence Bureau) के प्रमुख भी रह चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों के बीच उनका मजबूत जमीनी खुफिया नेटवर्क और आतंकवाद-रोधी रणनीतियों में अनुभव उनकी बड़ी ताकत माना जाता है। अनुच्छेद 370 के बाद निभाई अहम भूमिका अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महेश दीक्षित की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस दौरान उन्होंने विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर कई संवेदनशील अभियानों का नेतृत्व किया। 'सफेदपोश' आतंकी नेटवर्क का किया था पर्दाफाश पिछले वर्ष महेश दीक्षित ने एक कथित 'सफेदपोश' आतंकी नेटवर्क का खुलासा करने में अहम भूमिका निभाई थी। बताया जाता है कि यह कार्रवाई श्रीनगर पुलिस से प्राप्त शुरुआती खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी। इस अभियान को आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बड़ी सफलता माना गया था। क्या है इंटेलिजेंस ब्यूरो की जिम्मेदारी? इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) भारत की सबसे पुरानी और प्रमुख घरेलू खुफिया एजेंसी है। इसका मुख्य कार्य देश की आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियान, जासूसी विरोधी गतिविधियों, कट्टरपंथी संगठनों की निगरानी, साइबर सुरक्षा खतरों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर नजर रखना है। आईबी विभिन्न केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर खुफिया सूचनाएं साझा करती है और संभावित खतरों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। तपन डेका की जगह संभालेंगे जिम्मेदारी महेश दीक्षित, मौजूदा आईबी प्रमुख तपन डेका का स्थान लेंगे। डेका, 1988 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हैं। उन्हें वर्ष 2022 में आईबी प्रमुख नियुक्त किया गया था और बाद में उनके कार्यकाल को दो बार एक-एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया। अब महेश दीक्षित के नेतृत्व में इंटेलिजेंस ब्यूरो देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी संभालेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।