Jantar Mantar

Delhi Police investigating the July 20 CJP Parliament March violence using facial recognition technology
CJP संसद मार्च हिंसा: दिल्ली पुलिस ने 2,873 संदिग्धों की पहचान की, 989 का आपराधिक रिकॉर्ड होने का दावा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए CJP (Cockroach Janta Party) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पुलिस ने दावा किया है कि प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों की पहचान कर ली गई है। इनमें से 989 लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है। फेशियल रिकग्निशन सिस्टम से हुई पहचान दिल्ली पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) और अन्य तकनीकी माध्यमों की मदद से की गई। जांच में सामने आया कि कई लोग पहले से विभिन्न आपराधिक मामलों में आरोपी रह चुके हैं। हत्या, पॉक्सो और लूट जैसे मामलों के आरोपी शामिल होने का दावा पुलिस का कहना है कि चिन्हित किए गए 989 लोगों में हत्या, यौन अपराध, POCSO और लूट जैसे गंभीर मामलों के आरोपी भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इनमें से कुछ लोग आंदोलन स्थल पर कई बार देखे गए और उनके खिलाफ पहले से संगीन मामले दर्ज हैं। 20 जुलाई की हिंसा में 118 पुलिसकर्मी घायल दिल्ली पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। घायलों में स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर, डीसीपी, एडिशनल डीसीपी और एसीपी रैंक के अधिकारी, साथ ही कई महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं। करीब 60 प्रदर्शनकारी भी हुए घायल पुलिस के मुताबिक, झड़प के दौरान करीब 60 प्रदर्शनकारी भी घायल हुए थे। हिंसा के दौरान पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ और सुरक्षाकर्मियों पर हमला किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच जारी दिल्ली पुलिस ने बताया कि घटना से जुड़े विभिन्न मामलों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं, इन दावों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और जांच की न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
Rahul Gandhi meeting Mohammad Irfan, whose videos from the CJP protest went viral on social media
CJP आंदोलन की नई पहचान बने मोहम्मद इरफान, राहुल गांधी ने पहुंचकर की मुलाकात

Mohammad Irfan Viral Video: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP (Cockroach Janta Party) आंदोलन के दौरान एक फेरीवाले मोहम्मद इरफान की बातें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। लोकतंत्र, संविधान और मजदूरों के अधिकारों पर उनकी बेबाक राय ने लोगों का ध्यान खींचा। अब कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी उनसे मिलने उनके घर पहुंचे। फेरी लगाकर करते हैं गुजारा, Google Voice Search से सीखा संविधान करीब 35 वर्षीय मोहम्मद इरफान दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती में रहते हैं और फेरी लगाकर अपना जीवनयापन करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वह कभी स्कूल नहीं गए, लेकिन Google Voice Search के जरिए संविधान, लोकतंत्र और श्रमिकों के अधिकारों से जुड़ी जानकारी हासिल करते हैं। उनकी समझ और तर्कों ने CJP आंदोलन के दौरान लोगों को प्रभावित किया। राहुल गांधी ने की मुलाकात कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राहुल गांधी और मोहम्मद इरफान की मुलाकात का वीडियो साझा किया। पोस्ट में कांग्रेस ने लिखा कि "मोहम्मद इरफान जैसे लाखों युवा ही देश की असली उम्मीद हैं—जिज्ञासु, संवेदनशील और अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति सजग।" वीडियो में राहुल गांधी इरफान से बातचीत करते नजर आए। इस दौरान इलाके के लोगों ने भी उनका स्वागत किया। एक अन्य पोस्ट में कांग्रेस ने कहा कि इरफान जैसे युवाओं की आवाज देश के उन लाखों युवाओं की भावनाओं को सामने लाती है, जो रोजगार, शिक्षा और अवसरों को लेकर चिंतित हैं। पार्टी ने ऐसे युवाओं के साथ खड़े रहने का भरोसा भी जताया। भगत सिंह की कविताएं सुनाकर भी बटोरी सुर्खियां रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत के दौरान मोहम्मद इरफान ने शहीद भगत सिंह की कविताओं की पंक्तियां भी सुनाईं। उनकी वैचारिक समझ और आत्मविश्वास ने कई लोगों को प्रभावित किया और सोशल मीडिया पर उनके वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। CJP आंदोलन से मिली पहचान दिल्ली के जंतर-मंतर पर अभिजीत दिपके के नेतृत्व में हुए CJP आंदोलन के दौरान मोहम्मद इरफान ने एक इंटरव्यू दिया था। उसी इंटरव्यू के वायरल होने के बाद वह चर्चा में आ गए। अब उनकी कहानी सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बनी हुई है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
CJP spokesperson addressing media over the viral celebration video after the NEET-UG protest
जश्न के वीडियो पर CJP की सफाई, बोली- 5 स्टार पार्टी नहीं, 37 दिन आंदोलन करने वाले वॉलंटियर्स का सम्मान था

CJP Celebration Video: NEET-UG पेपर लीक आंदोलन के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए जश्न के वीडियो को लेकर उठे विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी सफाई दी है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि वायरल वीडियो को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उनके मुताबिक, यह कोई 5 स्टार होटल में आयोजित पार्टी नहीं, बल्कि 37 दिनों तक आंदोलन में जुटे वॉलंटियर्स के सम्मान और उनके अनुभव जानने के लिए आयोजित कार्यक्रम था। '5 स्टार होटल नहीं, बेसमेंट हॉल में हुआ कार्यक्रम' सौरव दास ने कहा कि जिस स्थान को सोशल मीडिया पर 5 स्टार होटल बताया जा रहा है, वह अधिकतम 2 या 3 स्टार श्रेणी का स्थल था। उन्होंने बताया कि पूरा कार्यक्रम एक बेसमेंट हॉल में आयोजित किया गया था, जहां आंदोलन से जुड़े स्वयंसेवक एकत्र हुए थे। 150 से 200 वॉलंटियर्स हुए शामिल CJP के अनुसार, कार्यक्रम में करीब 150 से 200 वॉलंटियर्स शामिल हुए थे, जिनमें से आधे से अधिक दूसरे राज्यों से आए थे और लगातार 37 दिनों तक आंदोलन का हिस्सा रहे। सौरव दास ने कहा कि कई स्वयंसेवक अपने-अपने घर लौटने वाले थे, इसलिए संगठन ने उनके सम्मान और अनुभव साझा करने के लिए यह आयोजन किया। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम में पहले लंबा फीडबैक सेशन और चर्चा हुई, जिसमें आंदोलन की समीक्षा की गई। हालांकि सोशल मीडिया पर केवल डांस और जश्न वाले वीडियो वायरल हुए, जिससे पूरे कार्यक्रम की गलत तस्वीर पेश की गई। सरकार को दिया गया 24 घंटे का अल्टीमेटम बरकरार CJP ने साफ किया कि सरकार को दिया गया 24 घंटे का अल्टीमेटम अब भी लागू है। सौरव दास के मुताबिक, सरकार ने तीसरे दौर की बातचीत में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी FIR वापस लेने और भविष्य में कोई कार्रवाई नहीं करने का लिखित आश्वासन देने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि यदि तय समय के भीतर लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो CJP दिल्ली में एक और राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान करेगी। बिहार फायरिंग और शिक्षा सुधार विधेयक पर भी उठाए सवाल सौरव दास ने बिहार के सीवान में प्रदर्शन के दौरान कथित AK-47 फायरिंग के मामले में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) से सार्वजनिक माफी की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले में जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने संसद में पेश शिक्षा सुधार विधेयक पर व्यापक चर्चा की मांग की। उनका कहना है कि पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर संसद में गंभीर बहस होनी चाहिए, ताकि युवाओं का शिक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा मजबूत हो सके।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
CJP leaders addressing the media over demands to withdraw cases against student protesters
CJP की सरकार को दो टूक चेतावनी: FIR वापस लें, नहीं तो फिर होगा जंतर-मंतर आंदोलन

CJP Protest: NEET-UG पेपर लीक आंदोलन समाप्त होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार को एक बार फिर चेतावनी दी है। संगठन के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR तत्काल वापस ली जाएं, हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा किया जाए और भविष्य में किसी भी छात्र या स्वयंसेवक पर नया मामला दर्ज न किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने अपने आश्वासन का पालन नहीं किया, तो CJP दोबारा जंतर-मंतर पर बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेगा। सरकार के वादे का दिलाया याद आशुतोष रांका ने कहा कि जंतर-मंतर और देशभर में चले आंदोलन को समाप्त करने से पहले केंद्र सरकार ने भरोसा दिया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। CJP का कहना है कि वह सरकार के इस वादे पर लगातार नजर बनाए हुए है और केंद्र के साथ-साथ बीजेपी और एनडीए शासित राज्यों से भी इसी आश्वासन का पालन करने की उम्मीद करता है। बिहार और पश्चिम बंगाल में कार्रवाई का आरोप CJP ने आरोप लगाया कि सरकार और पुलिस आंदोलन समाप्त होने के बाद हुए समझौते का पालन नहीं कर रही है। संगठन के मुताबिक बिहार और पश्चिम बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया, जबकि दिल्ली समेत कई राज्यों में छात्रों और स्वयंसेवकों को निगरानी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। CJP ने मांग की है कि सभी गिरफ्तार छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए, दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं और भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ नई कार्रवाई न हो। छात्र संगठनों ने भी उठाई आवाज छात्र संगठन AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी सरकार से प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मामलों को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं लगाना उचित नहीं है। उनका दावा है कि बिहार समेत कई राज्यों में अब भी बड़ी संख्या में छात्र जेल में बंद हैं। 'रेजिग्नेशन पार्टी' वीडियो पर विवाद आंदोलन समाप्त होने के बाद CJP एक नए विवाद में भी घिर गया। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में संगठन के कुछ नेता पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जश्न मनाते और नाचते नजर आए। इस वीडियो को लेकर संगठन की आलोचना हुई। हालांकि CJP नेता सौरव दास ने सफाई देते हुए कहा कि नई पीढ़ी के आंदोलन का तरीका अलग है। उनके अनुसार, "युवा नाचते हुए भी अपनी बात रख सकते हैं। इससे आंदोलन की गंभीरता या उद्देश्य कम नहीं हो जाता।" फिलहाल CJP ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए और सरकार अपने वादे पर कायम नहीं रही, तो आने वाले दिनों में राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
Abhijeet Deepke addressing supporters at Jantar Mantar, stating CJP protest will continue despite Dharmendra Pradhan's resignation.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी CJP का आंदोलन जारी, अभिजीत दीपके बोले- दो अहम मांगें पूरी होने तक नहीं हटेंगे

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद भी जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन समाप्त नहीं होगा। कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि संगठन की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं और जब तक उन पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। हालांकि, CJP नेतृत्व ने इसे आंदोलन की अंतिम जीत मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह केवल उनकी मांगों की दिशा में पहला कदम है। अभिजीत दीपके ने रखीं दो प्रमुख मांगें अभिजीत दीपके ने मीडिया से बातचीत में कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बावजूद संगठन अपनी दो महत्वपूर्ण मांगों पर अडिग है। पहली मांग उन छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की है, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा विवाद के दौरान आत्महत्या की। दीपके ने मांग की कि ऐसे प्रत्येक परिवार को एक करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा दिया जाए। दूसरी मांग 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर है। उन्होंने कहा कि जिन पुलिस अधिकारियों ने बल प्रयोग किया, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। "आंदोलन तब तक जारी रहेगा" दीपके ने कहा कि उनकी मांगें केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं थीं। उनका कहना है कि जब तक सरकार लिखित रूप में उनकी सभी मांगों पर निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई दिनों से लोग यह मान रहे थे कि इस्तीफा संभव नहीं है, लेकिन छात्रों के लगातार आंदोलन और दबाव के कारण यह स्थिति बनी। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक आंदोलन की सफलता बताया और कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने से बदलाव संभव है। छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग CJP ने यह भी मांग उठाई कि 20 जुलाई के बाद आंदोलन में शामिल छात्रों पर यदि कोई कानूनी मामले दर्ज किए गए हैं तो उन्हें वापस लिया जाए। संगठन का कहना है कि छात्रों के खिलाफ दर्ज कार्रवाई उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती है, इसलिए सरकार को इस दिशा में भी सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। इसके अलावा, दीपके ने रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। आंदोलन पर आगे क्या? संगठन ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में सरकार के साथ बातचीत के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल प्रदर्शन जारी रहेगा और CJP का कहना है कि जब तक सभी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। उधर, NEET परीक्षा विवाद और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर देशभर में छात्रों और विभिन्न संगठनों की ओर से अलग-अलग स्तर पर आवाज उठाई जा रही है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर बनी हुई है.  

anmol जुलाई 25, 2026 0
Central Delhi Liquor Shop Timings
दिल्ली में छात्र संगठनों के प्रदर्शन के बीच सुरक्षा कड़ी, वीकेंड में शराब की दुकानें रात 8 बजे तक ही खुलेंगी

नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी दिल्ली में छात्र संगठनों के जारी प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी है। एहतियात के तौर पर वीकेंड (शनिवार और रविवार) को दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को सामान्य समय से दो घंटे पहले यानी रात 8 बजे बंद करने का आदेश दिया गया है। यह फैसला दिल्ली पुलिस की सुरक्षा संबंधी सिफारिश के बाद लिया गया है।   प्रदर्शन वाले इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई   प्रशासन ने जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है तथा संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त बढ़ा दी गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।   वीकेंड में रात 8 बजे तक ही खुलेंगी शराब की दुकानें   सुरक्षा कारणों से वीकेंड के दौरान दिल्ली की सभी लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकानों को रात 8 बजे तक ही संचालन की अनुमति दी गई है। सामान्य दिनों में ये दुकानें देर रात तक खुली रहती हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए समय में अस्थायी बदलाव किया गया है।   यातायात और मेट्रो सेवाओं पर भी असर   प्रदर्शन के मद्देनज़र मध्य दिल्ली के कई मार्गों पर यातायात डायवर्ट किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत कई मेट्रो स्टेशनों पर विशेष निगरानी रखी गई है और यात्रियों को यात्रा से पहले ट्रैफिक एवं मेट्रो एडवाइजरी देखने की सलाह दी गई है।   स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर   दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने कहा है कि सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालात की लगातार समीक्षा की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
CJI Suryakant
छात्र प्रदर्शन मामले में CJI सूर्यकांत ने मीडिया रिपोर्टों को बताया गलत, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल दखल से किया इनकार

नई दिल्ली, एजेंसियां। जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कुछ मीडिया रिपोर्टों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि अदालत के रुख और टिप्पणियों को सही संदर्भ में पेश किया जाना चाहिए।   वीडियो देखने और स्वत: संज्ञान लेने की मांग पर कोर्ट का रुख   सुनवाई के दौरान एक वकील ने प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की थी। इस पर CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि केवल वीडियो के आधार पर तुरंत कार्रवाई करना उचित नहीं होगा।   "समय बर्बाद न करें" टिप्पणी पर विवाद   कुछ रिपोर्टों में CJI की टिप्पणी को अलग तरीके से पेश किए जाने पर विवाद हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत के पास हर वायरल वीडियो देखने का समय नहीं है और न्यायिक प्रक्रिया के तहत उचित तरीके से मामला लाया जाना चाहिए।   छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मामला   CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर आरोप लगाए गए थे। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनके साथ सख्ती हुई, जबकि प्रशासन का पक्ष कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा है। इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।   CJI ने मीडिया रिपोर्टिंग में सावधानी की बात कही   CJI सूर्यकांत ने इससे पहले भी कहा है कि न्यायिक टिप्पणियों को संदर्भ से हटाकर पेश करने से गलत धारणा बन सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों के नाम से चलने वाली गलत सूचनाओं से भी सावधान रहने की अपील की है।

abhishek singh जुलाई 24, 2026 0
Hollywood actor John Cusack shares a social media post supporting the CJP-led student protest over the NEET paper leak in India.
John Cusack Supports CJP Protest: CJP आंदोलन के समर्थन में उतरे हॉलीवुड स्टार जॉन कुसैक, सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी बहस

John Cusack on CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन मिलने लगा है। हॉलीवुड अभिनेता जॉन कुसैक (John Cusack) ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जारी छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। उनके इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। जहां कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन बताया, वहीं कई यूजर्स ने इसे भारत के आंतरिक मामलों में दखल करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई। जॉन कुसैक ने शेयर की छात्र आंदोलन से जुड़ी पोस्ट 'सेरेंडिपिटी', 'हाई फिडेलिटी', 'कॉन एयर' और '2012' जैसी फिल्मों के लिए मशहूर हॉलीवुड अभिनेता जॉन कुसैक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय का एक लेख साझा किया। इस लेख में संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग की आलोचना की गई थी। पोस्ट साझा करते हुए कुसैक ने लिखा कि उन्हें अपने "पसंदीदा साथी कॉकरोच" की ओर से अच्छी खबर मिली है और उन्होंने आंदोलन से जुड़ी रिपोर्ट को साझा किया। इसके बाद उनका पोस्ट तेजी से वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया जॉन कुसैक की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा नजर आया। कुछ यूजर्स ने उनके समर्थन का स्वागत किया, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर की। कई यूजर्स ने लिखा कि किसी विदेशी अभिनेता को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें पहले अपने देश के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं कुछ प्रतिक्रियाओं में लिखा गया कि भारतीय राजनीति और छात्र आंदोलनों पर बाहरी हस्तक्षेप उचित नहीं है। पहले भी भारत के मुद्दों पर रख चुके हैं राय यह पहली बार नहीं है जब जॉन कुसैक ने भारत से जुड़े किसी मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी हो। इससे पहले वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान भी उन्होंने सोशल मीडिया पर छात्रों का समर्थन किया था और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। क्या है CJP का आंदोलन? दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्र NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की है। हाल के दिनों में 'चलो संसद' मार्च के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे थे। इस दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस ने भी कार्रवाई की। प्रधानमंत्री मोदी ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामले पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और विद्यार्थियों का एक वर्ष खराब न हो, इसलिए प्राथमिकता के आधार पर 22 लाख छात्रों की परीक्षाएं कराई गईं। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।  

surbhi जुलाई 24, 2026 0
CJP founder Abhijeet Deepke addresses supporters during the ongoing protest at Jantar Mantar
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा CJP, अभिजीत दीपके बोले- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रहेगा जारी

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिन का अनशन समाप्त किए जाने के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने साफ कर दिया है कि जंतर-मंतर पर उनका आंदोलन जारी रहेगा। संगठन का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक प्रदर्शन खत्म नहीं होगा। NEET प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर CJP के नेतृत्व में छात्र पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, जवाबदेही तय करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अभिजीत दीपके ने क्या कहा? CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने अपने साहस और त्याग से देश का ध्यान छात्रों के मुद्दों की ओर आकर्षित किया। उन्होंने लिखा कि देश के लिए सोनम वांगचुक का जीवन बेहद महत्वपूर्ण है और उनके अनशन खत्म होने से राहत मिली है। हालांकि दीपके ने स्पष्ट किया, "CJP का जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन अभी खत्म नहीं होगा। जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।" 'Charging up...' पोस्ट से बढ़ी चर्चा अभिजीत दीपके ने एक अन्य पोस्ट में "Charging up..." लिखते हुए एक तस्वीर साझा की, जिसमें एक व्यक्ति के हाथ में ड्रिप लगी हुई दिखाई दे रही है। इस पोस्ट को आंदोलन जारी रहने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। सोनम वांगचुक ने खत्म किया 26 दिन का अनशन सोनम वांगचुक ने गुरुवार (23 जुलाई) देर रात 26 दिनों से जारी अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद यह फैसला लिया गया। सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने, परीक्षा प्रणाली में सुधार पर चर्चा करने और कथित पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिवारों को राहत देने जैसे मुद्दों पर विचार करने का भरोसा दिया है। CJP अपनी मांगों पर कायम सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने के बावजूद CJP का कहना है कि उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। संगठन का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
CJP leaders respond to PM Modi's NEET announcement, demanding Education Minister Dharmendra Pradhan's resignation.
CJP का PM मोदी को जवाब: "फास्ट-ट्रैक कोर्ट नहीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए"

NEET पेपर लीक मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के प्रस्ताव को अपर्याप्त बताते हुए अपनी मांगों पर कायम रहने का ऐलान किया है। CJP ने कहा कि उनकी प्राथमिक मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। साथ ही प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक माफी मांगने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करने की भी मांग की गई है। प्रमुख बातें PM मोदी ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया। CJP ने कहा- "फास्ट-ट्रैक कोर्ट नहीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए।" संगठन ने प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन लगातार जारी। सरकार और CJP दोनों ने बातचीत की इच्छा जताई। PM के ऐलान पर CJP की प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट के तुरंत बाद CJP ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने से छात्रों की मांगें पूरी नहीं होंगी। संगठन ने कहा कि सरकार को सबसे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना चाहिए। CJP ने अपने पोस्ट में लिखा कि सरकार को भ्रष्ट परीक्षा व्यवस्था में सुधार करना चाहिए और छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। "युवाओं की आवाज सुनी जाए" CJP ने अपने पोस्ट में कहा, "सबसे पहले युवाओं की मांग स्वीकार कीजिए। हमें धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए। भ्रष्ट सिस्टम को सुधारा जाए और सभी छात्रों से माफी मांगी जाए। ये आपके देश के युवा हैं, जो अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।" संगठन ने प्रधानमंत्री के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। जंतर-मंतर पर जारी है प्रदर्शन NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध में CJP का धरना जंतर-मंतर पर लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, जवाबदेही तय करने और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। बातचीत के लिए तैयार दोनों पक्ष छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बातचीत की इच्छा जताई है। वहीं CJP नेताओं अभिजीत दीपके और सौरभ दास ने भी कहा है कि वे वार्ता के लिए तैयार हैं। हालांकि, उनका कहना है कि सरकार का प्रतिनिधि जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर आकर बातचीत करे। सरकार की ओर से क्या कहा गया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि पेपर लीक के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सोशल मीडिया पर छात्रों के हितों की रक्षा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात दोहराई।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Clashes erupt between protesters and police near Parliament Road during CJP protest in Delhi
CJP Protest: जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक हिंसा, पथराव-आंसू गैस और इंटरनेट बंद; जानिए 22 जुलाई की रात क्या-क्या हुआ

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान 22 जुलाई की रात संसद मार्ग और कनॉट प्लेस क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति पर काबू पाने के लिए भारी पुलिस बल और अर्द्धसैनिक जवानों की तैनाती की गई। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद कर दीं। मुख्य बातें (Key Points) जंतर-मंतर के पास संसद मार्ग पर 22 जुलाई की रात हिंसक झड़प। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पथराव, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल। झड़प में 2 ACP समेत 5 पुलिसकर्मी घायल। CJP वॉलंटियर्स ने पुलिस बस से प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की। संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल व दंगा-रोधी वाहन तैनात। प्रशासन ने अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कीं। संसद मार्ग पर अचानक भड़की हिंसा 22 जुलाई की रात जंतर-मंतर से सटे संसद मार्ग पर अचानक हालात बिगड़ गए। पार्क होटल के पास बड़ी संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जिसके बाद कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस बस से वॉलंटियर्स ने की शांति की अपील स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने CJP के स्वयंसेवकों की मदद ली। लाउडस्पीकर लगी पुलिस बस पर सवार होकर वॉलंटियर्स ने प्रदर्शनकारियों से हिंसा रोकने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि पथराव और हिंसा से पूरे आंदोलन की छवि प्रभावित होगी। लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले हालात बेकाबू होने पर पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान दो एसीपी, एक इंस्पेक्टर, एक हेड कॉन्स्टेबल और एक कॉन्स्टेबल सहित कुल पांच पुलिसकर्मी घायल हुए। सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारी, सुरक्षा घेरा और बैरिकेडिंग झड़प के बाद कई प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए। इसके बाद पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल, दंगा-रोधी वाहन और अर्द्धसैनिक जवान तैनात किए गए। जंतर-मंतर से संसद मार्ग की ओर जाने वाले रास्तों को बैरिकेड लगाकर पूरी तरह सील कर दिया गया ताकि हालात दोबारा न बिगड़ें। इंटरनेट सेवाएं बंद, पूरे इलाके में हाई अलर्ट स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जंतर-मंतर, संसद मार्ग और मध्य दिल्ली के आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दीं। अधिकारियों का कहना था कि यह कदम अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए उठाया गया। पूरे इलाके में सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी गई और देर रात तक पुलिस बल तैनात रहा।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Former Pakistan cricketer Danish Kaneria reacts to the NEET protest, sparking widespread debate on social media.
NEET प्रदर्शन पर दानिश कनेरिया की टिप्पणी से विवाद, सोशल मीडिया पर घिरे पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर

Danish Kaneria on NEET Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे NEET परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के प्रदर्शन पर पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया की टिप्पणी विवादों में आ गई है। कनेरिया ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शन को लेकर अपनी राय व्यक्त की, जिसके बाद कई भारतीय यूजर्स ने उनकी आलोचना शुरू कर दी। क्या कहा दानिश कनेरिया ने? पूर्व पाकिस्तानी स्पिनर दानिश कनेरिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्हें भारत में होने वाले कई विरोध प्रदर्शन एक जैसे लगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे प्रदर्शनों में नारेबाजी और अपशब्द अधिक होते हैं, जबकि समाधान और सार्थक चर्चा कम दिखाई देती है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मुद्दे पर तथ्य सामने आने से पहले विरोध शुरू हो जाता है और इस तरह का माहौल देश की प्रगति के लिए उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर हुई तीखी प्रतिक्रिया कनेरिया के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनकी आलोचना की। कुछ यूजर्स ने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों पर किसी विदेशी नागरिक को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, जबकि कुछ ने उनके क्रिकेट करियर और विवादों का भी जिक्र किया। कौन हैं दानिश कनेरिया? दानिश कनेरिया पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व लेग स्पिनर हैं। उन्होंने वर्ष 2000 से 2010 के बीच पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला। करियर की प्रमुख बातें: 61 टेस्ट मैच 261 टेस्ट विकेट पाकिस्तान के सबसे सफल टेस्ट स्पिनरों में शामिल हालांकि, वर्ष 2012 में इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने स्पॉट फिक्सिंग मामले में उन्हें आजीवन प्रतिबंधित कर दिया था। बाद में उन्होंने फिक्सिंग में शामिल होने की बात स्वीकार भी की थी। शाहिद अफरीदी पर लगाए थे गंभीर आरोप दानिश कनेरिया पहले भी सुर्खियों में रह चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान टीम के दौरान उनके साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव किया गया। कनेरिया ने पूर्व कप्तान Shahid Afridi पर यह आरोप भी लगाया था कि वे उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालते थे और उनके साथ भोजन नहीं करते थे। NEET प्रदर्शन क्यों हो रहा है? दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र कथित NEET परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों और सरकार के बीच भी बयानबाजी जारी है।  

surbhi जुलाई 23, 2026 0
TV stars Karan Kundrra, Asha Negi and Arjun Bijlani react to the student protest, urging transparency and dialogue in education.
छात्रों के समर्थन में बोले TV स्टार्स, Karan Kundrra, Asha Negi और Arjun Bijlani ने दी प्रतिक्रिया

TV Stars on Student Protest: जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित लाठीचार्ज और झड़प की घटना पर अब टीवी इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। Karan Kundrra, Asha Negi, Arjun Bijlani और Kishwer Merchant समेत कई सितारों ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों की बात सुने जाने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही कई कलाकारों ने हिंसा और टकराव पर चिंता भी जताई। आशा नेगी ने जताई चिंता अभिनेत्री आशा नेगी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि परीक्षा से जुड़े विवाद कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन उन्हें दुख इस बात का है कि छात्रों को अपनी बात रखने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर अपनी राय साझा करने के बाद उन्हें धमकियों और आपत्तिजनक संदेशों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपील की कि छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और शिक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद के जरिए निकाला जाना चाहिए। करण कुंद्रा ने क्या कहा? अभिनेता करण कुंद्रा ने कहा कि किसी भी मुद्दे के कई पहलू हो सकते हैं, लेकिन छात्रों पर बल प्रयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने लिखा कि यदि छात्रों की मांग जवाबदेही और बेहतर शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी है, तो उस पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी ने युवाओं को अपने राजनीतिक हितों के लिए गुमराह किया है, तो ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार शिक्षा हर युवा का अधिकार है और इसे राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। अर्जुन बिजलानी ने पारदर्शिता की मांग की अभिनेता अर्जुन बिजलानी ने कहा कि यदि बड़ी संख्या में छात्र अपनी आवाज उठा रहे हैं, तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबरें दुखद हैं। उनके मुताबिक ऐसे मामलों का समाधान बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से निकलना चाहिए। किश्वर मर्चेंट ने भी रखा पक्ष अभिनेत्री किश्वर मर्चेंट ने कहा कि उनका समर्थन किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा के मुद्दे के लिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर छात्र और परिवार के भविष्य से जुड़ा विषय है और इसमें जवाबदेही तथा पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने के बाद उन्हें भी आलोचना और धमकियों का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर जारी है बहस छात्र आंदोलन और उस पर हुई कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस जारी है। जहां कई कलाकार छात्रों के समर्थन में सामने आए हैं, वहीं अलग-अलग पक्षों की ओर से भी विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा की निष्पक्षता और विरोध प्रदर्शन के तरीकों को लेकर चर्चा तेज बनी हुई है।  

surbhi जुलाई 22, 2026 0
Actor Naseeruddin Shah reacts emotionally in a video over the alleged lathi-charge on protesting students at Jantar Mantar.
छात्रों पर कथित लाठीचार्ज को लेकर भावुक हुए नसीरुद्दीन शाह, वीडियो जारी कर सरकार पर साधा निशाना

Naseeruddin Shah on Jantar Mantar Protest: अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट और लाठीचार्ज को लेकर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में छात्रों के प्रति अपना समर्थन जताया और हिंसा की आलोचना की। वीडियो में वे भावुक भी नजर आए और कहा कि छात्रों के साथ हो रहे व्यवहार से उन्हें गहरा दुख और गुस्सा है। इंस्टाग्राम वीडियो में क्या बोले नसीरुद्दीन शाह? 76 वर्षीय अभिनेता ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी पूरी सहानुभूति छात्रों के साथ है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने अभिनय जीवन में विद्यार्थियों से बहुत कुछ सीखा है और वे हर शिक्षक दिवस पर उन्हें सम्मानपूर्वक याद करते हैं। उन्होंने छात्रों से हिम्मत न हारने की अपील करते हुए कहा कि समाज का एक बड़ा वर्ग उनके साथ खड़ा है। हिंसा की आलोचना अपने वीडियो में नसीरुद्दीन शाह ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं बेहद दुखद हैं और किसी भी लोकतांत्रिक समाज में असहमति की आवाज को हिंसा से दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हमला करने वालों के लिए कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि ऐसे लोगों को अपने कर्मों के परिणामों के बारे में भी सोचना चाहिए। वायरल वीडियो पर भी हुई चर्चा सोशल मीडिया पर इससे पहले एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें दावा किया गया था कि नसीरुद्दीन शाह अपने बेटों के साथ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में मौजूद थे। हालांकि, बाद में स्पष्ट हुआ कि वह वीडियो मुंबई में आयोजित एक स्क्रीनिंग कार्यक्रम का था और उसका जंतर-मंतर के प्रदर्शन से संबंध नहीं था। विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ा NEET पेपर लीक मामले से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब कई शहरों तक फैल चुका है। दिल्ली के बाद मुंबई में भी प्रदर्शन हुए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस ने कुछ दिनों के लिए पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने और अन्य सार्वजनिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया है। कई फिल्मी हस्तियों ने भी जताया समर्थन छात्रों के समर्थन में कई फिल्मी हस्तियों ने भी अपनी राय रखी है। इनमें प्रकाश राज, अनुराग कश्यप, शबाना आजमी, विशाल ददलानी, अतुल कुलकर्णी, रितेश देशमुख, सोनाक्षी सिन्हा, दिलजीत दोसांझ, वीर दास, भूमि पेडनेकर, सोनू सूद, पूजा भट्ट, सोहा अली खान, हुमा कुरैशी और अन्य कलाकारों के नाम शामिल हैं।  

surbhi जुलाई 22, 2026 0
Vishal Dadlani, Kunika Sadanand, and Shekhar Suman react to the CJP protest, sparking debate across Bollywood.
CJP प्रदर्शन पर बॉलीवुड में बंटी राय, विशाल ददलानी ने चुप्पी पर उठाए सवाल, कुनिका सदानंद और शेखर सुमन ने भी दी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के बाद बॉलीवुड में भी प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। गायक विशाल ददलानी, अभिनेत्री कुनिका सदानंद और अभिनेता शेखर सुमन ने इस मुद्दे पर अपनी राय सार्वजनिक की है। वहीं, कई बड़े फिल्मी सितारों की चुप्पी को लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है। विशाल ददलानी ने बॉलीवुड की चुप्पी पर जताई नाराजगी विशाल ददलानी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा करते हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि जो छात्र अपने भविष्य और अधिकारों की बात कर रहे थे, उनके साथ बल प्रयोग किया गया। इसके साथ ही उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के उन लोगों पर भी सवाल उठाए, जिन्होंने अब तक इस मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। विशाल ने कहा कि सामाजिक मुद्दों पर कलाकारों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और केवल चुप रहना समाधान नहीं है। पहले भी उठा चुके हैं आवाज विशाल ददलानी इससे पहले भी छात्रों से जुड़े मुद्दों और विभिन्न सामाजिक विषयों पर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में भी शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की थी। कुनिका सदानंद ने सरकार से उठाए सवाल अभिनेत्री कुनिका सदानंद, जो हाल के दिनों में छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर भी पहुंची थीं, ने सरकार से इस पूरे मामले पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका कहना था कि यदि इतने लंबे समय से उठ रहे मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी, तो लोगों का भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए। शेखर सुमन ने भी जताई चिंता अभिनेता शेखर सुमन ने भी छात्रों के प्रदर्शन और उस दौरान हुई घटनाओं पर प्रतिक्रिया दी। अपने कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं की आवाज सुने जाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि समाज में संवाद और जवाबदेही लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक ओर कई लोग उन कलाकारों का समर्थन कर रहे हैं जिन्होंने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग मानते हैं कि सार्वजनिक हस्तियों पर किसी भी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने का दबाव नहीं होना चाहिए।  

surbhi जुलाई 21, 2026 0
Scattered slippers and injured students after CJP Parliament March in Delhi
सड़क पर बिखरी चप्पलें, रोते छात्र और लाठीचार्ज के दावे... संसद मार्च के बाद सामने आईं भावुक तस्वीरें

CJP Protest Jantar Mantar: दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान सोमवार को हुए हंगामे के बाद कई ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिन्होंने पूरे घटनाक्रम की मानवीय तस्वीर को उजागर किया। कहीं सड़क पर बिखरी चप्पलें दिखीं, कहीं घायल और रोते हुए छात्र-छात्राएं नजर आए, तो कहीं भीड़ के बीच एक प्रदर्शनकारी बेहोश पड़ा दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई के दौरान अपने अनुभव साझा किए और लाठीचार्ज के आरोप लगाए। 'सबसे आगे था, अचानक लाठीचार्ज शुरू हो गया' सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में 16 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी दावा करता है कि वह मार्च के दौरान सबसे आगे चल रहा था, तभी अचानक पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। छात्र का कहना है कि उसे बुरी तरह पीटा गया और वह समझ नहीं पा रहा कि उसकी गलती क्या थी। एक अन्य वीडियो में एक युवक अचेत अवस्था में दिखाई देता है, जिसके आसपास मौजूद लोग उसे संभालने और प्राथमिक उपचार देने की कोशिश करते नजर आते हैं। रोती छात्रा ने सुनाई आपबीती एक अन्य वीडियो में एक छात्रा भावुक होकर बताती है कि वह सुबह से प्रदर्शन में शामिल थी। उसके अनुसार, पुलिस कार्रवाई शुरू होने के बाद वह वहां से निकलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन इसी दौरान लाठीचार्ज हुआ और कई छात्रों को चोटें आईं। वीडियो में छात्रा रोते हुए पूरे घटनाक्रम का जिक्र करती दिखाई देती है। बिखरी चप्पलें बनीं अफरातफरी की गवाह प्रदर्शन के बाद सड़क पर बड़ी संख्या में चप्पलें और अन्य सामान बिखरा दिखाई दिया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वे किन लोगों की थीं, लेकिन ये तस्वीरें प्रदर्शन के दौरान मची भगदड़ और अव्यवस्था की कहानी बयां करती नजर आईं। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इन तस्वीरों को आंदोलन की सबसे मार्मिक तस्वीरों में से एक बताया। पुलिसकर्मी की पत्नी भी पहुंची प्रदर्शन में वायरल वीडियो में एक महिला ने बताया कि उनके पति दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं, लेकिन वह अपने बेटे के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं। इसी वजह से वह प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचीं। उनका बयान सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर सामने आए कई दावे सोमवार की घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में वीडियो और पोस्ट साझा किए गए, जिनमें प्रदर्शनकारियों ने चोट लगने, पुलिस कार्रवाई और आंदोलन के दौरान हुई अफरातफरी के अपने-अपने अनुभव बताए। इन वीडियो में छात्रों की चिंता, अभिभावकों की भावनाएं और आंदोलन के दौरान की अव्यवस्था साफ दिखाई देती है। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई थी झड़प सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च कर रहे थे। संसद मार्ग के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
Abhijeet Deepke addresses supporters at Jantar Mantar during CJP protest
CJP Protest: जंतर-मंतर पहुंचे अभिजीत दीपके, समर्थकों से मांगी माफी; आज RML जाएंगे केजरीवाल

CJP Protest Updates: दिल्ली में CJP के संसद मार्च के बाद जारी विरोध प्रदर्शन के बीच मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर एक बार फिर हलचल तेज हो गई। CJP प्रमुख अभिजीत दीपके सुबह-सुबह धरना स्थल पहुंचे और सोशल मीडिया पर अपने समर्थकों, खासकर घायल छात्राओं से माफी मांगी। वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने घायल छात्रों से मिलने राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल जाने और सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का ऐलान किया। इस बीच सोनम वांगचुक ने कहा कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को देखते हुए वह अपना अनशन नहीं तोड़ेंगे। अभिजीत दीपके ने समर्थकों से मांगी माफी CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वह उन सभी समर्थकों से माफी मांगते हैं, जो प्रदर्शन के दौरान घायल हुए, विशेषकर उन छात्राओं से जिनके साथ कथित तौर पर पुलिस ने मारपीट की। उन्होंने लिखा कि, "हम और बेहतर कर सकते थे। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से आपको बचाने के लिए मैं और अधिक प्रयास कर सकता था।" उन्होंने घायल प्रदर्शनकारियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने की भी अपील की। केजरीवाल करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस, फिर जाएंगे RML अस्पताल आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ अपनी बात रखेंगे। इसके बाद वह संसद मार्च के दौरान घायल हुए छात्रों से मिलने राम मनोहर लोहिया अस्पताल जाएंगे। मनीष तिवारी ने छात्रों के आंदोलन का किया समर्थन कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक शेर साझा किया। उन्होंने लिखा— "संघर्षों के साए में, असली आज़ादी पलती है, इतिहास उधर मुड़ जाता है, जिस ओर जवानी चलती है।" इसके साथ उन्होंने लिखा कि आंदोलित छात्र ही मजबूत राष्ट्र की पहचान हैं। संजय राउत बोले- 20 जुलाई लोकतंत्र के लिए काला दिन शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है और 20 जुलाई को भारतीय लोकतंत्र के लिए "काला दिवस" के रूप में याद रखा जाएगा। कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत? डॉक्टरों के अनुसार सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन वह अभी भी मेडिकल निगरानी में हैं। उनका ब्लड शुगर सामान्य से कम है और शरीर में पोटैशियम का स्तर 3.2 mEq/L दर्ज किया गया है। जांच में एनीमिया और सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या भी कम पाई गई है। डॉक्टरों ने IV फ्लूइड और ग्लूकोज लेने की सलाह दी है, लेकिन वांगचुक ने इसे लेने से इनकार कर दिया है। फिलहाल वह ORS और पोटैशियम की दवा ले रहे हैं। CJP का दावा- गीतांजलि के साथ हुई बदसलूकी CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि संसद मार्च के दौरान सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि के साथ पुलिस ने बदसलूकी की। उनका दावा है कि उन्हें बाल पकड़कर वाहन से बाहर खींचा गया और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया। हालांकि, दिल्ली पुलिस पहले ही ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पुलिस ने किसी महिला प्रदर्शनकारी के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया और लोगों से भ्रामक जानकारी न फैलाने की अपील की है। अनशन जारी रखने पर अड़े सोनम वांगचुक सोनम वांगचुक ने कहा कि छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक वह अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त नहीं करेंगे। इससे जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
Delhi Police remove CJP protest site at Jantar Mantar after Parliament March
संसद मार्च के बाद CJP पर पुलिस का एक्शन, जंतर-मंतर से हटाया धरना; दिनभर चला हाईवोल्टेज ड्रामा

CJP Parliament March: दिल्ली में सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'चलो संसद' मार्च के बाद राजधानी में पूरे दिन हाईवोल्टेज राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम देखने को मिला। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल खाली करा दिया। हालांकि देर शाम प्रदर्शनकारी दोबारा जंतर-मंतर लौट आए और सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। इस दौरान पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन के लिए बनाया गया मंच भी हटा दिया और धरना स्थल से ट्रैम्पोलिन, गद्दे, कालीन समेत अन्य सामान जब्त कर लिया। संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव सोमवार सुबह हजारों प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं, पेपर लीक मामलों में कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर से संसद की ओर निकले। संसद मार्ग के पास पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च को रोकने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। जंतर-मंतर से हटाया गया धरना संसद मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल को खाली कराया। पुलिस ने सोनम वांगचुक के अनशन के लिए बनाया गया मंच हटाने के साथ-साथ वहां रखा अन्य सामान भी जब्त कर लिया। हालांकि शाम होते-होते प्रदर्शनकारी फिर से जंतर-मंतर लौट आए और आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर दिया। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने लाउडस्पीकर के जरिए प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। सरकार और CJP के बीच हुई बातचीत तनावपूर्ण माहौल के बीच केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों से संवाद की पहल भी की। CJP के दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, सोनम वांगचुक पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई रोकने की मांग रखी। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि मांगों पर विचार कर उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा। क्या हैं CJP की प्रमुख मांगें? प्रदर्शनकारी संगठन ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं— सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बिना किसी प्रतिबंध के रिहा किया जाए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए। कथित NEET 2026 पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। कई छात्र संगठनों का मिला समर्थन इस आंदोलन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) सहित कई छात्र संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। इसके अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र, शिक्षक और कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद भड़की झड़प सुबह करीब 11 बजे संसद मार्ग पुलिस थाने के पास प्रदर्शनकारियों ने लगाए गए प्रमुख बैरिकेड को हटाने की कोशिश की। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ गए। पुलिस के अनुसार, कुछ उपद्रवियों ने सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकी, जिससे कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए बल प्रयोग किया। हिरासत, इंटरनेट बंद और धारा 163 लागू अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन के बाहर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस दौरान 20 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। एहतियात के तौर पर नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं। दोपहर बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर सार्वजनिक सभा और प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई। राजधानी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था प्रदर्शन को देखते हुए संसद भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, केंद्रीय सचिवालय सहित पूरे लुटियंस दिल्ली इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए। दिल्ली पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियां भी तैनात रहीं। दंगा-रोधी उपकरणों से लैस जवानों को संवेदनशील स्थानों पर लगाया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। विपक्षी नेताओं ने भी जताया समर्थन प्रदर्शन के दौरान नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद और समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव भी जंतर-मंतर पहुंचे। दोनों नेताओं ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की। पांच मेट्रो स्टेशन रहे बंद सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद रखा। स्थिति सामान्य होने के बाद चरणबद्ध तरीके से मेट्रो सेवाएं बहाल कर दी गईं।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
CJP Protest
जंतर-मंतर पर संसद मार्च से पहले हंगामा, पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने

नई दिल्ली, एजेंसियां। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित संसद मार्च से पहले सोमवार सुबह जंतर-मंतर पर भारी हंगामा देखने को मिला। पुलिस ने मार्च को रोकने के लिए इलाके में कड़ी बैरिकेडिंग की थी और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। इसके विरोध में भीड़ ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मौके पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं।   पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा CJP का संसद मार्च सुबह नौ बजे शुरू होना था, लेकिन बैरिकेडिंग के कारण इसमें देरी हुई। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि उन्हें कोई नहीं रोक सकता और वे हर हाल में संसद तक पहुंचेंगे। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी, इसलिए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया।   इसी बीच, 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए सरकार के सामने तीन शर्तें रखी हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक की जिम्मेदारी तय करने, CJP प्रतिनिधिमंडल को संसद जाने की अनुमति देने तथा सांसदों से मुद्दा उठाने का आश्वासन मांगा है। स्वास्थ्य कारणों से ऐसा संभव न होने पर उन्होंने सांसदों से सफदरजंग अस्पताल आकर आश्वासन देने की मांग की है।

abhishek singh जुलाई 20, 2026 0
Dr. Geetanjali Angmo addressing the media ahead of the Parliament March in support of Sonam Wangchuk
संसद मार्च में सोनम वांगचुक की जगह पत्नी गीतांजलि संभालेंगी मोर्चा, बोलीं- सरकार आंदोलन से घबराई हुई है

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद अब 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च का नेतृत्व उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो करेंगी। उन्होंने कहा कि वह अपने पति का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदर्शन में शामिल होंगी और आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। "मैं सोनम वांगचुक का प्रतिनिधित्व करूंगी" न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि उन्होंने वांगचुक को दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अनुमति नहीं मिली। उन्होंने कहा कि यदि स्थानांतरण की मंजूरी मिल जाती तो वांगचुक भी मार्च में शामिल हो सकते थे। अब वह स्वयं उनके प्रतिनिधि के रूप में संसद मार्च में शामिल होंगी। छात्रों और अभिभावकों से की शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील गीतांजलि आंग्मो ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्रों और अभिभावकों से संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण होना चाहिए और किसी भी ऐसे तत्व से सावधान रहना होगा जो आंदोलन का माहौल बिगाड़ने या उसे अलग दिशा देने की कोशिश करे। उन्होंने यह भी बताया कि सोनम वांगचुक अब भी अपना अनशन जारी रखना चाहते हैं। डॉक्टरों द्वारा तरल पदार्थ लेने की सलाह के बावजूद उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया है, हालांकि वे पानी पी रहे हैं। सरकार पर लगाए गंभीर आरोप गीतांजलि आंग्मो ने आरोप लगाया कि सरकार को वांगचुक के नेतृत्व में होने वाले संसद मार्च से डर है। उनके अनुसार, यदि वांगचुक स्वयं मार्च का नेतृत्व करते तो देशभर से बड़ी संख्या में लोग इस आंदोलन से जुड़ सकते थे। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से स्वास्थ्य को लेकर जताई जा रही चिंता केवल दिखावा है। हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने डॉ. गीतांजलि आंग्मो की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी देकर मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने की मांग की थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वांगचुक हिरासत में नहीं हैं और उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने के फैसले को मनमाना नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने तत्काल अस्पताल बदलने की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया। क्या है पूरा मामला? सोनम वांगचुक कथित NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके समर्थकों का आरोप है कि उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया। इस बीच संसद मार्च को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।  

kalpana जुलाई 20, 2026 0
Security personnel deployed at Jantar Mantar ahead of the proposed Parliament March in Delhi
संसद मार्च से पहले दिल्ली हाई अलर्ट पर, जंतर-मंतर पर 5,000 जवान तैनात; सुरक्षा के कड़े इंतजाम

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आह्वान पर आयोजित 'संसद मार्च' को देखते हुए जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में बदल दिया गया है। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 5,000 से अधिक जवान तैनात किए गए हैं। जंतर-मंतर पर जुटने लगे प्रदर्शनकारी देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। हल्की बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं दिखा। हाथों में तिरंगा लेकर लोग देशभक्ति के नारे लगा रहे हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। संसद मार्च की अनुमति नहीं दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई है। इलाके में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू कर दी गई है, जिसके तहत बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध रहेगा। पुलिस ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई और गिरफ्तारी की जा सकती है। तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरा सुरक्षा व्यवस्था के तहत दिल्ली पुलिस, CAPF और RAF की 25 से अधिक कंपनियों को तैनात किया गया है। स्पेशल सीपी, जॉइंट सीपी और डीसीपी स्तर के अधिकारी स्वयं पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं। संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग, चेकिंग और निगरानी बढ़ा दी गई है। कई मेट्रो स्टेशन अस्थायी रूप से बंद संसद मार्च के मद्देनज़र दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों पर अगले आदेश तक प्रवेश और निकास बंद कर दिया है। यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है। बातचीत के लिए तैयार आंदोलनकारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि प्रशासन ने सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की पहल की है। उनके अनुसार संगठन संवाद के लिए तैयार है और अब फैसला सरकार को करना है। उन्होंने बताया कि सोनम वांगचुक की तबीयत स्थिर है और उनका अनशन जारी है। चंद्रशेखर आजाद ने दिया समर्थन आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद भी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में खड़े हुए। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज उठाना उनका कर्तव्य है और इस मुद्दे को संसद के भीतर भी पूरी मजबूती से उठाया जाएगा। CJP का दावा- ऐतिहासिक होगा मार्च CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दावा किया कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मार्च साबित होगा। उन्होंने कहा कि देशभर से लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं और आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ेगा। सोनम वांगचुक ने रखी हैं तीन शर्तें इस बीच अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने कहा है कि यदि सरकार परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों पर जवाबदेही तय करती है या उनकी बात सांसदों तक पहुंचाने का रास्ता देती है, तो वे अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे। फिलहाल उनकी मांगों को लेकर सरकार की ओर से किसी आधिकारिक निर्णय का इंतजार है।  

kalpana जुलाई 20, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 23, 2026 0