Jharkhand Corruption News

Jharkhand Treasury scam
Jharkhand Treasury scam: झारखंड ट्रेजरी घोटाले का बढ़ता दायरा

झारखंड में ट्रेजरी घोटाला रूकने का नाम ही नहीं ले रहा। हर दिन एक नये कोषागार में गड़बड़ी के खुलासे हो रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक घोटाले की आंच राज्य के 15 जिलों तक पहुंच गई और गड़बड़ी की राशि का आंकड़ा 150 करोड़ पार कर चुका है। मतलब बड़ा घोटाला है ये,  पिछले एक दशक से चल रहा था और राज्य को दीमक की तरह चाट रहा था। झारखंड ट्रेजरी घोटाला-2026 एक बड़े वित्तीय संकट और प्रशासनिक विफलता के रूप में उभरा है। यह घोटाला मुख्य रूप से पुलिस विभाग और कोषागार (Treasury) के बीच डेटा हेरफेर और फर्जी वेतन निकासी से जुड़ा है। कैसे होता रहा घोटाला यह घोटाला कोई एकमुश्त डकैती नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर बैठे लोगों द्वारा किया गया एक डिजिटल फ्रॉड है। जांच में ये खुलासे हुएः डेटा हेरफेर: पुलिस विभाग के अकाउंटेंट और कंप्यूटर ऑपरेटरों ने विभागीय कंप्यूटर डेटा में हेरफेर किया। फर्जी वेतन निकासी: मृत पुलिसकर्मियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों या काल्पनिक नामों के आधार पर फर्जी बैंक खाते जोड़े गए और सालों तक उनमें वेतन और भत्ते (TA/DA) भेजे गए। OTP का खेल: आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) के मोबाइल पर आने वाले OTP का दुरुपयोग कर डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए अवैध भुगतान को मंजूरी दी गई। पारिवारिक खातों का उपयोग: मुख्य आरोपियों ने सरकारी पैसा सीधे अपनी पत्नियों या रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया। घोटाले की व्यापकता और प्रभावित जिले शुरुआत में यह मामला बोकारो से शुरू हुआ था, लेकिन अब इसकी आंच राज्य के 15 जिलों तक फैल चुकी है: हजारीबाग: यहां सबसे बड़ी अवैध निकासी करीब ₹15-28 करोड़ की बात सामने आई है। बोकारो: करीब ₹6 करोड़ से ज्यादा का गबन पकड़ा गया है। चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम): यहां के पुलिस कोषागार से लगभग ₹26 लाख की अवैध निकासी की पुष्टि हुई है। अन्य जिले: रांची, पलामू, जमशेदपुर, देवघर और रामगढ़ भी जांच के दायरे में हैं। अनुमान है कि यह आंकड़ा ₹150 करोड़ से लेकर ₹500 करोड़ तक जा सकता है। जांच की वर्तमान स्थिति (Status of Investigation)... सरकार ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कई स्तरों पर जांच शुरू की है: CID और SIT पूरे मामले की जांच सीआईडी (CID) की विशेष जांच टीम (SIT) कर रही है। हजारीबाग, बोकारो और चाईबासा में कई एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं। प्रमुख गिरफ्तारियां अब तक कई छोटे-बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें बोकारो के अकाउंटेंट कौशल कुमार पांडे, चाईबासा के सिपाही अकाउंटेंट देवनारायण मुर्मू और उनके सहयोगी शामिल हैं। 21 से अधिक बैंक खाते फ्रीज   सीआईडी ने 21 से अधिक संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है और आरोपियों की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। हाई-लेवल कमेटी कर रही जांच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर आईएएस अधिकारियों और एजी (AG) ऑफिस के विशेषज्ञों की एक संयुक्त कमेटी बनाई गई है, जो सभी 24 जिलों की 33 ट्रेजरी का ऑडिट कर रही है। घोटाले का असर वेतन पर रोक: जांच के कारण राज्य के लगभग 70,000 से 80,000 पुलिसकर्मियों का वेतन मार्च 2026 से रुक गया था, क्योंकि डेटा वेरिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा अन्य विभागों का वेतन भुगतान भी लंबित है।  विपक्ष का हमला बीजेपी ने इसे "सफेदपोशों" का संरक्षण प्राप्त घोटाला बताते हुए CBI जांच की मांग की है। बाबूलाल मरांडी और अन्य नेताओं ने सरकार पर प्रशासनिक ढिलाई के आरोप लगाए हैं। प्रशासनिक बदलाव   सरकार ने आदेश दिया है कि 3 साल से अधिक समय से एक ही ट्रेजरी या विभाग में जमे कर्मचारियों का तुरंत तबादला किया जाए। जांच की आंच कहां तक पहुंची? वर्तमान में जांच केवल निचले स्तर के क्लर्कों या अकाउंटेंट तक ही सीमित नहीं है। सीआईडी इस बात की जांच कर रही है कि क्या इतने बड़े पैमाने पर निकासी बिना उच्च अधिकारियों (DDO और ट्रेजरी ऑफिसर्स) की मिलीभगत के संभव थी? यह भी खुलासा हुआ है कि राज्य के पांच जिलों के एसपी के खाते में पैसे ट्रांसफर हुए हैं।   जांच अब उस 'सिंडिकेट' को खोजने की ओर बढ़ रही है, जो राज्य भर के कोषागारों में एक ही पैटर्न पर फ्रॉड कर रहा था। यदि बड़े अधिकारियों की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में कुछ कड़े प्रशासनिक निलंबन देखने को मिल सकते हैं।

Unknown मई 1, 2026 0
Young lawyer dies after jumping from Kanpur court building, suicide note alleges mental harassment
कानपुर कोर्ट से वकील ने लगाई छलांग, सुसाइड नोट में पिता पर गंभीर आरोप

"मेरे शव को पिता छूएं नहीं"– मौत से पहले WhatsApp स्टेटस पर लिखा दर्द उत्तर प्रदेश के कानपुर से बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। 24 वर्षीय युवा वकील ने कोर्ट परिसर की इमारत से कूदकर अपनी जान दे दी। घटना के बाद पूरे न्यायालय परिसर में हड़कंप मच गया। मृतक ने आत्महत्या से पहले दो पन्नों का सुसाइड नोट अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने पिता पर बचपन से मानसिक प्रताड़ना देने के गंभीर आरोप लगाए। पांचवीं मंजिल से कूदकर दी जान पुलिस के अनुसार, युवा वकील प्रियंशु श्रीवास्तव ने गुरुवार को कानपुर कोर्ट की पांचवीं मंजिल से छलांग लगा दी। गंभीर हालत में उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सुसाइड नोट में छलका वर्षों का दर्द प्रियंशु ने अपने नोट में बचपन की कई घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि छह साल की उम्र में आम का जूस पीने पर उनके पिता ने उन्हें निर्वस्त्र कर घर से बाहर निकाल दिया था। इस घटना ने उनके मन पर गहरा असर छोड़ा और जीवनभर हीन भावना से जूझते रहे। "मेरे शव को पिता हाथ न लगाएं" सुसाइड नोट की सबसे मार्मिक पंक्ति थी– "मेरे शव को मेरे पिता छूएं नहीं।" यह पंक्ति उनके भीतर वर्षों से जमा पीड़ा और मानसिक संघर्ष को बयां करती है। पढ़ाई को लेकर भी लगाया दबाव का आरोप प्रियंशु ने 2016 की एक घटना का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि वह फिजिकल एजुकेशन पढ़ना चाहते थे, लेकिन पिता ने उन्हें जबरन कंप्यूटर साइंस लेने के लिए मजबूर किया। मां को परेशान न करने की अपील अपने अंतिम संदेश में प्रियंशु ने पुलिस और परिवार से अनुरोध किया कि उनकी मां को किसी प्रकार की परेशानी न दी जाए। उन्होंने यह भी लिखा कि अपने इस फैसले के लिए वह किसी और को जिम्मेदार नहीं ठहराते। पुलिस जांच में जुटी पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। कोर्ट परिसर के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Chaibasa treasury scam
Chaibasa treasury scam: हजारीबाग और बोकारो के बाद अब चाईबासा में 45 लाख का  ट्रेजरी घोटाला

चाईबासा। झारखंड में कोषागार (ट्रेजरी) से अवैध निकासी के मामलों की कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है। इस बार मामला चाईबासा से जुड़ा है, जहां पुलिस विभाग के खातों से करीब 45 लाख रुपये की अवैध निकासी का खुलासा हुआ है। घटना सामने आते ही जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार, यह गड़बड़ी आंतरिक ऑडिट के दौरान पकड़ी गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पुलिस विभाग के नाम पर फर्जी तरीके से अलग-अलग ट्रांजैक्शन कर रकम निकाली गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत जांच शुरू कर दी है।   विशेष जांच टीम का गठन पूरे मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन ने विशेष टीम का गठन किया है, जिसमें कोषागार, ऑडिट और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल हैं। रांची मुख्यालय से भी ऑडिट टीम को जांच में लगाया गया है, जो पिछले महीनों के वाउचर, चेकबुक और ऑनलाइन लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही है।   एक सिपाही हिरासत में, जांच तेज मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने गोइलकेरा से एक सिपाही को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि उसी के माध्यम से संदिग्ध लेन-देन हुए। हालांकि, अभी तक पूरी राशि और जिम्मेदार व्यक्तियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।   निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इतनी बड़ी राशि बिना उचित सत्यापन के कैसे निकाली गई। प्रशासन ने सभी बड़े भुगतानों पर अस्थायी रोक लगा दी है और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घोटाले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

Unknown अप्रैल 25, 2026 0
treasury scam Jharkhand
झारखंड ट्रेजरी घोटाले में अब ED की एंट्री

रांची। झारखंड ट्रेजरी घोटाले में जल्द ही ED की इंट्री होने जा रही है। राज्य में ट्रेजरी से अवैध निकासी की जांच में ईडी की भी एंट्री की चर्चा होते ही हड़कंप मच गया है। बोकारो में पुलिस विभाग के खाते से अब तक नौ करोड़ व हजारीबाग में करीब 30 करोड़ की अवैध निकासी का मामला सामने आने के बाद वहां प्राथमिकी दर्ज हुई है। ईडी उन प्राथमिकियों की समीक्षा कर रही है। ताजा मामला रांची में पशुपालन विभाग में वेतन मद में 2.94 करोड़ रुपये की फर्जी तरीके से निकासी मामले में कोतवाली थाने में दर्ज प्राथमिकी की भी ईडी समीक्षा कर रही है। रामगढ़ में भी इसी तरह का एक मामला सामने आया है, जिसमें 34.25 लाख रुपये की फर्जी तरीके से निकासी उजागर हो चुकी है। ईडी सभी मामलों को देख रही है। बताया जा रहा है कि जल्द ही ईडी इन प्राथमिकियों को जोड़कर इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट यानी ईसीआइआर दर्ज करेगी। ईडी इसे मनी लांड्रिंग के बिंदु पर देखेगी।  उर्जा व पर्यटन विभाग में अवैध निकासी की जांच कर रही ईडी इससे पहले ईडी ने ऊर्जा व पर्यटन निगम के खाते से 107 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी मामले में केस दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया था। ईडी इस मामले में भी मनी लांड्रिंग के बिंदु पर जांच कर रही है। एमडीएम में गड़बड़ी की जांच कर चुकी ईडी पूर्व में मिड डे मील के 100 करोड़ रुपये की हेराफेरी मामले में भी ईडी ने जांच कर बड़ी कार्रवाई की थी। अब ट्रेजरी घोटाले में भी ईडी की शीघ्र एंट्री की संभावना जताई जा रही है। सीआइडी को अब तक नहीं मिला है औपचारिक आदेश अवैध निकासी की उच्चस्तरीय जांच चल रही है। जांच समिति के अध्यक्ष उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव डा. अमिताभ कौशल हैं। वहीं, सदस्यों में प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) के प्रतिनिधि डिप्टी अकाउंटेंट जनरल भार्गव राम ख्याति, वित्त विभाग की उप सचिव ज्योति कुमारी झा, अवर सचिव कपिल देव पंडित, अंकेक्षण निदेशालय के लेखा नियंत्रक नरेश झा, एनआइसी के वरीय निदेशक (आईटी) ओमेश प्रसाद सिन्हा, सहायक निदेशक गौरव कुमार तथा सदस्य सचिव के रूप में वित्त विभाग के प्रशाखा पदाधिकारी खिरोद सिंह मुंडा शामिल हैं। समिति कर रही जांच समिति के पदाधिकारी व सदस्यों ने वित्त विभाग व एजी से वित्तीय निकासी से संबंधित दस्तावेज मंगवाकर उसकी समीक्षा शुरू कर दी है। इस केस में सीआईडी को आपराधिक मामलों की जांच करने का आदेश सीएम हेमंत सोरेन ने दिया है। सीआइडी को नहीं मिली औपचारिक आदेश की कापी सीआडी को बोकारो, धनबाद व अन्य जिलों में दर्ज मामले की जांच करनी थी, लेकिन बुधवार की शाम तक सीआइडी को औपचारिक आदेश की कापी नहीं मिली थी।

Unknown अप्रैल 23, 2026 0
Ranchi scam news
रांची के ऊर्जा विभाग में 56.5 करोड़ का घोटाला

रांची। झारखंड में घोटाला का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रांची के बिजली विभाग से एक 56.5 करोड़ रुपये घोटाला सामने आया है। CID की जांच में पता चला है कि घोटाले की रकम में से 20 लाख रुपये एक घड़ी बेचने वाली कंपनी के खाते में भी ट्रांसफर किए गए थे। जांच के मुताबिक, यह पूरा मामला झारखंड राज्य विद्युत कर्मचारी मास्टर ट्रस्ट से जुड़ा है, जहां से करीब 56.5 करोड़ रुपये संदिग्ध तरीके से विभिन्न निजी खातों में भेजे गए। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे लेन-देन में ‘लेयरिंग’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया, ताकि पैसों के असली स्रोत को छिपाया जा सके।   फर्जी कंपनियों के जरिए घुमाया गया पैसा सीआईडी जांच में सामने आया है कि रकम पहले कई संदिग्ध और फर्जी फर्मों जैसे हरेश ट्रेडर्स, अशोक इलेक्ट्रॉनिक्स, राजीव टेक्सटाइल और आदर्श डीलर्सके खातों में ट्रांसफर की गई। इसके बाद इन खातों से पैसे को अलग-अलग माध्यमों से आगे बढ़ाया गया, जिससे ट्रांजेक्शन का ट्रैक करना मुश्किल हो जाए। इसी कड़ी में 20 लाख रुपये की एक राशि  स्वॉच ग्रुप से जुड़ी एक इकाई के खाते में पहुंची। यह कंपनी घड़ियों के प्रसिद्ध ब्रांड जैसे राडो, टीस्सॉट, लॉन्गीन्स और ओमेगा के इंपोर्ट, डिस्ट्रीब्यूशन और रिसेल का काम करती है। संबंधित बैंक खाता दिल्ली के पश्चिम पंजाबी बाग स्थित सिटी बैंक शाखा में बताया गया है।   सीआईडी ने खाता किया फ्रीज, जांच जारी सीआईडी ने इस ट्रांजेक्शन को संदिग्ध मानते हुए संबंधित बैंक खाते को फ्रीज कर दिया है। एजेंसी का मानना है कि यह रकम कथित गबन से जुड़ी हो सकती है। फिलहाल मामले की गहराई से जांच जारी है और कई लोगों की संलिप्तता की जांच की जा रही है।यह मामला राज्य में वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, वहीं आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

Unknown अप्रैल 23, 2026 0
Jharkhand Treasury scam
Jharkhand Treasury scam: झारखंड ट्रेजरी घोटाला का 50 करोड़ का, 25 महीने में 63 बार सैलरी!

रांची। झारखंड के ट्रेजरी घोटाले ने सरकार और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। बोकारो और हजारीबाग ट्रेजरी से पुलिस वेतन मद में करोड़ों की अवैध निकासी मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आईएएस कमेटी और सीआईडी जांच के आदेश दिये हैं। राज्य के सभी 33 ट्रेजरी की जांच शुरू हो गई है। वित्त मंत्री के प्रस्ताव पर बनी आइएएस कमेटी तकनीकी और आपराधिक दोनों पहलुओं की जांच कर रही है, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप है।  झारखंड के बोकारो और हजारीबाग जिले में ट्रेजरी से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।  इस घोटाले में पुलिस अधिकारियों के वेतन के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध लगाई गई है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में वित्त विभाग की एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है। वहीं, इस पूरे मामले में रची गई आपराधिक साजिश की परतें सीआईडी की तफ्तीश में खुलने लगी हैं। सीआइडी ने सभी एफआइआर की कॉपी ली वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, अब तक दर्ज सभी प्राथमिकियों को सीआईडी को ट्रांसफर किया जा रहा है। जहां आईएएस कमेटी वित्तीय अनियमितताओं और विभागीय खामियों की जांच करेगी। वहीं, सीआईडी ये पता लगाएगी कि इस सुनियोजित चोरी के पीछे कौन से माफिया या अपराधी सक्रिय थे। जांच का दायरा केवल दो जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी जिलों में भी संभावित गड़बड़ियों की पड़ताल की जाएगी। तकनीकी जांच में एजी की मदद झारखंड ट्रेजरी घोटाले की गहराई और तकनीकी बारीकियों को देखते हुए, वित्त विभाग ने प्रधान महालेखाकार (AG Office) से संपर्क किया है। सरकार चाहती है कि एजी ऑफिस के किसी अनुभवी अधिकारी को इस उच्चस्तरीय कमेटी का सदस्य बनाया जाए। इससे ट्रेजरी सॉफ्टवेयर और बिलिंग प्रक्रिया में हुई हेराफेरी को पकड़ने में आसानी होगी और दोषियों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जा सकेंगे। 25 महीने में निकाली 63 बार सैलरी बोकारो ट्रेजरी से एक रिटायर पुलिसकर्मी के नाम पर 4 करोड़ 29 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी हुई। आशंका है कि ये पूरा घोटाला 50 करोड़ रुपये या उससे भी अधिक का हो सकता है। जुलाई 2016 में रिटायर हो चुके उपेंद्र सिंह को कागजों पर दोबारा नौकरी में दिखाया गया। नवंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच पिछले 25 महीनों में कुल 63 बार फर्जी तरीके से वेतन निकाला गया। इस मामले में एसपी कार्यालय के अकाउंटेंट कौशल किशोर पांडेय को गिरफ्तार किया गया। उस पर बिल मैनेजमेंट सिस्टम (DDO Level) में छेड़छाड़ कर फर्जी वेतन बिल बनाने का गंभीर आरोप है। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी अकाउंटेंट ने घोटाले की रकम पहले अपने बैंक खाते में और बाद में अपनी पत्नी (अनु पांडेय) के खाते में ट्रांसफर की। पुलिस ने दोनों के खातों में जमा भारी राशि को फ्रीज कर दिया है। झारखंड में इस बड़े वित्तीय घोटाले के सामने आने के बाद पूरे प्रशासनिक विभाग में हड़कंप मच गया है। रडार पर सार्जेंट मेजर और डीएसपी स्तर के अधिकारी सरकारी विभाग में वेतन निकासी की प्रक्रिया काफी जटिल होती है, जिसमें पुलिस लाइन से मास्टर रोल पर सार्जेंट मेजर के हस्ताक्षर होते हैं। इसके बाद लेखापाल, बड़ा बाबू और अंत में डीएसपी (निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी) के हस्ताक्षर से ट्रेजरी से भुगतान होता है। ऐसे में जांच की आंच डीएसपी, सार्जेंट मेजर और लेखा शाखा के क्लर्कों तक पहुंचना तय माना जा रहा है। इसी तर्ज पर कभी बिहार-झारखंड में चारा घोटाला हुआ था। सिपाही से इंस्पेक्टर तक के वेतन में खेल शुरुआती जांच में पता चला है कि  सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक के कर्मचारियों के वेतन बिलों में छेड़छाड़ कर ये अवैध निकासी की गई है। मास्टर रोल से लेकर ट्रेजरी तक की चेन में शामिल हर अधिकारी अब जांच के दायरे में है। वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई है कि उच्चस्तरीय कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद जल्द ही इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश होगा और दोषियों को सजा मिलेगी।

Unknown अप्रैल 14, 2026 0
Jharkhand Tourism scam
झारखंड पर्यटन विकास निगम में करोड़ों की हेराफेरी, जांच में जुटी ईडी

रांची। रांची स्थित झारखंड पर्यटन विकास निगम में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। करीब 10.40 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वर्ष 2026 का अपना पहला केस दर्ज कर जांच तेज कर दी है। इस मामले में निगम और बैंक अधिकारियों के साथ-साथ बाहरी नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में है।   फर्जी हस्ताक्षर से खुला बैंक खाता प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि 21 जून 2023 को निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर के जरिए केनरा बैंक की हटिया शाखा में एक खाता खोला गया। इसके बाद 13 अक्टूबर 2023 को इस खाते में 10 करोड़ 40 लाख रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई, जो पूरे घोटाले की मुख्य कड़ी मानी जा रही है।   अधिकारियों और बैंक कर्मियों की भूमिका संदिग्ध ईडी ने अपने ECIR केस में जेटीडीसी के तत्कालीन लेखापाल सह कैशियर गिरजा प्रसाद सिंह और बैंक के अधिकारियों अमरजीत कुमार व आलोक कुमार को आरोपी बनाया है। जांच एजेंसी इन सभी की भूमिका और आपसी साठगांठ की गहराई से जांच कर रही है।   संदिग्ध खातों में पैसे का ट्रांसफर जांच में यह भी सामने आया है कि ट्रांसफर की गई रकम को योजनाबद्ध तरीके से कई अलग-अलग निजी खातों में भेजा गया। रांची और पतरातू समेत अन्य स्थानों के खातों में पैसे ट्रांसफर कर बाद में निकासी कर ली गई, जिससे संगठित घोटाले की आशंका और मजबूत हो गई है।   बंगाल कनेक्शन और आगे की जांच ईडी अब इस मामले में पश्चिम बंगाल के कुछ कारोबारियों की संभावित भूमिका भी खंगाल रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस घोटाले का नेटवर्क कितना बड़ा है और किन-किन लोगों तक पैसा पहुंचा।   कोर्ट में पेश होगी रिपोर्ट मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च को रांची की विशेष अदालत में होगी, जहां ईडी अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करेगी। इससे पहले यह मामला स्थानीय पुलिस, CID और ATS की जांच में भी सामने आ चुका है, लेकिन अब ईडी की एंट्री से जांच और तेज हो गई है।

Unknown मार्च 24, 2026 0
CAG रिपोर्ट में झारखंड की अधूरी सरकारी परियोजनाओं का खुलासा
CAG रिपोर्ट ने खोली झारखंड सरकारी परियोजनाओं की पोल

रांची। झारखंड में सरकारी परियोजनाओं की धीमी रफ्तार और लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। CAG (Comptroller and Auditor General of India) की रिपोर्ट में झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय के स्थायी भवन निर्माण को लेकर चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। खूंटी में बन रहे इस भवन पर अब तक 12.10 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन परियोजना अधूरी पड़ी है।   निर्धारित समयसीमा के बावजूद अधूरा निर्माण बता दे विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर जून 2018 में शुरू हुआ था और इसे मई 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन अभी तक निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका। जुलाई 2021 में काम पूरी तरह बंद हो गया और दिसंबर 2022 तक इसे स्थगित रखा गया। इसके बाद से परियोजना पर कोई प्रगति नहीं हुई है। वर्तमान में भवन अधूरा पड़ा है और उपयोग में नहीं आ पा रहा।   अन्य परियोजनाओं में भी गड़बड़ी इतना ही नहीं CAG रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि झारखंड भवन निर्माण कारपोरेशन लिमिटेड की छह अन्य परियोजनाओं में भी कुल 13.32 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद काम अधूरा है। पिठौरिया स्थित सुतियांबे पहाड़ के विकास कार्य का उदाहरण देते हुए बताया गया कि अक्टूबर 2017 तक केवल 8 प्रतिशत काम पूरा हुआ, जबकि इस पर 2.16 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे।   काम रुकने के पीछे प्रशासनिक कारण रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम के पुनर्मूल्यांकन का निर्देश दिया था। इसी कारण स्थायी परिसर के निर्माण को रोक दिया गया, ताकि विश्वविद्यालय की वास्तविक जरूरतों का आकलन किया जा सके। लेकिन संबंधित विभाग से आगे कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिलने के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका। परिणामस्वरूप केवल 19 प्रतिशत निर्माण के बाद ही परियोजना ठप हो गई। अगस्त 2020 में ठेकेदार ने 58 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा करते हुए भुगतान की मांग की। कारपोरेशन ने एक महीने में काम पूरा करने की शर्त पर बिल का भुगतान कर दिया। हालांकि, शर्त पूरी नहीं हुई, फिर भी ठेकेदार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

Unknown मार्च 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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