Jharkhand Premier League

JSCA Stadium
JPL के आगाज पर JSCA स्टेडियम में उमड़ा क्रिकेट प्रेमियों का सैलाब, धोनी की एक झलक पाने को बेताब दिखे फैंस

रांची। रांची के JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम में बुधवार से झारखंड प्रीमियर लीग (JPL) 2026 का भव्य आगाज हुआ। टूर्नामेंट के उद्घाटन मुकाबले में छोटानागपुर रॉयल्स और रांची टाइटंस की टीमें आमने-सामने उतरीं। पहले मैच के साथ ही स्टेडियम में क्रिकेट प्रेमियों का ऐसा उत्साह देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि झारखंड में क्रिकेट के प्रति लोगों का जुनून किसी बड़े राष्ट्रीय टूर्नामेंट से कम नहीं है।   सुबह से स्टेडियम के बाहर लगी रही लंबी कतारें JPL के पहले मुकाबले को देखने के लिए सुबह से ही JSCA स्टेडियम के बाहर दर्शकों की लंबी कतारें लग गई थीं। रांची ही नहीं, बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी मैच देखने पहुंचे। स्टेडियम के प्रवेश द्वारों पर लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती रही और पूरा परिसर क्रिकेटमय माहौल में रंग गया। दर्शकों में सबसे ज्यादा उत्साह भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और झारखंड के गौरव महेंद्र सिंह धोनी को लेकर देखने को मिला। हर कोई धोनी की एक झलक पाने और अपने मोबाइल कैमरे में उनकी तस्वीर कैद करने के लिए उत्सुक नजर आया।   तालियों और जयकारों से गूंजा स्टेडियम मैच शुरू होते ही पूरा स्टेडियम तालियों, नारों और जयकारों से गूंज उठा। दर्शक अपनी-अपनी पसंदीदा टीमों और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते नजर आए। स्टेडियम का विंग-सी और विंग-डी का लोअर टियर पूरी तरह भर गया, जबकि अन्य हिस्सों में भी सीटें तेजी से भरने लगीं। दर्शकों की भारी भीड़ को देखते हुए स्टेडियम प्रबंधन को अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ीं। जरूरत पड़ने पर अन्य टियर्स और अतिरिक्त बैठने वाले क्षेत्रों को भी खोलने की तैयारी की गई, ताकि कोई भी क्रिकेट प्रेमी मैच देखने से वंचित न रहे।   उद्घाटन समारोह में दिखे रंगारंग कार्यक्रम उद्घाटन मैच के बाद टूर्नामेंट का आधिकारिक उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। शाम को कोईलांचल सुपर किंग्स और जमशेदपुर स्टैलियंस के बीच दूसरा मुकाबला खेला जाना था, जिससे उत्साह और बढ़ गया।   JSCA अध्यक्ष ने सराहा दर्शकों का उत्साह इस दौरान JSCA अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव  भी स्टेडियम पहुंचे और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने दर्शकों से बातचीत कर आयोजन को लेकर प्रतिक्रिया ली। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर के टूर्नामेंट के लिए इतनी बड़ी संख्या में दर्शकों का पहुंचना सुखद और प्रेरणादायक है।   उन्होंने कहा कि क्रिकेट प्रेमियों का यह समर्थन खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाएगा और झारखंड क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। JPL के पहले दिन का उत्साह यह संकेत देता है कि आने वाले मुकाबलों में भी स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा रहेगा।

anjali kumari जून 10, 2026 0
Jharkhand Premier League
JPL : रोबिन मिंज 15.25 लाख, ईशान किशन 14.70 लाख में बिके

राज्य की बहुप्रतीक्षित झारखंड प्रीमियर लीग (JPL) का आगाज 10 जून से होने जा रहा है। टूर्नामेंट में कुल छह टीमें हिस्सा लेंगी और इसके लिए आयोजित खिलाड़ियों की नीलामी में कई बड़े नामों पर जमकर बोली लगी। सबसे ज्यादा चर्चा युवा बल्लेबाज रोबिन मिंज की रही, जो इस ऑक्शन के सबसे महंगे खिलाड़ी बने।   रॉबिन मिंज पर लगी सबसे बड़ी बोली आईपीएल में Mumbai Indians का हिस्सा रह चुके बाएं हाथ के बल्लेबाज रॉबिन मिंज को कोयलांचल सुपर किंग्स ने 15.25 लाख रुपये में खरीदा। झारखंड क्रिकेट में उन्हें "क्रिस गेल ऑफ झारखंड" के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि आईपीएल में वह अभी तक अपनी प्रतिभा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं, लेकिन उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी क्षमता को देखते हुए फ्रेंचाइजी ने उन पर बड़ा दांव लगाया है।   ईशान किशन दूसरे सबसे महंगे खिलाड़ी भारतीय टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज Ishan Kishan भी नीलामी का प्रमुख आकर्षण रहे। उन्हें संथाल स्ट्राइकर्स ने 14.70 लाख रुपये में खरीदा। लेकिन  सवाल  यह है  कि आखिर ईशान किशन जो इतने अच्छे फॉर्म में और क्रिकेट में पूरी तरह फिर से वापसी  कर चुके है। इतना ही नहीं  IPL 2026  में  भी सनरायझर्स हैदराबाद की और से भी विकेटकीपिंग करते नजर आए। दरअसल बात यह हैं कि पुरे JPL में  उनकी उपस्तिथि बहुत कम रहेगी। पुरे सीरीज में वह कह सकते कि 1 या 2  मैच  ही खेल  पाएंगे। कारण उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। यह सीरीज 13 से 20 जून के बीच खेली जाएगी, जिससे यहां कुछ मैच मिस होंगे ।   अब जानते है टीम और खिलाडियों के बारे में?   इस सीजन में छोटा नागपुर रॉयल्स, धनबाद डायमंड्स, जमशेदपुर स्टीलर्स, कोयलांचल सुपर किंग्स, रांची टाइटंस और संथाल स्ट्राइकर्स खिताब के लिए भिड़ेंगी। सभी टीमों ने अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का संतुलित संयोजन तैयार किया है।   • छोटा नागपुर रॉयल्स:  विराट सिंह, मोहम्मद नाजिम सिद्दीकी, विकाश सिंह, कुमार कुशाग्र, सुप्रियो चक्रवर्ती, पंकज यादव, मोहित कुमार, दीपांशु रावत, सोनू कुमार सिंह, वरुण कुमार सिंह, ऋत्विक पाठक, दुर्गेश कुमार, चंदन मुखी, आर्यमान लाला, श्रेष्ठ सागर, राहुल रजक, अविनाश कुमार, हिमांशु द्विवेदी।   • धनबाद डायमंड्स:  सुशांत मिश्रा, पंकज कुमार, बाल कृष्ण, अतुल सिंह सुरवार, राम रोशन सरन, बिसेश दत्ता, विकाश कुमार विशाल, मो. शमशाद, विवेकानंद तिवारी, आर्यमन सेन, आदित्य सिंह, तनिष चौबे, प्रभात कुमार यादव, मीत जैन, हिमांशु रंजन कुमार, अभिषेक यादव, गौरव सिंह, सिद्धार्थ सिन्हा।   • जमशेदपुर स्टीलर्स:  मोहम्मद कौनैन कुरैशी, साहिल राज, कुमार देवब्रत, अनुकूल रॉय, प्रतीक रंजन, नितिन कुमार पांडे, रवि शर्मा, हर्ष राणा, आदर्श गिरी, कुमार करण, समीर शर्मा, सिद्धांत रघुवंशी, अमन कुमार, रितिक अनंत, मणिकांत मिश्रा, अनुराग सिंह सेंगर, प्रांजल कुमार, जसराज सिंह।   • कोयलांचल सुपर किंग्स:  रॉबिन मिंज, शुभ शर्मा, उत्कर्ष सिंह, अमित कुमार, हर्ष राज, शरणदीप सिंह, योगेश भास्कर, सत्यम सिंह, राहुल प्रसाद, सेंटू कुमार यादव, आदित्य झा, गुंजन यादव, लक्ष्य, अभिनव शरण, जुनैद अशरफ, सनी सचिन तिवारी, संजीव चतुर्वेदी।   • रांची टाइटंस:  शिखर मोहन, राजनदीप सिंह, श्रेष्ठ, जतिन पांडे, सौरभ शेखर, आयुष भारद्वाज, प्रिंस मुर्मू, आर्यन हुडा, यश भगत, ईशान ओम, कुमार अंकित, सचिन यादव, ओम सिंह, सत्या सेतु, प्रेम कुमार चौरसिया, मुकेश कुमार, युवराज सिंह, युवराज कुमार।   • संथाल स्ट्राइकर:  ईशान किशन, अरविंद कुमार, सुमित कुमार, अनमोल राज, मनीषी, विवेक कुमार, रेयान सपकोटा, रवि यादव, प्रत्यूष कुमार, विकास कुमार, कुमार सूरज, रौनक कुमार, ओजस वर्धन, रितेश पटेल, विभोर पांडे, सादाब हुसैन, संजीत शर्मा, आशीष कुमार।

Unknown जून 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 4, 2026 0