Jharkhand Public Service Commission

L. Khangte
JPSC भर्ती घोटाला: पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांग्ते से 8 घंटे पूछताछ, 31 जुलाई को फिर होंगे CID के सामने पेश

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) भर्ती घोटाले की जांच में सीआईडी ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांग्ते से लगातार दूसरे दिन करीब आठ घंटे तक पूछताछ की गई। सीआईडी मुख्यालय में हुई इस लंबी पूछताछ के बाद उन्हें 31 जुलाई को एक बार फिर पूछताछ के लिए तलब किया गया है।   श्वेता गुप्ता के साथ आमने-सामने पूछताछ   जांच के दौरान सीआईडी ने एल. ख्यांग्ते का सामना तत्कालीन परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता गुप्ता से भी कराया। दोनों को आमने-सामने बैठाकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सवाल-जवाब किए गए। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनका अन्य आरोपियों के बयानों और दस्तावेजी साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है।   आरोपियों की रिमांड अवधि बढ़ी   मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों की रिमांड अवधि समाप्त होने पर अदालत ने उसे दो दिन और बढ़ा दिया। इसके बाद सीआईडी ने श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, कथित मास्टरमाइंड और सफल अभ्यर्थी अभय तिवारी, टीडीपीएल कर्मी मो. उस्मान, मो. एबाद, प्रदीप कुमार सिंह, हेमंत वर्मा और संजय कुमार से भी विस्तृत पूछताछ की।   पूर्व चेयरमैन की भूमिका की जांच तेज   सीआईडी सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांग्ते की कथित संलिप्तता से जुड़े कुछ साक्ष्य भी सामने आए हैं। अब विभिन्न आरोपियों के बयान, आमने-सामने की पूछताछ और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। इसके आधार पर 31 जुलाई को एल. ख्यांग्ते से दोबारा पूछताछ कर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।

abhishek singh जुलाई 30, 2026 0
Dharmendra Pradhan Nishikant Dubey
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर निशिकांत दुबे का बयान, बोले- बच्चों को आंदोलन नहीं, पढ़ाई पर देना चाहिए ध्यान

देवघर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय बताया। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को आंदोलनों में शामिल करने के बजाय उनकी पढ़ाई पर ध्यान दें, ताकि वे भविष्य में आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बन सकें।   'शिक्षा से ही मिली पहचान'   निशिकांत दुबे ने कहा कि वह स्वयं गांव के एक स्कूल से पढ़कर देश के सांसद बने हैं और आज भी नियमित रूप से अध्ययन करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही व्यक्ति को आगे बढ़ाती है और युवाओं को अपना भविष्य बनाने पर ध्यान देना चाहिए।   धर्मेंद्र प्रधान के काम की सराहना   सांसद ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उनके अनुसार, उन्होंने किसी दबाव में इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि छात्रों के बीच बने भ्रम को दूर करने और उनकी भावनाओं का सम्मान करने के लिए यह फैसला लिया।   उन्होंने यह भी कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में नीट परीक्षा को पहले से अधिक पारदर्शी और बेहतर तरीके से आयोजित कराया गया। कभी-कभी अभिभावकों को भी बच्चों की भावनाओं के आगे झुकना पड़ता है और इसी भावना के तहत यह निर्णय लिया गया।   JPSC मामले में झारखंड सरकार पर हमला   निशिकांत दुबे ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े मामले में राज्य सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि धांधली के कारण आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते को हटाया गया, लेकिन अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।   दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग   पोड़ैयाहाट में डीएसओ की गिरफ्तारी और मामले में भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित संलिप्तता के सवाल पर उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने ऐसे दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
Jharkhand Government Recruitment
झारखंड में बड़े पैमाने पर सरकारी नियुक्तियों की तैयारी, 25 हजार पदों पर जल्द भर्ती संभव

रांची। झारखंड सरकार ने राज्य के विभिन्न विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में बड़ी पहल शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर सभी विभागों में रिक्तियों का आकलन कर भर्ती प्रक्रिया तेज करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को अधिक से अधिक सरकारी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।   सबसे अधिक रिक्तियां शिक्षा, स्वास्थ्य और गृह विभाग में सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 3,51,968 नियमित पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 1,87,610 पदों पर ही कर्मचारी और अधिकारी कार्यरत हैं। यानी बड़ी संख्या में पद अब भी खाली पड़े हैं। सबसे अधिक रिक्तियां शिक्षा, स्वास्थ्य और गृह विभाग में हैं, जिससे सरकारी सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है।   जेपीएससी और जेएसएससी को मिली तेजी लाने की जिम्मेदारी सरकार ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को पहले से विज्ञापित पदों की परीक्षाएं जल्द कराने और चयन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने का निर्देश दिया है। विभागों से प्राप्त रिक्तियों के आधार पर नई अधियाचनाएं भी भेजी जाएंगी।   इन पदों पर होगी नियुक्ति भर्ती अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में सहायक शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सक, नर्स और मेडिकल स्टाफ, तथा सड़क, पुल और पुलिया निर्माण कार्यों के लिए अभियंता और तकनीकी कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। यदि प्रक्रिया तय समय पर आगे बढ़ी तो स्वतंत्रता दिवस के आसपास करीब 25 हजार नई नियुक्तियां की घोषणा की जा सकती है।   वित्त मंत्री ने क्या कहा वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य गठन के बाद पहली बार किसी सरकार ने मानव संसाधन की कमी दूर करने पर इतने बड़े स्तर पर ध्यान दिया है। उनके अनुसार वर्तमान कार्यकाल में 40 हजार से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं और सरकार आने वाले वर्षों में स्वीकृत पदों को अधिकतम संख्या में भरने के लिए तेजी से काम करेगी।   सरकार का मानना है कि बड़े पैमाने पर होने वाली यह भर्ती न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि राज्य के हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी।

abhishek singh जुलाई 12, 2026 0
JPSC
JPSC मुख्य परीक्षा की तारीखों में बदलाव, JSSC परीक्षा से टकराव टालने के लिए आयोग का फैसला

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने सिविल सेवा मुख्य (लिखित) परीक्षा 2025 की तिथियों में बदलाव कर दिया है। आयोग ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि मुख्य परीक्षा की पहले घोषित तिथियां झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की क्षेत्रीय कार्यकर्ता परीक्षा से टकरा रही थीं। इससे दोनों परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को कठिनाई का सामना करना पड़ता। अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोग ने संशोधित परीक्षा कार्यक्रम जारी किया है।   नई तारीखों पर होगी मुख्य परीक्षा संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2025 (विज्ञापन संख्या 01/2026) अब 21, 22 और 23 जुलाई को आयोजित की जाएगी। पहले यह परीक्षा 18, 19 और 20 जुलाई को प्रस्तावित थी। आयोग के अनुसार, इस परीक्षा में कुल 2,204 अभ्यर्थी शामिल होंगे।   बैकलॉग परीक्षाओं का भी जारी हुआ कार्यक्रम आयोग ने बैकलॉग मुख्य परीक्षाओं की नई तिथियां भी घोषित की हैं। बैकलॉग मुख्य परीक्षा 2023 (विज्ञापन संख्या 06/2026) का आयोजन 25, 26 और 27 जुलाई को किया जाएगा। वहीं, बैकलॉग मुख्य परीक्षा 2025 (विज्ञापन संख्या 05/2026) 1, 2 और 3 अगस्त को आयोजित होगी।   आयोग ने जारी की महत्वपूर्ण सलाह JPSC ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यही संशोधित कार्यक्रम प्रभावी रहेगा। हालांकि, यदि भविष्य में कोई अपरिहार्य परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो परीक्षा तिथियों में फिर से बदलाव किया जा सकता है। ऐसे में अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार की अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और केवल आयोग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करने की सलाह दी गई है।   वेबसाइट पर रखें नजर आयोग ने उम्मीदवारों से कहा है कि परीक्षा से जुड़े सभी नवीनतम अपडेट, प्रवेश पत्र और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं के लिए नियमित रूप से JPSC की आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें, ताकि किसी भी बदलाव की जानकारी समय पर मिल सके और परीक्षा की तैयारी प्रभावित न हो।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
JPSC Backlog PT
JPSC बैकलॉग पीटी-2025 का रिजल्ट जारी

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (बैकलॉग) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा-2025 का परिणाम जारी कर दिया है। विज्ञापन संख्या-05/2026 के तहत आयोजित इस परीक्षा का रिजल्ट आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है। प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित अभ्यर्थी अब मुख्य (लिखित) परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मुख्य परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 7 जुलाई 2026 से शुरू हो गई है।   मुख्य परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य JPSC के अनुसार, मुख्य परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने के साथ सभी आवश्यक प्रमाण-पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में अपलोड करने होंगे। इसके अलावा, आवेदन प्रक्रिया के तहत संबंधित दस्तावेजों की हार्ड कॉपी भी आयोग को निर्धारित समय के भीतर भेजनी होगी। आवेदन और दस्तावेज जमा करने से जुड़ी विस्तृत जानकारी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है।   आयोग ने जारी की महत्वपूर्ण सलाह आयोग ने सफल अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। ऑनलाइन आवेदन के दौरान सभी जानकारियां सावधानीपूर्वक भरें और आवश्यक दस्तावेज सही प्रारूप में अपलोड करें, ताकि किसी तकनीकी या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।   वेबसाइट पर नजर बनाए रखने की अपील JPSC ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि परिणाम या किसी सूचना में टंकण त्रुटि अथवा अन्य किसी प्रकार की गलती सामने आती है, तो उसमें संशोधन करने का अधिकार आयोग के पास सुरक्षित रहेगा। ऐसे में अभ्यर्थियों को केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करने और नियमित रूप से वेबसाइट का अवलोकन करते रहने की सलाह दी गई है।   आयोग ने कहा कि मुख्य परीक्षा, आवेदन प्रक्रिया और आगे की सभी महत्वपूर्ण जानकारियां समय-समय पर आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएंगी। इसलिए सभी अभ्यर्थी अपडेट के लिए नियमित रूप से वेबसाइट देखते रहें और निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी करें।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Indian Air Force Agniveer Vayu recruitment 2027 notification with online application details for eligible candidates.
Agniveer Vayu Recruitment 2027: अग्निवीर वायु भर्ती के लिए आवेदन शुरू, 26 जुलाई तक करें अप्लाई

भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) में शामिल होने का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। अग्निवीर वायु इनटेक 02/2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार 6 जुलाई 2026 से 26 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवार भारतीय वायु सेना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। क्या होता है Agniveer Vayu Intake? भारतीय वायु सेना में अग्निवीर वायु की भर्ती अलग-अलग बैचों में की जाती है। इन्हीं भर्ती सत्रों को Intake कहा जाता है। यानी Intake 02/2027 वर्ष 2027 के लिए आयोजित होने वाला भर्ती बैच है। महत्वपूर्ण तिथियां कार्यक्रम तिथि     आवेदन शुरू 6 जुलाई 2026 आवेदन की अंतिम तिथि 26 जुलाई 2026 शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 26 जुलाई 2026 ऑनलाइन परीक्षा 22–23 सितंबर 2026 एग्जाम सिटी स्लिप परीक्षा से पहले एडमिट कार्ड परीक्षा से 24–48 घंटे पहले कौन कर सकता है आवेदन? साइंस स्ट्रीम के उम्मीदवारों के लिए: 10+2 में गणित, भौतिकी और अंग्रेजी विषय होना अनिवार्य। कुल कम से कम 50% अंक तथा अंग्रेजी में 50% अंक जरूरी। संबंधित ट्रेड में 3 वर्षीय इंजीनियरिंग डिप्लोमा या 2 वर्षीय वोकेशनल कोर्स करने वाले उम्मीदवार भी पात्र हैं। अन्य स्ट्रीम के उम्मीदवारों के लिए: 10+2 में न्यूनतम 50% कुल अंक और अंग्रेजी में 50% अंक आवश्यक। दो वर्षीय वोकेशनल कोर्स करने वाले अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 17.5 वर्ष अधिकतम आयु: 22 वर्ष उम्मीदवार का जन्म 1 जुलाई 2005 से 1 जनवरी 2010 के बीच होना चाहिए। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। कैसे करें ऑनलाइन आवेदन? आवेदन के लिए इन आसान चरणों का पालन करें: भारतीय वायु सेना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। Agniveer Vayu Intake 02/2027 भर्ती लिंक पर क्लिक करें। नया उम्मीदवार होने पर पहले रजिस्ट्रेशन करें। लॉगिन कर आवेदन फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरें। फोटो, हस्ताक्षर और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। ऑनलाइन आवेदन शुल्क का भुगतान करें। सभी जानकारी जांचने के बाद फॉर्म सबमिट करें। भविष्य के लिए आवेदन फॉर्म का प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। आवेदन शुल्क सभी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 550 रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त लागू GST भी देना होगा। शुल्क का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, IMPS, मोबाइल वॉलेट या अन्य ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
JPSC Preliminary Exam Result
JPSC पीटी परीक्षा परिणाम पर सियासत तेज, आजसू ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के परिणाम को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। आजसू पार्टी ने परीक्षा परिणाम की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए सरकार और आयोग से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि जारी किए गए परिणाम में आयोग के किसी अधिकारी या सदस्य के हस्ताक्षर नहीं हैं, जिससे पूरे चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।   लंबोदर महतो ने उठाए गंभीर सवाल पूर्व विधायक और आजसू नेता लंबोदर महतो ने रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि जेपीएससी पहले भी कई बार विवादों में रहा है। ऐसे में इस बार बिना किसी सक्षम अधिकारी या आयोग के सदस्य के हस्ताक्षर के परीक्षा परिणाम जारी होना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया अभ्यर्थियों के बीच भ्रम और अविश्वास पैदा करती है।   सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब लंबोदर महतो ने कहा कि सरकार और जेपीएससी को जल्द से जल्द यह स्पष्ट करना चाहिए कि बिना हस्ताक्षर के परिणाम कैसे जारी किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की कार्यप्रणाली में लगातार कमियां सामने आ रही हैं, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।   आंदोलन की चेतावनी आजसू पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और आयोग जल्द इस मामले पर संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, तो छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि इस मुद्दे पर पूरे राज्य के अभ्यर्थियों को साथ लेकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।   आजसू ने सरकार से मांग की है कि परीक्षा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और अभ्यर्थियों की सभी शंकाओं का समयबद्ध समाधान किया जाए। पार्टी का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
Jharkhand High Court
झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जेल विभाग की 81% रिक्तियां 6 महीने में भरने के निर्देश

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के जेल विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने राज्य सरकार, झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को निर्देश दिया है कि जेल विभाग में लगभग 81% रिक्त पदों को छह महीने के भीतर भरने की प्रक्रिया पूरी की जाए। अदालत ने इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट भी तलब की है।   कोर्ट ने क्यों जताई चिंता?   सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि झारखंड के जेल विभाग में स्वीकृत पदों का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा खाली है। इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां होने से जेलों के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों के प्रबंधन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस स्थिति को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने तत्काल भर्ती प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया है।   सरकार और आयोगों को क्या निर्देश दिए गए?   हाईकोर्ट ने कहा कि: सभी रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया छह महीने के भीतर पूरी की जाए। भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। राज्य सरकार और संबंधित भर्ती एजेंसियां समय-समय पर अनुपालन रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।   जेल प्रशासन पर पड़ेगा सकारात्मक असर   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर भर्ती पूरी होती है तो जेलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, कर्मचारियों पर कार्यभार कम होगा और कैदियों के पुनर्वास व प्रबंधन में भी सुधार आएगा।   भर्ती की तैयारी पर रहेगी नजर   अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और भर्ती एजेंसियों पर हैं कि वे अदालत के आदेश का पालन करते हुए तय समय सीमा में भर्ती प्रक्रिया पूरी कर पाती हैं या नहीं। यदि आदेश का पालन नहीं होता है, तो मामले की अगली सुनवाई में अदालत आगे के निर्देश जारी कर सकती है।

abhishek singh जून 27, 2026 0
JPSC
जेपीएससी ने जारी की फाइनल आंसर-की, 6 सवाल रद्द; 125 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए क्वालिफाई

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने झारखंड सिविल सेवा (बैकलॉग) प्रारंभिक परीक्षा-2023 की संशोधित आंसर-की जारी कर दी है। अभ्यर्थियों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों और विषय विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद आयोग ने अंतिम आंसर-की अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। संशोधित आंसर-की में कुल छह प्रश्नों को ड्रॉप किया गया है।   आयोग के अनुसार, 10 मई 2026 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा की प्रोविजनल आंसर-की पर अभ्यर्थियों से 2 जून से 5 जून तक आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। निर्धारित अवधि में प्राप्त आपत्तियों की विषय विशेषज्ञों से जांच कराई गई। विशेषज्ञों की अनुशंसा के आधार पर उत्तरों में आवश्यक संशोधन करते हुए अंतिम आंसर-की प्रकाशित की गई है।   जुलाई में होगी मुख्य परीक्षा जेपीएससी ने बताया कि झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (बैकलॉग) मुख्य लिखित परीक्षा 25, 26 और 27 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी। प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। यह भर्ती प्रक्रिया वाणिज्य कर विभाग में स्टेट टैक्स ऑफिसर के सात बैकलॉग पदों को भरने के लिए संचालित की जा रही है।   पीटी परीक्षा का परिणाम भी घोषित आयोग ने प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम भी जारी कर दिया है। घोषित परिणाम के अनुसार कुल 125 अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की है और वे मुख्य परीक्षा में शामिल होने के पात्र होंगे। मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जा रही है। सफल अभ्यर्थी 27 जून से 2 जुलाई 2026 की शाम 5 बजे तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे। आयोग ने उम्मीदवारों को समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने और मुख्य परीक्षा की तैयारी शुरू करने की सलाह दी है।   वेबसाइट पर उपलब्ध है पूरी जानकारी जेपीएससी ने अभ्यर्थियों से कहा है कि वे संशोधित आंसर-की, परिणाम और मुख्य परीक्षा से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं। आयोग का मानना है कि आपत्तियों की निष्पक्ष समीक्षा और विशेषज्ञों की राय के आधार पर अंतिम आंसर-की जारी करने से परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।

abhishek singh जून 25, 2026 0
JPSC Civil Judge Result
JPSC ने जारी किया सिविल जज प्रारंभिक परीक्षा का संशोधित रिजल्ट

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने झारखंड न्यायिक सेवा के अंतर्गत सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा का संशोधित  रिजल्ट जारी कर दिया है। आयोग की ओर से जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक यह संशोधित रिजल्ट विज्ञापन संख्या-22/2023 के लिए सुर्प्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में तैयार किया गया है। JPSC की वेबसाइट पर देखें रिजल्ट आयोग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी 2026 को एक न्यायिक आदेश पारित किया था। इस आदेश के अनुपालन में आयोग ने पहले एक संशोधित उत्तर कुंजी तैयार की। इसी संशोधित आंसर की को आधार बनाते हुए 10 मार्च 2024 को आयोजित की गई सिविल जज प्रारंभिक परीक्षा का नया और संशोधित परिणाम जारी किया गया है। परीक्षार्थी अपना रिजल्ट JPSC की आधिकारिक वेबसाइट www.jpsc.gov.in  पर जाकर देख सकते हैं।

Unknown जून 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0