jharkhand railway news

Passengers waiting at a busy railway station during the Independence Day travel rush
यात्रियों की भीड़ और लंबी वेटिंग लिस्ट से मिलेगी राहत, इन 10 ट्रेनों में जुड़ेंगे अतिरिक्त कोच

चक्रधरपुर: स्वतंत्रता दिवस और उसके आसपास यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए दक्षिण-पूर्व रेलवे ने ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाने का फैसला किया है। लंबी वेटिंग लिस्ट और कंफर्म टिकट को लेकर यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए 15 से 21 अगस्त के बीच 10 प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े जायेंगे। रेलवे के इस फैसले से यात्रियों को अधिक सीटें उपलब्ध होंगी और कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। रेलवे के अनुसार, यात्रियों की मांग और ट्रेनों में बढ़ते दबाव को देखते हुए अलग-अलग तिथियों में अतिरिक्त कोच लगाए जायेंगे। इनमें स्लीपर, एसी स्लीपर और चेयर कार श्रेणी के कोच शामिल हैं। इन ट्रेनों में लगेंगे अतिरिक्त कोच 12837 हावड़ा-पुरी एक्सप्रेस: 15 से 21 अगस्त तक अतिरिक्त 3-टीयर स्लीपर कोच लगाया जायेगा। 12883 रूपसी बंगला एक्सप्रेस: 16 अगस्त को अतिरिक्त चेयर कार कोच की सुविधा मिलेगी। 12884 पुरुलिया-हावड़ा रूपसी बंगला एक्सप्रेस: 16 अगस्त को अतिरिक्त चेयर कार कोच लगाया जायेगा। 18030 शालीमार-मुंबई एक्सप्रेस: 15 से 21 अगस्त तक अतिरिक्त एसी और नॉन-एसी स्लीपर कोच जोड़े जायेंगे। 18039 शालीमार-पुरी एक्सप्रेस: 16 अगस्त को अतिरिक्त नॉन-एसी स्लीपर कोच लगाया जायेगा। 18045 शालीमार-चारलपल्ली एक्सप्रेस: 15 से 21 अगस्त तक अतिरिक्त स्लीपर कोच की सुविधा दी जायेगी। 18063 येलाहांका एसी एक्सप्रेस: 20 अगस्त को अतिरिक्त एसी स्लीपर कोच लगाया जायेगा। 18107 राउरकेला-जगदलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस: 15 और 16 अगस्त को अतिरिक्त एसी स्लीपर कोच जोड़ा जायेगा। 18603 रांची-गोड्डा एक्सप्रेस: 15, 18 और 20 अगस्त को अतिरिक्त नॉन-एसी स्लीपर कोच लगाया जायेगा। 18641 हटिया-दुर्ग एक्सप्रेस: 18 अगस्त को अतिरिक्त 3-टीयर स्लीपर कोच की सुविधा मिलेगी। वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा राहत स्वतंत्रता दिवस के दौरान ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। छुट्टियों और त्योहारों के कारण कई ट्रेनों में पहले से ही लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है। ऐसे में अतिरिक्त कोच लगने से ट्रेनों की क्षमता बढ़ेगी और अधिक यात्रियों को कंफर्म टिकट मिल सकेगा। रेलवे के इस फैसले से खासकर झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच सफर करने वाले यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। यात्रियों को सलाह दी गयी है कि यात्रा से पहले अपने टिकट और ट्रेन की स्थिति की जानकारी रेलवे के आधिकारिक माध्यम से जरूर जांच लें, क्योंकि अतिरिक्त कोच की तारीख और उपलब्धता ट्रेन के अनुसार अलग-अलग है।  

kalpana अगस्त 14, 2026 0
piska railway station
आनंद विहार की तर्ज पर लिकसित होगा पिस्का स्टेशन, 3 और लाइनें बनेंगी

रांची। रांची का पिस्का रेलवे स्टेशन नई दिल्ली के आनंद बिहार रेलवे स्टेशन की तरह होगा। रेलवे की महत्वाकांक्षी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इस स्टेशन का तेजी से आधुनिकीकरण और विस्तार किया जा रहा है। रक्षा राज्यमंत्री सह रांची सांसद संजय सेठ के मुताबिक पिस्का स्टेशन आनेवाले समय में रांची रेलमंडल में रांची व हटिया के बाद तीसरा सबसे बड़ा स्टेशन होगा। यहां पैसेंजर का आना-जाना पांच गुना बढ़ेगा। अभी प्रतिदिन करीब 1400 पैसेंजर का आनाजाना है, जो बढ़कर लगभग सात हजार हो जाएगा। नई लाइनों को मिली मंजूरी रांची रेल मंडल के डीआरएम ने कहा कि इस स्टेशन में तीन लाइनें और बनेंगी। इसकी स्वीकृति मिल गई है। तीन लाइन बनने से ट्रेनों की होल्डिंग बढ़ेगी। सर्कुलेटिंग एरिया भी बढ़ाया जाएगा। इससे दिल्ली, दक्षिण भारत और ओडिशा की ओर यात्रा आसान होगी। स्टेशन के विस्तार के लिए जमीन अधिग्रहण का काम जारी है। पिस्का से लोधमा तक लगभग 17 किलोमीटर लंबी नई रेलवे लाइन का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। इस परियोजना को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है। पिस्का-लोधमा रेल लाइन से कनेक्टिविटी में बदलाव तेजी से निर्माणाधीन पिस्का से लोधमा तक नई रेलवे लाइन रांची क्षेत्र की रेल व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाली परियोजना है। इसके पूरा होने के बाद ओड़िशा की ओर से आने वाली ट्रेनें बिना रांची जंक्शन और हटिया रेलवे स्टेशन पहुंचे सीधे दिल्ली और दक्षिण भारत की ओर जा सकेंगी। इससे रांची जंक्शन पर ट्रेनों का दबाव कम होगा। राउरकेला से आने वाली मालगाड़ियों भी इस नए रूट से बिना रुकावट संचालित हो सकेंगी। अभी जिन ट्रेनों को रांची होकर टोरी की ओर जाना पड़ता है और इंजन बदलना पड़ता है, वे अब बिना इंजन बदले सीधे इस लाइन से गुजर सकेंगी, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी। यहां राजधानी एक्सप्रेस, सासाराम, चोपन और साप्ताहिक अजमेर जैसी प्रमुख ट्रेनों के ठहराव पर विचार हो रहा है।   प्रमुख रेलवे हब के रूप में उभरेगा यह स्टेशन : डीआरएम डीआरएम करुणानिधि सिंह ने कहा कि नई लाइनों व अत्याधुनिक सुविधाओं के जुड़ने के बाद पिस्का रेलवे स्टेशन रांची के प्रमुख रेलवे हब के रूप में उभरेगा। यह स्टेशन राजधानी क्षेत्र के बड़े स्टेशनों में शुमार होगा। नई रेल लाइनें बनने का ये फायदा रांची स्टेशन पर लोड घटेगा, ट्रेनों को मिलेगा होल्डिंग स्पेस, कई ट्रेनें रुक सकेंगी। पश्चिमी रांची के लोगों को शहर के मुख्य स्टेशन तक आने की जरूरत कम पड़ेगी। आसपास के क्षेत्रों में व्यापार, जमीन और शहरी विकास को भी गति मिलेगी। राजधानी समेत कई एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनों का यहां ठहराव होगा। उद्घाटन जून में संभव अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत बन रहे स्टेशनों में सबसे ज्यादा 21 करोड़ रुपए पिस्का स्टेशन पर खर्च किया गया है। स्टेशन परिसर में आधुनिक यात्री सुविधाएं, बेहतर पार्किंग व्यवस्था, नया फुटओवर ब्रिज, आधुनिक प्रतीक्षालय जैसी सुविधाएं विकसित की जा चुकी हैं। इसका उद्घाटन जून में होने की संभावना है। इन क्षेत्र के लोगों को होगा लाभ पिस्का मोड़, अरगोड़ा, कटहल मोड़, रातू, ब्रांबे, मांडर, इटकी, नगड़ी, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा। इसके अलावा रांची जंक्शन और हटिया रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का दबाव कम होने से पूरे रांची शहर को अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

Unknown मई 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Government and opposition clash in Parliament over Amit Shah's response to police action during Delhi student protests.
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संसद में फिर आमने-सामने सरकार और विपक्ष, अमित शाह के जवाब को लेकर सियासी घमासान; NDA की 'मंगल मिलन' रणनीति से राहुल गांधी पर निशाना

surbhi अगस्त 11, 2026 0