रांची। झारखंड में साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से 10 मई तक आंधी-बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य में 13 मई तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। कई जिलों में गरज के साथ बारिश, तेज हवा और वज्रपात की संभावना जताई गई है। आठ मई को उत्तर और पश्चिमी हिस्सों को छोड़कर अधिकांश इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चल सकती है। इसे देखते हुए विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। साथ ही किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। 9 और 10 मई को ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार नौ और 10 मई को रांची, धनबाद, बोकारो, रामगढ़, खूंटी, लोहरदगा और गुमला समेत कई जिलों में मौसम ज्यादा खराब रह सकता है। इन इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवा चलने, बारिश होने और वज्रपात की आशंका है। इस स्थिति को देखते हुए विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। राज्य के बाकी हिस्सों में भी खराब मौसम को लेकर येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा।
रांची। झारखंड में इन दिनों मौसम ने अचानक करवट ले ली है। लगातार हो रही बारिश के कारण राज्य के अधिकांश जिलों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। India Meteorological Department (मौसम विभाग) ने 6 से 10 मई तक राज्य में बादल छाए रहने, हल्की से मध्यम बारिश और वज्रपात (बिजली गिरने) की संभावना जताई है। इसके मद्देनजर येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। तापमान में आई गिरावट, लोगों को राहत बारिश के चलते गर्मी से काफी राहत मिली है। Ranchi में पिछले 24 घंटों के दौरान अधिकतम तापमान करीब 5 डिग्री गिरकर 29.4 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। वहीं Medininagar में तापमान में 5.6 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई और अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस रहा। अन्य जिलों में भी तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया है। 6 से 10 मई तक कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के अनुसार इस अवधि में राज्य के कई हिस्सों में आंशिक से घने बादल छाए रहेंगे। कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश हो सकती है, जबकि वज्रपात की भी आशंका है। हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है। दिन के तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन मौसम पूरी तरह साफ होने में समय लगेगा। तेनुघाट में सबसे ज्यादा बारिश पिछले 24 घंटों में तेनुघाट में सबसे अधिक 82.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा कांके में 50.2 मिमी और पश्चिमी सिंहभूम में लगभग 8 मिमी वर्षा हुई है। अन्य जिलों का तापमान जमशेदपुर में 34.2 डिग्री, बोकारो में 32.5 डिग्री, चाईबासा में 32.4 डिग्री, कोडरमा में 31.4 डिग्री और गुमला में 30.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। वहीं लातेहार और लोहरदगा में तापमान 28 डिग्री के आसपास रहा।
भीषण गर्मी से जूझ रहे झारखंड में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। राजधानी रांची सहित कई इलाकों में तेज आंधी, बारिश और वज्रपात ने लोगों को गर्मी से राहत दी, लेकिन इसके साथ ही जनजीवन भी प्रभावित हुआ। गुरुवार दोपहर बाद करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं ने कई जगहों पर पेड़ उखाड़ दिए, जिससे यातायात और बिजली व्यवस्था बाधित हो गई। बारिश के दौरान रांची में लगभग 4 मिमी वर्षा दर्ज की गई। मौसम के इस बदलाव का असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ा। वहीं, वज्रपात की चपेट में आने से बरियातु क्षेत्र के एक युवक की मौत हो गई, जिससे इलाके में शोक का माहौल है। तापमान में भारी गिरावट, लोगों को मिली राहत अचानक बदले मौसम के कारण तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। अधिकतम तापमान में 7.9 डिग्री सेल्सियस की कमी आई, जबकि न्यूनतम तापमान में 6.6 डिग्री की गिरावट देखी गई। रांची का अधिकतम तापमान 30.7 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिससे लोगों को तपती गर्मी से राहत मिली। 17 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, तेज हवाओं और वज्रपात की चेतावनी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार के लिए झारखंड के 17 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि अन्य जिलों में येलो अलर्ट लागू है। विभाग के अनुसार, राज्य के पूर्वी और मध्य हिस्सों में कहीं-कहीं 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, साथ ही गरज के साथ वज्रपात की भी आशंका जताई गई है। अन्य क्षेत्रों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। आने वाले दिनों में भी राहत के संकेत मौसम विभाग के अनुसार, 1 से 4 मई के बीच राज्य में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। इस दौरान कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं। इससे आने वाले दिनों में भी लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
झारखंड में भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ली है। राजधानी Ranchi समेत कई जिलों में हुई बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने लोगों को गर्मी से राहत जरूर दी है, लेकिन इसके साथ ही कई जगहों पर जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने आज के लिए राज्य के कई हिस्सों में आंधी, बारिश और वज्रपात की आशंका जताते हुए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। बारिश से तापमान में गिरावट, मिली राहत राज्य के अलग-अलग जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। खूंटी: 34.5 मिमी बोकारो: 32.4 मिमी रांची: 2.0 मिमी कांके: 12.2 मिमी इस बारिश से तापमान में गिरावट आई है और लोगों को तपती गर्मी से राहत मिली है। बदले मौसम ने बढ़ाई मुश्किलें जहां एक ओर बारिश ने राहत दी, वहीं तेज आंधी और ओलावृष्टि ने कई इलाकों में नुकसान भी पहुंचाया। बेड़ो क्षेत्र में फसलों को आंशिक नुकसान सड़क पर पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित ओरमांझी के कुकुई गांव में पेड़ की डाल गिरने से दो छात्राएं घायल यह घटनाएं बताती हैं कि अचानक मौसम परिवर्तन के साथ सावधानी बरतना जरूरी है। बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा असर तेज आंधी और बारिश के दौरान कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। नामकुम-सिकिदरी हाई वोल्टेज लाइन ट्रिप हटिया-कांके अंडरग्राउंड केबल पंक्चर इससे कई क्षेत्रों में अस्थायी बिजली कटौती देखने को मिली। इन जिलों में तेज आंधी और वज्रपात का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, चतरा, हजारीबाग, कोडरमा, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, देवघर, जामताड़ा, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, रामगढ़ और रांची में 50–60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी 40–50 किमी/घंटा की रफ्तार से आंधी और गरज के साथ बारिश हो सकती है।
रांची। झारखंड में मौसम ने अचानक करवट ली है, जिससे राज्य के लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। मौसम केंद्र, रांची के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 28 अप्रैल को राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है। सुबह से ही राजधानी रांची में इसका असर देखने को मिला, जहां बादल छाने के साथ तेज हवाएं चलीं और कई इलाकों में मध्यम बारिश दर्ज की गई। इन जिलों में रहेगा मौसम का असर मध्य झारखंड के रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, कोडरमा और धनबाद में मौसम बदला हुआ रहेगा। वहीं दक्षिणी जिलों जैसे पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा और सरायकेला-खरसावां में भी बारिश के आसार हैं। उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार तथा उत्तर-पूर्वी जिलों देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज में भी बादल छाए रहने और बारिश की संभावना जताई गई है। येलो अलर्ट जारी, तेज हवा और वज्रपात का खतरा मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी करते हुए चेतावनी दी है कि कुछ क्षेत्रों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जबकि अन्य स्थानों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की गति रहने की संभावना है। इसके साथ ही वज्रपात का खतरा भी बना हुआ है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अगले पांच दिनों तक राहत के संकेत 29 अप्रैल से 3 मई तक राज्य में आंशिक बादल छाए रहेंगे और कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है। इस मौसम परिवर्तन का असर तापमान पर भी पड़ेगा और अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। इससे लोगों को गर्मी से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
रांची। झारखंड में लंबे समय से जारी भीषण गर्मी और लू से अब लोगों को राहत मिलने वाली है। राज्य में कई दिनों से तेज धूप और बढ़ते तापमान ने जनजीवन को प्रभावित किया था, लेकिन अब मौसम का मिजाज बदलने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 25 अप्रैल से राज्य में बादलों की आवाजाही शुरू हो जाएगी और धीरे-धीरे मौसम ठंडा होने लगेगा। पारा 43 डिग्री के पार, कई जिलों में रिकॉर्ड गर्मी पिछले 24 घंटों में पलामू में अधिकतम तापमान 43.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो राज्य में सबसे अधिक रहा। वहीं बोकारो में 43.5 डिग्री और जमशेदपुर में 41 डिग्री से ऊपर तापमान पहुंच गया। राजधानी रांची में भी पारा करीब 40 डिग्री सेल्सियस रहा, जिससे लोगों को दिनभर गर्म हवाओं और उमस का सामना करना पड़ा। 5 दिनों तक मौसम रहेगा अस्थिर मौसम विभाग ने 25 से 30 अप्रैल तक झारखंड के कई हिस्सों में बारिश, आंधी और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है। 26 से 28 अप्रैल के बीच संताल परगना, मध्य और दक्षिणी झारखंड में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है, जिसके लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान हवा की रफ्तार तेज रहने की संभावना है और कई जगहों पर आंधी भी चल सकती है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह 29 और 30 अप्रैल को राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को खुले में न रहने, पेड़ों के नीचे शरण न लेने और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है। हालांकि इस बदलाव से तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन आंधी-तूफान और वज्रपात को देखते हुए सतर्क रहना बेहद जरूरी होगा।
रांची। झारखंड में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण पूरे राज्य में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार झारखंड के कई जिलों में तेज आंधी, बारिश, वज्रपात और ओलावृष्टि की संभावना है। इन जिलों में तेज असर की चेतावनी राज्य के रांची, धनबाद, दुमका, देवघर, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज, कोडरमा, बोकारो, चतरा, रामगढ़ और हजारीबाग में 60–70 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवा, गरज-चमक और वज्रपात की संभावना जताई गई है। इन जिलों में भी अलर्ट इसके अलावा खूंटी, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, पलामू, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला और सिमडेगा में 50–60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवा और वज्रपात हो सकता है। तापमान में बदलाव मौसम विभाग के मुताबिक अगले तीन दिनों में तापमान 3–4 डिग्री तक गिर सकता है। इसके बाद धीरे-धीरे तापमान में बढ़ोतरी होगी। किसानों को सतर्क रहने की सलाह ओलावृष्टि और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए किसानों को खेतों में न जाने की सलाह दी गई है, क्योंकि इससे फसलों को नुकसान हो सकता है। 22 मार्च से मिलेगी राहत लगातार खराब मौसम के बीच राहत की खबर यह है कि 22 मार्च से मौसम साफ होने की संभावना है और इसके बाद तापमान सामान्य होने लगेगा। पिछले 24 घंटे का हाल नावाडीह में सबसे ज्यादा 43 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि डाल्टनगंज में अधिकतम तापमान 37.8°C और लातेहार में न्यूनतम तापमान 17.6°C रहा। तेज बारिश और वज्रपात के खतरे को देखते हुए लोगों से घर में सुरक्षित रहने और सावधानी बरतने की अपील की गई है।
बांग्लादेश के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर अब झारखंड के मौसम पर साफ दिखाई देने लगा है। मंगलवार को राजधानी रांची सहित राज्य के कई जिलों में अचानक मौसम बदल गया। दोपहर बाद आसमान में घने बादल छा गए और शाम होते-होते कई इलाकों में झमाझम बारिश हुई। करीब दो घंटे तक चली बारिश के दौरान रांची में लगभग 9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इस दौरान कांके और रातू इलाके में तेज हवाएं चलीं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई। बारिश और ठंडी हवाओं के कारण मौसम सुहावना हो गया, जिससे लोगों को अचानक बढ़ी गर्मी से राहत मिली। तापमान में आई गिरावट बारिश का असर तापमान पर भी पड़ा। रांची का अधिकतम तापमान करीब 2.8 डिग्री सेल्सियस घटकर 30.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि यह गिरावट ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगी। अगले तीन दिनों में अधिकतम तापमान में लगभग 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में तापमान फिर से 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। 15 जिलों में यलो अलर्ट जारी मौसम विभाग ने बुधवार को रांची समेत राज्य के 15 जिलों में मेघ गर्जन, तेज हवाओं और वज्रपात की संभावना जताई है। इसे देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया गया है। जिन जिलों में चेतावनी जारी की गई है, उनमें खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, जामताड़ा, गिरिडीह, देवघर, दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज शामिल हैं। इन इलाकों में तेज हवा के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों तथा पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है। घने कोहरे से हवाई सेवाएं प्रभावित मंगलवार सुबह से दोपहर तक रांची में घना कोहरा भी छाया रहा। कोहरे की वजह से हवाई सेवाओं पर असर पड़ा और एक विमान को रांची की जगह कोलकाता डायवर्ट करना पड़ा। इस कारण यात्रियों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। 13–14 मार्च को मौसम रहेगा साफ मौसम विभाग के अनुसार 13 और 14 मार्च को आसमान साफ रहने और मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है। इस दौरान तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे उमस बढ़ने की आशंका है। वहीं 15 मार्च से मौसम फिर करवट ले सकता है। 15 और 16 मार्च को सुबह के समय कोहरा और दिन में बादल छाए रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में मेघ गर्जन के साथ हल्की बारिश भी हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।