Jharkhand Tourism

Tribal communities participating in livelihood and forest conservation initiatives at Palamu Tiger Reserve
पीटीआर की नई पहल से वन्यजीव संरक्षण के साथ बदल रही आदिवासियों की जिंदगी, हुनर से रोजगार तक का खुल रहा रास्ता

पलामू/बेतला: झारखंड का एकमात्र पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) इन दिनों वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय आदिवासी और आदिम जनजाति समुदायों के जीवन में बदलाव लाने की दिशा में भी काम कर रहा है. पीटीआर प्रबंधन का मानना है कि जंगल और वन्यजीवों का स्थायी संरक्षण तभी संभव है, जब स्थानीय समुदायों को भी संरक्षण की प्रक्रिया से जोड़ा जाए और उनके लिए रोजगार के बेहतर अवसर पैदा किये जाएं. इसी उद्देश्य से पीटीआर में ‘जनभागीदारी से वन संरक्षण’ अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत ग्रामीणों के पारंपरिक हुनर, आजीविका और स्थानीय संसाधनों को बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. इससे एक ओर जंगलों पर दबाव कम करने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. आदिवासियों के पारंपरिक हुनर को बाजार से जोड़ने की तैयारी पीटीआर प्रबंधन जंगल क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी परिवारों की जीवनशैली और आजीविका को लेकर विस्तृत सर्वे कर रहा है. इसमें उनके पारंपरिक हुनर, आर्थिक गतिविधियों और स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल की जानकारी जुटायी जा रही है. बांस शिल्प, औषधीय ज्ञान और अन्य पारंपरिक कौशल को आधुनिक बाजार से जोड़कर ग्रामीणों को सीधे आर्थिक लाभ पहुंचाने की योजना पर काम किया जा रहा है. प्रबंधन का मानना है कि स्थानीय हुनर को रोजगार से जोड़ने से ग्रामीणों की आय बढ़ेगी और जंगल पर उनकी निर्भरता भी धीरे-धीरे कम होगी. जाली मॉडल से महुआ संग्रह में आया बदलाव पीटीआर क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों की आय का प्रमुख साधन महुआ संग्रह भी है. पहले महुआ चुनने के लिए कई जगहों पर पेड़ों के नीचे आग लगा दी जाती थी. इससे जंगल और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता था. पीटीआर प्रबंधन ने इसके विकल्प के तौर पर जाली मॉडल को बढ़ावा दिया है. इसमें महुआ के पेड़ों के नीचे जाल बिछाया जाता है, जिससे महुआ जमीन पर गिरने के बाद आसानी से और साफ तरीके से एकत्र किया जा सके. इससे आग लगाने की जरूरत कम हुई है और ग्रामीणों को बेहतर गुणवत्ता का महुआ मिलने से अच्छे दाम मिलने की संभावना भी बढ़ी है. ‘बाघ दीदी’ और ‘वनजीवी दीदी’ से महिलाओं को रोजगार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पीटीआर में ‘बाघ दीदी’ और ‘वनजीवी दीदी’ जैसी पहल शुरू की गयी है. इसके तहत गांवों की शिक्षित महिलाओं को कम्युनिटी एंबेसडर के रूप में जोड़ा गया है. ये महिलाएं ग्रामीणों को वन और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ पर्यावरण पर्यटन से भी जुड़ रही हैं. इससे महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और गांवों में संरक्षण को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है. ‘बाघ देवता’ के जरिए आस्था और संरक्षण को जोड़ा पीटीआर ने आदिवासी समाज की पारंपरिक मान्यताओं को भी वन संरक्षण से जोड़ने की पहल की है. आदिवासी समुदायों की लोककथाओं और धार्मिक आस्था में बाघ को रक्षक के रूप में देखा जाता है. इसी भावनात्मक जुड़ाव को संरक्षण का माध्यम बनाया जा रहा है. गांवों के सरना स्थलों और पवित्र उपवनों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है. इससे वन विभाग और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय बनाने में मदद मिल रही है. जंगल कैंप से स्थानीय युवाओं को रोजगार पीटीआर की ओर से आयोजित ‘जंगल कैंप’ भी स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का नया माध्यम बन रहा है. इन कैंपों में पर्यटकों को आदिवासी जीवनशैली, संस्कृति और पारंपरिक खान-पान से परिचित कराया जाता है. इससे स्थानीय युवाओं को टूरिस्ट गाइड, ट्रैकिंग एक्सपर्ट और होम-स्टे संचालन जैसे कामों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है. पर्यटन को स्थानीय रोजगार से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है. कोर एरिया से स्वैच्छिक विस्थापन में पुनर्वास पर जोर पीटीआर के कोर एरिया में रहने वाले ग्रामीण परिवारों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वैच्छिक विस्थापन और पुनर्वास की प्रक्रिया भी चल रही है. नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की गाइडलाइंस के तहत हाल ही में कोर जोन स्थित जैगीर गांव का विस्थापन पूरा किया गया. विस्थापित परिवारों को पोलपोल के पास करीब 75 एकड़ जमीन पर सड़क, बिजली और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ बसाने की प्रक्रिया की गयी है. प्रति परिवार 15 लाख रुपये तक के मुआवजे या भूमि विकल्प का प्रावधान बताया गया है. इससे एक तरफ कोर एरिया में मानवीय दबाव कम होगा, वहीं दूसरी तरफ विस्थापित परिवारों को बेहतर सुविधाओं के साथ जीवन जीने का अवसर मिलेगा. ‘आदिवासियों का जीवन स्तर सुधरेगा, तभी जंगल बचेगा’ पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने कहा कि बाघ और जंगल का संरक्षण केवल वन विभाग के प्रयासों से संभव नहीं है. इसके लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि जंगल क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के साथ ही उन्हें रोजगार और आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है. पीटीआर की योजनाओं का उद्देश्य आदिवासी समुदाय की परंपराओं और संस्कृति को सुरक्षित रखते हुए उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करना है.  

kalpana अगस्त 11, 2026 0
Thousands of tribal artists in traditional attire participating in the grand Tribal Jatra during Jharkhand Tribal Festival 2026 in Ranchi.
आदिवासी दिवस पर रांची में निकलेगा भव्य जतरा, 5000 कलाकार बनेंगे सांस्कृतिक विरासत के वाहक

रांची: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राजधानी रांची में 9 और 10 अगस्त को झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा. मोरहाबादी मैदान में होने वाले इस दो दिवसीय महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं. राज्य सरकार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा, लोककला और इतिहास की झलक देखने को मिलेगी. महोत्सव का उद्घाटन 9 अगस्त को दोपहर 1:30 बजे होगा. इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण भव्य 'जतरा' होगा, जिसमें देशभर से आए 5,000 से अधिक आदिवासी कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्य यंत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हिस्सा लेंगे. मांदर और नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक नृत्य और लोकगीतों के बीच राजधानी रांची आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगी नजर आएगी. जेल चौक से मोरहाबादी तक निकलेगा भव्य जतरा महोत्सव के पहले दिन निकलने वाला जतरा जेल म्यूजियम (जेल चौक) से शुरू होगा. यहां से कलाकार गेट संख्या-1 से होते हुए जेल चौक, करमटोली चौक, प्रेस क्लब, लोकायुक्त कार्यालय और गेरिसन चौक होते हुए मोरहाबादी मैदान पहुंचेंगे. गेरिसन चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जतरा में शामिल कलाकारों और प्रतिभागियों का स्वागत करेंगे. इसके बाद पूरा जतरा मोरहाबादी मैदान पहुंचेगा, जहां मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा. आयोजन स्थल पर लोगों की सुविधा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए पांच अलग-अलग प्रवेश द्वार बनाए गए हैं. पूरे रूट पर सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और चिकित्सा सुविधाओं की भी विशेष व्यवस्था की गई है. संस्कृति, खान-पान और कला का होगा संगम दो दिवसीय महोत्सव में झारखंड की आदिवासी संस्कृति को कई रूपों में प्रस्तुत किया जाएगा. यहां पारंपरिक जनजातीय व्यंजनों के स्टॉल, कला एवं शिल्प प्रदर्शनी, आदिवासी पुस्तक मेला, लोक चित्रकला गैलरी और हस्तशिल्प प्रदर्शनी लगाई जाएगी. आगंतुकों को झारखंड की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराने के लिए विभिन्न गोष्ठियों और सांस्कृतिक चर्चाओं का भी आयोजन होगा. ड्रोन शो और 5D इमर्सिव जोन होंगे खास आकर्षण इस बार महोत्सव में आधुनिक तकनीक का भी खास समावेश किया गया है. ड्रोन और लेजर शो के जरिए झारखंड आंदोलन, दिशोम गुरु शिबू सोरेन और राज्य के आंदोलनकारी शहीदों की गाथा को प्रस्तुत किया जाएगा. इसके अलावा 5D इमर्सिव जोन तैयार किया गया है, जहां आगंतुक आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिबू सोरेन के जीवन, संघर्ष और झारखंड आंदोलन के इतिहास को करीब से जान सकेंगे. फैशन शो, फिल्म फेस्टिवल और वृत्तचित्र भी होंगे शामिल महोत्सव में पहली बार ट्राइबल फैशन शो का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा और हस्तनिर्मित परिधानों का प्रदर्शन होगा. इसके साथ ही आदिवासी जीवन, संस्कृति और इतिहास पर आधारित फिल्मों और वृत्तचित्रों का प्रदर्शन भी किया जाएगा. राज्य सरकार के आदिवासी कल्याण विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय महोत्सव का समापन 10 अगस्त को होगा. आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि झारखंड की आदिवासी पहचान, विरासत और गौरव को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने का प्रयास है. बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं.  

kalpana अगस्त 7, 2026 0
Deoghar Shravani Mela 2026
देवघर श्रावणी मेले में भव्य ड्रोन शो बना आकर्षण का केंद्र

देवघर, एजेंसियां। झारखंड के विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में आयोजित श्रावणी मेला 2026 के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पहली बार भव्य ड्रोन शो का आयोजन किया जा रहा है। देवघर के शिवलोक परिसर में होने वाले इस 3D ड्रोन शो में भगवान शिव, कांवड़ यात्रा, ज्योतिर्लिंग और धार्मिक प्रतीकों की आकर्षक आकृतियां आसमान में दिखाई जाएंगी। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए मेले का प्रमुख आकर्षण बन गया है।   आस्था और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम   झारखंड पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से आयोजित इस ड्रोन शो का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव के साथ आधुनिक तकनीक का अनोखा संगम दिखाना है। सैकड़ों ड्रोन एक साथ उड़ान भरकर शिव तांडव, ओम, त्रिशूल, डमरू और बाबा बैद्यनाथ धाम की आकृतियां बनाएंगे।   श्रावणी मेले में तकनीक का व्यापक उपयोग   इस बार श्रावणी मेले में केवल ड्रोन शो ही नहीं, बल्कि AI आधारित निगरानी प्रणाली, फेस रिकग्निशन कैमरे, QR कोड शिकायत व्यवस्था और स्मार्ट भीड़ प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा दोनों बेहतर होंगी।   श्रद्धालुओं में भारी उत्साह   ड्रोन शो को देखने के लिए हर शाम बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवलोक परिसर पहुंच रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और देवघर की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देने में यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

anjali kumari जुलाई 31, 2026 0
Jharkhand Tourism
इस बार घूमिए झारखंड, प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर हैं ये 5 शानदार डेस्टिनेशन

रांची। अगर आप शहर की भागदौड़ और रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी से कुछ दिन दूर प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताना चाहते हैं, तो झारखंड आपके लिए एक बेहतरीन पर्यटन स्थल साबित हो सकता है। खनिज संपदा और औद्योगिक पहचान के लिए प्रसिद्ध यह राज्य प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, ऊंचे पहाड़ों, मनमोहक झरनों और शांत घाटियों के कारण भी देशभर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां ऐसे कई पर्यटन स्थल हैं, जहां परिवार, दोस्तों या अकेले भी यादगार छुट्टियां बिताई जा सकती हैं।   पतरातु घाटी: हरियाली और घुमावदार सड़कों का अद्भुत संगम रामगढ़ जिले की पतरातु घाटी झारखंड के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में गिनी जाती है। यहां की घुमावदार सड़कें, चारों ओर फैली हरियाली और पतरातु डैम का मनमोहक दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। लॉन्ग ड्राइव, फोटोग्राफी और सनसेट देखने के शौकीनों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं है।   हुंडरू और जोन्हा फॉल्स: झरनों की मधुर आवाज में मिलेगा सुकून रांची को 'झरनों का शहर' कहा जाता है। यहां स्थित हुंडरू फॉल्स और जोन्हा फॉल्स राज्य के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल हैं। खासकर मानसून के दौरान इन झरनों की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। ऊंचाई से गिरता पानी, आसपास की हरियाली और शांत वातावरण पर्यटकों को प्रकृति के बेहद करीब ले जाता है।   बेतला नेशनल पार्क: वन्यजीव प्रेमियों के लिए खास आकर्षण लातेहार-पलामू क्षेत्र में स्थित बेतला नेशनल पार्क एडवेंचर और वाइल्डलाइफ पसंद करने वालों के लिए बेहतरीन जगह है। यहां जंगल सफारी के दौरान हाथी, हिरण, बाइसन, बंदर और कई दुर्लभ पक्षियों को करीब से देखा जा सकता है। प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीवों का रोमांच इस जगह को खास बनाता है।   नेतरहाट: झारखंड का 'क्वीन ऑफ छोटानागपुर' लातेहार जिले का नेतरहाट झारखंड का सबसे प्रसिद्ध हिल स्टेशन माना जाता है। ठंडी हवाएं, चीड़ के पेड़ों से घिरी सड़कें, सूर्योदय और सूर्यास्त के मनोहारी दृश्य यहां आने वाले हर पर्यटक का दिल जीत लेते हैं। परिवार के साथ शांत और यादगार छुट्टियां बिताने के लिए यह एक आदर्श स्थान है।   पारसनाथ पहाड़: आस्था और रोमांच का अनूठा संगम गिरिडीह जिले में स्थित पारसनाथ पहाड़ झारखंड की सबसे ऊंची चोटी होने के साथ जैन धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल भी है। घने जंगलों और पहाड़ी रास्तों से होकर यहां पहुंचना अपने आप में रोमांचक अनुभव है। ट्रैकिंग के शौकीनों के साथ-साथ धार्मिक यात्रियों के लिए भी यह स्थान बेहद खास माना जाता है।   झारखंड के ये सभी पर्यटन स्थल प्राकृतिक सौंदर्य, शांति और रोमांच का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं। यदि आप इस बार भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच कुछ यादगार पल बिताने की योजना बना रहे हैं, तो झारखंड की ये पांच शानदार जगहें आपकी यात्रा को अविस्मरणीय बना सकती हैं।

anjali kumari जुलाई 17, 2026 0
Patratu Tourism Development
मंत्री सुदिव्य कुमार ने पतरातू को दी पर्यटन विकास की बड़ी सौगात, फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और म्यूजिकल फाउंटेन का हुआ शुभारंभ

रांची। झारखंड के प्रसिद्ध पतरातू डैम लेक रिसॉर्ट को पर्यटन के क्षेत्र में एक नई पहचान मिली है। राज्य के पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार ने गुरुवार को यहां फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और म्यूजिकल फाउंटेन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर रामगढ़ के उपायुक्त ऋतुराज, विधायक ममता देवी, विधायक रोशनलाल चौधरी, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद समेत कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।   पर्यटकों के लिए नया आकर्षण प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे पतरातू लेक रिसॉर्ट में झील के बीच विकसित फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और शाम के समय संगीत की धुनों पर रंग-बिरंगी रोशनी के साथ प्रस्तुत होने वाला म्यूजिकल फाउंटेन पर्यटकों के आकर्षण का नया केंद्र बन गया है। उद्घाटन के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने दोनों सुविधाओं का अवलोकन किया और उनकी सराहना की।   पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि झारखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और सरकार राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और म्यूजिकल फाउंटेन जैसी परियोजनाओं से पतरातू में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।   पर्यटन विभाग के अनुसार पर्यटन विभाग के अनुसार, फ्लोटिंग रेस्टोरेंट के दो हिस्सों का नाम ‘मयूराक्षी’ और ‘कोयल’ रखा गया है। यहां पारिवारिक समारोह, कॉर्पोरेट बैठकें, सामाजिक कार्यक्रम और विशेष आयोजनों का आयोजन किया जा सकेगा। वहीं म्यूजिकल फाउंटेन हर शाम संगीत, रंगीन रोशनी और पानी की मनमोहक प्रस्तुति से पर्यटकों को यादगार अनुभव देगा।   उद्घाटन के बाद मंत्री ने फ्लोटिंग रेस्टोरेंट का निरीक्षण किया और म्यूजिकल फाउंटेन शो का आनंद लिया। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों तक भी करना है, ताकि झारखंड की पर्यटन पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हो सके।

anjali kumari जुलाई 17, 2026 0
Jharkhand tourism
झारखंड के धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार! अर्जुन मुंडा ने केंद्र के सामने रखा विकास का रोडमैप

रांची। झारखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने सोमवार को केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर झारखंड के प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में रांची के प्रसिद्ध देवड़ी मंदिर, खूंटी के सोनमेर मंदिर और सिमडेगा के ऐतिहासिक रामरेखा धाम के समग्र विकास के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए।   बैठक के दौरान अर्जुन मुंडा ने इन धार्मिक स्थलों को पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन स्थलों का विकास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है।   चर्चा में मंदिर परिसरों चर्चा में मंदिर परिसरों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के साथ-साथ श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया गया। बेहतर सड़क संपर्क, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, विश्राम स्थल और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का प्रस्ताव भी रखा गया। साथ ही भारत सरकार की विभिन्न पर्यटन और संस्कृति संबंधी योजनाओं के तहत इन परियोजनाओं को शामिल करने की मांग की गई।   बैठक में क्या कहा गया? बैठक में यह भी कहा गया कि यदि इन धार्मिक स्थलों का योजनाबद्ध तरीके से विकास होता है तो झारखंड में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, छोटे व्यापारियों, हस्तशिल्पियों और स्थानीय कारीगरों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा तथा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।   केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बैठक में रखे गए प्रस्तावों पर मंत्रालय की योजनाओं और दिशा-निर्देशों के अनुरूप सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण और उनका सतत विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।   यदि प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है, तो देवड़ी मंदिर, सोनमेर मंदिर और रामरेखा धाम न केवल श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं से लैस होंगे, बल्कि झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान भी मिलेगी।

anjali kumari जुलाई 13, 2026 0
Betla National Park Closure
1 जुलाई से बेतला नेशनल पार्क में नो एंट्री, तीन महीने बंद रहेगी जंगल सफारी

लातेहार। झारखंड के प्रसिद्ध बेतला नेशनल पार्क को 1 जुलाई से 30 सितंबर तक पर्यटकों के लिए बंद रखा जाएगा। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के निर्देशानुसार इस अवधि में जंगल सफारी, वाहनों की आवाजाही और पार्क के भीतर होने वाली सभी इको-टूरिज्म गतिविधियों पर पूरी तरह रोक रहेगी। वन विभाग के अनुसार यह निर्णय मानसून और वन्यजीवों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पर्यटक अब 1 अक्टूबर से दोबारा जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे।   पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण पर रहेगा फोकस वन अधिकारियों के मुताबिक, बारिश के मौसम में अधिकांश जंगली जानवरों का प्रजनन काल होता है। ऐसे समय में मानवीय गतिविधियों से उनकी प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। साथ ही मानसून के दौरान जंगल के कच्चे रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं, जिससे सफारी वाहनों के फंसने और हाथी समेत अन्य वन्यजीवों के हमले का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए तीन महीने तक केवल वन विभाग के अधिकारी और पेट्रोलिंग टीम को ही जंगल में प्रवेश की अनुमति रहेगी। पार्क बंद रहने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी भी पहले से अधिक सख्त की जाएगी तथा वॉच टावरों पर वनकर्मियों की तैनाती बढ़ाई जाएगी।   रेस्ट हाउस खुले रहेंगे, आसपास के पर्यटन स्थलों का उठा सकेंगे आनंद हालांकि पार्क के भीतर प्रवेश और सफारी बंद रहेगी, लेकिन पर्यटकों के लिए वन विभाग के रेस्ट हाउस, कैंटीन और अन्य सुविधाएं पहले की तरह संचालित होती रहेंगी। बेतला आने वाले सैलानी आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे केचकी संगम, पलामू किला, मंडल डैम, सतनदिया, ततहा झरना, मिर्चईया फॉल, कोयल व्यू, सुग्गा बांध और लोध फॉल का भ्रमण कर सकेंगे। बेतला रेंज के रेंजर उमेश कुमार दुबे ने बताया कि पार्क बंद रखने के आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा और इस दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा तथा अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गश्त और निगरानी को और मजबूत किया जाएगा।

anjali kumari जून 29, 2026 0
Ancient Maa Bhadrakali Temple in Itkhori featuring Hindu, Buddhist and Jain heritage structures
इटखोरी का मां भद्रकाली मंदिर: जहां मिलते हैं हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के अद्भुत प्रमाण

अपरा एकादशी पर बढ़ जाता है इस प्राचीन मंदिर का महत्व झारखंड के Itkhori स्थित प्रसिद्ध Bhadrakali Temple धार्मिक आस्था, तांत्रिक साधना और प्राचीन इतिहास का अनोखा संगम माना जाता है। अपरा एकादशी के अवसर पर इस मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है। मान्यता है कि यहां मां भद्रकाली के दर्शन और पूजा करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। रांची से लगभग 150 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म की ऐतिहासिक विरासत को अपने भीतर समेटे हुए है। पांचवीं-छठी शताब्दी की मानी जाती है प्रतिमा मां भद्रकाली का यह प्राचीन मंदिर चतरा जिले के भदुली गांव में स्थित है। कहा जाता है कि गांव का नाम भी मंदिर के कारण पड़ा। मंदिर में स्थापित मां भद्रकाली की प्रतिमा एक विशाल शिलाखंड पर उकेरी गई है। यह प्रतिमा करीब साढ़े चार फीट ऊंची, ढाई फीट चौड़ी और लगभग 30 मन वजनी बताई जाती है। इतिहासकारों और विद्वानों के अनुसार यह प्रतिमा पाल काल यानी पांचवीं-छठी शताब्दी की मानी जाती है। 196 एकड़ में फैला है मंदिर परिसर Bhadrakali Temple का विशाल परिसर लगभग 196 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां बनी यज्ञशाला भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। इसका निर्माण वर्ष 1980 में कराया गया था। मंदिर परिसर में एक संग्रहालय भी मौजूद है, जहां खुदाई में मिली 418 प्राचीन मूर्तियों और भग्नावशेषों को सुरक्षित रखा गया है। यह संग्रहालय क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है यह स्थल मां भद्रकाली मंदिर तांत्रिक साधना के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां स्थापित मां तारा की प्रतिमा विशेष ढंग से बनाई गई है, जिससे साधक को मां के पैर का अंगूठा सीधे आज्ञाचक्र के सामने दिखाई देता है। मान्यता है कि मगध के प्रसिद्ध शाक्त साधक भैरवनाथ ने इस स्थान को साधना के लिए चुना था। इसी कारण यह क्षेत्र तंत्र साधना से जुड़े लोगों के बीच विशेष महत्व रखता है। मंदिर परिसर में मौजूद हैं कई दुर्लभ धरोहरें मंदिर परिसर में स्थित कोठेश्वरनाथ स्तूप भी काफी प्रसिद्ध है। इसके चारों ओर भगवान Gautama Buddha की मूर्तियां उकेरी गई हैं। स्तूप के ऊपर बने छोटे गड्ढे में हमेशा पानी भरा रहने की मान्यता भी लोगों को आकर्षित करती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस जल को पूरी तरह खाली नहीं किया जा सकता। इसके अलावा यहां सहस्रलिंगी शिवलिंग भी स्थापित है, जिसमें 1008 छोटे-छोटे शिवलिंग बने हुए हैं। यह अद्भुत शिवलिंग श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहता है। भगवान बुद्ध और जैन धर्म से भी जुड़ी हैं मान्यताएं स्थानीय मान्यताओं के अनुसार ज्ञान की खोज में निकले युवराज सिद्धार्थ ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। कहा जाता है कि जब उनकी माता उन्हें वापस ले जाने आईं और उनका ध्यान नहीं टूटा, तब उनके मुख से “इत खोई” शब्द निकला। बाद में यही नाम बदलकर इटखोरी पड़ गया। जैन धर्म के अनुयायी भी इस स्थान को पवित्र मानते हैं। मान्यता है कि जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर Sheetalnath की जन्मभूमि यही क्षेत्र है। खुदाई में मिले प्राचीन मठ और मंदिरों के अवशेष भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा वर्ष 2011-12 और 2012-13 में यहां खुदाई कराई गई थी। इस दौरान नौवीं और दसवीं शताब्दी के कई मठों और मंदिरों के अवशेष मिले थे। आज इन ऐतिहासिक धरोहरों को संग्रहालय में संरक्षित किया गया है। मंदिर प्रबंधन समिति भी इस प्राचीन स्थल को उसके पुराने वैभव के साथ सुरक्षित रखने का प्रयास कर रही है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Government and opposition clash in Parliament over Amit Shah's response to police action during Delhi student protests.
राष्ट्रीय

संसद में फिर आमने-सामने सरकार और विपक्ष, अमित शाह के जवाब को लेकर सियासी घमासान; NDA की 'मंगल मिलन' रणनीति से राहुल गांधी पर निशाना

surbhi अगस्त 11, 2026 0