मुंबई, एजेंसियां। फिल्म निर्माता करन जौहर ने फिल्म 'Alpha' की शानदार शुरुआत के बाद अभिनेत्री आलिया भट्ट की जमकर सराहना की है। करन ने कहा कि आलिया ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बॉलीवुड की सबसे भरोसेमंद और दमदार अभिनेत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि महिला प्रधान फिल्मों को लेकर बनी कई धारणाओं को आलिया ने अपने प्रदर्शन और बॉक्स ऑफिस सफलता से गलत साबित किया है। 'आलिया की स्टार पावर पर कोई सवाल नहीं' करन जौहर ने सोशल मीडिया पर फिल्म की सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि "आलिया भट्ट की स्टार पावर पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने हर बार अपनी मेहनत और अभिनय से खुद को साबित किया है।" उन्होंने फिल्म की पूरी टीम को बधाई देते हुए दर्शकों का भी आभार जताया। 'Alpha' को मिल रहा दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स रिलीज के बाद से 'Alpha' को दर्शकों और समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। फिल्म ने पहले दो दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर मजबूत कमाई दर्ज की है। एक्शन, कहानी और आलिया भट्ट के प्रदर्शन की खास तौर पर सराहना की जा रही है। ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो फिल्म पहले वीकेंड में शानदार कारोबार कर सकती है। महिला प्रधान फिल्मों को मिला नया भरोसा फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि 'Alpha' की सफलता महिला-केंद्रित फिल्मों के लिए सकारात्मक संकेत है। करन जौहर ने भी कहा कि मजबूत कहानी और दमदार अभिनय के दम पर ऐसी फिल्में दर्शकों का भरोसा जीत रही हैं और बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आईपीएल 2026 के फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गुजरात टाइटन्स को पांच विकेट से हराकर लगातार दूसरी बार खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ आरसीबी ने इतिहास रच दिया और मुंबई इंडियंस तथा चेन्नई सुपर किंग्स के बाद लगातार दो आईपीएल ट्रॉफी जीतने वाली तीसरी टीम बन गई। टीम की इस बड़ी उपलब्धि पर क्रिकेट प्रेमियों के साथ-साथ फिल्म और मनोरंजन जगत की कई हस्तियों ने भी खुशी जाहिर की। सेलेब्स ने सोशल मीडिया पर जताई खुशी आरसीबी की जीत के बाद सोशल मीडिया पर बधाइयों का तांता लग गया। फिल्म निर्माता-निर्देशक Karan Johar ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए टीम को लगातार दूसरी जीत की बधाई दी और खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की। वहीं, अभिनेता Rishab Shetty ने सोशल मीडिया पर लिखा कि विराट कोहली को जीत का जश्न मनाते देखना बेहद भावुक और यादगार पल था। अभिनेता Randeep Hooda ने भी आरसीबी और उसके प्रशंसकों को बधाई देते हुए कहा कि वर्षों के इंतजार और विश्वास का यह शानदार परिणाम है। शहनाज गिल ने मनाया जीत का जश्न अभिनेत्री और सोशल मीडिया स्टार Shehnaaz Gill ने भी आरसीबी की जीत पर खुशी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह मैच देखते हुए जमकर जश्न मनाती और डांस करती नजर आईं। उनके इस वीडियो को प्रशंसकों ने काफी पसंद किया। विराट कोहली ने लगाया विजयी छक्का फाइनल मुकाबले में गुजरात टाइटन्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए आरसीबी के सामने 156 रनों का लक्ष्य रखा था। जवाब में कप्तान Rajat Patidar की अगुवाई में आरसीबी ने 18 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। मैच का सबसे यादगार क्षण तब आया जब Virat Kohli ने 18वें ओवर की अंतिम गेंद पर छक्का लगाकर टीम को जीत दिलाई। इस ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे देश में आरसीबी और विराट कोहली के प्रशंसकों ने जमकर जश्न मनाया।
Karan Johar इन दिनों सोशल मीडिया पर अपने एक फैसले को लेकर चर्चा में हैं। फिल्ममेकर ने अचानक कई बॉलीवुड सितारों और करीबी दोस्तों को इंस्टाग्राम पर अनफॉलो कर दिया, जिसके बाद फैंस के बीच तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गईं। हालांकि अब सामने आई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह कदम किसी विवाद या रिश्तों में खटास की वजह से नहीं, बल्कि एक सोशल मीडिया रणनीति का हिस्सा है। शाहरुख खान और आलिया भट्ट भी हुए अनफॉलो रिपोर्ट्स के मुताबिक करण जौहर ने Shah Rukh Khan, Alia Bhatt, Kareena Kapoor Khan और Manish Malhotra समेत कई बड़े सितारों को इंस्टाग्राम पर अनफॉलो किया है। इसके अलावा Varun Dhawan, Sidharth Malhotra, Malaika Arora और Ananya Panday जैसे सितारों के नाम भी उनकी फॉलोइंग लिस्ट से गायब बताए जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि करण ने Kartik Aaryan को भी अनफॉलो कर दिया है, जबकि अभिनेता उनकी आगामी फिल्म “Naagzilla” में नजर आने वाले हैं। प्रियंका चोपड़ा को अब भी कर रहे फॉलो सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी नोटिस किया कि Priyanka Chopra Jonas फिलहाल करण जौहर की इंस्टाग्राम फॉलोइंग लिस्ट में बनी हुई हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर इसे लेकर और ज्यादा चर्चाएं होने लगीं। हालांकि रिपोर्ट्स का दावा है कि यह पूरा बदलाव केवल सोशल मीडिया मैनेजमेंट स्ट्रेटेजी का हिस्सा है और इसका किसी खास व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है। सोशल मीडिया पर शुरू हुई चर्चाएं करण जौहर अपने करीबी रिश्तों और इंडस्ट्री कनेक्शन के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में उनके इस कदम ने इंटरनेट पर काफी हलचल मचा दी। कई यूजर्स ने इसे बॉलीवुड के रिश्तों से जोड़कर देखना शुरू कर दिया था। हालांकि अब तक करण जौहर की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हाल ही में रिलीज हुई थी करण की फिल्म वर्कफ्रंट की बात करें तो करण जौहर हाल ही में Chaand Mera Dil को प्रोड्यूस करते नजर आए थे। फिल्म में Lakshya और अनन्या पांडे लीड रोल में थे। फिल्म 22 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और इसे दर्शकों व समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली।
मुंबई, एजेंसियां। फिल्म निर्माता और निर्देशक करन जोहर ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर कई बॉलीवुड सितारों को अनफॉलो कर सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी थी। उनकी फॉलोइंग लिस्ट से Shah Rukh Khan, Alia Bhatt, Kareena Kapoor Khan, Varun Dhawan और Sidharth Malhotra जैसे बड़े नाम अचानक गायब हो गए। इसके बाद फैंस के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या करण और उनके करीबी दोस्तों के बीच कोई अनबन चल रही है। करण ने पोस्ट शेयर कर दी सफाई लगातार बढ़ती अटकलों के बीच करण जौहर ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए पूरे मामले पर सफाई दी। उन्होंने बताया कि यह किसी विवाद या रिश्तों में खटास की वजह से नहीं, बल्कि उनके “डिजिटल डिटॉक्स” का हिस्सा है। करण ने लिखा कि वह सोशल मीडिया पर अपना समय और ऊर्जा बचाने के लिए लोगों को अनफॉलो कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि इसे “राष्ट्रीय खबर” बनाने की जरूरत नहीं है। प्रियंका चोपड़ा अब भी फॉलो लिस्ट में दिलचस्प बात यह रही कि जहां कई बॉलीवुड सितारे उनकी फॉलोइंग लिस्ट से हट गए, वहीं Priyanka Chopra अब भी उनकी फॉलो लिस्ट में शामिल हैं। इसके अलावा करण फिलहाल बेहद सीमित लोगों को फॉलो कर रहे हैं, जिनमें धर्मा प्रोडक्शंस के सीईओ अपूर्वा मेहता और उद्योगपति आदर पूनावाला शामिल हैं। फिल्मों में व्यस्त हैं करण सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले करण जौहर इन दिनों अपने फिल्मी प्रोजेक्ट्स में भी व्यस्त हैं। हाल ही में उन्होंने चांद मेरा दिल को प्रोड्यूस किया था। अब वह अपनी अगली फिल्म नागजिल्ला की तैयारी में जुटे हैं, जिसमें कार्तिक आर्यन मुख्य भूमिका निभाएंगे।
Central Board of Film Certification यानी CBFC एक बार फिर अपने फैसले को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला Chand Mera Dil से जुड़ा है, जिसमें अभिनेता Lakshya Lalwani और अभिनेत्री Ananya Panday के रोमांटिक सीन्स पर बोर्ड ने कैंची चला दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म को U/A 16+ सर्टिफिकेट दिया गया है, लेकिन इसके साथ फिल्म के करीब 96 सेकेंड लंबे किसिंग और लिप-लॉक सीन्स हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। 96 सेकेंड के रोमांटिक सीन हटाए गए मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार CBFC ने फिल्म से: 10 सेकेंड का एक किसिंग सीन हटाने और करीब 1 मिनट 26 सेकेंड के लिप-लॉक विजुअल्स काटने का निर्देश दिया है। कुल मिलाकर फिल्म से लगभग 96 सेकेंड के रोमांटिक विजुअल्स हटाए गए हैं। सोशल मीडिया पर उठे सवाल सेंसर बोर्ड के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि जब हिंसा, खून-खराबा और गालियों से भरी फिल्मों को आसानी से पास किया जा रहा है, तब एक रोमांटिक फिल्म के किसिंग सीन्स पर इतनी सख्ती क्यों दिखाई गई। लोगों ने तुलना करते हुए Animal, KGF और अन्य हिंसक फिल्मों का भी जिक्र किया। 22 मई को रिलीज होगी फिल्म Chand Mera Dil 22 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म का रनटाइम लगभग 2 घंटे 15 मिनट 36 सेकेंड बताया गया है। एडवांस बुकिंग 18 मई से शुरू हो चुकी है। ट्रेलर ने बटोरी थी तारीफ फिल्म का ट्रेलर 11 मई को रिलीज हुआ था, जिसे दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला। फिल्म में Ananya Panday और Lakshya Lalwani की केमिस्ट्री को काफी पसंद किया गया। ट्रेलर के कुछ डायलॉग्स भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिनमें: “प्यार तो बहुत है, लेकिन इज्जत उससे ज्यादा जरूरी है।” और “लेजेंड्री लव स्टोरीज की एंडिंग ही तो ट्रैजिक होती है।” जैसी लाइनें शामिल हैं। ‘सैयारा’ जैसी फीलिंग की चर्चा ट्रेलर देखने के बाद कई यूजर्स ने फिल्म की तुलना रोमांटिक ड्रामा फिल्मों से की थी। कुछ लोगों का कहना था कि फिल्म में इमोशनल लव स्टोरी के साथ ट्रेजडी और मैच्योर रिलेशनशिप की झलक देखने को मिल रही है। करण जौहर की प्रोडक्शन टीम से जुड़ी फिल्म फिल्म का निर्देशन Vivek Soni ने किया है, जबकि इसे Karan Johar समेत कई निर्माताओं ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में: अनन्या पांडे लक्ष्य लालवानी आस्था सिंह प्रथम राठौड़ एल्विस जोस मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म का अनुमानित बजट करीब 90 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।
मुंबई, एजेंसियां। ताहा शाह एक बार फिर चर्चा में हैं। हीरामंडी में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें एक बड़ा प्रोजेक्ट मिला है। अब वे फिल्ममेकर Karan Johar की अपकमिंग वेब सीरीज ‘नजदीकियां’ में लीड रोल निभाते नजर आएंगे। Amazon Prime पर रिलीज होगी ‘नजदीकियां’ यह वेब सीरीज Amazon Prime Video पर रिलीज की जाएगी। इस प्रोजेक्ट में ताहा शाह के साथ परेश पाहुजा, आकांक्षा सिंह और निकिता दत्ता भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। सीरीज को धर्माटिक एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनाया जा रहा है। बड़ी टीम के साथ तैयार हो रहा प्रोजेक्ट ‘नजदीकियां’ को करण जौहर, आदर पूनावाला और अपूर्व मेहता मिलकर प्रोड्यूस कर रहे हैं, जबकि इसका निर्देशन रुचिर अरुण करेंगे। यह प्रोजेक्ट ताहा शाह के करियर के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ‘हीरामंडी’ से मिली नई पहचान ताहा शाह को असली पहचान संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज ‘हीरामंडी’ से मिली, जहां उनके अभिनय की खूब सराहना हुई। इस सीरीज ने उनके करियर को नई दिशा दी और इंडस्ट्री में उनकी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। करण जौहर संग काम करने पर जताई खुशी करण जौहर के साथ दोबारा काम करने को लेकर ताहा शाह ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए खास पल है और वह इस नए प्रोजेक्ट को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने इसे अपने करियर का एक “फुल सर्कल मोमेंट” बताया। फैंस को है बेसब्री से इंतजार ‘नजदीकियां’ को लेकर दर्शकों में भी उत्सुकता बढ़ गई है। ‘हीरामंडी’ के बाद ताहा शाह को एक नए अंदाज में देखने के लिए फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।