मुंबई, एजेंसियां। कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण अभियान पर आधारित वेब सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ आज, 7 अगस्त 2026 से Netflix पर स्ट्रीम हो रही है। यह सीरीज 1999 के कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि में भारतीय वायुसेना के उस अभियान को सामने लाती है, जिसने युद्ध के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। 1999 के कारगिल युद्ध पर आधारित कहानी ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की कहानी 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के अभियान पर केंद्रित है। ऑपरेशन सफेद सागर भारतीय वायुसेना की ओर से कारगिल संघर्ष के दौरान चलाया गया महत्वपूर्ण हवाई अभियान था। सीरीज के जरिए युद्ध के दौरान सामने आई चुनौतियों, रणनीति और वायुसेना के जवानों के साहस को नाटकीय अंदाज में दिखाने की कोशिश की गई है। आज से Netflix पर उपलब्ध सीरीज का डिजिटल प्रीमियर 7 अगस्त 2026 को Netflix पर हुआ है। यानी दर्शक आज से ही इसे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं। Netflix की ओर से भी 7 अगस्त की स्ट्रीमिंग को लेकर प्रचार किया गया है। कारगिल युद्ध और भारतीय सशस्त्र बलों की वीरगाथाओं में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए यह सीरीज खास आकर्षण बन सकती है। जिमी शेरगिल समेत नजर आएंगे कई कलाकार सीरीज की चर्चा इसके विषय के साथ-साथ कलाकारों को लेकर भी है। इसमें जिमी शेरगिल और सिद्धार्थ जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आते हैं। कहानी में वायुसेना के अधिकारियों और जवानों के नजरिए से युद्ध की परिस्थितियों को दिखाने पर जोर दिया गया है। मेकर्स ने युद्ध के दौरान होने वाले हवाई अभियानों, रणनीतिक फैसलों और जवानों की चुनौतियों को मनोरंजक कहानी के साथ जोड़ने की कोशिश की है। देशभक्ति और युद्ध ड्रामा का मेल ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ केवल युद्ध के दृश्यों तक सीमित नहीं है। इसका फोकस उन लोगों की भूमिका और संघर्ष पर भी है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा के लिए काम किया। कारगिल युद्ध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इसे सामान्य युद्ध-आधारित मनोरंजन से अलग बनाती है। सीरीज में सैन्य रणनीति, साहस, भावनात्मक संघर्ष और देशभक्ति को कहानी के प्रमुख हिस्से के तौर पर पेश किया गया है। दर्शकों के लिए आज से नई OTT पेशकश अगस्त के पहले सप्ताह में Netflix पर आने वाली प्रमुख रिलीज में ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को शामिल किया गया है। 7 अगस्त को इसके साथ कई अन्य फिल्में और सीरीज भी अलग-अलग OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई हैं। ऐसे में इस सप्ताहांत युद्ध, इतिहास और देशभक्ति से जुड़ा कंटेंट देखने वाले दर्शकों के लिए ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ प्रमुख विकल्पों में शामिल हो सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल के वीरों का अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने देशवासियों से शहीदों के बलिदान को सदैव स्मरण रखने का आह्वान किया। देशभर में हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम कारगिल विजय दिवस के अवसर पर लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल सहित देशभर के युद्ध स्मारकों पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं। सेना, अर्धसैनिक बलों, पूर्व सैनिकों, शहीदों के परिजनों और आम नागरिकों ने पुष्पचक्र अर्पित कर वीर जवानों को नमन किया। कई राज्यों में शौर्य यात्राएं, स्कूलों में विशेष कार्यक्रम और देशभक्ति से जुड़े सांस्कृतिक आयोजन भी आयोजित किए गए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दी श्रद्धांजलि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने द्रास में आयोजित मुख्य समारोह में कहा कि भारतीय सशस्त्र बल किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध के वीरों का बलिदान भारत की सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने जवानों के साहस को नमन करते हुए कहा कि देश उनकी वीरता का सदैव ऋणी रहेगा। 1999 की ऐतिहासिक जीत को किया गया याद हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1999 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों को कारगिल की चोटियों से खदेड़कर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। इस युद्ध में भारतीय सेना के सैकड़ों जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। कारगिल विजय दिवस उन वीर सैनिकों की बहादुरी, त्याग और देशभक्ति को याद करने का दिन है, जिनकी वजह से भारत ने अपनी सीमाओं की रक्षा करते हुए विजय प्राप्त की।
द्रास (लद्दाख), एजेंसियां। 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रमों के तहत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज लद्दाख के द्रास पहुंचेंगे। वे कारगिल युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को नमन करेंगे। इस अवसर पर सेना के वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व सैनिक, वीर नारियां और शहीदों के परिजन भी मौजूद रहेंगे। श्रद्धांजलि समारोह में होंगे कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम रक्षा मंत्री कारगिल वॉर मेमोरियल स्थित सिनोटाफ (Cenotaph) पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद वे वर्चुअल वॉकथ्रू पोर्टल का उद्घाटन करेंगे, उपस्थित लोगों को संबोधित करेंगे तथा वीर नारियों और वीर माताओं से मुलाकात करेंगे। साथ ही, 'शौर्य विजय यात्रा' मोटरसाइकिल रैली को भी हरी झंडी दिखाएंगे। दो दिन तक चलेंगे कारगिल विजय दिवस के कार्यक्रम कारगिल विजय दिवस समारोह की शुरुआत आज युद्ध संस्मरण, गौरवमयी संस्कृति कार्यक्रम, विजय भोज और शौर्य संध्या जैसे आयोजनों से होगी। इन कार्यक्रमों में कारगिल युद्ध के वीरों के शौर्य और बलिदान को याद किया जाएगा। देशभर से आए पूर्व सैनिक, सेना के अधिकारी और शहीदों के परिजन इसमें हिस्सा लेंगे। 1999 की ऐतिहासिक जीत को करता है याद हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल की रणनीतिक चोटियों से खदेड़कर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। यह दिवस भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, वीरता और सर्वोच्च बलिदान को समर्पित है। देशभर में होंगे श्रद्धांजलि और सम्मान कार्यक्रम कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देशभर में शहीदों की स्मृति में श्रद्धांजलि सभाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति से जुड़े आयोजन किए जाएंगे। सरकार ने नागरिकों से भी वीर सैनिकों के बलिदान को याद करते हुए राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आह्वान किया है।
फ्रांसीसी लड़ाकू विमान Dassault Mirage 2000 एक बार फिर वैश्विक सैन्य चर्चाओं के केंद्र में है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के लावन द्वीप स्थित तेल रिफाइनरी पर मिराज-2000-9 फाइटर जेट से हमला किया। हालांकि इस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि मिराज-2000 की सटीक हमला क्षमता और गहरी घुसपैठ की ताकत ने इसे दुनिया के सबसे भरोसेमंद मल्टीरोल फाइटर जेट्स में शामिल कर दिया है। ईरान हमले की रिपोर्ट से बढ़ी चर्चा रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल में हुए संघर्ष के दौरान UAE के मिराज-2000-9 विमानों ने ईरान के लावन द्वीप पर स्थित ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया। इसके कुछ घंटों बाद ईरान समर्थित जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें भी सामने आईं। विशेषज्ञों का मानना है कि मिराज-2000-9, मूल मिराज-2000 का सबसे उन्नत एक्सपोर्ट संस्करण है, जिसे खास तौर पर United Arab Emirates के लिए विकसित किया गया था। इसमें आधुनिक एवियोनिक्स, सटीक टारगेटिंग सिस्टम, लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम शामिल हैं। क्यों इतना खतरनाक माना जाता है मिराज-2000 Dassault Aviation द्वारा विकसित यह चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान कई भूमिकाओं में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह हवाई वर्चस्व, गहरे हमले, टोही मिशन और परमाणु हथियार ले जाने जैसी क्षमताओं के लिए जाना जाता है। मिराज-2000 की सबसे बड़ी ताकत उसकी सटीकता और विश्वसनीयता मानी जाती है। यही वजह है कि कई देशों की वायुसेनाओं ने दशकों तक इस पर भरोसा बनाए रखा है। भारत की परमाणु रणनीति में अहम भूमिका भारतीय वायुसेना के लिए Indian Air Force का मिराज-2000 बेड़ा लंबे समय तक रणनीतिक ताकत का अहम हिस्सा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक भारत ने अपने परमाणु ट्रायड के वायु-आधारित हिस्से में मिराज-2000 विमानों को विशेष भूमिका दी थी। ग्वालियर के महाराजपुर एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात मिराज-2000 विमानों को परमाणु हथियार ले जाने और जवाबी हमले की क्षमता से लैस किया गया था। भारत की “नो फर्स्ट यूज” नीति के तहत यदि देश पर परमाणु हमला होता है, तो यह विमान जवाबी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम माने जाते हैं। कारगिल युद्ध में साबित की ताकत 1999 के Kargil War के दौरान मिराज-2000 ने भारतीय सेना को बड़ी रणनीतिक बढ़त दिलाई थी। पहाड़ी इलाकों में सटीक बमबारी और दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने में इसकी भूमिका बेहद अहम रही थी। उसी दौर में भारत ने इन विमानों को परमाणु हमले की क्षमता से लैस करने की प्रक्रिया को भी अंतिम रूप दिया था। अब राफेल संभाल रहा बड़ी जिम्मेदारी हालांकि समय के साथ मिराज-2000 बेड़ा पुराना हो रहा है। अब Dassault Rafale जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की नई रणनीतिक ताकत बन रहे हैं। माना जाता है कि भविष्य में वायु-आधारित परमाणु हमले की प्राथमिक जिम्मेदारी धीरे-धीरे राफेल बेड़े को सौंपी जा रही है। यूक्रेन भी हुआ मिराज का फैन रूस-यूक्रेन युद्ध में भी मिराज-2000 की क्षमताओं की खूब चर्चा हो रही है। Ukraine को फ्रांस से मिले मिराज-2000-5 विमानों ने रूसी क्रूज मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोकने में अहम भूमिका निभाई है। सैन्य रिपोर्टों के मुताबिक इन विमानों ने Kh-101 क्रूज मिसाइलों और शाहेद ड्रोन जैसे खतरनाक लक्ष्यों को रोकने में बेहद प्रभावी प्रदर्शन किया है। आधुनिक पश्चिमी हथियारों के साथ इसकी अनुकूलता और तेज इंटरसेप्शन क्षमता इसे आज भी बेहद खतरनाक लड़ाकू विमान बनाती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।