Maharashtra Crime

Nagpur Sexual Assault Case
नागपुर यौन उत्पीड़न मामला: सरकारी अधिकारी की बेटी से दरिंदगी, आरोपी ने जेल में मांगा पिज्जा

नागपुर, एजेंसियां। महाराष्ट्र के नागपुर में 16 वर्षीय छात्रा के कथित अपहरण और यौन उत्पीड़न मामले में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने सुनियोजित तरीके से एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी की बेटी तक पहुंच बनाई और वारदात को अंजाम दिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने जेल में पिज्जा, बेहतर भोजन और मुलायम बिस्तर जैसी विशेष सुविधाओं की मांग भी की, जिसे पुलिस ने ठुकरा दिया।   दोस्ती के बहाने बनाया शिकार   जांच में सामने आया है कि आरोपी ने पहले पीड़िता की करीबी दोस्त से सोशल मीडिया और गेमिंग ऐप के जरिए संपर्क बढ़ाया। भरोसा जीतने के बाद उसने पीड़िता और उसके परिवार की जानकारी जुटाई तथा उसी के आधार पर पूरी वारदात की योजना बनाई।   पुलिस को यह भी पता चला है कि आरोपी चार अन्य किशोरियों के संपर्क में था। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि कहीं उसने इसी तरह अन्य लड़कियों को भी अपने जाल में तो नहीं फंसाया।   24 घंटे तक बंधक बनाकर रखने का आरोप   पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने छात्रा को नागपुर के एक किराए के फ्लैट में 24 घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखा। आरोप है कि इस दौरान उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया, नशीले पदार्थ दिए गए, वीडियो बनाए गए, मारपीट की गई और चाकू से हमला भी किया गया। पुलिस ने पीड़िता को सुरक्षित बरामद कर लिया।   फ्लैट से मिले हथकड़ी, चाकू और नशीले पदार्थ   छापेमारी के दौरान पुलिस ने फ्लैट से नशीली गोलियां, स्प्रे, तीन धारदार चाकू, हथकड़ी, मजबूत नायलॉन की रस्सी, धातु का बेल्ट, हवा से भरने वाला गद्दा और अन्य सामान बरामद किया। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी ने पीड़िता को लंबे समय तक बंधक बनाकर रखने की तैयारी कर रखी थी।   जांच में सहयोग नहीं कर रहा आरोपी   पुलिस के अनुसार, आरोपी एक चिकित्सक का बेटा और पुलिस अधिकारी का भतीजा है। उसने मेडिकल जांच कराने से इनकार किया है और अपना व पीड़िता का मोबाइल फोन अनलॉक करने के लिए पासवर्ड भी साझा नहीं किया है। इससे डिजिटल साक्ष्य जुटाने में जांच एजेंसियों को कठिनाई हो रही है।   जेल में मांगी विशेष सुविधाएं   गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने पुलिस हिरासत में पिज्जा, बेहतर भोजन, मुलायम बिस्तर और मच्छर भगाने की दवा जैसी सुविधाओं की मांग की। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया कि उसे कानून के अनुसार केवल आवश्यक बुनियादी सुविधाएं ही दी जाएंगी, कोई विशेष सुविधा नहीं।   पीड़िता सदमे में, जांच जारी   पुलिस ने बताया कि पीड़िता अभी गहरे मानसिक सदमे में है। उसकी स्थिति सामान्य होने के बाद विस्तृत बयान दर्ज किया जाएगा। आरोपी के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम, हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। साथ ही उसके संपर्क में रही अन्य लड़कियों की पहचान और मामले के सभी पहलुओं की जांच जारी है।

anjali kumari अगस्त 6, 2026 0
Lohagad Fort in Pune, where police are investigating the death of Ketan Agrawal as an alleged murder involving his fiancée and another accused.
Pune Murder Case: पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को बताया आरोपी, लेकिन अदालत में कैसे साबित होंगे हत्या के आरोप?

पुणे: महाराष्ट्र के पुणे स्थित लोहागढ़ किले पर केतन अग्रवाल की मौत का मामला अब हत्या की जांच में बदल चुका है। पुलिस ने केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर हत्या का आरोप लगाया है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत में आरोप तय होने या दोष सिद्ध होने के लिए पुलिस को मजबूत और विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने होंगे। हादसे से हत्या तक कैसे बदला मामला? 18 जून को 26 वर्षीय केतन अग्रवाल की लोहागढ़ किले से गिरने के बाद मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में इसे ट्रैकिंग के दौरान हुआ हादसा माना गया था, लेकिन बाद में पुलिस ने जांच का रुख बदलते हुए इसे हत्या का मामला बताया। पुलिस का आरोप है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने मिलकर केतन को चट्टान से धक्का देकर उसकी हत्या की। पुलिस का दावा क्या है? पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार: सिया गोयल अपनी तयशुदा शादी से खुश नहीं थी। उसका चेतन चौधरी के साथ प्रेम संबंध था। दोनों ने कई बार मुलाकात कर हत्या की योजना बनाई। कथित तौर पर वारदात से पहले रिहर्सल भी की गई। पहली कोशिश नाकाम रहने के बाद दूसरी बार घटना को अंजाम दिया गया। हालांकि, ये सभी पुलिस के आरोप हैं और अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। अदालत में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानूनी प्रक्रिया में केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं होता। पुलिस को अदालत के सामने यह साबित करना होगा कि: केतन की मौत दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या थी। उसे जानबूझकर चट्टान से धक्का दिया गया। दोनों आरोपियों की कथित साजिश और वारदात के बीच स्पष्ट संबंध है। इसके लिए पुलिस को परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) की एक मजबूत और बिना किसी टूट के कड़ी प्रस्तुत करनी होगी। किन सबूतों पर टिकी होगी जांच? जांच एजेंसियां निम्नलिखित साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष मजबूत करने की कोशिश कर सकती हैं: मोबाइल फोन रिकॉर्ड लोकेशन डेटा सीसीटीवी फुटेज दोनों आरोपियों की कथित मुलाकातों के सबूत घटना के पहले और बाद का व्यवहार फोरेंसिक रिपोर्ट घटनास्थल से मिले तकनीकी साक्ष्य हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने अदालत को बताया है कि उसके पास घटना का कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह नहीं है, जो यह बता सके कि केतन को वास्तव में किसने धक्का दिया। कबूलनामा कितना अहम? रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस अपने दावे में आरोपियों के कथित कबूलनामे का भी उल्लेख कर रही है। लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर का कहना है कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामों की कानूनी वैधता सीमित होती है। उन्होंने कहा कि अदालत केवल ऐसे बयानों के आधार पर दोष सिद्ध नहीं करती, बल्कि स्वतंत्र और ठोस साक्ष्यों की भी आवश्यकता होती है। विशेषज्ञ की राय इंडिया टुडे से बातचीत में वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने कहा कि किसी मामले को लेकर बनी सार्वजनिक धारणा और अदालत में होने वाली सुनवाई अलग-अलग होती है। उनके अनुसार, अदालत केवल कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाती है। यदि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की श्रृंखला पूरी तरह स्थापित नहीं होती, तो केवल आरोपों के आधार पर दोष सिद्ध करना आसान नहीं होगा। जांच अभी जारी फिलहाल सिया गोयल और चेतन चौधरी इस मामले में आरोपी हैं। मामले की जांच जारी है और अंतिम निर्णय अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
A taxi driver speaks to the media after claiming he witnessed unusual behaviour by accused Siya Goyal before the Ketan Agrawal murder case.
पुणे मर्डर केस: 'सिया कार में बैठना नहीं चाहती थी', कैब ड्राइवर का दावा; पासपोर्ट गायब होने पर भी उठे सवाल

  पुणे: चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच के बीच एक नया दावा सामने आया है। मुंबई एयरपोर्ट तक परिवार को छोड़ने वाले कैब ड्राइवर ने दावा किया है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल पुणे से निकलते समय कार में बैठना नहीं चाहती थीं और उनके भाई साहिल गोयल ने उन्हें कथित तौर पर हाथ पकड़कर जबरन गाड़ी में बैठाया था। कैब ड्राइवर वैभव जाधव ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि पूरे सफर के दौरान सिया परेशान और तनाव में दिखाई दे रही थीं। पुलिस ने अभी तक ड्राइवर के इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। रास्ते भर भाई-बहन के बीच होती रही बहस ड्राइवर के मुताबिक, पुणे से रवेट तक के सफर में सिया और उनके भाई साहिल के बीच किसी बात को लेकर बहस होती रही। उनका कहना है कि दोनों के बीच पूरे रास्ते तनाव का माहौल था। बाद में किवाले-लोढ़ा इलाके से केतन अग्रवाल और उनके परिवार के कुछ सदस्य भी गाड़ी में सवार हुए, जिसके बाद सभी मुंबई एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए। फूड कोर्ट पर हुई संदिग्ध हरकत का दावा वैभव जाधव के अनुसार, रास्ते में एक फूड कोर्ट पर सभी लोग चाय-नाश्ते के लिए रुके थे। इसी दौरान सिया किसी सामान का बहाना बनाकर वापस कार तक आईं। ड्राइवर का दावा है कि सिया ने कार से कुछ सामान निकाला और उसे अपनी जेब में रख लिया। इसके बाद वह वापस फूड कोर्ट चली गईं। ड्राइवर का कहना है कि उसने इस पूरी घटना को नोटिस किया था। एयरपोर्ट पहुंचने के बाद गायब मिला पासपोर्ट ड्राइवर के अनुसार, यात्रियों को मुंबई एयरपोर्ट छोड़ने के कुछ समय बाद उसे केतन अग्रवाल का फोन आया। केतन ने बताया कि उनका पासपोर्ट कार में छूट गया है। इसके बाद कार की तलाशी ली गई, लेकिन पासपोर्ट नहीं मिला। पासपोर्ट गायब होने के कारण केतन का बाली जाने का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। यह यात्रा दोनों के प्री-वेडिंग फोटोशूट के लिए तय की गई थी। परिजनों ने जताई साजिश की आशंका केतन अग्रवाल के पिता विजय अग्रवाल ने भी पासपोर्ट के गायब होने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह सामान्य घटना नहीं लगती और इसके पीछे किसी सुनियोजित साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जांच जारी, पुलिस कर रही सभी पहलुओं की पड़ताल पुलिस पहले ही सिया गोयल और चेतन चौधरी को हत्या की साजिश के आरोप में गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियां डिजिटल सबूत, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही हैं। कैब ड्राइवर के ताजा दावों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, इन बयानों की सत्यता की पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
Accused Siya Goyal and Chetan Chaudhary are produced before a court in Pune as police continue investigating the alleged Ketan Agrawal murder conspiracy.
केतन अग्रवाल हत्याकांड: सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ी, जांच में साजिश के नए खुलासे

  पुणे: चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ा दी है। दोनों आरोपियों को सोमवार (29 जून) को वडगांव मावल कोर्ट में पेश किया गया, जहां सुनवाई के बाद यह आदेश दिया गया। पुलिस का दावा है कि यह हत्या किसी अचानक हुई घटना का परिणाम नहीं थी, बल्कि पहले से रची गई एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। जांच में लगातार नए सबूत सामने आ रहे हैं, जिससे मामला और गंभीर होता जा रहा है। पहले से तय साजिश का आरोप पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार, 18 जून को लोहागढ़ किले पर हुई घटना के दौरान सिया गोयल ने कथित तौर पर चेतन चौधरी को एक संकेत दिया था, जिसके बाद केतन अग्रवाल को चट्टान से धक्का दिया गया। पुलिस का कहना है कि सिया ने घटना के दौरान पानी पीने के बहाने खुद को पीड़ित से दूर कर लिया था, जिससे धक्का देने के समय केतन उसे पकड़ न सके। कैफे में रची गई थी हत्या की योजना जांच में यह भी सामने आया है कि घटना से एक दिन पहले दोनों आरोपी पुणे के लुल्लानगर इलाके के एक कैफे में मिले थे। पुलिस के अनुसार, यहीं पर हत्या की पूरी योजना बनाई गई थी। सीसीटीवी फुटेज में दोनों की मुलाकात की पुष्टि होने का दावा किया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या अपराध से पहले किसी प्रकार का “रीहर्सल” भी किया गया था। क्राइम सीन रीक्रिएशन और सबूतों की जांच पुलिस ने रविवार (28 जून) को सिया गोयल को लोहागढ़ किले ले जाकर क्राइम सीन रीक्रिएशन भी कराया, ताकि घटना की पूरी कड़ी को दोबारा समझा जा सके। इसके अलावा पुलिस ने वह स्कूटर भी जब्त किया है, जिसका इस्तेमाल चेतन चौधरी ने पुणे से लोहागढ़ किले तक पहुंचने के लिए किया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह रास्ते में पहचान और निगरानी से बचने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। रिश्तों और साजिश का एंगल पुलिस जांच के अनुसार, केतन अग्रवाल और सिया गोयल की सगाई फरवरी में हुई थी और दोनों की शादी इस साल तय थी। सिया और चेतन के बीच कथित प्रेम संबंधों की बात भी सामने आई है। इसी कारण, पुलिस को शक है कि शादी से बचने और निजी संबंधों के चलते यह हत्या की साजिश रची गई। अदालत ने बढ़ाई हिरासत अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने गंभीरता को देखते हुए स्वीकार कर लिया। दोनों आरोपियों को अब 3 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में रखा जाएगा। जांच जारी पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है। डिजिटल सबूत, मोबाइल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
Pune Police investigating the Ketan Agrawal murder case as forensic experts examine deleted chats and mobile phones of the accused.
2,004 कॉल, डिलीट चैट और 238 घंटे की बातचीत... केतन अग्रवाल मर्डर केस में डिजिटल सबूतों से बड़े खुलासे

  पुणे: केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में डिजिटल सबूत लगातार नए खुलासे कर रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने हत्या से पहले और घटना के बाद अपने मोबाइल फोन से कई चैट डिलीट कर दी थीं। अब इन डिलीट किए गए संदेशों को रिकवर करने के लिए दोनों के मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। डिलीट चैट रिकवर करने में जुटी फॉरेंसिक टीम जांच अधिकारियों के अनुसार, 18 जून को हुई घटना से पहले और उसके बाद दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण चैट डिलीट कर दी थीं। पुलिस का मानना है कि इन संदेशों से मामले की साजिश और घटनाक्रम से जुड़े अहम सुराग मिल सकते हैं। इसी वजह से दोनों मोबाइल फोन को डिजिटल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। 2,004 कॉल और 238 घंटे की बातचीत ने बढ़ाया शक पुलिस जांच में सामने आया है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच कुल 2,004 फोन कॉल हुई थीं। दोनों ने करीब 238 घंटे तक एक-दूसरे से बातचीत की थी। जांच एजेंसियां अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), चैट हिस्ट्री और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण कर रही हैं। कैफे में बनी थी कथित हत्या की योजना पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन सिया और चेतन एक कैफे में मिले थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि यहीं पर केतन अग्रवाल की हत्या की कथित साजिश बनाई गई। इसके बाद दोनों लोहागढ़ किले पहुंचे और पहले से ऐसी जगह की पहचान की, जहां से केतन को खाई में धक्का दिया जा सके। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। पुलिस का दावा- चेतन ने पहले किया गुमराह जांच अधिकारियों के अनुसार, शुरुआत में चेतन चौधरी ने पुलिस को बताया था कि वह लोहागढ़ किले पर मौजूद था, लेकिन घटनास्थल तक नहीं गया। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के दौरान उसके इस दावे का समर्थन नहीं मिला। पुलिस के मुताबिक, बाद की पूछताछ में दोनों आरोपियों ने घटनाक्रम को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। जांच एजेंसियों का दावा है कि कथित योजना के तहत सिया को तय स्थान पर बैठकर चेतन को संकेत देना था, जिसके बाद केतन को चट्टान से धक्का दिया गया। सिया के भाई और परिजनों से भी होगी पूछताछ पुणे (देहात) के पुलिस उपाधीक्षक गजानन टोंपे ने बताया कि सिया गोयल के भाई को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इसके अलावा उसके परिवार के अन्य सदस्यों और करीबी दोस्तों से भी पूछताछ की जाएगी ताकि पूरे घटनाक्रम की सभी कड़ियां स्पष्ट हो सकें। फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा केस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को केतन अग्रवाल के परिवार से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिया। केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने और यदि जांच में अन्य किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को इस मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया जाएगा। केतन के पिता बोले- आपत्ति थी तो शादी से इनकार कर सकती थी सिया के इस दावे पर कि वह केतन के विग पहनने के कारण शादी नहीं करना चाहती थी, केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि सिया को रिश्ते पर कोई आपत्ति थी तो वह शादी से इनकार कर सकती थी, लेकिन किसी की जान लेने का कोई औचित्य नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि केतन विग का केवल एक छोटा पैच इस्तेमाल करता था और इसकी जानकारी सगाई से पहले ही सिया तथा उसके परिवार को दे दी गई थी। सिया की मां ने भी रखा अपना पक्ष सिया गोयल की मां ने दावा किया कि उनकी बेटी 18 जून को लोहागढ़ किला जाने की इच्छुक नहीं थी। उनके अनुसार, 17 जून को हुई वीडियो कॉल के दौरान केतन अग्रवाल और उनकी मां ने सिया से साथ चलने का आग्रह किया था। शुरुआत में सिया ने पारिवारिक कार्यक्रम का हवाला देकर मना किया था, लेकिन बाद में वह उनके अनुरोध पर चली गई। शादी के खर्च को लेकर पिता ने किया दावा खारिज सिया के पिता ने उन मीडिया रिपोर्टों का भी खंडन किया, जिनमें शादी पर भारी-भरकम खर्च और चार्टर्ड विमान की व्यवस्था का दावा किया गया था। उन्होंने कहा कि शादी उदयपुर में तय हुई थी और करीब 70 कमरे बुक किए गए थे, लेकिन पूरे विवाह समारोह का अनुमानित खर्च तीन करोड़ रुपये से अधिक नहीं था। जांच जारी, अदालत में होगी अंतिम सच्चाई तय पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल डेटा, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0