रांची, एजेंसियां। झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना में लाभुकों के सत्यापन के बाद बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है। जांच में गलत जानकारी देने, फर्जी या रद्द राशन कार्ड रखने तथा पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करने वाले 1.18 लाख लाभुकों को योजना से बाहर कर दिया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए वैध राशन कार्ड अनिवार्य है, जबकि राज्य में सत्यापन अभियान के दौरान अब तक 3.19 लाख राशन कार्ड रद्द किए जा चुके हैं। 49 लाख महिलाओं को मिली तीन माह की सहायता राज्य सरकार ने योजना के तहत लगभग 49 लाख पात्र महिलाओं के बैंक खातों में एक साथ तीन माह की 7,500 रुपये की सहायता राशि हस्तांतरित की है। इस योजना के अंतर्गत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को प्रतिमाह 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। 50 हजार लाभुकों का सत्यापन अधूरा सत्यापन के दौरान करीब 50 हजार लाभुक आवेदन में दर्ज पते पर नहीं मिले। इनमें बड़ी संख्या उन महिलाओं की है, जो विवाह के बाद दूसरे स्थान पर रहने लगी हैं। वहीं, शहरी क्षेत्रों में किराये का मकान बदलने वाले कई लाभुकों का भी सत्यापन पूरा नहीं हो सका। ऐसे मामलों को फिलहाल जिला प्रशासन ने 'अज्ञात लाभुक' की श्रेणी में रखा है। उम्र सीमा भी बनी कारण योजना में केवल 50 वर्ष तक की महिलाओं को ही लाभ देने का प्रावधान है। 50 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभ स्वतः समाप्त हो जाता है। अधिकारियों के अनुसार, सत्यापन और आयु सीमा पूरी होने के कारण अब तक करीब दो लाख लाभुक योजना से बाहर हो चुके हैं। नए आवेदनों का होगा सत्यापन सरकार ने बताया कि अब योजना में नए लाभुकों को जोड़ने के लिए प्राप्त आवेदनों का सत्यापन शुरू किया जाएगा। पात्रता की जांच पूरी होने के बाद नए नाम जोड़े जाएंगे। सरकार का कहना है कि सत्यापन अभियान का उद्देश्य केवल वास्तविक और पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ पहुंचाना तथा सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
रांची। झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत रांची जिले की 3 लाख 66 हजार 664 महिला लाभुकों के बैंक खातों में अप्रैल से जून 2026 तक की तीन माह की सम्मान राशि एकमुश्त हस्तांतरित कर दी गई है। आधार आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए प्रत्येक महिला के खाते में 7,500 रुपये भेजे गए हैं। इस मद में जिला प्रशासन ने कुल 274 करोड़ 99 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान किया है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ी पहल रांची जिला प्रशासन के अनुसार, योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनकी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग देना है। डीबीटी प्रणाली के माध्यम से राशि सीधे बैंक खातों में भेजे जाने से पारदर्शिता बनी है और लाभुकों को समय पर योजना का लाभ मिल रहा है। सरकार का मानना है कि इस योजना से महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। कांके में सबसे ज्यादा लाभुक, कुछ क्षेत्रों में भुगतान जारी जिले के सभी प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाओं को इस योजना का लाभ मिला है। सबसे अधिक 31,094 लाभुक कांके प्रखंड में हैं। इसके अलावा टाउन अर्बन क्षेत्र में 25,006, मांडर में 22,885, सिल्ली में 21,031, बेड़ो में 20,519, चान्हो में 19,299, रातू में 18,500, तमाड़ में 18,411, बुढ़मू में 17,688, नगड़ी में 17,755, ओरमांझी में 17,824 और नामकुम में 17,566 महिलाओं के खातों में राशि भेजी गई है। वहीं बड़गाईं अंचल और ईटकी प्रखंड के लाभुकों का भुगतान अभी प्रक्रियाधीन है। बैंक खाते और आधार अपडेट रखने की अपील रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि यह योजना महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शेष पात्र महिलाओं के खातों में भी जल्द भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिला प्रशासन ने लाभुकों से बैंक खाते की जानकारी और आधार लिंकिंग अद्यतन रखने की अपील की है, ताकि भविष्य की किस्तें बिना किसी बाधा के सीधे उनके खातों में पहुंच सकें। शिकायत या जानकारी के लिए लाभुक "अबुआ साथी" व्हाट्सएप नंबर 9430328080 पर संपर्क कर सकते हैं।
दुमका। जिले के सरैयाहाट प्रखंड अंतर्गत बनियारा पंचायत में विभिन्न जनसमस्याओं के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को पंचायत सचिवालय परिसर में जन-प्रदर्शन किया। तेज धूप के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री तथा दुमका उपायुक्त के नाम 10 सूत्री मांगपत्र पंचायत सचिव और मुखिया के माध्यम से सौंपा। ग्रामीणों ने प्रशासन से लंबित योजनाओं का लाभ शीघ्र उपलब्ध कराने और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की। पेंशन, आवास और शिक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन, वृद्धा पेंशन, दिव्यांग पेंशन और मंईयां सम्मान योजना की लंबित राशि का जल्द भुगतान करने की मांग की। इसके अलावा अबुआ आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना की बकाया किस्त जारी करने की भी मांग उठाई गई। ग्रामीणों ने जोंकी बांध के नाला (डांड) के जीर्णोद्धार, पंचायत सचिवालय परिसर में चापाकल लगाने तथा बनियारा बेसिक स्कूल को उत्क्रमित कर वहां कक्षा 9 और 10 की पढ़ाई शुरू कराने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी। स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी और मानदेय पर भी जोर ज्ञापन में पंचायत के विभिन्न टोलों में आंगनबाड़ी केंद्र भवन निर्माण, सेविका और सहायिकाओं के लंबित मानदेय के भुगतान तथा पंचायत में स्वास्थ्य उपकेंद्र स्थापित करने की मांग शामिल की गई। साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों को नियमित मानदेय देने और पेसा कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग भी की गई। जल्द कार्रवाई की मांग ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से कई बुनियादी समस्याएं लंबित हैं, जिससे लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांगपत्र में शामिल सभी मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई करने और पंचायत की विकास योजनाओं को गति देने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करेगी और पंचायत में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
जमशेदपुर। झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना में अनियमितताओं पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले में जांच के दौरान 4,068 ऐसे लाभुकों की पहचान की गई है, जिन्होंने गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज या तथ्य छिपाकर योजना का लाभ लिया। अब इन सभी से अब तक प्राप्त पूरी राशि की वसूली की जाएगी। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि गंभीर मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। जांच में सामने आए कई चौंकाने वाले मामले विभागीय जांच और भौतिक सत्यापन के दौरान जिले में कुल 6,974 लाभुकों के नाम योजना की सूची से हटाए गए हैं। इनमें कई ऐसे लोग शामिल हैं जो योजना की पात्रता पूरी नहीं करते थे। कुछ मामलों में लाभुकों की मृत्यु के बाद भी उनके नाम पर भुगतान जारी था। वहीं, पहले एक पुरुष द्वारा योजना की राशि लेने का मामला भी सामने आया था, जिससे पूरी राशि वापस कराई गई। इसके अलावा, बिहार की मूल निवासी 142 महिलाओं को भी चिह्नित किया गया है, जो नियमों के विपरीत पूर्वी सिंहभूम से योजना का लाभ ले रही थीं। प्रशासन ने इनके खिलाफ भी राशि वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है। तीन लाख से अधिक लाभुकों का सत्यापन जिले में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत कुल 3,07,071 लाभुक पंजीकृत हैं। इनमें से अब तक 2,89,019 लाभुकों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। अधिकांश लाभुक पात्र पाए गए हैं, जबकि 11,078 लाभुकों का सत्यापन अभी शेष है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद वास्तविक पात्र लाभार्थियों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी। फर्जी लाभुकों पर होगी कार्रवाई सामाजिक सुरक्षा विभाग की प्रभारी सहायक निदेशक रूपा रानी तिर्की ने बताया कि जिले में लगभग 90 प्रतिशत सत्यापन कार्य पूरा हो चुका है। शेष 10 प्रतिशत जांच पूरी होने के बाद अयोग्य लाभुकों से राशि की रिकवरी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिन मामलों में नॉन-डीबीटी संबंधी तकनीकी समस्याएं मिली हैं, उनका भुगतान फिलहाल रोक दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ केवल पात्र महिलाओं तक पहुंचे, इसके लिए सत्यापन अभियान लगातार जारी रहेगा। फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि पात्र लाभुकों को योजना का लाभ बिना किसी बाधा के मिलता रहेगा।
रांची। झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने शुक्रवार को दुमका में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार केंद्र से मिलने वाली विभिन्न योजनाओं की राशि का समय पर उपयोग नहीं कर रही है। शाही ने दावा किया कि केंद्रांश की राशि को बैंक खातों में रखकर उसके ब्याज से मंईयां सम्मान योजना का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने इसे वित्तीय कुप्रबंधन का उदाहरण बताते हुए कहा कि राज्य सरकार विकास के बजाय राजनीतिक लाभ लेने में जुटी है। केंद्र सरकार के सहयोग का किया दावा भानु प्रताप शाही ने कहा कि केंद्र सरकार झारखंड को हर स्तर पर आर्थिक सहयोग दे रही है, लेकिन राज्य सरकार केंद्र को बदनाम कर अपनी राजनीति साध रही है। उन्होंने खनिज रॉयल्टी मद में केंद्र पर 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया होने के दावे को भी गलत बताया। उनके अनुसार, इस मद में सभी राज्यों का कुल बकाया लगभग 22 हजार करोड़ रुपये है और इसके भुगतान को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश भी जारी हैं। भ्रष्टाचार और योजनाओं में अनियमितता का आरोप पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार केंद्रांश की राशि खर्च करने और समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने में विफल रही है। उन्होंने जल-जीवन मिशन सहित कई योजनाओं में अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि जांच होने पर कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के माध्यम से अवैध घुसपैठियों की पहचान की आवश्यकता भी बताई। पीएम मोदी के 12 वर्षों की उपलब्धियां गिनाईं प्रेसवार्ता में भानु प्रताप शाही ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने जन-धन योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं को सरकार की बड़ी उपलब्धियां बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि जी-20 की सफल अध्यक्षता और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती साख प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की पहचान है।
बोकारो। झारखंड के बोकारो जिले में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के सत्यापन के दौरान लाभुकों से पैसे वसूली का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद आंगनबाड़ी केन्द्र चौफान उत्तरी की सेविका कुमारी सीमा को तत्काल प्रभाव से पद से चयनमुक्त कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, 22 मई को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें आंगनबाड़ी सेविका पर योजना के लाभुकों से भौतिक सत्यापन के नाम पर पैसे लेने का आरोप लगाया गया था। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दो सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। जांच समिति ने पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी। जांच रिपोर्ट में आरोपों की हुई पुष्टि जांच समिति की रिपोर्ट में यह स्पष्ट पाया गया कि आंगनबाड़ी सेविका द्वारा लाभुकों से रुपये की वसूली की गई थी। रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चौफान उत्तरी आंगनबाड़ी केन्द्र, कोड संख्या-20355020112 की सेविका कुमारी सीमा को चयनमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया। प्रशासन का कहना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और लाभुकों के साथ किसी भी प्रकार का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीसी ने दी सख्त चेतावनी अजय नाथ शाहदेव ने कहा कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, अनियमितता या लाभुकों से अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना किसी बाधा और पारदर्शिता के साथ पहुंचना चाहिए। इस कार्रवाई के बाद जिले में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन की सख्ती साफ दिखाई दे रही है। वहीं, स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है।
रांची। झारखंड सरकार ने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत आठ हजार करोड़ रुपये विभिन्न जिलों को आवंटित कर दिए हैं। यह राशि चालू वित्तीय वर्ष के छह माह के लिए है। जिलों को जारी आवंटन आदेश में विभाग द्वारा पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के तहत ही लाभुकों के खाते में राशि हस्तांतरित करने का निर्देश है। 2 माह की राशि एकसाथ मिलेगी इधर, जिलों को राशि आवंटित होने से लाभुकों को राशि शीघ्र मिलने की संभावना है। अप्रैल और मई दोनों माह की राशि एक साथ खाते में हस्तांतरित की जा सकती है। खाते में आएंगे 5000 रुपये इस तरह प्रत्येक लाभुक के खाते में पांच हजार रुपये हस्तांतरित होंगे। संभावना जताई जा रही है कि 15 मई के बाद विभिन्न जिलों में राशि हस्तांतरित करने की प्रकिया शुरू कर दी जाएगी। लाभुकों का सत्यापन जारी हालांकि, कुछ जिलों में लाभुकों का सत्यापन भी कराया जा रहा है। कई प्रखंडों में अपने-अपने नाम का फार्म प्राप्त करने के लिए महिलाओं में होड़ मची रही। पंचायत भवन में सुबह से ही लाभुक महिलाओं और युवतियों का आना-जाना लगा रहा।
रांची। झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना को लेकर बड़ा अपडेट है। राज्य की लाखों महिलाओं के लिए राहत भरी खबर है कि योजना की 21वीं किस्त जल्द ही उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। मुख्यमंत्री Hemant Soren ने बीते दिनों बैठक में इस योजना की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि भुगतान में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए और तय समय के भीतर लाभुकों के खातों में राशि पहुंचाई जाए। 2500 रुपये आयेंगे खाते मे मंईयां सम्मान योजना झारखंड सरकार की एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देना है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रति माह 2500 रुपये सीधे बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजे जाते हैं। 21वीं किस्त को लेकर क्या है नया अपडेट? सरकार की समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि कई जगहों पर तकनीकी कारणों या सत्यापन प्रक्रिया के चलते भुगतान में देरी हुई है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी लंबित मामलों को तुरंत निपटाया जाए और 21वीं किस्त की राशि तय तिथि से लाभुकों के खातों में खटाखट पहुंचनी शुरू हो जाए। सूत्रों के अनुसार, जिन महिलाओं का बैंक खाता आधार से लिंक है और जिनका दस्तावेज सत्यापन पूरा हो चुका है, उन्हें सबसे पहले राशि भेजी जाएगी। वहीं जिन लाभुकों का सत्यापन अधूरा है, उनके मामलों को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है। मार्च महीने की किस्त कई जिलों में हो चुकी है जारी इस योजना की खास बात यह है कि सरकार हर महीने की एक तय 15 तारीख को राशि ट्रांसफर करती है। इससे महिलाओं को नियमित आर्थिक सहारा मिलता है और वे अपने दैनिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई या स्वास्थ्य जैसी जरूरतों को आसानी से पूरा कर पाती हैं। हाल ही में मार्च महीने की किस्त भी कई जिलों में जारी की गई थी, जिसमें लाखों महिलाओं के खातों में एक साथ पैसे भेजे गए थे।
रांची। मंईयां सम्मान योजना में बड़ा अपडेट आया है। मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत रांची जिले में मार्च माह की राशि का भुगतान कर दिया गया है। जिले की 3 लाख 89 हजार 296 महिलाओं के बैंक खातों में 2500 रुपए प्रति लाभुक की दर से आधार आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए कुल 97 करोड़ 32 लाख 40 हजार रुपए भेजे गए हैं। पारदर्शी तरीके से किया गया भुगतान जिला प्रशासन के अनुसार, यह भुगतान सभी प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों में पारदर्शी तरीके से किया गया। कांके में सबसे अधिक 31,548 लाभुकों को राशि मिली, जबकि सदर शहरी क्षेत्र में 24,780 और मांडर में 23,079 लाभुकों को लाभ मिला। सिल्ली (21,120), बेड़ो (20,571) और चान्हो (19,699) भी प्रमुख लाभुक क्षेत्रों में शामिल हैं। प्रखंडों व शहरी क्षेत्रों में भुगतान की स्थिति अनगड़ा में 16,701 लाभुक, अरगोड़ा शहरी क्षेत्र में 13,360, बड़गाईं शहरी क्षेत्र में 9,683, बेड़ो में 20,571, बुंडू में 8,440, बुंडू नगर पंचायत में 3,502, बुढ़मू में 17,816, चान्हो में 19,699, हेहल शहरी क्षेत्र में 15,245, इटकी में 10,334, कांके में 31,548, कांके शहरी क्षेत्र में 1,313, खलारी में 9,580, लापुंग में 11,342, माण्डर में 23,079, नगड़ी में 17,856, नगड़ी शहरी क्षेत्र में 8,250, नामकुम में 17,847, नामकुम शहर में 9,489, ओरमांझी में 18,147, राहे में 9,522, रातू में 18,545, सिल्ली में 21,120, सोनाहातू में 13,036, तमाड़ में 18,491 तथा सदर शहरी क्षेत्र में 24,780 लाभुकों को भुगतान हुआ।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।