ओमान की खाड़ी में एक नाटकीय समुद्री घटना के दौरान 24 भारतीय नाविकों की जान बाल-बाल बच गई। एमटी मारिवेक्स नामक ऑयल टैंकर में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद आग लग गई, जिसके चलते चालक दल को आपातकालीन सहायता के लिए एसओएस संदेश भेजना पड़ा। बाद में ओमानी अधिकारियों और बचाव दल ने हेलीकॉप्टर की मदद से सभी भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना ओमान के मसिराह द्वीप के निकट समुद्री क्षेत्र में हुई, जहां टैंकर अचानक आग की चपेट में आ गया। आग लगने के बाद जहाज पर मौजूद चालक दल ने तत्काल मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया गया। अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की पुष्टि की अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, एमटी मारिवेक्स कथित तौर पर ईरान से जुड़े प्रतिबंधों और समुद्री नाकेबंदी का उल्लंघन करते हुए आगे बढ़ रहा था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि जहाज को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन उसने निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद अमेरिकी विमानवाहक पोत पर तैनात एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान ने जहाज के इंजन और स्टीयरिंग सेक्शन को निशाना बनाकर कार्रवाई की। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह हमला जहाज को रोकने के उद्देश्य से किया गया था ताकि वह आगे ईरानी जलक्षेत्र की ओर न बढ़ सके। आग लगते ही चालक दल ने भेजा SOS हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई। दोपहर करीब 1:30 बजे चालक दल ने आपातकालीन संदेश भेजकर सहायता मांगी। केंद्रीय शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, उस समय जहाज पर 24 भारतीय नाविक मौजूद थे। स्थिति तेजी से बिगड़ती देख चालक दल ने जहाज के सुरक्षित हिस्से में शरण ली और बचाव दल के पहुंचने का इंतजार किया। मंत्रालय ने पुष्टि की है कि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उन्हें सफलतापूर्वक बचा लिया गया है। ऑडियो संदेश में चालक दल ने बताई भयावह स्थिति घटना के दौरान जहाज से भेजे गए कुछ ऑडियो संदेशों में चालक दल के सदस्य घबराहट और संकट की स्थिति में मदद मांगते सुनाई दिए। एक संदेश में कथित तौर पर कहा गया, "जहाज पर आग लगी हुई है, पोत डूबने की स्थिति में है। इंजन रूम पर हमला हुआ है और जहाज के निचले हिस्से में बड़ा छेद हो गया है।" इन संदेशों के सामने आने के बाद समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल बचाव अभियान तेज कर दिया। लाइफबोट्स भी हुईं क्षतिग्रस्त चालक दल के अनुसार, हमले और आग के कारण जहाज की कुछ लाइफबोट्स भी क्षतिग्रस्त हो गई थीं। आग इतनी तेजी से फैली कि जहाज के पिछले हिस्से तक पहुंचना मुश्किल हो गया। स्थिति गंभीर होने पर सभी नाविक जहाज के अगले हिस्से में एकत्र हुए, जहां से उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए निकाला गया। बाद में सभी को सुरक्षित रूप से ओमान के मसिराह द्वीप पहुंचाया गया। भारतीय स्वामित्व वाला नहीं था जहाज शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि एमटी मारिवेक्स किसी भारतीय कंपनी के स्वामित्व वाला जहाज नहीं था। जहाज पर तैनात सभी 24 चालक दल के सदस्य भारतीय नागरिक थे। अधिकारियों के अनुसार, जहाज पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में शामिल था और उस पर ईरान से जुड़े कारोबारी संबंधों के आरोप लगाए गए थे। अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में था मारिवेक्स समुद्री डेटाबेस के अनुसार, एमटी मारिवेक्स को पिछले वर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने प्रतिबंधित जहाजों की सूची में शामिल किया था। अमेरिका का आरोप है कि जहाज का संबंध ईरान के तेल व्यापार नेटवर्क से था। रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के दिनों में जहाज ने अपनी ट्रैकिंग प्रणाली बंद करने और समुद्री निगरानी से बचने जैसी गतिविधियां भी की थीं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। भारत सरकार ने शुरू किया समन्वय घटना के बाद भारत सरकार ने विदेश मंत्रालय, भारतीय नौसेना, रक्षा मंत्रालय और विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों के साथ समन्वय शुरू कर दिया है। शिपिंग मंत्रालय ने कहा कि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिकता सभी नाविकों की सुरक्षा और उनके सुरक्षित ठिकाने तक पहुंच सुनिश्चित करना है। क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी चिंता यह घटना ऐसे समय हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी का इलाका पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है। ईरान, अमेरिका और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता लगातार बढ़ रही है। एमटी मारिवेक्स पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मध्य पूर्व के संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में व्यापारिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय नाविकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह पर एक दुर्लभ स्थिति देखने को मिली। भारत और पाकिस्तान के युद्धपोत एक ही दिन कोलंबो पहुंचे, जिससे क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। श्रीलंकाई नौसेना के मुताबिक पाकिस्तान नौसेना के युद्धपोत पीएनएस तैमूर, पीएनएस असलात और पनडुब्बी पीएनएस/एम हैंगोर 1 जून को कोलंबो पहुंचे। लगभग उसी समय भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस ऐरावत भी बंदरगाह पर पहुंचा। भारत का दौरा नियमित नौसैनिक कार्यक्रम का हिस्सा भारतीय नौसेना ने स्पष्ट किया है कि आईएनएस ऐरावत की यात्रा एक नियमित ऑपरेशनल मिशन के तहत की गई है। इस दौरान जहाज को आवश्यक रसद और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा भारतीय नौसैनिक दल श्रीलंकाई नौसेना के साथ कई पेशेवर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा। जहाज 4 जून तक कोलंबो में तैनात रहेगा। भारत ने इस यात्रा को अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘महासागर’ नीति के तहत क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की पहल बताया है। पाकिस्तानी बेड़े में शामिल रही चीन निर्मित आधुनिक पनडुब्बी पाकिस्तान की ओर से कोलंबो पहुंचे नौसैनिक समूह में दो युद्धपोतों के साथ पनडुब्बी पीएनएस/एम हैंगोर भी शामिल रही। यही पनडुब्बी इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चर्चित हिस्सा बनी हुई है। बताया जा रहा है कि हैंगोर श्रेणी की यह पनडुब्बी चीन की सहायता से विकसित की गई है और इसे पाकिस्तान की समुद्री क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह पनडुब्बी लंबी दूरी की मिसाइलें दागने में सक्षम है। श्रीलंका नौसेना के साथ होंगे संयुक्त कार्यक्रम पाकिस्तानी नौसेना ने इस यात्रा को सद्भावना और लॉजिस्टिक सपोर्ट मिशन बताया है। इस दौरान पाकिस्तानी नौसैनिक अधिकारी श्रीलंका के विभिन्न स्थलों का दौरा करेंगे और दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच कई संयुक्त गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। श्रीलंकाई नौसेना ने यह भी जानकारी दी है कि पाकिस्तानी जहाज पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में एक संयुक्त समुद्री अभ्यास में भाग लेंगे। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी पर फिर चर्चा भारत और पाकिस्तान के जहाजों की एक साथ मौजूदगी ने चीन की हिंद महासागर रणनीति को लेकर भी बहस तेज कर दी है। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने इस क्षेत्र में अपने आर्थिक और सामरिक प्रभाव का विस्तार किया है। पाकिस्तान का Gwadar Port और श्रीलंका का Hambantota Port अक्सर चीन की समुद्री रणनीति के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में देखे जाते हैं। इसके अलावा China-Pakistan Economic Corridor भी क्षेत्रीय संपर्क और समुद्री पहुंच को मजबूत करने की व्यापक योजना का हिस्सा माना जाता है। श्रीलंका ने साधा संतुलन का रास्ता श्रीलंका लंबे समय से भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। एक ओर भारत उसका प्रमुख सुरक्षा और आर्थिक साझेदार है, वहीं दूसरी ओर कोलंबो चीन और पाकिस्तान के साथ भी अपने रिश्तों को मजबूत बनाए रखना चाहता है। इसी नीति के तहत श्रीलंका ने दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों का स्वागत किया है और किसी भी पक्ष के प्रति झुकाव दिखाने से बचा है। भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम? रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भारत के लिए यह घटनाक्रम केवल एक नियमित बंदरगाह यात्रा नहीं है। पाकिस्तान की नौसेना में शामिल नई चीनी पनडुब्बियों और हिंद महासागर में बढ़ती चीन-पाकिस्तान साझेदारी पर भारत की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार क्षेत्र में बदलते रणनीतिक हालात भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा, साझेदारियों और निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करने की आवश्यकता की याद दिलाते हैं। क्षेत्रीय शक्ति संतुलन का नया संकेत कोलंबो बंदरगाह पर भारत और पाकिस्तान के युद्धपोतों की एक साथ मौजूदगी ने यह संकेत दिया है कि हिंद महासागर आने वाले वर्षों में वैश्विक और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बना रहेगा। ऐसे में श्रीलंका जैसे देशों की भूमिका भी पहले से अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।
भारतीय नौसेना के 27वें प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि देश की सुरक्षा और समुद्री हितों की रक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य के बीच नौसेना की युद्धक क्षमता को मजबूत बनाए रखने और तकनीकी आधुनिकीकरण को गति देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। एडमिरल स्वामीनाथन ने 31 मई को सेवानिवृत्त हुए एडमिरल Dinesh Kumar Tripathi का स्थान लिया। इससे पहले वह भारतीय नौसेना की पश्चिमी कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में सेवाएं दे रहे थे। चार दशक का समृद्ध नौसैनिक अनुभव 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त करने वाले एडमिरल स्वामीनाथन कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के विशेषज्ञ माने जाते हैं। लगभग चार दशक लंबे करियर में उन्होंने आईएनएस विद्युत, आईएनएस विनाश, आईएनएस कुलिश और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य समेत कई महत्वपूर्ण युद्धपोतों की कमान संभाली है। नौसेना के आधुनिकीकरण पर रहेगा जोर पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना का नेतृत्व करना उनके लिए अत्यंत गौरव और जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण लगातार जटिल, चुनौतीपूर्ण और अप्रत्याशित होता जा रहा है, ऐसे में नौसेना को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाना समय की आवश्यकता है। युद्धक क्षमता बनाए रखना प्राथमिक लक्ष्य एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना होगी कि भारतीय नौसेना हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा करने में सक्षम रहे। उन्होंने कहा कि नौसेना अपनी परिचालन तैयारियों और युद्धक क्षमता को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारतीय नौसेना ने पश्चिमी हिंद महासागर में एक बड़ी समुद्री डकैती की कोशिश को विफल कर दिया है। नौसेना के युद्धपोत INS कोलकाता ने त्वरित कार्रवाई करते हुए व्यापारी जहाज MV मशाल्लाह-1 को संभावित हमले से सुरक्षित बचा लिया। नौसेना के अनुसार, अदन की खाड़ी के पास व्यापारी जहाज के आसपास संदिग्ध समुद्री गतिविधियों की सूचना मिली थी। इसके बाद एंटी-पायरेसी मिशन पर तैनात INS कोलकाता को तुरंत सक्रिय किया गया। हेलीकॉप्टर और कमांडो टीम ने संभाला मोर्चा स्थिति की गंभीरता को देखते हुए INS कोलकाता से हेलीकॉप्टर भेजकर इलाके की हवाई निगरानी की गई। इसके साथ ही नौसेना के कमांडो दस्ते ने MV मशाल्लाह-1 पर बोर्डिंग ऑपरेशन चलाया। जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि जहाज और उसमें मौजूद चालक दल पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी प्रकार का तत्काल खतरा नहीं है। समुद्री डाकुओं की घेराबंदी की कोशिश नाकाम भारतीय नौसेना के मुताबिक, समुद्री डाकू व्यापारी जहाज के आसपास घेराबंदी की तैयारी में थे। लेकिन भारतीय युद्धपोत की तेज कार्रवाई और इलाके में उसकी मौजूदगी से संदिग्ध समुद्री लुटेरों के इरादे विफल हो गए। नौसेना ने कहा कि पूरे घटनाक्रम के दौरान जहाज की लगातार निगरानी की गई और किसी भी तरह की क्षति या अपहरण जैसी घटना नहीं होने दी गई। 2008 से अदन की खाड़ी में सक्रिय है भारतीय नौसेना भारतीय नौसेना वर्ष 2008 से अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर में एंटी-पायरेसी मिशन चला रही है। इस क्षेत्र से गुजरने वाले व्यापारी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना नौसेना की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। समुद्री व्यापार के लिहाज से यह इलाका बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां समुद्री डकैती की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रही हैं। हिंद महासागर में बढ़ी समुद्री चुनौतियां हाल के वर्षों में पश्चिमी हिंद महासागर और अदन की खाड़ी के आसपास समुद्री डकैती, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी को देखते हुए भारतीय नौसेना लगातार युद्धपोतों और निगरानी संसाधनों की तैनाती बनाए हुए है। नौसेना का कहना है कि उसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना और व्यापारी जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है। “भारत क्षेत्रीय सुरक्षा भागीदार की भूमिका निभा रहा” भारतीय नौसेना ने कहा कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में “प्रथम प्रतिक्रिया बल” और प्रमुख सुरक्षा भागीदार की भूमिका निभा रही है। समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत की प्रतिबद्धता लगातार मजबूत हो रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि INS कोलकाता की यह कार्रवाई भारतीय नौसेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और समुद्री सुरक्षा रणनीति की मजबूती को दर्शाती है। मित्र देशों के साथ बढ़ा समन्वय हाल के समय में भारतीय नौसेना ने कई मित्र देशों के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास भी किए हैं। इन अभ्यासों का उद्देश्य समुद्री डकैती, तस्करी और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर समन्वय विकसित करना है। नौसेना प्रमुख भी कई बार कह चुके हैं कि समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां अब वैश्विक स्वरूप ले चुकी हैं और उनसे निपटने के लिए साझा रणनीति जरूरी है।
Quadrilateral Security Dialogue देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अहम चर्चा हुई। बैठक के बाद जारी साझा बयान में सुरक्षित और बिना रुकावट समुद्री व्यापार पर जोर दिया गया। दिल्ली में हुई इस बैठक में S. Jaishankar समेत चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने वैश्विक सप्लाई चेन, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता पर बातचीत की। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी चिंता बैठक में खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। यह इलाका दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि QUAD का यह संदेश अप्रत्यक्ष रूप से Iran पर दबाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। QUAD ने क्या कहा? साझा बयान में कहा गया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पूरी दुनिया के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। चारों देशों ने कहा कि: समुद्री व्यापार सुरक्षित रहना चाहिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन जरूरी है सप्लाई चेन मजबूत और भरोसेमंद होनी चाहिए ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाया जाएगा समुद्री सुरक्षा पर बढ़ेगा सहयोग QUAD देशों ने समुद्री निगरानी, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, पनडुब्बी केबल सुरक्षा, ट्रेनिंग और आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। आतंकवाद पर भी सख्त संदेश एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है और आतंकवाद के खिलाफ QUAD देशों की नीति “जीरो टॉलरेंस” की है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अब होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा सुरक्षित और सामान्य बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की चर्चाओं के बीच ब्रिटेन और फ्रांस ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर वे होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने में सहयोग करेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटिश रॉयल नेवी ने जिब्राल्टर में तैनात अपने युद्धपोत RFA Lyme Bay को इस मिशन के लिए तैयार रखा है। इस जहाज पर ब्रिटेन और फ्रांस के सैनिक मौजूद हैं। साथ ही माइंस को निष्क्रिय करने वाले विशेष समुद्री ड्रोन और सैन्य उपकरण भी तैनात किए गए हैं। शांति समझौते के बाद शुरू हो सकता है ऑपरेशन ब्रिटेन ने साफ किया है कि वह सीधे ईरान युद्ध में शामिल नहीं होगा। हालांकि, यदि अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक समझौता हो जाता है और हालात सामान्य होते हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य से माइंस हटाने का अभियान शुरू किया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान के साथ समझौते को लेकर “व्यापक सहमति” बन चुकी है, हालांकि अंतिम रूप अभी बाकी है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हालिया तनाव के दौरान यहां बड़ी संख्या में समुद्री माइंस बिछाई थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने जहाजों को केवल निर्धारित रूट से गुजरने के निर्देश भी दिए थे। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है। ट्रंप ने NATO देशों की आलोचना की थी ईरान के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिका चाहता था कि NATO सहयोगी देश होर्मुज को सुरक्षित बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। लेकिन कई यूरोपीय देशों ने साफ कर दिया था कि वे सीधे युद्ध का हिस्सा नहीं बनेंगे। ब्रिटेन और फ्रांस ने अब संकेत दिया है कि शांति बहाल होने के बाद वे माइंस हटाने और समुद्री मार्ग को सामान्य बनाने में मदद करेंगे। ब्रिटिश रक्षा मंत्री ने किया युद्धपोत का दौरा ब्रिटेन के रक्षा मंत्री John Healey (कुछ रिपोर्टों में रक्षा अधिकारियों का हवाला) ने जिब्राल्टर में मौजूद RFA Lyme Bay का दौरा किया। यह एक amphibious warship है, जिसे समुद्री सुरक्षा और माइंस हटाने के विशेष अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ईरान ने इजरायली ड्रोन गिराने का दावा किया इस बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुजगान प्रांत के ऊपर उड़ रहे एक इजरायली टोही ड्रोन को मार गिराया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, नौसेना ने ड्रोन का मलबा भी बरामद कर लिया है। इजरायल की ओर से इस दावे पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ओमान के तट के पास भारतीय ध्वज वाले व्यावसायिक जहाज ‘हाजी अली’ पर हमला हुआ है। भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे “अस्वीकार्य” बताया है। Ministry of External Affairs ने गुरुवार को कहा कि भारतीय जहाज पर हमला व्यावसायिक नौवहन और आम नाविकों की सुरक्षा के खिलाफ गंभीर घटना है। ओमान के जलक्षेत्र में हुआ हमला जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Mukesh Mangal के मुताबिक, ‘हाजी अली’ नाम का यह पारंपरिक लकड़ी का पाल वाला भारतीय जहाज सोमालिया से Sharjah जा रहा था। बताया गया कि 13 मई 2026 की सुबह ओमान के जलक्षेत्र में जहाज पर हमला हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई और बाद में वह समुद्र में डूब गया। सभी 14 चालक दल सदस्य सुरक्षित राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी 14 चालक दल सदस्यों को Oman Coast Guard ने सुरक्षित बचा लिया। सभी लोगों को ओमान के दिब्बा बंदरगाह पहुंचाया गया है और उनकी हालत सुरक्षित बताई जा रही है। भारत ने जताया कड़ा विरोध विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि व्यावसायिक जहाजों और निर्दोष नाविकों को लगातार निशाना बनाया जाना पूरी तरह गलत है। भारत ने कहा कि समुद्री व्यापार, नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य में बाधा डालने वाली किसी भी गतिविधि से बचा जाना चाहिए। हमलावरों की पहचान नहीं फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि जहाज पर हमला किसने किया। घटना की जांच जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। वैश्विक व्यापार के लिए अहम है होर्मुज स्ट्रेट Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का हमला अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता माना जाता है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री सुरक्षा चिंताओं के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत के लिए एलपीजी लेकर आ रहे दो टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्र में तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी है और अब तक 13 भारतीय पोत इस अहम समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं। दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित भारत की ओर रवाना बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Mukesh Mangal ने बताया कि ‘सिमी’ नाम का एलपीजी टैंकर 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट पार कर गया। वहीं ‘एनवी सनशाइन’ टैंकर ने भी गुरुवार को सुरक्षित रूप से यह मार्ग पार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, दोनों जहाज भारत के लिए एलपीजी लेकर आ रहे हैं और उनकी सुरक्षित आवाजाही भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम मानी जा रही है। कांडला और मंगलूरु पहुंचेंगे टैंकर मार्शल द्वीप के ध्वज वाला ‘सिमी’ टैंकर करीब 19,965 टन एलपीजी लेकर भारत आ रहा है। इसके 16 मई को Kandla पहुंचने की संभावना है। वहीं वियतनाम के ध्वज वाला ‘एनवी सनशाइन’ संयुक्त अरब अमीरात की रुवैस रिफाइनरी से 46,427 टन एलपीजी लेकर रवाना हुआ है और इसके 18 मई को Mangaluru पहुंचने की उम्मीद है। दोनों जहाजों में मौजूद एलपीजी Indian Oil Corporation यानी IOC का बताया जा रहा है। अब तक 13 भारतीय जहाजों ने पार किया मार्ग अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद यह समुद्री क्षेत्र कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ था। इसके बावजूद अब तक कुल 13 भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। इनमें देश गरिमा, शिवालिक, ग्रीन सान्वी, नंदा देवी, पाइन गैस और एमवी सर्वशक्ति जैसे पोत शामिल हैं। हालांकि अभी भी खाड़ी क्षेत्र में करीब 12 भारतीय जहाज फंसे हुए बताए जा रहे हैं। ओमान के पास हमले में डूबी भारतीय नौका इसी बीच भारत के ध्वज वाली ‘हाजी अली’ नाम की मशीनी पाल नौका ओमान के जलक्षेत्र में हमले का शिकार हो गई। हमले के बाद लकड़ी से बनी इस पारंपरिक नौका में आग लग गई और बाद में यह समुद्र में डूब गई। यह नौका सोमालिया से UAE के शारजाह जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक नौका पर सवार चालक दल के सभी 14 सदस्यों को ओमान तटरक्षक बल ने सुरक्षित बचा लिया है। चालक दल सुरक्षित, भारत लाने की तैयारी अधिकारियों ने बताया कि सभी चालक दल के सदस्यों को ओमान के डिब्बा बंदरगाह पहुंचाया गया है और उनकी स्थिति सुरक्षित है। भारत सरकार ओमान प्रशासन और भारतीय दूतावास के संपर्क में है और उन्हें जल्द भारत वापस लाने की तैयारी की जा रही है। ऊर्जा आपूर्ति पर बनी हुई है नजर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कई विदेशी जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत लगातार अपनी ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर नजर बनाए हुए है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz पर बनी नाकेबंदी के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारत से जुड़ा एलपीजी टैंकर ‘सर्व शक्ति’ इस संवेदनशील जलमार्ग को सफलतापूर्वक पार करने में कामयाब रहा है। ऐसे समय में जब ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही लगभग ठप पड़ी थी, यह यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है। 45 हजार टन LPG के साथ जोखिम भरा सफर शिपिंग डेटा के अनुसार, यह टैंकर करीब 45,000 टन एलपीजी (LPG) लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है। जहाज ने ईरान के लारक और क़ेश्म द्वीपों के पास से गुजरते हुए ओमान की खाड़ी में प्रवेश किया। इस दौरान उसने तेहरान द्वारा तय किए गए सुरक्षित मार्ग का पालन किया। इस जहाज पर 18 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार हैं, और यह विशाखापत्तनम स्थित एक बड़े ऊर्जा टर्मिनल की ओर बढ़ रहा है। संकट के बीच ‘दुर्लभ’ पारगमन हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना इस समय बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है। हाल ही में कई जहाजों को हमले और फायरिंग के खतरे के चलते वापस लौटना पड़ा था। ऐसे में ‘सर्व शक्ति’ का सफल पारगमन एक दुर्लभ और रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि यह टैंकर मार्शल आइलैंड्स के झंडे के तहत संचालित हो रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में आम प्रथा है। इंडियन ऑयल बना खरीदार रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस एलपीजी कार्गो का खरीदार Indian Oil Corporation है। हालांकि कंपनी की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह खेप भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत के लिए क्यों अहम है यह यात्रा? भारत दुनिया का: तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक दूसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है। ऐसे में मिडिल ईस्ट से सप्लाई बाधित होने पर देश में: गैस की कमी लंबी कतारें सप्लाई संकट जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। ‘सर्व शक्ति’ की यह खेप भारत के लिए राहत लेकर आ सकती है और बाजार में स्थिरता ला सकती है। पहले क्यों बिगड़ी थी स्थिति? अप्रैल में हालात तब और बिगड़ गए थे जब ईरान ने पहले जहाजों को गुजरने की अनुमति दी, लेकिन बाद में कुछ जहाजों पर फायरिंग की घटनाएं सामने आईं। इससे कई अंतरराष्ट्रीय टैंकरों को अपनी यात्रा बीच में ही रोकनी पड़ी। हालांकि, इससे पहले एक भारतीय टैंकर ‘देश गरिमा’ भी जोखिम उठाकर इस मार्ग से गुजरने में सफल रहा था।
दुमका। 16 साल पुराने सड़क जाम के एक मामले में सोमवार को एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पोड़ैयाहाट से कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 225 के तहत दोषी मानते हुए 1 साल के कारावास की सजा सुनाई। अदालत के फैसले के तुरंत बाद ही विधायक प्रदीप यादव को सशर्त जमानत भी दे दी गई, जिससे उन्हें फिलहाल राहत मिल गई है। पूर्व भाजपा विधायक समेत अन्य आरोपी बरी इस मामले में साक्ष्य के अभाव के चलते पूर्व भाजपा विधायक रणधीर सिंह सहित सभी अन्य आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया। यह मामला करीब 16 साल पहले हुए सड़क जाम से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सार्वजनिक मार्ग को बाधित किया गया था। लंबे समय से चल रही सुनवाई के बाद अब जाकर इस पर अदालत का फैसला आया है।
मस्कट/तेहरान, 4 मई: दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल Strait of Hormuz में एक बार फिर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ब्रिटेन की समुद्री निगरानी एजेंसी United Kingdom Maritime Trade Operations ने जानकारी दी है कि ईरान के सिरिक तट के पास एक मालवाहक जहाज पर कई छोटी नौकाओं के जरिए हमला किया गया। कैसे हुआ हमला? रिपोर्ट के मुताबिक, अज्ञात हमलावरों ने छोटी-छोटी तेज गति वाली नौकाओं का इस्तेमाल करते हुए कार्गो शिप को निशाना बनाया। इस तरह के हमले आमतौर पर ‘स्वार्म टैक्टिक्स’ के रूप में देखे जाते हैं, जिसमें कई नावें एक साथ हमला कर जहाज को घेर लेती हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले के पीछे कौन था और इसका मकसद क्या था। चालक दल सुरक्षित, लेकिन खतरा बरकरार सबसे राहत की बात यह है कि जहाज पर मौजूद सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं। United Kingdom Maritime Trade Operations ने क्षेत्र से गुजरने वाले अन्य जहाजों को हाई अलर्ट पर रहने और सावधानीपूर्वक मार्ग तय करने की सलाह दी है। ईरान का दावा– ‘हमारा नियंत्रण कायम’ घटना के बाद ईरानी अधिकारियों ने बयान जारी कर कहा कि Strait of Hormuz पर उनका नियंत्रण पूरी तरह बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि जो जहाज अमेरिका या इजराइल से जुड़े नहीं हैं, वे निर्धारित शुल्क देकर सुरक्षित तरीके से इस मार्ग से गुजर सकते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिका-ईरान टकराव की पृष्ठभूमि Donald Trump प्रशासन द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी जारी रखी गई है। अमेरिकी नौसेना इस इलाके में सक्रिय है और हर आने-जाने वाले जहाज पर नजर रख रही है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें 30 दिनों के भीतर विवाद सुलझाने की बात कही गई है। हालांकि Donald Trump ने इस प्रस्ताव को लेकर संदेह जताया है और किसी ठोस समझौते की संभावना को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं। क्यों बेहद अहम है होर्मुज? Strait of Hormuz वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है खाड़ी देशों से एशिया, यूरोप और अमेरिका तक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है बढ़ती घटनाएं और सुरक्षा चिंता पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले, जब्ती और सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। इस ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा कमजोर हो रही है।
वैश्विक मिशन के लिए लंदन में जुटेंगे सैन्य रणनीतिकार होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए दुनिया के 30 से अधिक देशों ने संयुक्त प्रयास तेज कर दिए हैं। ब्रिटेन सरकार के अनुसार, 23 अप्रैल से लंदन में दो दिवसीय अहम बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें कई देशों के मिलिट्री प्लानर्स हिस्सा लेंगे। इस बैठक का उद्देश्य समुद्री मार्ग को सुरक्षित तरीके से फिर से चालू करने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना है। पिछले सप्ताह यूरोप, एशिया और मिडिल ईस्ट के करीब 50 देशों के बीच वर्चुअल बैठक हुई थी, जिसके बाद इस अंतरराष्ट्रीय मिशन को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। समुद्री सुरक्षा और फ्रीडम ऑफ नेविगेशन पर जोर ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में तैयार हो रहे इस प्लान का मुख्य लक्ष्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने कहा कि इस बैठक में कूटनीतिक सहमति को एक व्यावहारिक सैन्य योजना में बदला जाएगा। इस दौरान सेना की तैनाती, कमांड सिस्टम, संसाधनों का उपयोग और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही (फ्रीडम ऑफ नेविगेशन) जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही, यह प्रयास लंबे समय तक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और युद्धविराम को मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। ट्रंप ने बढ़ाया युद्धविराम, बातचीत को दिया समय इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अपील के बाद यह कदम उठाया। ट्रंप का कहना है कि ईरान की सरकार इस समय आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है, इसलिए उसे एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने के लिए समय दिया जाना चाहिए। हालांकि, अमेरिका ने अपनी सैन्य तैयारियों और समुद्री घेराबंदी को जारी रखने की बात भी स्पष्ट की है। ईरान ने बताया ‘रणनीतिक चाल’, बढ़ सकता है तनाव वहीं, ईरान ने अमेरिका के इस कदम को रणनीतिक चाल करार दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि घेराबंदी जारी रखना किसी हमले से कम नहीं है और इसका जवाब सैन्य कार्रवाई से दिया जा सकता है। इधर, अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावों पर सहमति नहीं बनने के कारण वार्ता की प्रक्रिया भी धीमी पड़ गई है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की यह वैश्विक पहल आने वाले दिनों में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए 51 देशों की बैठक के बाद फैसला होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार पर खतरे को देखते हुए अब यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस ने एक बड़ा कदम उठाया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने घोषणा की है कि दोनों देश मिलकर एक बहुराष्ट्रीय (Multinational) रक्षा मिशन का नेतृत्व करेंगे, जिसका उद्देश्य समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखना होगा। यह फैसला 51 देशों की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद लिया गया है, जिसमें कई देशों ने इस मिशन में सहयोग देने की इच्छा जताई है। मिशन होगा पूरी तरह शांतिपूर्ण और रक्षात्मक ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि यह मिशन किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई के लिए नहीं होगा। इसका उद्देश्य केवल: वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा समुद्री मार्गों की निगरानी और बारूदी सुरंगों (माइन) को हटाना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह मिशन तब पूरी तरह लागू होगा जब क्षेत्र में चल रहा संघर्ष समाप्त हो जाएगा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों है अहम? होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इसी रास्ते से बड़े पैमाने पर तेल और गैस का परिवहन होता है। हाल ही में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से बढ़ी स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, हाल के संघर्ष के दौरान ईरान पर इस जलमार्ग को बाधित करने के आरोप लगे थे। हालांकि बाद में ईरान के विदेश मंत्री ने दावा किया कि यह मार्ग अब पूरी तरह खुला है। उधर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया कि समुद्री रास्ते फिर से चालू हो गए हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने नाटो की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उसे “जरूरत के समय कमजोर” बताया। ब्रिटेन और फ्रांस की संयुक्त अगुवाई कीर स्टारमर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि इस मिशन में दर्जनों देश शामिल हो सकते हैं। कई देशों ने अपने सैन्य और तकनीकी संसाधन देने की पेशकश भी की है। मैक्रों ने कहा कि हालात में सुधार के संकेत जरूर हैं, लेकिन अभी सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि इस क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जर्मनी समेत कई देशों का समर्थन जर्मनी ने भी इस मिशन का समर्थन करते हुए कहा है कि वह नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। साथ ही, यह भी माना जा रहा है कि अमेरिका की भागीदारी इस मिशन को और मजबूत बना सकती है। अगले हफ्ते आएगा पूरा रोडमैप ब्रिटेन सरकार ने बताया है कि इस मिशन की विस्तृत योजना अगले हफ्ते लंदन में होने वाली सैन्य बैठक के बाद सार्वजनिक की जाएगी।
ईरान के बयान से बढ़ी उलझन हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि युद्धविराम अवधि के दौरान यह समुद्री रास्ता सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए “पूरी तरह खुला” रहेगा। लेकिन इसी घोषणा के बाद स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की सख्त शर्तें ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने साफ किया है कि इस मार्ग से गुजरने वाले हर जहाज को पहले उनकी अनुमति लेनी होगी। साथ ही तय मार्ग का ही उपयोग करना होगा। सैन्य जहाजों के प्रवेश पर अब भी रोक जारी है। इसे गार्ड ने “नई व्यवस्था” बताया है। ईरान के अंदर ही बयान पर असहमति ईरान के ही कुछ सरकारी मीडिया संस्थानों ने विदेश मंत्री के बयान पर सवाल उठाए हैं। तस्नीम न्यूज ने इसे “अधूरा और भ्रम पैदा करने वाला” बताया, जबकि मेहर न्यूज ने कहा कि रणनीतिक हालात को देखते हुए यह मार्ग पूरी तरह बंद रहना चाहिए। अमेरिका और ट्रंप का दावा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल चुका है और उन्होंने ईरान को धन्यवाद भी दिया। हालांकि बाद में उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक समझौता पूरा नहीं हो जाता। तेल बाजार पर असर इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, तेल कीमतें करीब 10 प्रतिशत तक नीचे आ गई हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के अलग-अलग बयानों और सैन्य शर्तों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। इससे वैश्विक व्यापार और तेल बाजार पर आने वाले दिनों में भी असर देखने को मिल सकता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच United States Navy ने ईरान के समुद्री रास्तों पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। United States Central Command (CENTCOM) द्वारा जारी वीडियो में अमेरिकी जंगी जहाज USS Michael Murphy (DDG-112) को ओमान की खाड़ी में एक मर्चेंट शिप को रोकते हुए देखा गया। नेवी अधिकारियों ने जहाज के क्रू को निर्देश दिया कि वे अब अमेरिकी निगरानी में अगले बंदरगाह तक जाएंगे। इस ऑपरेशन के दौरान हेलिकॉप्टर भी ऊपर से लगातार नजर रख रहे थे। 10 हजार सैनिक और 100 से ज्यादा विमान तैनात CENTCOM के मुताबिक, इस घेराबंदी में अमेरिका ने भारी सैन्य ताकत तैनात की है: 10,000 से अधिक सैनिक 12+ युद्धपोत 100+ लड़ाकू विमान इस मिशन का नेतृत्व एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln (CVN-72) कर रहा है, जो अरब सागर में मौजूद है। इस पर F-35C स्टील्थ फाइटर, F/A-18 जेट्स और आधुनिक हेलिकॉप्टर तैनात हैं। इसके अलावा गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Delbert D. Black (DDG-119) भी संदिग्ध जहाजों पर नजर बनाए हुए है। होर्मुज जलडमरूमध्य खुला, सिर्फ ईरानी पोर्ट्स पर पाबंदी अमेरिकी सेना ने साफ किया है कि Strait of Hormuz को बंद नहीं किया गया है। यह कार्रवाई केवल Iran के बंदरगाहों और उसकी तटीय सीमा तक सीमित है। ट्रम्प का सख्त संदेश अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा: “हमारी नेवी शानदार काम कर रही है। अब कोई भी जहाज हमारी मंजूरी के बिना ईरान की सीमा में घुसने की सोच भी नहीं सकता।” बातचीत फेल होने के बाद बढ़ा तनाव रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता बेनतीजा रही, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया। हालांकि, दोनों देशों के बीच फिलहाल दो हफ्ते का सीजफायर लागू है। जमीनी हकीकत भी अलग शिपिंग डेटा के अनुसार, घेराबंदी के बावजूद कुछ जहाज–जिनमें ईरानी टैंकर भी शामिल हैं–इस मार्ग से गुजरने में सफल रहे हैं। इससे स्थिति की जटिलता और बढ़ गई है। ईरान के खिलाफ अमेरिका की यह समुद्री घेराबंदी क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है। हालांकि, अमेरिका इसे सुरक्षा और रणनीतिक कदम बता रहा है, लेकिन इससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।