यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने गुरुवार (23 जुलाई) को लाल सागर (Red Sea) में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला करने का दावा किया है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, सऊदी झंडे वाले ऑयल टैंकर 'एन्सेलिया' (Anselia) पर मिसाइल हमला हुआ, जिससे जहाज में आग लग गई। घटना के बाद जहाज की ओर से तत्काल मदद की अपील की गई। हालांकि, किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। हूती का दावा- प्रतिबंध तोड़ रहे थे जहाज हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि 'एन्सेलिया' और 'लैला' उनके घोषित समुद्री प्रतिबंध का उल्लंघन कर रहे थे। संगठन का कहना है कि इसी वजह से दोनों जहाजों को निशाना बनाया गया। हूती के अनुसार, हमले में कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। मिसाइल लगने के बाद 'एन्सेलिया' में लगी आग समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, लाल सागर में सऊदी अरब के जिजान बंदरगाह के पास मौजूद 'एन्सेलिया' टैंकर के दाहिने हिस्से पर मिसाइल जैसी वस्तु आकर लगी, जिसके बाद जहाज में आग लग गई। चालक दल ने तुरंत मदद की गुहार लगाई और राहत अभियान शुरू किया गया। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा कंपनी Vanguard ने भी हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि घटना अल शुकैक तट से लगभग 130 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में हुई। फिलहाल किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल @HormuzReport नाम के एक्स (X) अकाउंट से एक वीडियो साझा किया गया है, जिसे हमले के बाद का बताया जा रहा है। वीडियो में जहाज से धुआं उठता दिखाई दे रहा है। हालांकि, वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। समुद्री नाकेबंदी के बाद बढ़ा तनाव हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की थी। संगठन का दावा है कि इस कदम से सऊदी आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित होगी और वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। हूती ने यह भी दावा किया कि चेतावनी के बाद करीब 10 जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सोमवार को एक वाणिज्यिक जहाज पर मिसाइल हमला हुआ, जिसके बाद उसमें भीषण आग लग गई। हादसे के बाद जहाज पर सवार सभी चालक दल (क्रू) के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना ने पहले से जारी अमेरिका-ईरान तनाव के बीच क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं। UKMTO ने की हमले की पुष्टि ब्रिटेन की यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मिसाइल हमले के तुरंत बाद चालक दल ने जहाज खाली कर दिया था। बाद में एक टग बोट की मदद से सभी क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। ओमान के कुमजार के पास हुआ हमला UKMTO के अनुसार, हमला ओमान के कुमजार से करीब 15 किलोमीटर (8 समुद्री मील) उत्तर-पश्चिम में हुआ। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और अब वह बिना चालक दल के समुद्र में बह रहा है। आग पर अभी तक पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है। एजेंसी ने क्षेत्र से गुजरने वाले सभी जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की सलाह दी है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच बढ़ा खतरा यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका ने अपने एक और सैनिक की मौत की पुष्टि के बाद सोमवार को ईरान के उत्तर-पश्चिमी शहर तबरेज पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों बहरीन और कुवैत को निशाना बनाया। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा (5th Fleet) तैनात है, जिससे इस जवाबी कार्रवाई को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समुद्री व्यापार पर बढ़ा संकट होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ते हमलों और सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग उद्योग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर पनामा ने पूरी दुनिया को चेतावनी दी है। पनामा के विदेश मंत्री जेवियर एडुआर्डो मार्टिनेज-अचा वास्केज ने कहा कि यदि इस अहम समुद्री मार्ग पर किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर एएनआई के अनुसार, विदेश मंत्री वास्केज ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यदि यहां तनाव बढ़ता है या नौवहन बाधित होता है, तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। उन्होंने बताया कि पनामा भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित तेल पर निर्भर है, इसलिए यह संकट उनके देश के लिए भी चिंता का विषय है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर चिंता वास्केज ने बताया कि भारत के अधिकारियों के साथ हुई बातचीत में होर्मुज क्षेत्र में तैनात भारतीय नाविकों (सीफेयरर्स) की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों पर कार्यरत हैं और मौजूदा हालात उनकी सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हैं। पनामा ने इसे मानवीय और वैश्विक समुद्री सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। समुद्री कानून का पालन करने की अपील पनामा के विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश दुनिया के सबसे बड़े शिपिंग रजिस्ट्रियों में शामिल है, इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का सम्मान करने और किसी भी परिस्थिति में समुद्री रास्तों को बाधित नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अखंडता, देशों की संप्रभुता और पनामा नहर की तटस्थता जैसे सिद्धांतों की रक्षा करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। भारत से सहयोग की उम्मीद वास्केज ने बताया कि उनकी भारत यात्रा का एक अहम उद्देश्य पनामा नहर की तटस्थता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते में भारत की भागीदारी पर चर्चा करना भी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है और पनामा चाहता है कि भारत इस महत्वपूर्ण व्यवस्था का हिस्सा बने। IMO के साथ बढ़ाई जा रही समुद्री सुरक्षा उन्होंने कहा कि पनामा अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के साथ मिलकर दुनिया भर के नाविकों की सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। उनका मानना है कि समुद्री विवादों का समाधान सैन्य टकराव से नहीं, बल्कि बातचीत, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन से होना चाहिए। भारत के रुख का किया समर्थन मिडिल ईस्ट में जारी तनाव पर पनामा ने भारत के संयमित रुख का समर्थन करते हुए कहा कि शांति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान ही मौजूदा संकट का स्थायी समाधान है। विदेश मंत्री वास्केज ने दोहराया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी देशों और जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए, क्योंकि यही वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और विश्व अर्थव्यवस्था की स्थिरता की सबसे बड़ी गारंटी है।
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच मंगलवार को कई गंभीर दावे सामने आए हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और तेज हो गया है। हालांकि, इन घटनाओं के कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क को लेकर चर्चा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा शुल्क वसूले जाने पर विचार किया जा सकता है। इसे लेकर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक नीति सार्वजनिक नहीं की गई है। ईरान की जवाबी कार्रवाई के दावे मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े कुछ ठिकानों एवं जहाजों को निशाना बनाया। इन दावों के संबंध में संबंधित देशों की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय होने की रिपोर्ट कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि जॉर्डन की सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी ओर आने वाली कई मिसाइलों को बीच रास्ते में नष्ट कर दिया। हालांकि, इस संबंध में उपलब्ध जानकारी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सकी है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर असर डाल सकता है। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों तथा कथित हमलों को लेकर कई दावे सामने आए हैं, लेकिन सभी घटनाओं की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। ऐसे में स्थिति पर दोनों देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के आधिकारिक बयानों का इंतजार किया जा रहा है।
नई दिल्ली/अबू धाबी: होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों पर कथित मिसाइल हमले में एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल हो गए। यूएई रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि यह हमला ईरान की क्रूज मिसाइलों से किया गया और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है। होर्मुज में दो तेल टैंकरों पर हमला यूएई रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 'मोम्बासा' और 'अल बहियाह' नाम के दो तेल टैंकर ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर होर्मुज के दक्षिणी शिपिंग मार्ग पर गुजर रहे थे। इसी दौरान उन पर कथित तौर पर ईरान की दो क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। हमले के बाद दोनों टैंकरों में आग लग गई। हालांकि, राहत एवं बचाव दल ने समय रहते आग पर काबू पा लिया और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। एक भारतीय की मौत, आठ घायल रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, हमले में मोम्बासा टैंकर पर तैनात एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो गई। इसके अलावा आठ लोग घायल हुए, जिनमें छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। घायलों में चार की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका इलाज जारी है। यूएई ने हमले की कड़ी निंदा की यूएई रक्षा मंत्रालय ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि इस तरह के हमले पूरे क्षेत्र की शांति और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। मंत्रालय ने कहा कि देश अपनी संप्रभुता, राष्ट्रीय हितों और समुद्री सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाने को तैयार है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यूएई की सेना और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी खतरे का जवाब देने में सक्षम हैं। अफवाहों से बचने की अपील रक्षा मंत्रालय ने नागरिकों से केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लेने की अपील की है। मंत्रालय ने कहा कि अपुष्ट खबरों और अफवाहों को साझा करने से बचें, ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी या अनावश्यक दहशत न फैले। क्षेत्र में बढ़ा तनाव होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। इस क्षेत्र में हाल के दिनों में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। इस ताजा घटना के बाद पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
तेहरान/वॉशिंगटन: हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और गहरा गया है। ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि वह किसी भी कीमत पर अमेरिका को हॉर्मुज में दखल नहीं देने देगा। साथ ही खाड़ी देशों को भी चेतावनी दी गई है कि यदि उन्होंने अमेरिका को सैन्य या लॉजिस्टिक सहायता दी, तो इसे ईरान के खिलाफ युद्ध में भागीदारी माना जाएगा। ईरान की अमेरिका को सीधी चेतावनी ईरानी सेना के खात्म अल-अनबिया मुख्यालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जोलफघारी ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और प्रबंधन में किसी भी अमेरिकी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी सैन्य जहाज या सुरक्षा बल ईरान की अनुमति के बिना इस क्षेत्र में सक्रिय हुए, तो उन्हें कड़ा जवाब दिया जाएगा। खाड़ी देशों को भी दी चेतावनी ईरान ने बहरीन, कुवैत, ओमान और अन्य क्षेत्रीय देशों को भी संदेश दिया है कि यदि उन्होंने अमेरिका को सैन्य अड्डे, हथियार, खुफिया जानकारी या लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई, तो उन्हें भी संघर्ष का पक्ष माना जाएगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में पूरा पश्चिम एशिया बड़े युद्ध की चपेट में आ सकता है। ट्रंप ने खुद को बताया 'गार्डियन ऑफ हॉर्मुज' इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका अब "Guardian of the Hormuz Strait" की भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान के जहाजों और उससे जुड़े व्यापार पर समुद्री नाकेबंदी लागू की जाएगी, जबकि अन्य देशों के जहाजों को सुरक्षित आवाजाही दी जाएगी। साथ ही हॉर्मुज से गुजरने वाले कार्गो जहाजों पर 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लगाने की भी घोषणा की गई है। हालिया सैन्य कार्रवाई से बढ़ा तनाव अमेरिकी सेना ने हाल के दिनों में ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया। दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है। वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है असर हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी का बड़ा हिस्सा गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहां सैन्य टकराव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अब इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का "गार्डियन" होगा। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ फिर से नौसैनिक नाकेबंदी (Blockade) लागू करने की घोषणा की है और कहा है कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले सभी गैर-ईरानी व्यापारिक जहाजों से 20% सुरक्षा शुल्क (Security Fee) लिया जाएगा। ट्रंप ने Truth Social पर किया ऐलान डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहेगा और अमेरिका इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान के जहाजों और उसके व्यापारिक साझेदारों पर नाकेबंदी लागू रहेगी, जबकि अन्य देशों के जहाज इस मार्ग का उपयोग कर सकेंगे। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था की लागत के बदले सभी कार्गो जहाजों पर 20% शुल्क लगाया जाएगा। सिर्फ ईरान और उसके साझेदार होंगे निशाने पर ट्रंप के अनुसार, नई नीति का उद्देश्य वैश्विक व्यापार को रोकना नहीं बल्कि ईरान पर दबाव बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध केवल ईरान और उसके साथ व्यापार करने वाले जहाजों पर लागू होगा, जबकि अन्य देशों के लिए मार्ग खुला रहेगा। 20% सुरक्षा शुल्क की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में अमेरिका का भारी खर्च होता है। इसी खर्च की भरपाई के लिए इस मार्ग से गुजरने वाले कार्गो जहाजों पर 20% सुरक्षा शुल्क वसूला जाएगा। उन्होंने कहा कि इसकी प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय कानून पर उठे सवाल ट्रंप की घोषणा के बाद संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय समुद्री संस्था (IMO) ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर एकतरफा शुल्क लगाना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुरूप नहीं माना जाता। कई शिपिंग विशेषज्ञों ने भी इस प्रस्ताव की वैधता और व्यवहारिकता पर सवाल उठाए हैं। ईरान की चेतावनी ईरान की सैन्य कमान ने अमेरिका के दावे को खारिज करते हुए कहा कि वह किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा। ईरान ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी दखल से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ेगा तथा इसके लिए अमेरिका और उसके सहयोगी जिम्मेदार होंगे। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या नई पाबंदी वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक असर डाल सकती है।
US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर दोनों देशों के दावों में टकराव सामने आया है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए यह समुद्री मार्ग खुला है, जबकि ईरान ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि ट्रांजिट परमिट के बिना यहां से गुजरना संभव नहीं होगा। अमेरिका का दावा- अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए रास्ता खुला अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य उन सभी जहाजों के लिए खुला है जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत कानूनी रूप से यात्रा करना चाहते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान का इस जलडमरूमध्य पर कोई नियंत्रण नहीं है और जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। ईरान ने अमेरिकी दावे को बताया गलत फारसी खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण (PGCA) ने अमेरिकी दावे को खारिज करते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के कारण फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन संभव नहीं है। प्राधिकरण ने कहा कि इस मार्ग से गुजरने के लिए ट्रांजिट परमिट अनिवार्य होगा और परमिट केवल आधिकारिक प्रक्रिया के तहत ही जारी किए जाएंगे। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में तनाव कम होने के बाद ही सामान्य आवाजाही बहाल की जाएगी। जहाज पर हमले के बाद बढ़ा सैन्य तनाव रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कंटेनर जहाज पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कतर, कुवैत, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की दिशा में मिसाइल हमले किए। हमले के दौरान कंटेनर जहाज में आग लग गई और चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा। अमेरिका का दावा- ईरान के 140 ठिकानों पर हमला अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि उसने ईरान के लगभग 140 सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इनमें कथित तौर पर मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, हथियार भंडार, संचार केंद्र और अन्य सैन्य प्रतिष्ठान शामिल थे। वैश्विक व्यापार के लिए अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। खाड़ी देशों से निकलने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर असर डाल सकता है।
जकार्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई ऊंचाई देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की साझेदारी केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विकास, लोकतंत्र, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार जैसे कई अहम मुद्दों पर भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण रखा। भारत विकास में विश्वास रखता है, विस्तारवाद में नहीं प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की नीति हमेशा विकास, सहयोग और साझी प्रगति पर आधारित रही है। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि भारत विस्तारवाद की नहीं, बल्कि विकासवाद की सोच पर विश्वास करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनों का सम्मान करना चाहिए। हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर रखा भारत का पक्ष दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र सभी देशों के लिए खुला, सुरक्षित और स्वतंत्र होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समुद्र किसी को अलग करने का माध्यम नहीं, बल्कि देशों को जोड़ने का रास्ता है। समुद्री व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। लोकतंत्र को बताया सबसे बड़ी ताकत प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया दुनिया के दो बड़े लोकतांत्रिक देश हैं। जब दोनों देश मिलकर आगे बढ़ते हैं तो पूरी दुनिया को यह संदेश मिलता है कि लोकतंत्र विकास और स्थिरता का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्य भविष्य की साझेदारी को और मजबूत करेंगे। आतंकवाद और साइबर खतरों से मिलकर मुकाबला प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद और कट्टरपंथ को वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि भारत और इंडोनेशिया इन खतरों से मिलकर मुकाबला करेंगे। उन्होंने साइबर सुरक्षा को भी भविष्य की बड़ी चुनौती बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए अब संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं में व्यापक सुधार का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाओं को आज की वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। रक्षा और व्यापार समेत 12 समझौतों पर हस्ताक्षर संसद में संबोधन से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं की मौजूदगी में रक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि, स्वास्थ्य, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल सहयोग और व्यापार सहित करीब 12 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों से दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। तीन देशों की यात्रा पर हैं प्रधानमंत्री मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों के दौरे पर हैं। इस यात्रा का पहला चरण इंडोनेशिया है, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। इंडोनेशिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा करेंगे, जहां वे द्विपक्षीय सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर शीर्ष नेताओं के साथ चर्चा करेंगे।
दुबई: होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने सोमवार को होर्मुज से गुजर रहे दो वाणिज्यिक जहाजों पर कम से कम दो मिसाइलें दागीं। हमले में दोनों जहाजों को नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी के हताहत होने की तत्काल सूचना नहीं है। यह घटना ऐसे समय हुई है जब कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री हमलों को रोकने के लिए बना अस्थायी युद्धविराम समझौता समाप्त हुआ है। दो जहाज बने निशाना रिपोर्ट के मुताबिक, मिसाइल हमले होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो कमर्शियल जहाजों पर किए गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार जहाजों को क्षति पहुंची है, लेकिन चालक दल सुरक्षित बताया जा रहा है। घटना के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। तेल टैंकर में लगी भीषण आग ब्रिटेन के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने बताया कि मंगलवार सुबह ओमान के लीमाह तट के पास एक तेल टैंकर पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। हमला जहाज के बाईं ओर हुआ, जिसके बाद टैंकर में आग लग गई। उस समय जहाज होर्मुज स्ट्रेट से निकलकर ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ रहा था। ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार, घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। ट्रंप के बयान के बाद बढ़ी चर्चा हमलों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए अस्थायी समझौते पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अमेरिका ने ईरान को "अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह की छुट्टी" दी थी। ट्रंप का यह बयान ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार के संदर्भ में माना गया, जिनकी इस वर्ष अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में मौत हुई थी। समझौते पर उठे सवाल हालिया घटनाओं के बाद अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट में हमले रोकने के उद्देश्य से हुए समझौते की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर तनाव लगातार बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। वैश्विक व्यापार के लिए अहम है होर्मुज स्ट्रेट होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य गतिविधि या हमले से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल संबंधित देशों की नौसेनाएं स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और हमलों की विस्तृत जांच जारी है।
नई दिल्ली: लाल सागर (Red Sea) में यमन के तट के पास रविवार को एक मालवाहक जहाज (Cargo Ship) पर अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने हमला कर दिया। इस घटना की पुष्टि ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने की है। फिलहाल हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। यमन के होदेइदा तट के पास हुआ हमला ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, हमला यमन के तटीय शहर होदेइदा से लगभग 30 समुद्री मील (करीब 55 किलोमीटर) दक्षिण-पश्चिम में हुआ। होदेइदा पर वर्तमान में ईरान समर्थित हूती (Houthi) विद्रोहियों का नियंत्रण है। समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज के चालक दल ने अज्ञात हथियारबंद हमलावरों द्वारा निशाना बनाए जाने की सूचना सुरक्षा एजेंसियों को दी। जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, हाल के महीनों में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर दोबारा हमले करने की चेतावनी दी थी। फिलहाल इस घटना को लेकर हूती संगठन की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पहले भी निशाने पर रहे हैं जहाज गाजा युद्ध के दौरान हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले कई वाणिज्यिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। इन हमलों के चलते कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने स्वेज नहर का रास्ता छोड़कर अफ्रीका के दक्षिणी छोर केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबी दूरी तय करनी शुरू कर दी थी, जिससे वैश्विक व्यापार और शिपिंग लागत पर असर पड़ा। सोमाली समुद्री डाकुओं की गतिविधियां भी बढ़ीं लाल सागर और अदन की खाड़ी में हाल के दिनों में सोमाली समुद्री डाकुओं की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। 1 जुलाई को यमन के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह बलहाफ से करीब 76 समुद्री मील (140 किलोमीटर) दक्षिण में एक संदिग्ध समुद्री डकैती की घटना सामने आई थी। उस दौरान चार हथियारबंद हमलावरों ने एक छोटी नाव के जरिए एक जहाज के ब्रिज पर हमला किया था, जिससे मामूली नुकसान हुआ था। जांच जारी यूकेएमटीओ और अन्य समुद्री सुरक्षा एजेंसियां घटना की जांच कर रही हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ताजा हमले के पीछे कौन-सा संगठन या समूह शामिल था। लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
नई दिल्ली/विक्टोरिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय सेशेल्स यात्रा के दौरान भारत और सेशेल्स ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष, कृषि और शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 19 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद इन समझौतों की घोषणा की गई। इनका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि, बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग, यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली, एक्जिम बैंक के माध्यम से व्यापक ऋण सुविधा, और सेशेल्स के नए राष्ट्रीय अस्पताल की प्रारंभिक तैयारियों से जुड़े समझौतों पर सहमति बनी है। सेशेल्स की समुद्री सुरक्षा को मिलेगा भारत का सहयोग भारत ने सेशेल्स की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। भारत सेशेल्स को एक तेज गश्ती पोत (Fast Patrol Vessel) उपहार में देगा। इसके अलावा सेशेल्स रक्षा बल को 10 यूटिलिटी वाहन और पांच लेजर रेडियल श्रेणी की नौकाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। भारत ने यह भी घोषणा की कि सेशेल्स कोस्ट गार्ड के पोत पीएस जोरोस्टर के पुनर्निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। साथ ही सेशेल्स के लिए उपलब्ध कराए गए डोर्नियर विमान को आधुनिक ग्लास कॉकपिट प्रणाली से अपग्रेड किया जाएगा। विकास परियोजनाओं को भी मिला बढ़ावा भारत ने विकास सहयोग के तहत सेशेल्स को छह एंबुलेंस, 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट भी सौंपा। इसके साथ ही भारत-सेशेल्स राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक स्मारक लोगो जारी किया गया। दोनों देशों ने व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा केंद्र की आधारशिला का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन भी किया। सेशेल्स में लागू होगी UPI आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली डिजिटल सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड और सेशेल्स के केंद्रीय बैंक के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत सेशेल्स में भारत की यूपीआई (UPI) आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली को लागू किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। जन औषधि योजना के तहत मिलेंगी सस्ती भारतीय दवाएं स्वास्थ्य क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और सेशेल्स के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच हुए समझौते के तहत जन औषधि योजना के माध्यम से सेशेल्स के लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती भारतीय दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा नए राष्ट्रीय अस्पताल की प्रारंभिक तैयारियों को लेकर भी समझौता हुआ है। शिक्षा, कृषि और अंतरिक्ष सहयोग का होगा विस्तार भारत और सेशेल्स ने विदेश सेवा प्रशिक्षण, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा, नाविकों के प्रशिक्षण और प्रमाणन की पारस्परिक मान्यता तथा बाह्य अंतरिक्ष की खोज और उसके शांतिपूर्ण उपयोग से जुड़े कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों से दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग और क्षमता निर्माण को नई गति मिलेगी। 50 वर्षों की दोस्ती को मिली नई दिशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर सेशेल्स पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भी शामिल होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन 19 समझौतों के बाद भारत और सेशेल्स के संबंध केवल विकास सहयोग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री सहयोग और डिजिटल कनेक्टिविटी के नए दौर की शुरुआत भी करेंगे।
नई दिल्ली/विक्टोरिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स की संसद को संबोधित करते हुए भारत और सेशेल्स के ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ के हितों, जलवायु न्याय, समुद्री सुरक्षा और सतत विकास के साझा विजन पर आधारित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव उन देशों पर पड़ रहा है, जिनका वैश्विक उत्सर्जन में सबसे कम योगदान रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु कार्रवाई न्याय, जिम्मेदारी और समानता के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। छोटे द्वीपीय देशों की आवाज बनेगा भारत पीएम मोदी ने कहा कि भारत विकासशील और छोटे द्वीपीय देशों (SIDS) की चिंताओं को वैश्विक मंचों पर मजबूती से उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत और सेशेल्स समावेशी विकास तथा ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की साझा चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है। 'हिंद महासागर हमें जोड़ता है' प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंद महासागर भारत और सेशेल्स के बीच दूरी नहीं, बल्कि मजबूत संबंधों का माध्यम है। उन्होंने सेशेल्स को केवल एक छोटा द्वीपीय राष्ट्र नहीं, बल्कि विशाल समुद्री क्षेत्र वाला महत्वपूर्ण समुद्री देश बताया। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों का सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। ब्लू इकोनॉमी और समुद्री सहयोग पर जोर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ब्लू इकोनॉमी को भविष्य की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत और सेशेल्स समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफी, क्षमता निर्माण, समुद्री निगरानी और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का 'महासागर विजन' हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध बनाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। डिजिटल परिवर्तन में भारत करेगा सहयोग प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के डिजिटल मॉडल ने सुशासन, वित्तीय समावेशन और सरकारी सेवाओं की पहुंच को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि यदि सेशेल्स अपने डिजिटल परिवर्तन को आगे बढ़ाना चाहता है तो भारत अपने अनुभव, तकनीकी विशेषज्ञता और डिजिटल समाधान साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 50 वर्षों की दोस्ती का किया उल्लेख प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि सेशेल्स की स्वतंत्रता के समय भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि वहां मौजूद था और आज स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस तरकश और आईएनएस इक्षक भी सेशेल्स पहुंचे हैं। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे विश्वास और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बताया। 'भारत हमेशा रहेगा भरोसेमंद साझेदार' अपने संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हर परिस्थिति में सेशेल्स का विश्वसनीय मित्र और विकास साझेदार बना रहेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, सतत विकास और ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा के लिए भविष्य में भी साथ मिलकर काम करते रहेंगे।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर सेशेल्स के लिए रवाना हो गए। 27 से 29 जून तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान वह सेशेल्स की आजादी के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री की यह पिछले 11 वर्षों में सेशेल्स की दूसरी यात्रा है। इससे पहले उन्होंने वर्ष 2015 में इस हिंद महासागर द्वीपीय देश का दौरा किया था। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारी और समुद्री सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। राष्ट्रीय दिवस परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी के साथ भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी हिस्सा लेंगे। राष्ट्रपति से द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर होगी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय संबंधों, हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग और विभिन्न क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। इसके अलावा वे सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा को भी संबोधित करेंगे। यह पहली बार होगा जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री सेशेल्स की संसद को संबोधित करेगा। प्रधानमंत्री वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे। सेशेल्स की लगभग 1.35 लाख की आबादी में करीब 12 हजार लोग भारतीय मूल के हैं, जो कुल आबादी का लगभग 8 से 9 प्रतिशत हिस्सा हैं। भारत-सेशेल्स संबंधों के 50 वर्ष पूरे रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस वर्ष भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता के सम्मान और लोगों के गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि फरवरी 2026 में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा के बाद यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने का अवसर होगा। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समृद्धि और सतत विकास के साझा लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा को संबोधित करना उनके लिए सम्मान की बात होगी और यह दोनों देशों के मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों तथा संसदीय परंपराओं का प्रतीक है। हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी पर रहेगा फोकस भारत के लिए सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेशेल्स भारत के 'विजन महासागर (MAHASAGAR)' का प्रमुख सहयोगी है और दोनों देश समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, आपदा प्रबंधन तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के दौरान समुद्री निगरानी, रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश और विकास परियोजनाओं पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है। 2015 के दौरे में मजबूत हुए थे रक्षा संबंध प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले मार्च 2015 में सेशेल्स का दौरा किया था। उस समय भारत ने सेशेल्स को दूसरा डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान देने की घोषणा की थी, जिससे उसकी तटीय सुरक्षा और समुद्री निगरानी क्षमता मजबूत हुई। इसी यात्रा के दौरान भारत की सहायता से विकसित तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का भी उद्घाटन किया गया था। यह परियोजना हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा और जहाजों की निगरानी बढ़ाने की भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जाती है। इंदिरा गांधी के बाद मोदी का दूसरा ऐतिहासिक दौरा सेशेल्स की यात्रा करने वाली पहली भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं, जिन्होंने 1976 में देश की स्वतंत्रता के बाद वहां का दौरा किया था और 1981 में दोबारा सेशेल्स गई थीं। इसके बाद करीब 34 वर्षों तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस द्वीपीय राष्ट्र की यात्रा नहीं की। वर्ष 2015 में नरेंद्र मोदी ने इस सिलसिले को आगे बढ़ाया और अब 2026 का यह दौरा भारत-सेशेल्स संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते सामरिक सहयोग के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
Ship Attack in Hormuz Strait: मध्य पूर्व में हालात सामान्य होने की उम्मीदों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास सिंगापुर के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज पर कथित हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने खाड़ी क्षेत्र से फंसे जहाजों की निकासी का अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया है। घटना के बाद समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। ओमान के पास मालवाहक जहाज पर हमला ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी UK Maritime Trade Operations (UKMTO) के अनुसार, सिंगापुर के झंडे वाला मालवाहक जहाज एवर लवली (Ever Lovely) ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास गुजर रहा था, तभी उस पर एक प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। हमले में हुए नुकसान और हताहतों को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यह घटना ऐसे समय हुई है जब ईरान पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को तय समुद्री मार्गों का पालन करने की चेतावनी दे चुका था। IMO ने सुरक्षा समीक्षा तक रोका निकासी अभियान हमले के बाद इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने खाड़ी क्षेत्र से फंसे जहाजों और नाविकों को सुरक्षित निकालने का अपना स्वैच्छिक अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया है। IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज ने कहा कि अभियान को तब तक रोका गया है, जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि निकासी सूची में शामिल सभी जहाजों और पूरे क्षेत्र में मौजूद अन्य पोतों के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि जिस जहाज पर हमला हुआ, वह उसके निकासी अभियान का हिस्सा नहीं था। दो वैकल्पिक समुद्री मार्ग बनाए गए थे IMO ने खाड़ी क्षेत्र से जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए दो वैकल्पिक समुद्री मार्ग निर्धारित किए थे। इनमें एक मार्ग ईरानी जलक्षेत्र से होकर गुजरता था, जबकि दूसरा ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर। इस पूरी प्रक्रिया पर अमेरिका भी नजर बनाए हुए था। लेकिन ताजा हमले के बाद इन दोनों मार्गों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। ईरान ने दोहराया अपना रुख ईरान ने संकेत दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन व्यवस्था पर उसका नियंत्रण जारी रहेगा। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि केवल तेहरान द्वारा निर्धारित समुद्री मार्गों पर ही सुरक्षित आवाजाही की गारंटी दी जा सकती है। संगठन ने चेतावनी दी कि निर्धारित रास्तों का पालन नहीं करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा कंपनी एम्ब्रे (Ambrey) ने भी दावा किया कि गुरुवार को IRGC ने पनामा के झंडे वाले दो जहाजों को अपना मार्ग बदलने के निर्देश दिए। तेल बाजार में दिखा तत्काल असर हमले की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया के कुल समुद्री तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रणनीतिक जलमार्ग से होकर गुजरता है। युद्धविराम के बाद बढ़ रही थी जहाजों की आवाजाही ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम लागू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होने लगी थी। समुद्री डेटा फर्म Lloyd's List Intelligence के अनुसार, पिछले सप्ताह इस मार्ग से 125 जहाज गुजरे, जबकि उससे पहले केवल 33 जहाजों ने इस रास्ते का इस्तेमाल किया था। बुधवार को 78 जहाजों की आवाजाही युद्ध शुरू होने के बाद का सबसे बड़ा दैनिक आंकड़ा रही। ताजा हमले के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री यातायात की रफ्तार एक बार फिर प्रभावित हो सकती है। अमेरिका ने जताया भरोसा अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। उनके अनुसार, पिछले 24 घंटों में इस मार्ग से करीब 2 करोड़ बैरल तेल का परिवहन हुआ, जो संघर्ष से पहले के स्तर के करीब माना जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक हिंद महासागर के द्वीपीय देश सेशेल्स की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वह सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा और विकास सहयोग सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर होगा दौरा विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह यात्रा सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर करेंगे। अपने प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें दोनों देशों के संबंधों की समीक्षा की जाएगी और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में होंगे शामिल प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के 50वें वर्ष के समारोह में विशेष अतिथि के रूप में हिस्सा लेंगे। इस अवसर पर भारतीय सशस्त्र बलों का एक दल और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी समारोह में भाग लेंगे, जो दोनों देशों के रक्षा सहयोग और मजबूत रणनीतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। संसद को करेंगे संबोधित, भारतीय समुदाय से भी मिलेंगे यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की संसद को संबोधित करेंगे। इसके अलावा वह वहां रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक एवं जन-से-जन संबंधों को मजबूत करने पर जोर देंगे। भारत-सेशेल्स संबंधों को मिलेगी नई मजबूती विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह दौरा भारत और सेशेल्स के बीच दशकों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों को नई दिशा देगा। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, विकास परियोजनाओं और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान रहेगा। हिंद महासागर में भारत का अहम साझेदार है सेशेल्स सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है। भारत की 'सागर' (Security and Growth for All in the Region) नीति, समुद्री सुरक्षा रणनीति और ग्लोबल साउथ देशों के साथ सहयोग बढ़ाने में सेशेल्स की अहम भूमिका मानी जाती है। यही वजह है कि इस यात्रा को क्षेत्रीय रणनीति और हिंद महासागर में भारत की बढ़ती भूमिका के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2015 के बाद प्रधानमंत्री मोदी की पहली सेशेल्स यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले वर्ष 2015 में सेशेल्स की यात्रा पर गए थे। लगभग एक दशक बाद हो रही यह यात्रा दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और समुद्री सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
तेहरान: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को लेकर ईरान ने नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बाद भले ही इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को दोबारा व्यापारिक गतिविधियों के लिए खोल दिया गया हो, लेकिन अब यहां से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए अनिवार्य शर्तें लागू कर दी गई हैं। नए नियमों के तहत किसी भी जहाज को होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश से कम से कम 48 घंटे पहले अपनी यात्रा की जानकारी देनी होगी। इसके अलावा जहाजों को अग्रिम पंजीकरण, सरकारी अनुमति और पर्याप्त बीमा (इंश्योरेंस) का प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इन शर्तों का पालन किए बिना किसी भी जहाज को इस समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दुनिया की 20 फीसदी ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है इस मार्ग से होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। ऐसे में ईरान के नए नियमों का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों, ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग पर लागू नई व्यवस्था से शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम में वृद्धि हो सकती है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। नई अथॉरिटी करेगी निगरानी इन नियमों को लागू करने और समुद्री गतिविधियों की निगरानी के लिए ईरान ने एक नई संस्था 'पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' (PGSA) का गठन किया है। यह संस्था अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के तहत बनाई गई है, जिसका उद्देश्य तीन महीने से अधिक समय तक चले संघर्ष के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर सुरक्षित और नियंत्रित व्यापारिक गतिविधियों को फिर से बहाल करना है। PGSA ने कहा है कि 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' पर हस्ताक्षर और संबंधित विभागों से निर्देश मिलने के बाद इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य अथॉरिटी ने जहाज संचालकों के लिए एक आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल भी जारी किया है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के इच्छुक सभी जहाजों को इस पोर्टल पर अपनी यात्रा, कार्गो और बीमा संबंधी जानकारी पहले से दर्ज करनी होगी। अधिकारियों के मुताबिक, नई व्यवस्था का उद्देश्य जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, समुद्री यातायात को व्यवस्थित करना और क्षेत्र में किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम को कम करना है। वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर लागू नए नियमों से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ सकती है। चूंकि दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए नियमों के सख्त अनुपालन और अतिरिक्त प्रक्रियाओं का असर वैश्विक तेल बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है। ईरान का कहना है कि ये कदम सुरक्षा कारणों से उठाए गए हैं और इनका उद्देश्य व्यापारिक जहाजों की निर्बाध एवं सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
पाकिस्तान की नई हैंगोर क्लास पनडुब्बी (PNS Hangor) एक बार फिर बंगाल की खाड़ी को लेकर चर्चा में है। पाकिस्तान नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के हालिया बयानों ने संकेत दिए हैं कि इस पनडुब्बी का इस्तेमाल केवल अरब सागर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में बंगाल की खाड़ी में भी पाकिस्तान अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश करेगा। चीन में निर्मित पाकिस्तान की पहली हैंगोर क्लास पनडुब्बी पिछले सप्ताह कराची पहुंची। इसके बाद पाकिस्तान नौसेना के अधिकारियों ने इसे ‘गेम चेंजर’ करार दिया और कहा कि इस नई क्षमता से पाकिस्तान दूरस्थ समुद्री क्षेत्रों, विशेषकर बंगाल की खाड़ी, में भी अपनी मौजूदगी बनाए रखने में सक्षम होगा। श्रीलंका में पाकिस्तानी अधिकारी ने क्या कहा? कोलंबो स्थित समाचार पोर्टल ‘द मॉर्निंग’ के अनुसार, पनडुब्बी के एस्कॉर्ट बेड़े का नेतृत्व कर रहे पाकिस्तानी कमोडोर उमर फारूक ने कहा कि हैंगोर क्लास पनडुब्बियों के शामिल होने से पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में भी अपनी उपस्थिति बनाए रखने में सक्षम होगा। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान कुल आठ हैंगोर क्लास पनडुब्बियों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना पर काम कर रहा है। बंगाल की खाड़ी क्यों है रणनीतिक रूप से अहम? 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद से बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियां लगभग नगण्य रही हैं। दूसरी ओर यह क्षेत्र भारत की समुद्री रणनीति का महत्वपूर्ण केंद्र है। भारतीय नौसेना की पूर्वी कमान का मुख्यालय विशाखापट्टनम में स्थित है। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत को इस क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त प्रदान करते हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और इंडो-पैसिफिक रणनीति का बड़ा हिस्सा भी इसी समुद्री क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। क्या है PNS हैंगोर का इतिहास? ‘हैंगोर’ नाम भारतीय नौसैनिक इतिहास में विशेष महत्व रखता है। 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी पनडुब्बी पीएनएस हैंगोर ने भारतीय युद्धपोत आईएनएस खुकरी को निशाना बनाकर डुबो दिया था। इस हमले में 176 भारतीय नौसैनिक शहीद हुए थे, जिनमें कप्तान महेंद्र नाथ मुल्ला भी शामिल थे, जिन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। इस घटना के बावजूद पाकिस्तान 1971 का युद्ध हार गया और बांग्लादेश का जन्म हुआ। अब पाकिस्तान ने अपनी नई पनडुब्बी परियोजना के लिए फिर से ‘हैंगोर’ नाम चुना है। क्या है हैंगोर क्लास पनडुब्बियों की खासियत? हैंगोर क्लास पनडुब्बियां पाकिस्तान की सबसे बड़ी नौसैनिक आधुनिकीकरण परियोजना का हिस्सा हैं। इनमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक होने की बात कही जाती है, जिससे ये पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती हैं और उन्हें बार-बार सतह पर आकर बैटरी चार्ज करने की आवश्यकता नहीं होती। इस तकनीक के कारण इन पनडुब्बियों को ट्रैक करना और उनकी गतिविधियों का पता लगाना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है। बांग्लादेश से बढ़ती नजदीकियां भी बढ़ा रहीं चिंता 2024 में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के संबंधों में तेजी से सुधार देखने को मिला है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें शुरू हुई हैं, व्यापार में वृद्धि हुई है और रक्षा सहयोग को लेकर भी बातचीत तेज हुई है। नवंबर 2025 में पाकिस्तानी युद्धपोत पीएनएस सैफ की चट्टोग्राम यात्रा 1971 के बाद पहली ऐसी घटना थी, जब कोई पाकिस्तानी युद्धपोत बांग्लादेश पहुंचा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, खुफिया साझेदारी और संयुक्त सैन्य अभ्यासों को संस्थागत रूप देने पर भी चर्चा चल रही है। अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि बांग्लादेश पाकिस्तान को अपने बंदरगाहों या सैन्य सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति देगा। भारत की चिंता कितनी बढ़ी? विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की नई पनडुब्बियां तत्काल तौर पर बंगाल की खाड़ी में शक्ति संतुलन बदलने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन वे भारत के लिए एक अतिरिक्त सामरिक चुनौती जरूर पैदा कर सकती हैं। भारतीय नौसेना पिछले पांच दशकों में काफी मजबूत हुई है। भारत के पास परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियां, दो विमानवाहक पोत और लंबी दूरी की समुद्री निगरानी क्षमताएं मौजूद हैं। भारत अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है। इसके बावजूद पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक क्षमताएं और बांग्लादेश के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियां भारत के लिए एक नए रणनीतिक समीकरण को जन्म दे सकती हैं। इसी वजह से भारत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आसपास अपनी समुद्री और निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। करीब 16 महीनों बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने की यह पहली मुलाकात थी। इससे पहले दोनों नेता फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में मिले थे। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट की स्थिति, वैश्विक स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना दुनिया के लिए जरूरी : पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसे हर हाल में खुला और सुरक्षित बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लाखों नाविक समुद्री मार्गों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय नाविक भी शामिल हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण : ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की बातों का समर्थन करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। ट्रंप ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है और मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता बनाए रखने में उसकी भूमिका बेहद अहम है। आर्थिक और व्यापारिक सहयोग पर भी हुई चर्चा बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका में भारतीय निवेश और भारतीय कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। व्यक्तिगत संबंधों का भी किया जिक्र राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी लंबे समय से उनके मित्र रहे हैं और उनसे मुलाकात हमेशा सुखद अनुभव रहती है। जी7 सम्मेलन के दौरान हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत और अमेरिका की बढ़ती साझेदारी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी शांति वार्ता के बीच ट्रंप प्रशासन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस एक ऐसी योजना पर चर्चा कर रहा है, जिसके तहत जहाज मालिक अतिरिक्त शुल्क देकर अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और प्राथमिकता के साथ गुजर सकेंगे। अधिकारियों के बीच इस प्रस्ताव को अनौपचारिक रूप से 'VIP पास योजना' कहा जा रहा है। अतिरिक्त शुल्क के बदले अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ Susie Wiles ने अधिकारियों को ऐसे उपाय खोजने का निर्देश दिया है, जिससे जहाज मालिक और बीमा कंपनियां दोबारा होर्मुज मार्ग का उपयोग करने के लिए तैयार हो सकें। एक अधिकारी के मुताबिक, वर्तमान परिस्थितियों में होर्मुज से गुजरने वाली कई समुद्री यात्राएं बीमा जोखिम के दायरे में हैं। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जहाजों को दोबारा बीमा कवरेज कैसे उपलब्ध कराया जाए। दुनिया के 20% तेल व्यापार की जीवनरेखा है होर्मुज Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता था। ईरान द्वारा अमेरिकी और इजरायली हमलों के जवाब में जहाजों पर हमले किए जाने के बाद इस समुद्री मार्ग पर आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। इसका असर वैश्विक तेल बाजार और ईंधन कीमतों पर भी देखने को मिला। हाल के हफ्तों में शांति वार्ता शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें घटकर करीब 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची हैं, लेकिन वे अब भी संघर्ष से पहले के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। 'VIP पास' से प्राथमिकता के साथ सुरक्षित आवाजाही सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित योजना के तहत जहाज मालिक अतिरिक्त शुल्क देकर अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में होर्मुज से गुजर सकेंगे। एक अधिकारी ने कहा, "यह कुछ वैसा होगा जैसे जहाज के लिए एक 'VIP पास' जारी कर दिया जाए, जिससे उसे सुरक्षित और प्राथमिकता के साथ मार्ग उपलब्ध कराया जा सके।" विश्लेषकों का मानना है कि इस योजना का उद्देश्य यूरोपीय देशों को भी खाड़ी क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा में अधिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि पूरा बोझ केवल अमेरिका पर न रहे। ट्रंप पहले भी टोल वसूली की कर चुके हैं वकालत अप्रैल में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क अमेरिका को लेना चाहिए, ईरान को नहीं। उन्होंने कहा था, "हम विजेता हैं, फिर शुल्क हम क्यों न लें?" रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अमेरिकी रक्षा उत्पादन अधिनियम (Defense Production Act) के तहत अमेरिकी बीमा कंपनियों को होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को बीमा कवरेज देने के लिए बाध्य करने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। 20 अरब डॉलर के बीमा सुरक्षा प्रस्ताव में नहीं दिखी रुचि मार्च में ट्रंप प्रशासन ने जहाज मालिकों को करीब 20 अरब डॉलर तक की राजनीतिक जोखिम बीमा सुरक्षा देने की पेशकश की थी। ईरानी मिसाइलों, ड्रोन और तेज गति वाली नौकाओं से हमले की आशंका को देखते हुए अधिकांश शिपिंग कंपनियों ने इस प्रस्ताव में दिलचस्पी नहीं दिखाई। शांति वार्ता जारी, लेकिन जहाज मालिकों की चिंता बरकरार अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए वार्ता जारी है, लेकिन शिपिंग कंपनियां और बीमा उद्योग अभी भी सतर्क हैं। उन्हें आशंका है कि यदि शांति समझौता विफल रहा, तो होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा संकट और समुद्री सुरक्षा तनाव का केंद्र बन सकता है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन की प्रस्तावित 'VIP सुरक्षा पास' योजना केवल समुद्री सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को स्थिर रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
एवियन-ले-बैंस (फ्रांस): फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात एक बार फिर सुर्खियों में है। दोनों नेताओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ट्रंप सीढ़ियां चढ़ते समय प्रधानमंत्री मोदी की कलाई पकड़कर उनके साथ आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। यह मुलाकात करीब 16 महीने बाद दोनों नेताओं की पहली प्रत्यक्ष मुलाकात थी। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में आमने-सामने मिले थे, जब ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की थी। फोटोशूट के दौरान दिखी दोनों नेताओं की गर्मजोशी वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप अन्य विश्व नेताओं के साथ पारंपरिक फैमिली फोटो के लिए जाते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान एक छोटी सी सीढ़ी चढ़ते समय ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की कलाई पकड़ते हैं और दोनों साथ आगे बढ़ते हैं। वीडियो में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी भी ट्रंप के पास खड़ी होने की कोशिश करती दिखाई देती हैं। इसी दौरान राष्ट्रपति मैक्रों कहते हैं, "Ready Everybody?" इस पर प्रधानमंत्री मोदी मुस्कुराते हुए जवाब देते हैं, "We are always ready." यह संवाद भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। हाथ मिलाने के बाद कुछ देर हुई बातचीत फोटोशूट से पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत भी की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब भारत और अमेरिका के संबंध व्यापार, रणनीतिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर नए दौर से गुजर रहे हैं। हाल के महीनों में कई मुद्दों पर बढ़ी थीं चुनौतियां भारत-अमेरिका संबंधों को हाल के महीनों में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर काउंटर टैरिफ लगाए थे। इसके अलावा ओमान तट के पास एक व्यापारी जहाज पर अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भी दोनों देशों के संबंधों को लेकर सवाल उठे थे। इन चुनौतियों के बावजूद नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच संवाद और सहयोग लगातार जारी है। मार्को रुबियो ने दिया था ट्रंप का संदेश पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को निकट भविष्य में व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया था। रुबियो ने भारत को अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का "आधार स्तंभ" बताते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया था। जी7 मंच से पीएम मोदी ने उठाया समुद्री सुरक्षा का मुद्दा जी7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री व्यापार मार्गों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार पर पड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा, "वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी भय के अपना कर्तव्य निभा सकें।" ओमान की खाड़ी में तीन भारतीय नाविकों की हुई थी मौत प्रधानमंत्री का यह बयान उस घटना के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी बलों ने 8 जून को 'मारिवेक्स', 9 जून को 'सेटेबेलो' और 11 जून को 'जलवीर' नामक जहाजों के खिलाफ अभियान चलाया था। अमेरिका का आरोप था कि ये जहाज ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकेबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे थे। मोदी और ट्रंप की मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब दोनों देश व्यापार, समुद्री सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।