Middle East

मिस्र के दमियत्ता बंदरगाह पर गैस टैंकर में लगी आग और राहत कार्य
मिस्र के दमियत्ता बंदरगाह पर हमला, गैस टैंकर में लगी आग; मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव

ड्रोन हमले की आशंका, बंदरगाह पर आपातकालीन कार्रवाई   काहिरा, एजेंसियां। मिस्र के भूमध्यसागरीय तट पर स्थित दमियत्ता (Damietta) बंदरगाह पर बड़ा हमला हुआ है। एक गैस भंडारण टैंकर में आग लगने के बाद पूरे बंदरगाह पर हड़कंप मच गया। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि यह हमला ड्रोन के जरिए किया गया, हालांकि मिस्र सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर ड्रोन हमले की पुष्टि नहीं की है।   दो जहाजों तक पहुंची आग   हमले के बाद आग पहले अमेरिकी स्वामित्व वाले गैस स्टोरेज टैंकर Energos Winter में लगी और फिर पास खड़े दूसरे जहाज Gaslog Salem तक फैल गई। बंदरगाह पर मौजूद आपातकालीन टीमों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।   मध्य पूर्व में बढ़ा सुरक्षा संकट   यह घटना ऐसे समय हुई है जब अमेरिका, ईरान और उसके समर्थक समूहों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। मिस्र के रणनीतिक बंदरगाह पर हुए इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं।   जांच में जुटीं मिस्र की एजेंसियां   मिस्र के पेट्रोलियम मंत्रालय ने घटना की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। वहीं, समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रोन हमले की आशंका जताई है और बंदरगाह की सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
ईरान के सैन्य ठिकानों पर अमेरिका का बड़ा हवाई हमला
ईरान पर अमेरिका का बड़ा हवाई हमला, कई सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना; मध्य पूर्व में फिर बढ़ा तनाव

ईरान के मिसाइल हमले के जवाब में अमेरिकी कार्रवाई   वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका ने ईरान पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेना के अनुसार, इन हमलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई सैन्य ठिकानों, कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों तथा तटीय रक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई ईरान द्वारा एक दिन पहले मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए मिसाइल हमले के जवाब में की गई।   दो घंटे तक चला सैन्य अभियान   अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह सैन्य अभियान करीब दो घंटे तक चला। हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और भविष्य में अमेरिकी बलों तथा क्षेत्रीय सहयोगियों पर संभावित हमलों को रोकना बताया गया है।   ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी   ईरान ने अमेरिकी हमलों की निंदा करते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। तेहरान ने संकेत दिए हैं कि यदि ऐसे हमले जारी रहे तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं।   वैश्विक बाजार और तेल कीमतों पर नजर   अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी हलचल तेज हो गई है। निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों और मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और वित्तीय बाजारों पर पड़ सकता है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
Oil tankers passing through the Strait of Hormuz amid rising US-Iran tensions after Iran claimed to stop three vessels
US-Iran Conflict: होर्मुज में ईरान का बड़ा एक्शन, तीन तेल टैंकर रोकने का दावा; ट्रंप की चेतावनी के बाद बढ़ा तनाव

US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में चेतावनी की अनदेखी करने वाले तीन तेल टैंकरों को रोक दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद दोनों देशों के बीच टकराव और गहरा गया है। होर्मुज में तीन तेल टैंकर रोकने का दावा ईरान के सरकारी टीवी के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि जिन तीन तेल टैंकरों ने ईरान की चेतावनी को नजरअंदाज किया, उन्हें कुछ घंटे पहले रोक दिया गया। हालांकि, टैंकरों की पहचान और घटना की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसकी जब्त की गई संपत्तियों का इस्तेमाल करने वाले किसी भी देश या कंपनी के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कार्रवाई से पहले दी थी सख्त चेतावनी टैंकरों को रोकने के दावे से कुछ घंटे पहले ही ईरान ने दुनिया भर के देशों और शिपिंग कंपनियों को चेतावनी जारी की थी। ईरान का कहना था कि यदि किसी देश या कंपनी ने अमेरिका द्वारा जब्त की गई ईरानी संपत्तियों का उपयोग किया, तो उसके जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ट्रंप के फैसले से बढ़ा विवाद यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त हुए जहाजों को ईरान की जब्त संपत्तियों से मुआवजा दिया जाएगा। ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। ईरानी विदेश मंत्री ने जताई आपत्ति ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि किसी देश की जब्त संपत्तियों का इस्तेमाल ऐसे दावों के भुगतान के लिए करना, जिनका उन संपत्तियों से कोई सीधा संबंध नहीं है, अंतरराष्ट्रीय नियमों को कमजोर करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकारें इस तरह दूसरे देशों की संपत्तियों को जब्त कर उनका उपयोग करना शुरू कर देंगी, तो भविष्य में किसी भी देश या संस्था की संपत्ति सुरक्षित नहीं रहेगी और इससे वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अस्थिरता बढ़ेगी। अमेरिकी प्रस्ताव पर ईरान का कड़ा रुख ईरानी सैन्य कमान 'खातम अल-अंबिया' के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फिकारी ने भी अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी देश या कंपनी ने ईरान की जब्त संपत्तियों का इस्तेमाल किया, तो ईरान के सशस्त्र बल ऐसे जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका के इस कदम के गंभीर परिणाम हो सकते हैं और ईरान अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हुई है।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
India addresses the UN Security Council, condemning attacks on commercial ships carrying Indian sailors and urging maritime security
UNSC में भारत का सख्त संदेश: भारतीय जहाजों पर हमले बर्दाश्त नहीं, समुद्री सुरक्षा बहाल करने की मांग

India at UNSC: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भारतीय नाविकों वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। साथ ही, भारत ने क्षेत्र में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही बहाल करने की मांग की। भारतीय नागरिकों पर हमलों पर जताई चिंता डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की पहल पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि हालिया हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत, एक अन्य लापता है, जबकि कई भारतीय घायल हुए हैं। उन्होंने इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। इन जहाजों पर हुए हमलों की निंदा भारत ने विशेष रूप से GFS Galaxy, MT Al Bahia और MT Mombasa जैसे जहाजों पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर इस तरह की हिंसा वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। पी. हरीश ने कहा कि भारत समुद्री यात्रियों को निशाना बनाने और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर सुरक्षित आवाजाही में बाधा पहुंचाने वाली हर प्रकार की हिंसा की कड़ी निंदा करता है। भारत ने UNSC से क्या मांग की? भारत ने सुरक्षा परिषद से अपील की कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना तुरंत बंद किया जाए। भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होर्मुज जलडमरूमध्य समेत सभी वैश्विक समुद्री मार्गों पर स्वतंत्र, सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही जल्द से जल्द बहाल की जानी चाहिए। भारत ने दोहराया कि क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। भारत के लिए क्यों अहम है मिडिल ईस्ट? भारत ने सुरक्षा परिषद में स्पष्ट किया कि मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र उसके लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। भारत का ऊर्जा आयात, व्यापार और निवेश भी बड़े पैमाने पर इसी क्षेत्र से जुड़ा है। भारतीय प्रतिनिधि ने बताया कि खाड़ी देशों के साथ भारत का करीब 180 अरब डॉलर का वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार, 31 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और 52 अरब डॉलर की वार्षिक प्रेषण (Remittances) इस क्षेत्र के महत्व को दर्शाते हैं। क्षेत्रीय तनाव पर भारत की नजर भारत ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए सभी पक्षों को संयम बरतते हुए कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, ताकि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और आम नागरिकों की जान खतरे में न पड़े।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
US President Donald Trump speaking about Iran, warning of possible strikes on bridges and power plants if negotiations fail
US-Iran War: ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, बोले- डील नहीं हुई तो पुल और पावर प्लांट होंगे निशाने पर

US-Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि तेहरान अमेरिका के साथ समझौता करने में विफल रहता है, तो अमेरिकी सेना दोबारा सैन्य कार्रवाई करेगी। ट्रंप के मुताबिक, इस बार हमलों का लक्ष्य ईरान के रणनीतिक पुल, बिजली संयंत्र और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे हो सकते हैं। "एक घंटे में ज्यादातर पुल नष्ट कर सकता हूं" समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका एक घंटे से भी कम समय में ईरान के अधिकांश पुलों को तबाह कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि किसी भी देश के पुल और बिजलीघर उसकी आर्थिक और रणनीतिक रीढ़ होते हैं और इनके नष्ट होने के बाद दोबारा निर्माण में कई वर्ष लग जाते हैं। ट्रंप ने कहा कि यदि सैन्य कार्रवाई हुई तो ईरान को ऐसा नुकसान होगा, जिससे उबरने में उसे लंबा समय लग सकता है। परमाणु ठिकानों पर भी दी कार्रवाई की चेतावनी ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें ईरान के कथित 'पिकएक्स माउंटेन' परमाणु स्थल पर चल रही गतिविधियों की पूरी जानकारी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले भी ईरान के कई परमाणु ठिकानों को निशाना बना चुका है और यदि समझौता नहीं हुआ तो भविष्य में इस स्थल पर भी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को दोबारा मजबूत नहीं होने देना चाहता। बिजली संयंत्र निशाने पर, लेकिन आम नागरिकों को बचाने का दावा ट्रंप ने कहा कि बिजली संयंत्र भी संभावित सैन्य कार्रवाई के दायरे में हो सकते हैं क्योंकि इन्हें दोबारा स्थापित करना बेहद कठिन होता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले डीसैलिनेशन प्लांट को निशाना नहीं बनाएगा, क्योंकि उससे सीधे आम नागरिक प्रभावित होंगे। उनका दावा था कि अमेरिकी कार्रवाई का उद्देश्य आम जनता को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि ईरान की रणनीतिक और सैन्य क्षमता को कमजोर करना होगा। नेतन्याहू पर भी साधा निशाना इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सार्वजनिक बयान देने की जरूरत नहीं थी, क्योंकि अमेरिका पहले से ही ईरान की गतिविधियों पर करीबी नजर रखे हुए है। व्हाइट हाउस बैठक से पहले बढ़ा तनाव ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब व्हाइट हाउस में उनकी इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच ईरान, लेबनान, मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति और अब्राहम समझौते से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ट्रंप के ताजा बयान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। हालांकि फिलहाल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं भी बनी हुई हैं, लेकिन ट्रंप की चेतावनी ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
The White House in Washington as the US says military action against Iran remains an option despite a pause in strikes
ईरान पर 3 रात से नहीं हुआ हमला, लेकिन खतरा बरकरार; व्हाइट हाउस बोला- सैन्य कार्रवाई का विकल्प अब भी खुला

Iran-US Tension: अमेरिका ने लगातार तीन रातों से ईरान पर कोई नया सैन्य हमला नहीं किया है, लेकिन इससे दोनों देशों के बीच तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल सैन्य कार्रवाई रोकी गई है, लेकिन जरूरत पड़ने पर अमेरिका दोबारा हमला करने का विकल्प खुला रखे हुए है। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन फिलहाल सीधे सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर भी काम कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और आगे की रणनीति परिस्थितियों के अनुसार तय की जाएगी। कूटनीति और आर्थिक दबाव पर जोर अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वॉशिंगटन इस समय ईरान पर दबाव बनाने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें कूटनीतिक वार्ता, नए आर्थिक प्रतिबंध और समुद्री नाकेबंदी जैसे कदम शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, समुद्री नाकेबंदी के कारण ईरान को हर दिन करोड़ों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो रहा है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। हालांकि व्हाइट हाउस ने यह भी साफ किया है कि यदि हालात बिगड़ते हैं या अमेरिकी हितों को खतरा होता है, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प तुरंत अपनाया जा सकता है। इजरायल की ईरान को सख्त चेतावनी इस बीच इजरायल भी पूरी तरह अलर्ट मोड में है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि यदि इजरायल पर किसी भी तरह का हमला हुआ तो उसका जवाब "बहुत ही कड़े और निर्णायक तरीके" से दिया जाएगा। उनके इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं। यूक्रेन के दावे से बढ़ा नया विवाद तनाव के बीच यूक्रेन ने दावा किया है कि उसने कैस्पियन सागर में ईरानी सैन्य सामान ले जा रहे जहाजों को निशाना बनाया है। इस दावे के बाद क्षेत्रीय समीकरण और जटिल हो गए हैं। ईरान इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, हालांकि इस दावे पर उसकी ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। मिडिल ईस्ट में हालात अब भी संवेदनशील भले ही पिछले तीन दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य हमले नहीं हुए हैं, लेकिन क्षेत्र में तनाव अभी भी बरकरार है। अमेरिका, ईरान, इजरायल और अन्य सहयोगी देशों की गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई सैन्य या कूटनीतिक घटना से हालात तेजी से बदल सकते हैं और पूरे पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ सकता है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
Bihar Bandh
बिहार बंद विवाद: तेजस्वी यादव ने न्यायिक जांच की मांग दोहराई, सरकार और सीएम सम्राट चौधरी पर साधा निशाना

पटना। बिहार की राजनीति में छात्र आंदोलन और बिहार बंद के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सियासी घमासान जारी है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक बार फिर आंदोलन के दौरान कथित AK-47 फायरिंग मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और फायरिंग के आदेश देने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।   फायरिंग मामले की न्यायिक जांच की मांग   तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान कथित तौर पर AK-47 का इस्तेमाल किया गया और इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए ताकि जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान हो सके।   सरकार के 100 दिन पर उठाए सवाल   तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के 100 दिन पूरे होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को बताए कि इस अवधि में आम लोगों के हित में क्या प्रमुख कार्य किए गए। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री और सरकार की कार्यशैली पर भी टिप्पणी की।   छात्रों की गिरफ्तारी पर जताई नाराजगी   आरजेडी नेता ने आरोप लगाया कि समझौते के बाद भी बड़ी संख्या में छात्रों को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए और युवाओं के साथ सख्ती उचित नहीं है।   सरकार पर लगाए वादाखिलाफी के आरोप   तेजस्वी यादव ने भाजपा और राज्य सरकार पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्रों, किसानों और महिलाओं से किए गए वादों को पूरा करने के बजाय सरकार विपक्ष और आंदोलनकारियों पर कार्रवाई करने में लगी है। वहीं, सरकार की ओर से इन आरोपों पर अलग रुख रखा गया है।

anjali kumari जुलाई 28, 2026 0
Smoke rises near Saudi oil infrastructure after an alleged Houthi drone attack amid escalating Middle East tensions
मिडिल ईस्ट फिर तनाव में: सऊदी के तेल ठिकानों पर हूती का ड्रोन हमला, वैश्विक तेल सप्लाई पर बढ़ी चिंता

Houthis Attack Saudi Arabia: अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य हमलों में फिलहाल कमी आई है, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सोमवार को यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई तेल ठिकानों पर ड्रोन हमला किया, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हूती संगठन के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि यह हमला सऊदी अरब द्वारा यमन के हवाई क्षेत्र में ड्रोन भेजे जाने के जवाब में किया गया। उन्होंने कहा कि हमले का निशाना पूर्वी सऊदी अरब से लाल सागर के यनबू बंदरगाह तक कच्चा तेल पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण पाइपलाइन नेटवर्क था। तेल सप्लाई पर बढ़ा खतरा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण हाल के महीनों में सऊदी अरब इस पाइपलाइन के जरिए तेल निर्यात पर अधिक निर्भर हो गया है। ऐसे में इस नेटवर्क पर हमला वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह के हमले जारी रहे तो अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। बाजार को राहत, लेकिन खतरा बरकरार अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में अस्थायी कमी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कुछ राहत देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 6 प्रतिशत गिरकर 91 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई, जबकि शेयर बाजारों में भी निवेशकों का भरोसा लौटा है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यदि हूती हमले तेज होते हैं या क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल आ सकता है। अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की कोशिश इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तीसरे दिन भी कोई सीधा सैन्य हमला नहीं हुआ। कतर, ओमान और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं ताकि वार्ता दोबारा शुरू हो सके। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल कूटनीतिक प्रयासों को मौका देने का फैसला किया है, जबकि ईरान ने भी अपने हमले रोकने की पुष्टि की है। समुद्री मार्गों पर बना हुआ है खतरा हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कुछ कम हुआ है, लेकिन क्षेत्र के अहम समुद्री मार्ग अब भी जोखिम में हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जैसे रणनीतिक समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जा रही है। हूती विद्रोही पहले भी लाल सागर में व्यापारिक जहाजों और सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाने की धमकी दे चुके हैं, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran, claiming Tehran is now seeking negotiations after US military action
ट्रंप का दावा- ईरान की सैन्य ताकत तबाह, बोले- अब बातचीत के लिए खुद आगे आ रहा तेहरान

Donald Trump on Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य क्षमता लगभग पूरी तरह कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा कि अब तेहरान खुद बातचीत की पहल कर रहा है और दोनों देशों के बीच समझौते की संभावना बन रही है। एएनआई के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई का असर इतना बड़ा रहा कि ईरान अब मध्यस्थों के जरिए वार्ता का अनुरोध कर रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि यदि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ी तो दोनों देशों के बीच समझौता हो सकता है। 'अगर हम कमजोर होते तो ईरान बातचीत नहीं मांगता' ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका कमजोर स्थिति में होता तो ईरान कभी बातचीत की पहल नहीं करता। उनके मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान पर दबाव बढ़ा है और इसी वजह से वह कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत का अंतिम परिणाम क्या होगा, यह अभी देखना बाकी है। रूस की कथित मदद पर पुतिन से करेंगे बात यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के उस दावे पर भी ट्रंप ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि रूस ईरान को अमेरिकी ठिकानों की निगरानी के लिए सैटेलाइट संबंधी जानकारी दे रहा है। ट्रंप ने कहा कि वह इस मामले में सीधे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि रूस ने किसी तरह की सहायता दी भी है, तो उसका कोई बड़ा प्रभाव नजर नहीं आया है। ईरान की सैन्य क्षमता पर बड़ा दावा ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की सेना, वायुसेना और नौसेना की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान अब पहले जैसी सैन्य ताकत नहीं रखता और यही वजह है कि वह बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहता है। हालांकि, ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की ओर से भी इन बयानों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों और संभावित वार्ता पर दुनिया की नजर बनी हुई है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran during a public rally, warning of possible military action if talks fail
ईरान पर ट्रंप की सख्त चेतावनी, बोले- बातचीत विफल हुई तो फिर होगी सैन्य कार्रवाई

Trump on Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन अगर बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान को किसी तरह के दबाव या लालच से नहीं मनाया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे तो अमेरिका पहले की तरह सख्त कदम उठाएगा। "ईरान के साथ हमारी बातचीत अच्छी चल रही है। मुझे उम्मीद है कि कोई समझौता हो जाएगा। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम फिर वही करेंगे जो दो दिन पहले कर रहे थे।" — डोनाल्ड ट्रंप ड्रोन हमलों से फिर बढ़ी चिंता इस बीच 27 जुलाई को सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक में ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आईं। इन हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई रुकी हुई है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बरकरार है। अमेरिका ने फिलहाल रोके हवाई हमले 25 जुलाई को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ करीब दो सप्ताह से जारी हवाई अभियान को रोक दिया था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सैन्य नेतृत्व ने राष्ट्रपति ट्रंप को बताया कि अभियान से मिलने वाला प्रमुख रणनीतिक लाभ हासिल किया जा चुका है और अब महत्वपूर्ण सैन्य लक्ष्य सीमित रह गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने यह भी चेतावनी दी थी कि लगातार हमलों से अमेरिकी सेना के हवाई हथियारों का भंडार तेजी से घट रहा है। इसी कारण फिलहाल अभियान रोकने की सलाह दी गई। ईरान ने बातचीत के रास्ते खुले होने की बात कही वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान ने बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया है। उन्होंने बताया कि मध्यस्थ देशों के जरिए दोनों पक्षों के बीच अब भी संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। हालांकि उन्होंने उन खबरों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि ईरान ने स्वयं बातचीत की पहल की है। बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक प्रयासों के बीच अब दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते या आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
US President Donald Trump meets Ukrainian President Volodymyr Zelenskyy and Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu at the White House
व्हाइट हाउस में ट्रंप की अहम कूटनीतिक बैठकें आज, जेलेंस्की और नेतन्याहू से यूक्रेन युद्ध व ईरान पर होगी चर्चा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार को व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में यूक्रेन युद्ध, ईरान, मध्य पूर्व की सुरक्षा, लेबनान की स्थिति और क्षेत्रीय शांति प्रयासों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। नेतन्याहू के साथ ईरान और अब्राहम समझौते पर फोकस व्हाइट हाउस में ट्रंप और नेतन्याहू की बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान से जुड़े सुरक्षा हालात, लेबनान के साथ चल रही वार्ताएं और अब्राहम समझौतों (Abraham Accords) को आगे बढ़ाना होगा। वॉशिंगटन रवाना होने से पहले नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल की सुरक्षा मजबूत करना और क्षेत्र में शांति का विस्तार उनकी यात्रा की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में दोनों नेताओं की यह आठवीं आमने-सामने की मुलाकात होगी। जेलेंस्की से यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर चर्चा ट्रंप की दूसरी महत्वपूर्ण बैठक यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ होगी। व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, दोनों नेता रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के संभावित समाधान और शांति प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे। ट्रंप पहले भी युद्ध जल्द खत्म कराने की इच्छा जता चुके हैं। रूस और ईरान को लेकर भी होगी बातचीत हाल ही में जेलेंस्की ने आरोप लगाया था कि रूस, ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी उपलब्ध करा रहा है। हालांकि ट्रंप ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यदि ऐसी कोई जानकारी सामने आती है तो वह इस विषय पर सीधे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान पहले की तुलना में कमजोर स्थिति में है। उत्तर कोरिया की भूमिका पर भी नजर जेलेंस्की ने यह भी दावा किया है कि रूस, उत्तर कोरिया के करीब 30 हजार सैनिकों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हो सकती है। लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी हो सकते हैं शामिल बैठकों के बाद ट्रंप, जेलेंस्की और नेतन्याहू अमेरिका के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी शामिल हो सकते हैं। यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इन बैठकों को अमेरिकी विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
Oil tanker explosion in the Strait of Hormuz after reportedly hitting a sea mine
होर्मुज स्ट्रेट में बड़ा हादसा: समुद्री माइन से टकराकर ऑयल टैंकर में विस्फोट, ईरान ने बताया तय मार्ग से भटका जहाज

Staright Of Hormuz: दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट में बड़ा हादसा हुआ है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, निर्धारित समुद्री मार्ग से भटकने के बाद एक ऑयल टैंकर समुद्री माइन (Sea Mine) से टकरा गया, जिससे उसमें जोरदार विस्फोट हो गया। घटना के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कैसे हुआ हादसा? ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, ऑयल टैंकर ईरान द्वारा निर्धारित सुरक्षित समुद्री मार्ग छोड़कर दूसरे रास्ते पर चला गया था। इसी दौरान वह समुद्री माइन से टकरा गया, जिससे जहाज में भीषण विस्फोट हुआ। रिपोर्ट में टैंकर को "अवैध तेल टैंकर" बताया गया है। ईरान पहले भी कई बार चेतावनी दे चुका है कि निर्धारित मार्गों से हटकर गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बातचीत जारी हादसे के बावजूद ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट तथा आसपास के समुद्री मार्गों को फिर से सामान्य रूप से खोलने को लेकर बातचीत जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, हालांकि अंतिम समझौते तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है। अमेरिका ने रोकी बमबारी रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर जारी अमेरिकी बमबारी को फिलहाल रोक दिया है। बताया जा रहा है कि यह फैसला कूटनीतिक प्रयासों को मौका देने के लिए लिया गया। वहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि ईरान के खिलाफ लंबा सैन्य अभियान चलाने से पैट्रियट एंटी-मिसाइल इंटरसेप्टर का भंडार तेजी से कम हो सकता है। इससे क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका है। ईरान का आरोप- अमेरिका ने समझौता तोड़ा 25 जुलाई को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर आरोप लगाया था कि उसने होर्मुज स्ट्रेट में पहले हुए समझौते का उल्लंघन किया है। अराघची ने कहा कि अमेरिका ईरान द्वारा तय किए गए सुरक्षित समुद्री मार्गों के बजाय वैकल्पिक जहाजरानी मार्ग विकसित करने की कोशिश कर रहा है, जो दोनों देशों के बीच हुए समझौते के खिलाफ है। चार कमर्शियल जहाजों को भी रोका गया ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने पिछले 24 घंटे में चार कमर्शियल जहाजों को रोककर उनका मार्ग बदलवाया। ईरान का दावा है कि ये जहाज असुरक्षित और अनधिकृत समुद्री रास्तों से गुजर रहे थे। हालांकि, इन जहाजों की पहचान और उनके देशों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।  

kalpana जुलाई 27, 2026 0
Iran responds to Donald Trump’s warning, saying any attack on its civilian infrastructure will trigger a strong retaliation
US-Iran War: ट्रंप की धमकी पर ईरान का पलटवार, बोला- एक भी पुल या पावर प्लांट पर हमला हुआ तो मिलेगा करारा जवाब

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसके किसी पुल, पावर प्लांट या अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला किया गया तो उसका जवाब तुरंत और कड़े तरीके से दिया जाएगा. दोनों देशों के बीच खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है. अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का आरोप ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि नागरिकों के उपयोग वाले पुलों, बिजलीघरों और अन्य जरूरी ढांचों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है और इसे युद्ध अपराध माना जाता है. बकाई ने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के किसी नागरिक ढांचे पर हमला किया तो उसे उसी भाषा में जवाब मिलेगा. उन्होंने अमेरिकी सैनिकों से भी अपील की कि वे किसी भी गैरकानूनी सैन्य आदेश का पालन न करें. ट्रंप की धमकी के बाद बढ़ा तनाव तनाव उस समय और बढ़ गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करता है, तो अमेरिका ईरान के पुलों और बिजलीघरों को निशाना बना सकता है. ट्रंप के इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई. ईरान की चेतावनी- अमेरिकी हितों पर होगा जवाबी हमला ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने तस्नीम न्यूज एजेंसी से कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के किसी पुल या पावर प्लांट पर हमला किया तो जवाब में ईरान पूरे क्षेत्र में मौजूद उन ठिकानों को निशाना बनाएगा, जहां अमेरिका के रणनीतिक या आर्थिक हित जुड़े हैं. अधिकारी ने दावा किया कि ईरान ने हाल के दिनों में अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है और जरूरत पड़ने पर जवाब देने में सक्षम है. 'सामूहिक सजा' बताया अमेरिकी रुख ईरान ने अमेरिकी रुख को "सामूहिक सजा" करार देते हुए कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है. तेहरान का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और इससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ेगी. होर्मुज जलडमरूमध्य पर कायम रहेगा ईरान का रुख ईरान ने साफ किया कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी संप्रभुता और नियंत्रण बनाए रखेगा. विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि यदि ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया तो उसका जवाब "जैसे को तैसा" होगा और प्रतिक्रिया बेहद सख्त होगी. बढ़ सकती है क्षेत्रीय चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ती बयानबाजी से पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा सकता है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर व्यापक असर डाल सकता है.  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Israeli National Security Minister Itamar Ben-Gvir visits the Al-Aqsa Mosque compound amid heightened security in Jerusalem
अल-अक्सा मस्जिद परिसर पहुंचे इजरायल के सुरक्षा मंत्री, धार्मिक स्थल पर बढ़ा तनाव

यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद परिसर में गुरुवार को उस समय तनाव बढ़ गया, जब इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर हजारों यहूदी श्रद्धालुओं और कट्टरपंथी समूहों के साथ वहां पहुंचे। हथियारबंद इजरायली पुलिस की सुरक्षा में परिसर में प्रवेश करने वाले समूह ने प्रार्थना की, इजरायल का झंडा लहराया और राष्ट्रगान भी गाया। इस घटना के बाद फिलिस्तीनी पक्ष ने इसे धार्मिक तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई करार दिया। क्या है विवाद? अल-अक्सा मस्जिद परिसर दुनिया के सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों में से एक है। मुसलमान इसे अल-हरम अल-शरीफ और यहूदी समुदाय इसे टेम्पल माउंट के नाम से जानता है। दशकों पुराने 'स्टेटस क्वो' समझौते के तहत गैर-मुस्लिमों को परिसर में घूमने की अनुमति है, लेकिन वहां धार्मिक प्रार्थना करने की इजाजत नहीं है। आलोचकों का आरोप है कि बेन-गवीर के लगातार दौरों और प्रशासनिक बदलावों से इस व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। गुरुवार को क्या हुआ? रिपोर्टों के अनुसार, यहूदी श्रद्धालुओं ने परिसर के उन हिस्सों में भी प्रार्थना की, जो अल-अक्सा मस्जिद और डोम ऑफ द रॉक के निकट हैं। इजरायली मीडिया के मुताबिक, लिकुड पार्टी के सांसद अमित हलेवी भी इस समूह में शामिल थे। कुछ लोगों ने परिसर में इजरायल का झंडा लहराया और राष्ट्रगान गाया, जिसे फिलिस्तीनी संगठनों ने उकसावे की कार्रवाई बताया। बेन-गवीर का बयान घटना के बाद इतामार बेन-गवीर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अल-अक्सा परिसर में "बड़ा बदलाव" देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि वहां प्रार्थना करने वाले यहूदियों को ऐसा महसूस होता है जैसे वे इस स्थान के मालिक हों। इससे पहले भी वह परिसर में इजरायल का झंडा फहराने और वहां एक यहूदी उपासना स्थल (सिनेगॉग) बनाने की वकालत कर चुके हैं। फिलिस्तीन की कड़ी प्रतिक्रिया फिलिस्तीन के धार्मिक मामलों और वक्फ मंत्रालय ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि इजरायली सरकार के शीर्ष स्तर से हो रही ऐसी कार्रवाइयां पूरे क्षेत्र में धार्मिक संघर्ष भड़काने की कोशिश हैं। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अल-अक्सा परिसर की ऐतिहासिक और धार्मिक स्थिति को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। तिशा ब'आव के दिन हुआ दौरा यह घटना ऐसे दिन हुई जब यहूदी समुदाय तिशा ब'आव मना रहा था। यह दिन प्राचीन यहूदी मंदिरों के विनाश की स्मृति में मनाया जाता है। इसी कारण बड़ी संख्या में यहूदी श्रद्धालु टेम्पल माउंट पहुंचे थे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई थी। इस घटनाक्रम के बाद यरुशलम और आसपास के इलाकों में तनाव बढ़ गया है। फिलहाल इजरायली प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर भी इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
US and Saudi officials sign a civilian nuclear cooperation agreement amid concerns over uranium enrichment and regional security.
US-Saudi Nuclear Deal: अमेरिका-सऊदी न्यूक्लियर डील पर क्यों मचा बवाल? क्या भविष्य में परमाणु बम बना सकेगा सऊदी अरब

अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए नए परमाणु सहयोग समझौते ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। इस समझौते के तहत अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में सहयोग करेंगी। साथ ही, सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) की दिशा में तकनीकी सहायता मिलने का रास्ता भी खुल सकता है। हालांकि अमेरिका का कहना है कि यह समझौता केवल शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम तक सीमित है, लेकिन विशेषज्ञ इसे भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से जोड़कर देख रहे हैं। क्या है अमेरिका-सऊदी न्यूक्लियर डील? अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा दोनों देशों के बीच परमाणु सुरक्षा मानकों को लेकर भी एक अलग समझौता हुआ है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के मुताबिक, इसका उद्देश्य सऊदी अरब में नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को विकसित करना है। हालांकि, समझौते का पूरा मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। क्यों उठ रहे हैं सवाल? विवाद की सबसे बड़ी वजह यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) है। परमाणु बिजलीघरों के लिए कम स्तर का संवर्धित यूरेनियम इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यही तकनीक अत्यधिक स्तर तक पहुंचने पर परमाणु हथियार बनाने में भी उपयोगी हो सकती है। यही कारण है कि कई विशेषज्ञ इस समझौते को भविष्य के संभावित परमाणु प्रसार के नजरिए से देख रहे हैं। क्या सऊदी अरब परमाणु बम बना सकेगा? फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं है कि सऊदी अरब परमाणु हथियार विकसित करेगा। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता केवल नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए है और इसमें अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी देश के पास यदि यूरेनियम संवर्धन की क्षमता होती है तो भविष्य में उसका सैन्य उपयोग पूरी तरह असंभव नहीं माना जा सकता। अभी क्या होगी आगे की प्रक्रिया? समझौते को लागू करने से पहले इसे अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी मिलनी जरूरी है। माना जा रहा है कि रिपब्लिकन बहुमत के कारण इसके पारित होने की संभावना अधिक है, लेकिन कुछ सांसद सुरक्षा और परमाणु प्रसार के मुद्दे पर इसका विरोध कर सकते हैं। ईरान युद्ध के बीच क्यों अहम है यह समझौता? यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और सैन्य कार्रवाई को लेकर तनाव चरम पर है। अमेरिका लगातार ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश का आरोप लगाता रहा है, जबकि ईरान इन आरोपों से इनकार करता है। ऐसे माहौल में सऊदी अरब के साथ परमाणु सहयोग समझौता पश्चिम एशिया में रणनीतिक संतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ सकता है। 5 सवालों में समझें पूरी डील ● अमेरिका और सऊदी के बीच क्या समझौता हुआ? दोनों देशों ने शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा सहयोग और सुरक्षा मानकों से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। ● क्या सऊदी यूरेनियम संवर्धन कर सकेगा? समझौते के तहत नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए तकनीकी सहयोग का रास्ता खुल सकता है। ● क्या इससे परमाणु हथियार बनने का खतरा है? अमेरिका इससे इनकार करता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यही तकनीक भविष्य में हथियार कार्यक्रम का आधार बन सकती है। ● क्या समझौता लागू हो गया है? नहीं। इसे लागू करने से पहले अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक है। ● दुनिया की चिंता क्या है? विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि पश्चिम एशिया में अधिक देशों के पास यूरेनियम संवर्धन की क्षमता आती है, तो क्षेत्र में परमाणु हथियारों की नई होड़ शुरू हो सकती है।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Iran claims attacks on US military bases in Bahrain and Kuwait amid rising Middle East tensions
ईरान का दावा- बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमला, होर्मुज में 2 तेल टैंकर रोके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। साथ ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो तेल टैंकरों को रोकने का भी दावा किया है। हालांकि, इन दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि उसने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए हैं और इस कार्रवाई में ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। अमेरिका का दावा- होर्मुज की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी हमलों का निशाना ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, एयर डिफेंस सिस्टम और नौसैनिक ठिकाने रहे। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अमेरिका ने यह भी दावा किया कि सैन्य कार्रवाई के बावजूद फिलहाल इस अहम समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है। पुरानी दुश्मनी ने फिर बढ़ाया संकट अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कई वर्षों से जारी है। वर्ष 2020 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी हमले में मौत के बाद दोनों देशों के रिश्ते लगातार बिगड़ते गए। इसके बाद खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमले, ड्रोन हमले और सैन्य टकराव की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच बढ़ी सैन्य गतिविधियों ने पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता और बढ़ा दी है। दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी मात्रा इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। ऐसे में यदि यहां तनाव और बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर भारत सहित तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था, ईंधन की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। बढ़ सकती है क्षेत्रीय अस्थिरता ईरान और अमेरिका के बीच लगातार हो रही जवाबी सैन्य कार्रवाई ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में नए संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है। फिलहाल दुनिया की नजर दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि इस तनाव का असर केवल मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
US and Iran exchange military strikes as Middle East tensions rise and oil prices surge
US-Iran War: अमेरिका का बड़ा सैन्य एक्शन, ईरान का पलटवार; मिडिल ईस्ट में फिर गहराया युद्ध का खतरा

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आशंका बढ़ा दी है। वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी सेना अलर्ट मोड में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने मिडिल ईस्ट में तैनात अपनी सेना की ऑपरेशनल तैयारियों की जानकारी साझा करते हुए कहा कि सभी सैन्य उपकरणों को पूरी तरह मिशन के लिए तैयार रखा जा रहा है। CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी मरीन HIMARS (हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम) जैसे हथियारों के तकनीकी रखरखाव पर तेजी से काम कर रहे हैं, ताकि किसी भी स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। ईरान ने अमेरिका पर साधा निशाना CENTCOM के बयान के बाद ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका एक ओर शांति की बात करता है, जबकि दूसरी ओर लगातार मिडिल ईस्ट में सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। गालिबाफ ने कहा कि ईरान अमेरिकी रणनीति को समझ चुका है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। अमेरिका के नए हवाई हमले अमेरिकी सेना ने सोमवार तड़के ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए। इससे पहले अमेरिका ने पुष्टि की थी कि इराक में एक और अमेरिकी सैनिक की मौत हुई है। सेना के अनुसार, सैनिक ईरानी ड्रोन को निष्क्रिय करने की कार्रवाई के दौरान घायल हुआ था और बाद में उसकी मौत हो गई। ईरान का पलटवार अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बनाया। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का 5वां बेड़ा (5th Fleet) तैनात है, इसलिए इस हमले को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। इन घटनाओं के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सैन्य संघर्ष की आशंका और बढ़ गई है। होर्मुज संकट से तेल बाजार प्रभावित अमेरिका-ईरान तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते खतरे के कारण समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जारी रहा तो ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है। ट्रंप का सख्त संदेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताजा सैन्य कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हमने उन्हें आज रात फिर बहुत जोरदार जवाब दिया।" उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उन अमेरिकी सैनिकों के सम्मान में की गई है जिन्होंने हालिया घटनाओं में अपनी जान गंवाई। ट्रंप के इस बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल अपने सैन्य अभियान को रोकने के मूड में नहीं है। बढ़ सकती है क्षेत्रीय अस्थिरता विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार, समुद्री मार्गों और विश्व अर्थव्यवस्था पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
White House dismisses reports of US missile stockpile shortage during Iran conflict
ईरान से जंग के बीच अमेरिका की मिसाइलों पर सवाल, क्या घट रहा है हथियारों का जखीरा? व्हाइट हाउस ने किया खारिज

US-Iran Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अब अमेरिकी हथियारों के भंडार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अमेरिकी मीडिया की कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो अमेरिका को मिसाइलों और अन्य उन्नत हथियारों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि व्हाइट हाउस ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिकी सेना के पास सभी रणनीतिक अभियानों के लिए पर्याप्त सैन्य संसाधन मौजूद हैं। रिपोर्ट में क्या किया गया दावा? द वॉशिंगटन पोस्ट और द टेलीग्राफ की रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है, लेकिन लगातार अभियानों के कारण मिसाइलों और उन्नत हथियारों का स्टॉक तेजी से कम हो सकता है। रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि लंबे समय तक युद्ध जारी रहने की स्थिति में मौजूदा हथियारों के साथ अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। किन हथियारों की कमी की आशंका? रिपोर्टों के अनुसार, यदि संघर्ष और तेज होता है तो अमेरिका को एयर डिफेंस इंटरसेप्टर, लंबी दूरी तक मार करने वाली सटीक मिसाइलों और अन्य आधुनिक हथियारों की उपलब्धता पर दबाव झेलना पड़ सकता है। साथ ही बड़ी संख्या में सैनिकों, लड़ाकू विमानों और सैन्य उपकरणों की तैनाती भी चुनौती बन सकती है। रक्षा विशेषज्ञों ने भी जताई चिंता वॉशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के रक्षा विशेषज्ञ सेथ जोन्स ने भी चेतावनी दी है कि यदि युद्ध का दायरा बढ़ता है तो अमेरिका की सैन्य तैयारियों पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में जमीनी सैनिक भेजना रणनीतिक रूप से जोखिम भरा कदम साबित हो सकता है। पेंटागन में 'चुप्पी की संस्कृति' का दावा द टेलीग्राफ की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पेंटागन के भीतर कई अधिकारी हथियारों की वास्तविक स्थिति या चुनौतियों की जानकारी शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने से बच रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों में कार्रवाई के डर के कारण वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ पा रही है। हजारों मिसाइलें इस्तेमाल होने का दावा रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष के शुरुआती 16 दिनों में अमेरिका और उसके सहयोगियों ने 11 हजार से अधिक मिसाइलें और हथियार इस्तेमाल किए। विश्लेषकों का कहना है कि THAAD इंटरसेप्टर, Patriot PAC-3 और Tomahawk क्रूज मिसाइलों का बड़े पैमाने पर उपयोग होने से इनके भंडार पर दबाव बढ़ा है। व्हाइट हाउस ने किया साफ इनकार व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने हथियारों की कमी संबंधी सभी रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सभी रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हथियार, गोला-बारूद और सैन्य संसाधन उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
Panama warns that Strait of Hormuz tensions could trigger a global economic crisis
होर्मुज पर बढ़ते तनाव से दुनिया को चेतावनी! पनामा बोला- समुद्री कानून तोड़ा तो वैश्विक संकट गहराएगा

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर पनामा ने पूरी दुनिया को चेतावनी दी है। पनामा के विदेश मंत्री जेवियर एडुआर्डो मार्टिनेज-अचा वास्केज ने कहा कि यदि इस अहम समुद्री मार्ग पर किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर एएनआई के अनुसार, विदेश मंत्री वास्केज ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यदि यहां तनाव बढ़ता है या नौवहन बाधित होता है, तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। उन्होंने बताया कि पनामा भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित तेल पर निर्भर है, इसलिए यह संकट उनके देश के लिए भी चिंता का विषय है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर चिंता वास्केज ने बताया कि भारत के अधिकारियों के साथ हुई बातचीत में होर्मुज क्षेत्र में तैनात भारतीय नाविकों (सीफेयरर्स) की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों पर कार्यरत हैं और मौजूदा हालात उनकी सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हैं। पनामा ने इसे मानवीय और वैश्विक समुद्री सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। समुद्री कानून का पालन करने की अपील पनामा के विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश दुनिया के सबसे बड़े शिपिंग रजिस्ट्रियों में शामिल है, इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का सम्मान करने और किसी भी परिस्थिति में समुद्री रास्तों को बाधित नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अखंडता, देशों की संप्रभुता और पनामा नहर की तटस्थता जैसे सिद्धांतों की रक्षा करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। भारत से सहयोग की उम्मीद वास्केज ने बताया कि उनकी भारत यात्रा का एक अहम उद्देश्य पनामा नहर की तटस्थता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते में भारत की भागीदारी पर चर्चा करना भी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है और पनामा चाहता है कि भारत इस महत्वपूर्ण व्यवस्था का हिस्सा बने। IMO के साथ बढ़ाई जा रही समुद्री सुरक्षा उन्होंने कहा कि पनामा अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के साथ मिलकर दुनिया भर के नाविकों की सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। उनका मानना है कि समुद्री विवादों का समाधान सैन्य टकराव से नहीं, बल्कि बातचीत, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन से होना चाहिए। भारत के रुख का किया समर्थन मिडिल ईस्ट में जारी तनाव पर पनामा ने भारत के संयमित रुख का समर्थन करते हुए कहा कि शांति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान ही मौजूदा संकट का स्थायी समाधान है। विदेश मंत्री वास्केज ने दोहराया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी देशों और जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए, क्योंकि यही वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और विश्व अर्थव्यवस्था की स्थिरता की सबसे बड़ी गारंटी है।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
Explosion reported in Iran after US airstrikes near Bandar Abbas
ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी बम, बंदर अब्बास समेत कई शहरों में धमाके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए हैं, जिससे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव और गहरा गया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर यह सैन्य कार्रवाई शुरू की गई। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने में किया जा रहा था। बंदर अब्बास में जोरदार धमाका अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में जोरदार विस्फोट की खबर सामने आई। ईरानी सरकारी टीवी के अनुसार, धमाके के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। वहीं, मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है, जिससे किसी भी संभावित हमले का जवाब दिया जा सके। चाबहार और कोनारक में भी धमाकों की गूंज ईरानी मीडिया के मुताबिक, दक्षिण-पूर्वी शहर चाबहार और कोनारक में भी कई धमाके हुए हैं। दोनों शहर ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित हैं और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। कोनारक में ईरानी नौसेना का प्रमुख बेस मौजूद है, जबकि चाबहार ईरान का अहम व्यावसायिक बंदरगाह है। इसके अलावा, फार्स न्यूज एजेंसी के हवाले से अल जजीरा ने बताया कि केश्म द्वीप पर भी लगातार कई विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। घटनाओं के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकता है। IRIB ने साझा की जलते जहाज की तस्वीर तनाव के बीच ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक जलते हुए जहाज की तस्वीर साझा की। आईआरआईबी ने दावा किया कि यह तस्वीर होर्मुज जलडमरूमध्य की है और इसके साथ लिखा, "अमेरिका पर भरोसा करने का नतीजा... कुछ घंटे पहले होर्मुज का नजारा।" बढ़ सकती है क्षेत्रीय अस्थिरता लगातार हो रहे अमेरिकी हमलों और ईरान की सैन्य तैयारियों ने पूरे मिडिल ईस्ट में हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा, वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
Anand Mohan
आनंद मोहन की समय-पूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर

नई दिल्ली, एजेंसियां। बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन की समय-पूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या से जुड़ा है, जिसमें आनंद मोहन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।   बिहार सरकार के फैसले को दी गई थी चुनौती   आनंद मोहन को वर्ष 2023 में बिहार सरकार द्वारा जेल नियमों में बदलाव के बाद समय से पहले रिहा किया गया था। इस रिहाई को जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि रिहाई की प्रक्रिया में नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।   सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उठाए कई सवाल   सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान रिमिशन (सजा में छूट) प्रक्रिया, जेल नियमों में बदलाव और रिहाई के आधार को लेकर कई सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि लोक सेवक की हत्या जैसे गंभीर अपराध में समय से पहले रिहाई देने के फैसले पर पुनर्विचार जरूरी है।   क्या है पूरा मामला?   1994 में गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी. कृष्णैया की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आनंद मोहन को दोषी ठहराया गया और उन्हें उम्रकैद की सजा मिली थी। बाद में बिहार सरकार ने जेल नियमावली में बदलाव किया, जिसके बाद अप्रैल 2023 में उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।   अब फैसले का इंतजार   अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर है। यदि अदालत बिहार सरकार के रिहाई आदेश को बरकरार रखती है तो आनंद मोहन की रिहाई जारी रहेगी, जबकि याचिका स्वीकार होने की स्थिति में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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US-Iran War: मोजतबा खामेनेई का बड़ा बयान, बोले- 'अब जिहाद और प्रतिरोध ही एकमात्र रास्ता'

kalpana जुलाई 27, 2026 0