Middle East Tensions

UAE aligns with US on Hormuz Strait, preparing against Iran
होर्मुज पर अमेरिका के साथ आया UAE, ईरान के खिलाफ बड़े कदम की तैयारी

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ा भू-राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब अमेरिका-ईरान संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर UAE ने बड़ा ऐलान किया है। होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए गठबंधन की पहल UAE के राजनयिकों ने अमेरिका के साथ-साथ यूरोप और एशिया की सैन्य शक्तियों से अपील की है कि वे मिलकर एक वैश्विक गठबंधन बनाएं, ताकि होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जा सके। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। जंग में कूदने को तैयार UAE रिपोर्ट्स के अनुसार, UAE अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई में भी हिस्सा ले सकता है। अगर ऐसा होता है, तो UAE फारस की खाड़ी का पहला देश होगा जो सीधे इस युद्ध में शामिल होगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सहयोगी देशों से अधिक समर्थन की मांग की थी और कहा था कि तेल आपूर्ति की सुरक्षा केवल अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव की तैयारी UAE संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ईरान के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति के लिए प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव को रूस और चीन जैसे देश वीटो कर सकते हैं, जिससे इसकी राह मुश्किल हो सकती है। प्रस्ताव न पास होने पर भी मदद रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर UNSC में प्रस्ताव पास नहीं होता है, तब भी UAE सैन्य सहयोग देने को तैयार है। इसमें समुद्री माइंस हटाने (माइन क्लीयरेंस) और अन्य रणनीतिक सहायता शामिल हो सकती है। रणनीतिक द्वीपों पर नियंत्रण का सुझाव UAE ने अमेरिका को यह भी सुझाव दिया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट के रणनीतिक द्वीपों पर नियंत्रण करे, जिनमें अबू मूसा द्वीप भी शामिल है। इस द्वीप पर पिछले करीब 50 वर्षों से ईरान का कब्जा है, जबकि UAE भी इस पर दावा करता है। वैश्विक समर्थन जुटाने की कोशिश UAE के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने को लेकर सहमति बन रही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के प्रस्तावों का हवाला देते हुए ईरान की कार्रवाइयों की आलोचना की। बढ़ सकता है तनाव UAE के इस रुख से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है। अगर खाड़ी देश सीधे युद्ध में शामिल होते हैं, तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ेगा।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Damaged US military base in Middle East after Iranian missile and drone attacks
मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: रिपोर्ट में दावा—ईरानी हमलों से अमेरिका के 13 सैन्य ठिकाने तबाह, सैनिकों को होटल में लेना पड़ा शरण

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों में अमेरिका के कम से कम 13 सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई बेस अब संचालन के लायक नहीं बचे, जिससे अमेरिकी सैनिकों को अस्थायी रूप से होटल और दफ्तरों में शरण लेनी पड़ रही है। कुवैत में सबसे ज्यादा तबाही रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत में स्थित अमेरिकी ठिकानों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। पोर्ट शुवैबा, अली अल सलेम एयर बेस और कैंप बुहरिंग जैसे प्रमुख ठिकानों पर हमलों से ऑपरेशनल सेंटर, विमानन ढांचा और ईंधन आपूर्ति सिस्टम गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। इससे सैन्य आपूर्ति श्रृंखला और सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। कतर, बहरीन और सऊदी अरब भी निशाने पर ईरानी हमलों का असर केवल कुवैत तक सीमित नहीं रहा। अल उदेद एयर बेस (कतर) में स्थित अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुख्यालय का अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम क्षतिग्रस्त हो गया। वहीं बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के संचार उपकरणों और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर रिफ्यूलिंग टैंकरों को भी नुकसान पहुंचा है। ‘रिमोट वॉरफेयर’ की स्थिति सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा हालात ‘रिमोट वॉरफेयर’ का रूप ले चुके हैं, जहां सैनिक स्थायी बेस के बजाय अस्थायी ठिकानों से ऑपरेशन चला रहे हैं। इससे समन्वय और प्रतिक्रिया समय पर असर पड़ रहा है। सैनिकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया लगातार हमलों के चलते अमेरिकी सैनिकों को बेस से हटाकर अलग-अलग सुरक्षित स्थानों, जैसे होटल और कार्यालयों में ठहराया जा रहा है। इससे सैन्य संचालन में कठिनाई और जोखिम दोनों बढ़ गए हैं। ईरान की चेतावनी और जवाबी कार्रवाई Islamic Revolutionary Guard Corps ने अमेरिका और इजरायल को कड़ी चेतावनी दी है कि वे जमीनी युद्ध से बचें। साथ ही ईरान ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4’ के तहत इजरायल के कई शहरों—हाइफा, डिमोना और तेल अवीव—पर मिसाइल हमलों का दावा किया है। अमेरिका की जवाबी तैयारी दूसरी ओर, Pentagon मिडिल ईस्ट में अपनी 82nd एयरबोर्न डिवीजन की तैनाती की तैयारी कर रहा है। यह यूनिट आपात स्थितियों में तेजी से कार्रवाई के लिए जानी जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर आगे और हमले करने की योजना बना रहा है। बढ़ता खतरा, टलती कूटनीति ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी युद्धविराम या समझौते का सवाल नहीं है। उनका कहना है कि देश ‘प्रतिरोध’ की नीति पर कायम रहेगा। ऐसे में क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
Kharg Island in the Persian Gulf, Iran’s heavily guarded oil export hub with strategic military installations.
ट्रंप-नेतन्याहू के लिए आसान नहीं ईरान का खर्ग द्वीप, कड़ी सुरक्षा में छिपी है तेल अर्थव्यवस्था की ‘लाइफलाइन’

  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान का रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Kharg Island एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में आ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump और इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए इस द्वीप को निशाना बनाते हैं, तो यह कदम आसान नहीं होगा। इसकी वजह यहां की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और वैश्विक ऊर्जा बाजार में इसकी अहम भूमिका है।   ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र फारस की खाड़ी में स्थित खर्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। अनुमान के मुताबिक ईरान के अधिकांश कच्चे तेल का निर्यात यहीं से होता है। द्वीप पर विशाल तेल भंडारण टैंक, पाइपलाइन नेटवर्क और बड़े ऑयल टैंकरों के लिए गहरे पानी के टर्मिनल मौजूद हैं, जिससे यह देश की ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख आधार बन गया है।   भारी सैन्य सुरक्षा में घिरा इलाका खर्ग द्वीप को ईरान ने कड़ी सैन्य सुरक्षा से घेर रखा है। यहां एयर डिफेंस सिस्टम, रडार नेटवर्क और मिसाइल सुरक्षा तैनात है। साथ ही Islamic Revolutionary Guard Corps और ईरानी नौसेना की इकाइयां आसपास के समुद्री क्षेत्र में लगातार गश्त करती हैं। यही वजह है कि किसी भी बाहरी सैन्य कार्रवाई को यहां अंजाम देना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है।   मुख्य भूमि के करीब होने से रणनीतिक बढ़त खर्ग द्वीप ईरान की मुख्य भूमि से करीब 25 से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में अगर यहां किसी तरह का हमला होता है तो ईरान अपनी मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक ताकत के जरिए तुरंत जवाबी कार्रवाई कर सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे सैन्य दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र मानते हैं।   वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है असर ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक यदि खर्ग द्वीप पर हमला होता है या यहां की तेल सुविधाएं बाधित होती हैं, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका रहती है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।   रणनीतिक रूप से बेहद अहम ठिकाना छोटे आकार के बावजूद खर्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य रणनीति दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि किसी भी संभावित संघर्ष में यह द्वीप निर्णायक भूमिका निभा सकता है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Indian LPG tankers pass through Strait of Hormuz after Iran permits safe passage amid Middle East tensions.
होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को मिली अनुमति, जयशंकर ने बताई कूटनीति की भूमिका

  पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने दो भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। ये दोनों जहाज अब भारत के तट की ओर बढ़ चुके हैं और जल्द ही अपने-अपने बंदरगाहों पर पहुंचने वाले हैं। भारतीय झंडे वाले ये गैस टैंकर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ करीब 92,700 मीट्रिक टन LPG लेकर आ रहे हैं। इनमें से ‘शिवालिक’ मुंद्रा बंदरगाह पहुंचने वाला है, जबकि ‘नंदा देवी’ कांडला बंदरगाह पर पहुंचेगा।   बातचीत से निकला समाधान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मामले में पर्दे के पीछे की कूटनीतिक कोशिशों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि यह अनुमति भारत और ईरान के बीच सीधे संवाद का नतीजा है। जयशंकर के अनुसार, तेहरान के साथ लगातार बातचीत के जरिए जहाजों की आवाजाही को फिर से शुरू कराना सबसे प्रभावी तरीका साबित हुआ। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अभी भी जारी है और भारत अपने अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए भी बातचीत जारी रखेगा।   कोई ‘डील’ नहीं, रिश्तों का असर इस मुद्दे पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इसके बदले में ईरान को भारत से कोई रियायत मिली है। इस पर जयशंकर ने साफ कहा कि यह किसी लेन-देन का मामला नहीं है। उनके मुताबिक भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं और उसी भरोसे के आधार पर यह समाधान संभव हो पाया है।   प्रधानमंत्री की बातचीत का भी असर बताया जा रहा है कि भारतीय जहाजों को अनुमति मिलने से पहले नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा की गई थी।   वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यही रास्ता फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसी मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति दुनिया भर में होती है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी, ऐसे में भारतीय जहाजों को अनुमति मिलना भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
People arrested in UAE for sharing missile attack videos on social media.
United Arab Emirates में मिसाइल हमलों के वीडियो साझा करने पर सख्ती, कई लोगों पर कार्रवाई

  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच United Arab Emirates (UAE) ने मिसाइल हमलों से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकारी मीडिया के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा हमलों को रोकने के वीडियो क्लिप और कथित फर्जी वीडियो साझा करने के आरोप में 10 लोगों की गिरफ्तारी के आदेश दिए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों ने असली वीडियो के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार किए गए वीडियो और तस्वीरें भी विभिन्न वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की थीं। इन सभी मामलों को त्वरित सुनवाई के लिए अदालत भेज दिया गया है।   45 लोगों की गिरफ्तारी Abu Dhabi Police ने बताया कि देश पर हुए हालिया हमलों के दौरान वीडियो बनाने और कथित रूप से “गलत जानकारी फैलाने” के आरोप में अलग-अलग देशों के 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की सामग्री सार्वजनिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है और अफवाहें फैलाकर लोगों में डर का माहौल बना सकती है।   ब्रिटिश नागरिक पर भी केस पिछले सप्ताह Dubai में साइबर अपराध कानून के तहत एक 60 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक पर भी मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि उन्होंने शहर के ऊपर उड़ती कथित Iran की मिसाइलों का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया।   साइबर कानून के तहत कई मामले मानवाधिकार संगठन Detained in Dubai की सीईओ Radha Stirling के मुताबिक, हाल में हुए मिसाइल हमलों से जुड़े वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में UAE के साइबर क्राइम कानून के तहत कम से कम 21 लोगों पर आरोप लगाए गए हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं, जिनमें किसी ऊंची रिहायशी इमारत, एक लग्ज़री होटल और Dubai International Airport के पास मलबा गिरने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन तस्वीरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। UAE अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि के किसी भी वीडियो या तस्वीर को साझा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
LPG tanker ships waiting near Strait of Hormuz amid Middle East tensions before sailing to India
ईरान युद्ध के बीच भारत की बड़ी तैयारी: 8 LPG टैंकर जल्द पार करेंगे होर्मुज, गैस की किल्लत की आशंका कम

  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध हालात के बीच भारत ने घरेलू रसोई गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। सरकार के अनुसार, जल्द ही 8 LPG टैंकर Strait of Hormuz को पार कर भारत की ओर रवाना होंगे, जिससे देश में गैस संकट की आशंकाओं को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल ये सभी टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य के ठीक पहले इंतजार कर रहे हैं और उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारत और ईरान के बीच लगातार बातचीत जारी है।   जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री के बीच हुई बातचीत ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने के लिए भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच कई दौर की फोन पर बातचीत हुई है। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय LPG टैंकरों को सुरक्षित मार्ग मिल सके और वे बिना किसी बाधा के होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर सकें।   होर्मुज के पास खड़े हैं 8 टैंकर सरकारी सूत्रों के अनुसार, आठ LPG टैंकर इस समय होर्मुज के पास खड़े हैं और स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। ईरानी अधिकारियों ने भारतीय जहाजों की आवाजाही में सहयोग का भरोसा दिया है। इसके साथ ही मानवीय पहलू पर भी बातचीत हो रही है। करीब 250 ईरानी नाविक फिलहाल भारत में हैं, जिन्हें रहने की सुविधा दी गई है और उनके स्वदेश लौटने की व्यवस्था की जा रही है।   सरकार ने बनाया संकट प्रबंधन प्लान ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए केंद्र सरकार का क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (Crisis Management Group) लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यह समूह तेल और गैस की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहा है, ताकि देश में LPG कुकिंग गैस की सप्लाई सामान्य बनी रहे।   भारत की LPG आयात पर निर्भरता भारत अपनी कुल LPG जरूरतों का करीब 60 से 67 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इस आयात का बड़ा भाग खाड़ी देशों से आता है और अधिकांश शिपमेंट Strait of Hormuz के रास्ते ही भारत पहुंचते हैं। ऐसे में इस समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट देश की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।   नौसेना एस्कॉर्ट पर भी विचार सूत्रों के अनुसार, अगर हालात ज्यादा तनावपूर्ण होते हैं तो भारत अपने ईंधन से भरे जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना एस्कॉर्ट देने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
global conflicts amid US strikes on Iran and rising Middle East tensions
हनीफ़ का ब्लॉग: अमेरिकियों को भी नहीं पता उनके राष्ट्रपति कल कहां जंग शुरू कर देंगे

  वैश्विक राजनीति में अमेरिका की भूमिका को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में ईरान पर हमलों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि दुनिया में बढ़ते संघर्षों में अमेरिका की भूमिका क्या है और उसके फैसलों का असर कितना व्यापक हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump अक्सर यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रोकने में भूमिका निभाई है। उन्होंने पहले भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तनाव का जिक्र करते हुए कहा था कि उनकी मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच स्थिति नियंत्रण में आई। लेकिन आलोचकों का कहना है कि हाल के समय में अमेरिका की विदेश नीति कई नए विवादों और सैन्य टकरावों से जुड़ी रही है। खासकर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को और जटिल बना दिया है। हालिया घटनाओं में अमेरिका और Israel द्वारा Iran पर किए गए हमलों को लेकर दुनिया भर में चर्चा हो रही है। इस घटनाक्रम के बाद कई विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर छोटे-छोटे संघर्ष तेजी से बड़े टकराव में बदल सकते हैं। ब्लॉग में यह भी कहा गया है कि आम अमेरिकी नागरिकों को भी अक्सर यह समझ नहीं आता कि उनके देश की विदेश नीति किस दिशा में जा रही है और किस कारण से किसी नए संघर्ष की शुरुआत हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक असर वाला मुद्दा है, क्योंकि इसका प्रभाव ऊर्जा बाजार, वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ता है।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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