राष्ट्रीय

Middle East Crisis Hits Indian Pharma

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: महंगी हो रही दवाएं, भारतीय फार्मा सेक्टर पर दबाव

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Pharmaceutical manufacturing facility with medicine packaging highlighting impact of Middle East tensions on drug prices.
Middle East Tensions Impact Indian Pharma Sector

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के फार्मा सेक्टर पर साफ दिखने लगा है। इंडियन फार्मास्यूटिकल एलायंस (IPA) के महासचिव Sudarshan Jain ने बताया कि इस संकट के चलते दवाओं के उत्पादन की लागत में लगातार इजाफा हो रहा है।

बढ़ी लागत, महंगा हुआ उत्पादन

Indian Pharmaceutical Alliance के अनुसार,

  • Freight (माल ढुलाई) महंगी हो गई है
  • Insurance (बीमा प्रीमियम) में तेज बढ़ोतरी हुई है
  • दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले Solvents (कच्चा माल) की कीमतें भी बढ़ी हैं

इन कारणों से दवाओं की कुल लागत पर दबाव बढ़ रहा है।

सप्लाई चेन पर असर

युद्ध और तनाव के चलते समुद्री मार्ग, खासकर Strait of Hormuz जैसे अहम रूट, जोखिम भरे और महंगे हो गए हैं।

  • शिपिंग लागत बढ़ी
  • बीमा प्रीमियम में उछाल
  • समय पर डिलीवरी में अनिश्चितता

हालांकि, सरकार और उद्योग दोनों का फोकस इस समय दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर है, न कि कीमतों को तुरंत नियंत्रित करने पर।

क्या दवाओं की कमी होगी?

भारत 200 से ज्यादा देशों को दवाइयां सप्लाई करता है और दुनिया भर के करोड़ों मरीज भारतीय दवाओं पर निर्भर हैं।
Sudarshan Jain के अनुसार:

  • सरकार के फार्मा विभाग और वाणिज्य मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं
  • सप्लाई चेन को बाधित होने से बचाने की कोशिश जारी है
  • फिलहाल दवाओं की कमी की आशंका कम है

भारतीय फार्मा सेक्टर की ताकत

भारत का फार्मा उद्योग वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में है:

  • करीब 30 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट
  • लगभग 30 बिलियन डॉलर का घरेलू बाजार
  • सबसे ज्यादा USFDA प्रमाणित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भारत में मौजूद

2047 का विजन

भारतीय फार्मा इंडस्ट्री ने 2047 तक बड़ा लक्ष्य तय किया है:

  • 450 बिलियन डॉलर का योगदान
  • 100+ नए प्रोडक्ट्स का विकास
  • “Affordable Innovation” पर फोकस

मिडिल ईस्ट तनाव ने भारतीय फार्मा सेक्टर की लागत और सप्लाई चेन पर दबाव जरूर बढ़ाया है, लेकिन मजबूत उत्पादन क्षमता और सरकारी सहयोग के चलते भारत फिलहाल वैश्विक दवा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की स्थिति में है। आने वाले समय में यह सेक्टर न सिर्फ चुनौतियों से निपटेगा, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की दिशा में भी आगे बढ़ेगा।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Kulgam Target Killing
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में टारगेट किलिंग, छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की गोली मारकर हत्या

कुलगाम, एजेंसियां। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के केलम इलाके में आतंकियों ने गैर-स्थानीय मजदूरों को निशाना बनाकर हमला किया। शुक्रवार शाम हुए इस हमले में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों को गोली मारी गई। दोनों घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में दोनों की मौत हो गई। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया है।   ईंट भट्ठे पर मजदूरों को बनाया निशाना   रिपोर्ट के मुताबिक, हमला कुलगाम के केलम इलाके में एक ईंट भट्ठे पर हुआ। आतंकियों ने वहां मौजूद गैर-स्थानीय मजदूरों पर गोलीबारी की। शुरुआती जानकारी में एक मजदूर की मौके पर मौत बताई गई थी, जबकि दूसरे को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया था। बाद में दूसरे मजदूर ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।   छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे दोनों मजदूर   मारे गए दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इस हमले के बाद घाटी में काम करने वाले गैर-स्थानीय श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। यह घटना कश्मीर में प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।   सुरक्षा बलों ने इलाके को घेरा   हमले के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों ने घटनास्थल के आसपास के क्षेत्र को घेर लिया और आतंकियों की तलाश में अभियान शुरू किया। सुरक्षा एजेंसियां हमले में शामिल आतंकियों की पहचान और उनके ठिकाने का पता लगाने में जुटी हैं।   अमरनाथ यात्रा के बीच सुरक्षा चुनौती बढ़ी   कुलगाम में हुआ यह हमला ऐसे समय में सामने आया है जब जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा चल रही है। गैर-स्थानीय मजदूरों को निशाना बनाए जाने की इस घटना के बाद दक्षिण कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ाए जाने की संभावना है। अधिकारियों ने इलाके में सुरक्षा बलों की तैनाती और तलाशी अभियान तेज कर दिया है।

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असम में एक्टिविस्ट प्रणब डोले पर NSA, जमानत के एक दिन बाद फिर हिरासत में

गुवाहाटी, एजेंसियां। काजीरंगा के पास प्रस्तावित लग्जरी होटल परियोजना का विरोध कर रहे भूमि एवं आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले पर असम सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की है। यह कदम उन्हें अदालत से जमानत मिलने के ठीक एक दिन बाद उठाया गया। सरकार के आदेश के बाद डोले फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।   जमानत के एक दिन बाद NSA के तहत कार्रवाई   प्रणब डोले को 13 जुलाई को गुवाहाटी में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें गोलाघाट जिला जेल में रखा गया। 29 जुलाई को गोलाघाट की एक सत्र अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। इसके अगले दिन, 30 जुलाई को असम सरकार ने उन्हें NSA के तहत हिरासत में रखने का आदेश जारी कर दिया।   काजीरंगा होटल परियोजना के विरोध से जुड़ा मामला   डोले ग्रेटर काजीरंगा लैंड एंड ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी से जुड़े हैं और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित पांच सितारा होटल परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उनके खिलाफ मामला 28 जून को हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस ने उन पर आपराधिक साजिश, गैरकानूनी सभा, दंगा, आपराधिक अतिक्रमण और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने सहित भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।   सरकार ने सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा का दिया हवाला   असम सरकार की ओर से NSA के तहत हिरासत का आधार यह बताया गया है कि सामान्य आपराधिक कानून के तहत डोले की गतिविधियों को रोकना पर्याप्त नहीं हो सकता और उनकी गतिविधियां सार्वजनिक व्यवस्था तथा राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। NSA के तहत बिना सामान्य आपराधिक मुकदमे के निवारक हिरासत का प्रावधान है।   अदालत की जमानत के बावजूद जेल में रहेंगे डोले   NSA लगाए जाने के बाद अदालत से मिली जमानत के बावजूद डोले की रिहाई नहीं हो सकी है। मामले ने असम में भूमि अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और प्रस्तावित काजीरंगा होटल परियोजना को लेकर चल रहे विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।    

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आंध्र प्रदेश में ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल जारी, SIR के बाद 44.80 लाख नाम हटे

अमरावती, एजेंसियां। भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद आंध्र प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। मसौदा सूची में करीब 44.80 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह कार्रवाई मतदाता सूची को अपडेट करने और मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अपात्र हो चुके नामों को हटाने की प्रक्रिया के तहत की गई है।   SIR के बाद लाखों नाम सूची से बाहर   विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के विवरण का व्यापक सत्यापन किया गया। इसके बाद आंध्र प्रदेश के ड्राफ्ट रोल में करीब 44.80 लाख नाम कम हुए हैं। निर्वाचन अधिकारियों की ओर से तैयार मसौदा सूची अब आगे की जांच और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के लिए उपलब्ध है।   मतदाताओं को दावे और आपत्ति का मौका   ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल जारी होने के बाद पात्र मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण जांच सकते हैं। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम छूट गया है या मतदाता सूची में किसी जानकारी को लेकर आपत्ति है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।   अंतिम सूची 3 अक्टूबर को होगी जारी   आंध्र प्रदेश में SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची 3 अक्टूबर 2026 को जारी किए जाने का कार्यक्रम है। ड्राफ्ट रोल और अंतिम सूची के बीच की अवधि में दावों एवं आपत्तियों पर कार्रवाई की जाएगी।   मतदाताओं से नाम जांचने की अपील   निर्वाचन प्रक्रिया के लिहाज से मतदाता सूची में नाम होना बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में मतदाताओं से अपील की गई है कि वे ड्राफ्ट रोल में अपना नाम और अन्य विवरण जरूर जांच लें तथा आवश्यकता होने पर समय रहते दावा या आपत्ति दर्ज कराएं।

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