Murder investigation

Lohagad Fort in Pune, where police are investigating the death of Ketan Agrawal as an alleged murder involving his fiancée and another accused.
Pune Murder Case: पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को बताया आरोपी, लेकिन अदालत में कैसे साबित होंगे हत्या के आरोप?

पुणे: महाराष्ट्र के पुणे स्थित लोहागढ़ किले पर केतन अग्रवाल की मौत का मामला अब हत्या की जांच में बदल चुका है। पुलिस ने केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर हत्या का आरोप लगाया है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत में आरोप तय होने या दोष सिद्ध होने के लिए पुलिस को मजबूत और विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने होंगे। हादसे से हत्या तक कैसे बदला मामला? 18 जून को 26 वर्षीय केतन अग्रवाल की लोहागढ़ किले से गिरने के बाद मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में इसे ट्रैकिंग के दौरान हुआ हादसा माना गया था, लेकिन बाद में पुलिस ने जांच का रुख बदलते हुए इसे हत्या का मामला बताया। पुलिस का आरोप है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने मिलकर केतन को चट्टान से धक्का देकर उसकी हत्या की। पुलिस का दावा क्या है? पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार: सिया गोयल अपनी तयशुदा शादी से खुश नहीं थी। उसका चेतन चौधरी के साथ प्रेम संबंध था। दोनों ने कई बार मुलाकात कर हत्या की योजना बनाई। कथित तौर पर वारदात से पहले रिहर्सल भी की गई। पहली कोशिश नाकाम रहने के बाद दूसरी बार घटना को अंजाम दिया गया। हालांकि, ये सभी पुलिस के आरोप हैं और अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। अदालत में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानूनी प्रक्रिया में केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं होता। पुलिस को अदालत के सामने यह साबित करना होगा कि: केतन की मौत दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या थी। उसे जानबूझकर चट्टान से धक्का दिया गया। दोनों आरोपियों की कथित साजिश और वारदात के बीच स्पष्ट संबंध है। इसके लिए पुलिस को परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) की एक मजबूत और बिना किसी टूट के कड़ी प्रस्तुत करनी होगी। किन सबूतों पर टिकी होगी जांच? जांच एजेंसियां निम्नलिखित साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष मजबूत करने की कोशिश कर सकती हैं: मोबाइल फोन रिकॉर्ड लोकेशन डेटा सीसीटीवी फुटेज दोनों आरोपियों की कथित मुलाकातों के सबूत घटना के पहले और बाद का व्यवहार फोरेंसिक रिपोर्ट घटनास्थल से मिले तकनीकी साक्ष्य हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने अदालत को बताया है कि उसके पास घटना का कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह नहीं है, जो यह बता सके कि केतन को वास्तव में किसने धक्का दिया। कबूलनामा कितना अहम? रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस अपने दावे में आरोपियों के कथित कबूलनामे का भी उल्लेख कर रही है। लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर का कहना है कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामों की कानूनी वैधता सीमित होती है। उन्होंने कहा कि अदालत केवल ऐसे बयानों के आधार पर दोष सिद्ध नहीं करती, बल्कि स्वतंत्र और ठोस साक्ष्यों की भी आवश्यकता होती है। विशेषज्ञ की राय इंडिया टुडे से बातचीत में वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने कहा कि किसी मामले को लेकर बनी सार्वजनिक धारणा और अदालत में होने वाली सुनवाई अलग-अलग होती है। उनके अनुसार, अदालत केवल कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाती है। यदि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की श्रृंखला पूरी तरह स्थापित नहीं होती, तो केवल आरोपों के आधार पर दोष सिद्ध करना आसान नहीं होगा। जांच अभी जारी फिलहाल सिया गोयल और चेतन चौधरी इस मामले में आरोपी हैं। मामले की जांच जारी है और अंतिम निर्णय अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
A taxi driver speaks to the media after claiming he witnessed unusual behaviour by accused Siya Goyal before the Ketan Agrawal murder case.
पुणे मर्डर केस: 'सिया कार में बैठना नहीं चाहती थी', कैब ड्राइवर का दावा; पासपोर्ट गायब होने पर भी उठे सवाल

  पुणे: चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच के बीच एक नया दावा सामने आया है। मुंबई एयरपोर्ट तक परिवार को छोड़ने वाले कैब ड्राइवर ने दावा किया है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल पुणे से निकलते समय कार में बैठना नहीं चाहती थीं और उनके भाई साहिल गोयल ने उन्हें कथित तौर पर हाथ पकड़कर जबरन गाड़ी में बैठाया था। कैब ड्राइवर वैभव जाधव ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि पूरे सफर के दौरान सिया परेशान और तनाव में दिखाई दे रही थीं। पुलिस ने अभी तक ड्राइवर के इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। रास्ते भर भाई-बहन के बीच होती रही बहस ड्राइवर के मुताबिक, पुणे से रवेट तक के सफर में सिया और उनके भाई साहिल के बीच किसी बात को लेकर बहस होती रही। उनका कहना है कि दोनों के बीच पूरे रास्ते तनाव का माहौल था। बाद में किवाले-लोढ़ा इलाके से केतन अग्रवाल और उनके परिवार के कुछ सदस्य भी गाड़ी में सवार हुए, जिसके बाद सभी मुंबई एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए। फूड कोर्ट पर हुई संदिग्ध हरकत का दावा वैभव जाधव के अनुसार, रास्ते में एक फूड कोर्ट पर सभी लोग चाय-नाश्ते के लिए रुके थे। इसी दौरान सिया किसी सामान का बहाना बनाकर वापस कार तक आईं। ड्राइवर का दावा है कि सिया ने कार से कुछ सामान निकाला और उसे अपनी जेब में रख लिया। इसके बाद वह वापस फूड कोर्ट चली गईं। ड्राइवर का कहना है कि उसने इस पूरी घटना को नोटिस किया था। एयरपोर्ट पहुंचने के बाद गायब मिला पासपोर्ट ड्राइवर के अनुसार, यात्रियों को मुंबई एयरपोर्ट छोड़ने के कुछ समय बाद उसे केतन अग्रवाल का फोन आया। केतन ने बताया कि उनका पासपोर्ट कार में छूट गया है। इसके बाद कार की तलाशी ली गई, लेकिन पासपोर्ट नहीं मिला। पासपोर्ट गायब होने के कारण केतन का बाली जाने का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। यह यात्रा दोनों के प्री-वेडिंग फोटोशूट के लिए तय की गई थी। परिजनों ने जताई साजिश की आशंका केतन अग्रवाल के पिता विजय अग्रवाल ने भी पासपोर्ट के गायब होने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह सामान्य घटना नहीं लगती और इसके पीछे किसी सुनियोजित साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जांच जारी, पुलिस कर रही सभी पहलुओं की पड़ताल पुलिस पहले ही सिया गोयल और चेतन चौधरी को हत्या की साजिश के आरोप में गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियां डिजिटल सबूत, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही हैं। कैब ड्राइवर के ताजा दावों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, इन बयानों की सत्यता की पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
Accused Siya Goyal and Chetan Chaudhary are produced before a court in Pune as police continue investigating the alleged Ketan Agrawal murder conspiracy.
केतन अग्रवाल हत्याकांड: सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ी, जांच में साजिश के नए खुलासे

  पुणे: चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ा दी है। दोनों आरोपियों को सोमवार (29 जून) को वडगांव मावल कोर्ट में पेश किया गया, जहां सुनवाई के बाद यह आदेश दिया गया। पुलिस का दावा है कि यह हत्या किसी अचानक हुई घटना का परिणाम नहीं थी, बल्कि पहले से रची गई एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। जांच में लगातार नए सबूत सामने आ रहे हैं, जिससे मामला और गंभीर होता जा रहा है। पहले से तय साजिश का आरोप पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार, 18 जून को लोहागढ़ किले पर हुई घटना के दौरान सिया गोयल ने कथित तौर पर चेतन चौधरी को एक संकेत दिया था, जिसके बाद केतन अग्रवाल को चट्टान से धक्का दिया गया। पुलिस का कहना है कि सिया ने घटना के दौरान पानी पीने के बहाने खुद को पीड़ित से दूर कर लिया था, जिससे धक्का देने के समय केतन उसे पकड़ न सके। कैफे में रची गई थी हत्या की योजना जांच में यह भी सामने आया है कि घटना से एक दिन पहले दोनों आरोपी पुणे के लुल्लानगर इलाके के एक कैफे में मिले थे। पुलिस के अनुसार, यहीं पर हत्या की पूरी योजना बनाई गई थी। सीसीटीवी फुटेज में दोनों की मुलाकात की पुष्टि होने का दावा किया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या अपराध से पहले किसी प्रकार का “रीहर्सल” भी किया गया था। क्राइम सीन रीक्रिएशन और सबूतों की जांच पुलिस ने रविवार (28 जून) को सिया गोयल को लोहागढ़ किले ले जाकर क्राइम सीन रीक्रिएशन भी कराया, ताकि घटना की पूरी कड़ी को दोबारा समझा जा सके। इसके अलावा पुलिस ने वह स्कूटर भी जब्त किया है, जिसका इस्तेमाल चेतन चौधरी ने पुणे से लोहागढ़ किले तक पहुंचने के लिए किया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह रास्ते में पहचान और निगरानी से बचने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। रिश्तों और साजिश का एंगल पुलिस जांच के अनुसार, केतन अग्रवाल और सिया गोयल की सगाई फरवरी में हुई थी और दोनों की शादी इस साल तय थी। सिया और चेतन के बीच कथित प्रेम संबंधों की बात भी सामने आई है। इसी कारण, पुलिस को शक है कि शादी से बचने और निजी संबंधों के चलते यह हत्या की साजिश रची गई। अदालत ने बढ़ाई हिरासत अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने गंभीरता को देखते हुए स्वीकार कर लिया। दोनों आरोपियों को अब 3 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में रखा जाएगा। जांच जारी पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है। डिजिटल सबूत, मोबाइल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
Pune murder case
पुणे हत्याकांड: शव मिलने के बाद भी शांत रही सिया, रेस्क्यू टीम ने सुनाई पूरी घटना

पुणे, एजेंसियां। पुणे के चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। अब रेस्क्यू टीम के एक सदस्य के बयान ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। टीम के सदस्य सुनील गायकवाड़ ने दावा किया कि लोहागढ़ किले से केतन का शव निकालने के दौरान मुख्य आरोपी सिया गोयल घटनास्थल पर मौजूद थी, लेकिन वह अन्य लोगों की तरह भावुक या परेशान नजर नहीं आई। उन्होंने बताया कि शव के सिर पर गंभीर चोटें थीं और शरीर पर कई स्थानों पर चोट के निशान मिले थे। पुलिस को सुबह सूचना मिलने के बाद रेस्क्यू अभियान चलाया गया और दोपहर तक शव को खाई से निकालकर एम्बुलेंस के हवाले कर दिया गया।   भाई ने कहा- मना करती तो शादी रुक जाती मामले की जांच के तहत पुलिस ने सिया के भाई साहिल गोयल से करीब 10 घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के दौरान साहिल ने कथित तौर पर बताया कि यदि सिया ने परिवार से साफ कहा होता कि वह केतन से शादी नहीं करना चाहती, तो परिवार यह रिश्ता तोड़ देता। पुलिस ने साहिल से सह-आरोपी चेतन चौधरी के साथ सिया के संबंधों को लेकर भी कई सवाल पूछे और उसके बयान के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।   पहले भी हत्या की कोशिश का दावा जांच एजेंसियों का दावा है कि घटना से पहले भी केतन को लोहागढ़ किले ले जाने की कई बार कोशिश की गई थी। पुलिस के अनुसार, 31 मई और 4 जून को भी किले की यात्रा की योजना बनी थी। इतना ही नहीं, 14 जून को भी कथित तौर पर केतन को चट्टान से धक्का देने की कोशिश की गई, लेकिन वह झाड़ी पकड़कर बच गया। उस समय सिया ने कथित रूप से पास में सांप होने की बात कहकर मामला टाल दिया था।   फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों पर टिकी जांच पुलिस अब मोबाइल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूत और गवाहों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा। फिलहाल मामले में जुटाए जा रहे साक्ष्यों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

anjali kumari जून 27, 2026 0
Accused Siya Goyal during police investigation in the Ketan Agrawal murder case in Pune as investigators examine digital evidence and chat records.
पुलिस पूछताछ में टूटी सिया, बोली- 'केतन विग पहनता था इसलिए नहीं करना चाहती थी शादी'; मोबाइल चैट ने भी खोले कई राज

  पुणे: केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी सिया गोयल ने दावा किया है कि वह केतन अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि वह विग पहनता था।  पुलिस का कहना है कि सिया के बयान और उसके मोबाइल से मिले डिजिटल सबूतों में कई विरोधाभास सामने आए हैं। जांच एजेंसियां अब मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही हैं। पूछताछ में सिया ने बताई शादी से इनकार की वजह मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को हुई पूछताछ में सिया गोयल ने पुलिस को बताया कि वह केतन अग्रवाल से विवाह नहीं करना चाहती थी क्योंकि उसके सिर पर बाल नहीं थे और वह विग पहनता था। सिया ने यह भी कहा कि उसने परिवार की नाराजगी के डर से शादी से इनकार नहीं किया। पुलिस के अनुसार, दोनों की सगाई फरवरी में हुई थी और नवंबर में शादी प्रस्तावित थी। विवाह समारोह के लिए राजस्थान के एक पैलेस की बुकिंग भी की जा चुकी थी, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च होने थे। मोबाइल चैट ने सिया के दावों पर खड़े किए सवाल लोनावला ग्रामीण पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान सिया ने दावा किया कि उसने पहले ही केतन को शादी न करने की इच्छा बता दी थी। उसके अनुसार, केतन हर बार कहता था कि अब बहुत देर हो चुकी है और रिश्ता तोड़ना संभव नहीं है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जब्त किए गए दोनों के मोबाइल फोन से मिली चैट इस दावे का समर्थन नहीं करती। शुरुआती जांच में दोनों के बीच सामान्य मंगेतर की तरह बातचीत और प्रेमपूर्ण संदेश मिले हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर सिया के मौजूदा बयान पूरी तरह विश्वसनीय नहीं लग रहे हैं। सभी बयानों का इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से मिलान किया जा रहा है। हर एंगल से जांच कर रही है पुलिस पुलिस का कहना है कि जांच किसी एक पहलू तक सीमित नहीं है। डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, आरोपियों के बयान और तकनीकी सबूतों का विस्तार से विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके। 18 जून को हुई थी केतन अग्रवाल की मौत जानकारी के अनुसार, 18 जून को पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले से गिरने के बाद केतन अग्रवाल की मौत हुई थी। शुरुआती तौर पर इसे हादसा माना गया, लेकिन बाद में पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच एजेंसियों को संदेह है कि सिया गोयल अपनी जिंदगी के इस दौर में शादी नहीं करना चाहती थी और परिवार के दबाव में उसने यह रिश्ता स्वीकार किया था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है। सिया गोयल और चेतन चौधरी पुलिस हिरासत में मामले में पुलिस ने 23 जून को सिया गोयल और उसके दोस्त चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया था। दोनों फिलहाल 29 जून तक पुलिस हिरासत में हैं। पुलिस लगातार उनसे पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच जारी है। जांच जारी, अभी आरोप साबित होना बाकी पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। आरोपियों के बयानों, डिजिटल साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
Father of accused Siya Goyal says she should receive the strictest punishment if found guilty in the Ketan Agrawal murder case.
पुणे मर्डर केस: 'अगर बेटी दोषी है तो उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले', सिया गोयल के पिता का भावुक बयान

  पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में आरोपी सिया गोयल के पिता प्रवीण गोयल ने अपनी बेटी को लेकर भावुक लेकिन सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि अदालत में सिया के खिलाफ हत्या के आरोप साबित हो जाते हैं, तो उसे कानून के अनुसार सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक पिता होने के बावजूद वह न्यायिक प्रक्रिया में किसी तरह की रियायत नहीं चाहते। 'अब भी यकीन नहीं कि मेरी बेटी ऐसा कर सकती है' समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में प्रवीण गोयल ने कहा कि उन्हें आज भी विश्वास नहीं हो रहा कि उनकी बेटी ऐसा अपराध कर सकती है। उन्होंने बताया कि सिया की गिरफ्तारी की खबर मिलने के बाद उन्हें गहरा सदमा लगा और उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने कहा, "मेरी बेटी ने कभी मुझसे झूठ नहीं बोला। वह हमेशा सही रास्ते पर चली। इसलिए उस पर लगे आरोपों पर यकीन करना मेरे लिए बेहद मुश्किल है।" 'दोषी साबित हुई तो सबसे कड़ी सजा मिले' प्रवीण गोयल ने कहा कि अगर अदालत में सिया के खिलाफ सभी आरोप साबित हो जाते हैं, तो उसे बिना किसी रियायत के कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, "एक पिता होने के बावजूद मैं न्याय के रास्ते में नहीं आऊंगा। अगर मेरी बेटी दोषी है तो उसे वही सजा मिलनी चाहिए जिसकी वह हकदार है।" भावुक होकर कही बड़ी बात बातचीत के दौरान प्रवीण गोयल भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यदि सिया दोषी साबित होती है तो उसे उसी लोहागढ़ किले पर ले जाकर उसी जगह से धक्का दे देना चाहिए, जहां से पुलिस के अनुसार केतन अग्रवाल को खाई में धक्का दिया गया था। यह उनके भावनात्मक बयान का हिस्सा था। अंतिम फैसला अदालत और भारतीय कानून के अनुसार ही होगा। क्या है पूरा मामला? पुलिस के अनुसार, 18 जून को पुणे के लोहागढ़ किले पर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर सिया के मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश रची। आरोप है कि दोनों ने केतन को किले के एक सुनसान हिस्से में ले जाकर खाई में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। फिलहाल सिया गोयल और चेतन चौधरी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि मामले की जांच जारी है।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
Khunti murder case
खूंटी में फिर हत्या से सनसनी, सड़क किनारे मिला युवक का शव

खूंटी। झारखंड के खूंटी जिले में अपराधियों ने एक बार फिर पुलिस को खुली चुनौती देते हुए हत्या की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। रनिया थाना क्षेत्र में एक युवक की पत्थर से कुचलकर हत्या कर दी गई और शव को सड़क किनारे फेंक दिया गया। घटना ऐसे समय सामने आई, जब पुलिस एक अन्य हत्याकांड के आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेजकर लौटी थी। लगातार हो रही हत्याओं ने इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।   क्या है मामला? सोमवार सुबह रनिया थाना पुलिस को तांबा रोड के किनारे एक व्यक्ति का शव पड़े होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शुरुआती तौर पर मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हुआ, लेकिन घटनास्थल और शव का बारीकी से निरीक्षण करने पर हत्या की आशंका स्पष्ट हो गई। मृतक के सिर और चेहरे पर गंभीर चोट के निशान मिले, जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि अपराधियों ने भारी पत्थर से हमला कर उसकी हत्या की और सबूत छिपाने के लिए शव को सड़क किनारे छोड़ दिया।   जांच के दौरान मृतक की पहचान तोरपा निवासी 40 वर्षीय राधेश्याम साहू के रूप में हुई। परिजनों ने बताया कि वह पिछले करीब पांच वर्षों से रनिया में मोटर गैराज चलाकर अपना जीवनयापन कर रहे थे। उनकी हत्या की खबर से परिवार और स्थानीय लोगों में शोक और आक्रोश का माहौल है।   जमीन विवाद समेत सभी एंगल पर जांच तोरपा के डीएसपी विजय सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। हालांकि पुलिस आपसी रंजिश, व्यक्तिगत दुश्मनी और अन्य संभावित कारणों को भी ध्यान में रखकर जांच कर रही है। संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और पुलिस का दावा है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर लिया जाएगा।   पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं से खूंटी जिले में लोगों के बीच भय का माहौल है। स्थानीय लोग अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

anjali kumari जून 15, 2026 0
Giridih Murder Case
जादू-टोना और जमीन विवाद बना दंपती हत्याकांड की वजह, गिरिडीह पुलिस ने सात आरोपियों को किया गिरफ्तार

गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले के मधुबन थाना क्षेत्र स्थित दलान चलकरी गांव में हुए चर्चित दंपती हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया है कि इस दोहरे हत्याकांड के पीछे अंधविश्वास, जादू-टोना की आशंका और पुराना जमीन विवाद मुख्य कारण थे। पुलिस ने मामले में मृतक के ही रिश्तेदारों समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार और खून से सने कपड़े भी बरामद किए हैं।   विशेष टीम ने तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों से सुलझाई गुत्थी गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने बताया कि 2-3 मार्च की रात दलान चलकरी के तिरिलटांड़ टोला में पतिया हांसदा और उनकी पत्नी परनी देवी की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए डुमरी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी आबिद खान के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा किया।   गोतिया पक्ष के लोगों ने रची थी साजिश जांच में पता चला कि मृतक परिवार और गोतिया पक्ष के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसके साथ ही जादू-टोना को लेकर भी आपसी तनाव था। इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से दंपती की हत्या की साजिश रची। पुलिस के अनुसार रमेश हांसदा, विजय हांसदा और पांडु हांसदा ने धारदार हथियार से हमला कर हत्या की, जबकि दोधमा हांसदा, बबलू हांसदा, मोती हांसदा और सिकरा हांसदा ने वारदात को अंजाम देने में सहयोग किया।   हथियार और खून से सने कपड़े बरामद पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त एक लोहे की तलवार, दो लोहे के छुरे, खून के धब्बों वाले कपड़े और गमछे बरामद किए हैं। बरामद सामान को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। सभी सात आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे की जांच जारी है, ताकि अदालत में मजबूत चार्जशीट पेश की जा सके।

anjali kumari जून 12, 2026 0
Teacher Murder Case
पलामू में शिक्षक की हत्या के बाद बवाल, सड़क जाम कर ग्रामीणों ने  प्रदर्शन

पलामू। जिले के छतरपुर थाना क्षेत्र के चिल्हो खुर्द गांव में पारा शिक्षक उदय सिंह की हत्या के बाद लोगों का आक्रोश शनिवार को खुलकर सामने आया। सैकड़ों ग्रामीणों, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं, ने छतरपुर थाना पहुंचकर घेराव किया और जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने भारत माता चौक को करीब तीन घंटे तक जाम कर दिया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।   गिरफ्तारी और मुआवजे की मांग प्रदर्शनकारियों ने हत्या में शामिल सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक सभी दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।   अधिकारियों ने संभाला मोर्चा स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी गणेश महतो, अंचल अधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी आशीष कुमार साहू और पुलिस अंचल निरीक्षक द्वारिका राम मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों और परिजनों से बातचीत कर उन्हें निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि काफी देर तक लोग अपनी मांगों पर अड़े रहे।   एक आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी पुलिस अंचल निरीक्षक द्वारिका राम ने बताया कि मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है ताकि किसी भी दोषी को कानून से बचने का मौका न मिले।   परिजनों ने जताई साजिश की आशंका मृतक के बेटे बिपिन सिंह ने आरोप लगाया कि हत्या में कई लोग शामिल थे, लेकिन अब तक केवल एक गिरफ्तारी हुई है। वहीं, पत्नी तेतरी देवी ने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए सभी दोषियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की।   इलाके में तनाव बरकरार घटना के बाद चिल्हो खुर्द और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल है। स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।

Unknown मई 30, 2026 0
Police investigation at crime scene in Bihar after woman shot dead and skeleton recovered in Siwan
बिहार में दो सनसनीखेज घटनाएं: सहरसा में महिला की गोली मारकर हत्या, सीवान में 5 महीने से लापता युवक का कंकाल बरामद

  सहरसा में घास काटने गई महिला की गोली मारकर हत्या बिहार के सहरसा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। Saharsa के सलखुआ थाना क्षेत्र के कोपरिया गांव में अज्ञात अपराधियों ने एक 20 वर्षीय तलाकशुदा महिला की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतका की पहचान कोपरिया पंचायत के वार्ड-13 निवासी धीरेन्द्र यादव की पुत्री शुषम कुमारी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह गांव के पास स्थित गुलडाही बहियार में घास काटने गई थी, तभी अपराधियों ने उसके गले में गोली मार दी, जिससे घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई।   महिलाओं ने खेत में देखा खून से लथपथ शव जानकारी के अनुसार, गांव की कुछ महिलाएं घास काटकर वापस लौट रही थीं। इसी दौरान उनकी नजर खेत में खून से लथपथ पड़े शव पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने शोर मचाया और गांव वालों को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही मृतका के परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और सनसनी का माहौल बन गया।   तीन साल पहले हुआ था विवाह, बाद में हो गया था तलाक मृतका के पिता ने बताया कि करीब तीन साल पहले उनकी बेटी की शादी हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद उसका तलाक हो गया। परिवार वाले अब उसकी दूसरी शादी की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच इस दर्दनाक घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है।   पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मक्के के खेत से शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर हत्या के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।   सीवान में 5 महीने से लापता युवक का कंकाल मिला इधर Siwan जिले में करीब पांच महीने से लापता युवक का कंकाल मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान दारौंदा थाना क्षेत्र के उजाय गांव निवासी राजेंद्र यादव के रूप में हुई है। कंकाल गांव के पास एक खेत से बरामद हुआ है।   26 सितंबर को भैंस चराने निकले थे घर से परिजनों के अनुसार, राजेंद्र यादव 26 सितंबर 2025 को सुबह करीब 11 बजे घर से भैंस चराने के लिए निकले थे, लेकिन इसके बाद वह वापस घर नहीं लौटे। परिवार ने काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया।   मोबाइल और सामान मिलने से हुई पहचान बीती रात गांव के एक व्यक्ति ने परिजनों को सूचना दी कि गांव के पूर्व दिशा में स्थित चंवर में लाठी और छाता पड़ा हुआ है। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे और पुलिस को भी इसकी जानकारी दी। पुलिस की मौजूदगी में जब आसपास खोजबीन की गई तो वहां से मोबाइल फोन जेब में रखा पैसा खैनी की चुनौटी गमछा और लाठी मानव हड्डियां बरामद हुईं। इन सामानों के आधार पर कंकाल की पहचान राजेंद्र यादव के रूप में की गई।   हत्या की आशंका, जांच में जुटी पुलिस परिजनों का आरोप है कि राजेंद्र यादव की हत्या कर शव को खेत में फेंक दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई और जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0