खूंटी। झारखंड के खूंटी जिले में अपराधियों ने एक बार फिर पुलिस को खुली चुनौती देते हुए हत्या की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। रनिया थाना क्षेत्र में एक युवक की पत्थर से कुचलकर हत्या कर दी गई और शव को सड़क किनारे फेंक दिया गया। घटना ऐसे समय सामने आई, जब पुलिस एक अन्य हत्याकांड के आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेजकर लौटी थी। लगातार हो रही हत्याओं ने इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोमवार सुबह रनिया थाना पुलिस को तांबा रोड के किनारे एक व्यक्ति का शव पड़े होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शुरुआती तौर पर मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हुआ, लेकिन घटनास्थल और शव का बारीकी से निरीक्षण करने पर हत्या की आशंका स्पष्ट हो गई। मृतक के सिर और चेहरे पर गंभीर चोट के निशान मिले, जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि अपराधियों ने भारी पत्थर से हमला कर उसकी हत्या की और सबूत छिपाने के लिए शव को सड़क किनारे छोड़ दिया।
जांच के दौरान मृतक की पहचान तोरपा निवासी 40 वर्षीय राधेश्याम साहू के रूप में हुई। परिजनों ने बताया कि वह पिछले करीब पांच वर्षों से रनिया में मोटर गैराज चलाकर अपना जीवनयापन कर रहे थे। उनकी हत्या की खबर से परिवार और स्थानीय लोगों में शोक और आक्रोश का माहौल है।
तोरपा के डीएसपी विजय सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। हालांकि पुलिस आपसी रंजिश, व्यक्तिगत दुश्मनी और अन्य संभावित कारणों को भी ध्यान में रखकर जांच कर रही है। संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और पुलिस का दावा है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर लिया जाएगा।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं से खूंटी जिले में लोगों के बीच भय का माहौल है। स्थानीय लोग अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
झारखंड में अब तक 29% कम बारिश दर्ज, कई जिलों में सामान्य से कम वर्षा रांची। झारखंड में मानसून के दौरान अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में सामान्य से करीब 29 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। बारिश की कमी का असर खेती-किसानी पर भी पड़ रहा है और कई इलाकों में किसान पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कई इलाकों में बारिश का असमान वितरण राज्य में बारिश का वितरण एक समान नहीं रहा है। कुछ जिलों में अच्छी बारिश हुई है, जबकि कई जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में मानसून की स्थिति में अंतर देखने को मिल रहा है। बारिश की कमी के कारण खासकर धान की खेती पर चिंता बढ़ी है। ग्रामीण इलाकों में किसान खेतों में पर्याप्त नमी और बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मानसून की गतिविधि पर मौसम विभाग की नजर मौसम विभाग लगातार राज्य में मानसून की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति में सुधार होने पर वर्षा की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है। हालांकि, बारिश की कमी के बीच कुछ हिस्सों में अचानक तेज बारिश और वज्रपात की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इससे यह स्पष्ट है कि बारिश का वितरण कई क्षेत्रों में असमान बना हुआ है। किसानों के लिए बढ़ी चिंता झारखंड की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और बड़ी संख्या में किसान मानसूनी बारिश पर निर्भर हैं। ऐसे में सामान्य से कम बारिश लंबे समय तक जारी रहने पर खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है। कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से भी फसल की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। किसानों को मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार खेती से जुड़े जरूरी फैसले लेने की सलाह दी जा रही है। आगे बारिश बढ़ने की उम्मीद मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार राज्य में मानसून की गतिविधियां आगे भी बनी रह सकती हैं। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो 29 प्रतिशत की वर्तमान कमी कम होने की संभावना है। फिलहाल राज्य में बारिश की कमी के साथ-साथ कुछ जिलों में भारी बारिश और वज्रपात का खतरा भी बना हुआ है। लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
देवेंद्र महतो ने सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद तोड़ा अनशन, छात्रों का आंदोलन जारी रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद अनशन तोड़ने का फैसला किया। हालांकि, परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन अभी जारी है। सोनम वांगचुक से हुई बातचीत अनशन के दौरान देवेंद्र नाथ महतो की सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत हुई। बातचीत में छात्र आंदोलन और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके बाद महतो ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। अनशन खत्म होने के बावजूद छात्रों की प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है। परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों में नाराजगी JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर छात्र लंबे समय से विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी परीक्षा व्यवस्था में सुधार, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठा रहे हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि केवल अनशन समाप्त होने से आंदोलन खत्म नहीं होगा। उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस कदम उठाए जाने तक विरोध जारी रहेगा। सरकार से समाधान की मांग छात्र संगठन सरकार से बातचीत कर विवाद का समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों की ओर से परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की जा रही है। वहीं, सरकार की ओर से भी छात्रों की समस्याओं पर बातचीत और समाधान का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई है। आंदोलन की अगली रणनीति पर नजर देवेंद्र नाथ महतो के अनशन समाप्त करने के बाद अब छात्र आंदोलन की अगली रणनीति पर नजर है। आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखने की तैयारी में हैं। फिलहाल अनशन खत्म होने के बावजूद JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और सरकार तथा छात्रों के बीच आगे की बातचीत इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।
झारखंड में SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आज होगी जारी, छूटे मतदाताओं के लिए दावा-आपत्ति शुरू रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत प्रारूप मतदाता सूची आज, 5 अगस्त 2026 को जारी की जा रही है। सूची जारी होने के साथ ही उन मतदाताओं के लिए दावा और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी, जिनका नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं है। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया 4 सितंबर 2026 तक चलेगी। 43 लाख से ज्यादा नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर SIR प्रक्रिया के दौरान किए गए सत्यापन के बाद झारखंड में 43 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। इनमें मृत मतदाता, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके मतदाता, दोहरी प्रविष्टियां और अन्य कारणों से सत्यापन पूरा नहीं हो पाने वाले नाम शामिल बताए गए हैं। हालांकि, किसी नाम का ड्राफ्ट सूची में नहीं होना अपने आप में मतदाता का अंतिम रूप से नाम कटना नहीं है। पात्र मतदाताओं को दावा प्रस्तुत कर अपना नाम शामिल कराने का अवसर दिया गया है। 4 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे दावा-आपत्ति ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल की जा सकेगी। जिन योग्य मतदाताओं का नाम सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा पेश कर सकते हैं। मतदाताओं को सलाह दी गई है कि वे अपना नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में जरूर जांच लें। नाम नहीं मिलने पर निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ दावा दाखिल करना महत्वपूर्ण होगा। पात्र मतदाता का नाम नहीं हटाने का भरोसा झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि SIR का उद्देश्य किसी वास्तविक और पात्र मतदाता का नाम हटाना नहीं है। उन्होंने पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल किए जाने का भरोसा भी दिया है। अब ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसके बाद प्राप्त दावों और आपत्तियों की जांच कर अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी।