खूंटी। झारखंड के खूंटी जिले में अपराधियों ने एक बार फिर पुलिस को खुली चुनौती देते हुए हत्या की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। रनिया थाना क्षेत्र में एक युवक की पत्थर से कुचलकर हत्या कर दी गई और शव को सड़क किनारे फेंक दिया गया। घटना ऐसे समय सामने आई, जब पुलिस एक अन्य हत्याकांड के आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेजकर लौटी थी। लगातार हो रही हत्याओं ने इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या है मामला? सोमवार सुबह रनिया थाना पुलिस को तांबा रोड के किनारे एक व्यक्ति का शव पड़े होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शुरुआती तौर पर मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हुआ, लेकिन घटनास्थल और शव का बारीकी से निरीक्षण करने पर हत्या की आशंका स्पष्ट हो गई। मृतक के सिर और चेहरे पर गंभीर चोट के निशान मिले, जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि अपराधियों ने भारी पत्थर से हमला कर उसकी हत्या की और सबूत छिपाने के लिए शव को सड़क किनारे छोड़ दिया। जांच के दौरान मृतक की पहचान तोरपा निवासी 40 वर्षीय राधेश्याम साहू के रूप में हुई। परिजनों ने बताया कि वह पिछले करीब पांच वर्षों से रनिया में मोटर गैराज चलाकर अपना जीवनयापन कर रहे थे। उनकी हत्या की खबर से परिवार और स्थानीय लोगों में शोक और आक्रोश का माहौल है। जमीन विवाद समेत सभी एंगल पर जांच तोरपा के डीएसपी विजय सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। हालांकि पुलिस आपसी रंजिश, व्यक्तिगत दुश्मनी और अन्य संभावित कारणों को भी ध्यान में रखकर जांच कर रही है। संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और पुलिस का दावा है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर लिया जाएगा। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं से खूंटी जिले में लोगों के बीच भय का माहौल है। स्थानीय लोग अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
सिमडेगा। कोलेबिरा थाना क्षेत्र के नवाटोली गांव में शनिवार की भोर करीब चार बजे दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। 22 वर्षीय जेबा परवीन को उनके प्रेमी ने घर में घुसकर गोली मार दी, क्योंकि उन्होंने उससे शादी करने से इनकार कर दिया था। हमलावर घटना के बाद फरार हो गया। जेबा परवीन को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया और रांची के रिम्स रेफर किया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। पुलिस के अनुसार, आरोपी पिछले तीन-चार दिनों से लगातार जेबा परवीन और उसके परिवार पर शादी का दबाव डाल रहा था। कोलेबिरा पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी हुई है। इस घटना ने स्थानीय समुदाय में डर और आक्रोश फैलाया है और यह दिखाता है कि प्रेम संबंधों में उत्पन्न विवाद कितने खतरनाक रूप ले सकते हैं।
रांची। रांची के ओरमांझी थाना क्षेत्र में पुलिस ने TPC संगठन से जुड़े दो उग्रवादियों को पकड़ा है। इन पर एक व्यवसायी से 10 लाख रुपये रंगदारी मांगने का आरोप है। यह मामला 17 अप्रैल 2026 का है, जब ओरमांझी क्षेत्र के एक व्यवसायी से TPC के नाम पर 10 लाख रुपये की मांग की गई थी। इस संबंध में पहले ओरमांझी थाना में मामला दर्ज किया गया था। एसएसपी के निर्देश पर बनी एसआइटी मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी रांची के निर्देश पर एक विशेष टीम बनाई गई। सिल्ली डीएसपी के नेतृत्व में गठित इस टीम ने तकनीकी मदद से छापेमारी की। ईरबा से हुई गिरफ्तारी छापेमारी के दौरान ईरबा गोलचक्कर के पास शालीमार नर्सरी के नजदीक दो संदिग्ध व्यक्ति खड़े दिखे। पुलिस को देखते ही दोनों भागने लगे, लेकिन टीम ने घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान समरित गंझू उर्फ मलिंगा उर्फ अरुण जी और सोनू उरांव उर्फ सन्नी के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान समरित गंझू के बैग से एक देसी कट्टा, मैगजीन, दो मोबाइल, एक राउटर, दो सिम कार्ड, एक पावर बैंक और चार डेटा केबल बरामद किए गए। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे ओरमांझी, हजारीबाग, रामगढ़ और चतरा के व्यवसायियों से धमकी देकर लेवी वसूलने का काम करते थे। लंबा आपराधिक इतिहास गिरफ्तार समरित गंझू का आपराधिक इतिहास भी लंबा है और उसके खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हैं, जिनमें रंगदारी, धमकी और आर्म्स एक्ट से जुड़े केस शामिल हैं। पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क को लेकर अलग से एक और मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। इस कार्रवाई को रांची पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे इलाके में सक्रिय उग्रवादी नेटवर्क पर बड़ी चोट पहुंची है।
रांची। रांची के डोरंडा थाना क्षेत्र स्थित मनिटोला में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके को हिला दिया। शुरुआत में इस घटना को सामान्य मौत मानकर शव को दफना दिया गया था, लेकिन बाद में पुलिस जांच में हत्या का खुलासा हुआ। इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि हत्या के आरोप में मृतका की सगी बेटी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कब्र से निकलवाया गया शव, जांच तेज मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। कार्यपालक दंडाधिकारी की मौजूदगी में महिला के शव को कब्र से बाहर निकाला गया। इसके बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) भेज दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारण और हत्या के तरीके का खुलासा होने की उम्मीद है। बेटी पर साजिश का आरोप पुलिस जांच में शुरुआती तौर पर यह सामने आया है कि मृतका की बेटी ने अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। अधिकारियों के अनुसार यह हत्या पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी। घटना के बाद इसे सामान्य मौत दिखाने की कोशिश की गई, ताकि किसी को शक न हो और मामला दबा रहे। तीनों आरोपी गिरफ्तार, पूछताछ जारी डोरंडा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस हत्या के पीछे की असली वजह का पता लगाने में जुटी है। शुरुआती जांच में संपत्ति विवाद और आपसी रंजिश जैसे कारण सामने आ रहे हैं, हालांकि सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में गुरुवार देर रात सुरक्षा गार्ड की हत्या से इलाके में सनसनी फैल गई है। करीब 335 साल पुराने इस मंदिर में हुई इस वारदात ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को दहशत में डाल दिया है। मृतक गार्ड की पहचान, रात में हुई वारदात मृतक की पहचान बिरसा मुंडा के रूप में हुई है, जो लंबे समय से मंदिर में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि अज्ञात अपराधियों ने देर रात मंदिर परिसर में ही उनकी हत्या कर दी। शुक्रवार सुबह जब पुजारी और स्थानीय लोग मंदिर पहुंचे तो गार्ड का शव देखकर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस और FSL टीम जांच में जुटी घटना की जानकारी मिलते ही धुर्वा, जगन्नाथपुर और विधानसभा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। इसके अलावा हटिया डीएसपी, एसएसपी राकेश रंजन, सिटी एसपी पारस राणा और ग्रामीण एसपी ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया है। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। रंजिश या चोरी की आशंका प्रारंभिक जांच में पुलिस ने हत्या के पीछे आपसी रंजिश या चोरी की संभावना जताई है, हालांकि अभी तक स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है। ऐतिहासिक मंदिर में दहशत का माहौल नीलांचल पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर वर्ष 1691 में बड़कागढ़ रियासत के राजा एनीनाथ शाहदेव द्वारा पुरी जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर बनवाया गया था। यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की पूजा होती है और यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। घटना के बाद से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच भय और आक्रोश का माहौल है।
हजारीबाग। हजारीबाग के चरही थाना क्षेत्र में एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य पर छात्राओं के साथ छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, स्कूल की 12 से अधिक छात्राओं ने आरोप लगाया है कि प्राचार्य ने पढ़ाई के दौरान उनके साथ शारीरिक छेड़छाड़ की। यह घटना 11 अप्रैल की बताई जा रही है, जब दो छात्राओं ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर शिकायत दर्ज कराई। बाद में और छात्राएं भी सामने आईं, जिन्होंने इसी तरह के आरोप लगाए। बाल कल्याण समिति तक पहुंचा मामला शिकायत मिलने के बाद संबंधित टीम और पुलिस मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच शुरू की गई। इसके बाद पीड़ित छात्राओं को बयान के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। समिति ने मामले को गंभीर मानते हुए चरही थाना को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। जांच शुरू, कार्रवाई की मांग तेज इस मामले में स्थानीय सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधियों ने भी हस्तक्षेप किया है। संगठन की ओर से थाने में लिखित शिकायत देकर आरोपी प्राचार्य की कार्यशैली की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। छात्राओं ने बताई धमकी की बात पीड़ित छात्राओं का आरोप है कि छेड़छाड़ के साथ-साथ उन्हें धमकाया भी गया था कि यदि उन्होंने इस बारे में किसी को बताया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस खुलासे के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में गहरी नाराजगी और चिंता देखी जा रही है। पुलिस जांच में जुटी चरही थाना पुलिस ने मामले में आवेदन मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
धनबाद। धनबाद में अपराधियों के हौसले एक बार फिर बुलंद नजर आए, जब तेतुलमारी थाना क्षेत्र के शक्ति चौक के पास देर रात कोयला कारोबारी के वाहन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। इस हमले में कोयला कारोबारी मनीष सिंह समेत कई लोगों के घायल होने की सूचना है। घात लगाकर बैठे थे हमलावर मिली जानकारी के अनुसार, अपराधी पहले से ही शक्ति चौक के पास घात लगाकर बैठे थे। जैसे ही मनीष सिंह अपने वाहन से वहां पहुंचे, बदमाशों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। हमले से बचने के लिए चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए वाहन को तेज रफ्तार में भगाया और किसी तरह मुख्य सड़क की ओर निकल गया। कई लोगों के घायल होने की आशंका फायरिंग के दौरान वाहन में सवार मनीष सिंह और अन्य लोगों को गोली लगने की बात सामने आई है। हालांकि घायलों की स्थिति और संख्या को लेकर पुलिस ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी तेतुलमारी थाना प्रभारी विवेक कुमार ने बताया कि मनीष सिंह की पत्नी शिवानी सिंह की शिकायत पर अज्ञात अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और हमलावरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। संदिग्ध वाहन भी बरामद इसी बीच बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के किसान चौक के पास पुलिस पेट्रोलिंग के दौरान एक संदिग्ध वाहन बरामद हुआ है, जिस पर फायरिंग के निशान पाए गए हैं। हालांकि वाहन में कोई मौजूद नहीं था। जांच में जुटी पुलिस पुलिस अब दोनों घटनाओं के बीच कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है। इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और अपराधियों की तलाश जारी है। इस घटना ने एक बार फिर धनबाद में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में एक मेडिकल छात्रा के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। यह घटना 9 अप्रैल की रात एक अपार्टमेंट में हुई, जहां पीड़िता को जन्मदिन की पार्टी के लिए बुलाया गया था। आरोप है कि पार्टी के दौरान उसे खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर दिया गया, जिससे वह अर्धबेहोशी की हालत में चली गई। पिज्जा में नशा देकर दिया गया वारदात को अंजाम पीड़िता के बयान के अनुसार, केक काटने के बाद उसे पिज्जा दिया गया, जिसे खाने के बाद उसे नशे जैसा महसूस होने लगा। इसके बाद वह एक कमरे में आराम करने चली गई। इसी दौरान आरोपी दानिश ने उसकी हालत का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने बताया कि नशे की वजह से वह विरोध करने में असमर्थ थी। सुबह खून से लथपथ मिली पीड़िता पीड़िता ने एफआईआर में बताया कि सुबह जब उसे होश आया तो वह खून से लथपथ हालत में थी। घटना के बाद पार्टी में मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने उसे समझाकर हॉस्टल भेज दिया। वहां उसकी तबीयत और बिगड़ गई, जिसके बाद उसकी सहेली ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया और पुलिस को सूचना दी। एफआईआर दर्ज, आरोपी गिरफ्तार होने की सूचना लालपुर थाना पुलिस ने पीड़िता के फर्द बयान के आधार पर केस दर्ज कर लिया है। मामला केस नंबर 66/26 के तहत दर्ज हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी दानिश को पश्चिम बंगाल के खड़गपुर से गिरफ्तार किए जाने की सूचना है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। पुलिस जांच जारी पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। यह घटना शहर में सुरक्षा व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
गुमला। जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर पुलिस प्रशासन ने समीक्षा बैठक आयोजित की। पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमां ने चंदाली स्थित कार्यालय में मासिक अपराध समीक्षा बैठक की, जिसमें विभिन्न मामलों की प्रगति का आकलन करते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। त्योहारों के संचालन पर हुई समीक्षा बैठक में हाल ही में संपन्न हुए नगरपालिका चुनाव, होली, सरहुल, ईद और रामनवमी के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की गई। इन आयोजनों के शांतिपूर्ण संपन्न होने पर अधिकारियों की भूमिका का मूल्यांकन किया गया। गंभीर अपराधों पर प्रगति की जांच बैठक के दौरान हत्या, दुष्कर्म, अपहरण, POCSO और एससी-एसटी से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई। साथ ही लूट और गृहभेदन जैसे मामलों में अब तक की कार्रवाई का आकलन करते हुए लंबित मामलों को शीघ्र निष्पादित करने के निर्देश दिए गए। नशा और लंबित वारंट पर कार्रवाई की समीक्षा अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही कार्रवाई की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही लंबित वारंट, कुर्की और इस्तेहार के निष्पादन की प्रगति पर चर्चा हुई और इसे तेज करने के निर्देश दिए गए। जनसेवा से जुड़े मामलों के निपटारे पर जोर सूचना अधिकार, जन शिकायत, पासपोर्ट और चरित्र सत्यापन से संबंधित लंबित आवेदनों के निष्पादन की समीक्षा की गई। अधिकारियों को इन मामलों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा गया। सामाजिक अपराधों पर जागरूकता अभियान की समीक्षा डायन प्रथा, मानव तस्करी, पलायन और महिलाओं से जुड़े अपराधों की रोकथाम को लेकर चल रहे जागरूकता अभियानों की समीक्षा की गई और इसे और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। सड़क सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर चर्चा बैठक में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा की गई। हेलमेट जांच, नशे में ड्राइविंग और लापरवाही से वाहन चलाने वालों पर की गई कार्रवाई का आकलन किया गया। साथ ही जमानत पर छूटे अपराधियों की निगरानी व्यवस्था को सख्त रखने पर जोर दिया गया। नक्सल गतिविधियों और अवैध खनन पर नजर नक्सल गतिविधियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई, खुफिया तंत्र की स्थिति और अवैध खनन पर नियंत्रण को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को इन मामलों में सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन पिछले महीने के कार्यों के आधार पर थाना प्रभारियों और अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। कमजोर प्रदर्शन करने वालों को चेतावनी दी गई, जबकि बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया गया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।