झारखंड

Raped in Ranchi: रांची में पार्टी के दौरान मेडिकल छात्रा से दुष्कर्म

Anjali Kumari अप्रैल 14, 2026 0
Raped in Ranchi
Raped in Ranchi

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में एक मेडिकल छात्रा के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। यह घटना 9 अप्रैल की रात एक अपार्टमेंट में हुई, जहां पीड़िता को जन्मदिन की पार्टी के लिए बुलाया गया था। आरोप है कि पार्टी के दौरान उसे खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर दिया गया, जिससे वह अर्धबेहोशी की हालत में चली गई।

 

पिज्जा में नशा देकर दिया गया वारदात को अंजाम


पीड़िता के बयान के अनुसार, केक काटने के बाद उसे पिज्जा दिया गया, जिसे खाने के बाद उसे नशे जैसा महसूस होने लगा। इसके बाद वह एक कमरे में आराम करने चली गई। इसी दौरान आरोपी दानिश ने उसकी हालत का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने बताया कि नशे की वजह से वह विरोध करने में असमर्थ थी।

 

सुबह खून से लथपथ मिली पीड़िता


पीड़िता ने एफआईआर में बताया कि सुबह जब उसे होश आया तो वह खून से लथपथ हालत में थी। घटना के बाद पार्टी में मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने उसे समझाकर हॉस्टल भेज दिया। वहां उसकी तबीयत और बिगड़ गई, जिसके बाद उसकी सहेली ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया और पुलिस को सूचना दी।

 

एफआईआर दर्ज, आरोपी गिरफ्तार होने की सूचना


लालपुर थाना पुलिस ने पीड़िता के फर्द बयान के आधार पर केस दर्ज कर लिया है। मामला केस नंबर 66/26 के तहत दर्ज हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी दानिश को पश्चिम बंगाल के खड़गपुर से गिरफ्तार किए जाने की सूचना है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

 

पुलिस जांच जारी


पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। यह घटना शहर में सुरक्षा व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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20 अप्रैल के बाद आ सकते हैं मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट

रांची। झारखंड में मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट 20 अप्रैल के बाद कभी भी आ सकते हैं। बताया जा रहा है कि 25 अप्रैल तक सभी रिजल्ट आ जायेंगे। जानकारी के अनुसार कॉपियों का मूल्याकंन लगभग समाप्त हो चुका है। साथ ही परीक्षा परिणाम जारी करने को लेकर प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। जैक के आधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि सबसे पहले मैट्रिक और इंटर साइंस का रिजल्ट जारी किया जायेगा। परीक्षा परिणाम जारी करने के लिए सरकारी स्तर पर मुख्यमंत्री सह शिक्षा मंत्री को आमंत्रण भेजा जा रहा है। यदि बहुत व्यस्तता हुई तो परीक्षा परिणाम जारी करने के लिए राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री सुदीव्य कुमार सोनू आ सकते हैं। मैट्रिक में साढे चार लाख, जबकि इंटर में तीन लाख के आसपास अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी है।

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झारखंड उत्पाद सिपाही पेपर लीक में बड़ा खुलासा, छात्रों से वसूले 4.77 करोड़,10-10 लाख में डील

रांची। झारखंड उत्पाद सिपाही परीक्षा पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि पेपर लीक के लिए छात्रों से 3-3 लाख रुपये लिये गये थे और व्हाट्सएप से पेपर लीक कराये गये थे। यह मामला रांची के तमाड़ थाने में दर्ज हुआ है। जांच में घोटाले का परत दर परत खुलासा हो रहा है। इस मामले में पुलिस ने रड़गांव स्थित एक अर्धनिर्मित नर्सिंग कॉलेज से 166 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इनमें गिरोह के सरगना से लेकर परीक्षा देने आए आरोपियों तक शामिल हैं।   संचालन एजेंसी से चोरी किये गये थे प्रश्न पत्र जांच में सामने आया कि प्रश्न पत्र व्हाट्सएप के जरिए भेजे गए थे। गिरफ्तार आरोपी विकास कुमार के मोबाइल से पुलिस को पेपर मिला। पूछताछ में उसने बताया कि प्रश्न पत्र संचालन एजेंसी से चोरी किए गए थे और ‘चुनचुन’ नाम के व्यक्ति ने उसे व्हाट्सएप पर भेजा था। इसके बाद उसी पेपर के जवाब अभ्यर्थियों को रटवाए जा रहे थे।   रड़गांव का नर्सिंग कॉलेज बना था अड्डा रड़गांव का अर्धनिर्मित नर्सिंग कॉलेज इस पूरे खेल का अड्डा बना हुआ था। यहां अभ्यर्थियों को ठहराया गया, खाना-पीना कराया गया और उन्हें पेपर के जवाब याद करवाए जा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, यह पूरी तैयारी परीक्षा पास कराने के लिए की गई थी। छात्रों को फंसा कर लाया गया गिरोह के सदस्य बिहार और झारखंड के अलग-अलग इलाकों से अभ्यर्थियों को लालच देकर यहां लाते थे। उन्हें भरोसा दिलाया जाता था कि परीक्षा पास करवा दी जाएगी। इसके लिए कई एजेंट भी सक्रिय थे, जो छात्रों को फंसाकर इस नेटवर्क तक पहुंचाते थे।   3 लाख एडवांस, 10 लाख में डील पूछताछ में सबसे बड़ा खुलासा पैसों को लेकर हुआ। हर अभ्यर्थी से 3-3 लाख रुपये एडवांस लिए गए थे। कुल 159 अभ्यर्थियों से करीब 4.77 करोड़ रुपये वसूले गए। पूरी डील 10 लाख में तय होती थी, जिसमें बाकी 7 लाख परीक्षा पास होने के बाद देने की बात तय थी।   ठेकेदार और मालिक की भी मिलीभगत जांच में यह भी सामने आया कि नर्सिंग कॉलेज का ठेकेदार और मालिक भी इस खेल में शामिल थे। उन्होंने अभ्यर्थियों के रहने और खाने की व्यवस्था करवाई थी। इसके बदले उन्हें मोटी रकम दी गई थी। बताया जा रहा है कि इस पूरे प्लान की तैयारी करीब एक महीने पहले से चल रही थी।   गाड़ियों से पहुंचाए गए अभ्यर्थी अभ्यर्थियों को अलग-अलग जगहों से लाने के लिए गाड़ियों का इंतजाम किया गया था। कुछ गाड़ियां किराए पर ली गई थीं, जबकि कुछ आरोपियों की अपनी थीं। इन्हीं वाहनों से छात्रों को रड़गांव लाया गया।   166 आरोपी गये जेल पुलिस ने इस मामले में कुल 166 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इनमें 152 पुरुष और 7 महिला अभ्यर्थी शामिल हैं। साथ ही गिरोह के कई मुख्य आरोपी भी पकड़े गए हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और जल्द ही और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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रांची। झारखंड के ट्रेजरी घोटाले ने सरकार और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। बोकारो और हजारीबाग ट्रेजरी से पुलिस वेतन मद में करोड़ों की अवैध निकासी मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आईएएस कमेटी और सीआईडी जांच के आदेश दिये हैं। राज्य के सभी 33 ट्रेजरी की जांच शुरू हो गई है। वित्त मंत्री के प्रस्ताव पर बनी आइएएस कमेटी तकनीकी और आपराधिक दोनों पहलुओं की जांच कर रही है, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप है।  झारखंड के बोकारो और हजारीबाग जिले में ट्रेजरी से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।  इस घोटाले में पुलिस अधिकारियों के वेतन के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध लगाई गई है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में वित्त विभाग की एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है। वहीं, इस पूरे मामले में रची गई आपराधिक साजिश की परतें सीआईडी की तफ्तीश में खुलने लगी हैं। सीआइडी ने सभी एफआइआर की कॉपी ली वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, अब तक दर्ज सभी प्राथमिकियों को सीआईडी को ट्रांसफर किया जा रहा है। जहां आईएएस कमेटी वित्तीय अनियमितताओं और विभागीय खामियों की जांच करेगी। वहीं, सीआईडी ये पता लगाएगी कि इस सुनियोजित चोरी के पीछे कौन से माफिया या अपराधी सक्रिय थे। जांच का दायरा केवल दो जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी जिलों में भी संभावित गड़बड़ियों की पड़ताल की जाएगी। तकनीकी जांच में एजी की मदद झारखंड ट्रेजरी घोटाले की गहराई और तकनीकी बारीकियों को देखते हुए, वित्त विभाग ने प्रधान महालेखाकार (AG Office) से संपर्क किया है। सरकार चाहती है कि एजी ऑफिस के किसी अनुभवी अधिकारी को इस उच्चस्तरीय कमेटी का सदस्य बनाया जाए। इससे ट्रेजरी सॉफ्टवेयर और बिलिंग प्रक्रिया में हुई हेराफेरी को पकड़ने में आसानी होगी और दोषियों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जा सकेंगे। 25 महीने में निकाली 63 बार सैलरी बोकारो ट्रेजरी से एक रिटायर पुलिसकर्मी के नाम पर 4 करोड़ 29 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी हुई। आशंका है कि ये पूरा घोटाला 50 करोड़ रुपये या उससे भी अधिक का हो सकता है। जुलाई 2016 में रिटायर हो चुके उपेंद्र सिंह को कागजों पर दोबारा नौकरी में दिखाया गया। नवंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच पिछले 25 महीनों में कुल 63 बार फर्जी तरीके से वेतन निकाला गया। इस मामले में एसपी कार्यालय के अकाउंटेंट कौशल किशोर पांडेय को गिरफ्तार किया गया। उस पर बिल मैनेजमेंट सिस्टम (DDO Level) में छेड़छाड़ कर फर्जी वेतन बिल बनाने का गंभीर आरोप है। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी अकाउंटेंट ने घोटाले की रकम पहले अपने बैंक खाते में और बाद में अपनी पत्नी (अनु पांडेय) के खाते में ट्रांसफर की। पुलिस ने दोनों के खातों में जमा भारी राशि को फ्रीज कर दिया है। झारखंड में इस बड़े वित्तीय घोटाले के सामने आने के बाद पूरे प्रशासनिक विभाग में हड़कंप मच गया है। रडार पर सार्जेंट मेजर और डीएसपी स्तर के अधिकारी सरकारी विभाग में वेतन निकासी की प्रक्रिया काफी जटिल होती है, जिसमें पुलिस लाइन से मास्टर रोल पर सार्जेंट मेजर के हस्ताक्षर होते हैं। इसके बाद लेखापाल, बड़ा बाबू और अंत में डीएसपी (निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी) के हस्ताक्षर से ट्रेजरी से भुगतान होता है। ऐसे में जांच की आंच डीएसपी, सार्जेंट मेजर और लेखा शाखा के क्लर्कों तक पहुंचना तय माना जा रहा है। इसी तर्ज पर कभी बिहार-झारखंड में चारा घोटाला हुआ था। सिपाही से इंस्पेक्टर तक के वेतन में खेल शुरुआती जांच में पता चला है कि  सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक के कर्मचारियों के वेतन बिलों में छेड़छाड़ कर ये अवैध निकासी की गई है। मास्टर रोल से लेकर ट्रेजरी तक की चेन में शामिल हर अधिकारी अब जांच के दायरे में है। वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई है कि उच्चस्तरीय कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद जल्द ही इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश होगा और दोषियों को सजा मिलेगी।

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