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Ram Charan Talks Parenting Style

‘मैं थोड़ा सख्त पिता हूं’: Ram Charan ने पैरेंटिंग को लेकर किया खुलासा, पत्नी को बताया बच्चों की ‘नर्चरिंग पोल’

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
Ram Charan with wife Upasana Konidela and children sharing family parenting moments.
Ram Charan Parenting Style Reveal

साउथ सिनेमा के सुपरस्टार Ram Charan ने हाल ही में अपनी पर्सनल लाइफ और पैरेंटिंग स्टाइल को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने खुद को “रफ (सख्त) पिता” बताते हुए कहा कि वह अपने बच्चों को खुलकर खेलने, गिरने और सीखने का मौका देते हैं, जबकि उनकी पत्नी Upasana Konidela परिवार की “नर्चरिंग पोल” हैं।

तीन बच्चों के पिता बनने के बाद बदली जिंदगी

राम चरण और उपासना ने 31 जनवरी 2026 को हैदराबाद में जुड़वां बच्चों–एक बेटे और एक बेटी–का स्वागत किया। इससे पहले उनकी ढाई साल की बेटी कारा (Kaara) है। अब उनके परिवार में तीन बच्चे हैं, जिनके नाम हैं:

  • कारा (Kaara)
  • शिवराम (Shivram)
  • अनवीरा देवी (Anveera Devi)

एक इंटरव्यू में राम चरण ने कहा कि बच्चों के आने के बाद उनकी जिंदगी और घर पूरी तरह बदल गया है। उन्होंने बच्चों को “दिल के बाहर धड़कते दिल” बताया।

“मैं उन्हें रिस्क लेने देता हूं”

राम चरण ने अपने पैरेंटिंग स्टाइल के बारे में कहा:
“मैं रफ तरह का पिता हूं। मैं उन्हें कूदने, गंदा होने, चढ़ने और रिस्क लेने देता हूं।”

उनका मानना है कि बच्चों को अनुभव से सीखने देना जरूरी है, जबकि उपासना बच्चों को प्यार और देखभाल से संभालती हैं।

उपासना हैं परिवार की ‘नर्चरिंग पोल’

राम ने अपनी पत्नी की तारीफ करते हुए कहा:
“उनकी मां नर्चरिंग पोल हैं, और मैं वह हूं जिसके पास बच्चे हिम्मत पाने आते हैं।”

यह संतुलन बच्चों के बेहतर विकास में मदद करता है।

स्टारडम के बीच ‘प्रेजेंट फादर’ बनने की कोशिश

Ram Charan ने बताया कि बिजी शेड्यूल के बावजूद वह एक “प्रेजेंट फादर” बनना चाहते हैं।
उनका कहना है कि:

  • बच्चों के साथ समय बिताना उनकी प्राथमिकता है
  • घर का माहौल बच्चों के आसपास ही घूमता है

उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने बच्चों से जिंदगी को आसान और खुशहाल तरीके से जीना सीखना चाहते हैं।

अलग तरीके से हो रही बच्चों की परवरिश

राम और उपासना अपने बच्चों को एक अलग और खुला माहौल दे रहे हैं:

  • Montessori शिक्षा
  • एक्सप्लोर करने की आजादी
  • सीमित और संतुलित पारिवारिक माहौल

राम चरण अपने पालतू जानवरों को भी परिवार का अहम हिस्सा मानते हैं और अपनी दुनिया को छोटा और संतुलित रखने में विश्वास रखते हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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शबाना आजमी की दिलचस्प इच्छा, बोलीं- अब बॉबी देओल के साथ भी करना चाहती हूं काम

'बंटवारा 1947' ट्रेलर लॉन्च   मुंबई, एजेंसियां। फिल्म 'बंटवारा 1947' के ट्रेलर लॉन्च के दौरान दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी ने अभिनेता बॉबी देओल के साथ काम करने की इच्छा जताई। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्होंने धर्मेंद्र और सनी देओल के साथ काम किया है, अब "बॉबी को भी बोलो, अब तैयार हो जाए।" उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद कलाकारों और दर्शकों ने तालियां बजाईं।   देओल परिवार से जुड़ा खास रिश्ता   शबाना आजमी ने कहा कि देओल परिवार के साथ उनका लंबे समय से अच्छा रिश्ता रहा है। उन्होंने धर्मेंद्र और सनी देओल के साथ काम करने के अपने अनुभवों को याद करते हुए कहा कि अब वह बॉबी देओल के साथ भी स्क्रीन साझा करना चाहती हैं। उनके इस बयान ने ट्रेलर लॉन्च इवेंट का माहौल हल्का-फुल्का और यादगार बना दिया।   'बंटवारा 1947' में निभाया अहम किरदार   राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी 'बंटवारा 1947' भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म है। इसमें सनी देओल, शबाना आजमी, प्रीति जिंटा, करण देओल और अली फजल अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म 1947 के विभाजन के मानवीय और भावनात्मक पहलुओं को बड़े पर्दे पर दिखाएगी।   ट्रेलर को मिल रहा शानदार रिस्पॉन्स   फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। दर्शक शबाना आजमी और सनी देओल के अभिनय की सराहना कर रहे हैं, वहीं फिल्म की भावनात्मक कहानी और दमदार प्रस्तुति ने रिलीज से पहले ही दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।

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Ayushmaan Sethi Google Trends में क्यों छाए? अर्चना पूरन सिंह के बेटे का वीडियो और फैमिली व्लॉग बना चर्चा का कारण

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता-निर्देशक परमीत सेठी और अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह के बेटे आयुष्मान सेठी (Ayushmaan Sethi) इन दिनों Google Trends में चर्चा में हैं। उनके नाम को लेकर अचानक सर्च बढ़ने की वजह उनकी कोई बड़ी फिल्म रिलीज नहीं, बल्कि उनके परिवार से जुड़े वीडियो, व्लॉग और सोशल मीडिया गतिविधियां बताई जा रही हैं।   परिवार के व्लॉग से बढ़ी लोकप्रियता   आयुष्मान सेठी अपनी मां अर्चना पूरन सिंह और परिवार के साथ जुड़े व्लॉग्स में नजर आते रहे हैं। उनके परिवार के वीडियो में निजी जिंदगी, यात्रा और रोजमर्रा की गतिविधियों को दिखाया जाता है, जिससे दर्शकों के बीच उनकी पहचान बढ़ी है। हाल के दिनों में उनके नाम को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की रुचि बढ़ी और इसी वजह से वह ट्रेंड में दिखाई दिए।   गर्लफ्रेंड और निजी जिंदगी को लेकर चर्चा   आयुष्मान सेठी की निजी जिंदगी भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार उनके परिवार से जुड़े एक व्लॉग में उनकी कथित पार्टनर समीक्षा शेट्टी के साथ उनकी मौजूदगी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई। हालांकि दोनों की ओर से रिश्ते को लेकर कोई बड़ी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।   एक्टिंग और डायरेक्शन में बना रहे पहचान   आयुष्मान सेठी सिर्फ परिवार की पहचान के कारण ही नहीं, बल्कि अपने काम को लेकर भी आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने न्यूयॉर्क में एक्टिंग की ट्रेनिंग ली है और अभिनय के साथ-साथ निर्देशन में भी रुचि दिखाई है। उन्होंने म्यूजिक वीडियो और शॉर्ट फिल्म प्रोजेक्ट्स में काम किया है।   उन्होंने डायरेक्शन के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाया है और अपने प्रोजेक्ट्स के जरिए फिल्म निर्माण की दुनिया में पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।   सोशल मीडिया पर बढ़ती फैन फॉलोइंग   फिल्मी परिवार से आने के बावजूद आयुष्मान सेठी अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी पढ़ाई, एक्टिंग करियर और परिवार के साथ जुड़े कंटेंट को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स लगातार दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसी वजह से समय-समय पर उनका नाम Google Trends में दिखाई देता है।  

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दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' के OTT और नेटफ्लिक्स रिलीज से जुड़ी खबर
दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' OTT पर रिलीज के लिए तैयार

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की चर्चित फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' अब OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने के लिए तैयार है। इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी यह इमोशनल ड्रामा फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज के बाद दर्शकों और समीक्षकों से अच्छी प्रतिक्रिया हासिल कर चुकी है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ शरवरी, वेदांग रैना और नसीरुद्दीन शाह अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं।   नेटफ्लिक्स पर होगी स्ट्रीमिंग   फिल्म के डिजिटल राइट्स नेटफ्लिक्स के पास हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म थिएटर रिलीज के बाद लगभग 6 से 8 सप्ताह के OTT विंडो के बाद स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध होगी। हालांकि आधिकारिक स्ट्रीमिंग तारीख को लेकर प्लेटफॉर्म की ओर से अंतिम घोषणा का इंतजार है।   1947 के विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी है फिल्म   'मैं वापस आऊंगा' एक पीरियड रोमांटिक ड्रामा फिल्म है, जिसकी कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन (1947) के दौर की भावनाओं, बिछड़ने और रिश्तों की गहराई को दिखाती है। फिल्म में प्यार, इंतजार और इंसानी जज्बातों को इम्तियाज अली के खास अंदाज में पेश किया गया है।   दिलजीत की एक्टिंग की हुई तारीफ   फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अभिनय को दर्शकों ने काफी पसंद किया है। नसीरुद्दीन शाह और शरवरी के अभिनय की भी सराहना हुई। सिनेमाघरों में रिलीज के बाद फिल्म ने धीरे-धीरे दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई और अब OTT रिलीज के जरिए यह और बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचेगी।  

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