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चीनी की जमाखोरी पर सरकार का बड़ा एक्शन, स्टॉक रखने की सीमा तय; 1 अगस्त से लागू होंगे नए नियम

abhishek singh जुलाई 29, 2026 0
Sugar Stock
Sugar Stock Holding Limit has been fixed at 4,000 quintals

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों और संभावित जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने देशभर के चीनी कारोबारियों और डीलरों के लिए स्टॉक रखने की अधिकतम सीमा 4,000 क्विंटल (400 टन) तय कर दी है। यह व्यवस्था 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। सरकार का उद्देश्य त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रित करना है।

 

30 दिन से ज्यादा नहीं रख सकेंगे स्टॉक

 

नए आदेश के अनुसार, कोई भी डीलर चीनी का स्टॉक 30 दिनों से अधिक अपने पास नहीं रख सकेगा। जिन कारोबारियों के पास तय सीमा से अधिक चीनी का भंडार है, उन्हें 1 अगस्त तक अतिरिक्त स्टॉक बाजार में उतारना होगा, ताकि नए नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

 

जमाखोरी और सट्टेबाजी पर लगेगी रोक

 

सरकार का मानना है कि हाल के दिनों में चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे जमाखोरी और सट्टेबाजी भी एक बड़ा कारण रही है। नए नियमों से कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों पर रोक लगेगी और उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

 

त्योहारी सीजन में कीमतें स्थिर रखने की कोशिश

 

रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव और अन्य त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए सरकार ने समय रहते यह फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि बाजार की लगातार निगरानी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

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Share Market Rally
शेयर बाजार में तेजी, निवेशकों की नजर IT और दिग्गज कंपनियों के शेयरों पर

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में आज तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स में 800 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 24,200 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। IT सेक्टर के शेयरों में मजबूत खरीदारी और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।   IT शेयरों में जोरदार उछाल   आज बाजार की तेजी में IT कंपनियों के शेयरों की अहम भूमिका रही। निवेशकों ने IT सेक्टर में खरीदारी बढ़ाई, जिससे इंडेक्स को मजबूती मिली। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले निवेशकों की नजर बाजार की दिशा पर बनी हुई है।   सेंसेक्स और निफ्टी में बढ़त   कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 800 अंक ऊपर गया, वहीं निफ्टी ने 24,200 का स्तर पार किया। बाजार में बैंकिंग, आईटी और कई बड़े सेक्टरों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।   इन कंपनियों के शेयर चर्चा में   आज कई बड़ी कंपनियां निवेशकों के रडार पर रहीं। ब्रोकरेज रिपोर्ट और कारोबारी अपडेट के कारण लार्सन एंड टुब्रो (L&T), टाटा कैपिटल और अन्य प्रमुख शेयरों में गतिविधियां देखने को मिलीं।   वैश्विक संकेतों का बाजार पर असर   निवेशकों की नजर अमेरिका के फेडरल रिजर्व के फैसले, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों की चाल पर बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले सत्रों में विदेशी निवेश, कंपनियों के नतीजे और आर्थिक संकेतक बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

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भारत-नेपाल व्यापार को मिली नई रफ्तार, रेलवे ने नेपाल के लिए पहली सीधी मालगाड़ी चलाई

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कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, अमेरिका से राहत भरी खबर के बाद Brent Crude करीब 5% हुआ सस्ता

नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक तेल बाजार में बुधवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। Brent Crude की कीमत करीब 5% तक लुढ़क गई, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। कीमतों में यह गिरावट अमेरिका से आए सकारात्मक आर्थिक संकेतों और पश्चिम एशिया में तनाव कुछ कम होने की उम्मीद के बाद देखने को मिली।    अमेरिकी संकेतों से बढ़ा निवेशकों का भरोसा   विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार, मांग और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े ताजा आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर आपूर्ति बाधित होने की आशंका कम होने से तेल की कीमतों पर दबाव बना।   भारत के लिए राहत की उम्मीद   भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें घटने से पेट्रोलियम कंपनियों की लागत कम हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है, तो महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है और ऊर्जा आयात बिल में कमी आने की संभावना है।    आगे बाजार की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर   विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका के आर्थिक आंकड़े, ओपेक+ की उत्पादन नीति और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगे। निवेशकों की नजर इन सभी घटनाक्रमों पर बनी हुई है।

abhishek singh जुलाई 29, 2026 0
Crude oil prices rise above $86 as US inventories fall and Iran-US tensions impact global markets

Crude Oil Price: 33 लाख बैरल स्टॉक घटते ही कच्चे तेल में उछाल, Brent $86 के पार; Iran-US तनाव पर नजर

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Indian stock market rallies as Sensex jumps 800 points and IT stocks lead early trading gains

Stock Market Opening: शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 800 अंक उछला; IT शेयरों में फिर आया जोश

A-1 Limited penny stock under ₹6 hits upper circuit after strong Q1 FY27 results
Penny Stock: ₹6 से कम का शेयर, लगातार दूसरे दिन अपर सर्किट; Q1 नतीजों के बाद दिखी तेजी

Penny Stock Under ₹6: शेयर बाजार में छोटे भाव वाले पेनी स्टॉक्स में अचानक तेजी अक्सर निवेशकों का ध्यान खींचती है। लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनी A-1 Limited का शेयर भी लगातार दूसरे कारोबारी दिन 5 फीसदी के अपर सर्किट में पहुंच गया। कंपनी ने हाल ही में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें राजस्व और मुनाफे में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। खुलते ही अपर सर्किट में पहुंचा शेयर बीएसई पर A-1 Limited का शेयर मंगलवार को ₹5.71 पर बंद हुआ था। बुधवार सुबह यह करीब 5 फीसदी की तेजी के साथ ₹5.99 पर खुला और जल्द ही 5 फीसदी के अपर सर्किट पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान शेयर कुछ समय के लिए ₹5.98 तक आया, लेकिन फिर ₹5.99 के स्तर पर लौट गया। कंपनी के शेयर में 5 फीसदी की सर्किट लिमिट लागू है। एक साल में बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा प्रदर्शन इस पेनी स्टॉक का पिछले एक साल का प्रदर्शन काफी अस्थिर रहा है। कंपनी के शेयर का 52-हफ्ते का उच्च स्तर ₹70.41 है, जो नवंबर 2025 में दर्ज हुआ था। वहीं 52-हफ्ते का निचला स्तर ₹5 रहा, जो 5 जुलाई 2026 को दर्ज किया गया। हालिया अवधि में भी शेयर ने काफी उतार-चढ़ाव दिखाया है: 1 सप्ताह: 10 फीसदी से ज्यादा तेजी 1 महीना: करीब 22 फीसदी गिरावट 3 महीने: करीब 52 फीसदी गिरावट 6 महीने: करीब 85 फीसदी गिरावट 1 साल: करीब 65 फीसदी नकारात्मक रिटर्न इससे साफ है कि हाल की तेजी के बावजूद शेयर का लंबी अवधि का प्रदर्शन बेहद अस्थिर रहा है। Q1FY27 में कंपनी का प्रदर्शन कैसा रहा? A-1 Limited ने 30 जून 2026 को समाप्त पहली तिमाही के नतीजे जारी किए। कंपनी के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में सालाना आधार पर 170.5 फीसदी की वृद्धि हुई और यह बढ़कर ₹175.01 करोड़ हो गया। कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा यानी PAT भी तेजी से बढ़ा। पिछले साल की समान तिमाही में ₹0.60 करोड़ के मुकाबले इस बार PAT 429.3 फीसदी बढ़कर ₹3.16 करोड़ पहुंच गया। कंपनी का PAT मार्जिन भी 0.92 फीसदी से बढ़कर 1.81 फीसदी हो गया। क्या सिर्फ अपर सर्किट देखकर खरीदना सही है? पेनी स्टॉक्स में तेज उछाल देखकर निवेशकों का आकर्षित होना स्वाभाविक है, लेकिन ऐसे शेयरों में जोखिम भी काफी ज्यादा हो सकता है। A-1 Limited के मामले में भी हालिया अपर सर्किट को कंपनी के तिमाही नतीजों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन पिछले एक साल में शेयर की भारी गिरावट और अस्थिरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। निवेशकों को केवल शेयर की कम कीमत या लगातार लग रहे अपर सर्किट के आधार पर फैसला लेने के बजाय कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार, कर्ज, नकदी प्रवाह, वैल्यूएशन और भविष्य की संभावनाओं का स्वतंत्र विश्लेषण करना चाहिए।  

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