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India-Nepal Trade Gets Rail Connectivity Boost

Indian Railway News: नेपाल के लिए पहली सीधी कंटेनर मालगाड़ी चली, भारत-नेपाल व्यापार को मिल सकता है बड़ा फायदा

surbhi जुलाई 29, 2026 0
Indian Railways launches first direct commercial container freight train from Kolkata Port to Nepal
India Nepal Direct Container Freight Train

Indian Railway News: भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। भारतीय रेलवे ने पहली बार नेपाल के लिए सीधी कमर्शियल कंटेनर मालगाड़ी चलाई है। इस मालगाड़ी ने कोलकाता पोर्ट से नेपाल के विराटनगर कस्टम्स यार्ड तक का सफर पूरा किया।

इस ऐतिहासिक मालगाड़ी में 40 टैंक वैगन में कैनोला तेल लदा था। अभी तक दोनों देशों के बीच बड़ी मात्रा में माल की आवाजाही सड़क मार्ग यानी ट्रकों के जरिए होती रही है। ऐसे में सीधी रेल सेवा शुरू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार को गति मिलने की उम्मीद है।

कोलकाता पोर्ट से विराटनगर तक पहुंचा माल

रेलवे की इस पहली सीधी कमर्शियल सेवा ने कोलकाता पोर्ट से नेपाल के विराटनगर कस्टम्स यार्ड तक माल पहुंचाया। रेल मंत्रालय के मुताबिक, नई व्यवस्था से माल की आवाजाही में लगने वाला समय, लॉजिस्टिक्स लागत और कार्गो हैंडलिंग का समय कम होने की उम्मीद है।

यह सुविधा जोगबनी-विराटनगर ब्रॉडगेज रेल लिंक पर आधारित है, जिसे जून 2023 में शुरू किया गया था। अब इस इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल सीधे कमर्शियल कंटेनर कार्गो के लिए भी किया जा रहा है।

भारत-नेपाल व्यापार को कैसे होगा फायदा?

सीधी मालगाड़ी सेवा दोनों देशों के व्यापार के लिए कई स्तरों पर फायदेमंद साबित हो सकती है।

पहला फायदा ट्रांजिट टाइम में कमी का है। सड़क मार्ग की तुलना में रेल के जरिए बड़ी मात्रा में माल को व्यवस्थित तरीके से भेजना आसान हो सकता है। इससे सप्लाई चेन अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।

दूसरा फायदा लॉजिस्टिक्स लागत में कमी का हो सकता है। माल को कई अलग-अलग परिवहन माध्यमों में ट्रांसफर करने की जरूरत कम होने से अतिरिक्त हैंडलिंग और परिवहन खर्च घट सकता है।

तीसरा फायदा कार्गो हैंडलिंग में कमी का है। कम हैंडलिंग पॉइंट होने से माल को बार-बार उतारने और चढ़ाने की जरूरत कम होगी, जिससे समय की बचत के साथ नुकसान का जोखिम भी घट सकता है।

आयात-निर्यात को मिल सकती है नई रफ्तार

रेल मंत्रालय के मुताबिक, इस सेवा से भारत और नेपाल के बीच आयात-निर्यात कार्गो की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। रेल परिवहन बड़े पैमाने पर माल ढुलाई के लिए अपेक्षाकृत तेज, लागत-कुशल और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प बन सकता है।

इससे खासतौर पर उन कारोबारियों को फायदा मिल सकता है जो नियमित रूप से बड़ी मात्रा में माल भारत से नेपाल या नेपाल से भारत भेजते हैं।

नवंबर 2025 के समझौते के बाद खुला रास्ता

सीधी कमर्शियल रेल सेवा शुरू होने की दिशा में नवंबर 2025 में संशोधित Letter of Exchange (LoE) पर हस्ताक्षर महत्वपूर्ण कदम रहा। इसके बाद विराटनगर के लिए सीधी वाणिज्यिक रेल सेवा शुरू करने का रास्ता साफ हुआ।

यह कदम केवल परिवहन व्यवस्था में बदलाव नहीं है, बल्कि भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

भारत-नेपाल कनेक्टिविटी में नया अध्याय

भारत और नेपाल के बीच पहले से ही मजबूत आर्थिक और कारोबारी संबंध हैं। ऐसे में सीधी मालगाड़ी सेवा दोनों देशों की सीमा-पार सप्लाई चेन को और मजबूत कर सकती है।

अगर यह मॉडल आगे सफल रहता है और ज्यादा तरह के माल को रेल नेटवर्क से जोड़ा जाता है, तो आने वाले समय में भारत-नेपाल व्यापार के लिए रेल परिवहन एक अहम विकल्प बन सकता है।

कुल मिलाकर, पहली सीधी कमर्शियल कंटेनर मालगाड़ी सिर्फ एक नई रेल सेवा की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह भारत और नेपाल के बीच व्यापार को अधिक तेज, व्यवस्थित और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Adani Ports
अडानी की नजर ब्रिटेन के 21 बंदरगाहों पर, Associated British Ports में हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी

लंदन, एजेंसियां। अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) ब्रिटेन की सबसे बड़ी पोर्ट ऑपरेटिंग कंपनी Associated British Ports (ABP) में नियंत्रक हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी कर रही है। यदि यह सौदा सफल होता है, तो अडानी समूह को एक साथ ब्रिटेन के 21 प्रमुख बंदरगाहों का संचालन संभालने का अवसर मिल सकता है।   ब्रिटेन के समुद्री कारोबार में होगी बड़ी एंट्री   Associated British Ports (ABP) ब्रिटेन की सबसे बड़ी पोर्ट ऑपरेटर कंपनी है, जो देश के समुद्री व्यापार का लगभग 25% संभालती है। कंपनी के पास 21 प्रमुख बंदरगाह हैं और यह लॉजिस्टिक्स, कार्गो हैंडलिंग तथा समुद्री परिवहन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अडानी पोर्ट्स इस अधिग्रहण के जरिए अपने वैश्विक नेटवर्क को और मजबूत करना चाहती है।   वैश्विक कारोबार बढ़ाने की रणनीति   रिपोर्ट के अनुसार, अडानी समूह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कारोबार का विस्तार कर रहा है। ब्रिटेन के बंदरगाहों में हिस्सेदारी मिलने से कंपनी को यूरोप में अपनी मौजूदगी मजबूत करने और वैश्विक समुद्री व्यापार में बड़ा स्थान हासिल करने में मदद मिलेगी।   सौदे पर अभी अंतिम फैसला बाकी   फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है और दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है। सौदा कई नियामकीय मंजूरियों और व्यावसायिक शर्तों पर निर्भर करेगा। यदि समझौता पूरा होता है, तो यह अडानी समूह के इतिहास के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहणों में से एक माना जाएगा।

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Crude Oil Prices

कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, अमेरिका से राहत भरी खबर के बाद Brent Crude करीब 5% हुआ सस्ता

Crude oil prices rise above $86 as US inventories fall and Iran-US tensions impact global markets
Crude Oil Price: 33 लाख बैरल स्टॉक घटते ही कच्चे तेल में उछाल, Brent $86 के पार; Iran-US तनाव पर नजर

Crude Oil Price: वैश्विक तेल बाजार में बुधवार को एक बार फिर तेज हलचल देखने को मिली। अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में बड़ी गिरावट और OPEC+ की उत्पादन नीति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी आई। Brent crude 3.2% चढ़कर $86.80 प्रति बैरल और WTI crude 3.4% बढ़कर $81.95 प्रति बैरल पहुंच गया। मंगलवार को करीब 5% की गिरावट के बाद तेल की कीमतों में यह वापसी बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को दर्शाती है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी Energy Information Administration यानी EIA के आधिकारिक इन्वेंट्री आंकड़ों पर है। अमेरिका में 33 लाख बैरल घटा कच्चे तेल का स्टॉक तेल की कीमतों में बुधवार की तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका में क्रूड इन्वेंट्री में गिरावट रही। American Petroleum Institute (API) के आंकड़ों के मुताबिक, 24 जुलाई को समाप्त सप्ताह में अमेरिकी कच्चे तेल का भंडार करीब 33 लाख बैरल घटा। हालांकि, पेट्रोलियम उत्पादों के स्टॉक में बढ़ोतरी देखने को मिली। इस दौरान: गैसोलीन स्टॉक करीब 9.18 लाख बैरल बढ़ा डिस्टिलेट स्टॉक करीब 3.55 लाख बैरल बढ़ा अब बाजार की नजर EIA के आधिकारिक आंकड़ों पर है। अगर सरकारी आंकड़े भी क्रूड स्टॉक में बड़ी गिरावट की पुष्टि करते हैं, तो तेल की कीमतों को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है। OPEC+ की उत्पादन नीति भी अहम कच्चे तेल की कीमतों के लिए OPEC+ की अगली रणनीति भी महत्वपूर्ण बन गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, संगठन अक्टूबर से लगातार तीन महीनों तक तेल उत्पादन बढ़ाने की अपनी योजना को रोकने पर विचार कर सकता है। अगर उत्पादन बढ़ाने की रफ्तार धीमी होती है, तो बाजार में अतिरिक्त सप्लाई का दबाव कम हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों को मजबूती मिल सकती है। फिलहाल OPEC+ उन देशों द्वारा पहले स्वेच्छा से घटाए गए उत्पादन को धीरे-धीरे बाजार में वापस ला रहा है। ऐसे में उत्पादन नीति में कोई भी बदलाव वैश्विक तेल कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है। Iran-US तनाव से फिर बढ़ी बाजार की चिंता तेल बाजार में भू-राजनीतिक तनाव भी बड़ा फैक्टर बना हुआ है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव ने खास तौर पर Strait of Hormuz को लेकर चिंता बढ़ाई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मंगलवार को संघर्ष में कुछ समय के लिए तनाव कम होने की उम्मीद से तेल की कीमतों में लगभग 5% की गिरावट आई थी। लेकिन अब फिर अनिश्चितता बढ़ने से कीमतों में तेजी लौट आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत दिए, लेकिन बातचीत विफल होने की स्थिति में आगे कार्रवाई की चेतावनी भी दी। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत शुरू होने से इनकार किया है। Strait of Hormuz पर ओमान का प्रस्ताव इस बीच Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही को लेकर एक नई पहल सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, ओमान ने ईरान के सामने इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए स्वैच्छिक शुल्क व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का उद्देश्य Hormuz के रास्ते होने वाले व्यापार में रुकावट को कम करना और जहाजों की आवाजाही को सुचारु बनाना है। खाड़ी देशों के समर्थन वाला यह प्रस्ताव अगर आगे बढ़ता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंता कुछ कम हो सकती है। आगे क्या होगा? फिलहाल कच्चे तेल की दिशा तीन प्रमुख संकेतकों पर निर्भर करेगी—अमेरिकी इन्वेंट्री डेटा, OPEC+ की उत्पादन नीति और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव। अगर अमेरिकी क्रूड स्टॉक में गिरावट जारी रहती है और OPEC+ उत्पादन बढ़ाने की गति सीमित करता है, तो तेल की कीमतों को और मजबूती मिल सकती है। वहीं Iran-US तनाव में कमी और Hormuz में सामान्य स्थिति बनने से कीमतों पर दबाव आ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आयात बिल, रुपये की स्थिति और महंगाई पर असर पड़ सकता है।  

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Stock Market
Stock Market: शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 800 अंक से अधिक उछला; IT शेयरों की खरीदारी से निफ्टी 24,200 के करीब

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को शानदार तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 800 अंक से अधिक उछल गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,200 के करीब पहुंच गया। आईटी कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने बाजार को मजबूती दी। निवेशकों की खरीदारी से बाजार का माहौल पूरे दिन सकारात्मक बना रहा।   आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी   बाजार की तेजी में आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनियों का सबसे अहम योगदान रहा। टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा बैंकिंग, ऑटो और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों ने भी बाजार को सहारा दिया।    वैश्विक संकेतों से मिला समर्थन   विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसके चलते बाजार में व्यापक स्तर पर खरीदारी देखने को मिली।    निवेशकों की नजर तिमाही नतीजों पर   अब बाजार की नजर प्रमुख कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक संकेत सकारात्मक रहे तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार में मजबूती का रुख जारी रह सकता है।

anjali kumari जुलाई 29, 2026 0
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