रक्षाबंधन

28 अगस्त 2026 रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण का धार्मिक संयोग
Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का संयोग, भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण

रांची। इस साल रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इसी दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगेगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा और राखी बांधने में ग्रहण की बाधा नहीं रहेगी।   28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन     पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे होगी और इसका समापन 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा।     रक्षाबंधन के दिन लगेगा चंद्र ग्रहण     28 अगस्त को चंद्र ग्रहण की शुरुआत सुबह 6:53 बजे और समापन दोपहर 12:31 बजे बताया गया है। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। यह अफ्रीका, यूरोप, उत्तर और दक्षिण अमेरिका तथा पश्चिमी एशिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा, लेकिन भारत में इसकी दृश्यता नहीं होगी।   भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसलिए बहनें सामान्य रूप से भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।   राखी बांधने का शुभ समय     रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है।   लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 7:33 बजे से 9:10 बजे तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 9:10 बजे से 10:46 बजे तक हालांकि, दिए गए मुहूर्त स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार अलग हो सकते हैं।   27 अगस्त को भद्रा का प्रभाव     रक्षाबंधन से एक दिन पहले 27 अगस्त को भद्रा का प्रभाव बताया गया है। पंचांग के अनुसार यह सुबह 9:08 बजे से रात 9:32 बजे तक रहेगा। इसके बाद 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।   नोट: ग्रहण, सूतक और शुभ मुहूर्त से जुड़ी जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। स्थानीय परंपरा के अनुसार समय में अंतर संभव है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
सावन में फ्लोरल, अरेबिक और बेल मेहंदी डिजाइन
Sawan Mehndi: सावन में छाएगी बेल मेहंदी, फ्लोरल से अरेबिक तक ये डिजाइन हैं ट्रेंडिंग

सावन का महीना आते ही हरियाली, त्योहारों और पारंपरिक सजने-संवरने की रौनक बढ़ जाती है। हरियाली तीज, नाग पंचमी, रक्षाबंधन और सावन के सोमवार जैसे मौकों पर महिलाएं और युवतियां मेहंदी लगाना पसंद करती हैं। अगर आप भी इस सावन हाथों पर खूबसूरत लेकिन ज्यादा भारी मेहंदी नहीं लगाना चाहती हैं, तो बेल मेहंदी डिजाइन आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है। बेल डिजाइन की खासियत यह है कि यह कम समय में तैयार हो जाती है और हाथों को आकर्षक व एलिगेंट लुक देती है। इसे पारंपरिक के साथ-साथ मॉडर्न अंदाज में भी बनाया जा सकता है। फ्लोरल बेल, अरेबिक बेल, फिंगर बेल और मंडला-बेल कॉम्बिनेशन इस समय पसंद किए जा रहे हैं।   फ्लोरल बेल डिजाइन है आसान और स्टाइलिश     फ्लोरल बेल डिजाइन में छोटे-छोटे फूल, पत्तियां और बेल की आकृतियां कलाई से उंगलियों तक बनाई जाती हैं। यह डिजाइन सिंपल होने के साथ काफी खूबसूरत दिखाई देती है। सूट, साड़ी और इंडो-वेस्टर्न आउटफिट के साथ यह डिजाइन खास तौर पर अच्छी लगती है।   यह डिजाइन कॉलेज जाने वाली युवतियों, ऑफिस वर्कर्स और सावन या तीज की पूजा के लिए मेहंदी लगाने वाली महिलाओं के लिए अच्छा विकल्प है।   मंडला और बेल का कॉम्बिनेशन देगा ट्रेडिशनल लुक     अगर आप पारंपरिक और मॉडर्न डिजाइन का कॉम्बिनेशन चाहती हैं, तो मंडला-बेल डिजाइन चुन सकती हैं। इसमें हथेली के बीच में गोल मंडला बनाया जाता है और उसके आसपास या उससे निकलती हुई बेल की डिजाइन तैयार की जाती है।   यह डिजाइन फोटो में काफी आकर्षक नजर आती है और ट्रेडिशनल कपड़ों के साथ खूबसूरत लुक देती है। इसे अलग-अलग उम्र की महिलाएं अपनी पसंद के अनुसार कस्टमाइज करा सकती हैं।   अरेबिक बेल डिजाइन भी है काफी पसंद     अरेबिक बेल मेहंदी उन लोगों के लिए अच्छी है, जो कम समय में स्टाइलिश डिजाइन चाहती हैं। इसमें मोटी आउटलाइन, बड़े फूल और पत्तियों के साथ खाली जगह का खूबसूरत इस्तेमाल किया जाता है।   इस डिजाइन की सबसे बड़ी खासियत है कि यह जल्दी तैयार हो जाती है और हाथों को ज्यादा भरा हुआ दिखाए बिना आकर्षक बनाती है। शुरुआती लोगों के लिए भी यह अपेक्षाकृत आसान डिजाइन मानी जाती है।   कम मेहंदी पसंद है तो चुनें फिंगर बेल डिजाइन     अगर आपको हथेली पर ज्यादा भरी हुई मेहंदी पसंद नहीं है, तो फिंगर बेल डिजाइन ट्राई कर सकती हैं। इसमें उंगलियों और हथेली के छोटे हिस्से पर बेल, फूल और पत्तियों की आकृतियां बनाई जाती हैं।   यह डिजाइन मॉडर्न और एलिगेंट लुक देती है और कॉलेज, ऑफिस या छोटे पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए भी अच्छी रहती है।   मेहंदी का रंग गहरा करने के लिए रखें इन बातों का ध्यान     मेहंदी की खूबसूरती सिर्फ डिजाइन से नहीं, बल्कि उसके रंग से भी बढ़ती है। गहरा रंग पाने के लिए मेहंदी को पूरी तरह सूखने तक पानी से बचाएं। सूखने के बाद नींबू-चीनी का मिश्रण हल्के हाथ से लगाया जा सकता है। मेहंदी को करीब 6 से 8 घंटे या रातभर लगा रहने देना भी मददगार हो सकता है।   मेहंदी हटाने के तुरंत बाद हाथों पर साबुन का इस्तेमाल करने से बचें। हालांकि, मेहंदी का रंग त्वचा, मेहंदी की गुणवत्ता और देखभाल के तरीके के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इस सावन अगर आप सिंपल, खूबसूरत और ट्रेंडी मेहंदी डिजाइन चाहती हैं, तो बेल डिजाइन आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
रक्षाबंधन पर राखी भेजने के लिए डाक विभाग की स्पीड पोस्ट सुविधा
रक्षाबंधन पर डाक विभाग की खास सौगात, स्पीड पोस्ट से राखी भेजने पर मिलेगी 10% छूट

नई दिल्ली, एजेंसियां। रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए डाक विभाग ने राखी भेजने वाले ग्राहकों के लिए विशेष सुविधा शुरू की है। विभाग की ओर से स्पीड पोस्ट के जरिए राखी भेजने पर 10 फीसदी की छूट दी जाएगी। यह विशेष ऑफर रिटेल ग्राहकों के लिए होगा और स्पीड पोस्ट के डाक शुल्क पर लागू किया जाएगा। डाक विभाग के मुताबिक, रक्षाबंधन के दौरान देशभर में बड़ी संख्या में लोग डाक सेवा के जरिए अपने भाई-बहनों को राखियां भेजते हैं। ऐसे में ग्राहकों को राहत देने और निजी कूरियर कंपनियों से प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यह पहल की गई है।   रक्षाबंधन से 15 दिन पहले लागू होगी योजना     डाक विभाग की यह विशेष ‘राखी मेल’ योजना रक्षाबंधन से 15 दिन पहले लागू की जाएगी। इसके तहत राखी भेजने वाले ग्राहकों को लिफाफे के सामने स्पष्ट रूप से ‘राखी मेल’ लिखना होगा।   इसके बाद राखी को नजदीकी डाकघर के काउंटर पर जाकर स्पीड पोस्ट के माध्यम से बुक कराना होगा।   एक बार में पांच राखी भेजने की सुविधा     इस योजना के तहत एक ग्राहक एक बार में अधिकतम पांच राखी वाले स्पीड पोस्ट बुक करा सकेगा। 10 फीसदी की छूट केवल स्पीड पोस्ट के डाक शुल्क पर मिलेगी।   डाक विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा डाकघर के काउंटर पर की जाने वाली रिटेल बुकिंग के लिए उपलब्ध होगी। यानी ग्राहकों को इस छूट का लाभ लेने के लिए राखी की बुकिंग डाकघर के काउंटर से करानी होगी।   निजी कूरियर कंपनियों को मिलेगी चुनौती     रक्षाबंधन के दौरान राखी भेजने के लिए बड़ी संख्या में लोग निजी कूरियर सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में डाक विभाग की यह पहल ग्राहकों को कम कीमत पर भरोसेमंद स्पीड पोस्ट सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
अगस्त 2026 स्कूल छुट्टियां
School Holiday August 2026: अगस्त में कब-कब बंद रहेंगे स्कूल? स्वतंत्रता दिवस, मिलाद-उन-नबी और रक्षाबंधन समेत देखें छुट्टियों की पूरी सूची

नई दिल्ली, एजेंसियां। अगस्त 2026 की शुरुआत के साथ ही छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए छुट्टियों की सूची भी सामने आ गई है। इस महीने स्वतंत्रता दिवस, मिलाद-उन-नबी और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख राष्ट्रीय और धार्मिक पर्वों के अवसर पर देश के कई राज्यों में स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान बंद रह सकते हैं। हालांकि, छुट्टियों की अंतिम सूची संबंधित राज्य सरकारों और स्कूल प्रशासन की अधिसूचना के अनुसार तय होगी।   15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी   अगस्त की पहली बड़ी छुट्टी 15 अगस्त (शनिवार) को होगी। इस दिन देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। स्कूलों में ध्वजारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं, जबकि अधिकांश सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में अवकाश रहेगा।   26 अगस्त को मिलाद-उन-नबी   26 अगस्त (बुधवार) को मिलाद-उन-नबी का पर्व मनाया जाएगा। पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के रूप में मनाए जाने वाले इस अवसर पर कई राज्यों में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जा सकता है। School, कॉलेज और सरकारी कार्यालय स्थानीय आदेशों के अनुसार बंद रह सकते हैं।   28 अगस्त को रक्षाबंधन का अवकाश   28 अगस्त (शुक्रवार) को भाई-बहन के पवित्र पर्व रक्षाबंधन के अवसर पर कई राज्यों में स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी रहने की संभावना है। कई जगह सरकारी कार्यालयों और अन्य संस्थानों में भी अवकाश घोषित किया जा सकता है।   राज्यों के अनुसार अलग हो सकती है छुट्टियों की सूची   अगस्त महीने में घोषित होने वाली छुट्टियां सभी राज्यों में समान नहीं होंगी। कई राज्यों में स्थानीय त्योहारों और क्षेत्रीय आयोजनों के कारण अतिरिक्त अवकाश भी मिल सकता है। इसलिए छात्रों और अभिभावकों को अपने स्कूल या संबंधित शिक्षा विभाग की आधिकारिक सूचना जरूर देखनी चाहिए।   अगस्त 2026 की प्रमुख छुट्टियां   15 अगस्त 2026 - शनिवार - स्वतंत्रता दिवस 26 अगस्त 2026 - बुधवार - मिलाद-उन-नबी 28 अगस्त 2026 - शुक्रवार - रक्षाबंधन   अगस्त में लगातार आने वाले प्रमुख त्योहारों के कारण कई परिवार पहले से यात्रा और अन्य कार्यक्रमों की योजना बना रहे हैं। ऐसे में छुट्टियों की आधिकारिक जानकारी पहले से जांच लेना बेहतर रहेगा।

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
Sugar Stock
चीनी की जमाखोरी पर सरकार का बड़ा एक्शन, स्टॉक रखने की सीमा तय; 1 अगस्त से लागू होंगे नए नियम

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों और संभावित जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने देशभर के चीनी कारोबारियों और डीलरों के लिए स्टॉक रखने की अधिकतम सीमा 4,000 क्विंटल (400 टन) तय कर दी है। यह व्यवस्था 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। सरकार का उद्देश्य त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रित करना है।   30 दिन से ज्यादा नहीं रख सकेंगे स्टॉक   नए आदेश के अनुसार, कोई भी डीलर चीनी का स्टॉक 30 दिनों से अधिक अपने पास नहीं रख सकेगा। जिन कारोबारियों के पास तय सीमा से अधिक चीनी का भंडार है, उन्हें 1 अगस्त तक अतिरिक्त स्टॉक बाजार में उतारना होगा, ताकि नए नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।   जमाखोरी और सट्टेबाजी पर लगेगी रोक   सरकार का मानना है कि हाल के दिनों में चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे जमाखोरी और सट्टेबाजी भी एक बड़ा कारण रही है। नए नियमों से कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों पर रोक लगेगी और उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।   त्योहारी सीजन में कीमतें स्थिर रखने की कोशिश   रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव और अन्य त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए सरकार ने समय रहते यह फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि बाजार की लगातार निगरानी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

abhishek singh जुलाई 29, 2026 0
Amarnath Yatra
'बम-बम भोले' के जयघोष के साथ शुरू हुआ अमरनाथ यात्रा

श्रीनगर, एजेंसियां। आस्था, श्रद्धा और उत्साह के माहौल में गुरुवार को वार्षिक अमरनाथ यात्रा 2026 की शुरुआत हो गई। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू से श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को विधिवत पूजा-अर्चना के बाद हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान पूरे परिसर में 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोष गूंजते रहे। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हजारों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना हुए।   यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक इंतजाम किए हैं। यात्रा शुरू होने से पहले सीआरपीएफ की 137वीं बटालियन और के-9 डॉग स्क्वॉड ने उधमपुर में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सघन तलाशी अभियान चलाया। इसके अलावा यात्रा मार्ग और बेस कैंपों पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। श्रीनगर के पठान चौक स्थित यात्री निवास में पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने आतंकवाद-रोधी मॉक ड्रिल भी आयोजित की।   रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद भारतीय जनता पार्टी के सांसद जुगल किशोर शर्मा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने यात्रा के सफल आयोजन की कामना की। उन्होंने कहा कि श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेहतर इंतजाम किए गए हैं। उनका मानना है कि इस वर्ष यात्रा में पिछले वर्षों की तुलना में अधिक श्रद्धालु शामिल हो सकते हैं और नए रिकॉर्ड बन सकते हैं।   57 दिनों तक चलेगी पवित्र यात्रा समुद्र तल से करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार यात्रा पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग और 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से एक साथ संचालित की जा रही है। 57 दिनों तक चलने वाली यह पवित्र यात्रा 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर संपन्न होगी।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 12, 2026 0