चीन

Chinese scientists face scrutiny after alleged research paper irregularities uncovered by a science blogger
ब्लॉगर ने खोली चीन के टॉप वैज्ञानिकों की पोल, रिसर्च पेपर्स में की थी गड़बड़ी; पद से हटाए गए

चीन में वैज्ञानिक शोध की विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच तीन और वरिष्ठ वैज्ञानिकों को उनके महत्वपूर्ण अकादमिक पदों से हटा दिया गया है। विश्वविद्यालयों ने यह कार्रवाई शोध पत्रों में कथित डेटा और तस्वीरों की गड़बड़ियों के आरोपों के बाद की है। इन मामलों ने तब जोर पकड़ा, जब एक विज्ञान ब्लॉगर ने कई चर्चित रिसर्च पेपर्स में अनियमितताओं का दावा किया। कैंसर शोधकर्ता पर कार्रवाई के बाद बढ़ी जांच मामले की शुरुआत पिछले महीने हुई थी, जब शंघाई स्थित तोंगजी विश्वविद्यालय के कैंसर शोधकर्ता वांग पिंग को शोध संबंधी विवादों के बाद उनके पद से हटा दिया गया। इसके बाद अन्य वैज्ञानिकों के शोध कार्य भी जांच के दायरे में आ गए। तीन वरिष्ठ वैज्ञानिकों पर गिरी गाज तियानजिन की नानकाई यूनिवर्सिटी ने अपने कॉलेज ऑफ लाइफ साइंसेज के डीन चेन क्वान को पद से हटा दिया है। विश्वविद्यालय का आरोप है कि वर्ष 2024 में नेचर कैंसर पत्रिका में प्रकाशित एक शोध पत्र के पत्राचार लेखक के रूप में वह डेटा की गुणवत्ता और प्रामाणिकता की निगरानी करने में विफल रहे। वहीं, ग्वांगझोउ स्थित सन यात-सेन यूनिवर्सिटी ने भी दो वरिष्ठ वैज्ञानिकों के खिलाफ कार्रवाई की है। कांग तिएबांग को स्टेट की लेबोरेटरी ऑफ ऑन्कोलॉजी के उपनिदेशक पद से हटाया गया। कुआंग डोंगमिंग को स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के एसोसिएट डीन पद से हटाया गया। विश्वविद्यालय के अनुसार, दोनों वैज्ञानिकों से जुड़े कुछ शोध पत्रों में डेटा और तस्वीरों से संबंधित गंभीर त्रुटियां पाई गईं। प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त कर चुके थे वैज्ञानिक कार्रवाई का सामना कर रहे सभी वैज्ञानिक चीन के प्रतिष्ठित ‘आउटस्टैंडिंग यूथ’ सम्मान से सम्मानित रह चुके हैं। यह सम्मान देश के वैज्ञानिक समुदाय में बड़ी उपलब्धि माना जाता है। ब्लॉगर के खुलासों से मचा हड़कंप इन मामलों को तब व्यापक चर्चा मिली, जब ‘स्टूडेंट गेंग’ नाम से चर्चित एक विज्ञान ब्लॉगर ने कई शोध पत्रों की जांच कर कथित अनियमितताओं को उजागर किया। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि रखने वाले इस ब्लॉगर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सांख्यिकीय विश्लेषण की मदद से शोध पत्रों में संदिग्ध पैटर्न पहचानने का दावा किया। उनके वीडियो चीनी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद वैज्ञानिक शोध की पारदर्शिता और जवाबदेही पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू हो गई। सरकारी मीडिया ने भी उठाए सवाल चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने ब्लॉगर के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने वैज्ञानिक जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा शुरू की है। हालांकि एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि अकादमिक कदाचार की जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों की ही है। निगरानी व्यवस्था होगी और सख्त विवाद के बाद नानकाई यूनिवर्सिटी और सन यात-सेन यूनिवर्सिटी ने शोध कार्यों की निगरानी प्रणाली को और मजबूत बनाने का ऐलान किया है। दोनों संस्थानों ने कहा है कि वैज्ञानिक ईमानदारी और रिसर्च इंटीग्रिटी के मानकों को सख्ती से लागू किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।  

surbhi जून 1, 2026 0
Rescue teams inspect damaged buildings after deadly earthquake struck Guangxi region in southern China.
चीन में भूकंप से तबाही: 2 लोगों की मौत, कई घायल, 13 इमारतें क्षतिग्रस्त

China के दक्षिणी क्षेत्र ग्वांग्शी में सोमवार तड़के आए तेज भूकंप ने भारी तबाही मचाई। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.2 मापी गई। भूकंप के कारण कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है, जबकि अब तक 2 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, भूकंप के झटकों के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और हजारों लोग घरों से बाहर निकल आए। 13 इमारतें तबाह, कई लोग घायल चीनी सरकारी मीडिया China Central Television की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप से कम से कम 13 इमारतें क्षतिग्रस्त या तबाह हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि कई लोग घायल हुए हैं, हालांकि अधिकांश घायलों की स्थिति गंभीर नहीं है। घायलों में से चार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राहत एजेंसियों को आशंका है कि कुछ लोग अभी भी क्षतिग्रस्त इमारतों के भीतर फंसे हो सकते हैं। 7 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया भूकंप के बाद प्रशासन ने तेजी से राहत और बचाव अभियान शुरू किया। अब तक 7 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रही हैं। प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने की अपील की है। रेल यातायात प्रभावित भूकंप के बाद इलाके में रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा है। चीनी रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पटरियों और पुलों की सुरक्षा जांच की जा रही है, जिसके चलते कुछ ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि बिजली, पानी, गैस सप्लाई और सड़क यातायात फिलहाल सामान्य रूप से चल रहे हैं। आफ्टरशॉक को लेकर अलर्ट स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और संभावित आफ्टरशॉक को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है।  

surbhi मई 18, 2026 0
US trade representative discusses China, Iran and Strait of Hormuz amid rising global tensions.
US का दावा: ‘ईरान को मदद नहीं देगा चीन’, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने किया बड़ा खुलासा

United States के व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer ने दावा किया है कि China ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वह Iran की मदद नहीं करेगा। एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में ग्रीर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का मुख्य फोकस इस बात पर था कि चीन, ईरान के समर्थन में कोई कदम न उठाए। ग्रीर ने कहा, “हमें चीन की ओर से इसकी प्रतिबद्धता मिली है और उन्होंने इसकी पुष्टि भी की है।” होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बयान ग्रीर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने चीन से Strait of Hormuz को दोबारा खोलने के लिए किसी सैन्य हस्तक्षेप की मांग नहीं की थी। उन्होंने कहा कि चीन खुद भी इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को खुला रखना चाहता है, क्योंकि इसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ता है। ग्रीर के मुताबिक, “राष्ट्रपति ट्रंप चीन की सैन्य मदद नहीं चाहते। अमेरिका सिर्फ यह सुनिश्चित करना चाहता है कि चीन, अमेरिका द्वारा उठाए जा रहे कदमों में बाधा न बने।” ट्रंप-शी जिनपिंग बातचीत में टैरिफ मुद्दा नहीं उठा हाल के महीनों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव और टैरिफ विवाद चर्चा में रहे हैं। हालांकि ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उनकी और Xi Jinping के बीच हुई बातचीत में टैरिफ का मुद्दा नहीं उठा। ग्रीर ने इस पर कहा कि व्यापार वार्ता जरूर हुई थी, लेकिन वह शीर्ष नेताओं के स्तर पर नहीं थी। उन्होंने बताया कि अमेरिका की ओर से उन्होंने, वित्त मंत्री Scott Bessent और उनकी टीम ने चीनी अधिकारियों के साथ टैरिफ समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। ‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’ बनाने पर विचार ग्रीर ने यह भी बताया कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक नियमों और विवादों को व्यवस्थित करने के लिए ‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’ बनाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि चीन ने कई अमेरिकी मीट निर्यात इकाइयों से आयात फिर शुरू करने, कुछ बायोटेक मामलों की समीक्षा करने और 200 Boeing विमानों की खरीद पर सहमति जताई है। हालांकि चीन की ओर से अब तक इन समझौतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने पर जोर ग्रीर ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच कई “ठोस कदम” पहले ही शुरू हो चुके हैं और सबसे अहम बात यह है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक स्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका-चीन संबंध आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकते हैं।  

surbhi मई 18, 2026 0
Donald Trump faces Iran tensions ahead of a crucial diplomatic visit to China
चीन दौरे से पहले मुश्किल में ट्रंप: ईरान से टकराव या कूटनीतिक समझौता? क्या है पूरा प्लान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक जटिल वैश्विक समीकरण के बीच फंसे नजर आ रहे हैं। एक ओर ईरान के साथ बढ़ता सैन्य और आर्थिक तनाव है, तो दूसरी ओर 14-15 मई को प्रस्तावित चीन का बेहद अहम दौरा। यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक संतुलन से जुड़ा हुआ है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है–क्या पहले ईरान के साथ टकराव सुलझाया जाए या चीन के साथ रिश्तों को प्राथमिकता दी जाए? क्यों इतना अहम है चीन दौरा? व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा कई वजहों से बेहद महत्वपूर्ण है: अमेरिका-चीन के बीच व्यापार और प्रतिबंधों को लेकर तनाव वैश्विक सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें ऊर्जा संकट और तेल आपूर्ति का मुद्दा दरअसल, अमेरिका यह समझता है कि चीन के साथ सीधी बातचीत के बिना मौजूदा संकटों का समाधान मुश्किल होगा। यही वजह है कि पहले टाले जा चुके इस दौरे को अब हर हाल में पूरा करने की कोशिश की जा रही है। ईरान संकट ने बढ़ाई कूटनीतिक चुनौती ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती ईरान से जुड़ी स्थिति है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, वहां बढ़ते तनाव ने हालात को और गंभीर बना दिया है। इस मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल सप्लाई होता है मार्च की शुरुआत से ही यहां व्यवधान की स्थिति बनी हुई है कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है इसका सीधा असर वैश्विक बाजार, खासकर तेल कीमतों और व्यापार पर पड़ा है। ऊर्जा संकट और वैश्विक असर चीन समेत एशिया के कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं। रास्ता बाधित होने के कारण: तेल की सप्लाई कम हुई कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ी यही वजह है कि अब यह मुद्दा अमेरिका-चीन वार्ता का केंद्र बन चुका है। चीन की भूमिका–मध्यस्थ या रणनीतिक खिलाड़ी? चीन इस पूरे विवाद में खुद को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। लेकिन स्थिति इतनी सरल नहीं है: अमेरिका ने चीन की कई शिपिंग कंपनियों और तेल रिफाइनरियों पर प्रतिबंध लगाए हैं आरोप है कि ये कंपनियां ईरान से तेल खरीदकर अमेरिकी नियमों का उल्लंघन कर रही हैं ऐसे में चीन एक तरफ समाधान चाहता है, तो दूसरी तरफ अपने आर्थिक हितों की भी रक्षा कर रहा है। ट्रंप के सामने दो रास्ते इस पूरे घटनाक्रम में ट्रंप प्रशासन के सामने दो बड़े विकल्प हैं: 1. सैन्य दबाव बढ़ाना ईरान पर और कड़े प्रतिबंध सैन्य कार्रवाई की संभावना क्षेत्र में अमेरिका की मौजूदगी बढ़ाना 2. कूटनीतिक समाधान चीन की मध्यस्थता का इस्तेमाल ईरान के साथ बातचीत ऊर्जा और व्यापार को स्थिर करने की कोशिश विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप फिलहाल दोनों रणनीतियों को साथ लेकर चल रहे हैं–एक तरफ दबाव, दूसरी तरफ बातचीत। दौरे पर पड़ सकता है असर? अगर ईरान के साथ तनाव और बढ़ता है, तो: ट्रंप का चीन दौरा फिर टल सकता है या फिर दौरे का एजेंडा पूरी तरह ईरान संकट पर केंद्रित हो सकता है लेकिन अगर कोई आंशिक समाधान निकलता है, तो यह दौरा वैश्विक राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।  

surbhi मई 1, 2026 0
Mystery deepens as scientists in the US and China die or disappear under suspicious circumstances
अमेरिका-चीन में सनसनी: 20 वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौत और लापता होने की घटनाएं, खुफिया एजेंसियों में हलचल

हाई-टेक वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौतों से बढ़ी चिंता दुनिया की दो महाशक्तियों–अमेरिका और चीन–में रक्षा और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े शीर्ष वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौतों और लापता होने की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। ये वैज्ञानिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइपरसोनिक हथियार, न्यूक्लियर रिसर्च और स्पेस डिफेंस जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन घटनाओं ने अब राजनीतिक हलकों में भी बहस को जन्म दे दिया है। अमेरिका में 11 संदिग्ध घटनाओं की जांच वॉशिंगटन में कम से कम 11 मामलों की जांच चल रही है, जिनमें वैज्ञानिक या तो लापता हुए हैं या संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए हैं। ये सभी मामले न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, स्पेस रिसर्च और एडवांस्ड हथियारों से जुड़े हैं। अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। कुछ नेताओं ने इसे संभावित “विदेशी ऑपरेशन” तक बताया है, हालांकि अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एफबीआई (FBI) ने इन सभी मामलों की जांच शुरू कर दी है। चीन में भी लगातार हो रही वैज्ञानिकों की मौतें दूसरी ओर, चीन और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में कम से कम 9 वैज्ञानिकों की मौतें संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हैं। इनमें से कई मामले सड़क दुर्घटना, अचानक बीमारी या अस्पष्ट कारणों से जुड़े बताए गए हैं। इन वैज्ञानिकों की उम्र 26 से 68 वर्ष के बीच बताई गई है और वे सभी अत्याधुनिक सैन्य तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे थे। “टॉप साइंटिस्ट गायब हो रहे हैं” – राजनीतिक बयानबाजी तेज अमेरिका में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयान भी सामने आए हैं। रिपब्लिकन सांसद एरिक बर्लिसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका, चीन, रूस और ईरान जैसे देशों के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच यह घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले को “गंभीर” बताया है, हालांकि उन्होंने यह संभावना भी जताई कि यह महज संयोग हो सकता है। चीन के वैज्ञानिक की मौत पर उठे सवाल सबसे चर्चित मामलों में एक नाम फेंग यांगहे का है, जो चीन की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी में प्रोफेसर थे। उनकी मौत 2023 में बीजिंग में एक कार दुर्घटना में हुई बताई गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह ताइवान से जुड़े सैन्य परिदृश्यों की AI सिमुलेशन पर काम कर रहे थे और देर रात एक बैठक से लौटते समय उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। संवेदनशील तकनीकी क्षेत्रों में काम करने वाले वैज्ञानिक अधिक प्रभावित विशेषज्ञों के अनुसार, जिन वैज्ञानिकों की मौत या लापता होने की घटनाएं सामने आई हैं, वे मुख्य रूप से इन क्षेत्रों से जुड़े थे: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैन्य सिमुलेशन हाइपरसोनिक हथियार तकनीक ड्रोन और स्वॉर्म टेक्नोलॉजी न्यूक्लियर और स्पेस डिफेंस रिसर्च हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कुछ मामले दुर्घटनाओं या प्राकृतिक कारणों से जुड़े हो सकते हैं। क्या यह सिर्फ संयोग या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा? इन घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया और विश्लेषकों के बीच कई तरह की अटकलें चल रही हैं। कुछ लोग इसे महज संयोग बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा से जुड़ा गंभीर मुद्दा मान रहे हैं। फिलहाल किसी भी देश द्वारा किसी संगठित साजिश की पुष्टि नहीं हुई है। रहस्य गहराता जा रहा है, जांच जारी अमेरिका और चीन दोनों ही इस मामले की जांच में जुटे हैं। जैसे-जैसे नई घटनाएं सामने आ रही हैं, सुरक्षा एजेंसियों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। यह मामला अभी पूरी तरह रहस्य बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी में है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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