रांची। झारखंड के रांची जिले के तमाड़ क्षेत्र में हुए सनसनीखेज हत्याकांड का पुलिस ने 17 दिनों बाद खुलासा करने का दावा किया है। 19 जून को बुंडू थाना क्षेत्र के तेतरटांड़ जंगल से मिली सिरकटी और आंशिक रूप से जली लाश की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि प्रेमी से शादी करने की चाह में पत्नी ने अपने पति की हत्या की साजिश रची थी। पहचान मिटाने के लिए सिर काटकर जलाया शव पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान तमाड़ थाना क्षेत्र के मांझीडीह निवासी संजय लोहरा के रूप में हुई। हत्या के बाद आरोपियों ने शव की पहचान छिपाने के लिए पहले सिर धड़ से अलग किया, फिर धड़ को जलाकर जंगल में फेंक दिया। सिर को अलग स्थान पर जमीन में दफना दिया गया, जिससे पुलिस को कोई सुराग न मिल सके। बिना सिर के शव मिलने के कारण यह मामला पुलिस के लिए ब्लाइंड मर्डर बन गया था। आरोपियों की निशानदेही पर मिला कटा हुआ सिर गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया। उनकी निशानदेही पर तमाड़ थाना क्षेत्र के सुंदरडीह स्थित रानी वन में जमीन के भीतर दबाकर रखा गया मृतक का सिर बरामद किया गया। बरामदगी के दौरान एफएसएल टीम ने मौके से वैज्ञानिक साक्ष्य भी जुटाए। चार आरोपी शामिल, दो अब भी फरार डीएसपी ओमप्रकाश ने बताया कि तकनीकी विश्लेषण, फॉरेंसिक जांच और लगातार छानबीन के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। जांच में चार लोगों की संलिप्तता सामने आई है। पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल कार भी जब्त कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि सभी साक्ष्य जुटाने के बाद न्यायालय में मजबूत आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। इस ब्लाइंड मर्डर केस के खुलासे में अनुसंधान टीम, तकनीकी सेल और एफएसएल की संयुक्त भूमिका रही।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम विकसित किया है, जो बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान करने के साथ-साथ 30 मीटर रिजॉल्यूशन पर बाढ़ के पानी की गहराई का भी अनुमान लगा सकता है। यह तकनीक दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट क्षेत्र में विकसित की गई है और भविष्य में देश के अन्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। 93% से ज्यादा सटीकता के साथ करता है बाढ़ का अनुमान शोधकर्ताओं के अनुसार, यह AI सिस्टम 93 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान करने में सक्षम है। यह मॉडल लगभग 55,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है, जो कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के तदरी से लेकर तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इस तकनीक का उद्देश्य भारी बारिश के कारण आने वाली अचानक बाढ़ (Flash Flood) से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करना और समय रहते प्रशासन को सतर्क करना है। सिर्फ बारिश नहीं, कई कारकों का करता है विश्लेषण IIT बॉम्बे की रिसर्च टीम ने इस मॉडल में केवल वर्षा के आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय कई अन्य कारकों को भी शामिल किया है। इनमें शामिल हैं: सतही जल प्रवाह (Surface Runoff) मिट्टी की नमी भूमि उपयोग (Land Use) जल अवशोषण क्षमता ड्रेनेज सिस्टम शोधकर्ताओं का कहना है कि सतही जल प्रवाह, केवल बारिश की मात्रा की तुलना में बाढ़ का अधिक विश्वसनीय संकेतक साबित हुआ। सैटेलाइट और AI का अनोखा संयोजन इस सिस्टम को तैयार करने के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के Sentinel-1 Synthetic Aperture Radar (SAR) सैटेलाइट डेटा का उपयोग किया गया। यह रडार तकनीक घने मानसूनी बादलों के बीच भी पृथ्वी की स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम है। AI मॉडल ने बाढ़ से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर पानी से भरे क्षेत्रों की पहचान करना सीखा और उसी आधार पर संभावित बाढ़ की गहराई का अनुमान लगाया। दो चरणों में करता है काम यह AI सिस्टम दो स्तरों पर कार्य करता है: पहले चरण में यह पहचानता है कि कौन-सा क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आने की आशंका रखता है। दूसरे चरण में यह अनुमान लगाता है कि उस स्थान पर पानी कितनी गहराई तक भर सकता है। इससे प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है। अस्पताल, सड़क और स्कूलों की सुरक्षा में होगी मदद 30 मीटर रिजॉल्यूशन वाले हाई-प्रिसिजन मैप्स की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि बाढ़ के दौरान कौन-कौन से अस्पताल, स्कूल, सड़कें और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे प्रभावित हो सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक विशेष रूप से केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। भविष्य में मुंबई और पूर्वी तट तक होगा विस्तार फिलहाल यह मॉडल पश्चिमी घाट के कम ढलान (7% से कम) वाले क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि आवश्यक बदलाव और अतिरिक्त डेटा जोड़कर इसे मुंबई और भारत के पूर्वी तटीय क्षेत्रों जैसे जटिल इलाकों में भी लागू किया जा सकता है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के नाम पर रंगदारी मांगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला सामने आया है जहां शहर के दो प्रमुख कारोबारियों से पांच-पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई है। यहां तक कि रंगदारी नहीं देने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई है, जिससे कारोबारी समुदाय में भय का माहौल बन गया है। पॉल ज्वेलर्स की संचालिका को धमकी जानकारी के अनुसार, रांची के प्रसिद्ध पॉल ज्वेलर्स की संचालिका सुमन पॉल को चार जून की रात एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को प्रिंस खान बताते हुए कहा कि वह दुबई से बोल रहा है। उसने पांच करोड़ रुपये की मांग की और रकम नहीं देने पर सुमन पॉल तथा उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गयी । बाद में व्हाट्सएप पर भी धमकी भरा मैसेज भेजा गया। मामले को लेकर सुमन पॉल ने लालपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। बिल्डर से भी मांगे गए पांच करोड़ रुपये इसी तरह लालपुर निवासी बिल्डर उदय शंकर को भी एक अज्ञात नंबर से संदेश भेजकर पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई। पांच जून की रात मिले इस संदेश में खुद को प्रिंस खान बताने वाले व्यक्ति ने रकम नहीं देने पर गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी। इसके बाद उदय शंकर ने भी लालपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई। कारोबारियों में बढ़ी चिंता पुलिस की शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि विदेश में बैठा गैंगस्टर अपने नेटवर्क के जरिए रांची के कारोबारियों को निशाना बना रहा है। पिछले दो सप्ताह में होटल संचालकों सहित कई व्यापारियों से रंगदारी मांगने के मामले सामने आ चुके हैं। बताया जा रहा है कि अब तक शहर के आठ से अधिक कारोबारियों को धमकी भरे कॉल और संदेश मिल चुके हैं। पुलिस ने बढ़ाई निगरानी दोनों मामलों में पुलिस जांच कर रही है और कॉल व मैसेज के स्रोत का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। लगातार सामने आ रहे रंगदारी के मामलों ने राजधानी में कारोबारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रांची। राजधानी रांची में चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। ताजा मामला खेलगांव ओपी क्षेत्र का है, जहां चोरों ने एक बंद घर को निशाना बनाकर लाखों रुपये के गहने और नकदी पर हाथ साफ कर दिया। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। जानकारी के अनुसार, मेधा डेयरी में कार्यरत अनीश कुमार भारती अपने परिवार के साथ 29 मई को नेपाल घूमने गए थे। गुरुवार सुबह जब पूरा परिवार वापस घर लौटा तो बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई दिया। लेकिन घर के अंदर प्रवेश करते ही सभी हैरान रह गए। घर के मुख्य दरवाजे समेत अन्य कमरों के ताले टूटे हुए थे और सामान पूरी तरह बिखरा पड़ा था। अलमारी और बक्सों को खंगाल ले गए चोर पीड़ित अनीश कुमार भारती ने बताया कि चोरों ने घर की अलमारियां, बक्से और ट्रॉली बैग तक खंगाल दिए। घर में रखे सोने-चांदी के लगभग 25 से 30 लाख रुपये मूल्य के गहने चोरी कर लिए गए। इसके अलावा 15 हजार रुपये नकद भी गायब हैं। चोरी हुए सामान में दो सोने की चेन, एक मंगलसूत्र, चार नथनी, पांच टॉप्स, पांच अंगूठियां, एक मांग टीका, एक सोने का हार, दो झुमके, दो लॉकेट, कान के कुंडल समेत बड़ी मात्रा में चांदी के आभूषण शामिल हैं। पुलिस और एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी निर्भय कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) टीम को भी बुलाया गया। टीम ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट और अन्य साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है ताकि चोरों की पहचान की जा सके। थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं ने राजधानी के लोगों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं पुलिस पर भी अपराधियों पर लगाम लगाने का दबाव बढ़ गया है।
रांची। राजधानी रांची के रातू थाना क्षेत्र में हुई मॉब लिंचिंग की घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। भाजपा नेता कमलेश राम के भांजे रोहित की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले में एक दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है और अब तक कई लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। छेड़खानी के आरोप के बाद हुई थी पिटाई जानकारी के अनुसार, बुधवार को रातू क्षेत्र की एक महिला ने रोहित पर छेड़खानी का आरोप लगाया था। आरोप के बाद महिला के परिजनों और स्थानीय लोगों ने रोहित को पकड़ लिया और उसकी लाठी-डंडों से बेरहमी से पिटाई कर दी। मारपीट के दौरान किसी ने डायल-112 पर सूचना देकर पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही रातू थाना पुलिस मौके पर पहुंची और रोहित को भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। पुलिस ने शुरू की जांच रातू थाना प्रभारी आदिकांत महतो ने बताया कि युवक की मौत पिटाई के कारण हुई है। प्रारंभिक जांच में छेड़खानी के विवाद को घटना का कारण बताया जा रहा है। मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की जा रही है। पुलिस ने अब तक एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। जमीन विवाद का भी आरोप वहीं भाजपा नेता कमलेश राम ने इस घटना को केवल छेड़खानी का मामला मानने से इनकार किया है। उनका आरोप है कि उनके भांजे की हत्या जमीन विवाद के कारण की गई और मामले को छेड़खानी का रूप देकर वास्तविक कारण छिपाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सभी दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। निष्पक्ष जांच पर टिकी नजरें मामले को लेकर पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। छेड़खानी के आरोप और जमीन विवाद के दावों के बीच सच्चाई सामने लाने के लिए जांच जारी है। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
रांची। रांची में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत एक ही रात में 30 से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही 135 से ज्यादा लंबित वारंटों का निष्पादन भी किया गया। रांची पुलिस की इस कार्रवाई को हाल के दिनों का सबसे बड़ा अभियान माना जा रहा है। फरार अपराधियों पर कसा शिकंजा रांची के सीनियर एसपी राकेश रंजन ने बताया कि ऑपरेशन प्रहार का उद्देश्य अपराध नियंत्रण, संगठित अपराध पर रोक और लंबित वारंटों का निष्पादन करना है। इसके तहत पुलिस समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर फरार अपराधियों और संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई करती है। ऑपरेशन के दूसरे चरण में जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में देर रात तक छापेमारी की गई। इस दौरान कई ऐसे आरोपी भी गिरफ्तार किए गए, जो लंबे समय से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहे थे। रातभर चली पुलिस की कार्रवाई अभियान का नेतृत्व सिटी एसपी पारस राणा और ग्रामीण एसपी ने किया। पुलिस की अलग-अलग टीमों ने शहर और ग्रामीण इलाकों में दबिश देकर अपराधियों को पकड़ा। अभियान में जिले के सभी एसपी, डीएसपी, थाना प्रभारी और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी शामिल रहे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पिछले 24 घंटे से लगातार टीमों को सक्रिय रखा गया था। गंभीर मामलों में वांछित अपराधियों की सूची तैयार कर विशेष रणनीति के तहत कार्रवाई की गई। पहले चरण में भी हुई थी बड़ी कार्रवाई इससे पहले ऑपरेशन प्रहार के पहले चरण में भी रांची पुलिस ने 100 से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया था और 220 से ज्यादा लंबित वारंटों का निष्पादन किया गया था। पुलिस का कहना है कि अपराध और संगठित गिरोहों पर नियंत्रण के लिए आगे भी इस तरह के अभियान लगातार जारी रहेंगे।
रांची। राजधानी रांची में बस चालक से रंगदारी मांगने और फायरिंग करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अरगोड़ा चौक के पास हुई इस घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से अवैध हथियार, कारतूस का खोखा और मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। घटना के बाद बस चालकों और परिवहन कारोबारियों में डर का माहौल बन गया है। बस चालक पर तानी पिस्तौल, विरोध करने पर की फायरिंग वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी जानकारी के अनुसार, ‘जीवन ज्योति’ नाम की बस रांची से नालंदा जा रही थी। नो-एंट्री लागू होने के कारण बस अरगोड़ा चौक से पहले रुकी हुई थी। इसी दौरान तीन युवक बस के पास पहुंचे। इनमें से दो आरोपी बस में चढ़ गए और चालक की कनपटी पर हथियार सटाकर रंगदारी मांगने लगे। जब चालक ने विरोध किया तो आरोपियों ने उसे जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी। हालांकि चालक बाल-बाल बच गया और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। गोली चलने से आसपास अफरा-तफरी मच गई। पुलिस की तत्परता से आरोपी गिरफ्तार घटना के समय अरगोड़ा चौक पर मौजूद पुलिस गश्ती दल और ट्रैफिक पुलिसकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस को देखते ही आरोपी भागने लगे, लेकिन एक आरोपी को हथियार के साथ मौके पर ही पकड़ लिया गया। बाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम गठित कर छापेमारी की गई, जिसमें फरार दो अन्य आरोपी और हथियार उपलब्ध कराने वाला एक व्यक्ति भी गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुंदन कुमार सोनी, अभिजीत कुमार उर्फ अन्नो सिंह, नितिन पांडेय उर्फ अमन और गोलू राम उर्फ गोलू बाल्मोकी के रूप में हुई है। इनमें कुछ आरोपी बिहार के गया और नवादा जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी का आपराधिक इतिहास भी रहा है। मामले में अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
रांची। रांची के डोरंडा थाना क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग बेटी ने अपने प्रेमी और उसके साथियों के साथ मिलकर अपनी ही मां की हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। मृतका नाहिद परवीन मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली थीं। उन्होंने करीब 16 साल पहले एक छह महीने की बच्ची को गोद लिया था और उसे बेहद प्यार से पाला। पति की मौत के बाद वही बेटी उनकी जिंदगी का सहारा थी, लेकिन वही बेटी इस जघन्य अपराध में शामिल पाई गई। पैसों के विवाद ने लिया खौफनाक रूप पुलिस के अनुसार, नाहिद के बैंक खाते में करीब 25 लाख रुपये जमा थे, जिनका संचालन बेटी ही करती थी। आरोप है कि बेटी ने बिना जानकारी के 15 लाख रुपये निकालकर अपने प्रेमी अरबाज को दे दिए। जब मां को इस बात का पता चला, तो दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और मामला हत्या तक पहुंच गया। प्रेमी और साथियों के साथ मिलकर की हत्या 25 अप्रैल की रात को बेटी ने अपने प्रेमी अरबाज को घर बुलाया। वह अपने साथ शाहिद, समीर और हासिम को भी लेकर आया। इन सभी ने मिलकर नाहिद परवीन की हत्या कर दी। इसके बाद घटना को छिपाने के लिए इसे बाथरूम में गिरने से हुई मौत बताया गया और जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। संदेह के बाद खुला राज परिजनों को घटना पर शक हुआ, जिसके बाद सख्ती से पूछताछ में सच्चाई सामने आई। पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया। कब्र से निकाला गया शव, जांच जारी मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में डोरंडा कब्रिस्तान से शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
रांची। रांची के डोरंडा थाना क्षेत्र स्थित मनिटोला में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके को हिला दिया। शुरुआत में इस घटना को सामान्य मौत मानकर शव को दफना दिया गया था, लेकिन बाद में पुलिस जांच में हत्या का खुलासा हुआ। इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि हत्या के आरोप में मृतका की सगी बेटी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कब्र से निकलवाया गया शव, जांच तेज मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। कार्यपालक दंडाधिकारी की मौजूदगी में महिला के शव को कब्र से बाहर निकाला गया। इसके बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) भेज दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारण और हत्या के तरीके का खुलासा होने की उम्मीद है। बेटी पर साजिश का आरोप पुलिस जांच में शुरुआती तौर पर यह सामने आया है कि मृतका की बेटी ने अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। अधिकारियों के अनुसार यह हत्या पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी। घटना के बाद इसे सामान्य मौत दिखाने की कोशिश की गई, ताकि किसी को शक न हो और मामला दबा रहे। तीनों आरोपी गिरफ्तार, पूछताछ जारी डोरंडा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस हत्या के पीछे की असली वजह का पता लगाने में जुटी है। शुरुआती जांच में संपत्ति विवाद और आपसी रंजिश जैसे कारण सामने आ रहे हैं, हालांकि सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में गुरुवार देर रात सुरक्षा गार्ड की हत्या से इलाके में सनसनी फैल गई है। करीब 335 साल पुराने इस मंदिर में हुई इस वारदात ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को दहशत में डाल दिया है। मृतक गार्ड की पहचान, रात में हुई वारदात मृतक की पहचान बिरसा मुंडा के रूप में हुई है, जो लंबे समय से मंदिर में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि अज्ञात अपराधियों ने देर रात मंदिर परिसर में ही उनकी हत्या कर दी। शुक्रवार सुबह जब पुजारी और स्थानीय लोग मंदिर पहुंचे तो गार्ड का शव देखकर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस और FSL टीम जांच में जुटी घटना की जानकारी मिलते ही धुर्वा, जगन्नाथपुर और विधानसभा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। इसके अलावा हटिया डीएसपी, एसएसपी राकेश रंजन, सिटी एसपी पारस राणा और ग्रामीण एसपी ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया है। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। रंजिश या चोरी की आशंका प्रारंभिक जांच में पुलिस ने हत्या के पीछे आपसी रंजिश या चोरी की संभावना जताई है, हालांकि अभी तक स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है। ऐतिहासिक मंदिर में दहशत का माहौल नीलांचल पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर वर्ष 1691 में बड़कागढ़ रियासत के राजा एनीनाथ शाहदेव द्वारा पुरी जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर बनवाया गया था। यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की पूजा होती है और यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। घटना के बाद से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच भय और आक्रोश का माहौल है।
रांची। हाल ही में राजधानी रांची में एमडीएस छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म मामले ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना लालपुर स्थित गोकुल वाटिका अपार्टमेंट में हुई, जहां आरोपी ने एक प्राइवेट ऐप के जरिए फ्लैट को होम स्टे के रूप में बुक किया था। इस मामले ने यह उजागर कर दिया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिना किसी ठोस नियम-कानून और निगरानी के कमरे और फ्लैट को किराये पर देना कितना खतरनाक हो सकता हैं। वेरिफिकेशन की कमी से बढ़ा खतरा सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसे होम स्टे में किराया देने से पहले ठहरने वालों का कोई पुख्ता रिकॉर्ड या पहचान पत्र मांगना चाहिए या नहीं ? अगर किसी व्यक्ति की पहचान और उसके ठहरने का उद्देश्य ही स्पष्ट न हो, तो इस तरह की घटनाओं का घटना स्वाभाविक है। यही वजह है कि अपराधियों के लिए ऐसे जगह क्राइम करने के लिए आसान ठिकाना बनते जा रहे हैं। होटल-लॉज पर सख्ती तो वहीं आपको बताते चले कि एक ओर सरकार ने होटल और लॉज के लिए कड़े नियम बनाए हैं-जैसे गेस्ट का पहचान पत्र लेना, रजिस्टर में नाम, एड्रेस एंट्री करना और सुरक्षा मानकों का पालन करना। वहीं दूसरी ओर प्राइवेट ऐप के जरिए चल रहे होम स्टे इन नियमों से बाहर हैं। इस असमानता के कारण सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा अंतर पैदा हो गया है, जो कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनता जा रहा है। प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया नगर प्रशासन ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उप नगर आयुक्त गौतम प्रसाद साहू के अनुसार, नगर निगम के पास शहर में संचालित होम स्टे की संख्या का कोई स्पष्ट डेटा नहीं है। साथ ही, प्राइवेट ऐप के जरिए हो रही बुकिंग की जानकारी भी प्रशासन तक नहीं पहुंचती। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भले ही कुछ समय के बुकिंग हो लेकिन किसी भी किरायेदार का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है। यह नियम पूरे राज्य में लागू है, पर होम स्टे के मामलों में इसका पालन नहीं हो रहा। सख्त नियमों की बढ़ी मांग अगर होम स्टे सिस्टम को बिना नियंत्रण के चलने दिया गया, तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में सरकार से मांग की जा रही है कि होम स्टे के लिए भी होटल-लॉज की तरह स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं और एक सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाए, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
रांची। राजधानी रांची के पंडरा इलाके में दिनदहाड़े गोलीबारी की घटना से हड़कंप मच गया। अपराधियों ने भार्गव सिंह नामक युवक को गोली मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना उस समय हुई जब वह मंदिर से पूजा कर लौट रहा था। वारदात की जगह केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के आवास के पास वाली गली बताई जा रही है, जिससे इलाके में दहशत और बढ़ गई। मंत्री की तत्परता, ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पहुंचाया अस्पताल घटना की सूचना मिलते ही संजय सेठ स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मियों की मदद से घायल युवक को तुरंत अस्पताल भिजवाया। बताया जा रहा है कि ग्रीन कॉरिडोर बनाकर युवक को तेजी से इलाज के लिए पहुंचाया गया, जिससे उसकी जान बचाने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल अस्पताल में उसका इलाज जारी है। मंदिर से लौटते समय पीछे से मारी गोली स्थानीय लोगों के अनुसार, भार्गव सिंह हनुमान मंदिर में पूजा करने के बाद प्रसाद लेकर लौट रहा था। इसी दौरान एक नकाबपोश अपराधी ने पीछे से उस पर गोली चला दी। गोली लगते ही वह जमीन पर गिर पड़ा और हमलावर मौके से फरार हो गया। अचानक हुई इस घटना से आसपास अफरा-तफरी मच गई। जमीन विवाद को लेकर हमले की आशंका घायल युवक ने बयान में बताया कि रातू इलाके की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में विजय नामक व्यक्ति ने उस पर हमला करवाया है। पुलिस ने इस बयान के आधार पर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी है। कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने राजधानी की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Sanjay Seth ने भी घटना पर चिंता जताते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा कर रही है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में एक मेडिकल छात्रा के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। यह घटना 9 अप्रैल की रात एक अपार्टमेंट में हुई, जहां पीड़िता को जन्मदिन की पार्टी के लिए बुलाया गया था। आरोप है कि पार्टी के दौरान उसे खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर दिया गया, जिससे वह अर्धबेहोशी की हालत में चली गई। पिज्जा में नशा देकर दिया गया वारदात को अंजाम पीड़िता के बयान के अनुसार, केक काटने के बाद उसे पिज्जा दिया गया, जिसे खाने के बाद उसे नशे जैसा महसूस होने लगा। इसके बाद वह एक कमरे में आराम करने चली गई। इसी दौरान आरोपी दानिश ने उसकी हालत का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने बताया कि नशे की वजह से वह विरोध करने में असमर्थ थी। सुबह खून से लथपथ मिली पीड़िता पीड़िता ने एफआईआर में बताया कि सुबह जब उसे होश आया तो वह खून से लथपथ हालत में थी। घटना के बाद पार्टी में मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने उसे समझाकर हॉस्टल भेज दिया। वहां उसकी तबीयत और बिगड़ गई, जिसके बाद उसकी सहेली ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया और पुलिस को सूचना दी। एफआईआर दर्ज, आरोपी गिरफ्तार होने की सूचना लालपुर थाना पुलिस ने पीड़िता के फर्द बयान के आधार पर केस दर्ज कर लिया है। मामला केस नंबर 66/26 के तहत दर्ज हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी दानिश को पश्चिम बंगाल के खड़गपुर से गिरफ्तार किए जाने की सूचना है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। पुलिस जांच जारी पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। यह घटना शहर में सुरक्षा व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
धनबाद। कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान पाकिस्तान से भारत में हथियारों की सप्लाई कर रहा है। उसकी गैंग में कई लड़कियां हैं, जो इस तस्करी को अंजाम दे रही हैं। रांची के रेस्टोरेंट में 7 मार्च की फायरिंग में पकड़े गए प्रिंस खान के हैंडलर अमन सिंह उर्फ कुबेर से धनबाद पुलिस की पूछताछ में कई और नए चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस को पता चला है कि रंगदारी के लिए फायरिंग और हत्याएं कराने के लिए गैंगस्टर प्रिंस खान पाकिस्तान से भारत में हथियारों की सप्लाई कर रहा है। प्रिंस खान ने कई हथियार भेजे पुलिस को जानकारी मिली है कि फरवरी में प्रिंस खान ने पाकिस्तान से पठान नामक अपराधी को दो हथियार देकर अमृतसर के रास्ते तरन तारन भेजा था। उससे हथियार रिसीव करने के लिए पलामू का कृष कुमार सिंह उर्फ आयुष वहां गया था। हालांकि, वहां किसी कारण डिलीवरी नहीं मिलने पर वह खाली हाथ रांची लौट गया था। फिर प्रिंस ने उसे 8 फरवरी को मध्यप्रदेश के बुरहानपुर भेजा था, जहां उसे 3 पिस्टल सौंपी गई थी। 20 फरवरी को वही पिस्टल रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड के पास कुबेर और कृष ने शूटरों को दी थीं। उन्हीं से धनबाद में फहीम खान के बेटे इकबाल खान को गोली मारने का फरमान पाकिस्तान से प्रिंस ने जारी किया था। हालांकि, गोली इकबाल के ड्राइवर को लगी थी। फिर 7 मार्च की रात रांची में एयरपोर्ट थाना क्षेत्र की फैमिली रेस्टोंरेंट में भी उन्हीं हथियारों से फायरिंग की गई थी, जिसमें वेटर मनीष की मौत हो गई थी। बाद में 16 मार्च को भागाबांध में मुठभेड़ के बाद कृष पकड़ा गया था और तभी से धनबाद जेल में बंद है। इकबाल की हत्या के लिए रांची से एक लड़की लाई थी हथियार पुलिस को यह भी पता चला कि प्रिंस खान अपने गिरोह के गुर्गों तक हथियार पहुंचाने के लिए लड़कियों का भी इस्तेमाल कर रहा है। गैंग में कई लड़कियां स्पीलर सेल के रूप में शामिल होकर काम कर रही है। उनके जरिए प्रिंस कारोबारियों की जानकारी भी हासिल करता है। पूछताछ में पता चला कि इकबाल को मारने के लिए रांची में अफजल उर्फ बाबर से एक लड़की ही हथियार लेकर धनबाद आई थी। सुधीश को धनबाद-बोकारो, कुबेर को रांची-पलामू की कमान रंगदारी वसूली के लिए प्रिंस खान ने झारखंड में तीन जोन बना रखे हैं। वहां फायरिंग कराने और रुपए वसूलने के लिए एजेंट भी बना रखे हैं, जिनमें कई लड़कियां हैं। धनबाद और बोकारों में सुधीश ओझा, रांची और पलामू में कुबेर और हजारीबाग में अमन खान को उसने इस काम में लगाया है। अमन कुछ माह पहले ही गैंग से जुड़ा है। पलामू में एक रिसार्ट में काम करनेवाले अभिषेक को भी रंगदारी वसूली में लगाया गया था। गैंग के गुर्गों के संपर्क में रहता है प्रिंस खान प्रिंस खान अपने गिरोह के अपराधियों से 4 मोबाइल एप के जरिए संपर्क में रहता है। इनमें वॉट्सएप और मैसेंजर के साथ जंगी एप भी शामिल है। इन एप के जरिए प्रिंस गिरोह के अपराधियों को निर्देश देता है। पुलिस अब टेक्निकल टीम की मदद से इन एप की डिटेल खंगाल रही है। दुबई गए थे सफेदपोश, अब पुलिस पूछेगी जाने का मकसद पुलिस को पता चला है कि दुबई में प्रिंस खान से मिलने के लिए धनबाद और रांची से कई सफेदपोश गए थे। उनमें वासेपुर के कुछ लोग भी शामिल हैं। संदेह है कि वे प्रिंस को कारोबारियों की जानकारी देते हैं और रंगदारी के पैसे के ट्रांजेक्शन में भी मददगार हैं। उन सबका पता लगाया जा रहा है। उनसे दुबई जाने का मकसद पूछा जाएगा।
रांची। धनबाद के वासेपुर के गैंगस्टर प्रिंस खान के मुख्य शूटर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ये गिरफ्तारी राजधानी रांची में हुई हैं। गिरफ्तार मुख्य शूटर पर रांची के एक रेस्टोरेंट में घुसकर फायरिंग करने और हत्या करने का आरोप है। रांची 7 मार्च को रेस्टोरेंट में हुई थी हत्या रांची के एसएसपी ने बताया कि प्रिंस खान गिरोह की ओर से रांची एयरपोर्ट थाना इलाके में 7 मार्च की रात को टी टॉस रेस्टोरेंट में घुसकर अपराधियों ने फायरिंग और हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। इस मामले में पुलिस ने मुख्य शूटर सचिन यादव को गिरफ्तार किया है। रेस्टोरेंट संचालक से एक करोड़ रंगदारी की मांग की गई थीः पुलिस के अनुसार 27 दिसंबर को लोधमा स्थित टी टॉस रेस्टोरेंट के मालिक राजकुमार गोप से प्रिंस खान की ओर से इंटरनेट कॉल के माध्यम से ऑडियो मैसेज भेज कर एक करोड़ रंगदारी की मांग की गई। पैसे नहीं देने पर लगातार धमकी दी जा रही थी। पर जब रंगदारी का पैसा नही मिला, तो प्रिंस खान ने अपने गैंग के लड़को के माध्यम से 7 मार्च को टी टॉस रेस्टोरें में फायरिंग करा दी। इसमें रेस्टोरेंट के एक स्टाफ को गोली लगने से मृत्यु हो गई थी। 4 आरोपियों की पहले ही हो चुकी है गिरफ्तारी इस मामले में जांच के लिए गठित एसआईटी की ओर से त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना में संलिप्त अपराधियों में से 4 को गिरफ्तार कर पहले ही जेल भेजा जा चुका है। अनुसंधान के कम में गिरफ्तार अभियुक्तों की ओर से घटना को अंजाम देने वाले प्रमुख शूटर के रुप में सचिन यादव का पहचान की गई। घटना के समय पहने कपड़े भी बरामद रांची पुलिस ने लागातर छापमारी करते हुए 29 मार्च को सचिन यादव को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद घटना के समय पहने हुए कपड़े और आर्म्स एमयुनेशन बरामद किया गया है। बरामद आर्म्स एम्युनेशन के सबंध में अलग से एयरपोर्ट थाना काण्ड सं0-15/26 दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है। सचिन यादव के खिलाफ 8 मामले दर्ज सचिन यादव की पूर्व से ही कई घटनाओं में संलिप्तता का आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ जोगता, राजगंज, बैंक मोड़ औऱ पुटकी थाना में 8 केस दर्ज है। उसने पुलिस को बताया कि इस कांड के लिए उसे एक लाख रुपए देने का वादा किया गया था,लेकिन पूरा पैसा नहीं मिला।
रांची। रांची में अपराधियों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। मंगलवार देर रात बाइक सवार हथियारबंद बदमाशों ने एक के बाद एक तीन पेट्रोल पंपों को निशाना बनाकर लूट की वारदात को अंजाम दिया। इस दौरान विरोध करने पर एक दुकानदार को चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। तीन इलाकों में एक साथ वारदात घटना बीआईटी, ओरमांझी और टाटीसिलवे इलाके में हुई। करीब आधी रात को छह अपराधी बीआईटी ओपी क्षेत्र के नेवरी स्थित एक पेट्रोल पंप पर पहुंचे और वहां से 2 लाख रुपये से अधिक की नकदी लूट ली। इसके बाद पास के दूसरे पेट्रोल पंप से भी नकदी और मोबाइल फोन छीन लिया गया। विरोध करने पर दुकानदार पर हमला लूटपाट के बाद अपराधी ओरमांझी की ओर बढ़े, जहां उन्हें एक दुकान खुली मिली। जब दुकानदार ने विरोध किया, तो बदमाशों ने उस पर चाकू से हमला कर दिया और दुकान से भी सामान व नकदी लूट ली। घायल दुकानदार को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। टाटीसिलवे में भी लूट की पुष्टि इसी रात टाटीसिलवे स्थित एक पेट्रोल पंप पर भी लूट की घटना सामने आई, जहां से करीब 12 हजार रुपये लूटे गए। पुलिस ने इस घटना की पुष्टि की है। सीसीटीवी में कैद हुई वारदात पूरी घटना पेट्रोल पंपों पर लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि बदमाश हथियार के बल पर कर्मचारियों को डराते हैं और कैश काउंटर से पैसे लेकर फरार हो जाते हैं। एक ही गैंग पर शक, पुलिस जांच में जुटी प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सभी घटनाओं में एक ही गिरोह का हाथ हो सकता है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। हालांकि, एक ही रात में कई जगह लूट की घटनाओं ने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रांची। रांची में बढ़ते अपराध और गैंगस्टर गतिविधियों को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान और उसके गुर्गों द्वारा फैलाए जा रहे आतंक पर सरकार और पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है। सरकार और पुलिस पर लगाया ढुलमुल रवैये का आरोप मीडिया से बातचीत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में अपराधियों का मनोबल सरकार और पुलिस की “लुंज-पुंज व्यवस्था” के कारण बढ़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रिंस खान और उसके गुर्गे खुलेआम दहशत फैला रहे हैं, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि उन्हें कहीं न कहीं संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ठोस कार्रवाई करे, तो अपराधियों को एक रात में भागने पर मजबूर किया जा सकता है। गुर्गों पर कार्रवाई की मांग मरांडी ने कहा कि भले ही प्रिंस खान देश से बाहर रहकर गैंग चला रहा हो, लेकिन उसके गुर्गे झारखंड में सक्रिय हैं। उन्होंने पुलिस को सख्त कार्रवाई करने की सलाह देते हुए कहा कि यदि 8-10 अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, तो बाकी अपराधियों में भी डर पैदा होगा और अपराध पर लगाम लगेगी। विधानसभा में भी गूंजा मामला प्रिंस खान गैंग का मुद्दा झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में भी उठ चुका है। नेता प्रतिपक्ष ने सदन में सरकार से इस पर जवाब मांगा और राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि गैंगस्टर विदेश में बैठकर अपने नेटवर्क के जरिए रंगदारी और अपराध का संचालन कर रहा है। हत्या और रंगदारी के मामलों का जिक्र मरांडी ने हाल के आपराधिक घटनाओं का हवाला देते हुए बताया कि रांची के टीटॉस होटल में गोलीबारी कर एक कर्मचारी की हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा बोकारो में एक शोरूम संचालक से रंगदारी मांगे जाने का मामला भी सामने आया है। इन घटनाओं से व्यापारियों और आम लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। कानून-व्यवस्था पर बढ़ी चिंता लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं के बीच सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है।
धनबाद। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान गैंग के खिलाफ रांची और धनबाद पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। धनबाद में सोमवार सुबह पुलिस और गैंगस्टर प्रिंस खान गैंग के गुर्गों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें 3 अपराधी घायल हो गये। ये तीनों पुलिस के हत्थे चढ़ गये हैं। घायल तीनों आरोपियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। धनबाद में एनकाउंटरः धनबाद के पुटकी थाना क्षेत्र के भागाबांध ओपी इलाके में रांची और धनबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के गिरोह के दो अपराधियों को पैर में गोली लगी है, जबकि एक अन्य भागने के क्रम में पैर टूटने से घायल हो गया। गिरफ्तार अपराधियों की पहचान कुबेर, विक्की डोम और अमन अफजल के रूप में हुई है, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। वर्चुअल नंबरों से मांग रहा रंगदारीः राजधानी रांची में प्रिंस खान के नाम पर वर्चुअल नंबरों से कॉल के जरिए मांगी जा रही रंगदारी और एक रेस्टोरेंट में गोलीबारी की घटना के बाद रांची और धनबाद पुलिस ने यह ऑपरेशन शुरू किया है। तकनीकी जांच में पता चला कि कुबेर नाम का बदमाश धनबाद में छिपकर रांची के व्यवसायियों को धमका रहा था। दो को लगी गोली, एक का पैर टूटाः सूचना की पुष्टि होते ही रांची और धनबाद पुलिस की विशेष टीम ने भागाबांध इलाके की घेराबंदी की। खुद को घिरा देख अपराधियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। इस मुठभेड़ में कुबेर और विक्की डोम को गोली लगी है, जबकि भागने की कोशिश में अमन अफजल का पैर टूट गया। होटल स्टाफ हत्याकांड का भी खुलासाः पुलिस सूत्रों का दावा है कि इन गिरफ्तारियों के साथ ही हाल में रांची के एयरपोर्ट क्षेत्र स्थित होटलकर्मी की हत्याकांड का भी खुलासा हो गया है। मुठभेड़ के बाद पूरा भागाबांध इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। धनबाद के एसएसपी स्वयं मौके पर मौजूद हैं। पुलिस को पूछताछ के दौरान प्रिंस खान गिरोह के अगले मंसूबों और उनके मददगारों के बारे में कई अहम सुराग मिले हैं। फिलहाल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है, ताकि गिरोह के किसी अन्य छिपे हुए सदस्यों को दबोचा जा सके। पुलिस अब अपराधियों के पास से बरामद मोबाइल और अन्य दस्तावेज के जरिए प्रिंस खान के अंतरराष्ट्रीय लिंक और स्थानीय नेटवर्क की बारीकी से जांच कर रही है। एक सप्ताह के अंदर दूसरी मुठभेड़ः बता दें कि धनबाद पुलिस और प्रिंस खान के गुर्गों के साथ एक सप्ताह में यह दूसरी बड़ी मुठभेड़ है। कुछ दिन पूर्व पुलिस ने धनबाद के भुईफोड़ स्थित फायरिंग जोन में प्रिंस खान के एक गुर्गे के साथ मुठभेड़ हुई थी। जिसमें पुलिस एनकाउंटर में एक गुर्गे को पैर में गोली लगी थी। दूसरा गुर्गा फरार हो गया था। जिसे बाद में कुछ घंटों के अंदर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था ।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।