नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET-UG परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार 2027 से NEET परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (Computer-Based Test) मोड में कराने की तैयारी कर रही है। इस कदम का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और गड़बड़ी मुक्त बनाना है। OMR आधारित परीक्षा से डिजिटल सिस्टम की ओर बदलाव धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि NEET जैसी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू होने से प्रश्नपत्र लीक, पेपर छपाई और वितरण जैसी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है। छात्रों की सुविधा के लिए बनाई जाएगी योजना शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, देशभर में लाखों छात्रों के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाने, तकनीकी सुविधाएं मजबूत करने और छात्रों को डिजिटल परीक्षा प्रणाली से परिचित कराने की योजना बनाई जाएगी। NEET विवाद के बाद सुधारों पर जोर NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के विरोध के बाद सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर लगातार जोर दे रही है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि छात्रों का भरोसा बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और परीक्षा प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाया जाएगा। विशेषज्ञों ने बताया बड़ा कदम शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा से मूल्यांकन प्रक्रिया तेज हो सकती है और पारदर्शिता बढ़ सकती है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए डिजिटल सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना इस बदलाव की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और पहले ही दिन सरकार तथा विपक्ष के बीच तीखे टकराव के संकेत मिल रहे हैं। विपक्ष कई प्रमुख मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है, जबकि सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस ने अपने लोकसभा सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। कांग्रेस ने सांसदों की बुलाई अहम बैठक मानसून सत्र की शुरुआत से पहले कांग्रेस ने सुबह 10:30 बजे संसद परिसर स्थित कांग्रेस संसदीय दल (CPP) कार्यालय में अपने लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई है। बैठक में विपक्षी दलों की रणनीति, फ्लोर मैनेजमेंट और सदन में उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा होगी। इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी विपक्ष ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह कई अहम मुद्दों को सदन में उठाएगा। इनमें शामिल हैं– NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक सोनम वांगचुक का अनशन और संसद मार्च महंगाई मणिपुर की स्थिति किसानों से जुड़े मुद्दे चुनाव आयोग के कामकाज अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावे से जुड़ा मामला एथनॉल नीति कांग्रेस सांसद माणिकम टैगोर ने लोकसभा में NEET-UG पेपर लीक मामले पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस भी दिया है। सरकार का फोकस आठ विधेयकों पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि मानसून सत्र के लिए फिलहाल आठ विधेयकों को सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई नया विधेयक लाया जाएगा तो उसकी जानकारी पहले कार्य मंत्रणा समिति और सभी राजनीतिक दलों को दी जाएगी। सरकार ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील भी की है। टीएमसी के बागी सांसदों की सीटें बदलीं लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की गई है। इस बदलाव के तहत कुल 39 सांसदों की सीटों का पुनः आवंटन किया गया है। संसद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी मानसून सत्र से पहले संसद भवन की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक परीक्षण किया गया। सीआईएसएफ, दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ, एनएसजी, एनडीआरएफ और संसद सुरक्षा कर्मियों ने संयुक्त रूप से मॉक ड्रिल कर आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। पहले दिन हंगामे के आसार संसद का यह सत्र राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष जहां विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं सरकार अपने विधायी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऐसे में पहले ही दिन सदन में जोरदार बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। 20 से 26 जुलाई के बीच OTT प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों के लिए मनोरंजन का भरपूर डोज़ तैयार है। इस सप्ताह कई नई फिल्में और वेब सीरीज़ रिलीज़ होने जा रही हैं, जिनमें 'Musafir Cafe', 'Adarsh Baal Vidyalaya' जैसे कई अन्य चर्चित टाइटल शामिल हैं। अलग-अलग जॉनर की इन रिलीज़ का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। 'Musafir Cafe' पर टिकी दर्शकों की नजर इस हफ्ते की सबसे चर्चित रिलीज़ 'Musafir Cafe' मानी जा रही है। फिल्म दोस्ती, रिश्तों और जीवन के नए अनुभवों की कहानी को हल्के-फुल्के अंदाज़ में पेश करती है। ट्रेलर को सोशल मीडिया पर शानदार प्रतिक्रिया मिली है और दर्शकों के बीच इसे लेकर अच्छा उत्साह देखने को मिल रहा है। 'Adarsh Baal Vidyalaya' भी बटोर रही सुर्खियां स्कूल जीवन और सामाजिक मुद्दों पर आधारित 'Adarsh Baal Vidyalaya' भी इस सप्ताह की प्रमुख रिलीज़ में शामिल है। फिल्म की कहानी और विषय को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है। रिलीज़ से पहले ही इसका ट्रेलर और पोस्टर चर्चा का विषय बने हुए हैं। हर जॉनर के दर्शकों के लिए विकल्प इस सप्ताह कॉमेडी, ड्रामा, फैमिली और थ्रिलर जैसे अलग-अलग जॉनर की कई नई फिल्में और सीरीज़ विभिन्न OTT प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज़ होंगी। ऐसे में दर्शकों को अपनी पसंद के अनुसार कई नए विकल्प मिलने वाले हैं। वीकेंड पर OTT दर्शकों की होगी मौज लगातार नई रिलीज़ के साथ यह सप्ताह OTT प्रेमियों के लिए बेहद खास रहने वाला है। दर्शक घर बैठे अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर नई फिल्मों और वेब सीरीज़ का आनंद ले सकेंगे, जिससे वीकेंड का मनोरंजन और भी शानदार होने की उम्मीद है।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद अब 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च का नेतृत्व उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो करेंगी। उन्होंने कहा कि वह अपने पति का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदर्शन में शामिल होंगी और आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। "मैं सोनम वांगचुक का प्रतिनिधित्व करूंगी" न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि उन्होंने वांगचुक को दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अनुमति नहीं मिली। उन्होंने कहा कि यदि स्थानांतरण की मंजूरी मिल जाती तो वांगचुक भी मार्च में शामिल हो सकते थे। अब वह स्वयं उनके प्रतिनिधि के रूप में संसद मार्च में शामिल होंगी। छात्रों और अभिभावकों से की शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील गीतांजलि आंग्मो ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्रों और अभिभावकों से संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण होना चाहिए और किसी भी ऐसे तत्व से सावधान रहना होगा जो आंदोलन का माहौल बिगाड़ने या उसे अलग दिशा देने की कोशिश करे। उन्होंने यह भी बताया कि सोनम वांगचुक अब भी अपना अनशन जारी रखना चाहते हैं। डॉक्टरों द्वारा तरल पदार्थ लेने की सलाह के बावजूद उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया है, हालांकि वे पानी पी रहे हैं। सरकार पर लगाए गंभीर आरोप गीतांजलि आंग्मो ने आरोप लगाया कि सरकार को वांगचुक के नेतृत्व में होने वाले संसद मार्च से डर है। उनके अनुसार, यदि वांगचुक स्वयं मार्च का नेतृत्व करते तो देशभर से बड़ी संख्या में लोग इस आंदोलन से जुड़ सकते थे। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से स्वास्थ्य को लेकर जताई जा रही चिंता केवल दिखावा है। हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने डॉ. गीतांजलि आंग्मो की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी देकर मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने की मांग की थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वांगचुक हिरासत में नहीं हैं और उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने के फैसले को मनमाना नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने तत्काल अस्पताल बदलने की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया। क्या है पूरा मामला? सोनम वांगचुक कथित NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके समर्थकों का आरोप है कि उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया। इस बीच संसद मार्च को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।
नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई ने विशेष अदालत में बड़ा दावा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, महाराष्ट्र के लातूर निवासी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे ने एक छात्र के परिवार से 5 लाख रुपये लेकर परीक्षा से पहले ही उसे लीक हुआ केमिस्ट्री का प्रश्नपत्र दिखाया था। यह जानकारी सीबीआई ने आरोपी डॉक्टर की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के सामने रखी। दो अन्य डॉक्टरों को भी नेटवर्क से जोड़ने का आरोप सीबीआई का कहना है कि डॉ. शिरुरे ने इस कथित पेपर लीक नेटवर्क में दो अन्य डॉक्टरों की मुलाकात सह-आरोपी पी.वी. कुलकर्णी से कराई थी। जांच के अनुसार, इन दोनों डॉक्टरों के बच्चों को भी लीक हुए प्रश्नपत्र का लाभ मिला और परीक्षा से पहले उन्हें पेपर उपलब्ध कराया गया था। अप्रैल में ही दिखाया गया था प्रश्नपत्र जांच एजेंसी के मुताबिक, डॉ. शिरुरे ने सह-आरोपी शिवराज मोटेगांवकर के बेटे आदित्य मोटेगांवकर को मई में आयोजित नीट-यूजी परीक्षा से पहले, अप्रैल के तीसरे सप्ताह में ही केमिस्ट्री का मूल प्रश्नपत्र दिखाया था। सीबीआई का आरोप है कि छात्रों को पहले से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराकर परीक्षा की तैयारी कराई गई, जिससे उन्हें अनुचित लाभ मिल सके। जांच जारी, अन्य आरोपियों की तलाश सीबीआई ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। एजेंसी पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और इसमें शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।
7 जुलाई रात 11:50 बजे तक मिलेगा मौका, समय रहते पूरी करें प्रक्रिया नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 के उन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की है, जो रिफंड के पात्र हैं। एजेंसी ने कहा है कि जिन अभ्यर्थियों ने अब तक अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट या सत्यापित नहीं की है, वे 7 जुलाई 2026 रात 11:50 बजे तक आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। समय सीमा के भीतर सही बैंक विवरण दर्ज करने से रिफंड मिलने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। NTA ने क्या कहा? NTA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी सूचना में बताया कि जिन उम्मीदवारों ने पहले ही अपने बैंक खाते की जानकारी की पुष्टि कर दी है, उनके रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एजेंसी के अनुसार, अब तक 8,29,510 उम्मीदवार अपने बैंक विवरण को अपडेट या संशोधित कर चुके हैं। बैंक डिटेल कैसे अपडेट करें? रिफंड के लिए उम्मीदवार निम्नलिखित आसान चरणों का पालन कर सकते हैं: NEET UG की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। Application Number और Password या Date of Birth की सहायता से लॉगिन करें। Refund/Bank Details सेक्शन में जाकर अपने बैंक खाते की जानकारी जांचें। यदि कोई त्रुटि हो तो Account Number, IFSC Code और अन्य आवश्यक विवरण सही करें। सभी जानकारी की पुष्टि करने के बाद Submit पर क्लिक करें। भविष्य के संदर्भ के लिए Confirmation Page डाउनलोड या प्रिंट करके सुरक्षित रख लें। NTA की उम्मीदवारों को सलाह एजेंसी ने सभी पात्र अभ्यर्थियों से अपील की है कि यदि उनके बैंक खाते की जानकारी में किसी भी प्रकार की गलती है, तो अंतिम तिथि से पहले उसे अवश्य सुधार लें। गलत बैंक विवरण के कारण रिफंड मिलने में देरी या अन्य तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं। NEET UG री-एग्जाम का रिजल्ट कब आएगा? NEET UG 2026 का री-एग्जाम 21 जून 2026 को देशभर के निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर आयोजित किया गया था। परीक्षा की प्रोविजनल आंसर की पहले ही जारी की जा चुकी है। अब उम्मीदवारों को परिणाम का इंतजार है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, NEET UG री-एग्जाम का रिजल्ट 20 जुलाई 2026 तक या उससे पहले घोषित किया जा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े विवाद और सुधारों को लेकर आज 1 जुलाई को संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति की अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), उच्च शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया गया है। समिति परीक्षा प्रणाली में सुधार और भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा करेगी। री-एग्जाम और परीक्षा प्रणाली की होगी समीक्षा समिति 21 जून को आयोजित NEET-UG री-एग्जाम के संचालन, पेपर लीक की घटनाओं और परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई कमियों की समीक्षा करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से सुधार लागू किए जा सकते हैं। NTA अधिकारियों से मांगा जाएगा जवाब बैठक में NTA अधिकारियों से परीक्षा की पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्र प्रबंधन और अभ्यर्थियों की शिकायतों पर जवाब मांगा जाएगा। समिति यह जानना चाहती है कि एजेंसी ने पिछले विवादों के बाद क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। के. राधाकृष्णन पेश करेंगे सुधार रिपोर्ट पूर्व ISRO प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन, जो NTA सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष हैं, अपनी सिफारिशें भी प्रस्तुत करेंगे। रिपोर्ट में परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने के सुझाव शामिल हैं। बड़े फैसलों की उम्मीद शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के संचालन, NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। इससे लाखों छात्रों और अभिभावकों को भविष्य में अधिक भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था मिलने की उम्मीद है।
अगर आप मेडिकल फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं और NEET UG के बाद एक बेहतरीन BDS (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी) कॉलेज की तलाश कर रहे हैं, तो चेन्नई आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है। देश के प्रमुख मेडिकल हब के रूप में पहचाने जाने वाले चेन्नई में कई ऐसे डेंटल कॉलेज हैं, जो उत्कृष्ट शिक्षा, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुभवी फैकल्टी और बेहतरीन क्लीनिकल एक्सपोजर के लिए जाने जाते हैं। आइए जानते हैं चेन्नई के उन पांच प्रमुख डेंटल कॉलेजों के बारे में, जहां से पढ़ाई करने वाले छात्रों को इंटर्नशिप और करियर के शानदार अवसर मिलते हैं। 1. सविता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेज (SIMATS) जब देश के सर्वश्रेष्ठ डेंटल कॉलेजों की बात होती है, तो SIMATS का नाम सबसे पहले आता है। NIRF डेंटल रैंकिंग में यह संस्थान लगातार शीर्ष स्थान पर रहा है। खासियत वर्ल्ड-क्लास रिसर्च सुविधाएं अत्याधुनिक डेंटल लैब्स आधुनिक मशीनों पर क्लीनिकल ट्रेनिंग मजबूत प्लेसमेंट और इंटर्नशिप नेटवर्क अनुमानित वार्षिक फीस: ₹7 लाख से ₹9 लाख 2. मीनाक्षी अम्माल डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल चेन्नई का यह प्रतिष्ठित संस्थान अपने विशाल OPD और प्रैक्टिकल एक्सपोजर के लिए प्रसिद्ध है। यहां छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही बड़ी संख्या में मरीजों के विभिन्न डेंटल केस देखने और संभालने का अवसर मिलता है। खासियत प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज मजबूत क्लीनिकल ट्रेनिंग अनुभवी फैकल्टी अनुमानित वार्षिक फीस: ₹5 लाख से ₹6 लाख 3. SRM डेंटल कॉलेज, रामापुरम SRM ग्रुप अपने प्रीमियम एजुकेशन सिस्टम के लिए जाना जाता है। रामापुरम स्थित इसका डेंटल कॉलेज आधुनिक सुविधाओं और शानदार कैंपस लाइफ के कारण छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय है। खासियत डिजिटल डेंटिस्ट्री पर विशेष फोकस कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री की आधुनिक ट्रेनिंग मजबूत प्लेसमेंट रिकॉर्ड अनुमानित वार्षिक फीस: ₹6 लाख से ₹7 लाख 4. श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च (SRIHER) एक बड़े मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल से जुड़े होने के कारण यहां BDS छात्रों को विभिन्न मेडिकल विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ काम करने का अवसर मिलता है। खासियत उत्कृष्ट हॉस्पिटल अटैचमेंट बेहतर इंटर्नशिप सुविधाएं इंटर-डिसिप्लिनरी मेडिकल एक्सपोजर अनुमानित वार्षिक फीस: ₹8 लाख से ₹9 लाख 5. सत्यभामा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डेंटल विंग) अगर आप आधुनिक सुविधाओं के साथ अपेक्षाकृत किफायती कॉलेज की तलाश कर रहे हैं, तो सत्यभामा एक अच्छा विकल्प हो सकता है। खासियत डिजिटल डेंटिस्ट्री पर जोर करियर ओरिएंटेड ट्रेनिंग प्रैक्टिकल असेसमेंट पर विशेष ध्यान अनुमानित वार्षिक फीस: ₹4 लाख से ₹5 लाख इन कॉलेजों में एडमिशन कैसे मिलता है? चेन्नई के इन सभी प्रमुख डेंटल कॉलेजों में प्रवेश का आधार NEET UG परीक्षा है। काउंसलिंग प्रक्रिया NEET UG में क्वालिफाई करने के बाद उम्मीदवारों को मेडिकल काउंसलिंग कमिटी (MCC) की वेबसाइट के माध्यम से काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेना होता है। डीम्ड यूनिवर्सिटी और ऑल इंडिया कोटा की सीटें इसी प्रक्रिया के तहत आवंटित की जाती हैं। कटऑफ सविता इंस्टीट्यूट और श्री रामचंद्र जैसे प्रतिष्ठित कॉलेजों में एडमिशन के लिए अच्छा NEET स्कोर जरूरी होता है, क्योंकि इन संस्थानों की सीटें जल्दी भर जाती हैं। क्यों है चेन्नई BDS छात्रों के लिए खास? बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर, उच्च स्तरीय क्लीनिकल ट्रेनिंग और मजबूत इंटर्नशिप सुविधाओं के कारण चेन्नई आज देश के सबसे पसंदीदा मेडिकल एजुकेशन डेस्टिनेशन में शामिल हो चुका है। अगर आप डेंटिस्ट्री में लंबा और सफल करियर बनाना चाहते हैं, तो ये कॉलेज आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं।
नई दिल्ली: सोशल मीडिया से शुरू हुई पहल अब सड़क पर उतर चुकी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जिसमें परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके सुबह दिल्ली पहुंचे और प्रदर्शन में शामिल हुए। जंतर-मंतर पहुंचने के दौरान उनके हाथ में डॉ. भीमराव अंबेडकर की जीवनी भी देखी गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में विभिन्न परीक्षाओं और मूल्यांकन प्रक्रियाओं में सामने आए विवादों ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। NEET और CBSE मूल्यांकन विवाद बना प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा प्रदर्शनकारियों ने NEET-UG पेपर लीक मामले और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से जुड़े विवादों को प्रमुख मुद्दा बताया है। उनका आरोप है कि इन घटनाओं ने लाखों छात्रों और अभ्यर्थियों को प्रभावित किया है। इसी को लेकर शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री से इस्तीफा देने की मांग की जा रही है। सोनम वांगचुक भी होंगे आंदोलन में शामिल लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk ने भी इस प्रदर्शन को समर्थन दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पहले ही घोषणा की थी कि वह दिल्ली पहुंचकर आंदोलन में शामिल होंगे। वांगचुक का कहना है कि यदि शिक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आती हैं, तो जिम्मेदार पदाधिकारियों को जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए। क्या है कॉकरोच जनता पार्टी? कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत सोशल मीडिया पर हुई थी। यह नाम उस टिप्पणी के बाद चर्चा में आया था, जिसमें अदालत की एक सुनवाई के दौरान कुछ लोगों की तुलना "कॉकरोच" से की गई थी। इसके बाद अभिजीत दिपके ने इस नाम से एक सोशल मीडिया अभियान शुरू किया, जो धीरे-धीरे युवाओं और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों के बीच लोकप्रिय हो गया। अब यह अभियान ऑनलाइन दायरे से निकलकर जमीनी विरोध प्रदर्शन का रूप ले चुका है। कौन हैं अभिजीत दिपके? Abhijeet Dipke महाराष्ट्र के रहने वाले हैं और पत्रकारिता की पढ़ाई कर चुके हैं। उन्होंने आगे की शिक्षा के लिए अमेरिका का रुख किया और Boston University से पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर डिग्री प्राप्त की। दिपके इससे पहले चुनावी और सोशल मीडिया अभियानों से भी जुड़े रहे हैं। अब वह शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। जंतर-मंतर पर जारी रहेगा विरोध आयोजकों के अनुसार, प्रदर्शन का उद्देश्य केवल एक मंत्री के इस्तीफे की मांग करना नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। आंदोलन में देश के विभिन्न राज्यों से छात्र, अभ्यर्थी और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने केंद्र सरकार से पिछले आठ वर्षों में NTA द्वारा आयोजित परीक्षाओं में हुई पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों पर एक विस्तृत श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में कहा कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि छात्रों के बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि पिछले पेपर लीक मामलों की जांच किस प्रकार हुई और उसके परिणाम क्या रहे। जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न होने के कारण छात्रों में असमंजस और अविश्वास का माहौल बना हुआ है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई सार्वजनिक करने की मांग संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष ने कहा कि फिलहाल पेपर लीक मामलों में सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई का कोई समेकित सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार एक श्वेत पत्र जारी करे, जिसमें प्रत्येक मामले का विवरण, गिरफ्तार आरोपियों के नाम, आरोपपत्र या क्लोजर रिपोर्ट की स्थिति और मुकदमों की वर्तमान प्रगति का उल्लेख हो। 2024 के मामलों का भी किया जिक्र दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में 2024 के नीट-यूजी पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्य आरोपी संजीव कुमार उर्फ मुखिया के जमानत पर होने और कुछ मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने को लेकर छात्रों के बीच सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों में स्पष्ट जानकारी न मिलने से अफवाहों को बढ़ावा मिल रहा है। 21 जून को होगी पुनर्परीक्षा गौरतलब है कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा, जो 3 मई को आयोजित होनी थी, पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को रद्द कर दी गई थी। मामले की जांच सीबीआई कर रही है और परीक्षा की पुनर्परीक्षा 21 जून को प्रस्तावित है। दिग्विजय सिंह का मानना है कि पारदर्शिता बढ़ाने से छात्रों का परीक्षा व्यवस्था और सरकारी संस्थानों पर विश्वास दोबारा मजबूत हो सकेगा।
NEET-UG paper leak controversy मामले के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की मांग तेज हो गई है। People's Health Organization India (PHO) ने कहा है कि NEET परीक्षा में अब इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE की तरह मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। संगठन का कहना है कि लगातार सामने आ रहे विवादों और पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा कमजोर कर दिया है। PHO ने मेडिकल परीक्षा प्रक्रिया में तत्काल ढांचागत सुधार की मांग की है। “स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ेगा असर” पीएचओ ने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो इसका असर भविष्य में देश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। हर साल करीब 22 लाख छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शामिल होते हैं, जबकि देश के 824 मेडिकल कॉलेजों में लगभग 1.3 लाख सीटें ही उपलब्ध हैं। ऐसे में प्रतियोगिता बेहद कठिन हो चुकी है। मेडिकल शिक्षा के व्यवसायीकरण पर चिंता पीएचओ के संस्थापक Ishwar Gilada ने कहा कि देश में उपलब्ध मेडिकल सीटों में आधे से ज्यादा निजी संस्थानों में हैं, जहां फीस 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि असली समस्या मेडिकल शिक्षा का तेजी से बढ़ता व्यवसायीकरण है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या अभी भी मांग के मुकाबले काफी कम है, जिसके कारण छात्रों और अभिभावकों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ता है। JEE जैसी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग संगठन ने सुझाव दिया कि NEET परीक्षा में भी JEE की तरह डिजिटल निगरानी, सुरक्षित प्रश्नपत्र वितरण, परीक्षा केंद्रों पर कड़ी जांच और तकनीकी सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके। पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल एडमिशन को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है, जिससे हजारों NEET अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी। कोर्ट ने साफ किया है कि धोखाधड़ी (फ्रॉड) के कारण खाली हुई MBBS सीट अब खाली नहीं छोड़ी जाएगी, बल्कि उसे मेरिट के आधार पर अगले योग्य उम्मीदवार को दिया जाएगा। क्या था मामला? मामला NEET UG 2022 से जुड़ा है एक छात्र ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए MBBS में एडमिशन ले लिया जांच में फ्रॉड सामने आने पर उसका एडमिशन रद्द कर दिया गया इससे एक सीट खाली हो गई, लेकिन मेरिट में अगले छात्र को समय पर सीट नहीं मिली सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा- MBBS सीट एक राष्ट्रीय संसाधन (National Resource) है इसे खाली छोड़ना गलत है फ्रॉड से खाली हुई सीट तुरंत अगले योग्य कैंडिडेट को दी जानी चाहिए कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासनिक देरी या लापरवाही के कारण सीट खाली रखना पूरी प्रक्रिया के खिलाफ है। NMC को झटका नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) ने इस फैसले को चुनौती दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने NMC की अपील खारिज कर दी और छात्र के एडमिशन को बरकरार रखा छात्रों के लिए क्या बदलेगा? अब किसी भी फ्रॉड से आपका हक नहीं छीना जाएगा मेरिट लिस्ट में आगे आने वाले छात्रों को सीधा फायदा मिलेगा एडमिशन प्रक्रिया बनेगी ज्यादा फेयर और ट्रांसपेरेंट
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।