Nepal

Nepal approves new one rupee coin design without disputed political map
नेपाल का बदला रुख! एक रुपये के सिक्के से हटेगा विवादित नक्शा, भारत-नेपाल संबंधों में नरमी के संकेत

भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के बीच नेपाल सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने नए डिजाइन वाले एक रुपये और दो रुपये के सिक्कों को मंजूरी दे दी है। नए डिजाइन के तहत एक रुपये के सिक्के से विवादित राजनीतिक नक्शा हटाया जाएगा, जिसमें लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। इसे भारत-नेपाल संबंधों में सकारात्मक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। कैबिनेट ने दी नए सिक्कों को मंजूरी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को नेपाल की मंत्रिपरिषद ने नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके तहत एक रुपये और दो रुपये के सिक्कों का नया डिजाइन तैयार किया जाएगा। नए एक रुपये के सिक्के पर अब विवादित नक्शे की जगह मुस्तांग जिले के मारंग गांव स्थित ऐतिहासिक 'लो ध्याकर मठ' की तस्वीर होगी, जिसे नेपाल के सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में गिना जाता है। 2020 में शामिल किया गया था विवादित नक्शा मई 2020 में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार ने नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था, जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। भारत ने उस समय इस कदम का कड़ा विरोध किया था और इन क्षेत्रों को अपना अभिन्न हिस्सा बताया था। दो रुपये के सिक्के पर रहेगा नक्शा कैबिनेट सूत्रों के अनुसार, दो रुपये के सिक्के पर फिलहाल पहले से मौजूद नक्शा बना रहेगा। इसके दूसरी ओर जनकपुर स्थित जानकी मंदिर की तस्वीर होगी। फैसले का नेपाल में विरोध नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता भीम रावल ने सरकार के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने इसे देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बताया और सरकार से इस फैसले पर स्पष्टीकरण मांगा। रावल का कहना है कि यदि सरकार ने वास्तव में एक रुपये के सिक्के से विवादित नक्शा हटाने का फैसला किया है, तो यह राष्ट्रीय हितों के खिलाफ कदम माना जाएगा। नए सिक्कों में होंगे ये बदलाव नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने बताया कि सिक्कों का आकार और वजन कम करने के लिए नया डिजाइन तैयार किया गया है। नए सिक्कों की खास बातें: एक रुपये के सिक्के से विवादित नक्शा हटेगा। सिक्के पर लो ध्याकर मठ की तस्वीर होगी। दो रुपये के सिक्के पर पहले वाला नक्शा और दूसरी तरफ जानकी मंदिर की तस्वीर रहेगी। एक रुपये के सिक्के का वजन 4 ग्राम से घटाकर 3.2 ग्राम किया जाएगा। दो रुपये के सिक्के का वजन 5 ग्राम से घटाकर 3.8 ग्राम होगा। नए सिक्के मिश्रित धातु की बजाय स्टील से बनाए जाएंगे और उनका रंग पीले की जगह सफेद (स्टील जैसा) होगा। भारत-नेपाल रिश्तों के लिए सकारात्मक संकेत विशेषज्ञों का मानना है कि एक रुपये के सिक्के से विवादित नक्शा हटाने का फैसला भारत और नेपाल के बीच संबंधों में आई नरमी का संकेत हो सकता है। हालांकि, सीमा विवाद पर दोनों देशों का आधिकारिक रुख अब भी बरकरार है, लेकिन इस कदम को द्विपक्षीय रिश्तों में विश्वास बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
A fuel station in Nepal displays E10 ethanol-blended petrol as the government prepares to introduce ethanol-mixed fuel under new quality and production standards.
भारत में E20 के बाद अब नेपाल में E10 पेट्रोल की तैयारी, सरकार ने जारी किया नया ड्राफ्ट

काठमांडू: भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (E20) को बढ़ावा दिए जाने के बाद अब नेपाल भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। नेपाल सरकार ने पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E10) लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए नेपाल ब्यूरो ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड मेट्रोलॉजी (NBSM) ने नया ड्राफ्ट स्टैंडर्ड जारी किया है, जिसमें इथेनॉल के उत्पादन, गुणवत्ता, भंडारण, बिक्री और मूल्य निर्धारण से जुड़े विस्तृत नियम तय किए गए हैं। सरकार का कहना है कि कैबिनेट आवश्यकता के अनुसार भविष्य में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने या घटाने का फैसला भी कर सकेगी। E10 पेट्रोल के लिए तैयार किए गए नए नियम नेपाली अखबार द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ड्राफ्ट स्टैंडर्ड में इथेनॉल उत्पादन के स्रोत और तकनीकों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इसके साथ ही स्टोरेज, लेबलिंग और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ड्राफ्ट के अनुसार: इथेनॉल को केवल सुरक्षित, सूखे और लीक-प्रूफ टैंक या ड्रम में रखा जाएगा। हर कंटेनर पर निर्माता का नाम, बैच नंबर, मात्रा और उत्पादन तकनीक का उल्लेख करना अनिवार्य होगा। इथेनॉल पूरी तरह साफ और पारदर्शी होना चाहिए तथा उसमें कोई ठोस कण नहीं होना चाहिए। पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की शुद्धता कम से कम 99.5 प्रतिशत होनी चाहिए। इन रसायनों के इस्तेमाल पर रोक नेपाल सरकार ने मेथनॉल, तारपीन, कीटोन और टार जैसे रसायनों को डीनेचुरेंट के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का मानना है कि ऐसे रसायन वाहनों के इंजन, रबर पाइप और फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्थानीय उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा यह पहल नेपाल सरकार के 5 जनवरी 2026 के कैबिनेट फैसले के बाद शुरू की गई है। इसके तहत "इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपयोग आदेश-2026"को मंजूरी दी गई थी, जो 12 मार्च 2026 को नेपाल गजट में प्रकाशित होने के बाद प्रभावी हो गया। सरकार का उद्देश्य है कि देश में उपलब्ध संसाधनों से इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाया जाए, रोजगार के अवसर पैदा हों और आयातित पेट्रोल पर निर्भरता कम की जा सके। खाद्यान्न की कमी न हो, इसलिए लगाया प्रतिबंध नेपाल सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इथेनॉल उत्पादन के कारण खाद्यान्न संकट पैदा नहीं होना चाहिए। इसलिए खाने योग्य अनाज का उपयोग इथेनॉल बनाने में नहीं किया जाएगा। ड्राफ्ट के अनुसार इथेनॉल उत्पादन के लिए इन कच्चे माल का उपयोग किया जाएगा: चीनी मिलों से निकलने वाला शीरा (मोलासेस) नेपियर घास कृषि एवं वन अपशिष्ट धान का पुआल मक्के के डंठल गेहूं की भूसी खाने योग्य नहीं रहने वाला खराब अनाज कसावा यीस्ट और अन्य आवश्यक रसायन पर्यावरण अनुकूल उत्पादन पर जोर सरकार ने निर्देश दिया है कि इथेनॉल का उत्पादन पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों से किया जाएगा। तैयार इथेनॉल केवल नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) को ही बेचा जा सकेगा। इथेनॉल की कीमत हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले सरकार की सिफारिश समिति तय करेगी। नई दर लागू होने तक पुरानी कीमतें प्रभावी रहेंगी। संशोधित कीमतें हर वर्ष जुलाई के मध्य से लागू की जाएंगी। भारत की तरह स्वच्छ ईंधन की दिशा में कदम विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल का E10 कार्यक्रम भारत की इथेनॉल मिश्रण नीति की तर्ज पर स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने, स्थानीय कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Young protesters gather in Kathmandu demanding accountability, employment opportunities and an independent investigation after the death of a ride-share driver.
नेपाल में फिर भड़का Gen Z आंदोलन, बेरोजगारी और पुलिस कार्रवाई के विरोध में सड़कों पर उतरे युवा

काठमांडू: नेपाल में एक बार फिर जेन-जी (Gen Z) युवाओं के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। राजधानी काठमांडू समेत कई इलाकों में युवा बेरोजगारी, पुलिस कार्रवाई, कथित प्रशासनिक ज्यादती और सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू के मेयर बालेन शाह के इस्तीफे की मांग भी तेज कर दी है। यह आंदोलन एक राइड-शेयर चालक की मौत के बाद और उग्र हो गया है। युवाओं का कहना है कि सरकार रोजगार, सुशासन और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर विफल रही है। राइड-शेयर चालक की मौत के बाद भड़का आंदोलन जानकारी के अनुसार, 25 वर्षीय राइड-शेयर चालक गणेश नेपाली ने नगर निगम पुलिस के साथ कथित विवाद के बाद खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली थी। गंभीर रूप से झुलसे गणेश की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई और लगातार प्रशासनिक दबाव के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। घटना के बाद युवाओं में भारी नाराजगी फैल गई और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू हो गए। झुग्गी हटाने की कार्रवाई पर भी नाराजगी विरोध प्रदर्शन का एक बड़ा कारण काठमांडू में चलाया जा रहा अतिक्रमण हटाओ अभियान भी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के नदी किनारे बनी झुग्गी बस्तियों को हटाया, जिससे हजारों परिवार बेघर हो गए। युवाओं का कहना है कि गरीबों के पुनर्वास के बिना की गई कार्रवाई मानवीय दृष्टि से गलत है और सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। पुलिस पर बल प्रयोग के आरोप प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज, बल प्रयोग और हिरासत में दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। विभिन्न छात्र और युवा संगठनों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तथा पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है। राजधानी के कई हिस्सों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने में जुटी हुई है। बालेन शाह पर बढ़ा दबाव काठमांडू के मेयर बालेन शाह को पिछले वर्षों में युवाओं का व्यापक समर्थन मिला था, लेकिन अब वही युवा उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन जनता की समस्याओं का समाधान करने में असफल रहा है और युवाओं की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। युवाओं ने मेयर बालेन शाह से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है। रोजगार और पारदर्शिता की मांग राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल के युवा रोजगार, पारदर्शी शासन और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि, इन मुद्दों पर अपेक्षित प्रगति नहीं होने से असंतोष लगातार बढ़ता गया। सरकार ने आत्मदाह की घटना की जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि केवल जांच नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Bihar Flood
नेपाल में भारी बारिश का असर, बिहार में बढ़ा बाढ़ का खतरा

पटना, एजेंसियां। नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब बिहार में भी दिखाई देने लगा है। सीमावर्ती क्षेत्रों से होकर बहने वाली गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। हालांकि फिलहाल नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही है, लेकिन जल प्रवाह में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है।   बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, नेपाल में बारिश के कारण वाल्मीकीनगर बराज पर पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी के मद्देनजर शुक्रवार को चरणबद्ध तरीके से पानी का डिस्चार्ज बढ़ाया गया। सुबह लगभग 79,900 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसके बाद सुबह 10 बजे यह बढ़कर करीब 86,000 क्यूसेक और दोपहर 12 बजे तक 90,600 क्यूसेक पहुंच गया। बढ़ते डिस्चार्ज का सीधा असर गंडक नदी के जलस्तर पर देखा जा रहा है।   प्रशासन ने नदी के किनारे बसे गांवों और तटीय क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी है। स्थानीय अधिकारियों और इंजीनियरों को चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर रखने तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में बाढ़ सुरक्षा तटबंधों और जल प्रवाह की लगातार निगरानी की जा रही है।   अधिकारियों का कहना अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल बाढ़ जैसी स्थिति नहीं बनी है और हालात नियंत्रण में हैं। हालांकि यदि नेपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहा और वाल्मीकीनगर बराज से पानी छोड़ने की मात्रा और बढ़ी, तो गंडक नदी का जलस्तर तेजी से खतरे के निशान के करीब पहुंच सकता है।   प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। साथ ही स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना देने को कहा गया है। सरकार का कहना है कि संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से कर ली गई हैं।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Bihar Flood
पटना में गंगा के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन अलर्ट, तटवर्ती इलाकों की निगरानी तेज; बाढ़ से निपटने की तैयारियां शुरू

पटना, एजेंसियां। बिहार में मानसून के सक्रिय होने और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के बीच गंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसे देखते हुए पटना जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने तटवर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। संवेदनशील घाटों और निचले क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है, जबकि बाढ़ से निपटने के लिए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।   बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बढ़ाई निगरानी   जल संसाधन विभाग के केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष की ओर से गंगा समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। अधिकारियों को तटबंधों की नियमित निगरानी, संभावित कटाव वाले स्थानों का निरीक्षण और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।   निचले इलाकों पर प्रशासन की विशेष नजर   पटना के नदी किनारे बसे इलाकों और घाटों पर प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। स्थानीय अधिकारियों को लोगों को समय-समय पर स्थिति से अवगत कराने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। राहत एवं बचाव दलों को भी अलर्ट मोड में रखा गया है।   नेपाल की बारिश का बिहार पर असर   नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण गंगा की सहायक नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रही तो बिहार की कई नदियों में जलस्तर और बढ़ सकता है, इसलिए प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।   लोगों से सतर्क रहने की अपील   प्रशासन ने गंगा किनारे रहने वाले लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है। साथ ही नदी में अनावश्यक रूप से प्रवेश न करने तथा जलस्तर बढ़ने की स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Eastern UP Flood
नेपाल की बारिश से यूपी में बाढ़ का खतरा! राप्ती-घाघरा का जलस्तर बढ़ने की आशंका, प्रशासन अलर्ट

लखनऊ, एजेंसियां। नेपाल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ने लगा है। नेपाल से आने वाली नदियों में जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने कई जिलों में निगरानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने भी मानसून के सक्रिय रहने की संभावना जताई है।   इन जिलों पर प्रशासन की विशेष नजर   महराजगंज, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, कुशीनगर और गोरखपुर जैसे जिलों में जिला प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। राप्ती, घाघरा और अन्य नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।   बाढ़ से निपटने की तैयारी तेज   राज्य सरकार ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव दलों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय प्रशासन नावों, राहत शिविरों और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।   अगले कुछ दिन अहम   मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश जारी रहती है तो पूर्वी उत्तर प्रदेश की कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों से प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने तथा अफवाहों से बचने की अपील की गई है।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Bihar Flood
नेपाल की बारिश बनी बिहार के लिए खतरा! कोसी-गंडक उफान पर, कई जिलों में बढ़ा बाढ़ का अलर्ट

पटना, एजेंसियां। नेपाल के तराई और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब बिहार में भी दिखाई देने लगा है। नेपाल से निकलने वाली कोसी, गंडक, बागमती, कमला और बूढ़ी गंडक जैसी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसे देखते हुए बिहार सरकार और जल संसाधन विभाग ने उत्तर बिहार के कई जिलों में निगरानी बढ़ा दी है।   सीमावर्ती जिलों में बढ़ाई गई सतर्कता   सुपौल, अररिया, मधुबनी, सीतामढ़ी, किशनगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा और मुजफ्फरपुर जैसे जिलों में प्रशासन को विशेष सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ नियंत्रण विभाग लगातार नदियों के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है।   राहत एवं बचाव दल तैयार   संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए Nepal, NDRF और जिला प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवेदनशील इलाकों में नाव, राहत सामग्री और आवश्यक उपकरण पहले से उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।   लोगों से सतर्क रहने की अपील   प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से अनावश्यक रूप से नदी के पास नहीं जाने और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि नेपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहा तो अगले कुछ दिनों में नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Nepal Flood
नेपाल में मूसलाधार बारिश से बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ा, कई जिलों में हाई अलर्ट

काठमांडू, एजेंसियां। नेपाल में मानसून की सक्रियता के चलते लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग ने कई जिलों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड), भूस्खलन और नदियों के जलस्तर बढ़ने की चेतावनी जारी की है। अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।   कई जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा   मौसम विभाग के अनुसार, इलाम, झापा, पंचथर, धनकुटा, मोरंग, सुनसरी, सप्तरी, डडेलधुरा और डोटी सहित कई जिलों में छोटी नदियों और पहाड़ी जलधाराओं का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताई गई है।   पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का बढ़ा खतरा   लगातार बारिश के कारण नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। कई सड़कों पर आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है, जबकि कुछ स्थानों पर सड़क संपर्क बाधित होने की भी सूचना है। प्रशासन ने स्थानीय निकायों और राहत एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।   प्रशासन ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील   नेपाल सरकार ने नदी किनारे रहने वाले लोगों, पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों और यात्रियों से मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखने की अपील की है। लोगों को खराब मौसम के दौरान नदी-नालों को पार न करने और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।   मानसून अभी और रहेगा सक्रिय   नेपाल के मौसम विभाग का कहना है कि देशभर में मानसून सक्रिय बना हुआ है और आने वाले दिनों में भी कई इलाकों में भारी बारिश जारी रह सकती है। ऐसे में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की घटनाओं का खतरा बना रहेगा।   भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ सकता है असर   विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश का असर भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी देखने को मिल सकता है। नेपाल से निकलने वाली नदियों के जलस्तर में वृद्धि होने पर निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए संबंधित एजेंसियां भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Sanjay Kumar Jha
प्रिंस यादव की मौत पर बोले संजय झा, 'हम भी कोचिंग गए, बम-बारूद कभी नहीं देखा'

पटना, एजेंसियां। ज्ञान बिंदु कोचिंग के संस्थापक रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत पर जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मंगलवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि यह बेहद दुखद घटना है और मामले की निष्पक्ष जांच के बाद सच्चाई सामने आनी चाहिए।   संजय झा ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रिंस यादव एक सक्षम कोचिंग संस्थान से जुड़े थे। चूंकि घटना नेपाल में हुई है, इसलिए संबंधित एजेंसियां और बिहार सरकार भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि हर कोई चाहता है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले और घटना की वास्तविकता सामने आए।   कोचिंग संस्थानों के माहौल पर उठाए सवाल संजय झा ने हाल के दिनों में कोचिंग संस्थानों से जुड़े हिंसक घटनाक्रम पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "हम लोग भी पढ़ाई के दौरान कोचिंग जाते थे, लेकिन उस समय कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि कोचिंग संस्थानों में गोली, बम या बारूद जैसी घटनाएं देखने को मिलेंगी। आज का माहौल चिंताजनक है।"   उन्होंने अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में शिक्षक का सम्मान सर्वोपरि माना जाता था। "हम सरकारी स्कूल में पढ़ते थे और अपने शिक्षकों का सम्मान परिवार के सदस्यों से भी अधिक करते थे। आज शिक्षा संस्थानों से जुड़ी ऐसी घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं," उन्होंने कहा।   जांच जारी, CBI जांच की भी उठी मांग गौरतलब है कि 2 जून को एक कोचिंग संस्थान के बाहर कथित मारपीट और फायरिंग की घटना भी सामने आई थी, जिसकी जांच जारी है। वहीं, प्रिंस यादव की मौत के मामले में विपक्ष की ओर से सीबीआई जांच की मांग भी उठाई गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

abhishek singh जून 16, 2026 0
Rudraksha beads from Nepal as rising global demand sparks concerns over chemical use.
नेपाली रुद्राक्ष कारोबार में बढ़ी रसायनों की भूमिका, विशेषज्ञों ने गुणवत्ता को लेकर जताई चिंता

  नेपाल के पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रों में उगने वाला रुद्राक्ष लंबे समय से धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक महत्व का प्रतीक माना जाता रहा है। भारत सहित कई देशों में इसकी बड़ी मांग है। हालांकि हाल के वर्षों में चीन से बढ़ती मांग ने रुद्राक्ष को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक उत्पाद में बदल दिया है। इसके साथ ही रुद्राक्ष उत्पादन में रसायनों के बढ़ते उपयोग को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। पारंपरिक खेती से वैश्विक कारोबार तक नेपाल के मकालू क्षेत्र सहित कई इलाकों में रुद्राक्ष की खेती दशकों से की जा रही है। स्थानीय किसान बताते हैं कि रुद्राक्ष उनके परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत रहा है। एलिएओकार्पस गैनिट्रस प्रजाति के पेड़ों से प्राप्त होने वाले ये बीज धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं। पहले रुद्राक्ष का प्रमुख बाजार भारत था, जहां इसे भगवान शिव से जुड़ी आस्था के कारण खरीदा जाता था। लेकिन पिछले एक दशक में चीन से मांग बढ़ने के बाद इसका व्यापार तेजी से विस्तारित हुआ है। चीन की मांग ने बदली बाजार की प्राथमिकताएं भारतीय खरीदार जहां रुद्राक्ष को मुख्य रूप से धार्मिक दृष्टिकोण से देखते हैं, वहीं चीन में इसकी मांग सजावटी वस्तु और आभूषण के रूप में बढ़ी है। इसके चलते बड़े आकार, आकर्षक बनावट और चमकदार स्वरूप वाले रुद्राक्षों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, बाजार की इसी मांग ने किसानों पर अधिक आकर्षक दिखने वाले रुद्राक्ष उत्पादन का दबाव बढ़ाया है। ग्रोथ रेगुलेटर के इस्तेमाल पर बढ़ी बहस कई किसानों का कहना है कि बेहतर आकार और आकर्षक स्वरूप पाने के लिए कुछ स्थानों पर प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर (PGR) जैसे रसायनों का उपयोग किया जा रहा है। इनका प्रयोग पेड़ों के विकास और फल के आकार को प्रभावित करने के उद्देश्य से किया जाता है। किसानों का एक वर्ग मानता है कि यह बाजार की मजबूरी बन गई है, जबकि अन्य लोग इसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। पेड़ों और गुणवत्ता पर असर की आशंका कृषि विशेषज्ञों और स्थानीय किसानों का कहना है कि लंबे समय तक अत्यधिक रासायनिक उपयोग से पेड़ों की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है। कुछ किसानों ने दावा किया है कि लगातार रसायनों के इस्तेमाल से पेड़ों की सेहत कमजोर होने और बीजों की प्राकृतिक संरचना में बदलाव जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। इन दावों पर व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता बताई जा रही है। सरकारी मंजूरी और निगरानी पर सवाल रिपोर्टों के अनुसार, रुद्राक्ष उत्पादन में उपयोग किए जा रहे कुछ विशेष ग्रोथ रेगुलेटरों को लेकर नियामक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इसी वजह से इनके उपयोग, मात्रा और संभावित प्रभावों पर बहस जारी है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कृषि क्षेत्र में ग्रोथ रेगुलेटर का उपयोग असामान्य नहीं है, लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है जब इनका अत्यधिक या अनुचित मात्रा में प्रयोग किया जाता है। क्या उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य संबंधी चिंता करनी चाहिए? वर्तमान में ऐसी कोई व्यापक वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है कि रुद्राक्ष पर उपयोग किए गए ग्रोथ रेगुलेटर सीधे तौर पर त्वचा रोग या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा करते हैं। फिर भी विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि उपभोक्ता विश्वसनीय स्रोतों से रुद्राक्ष खरीदें और उपयोग से पहले उसे अच्छी तरह साफ करें। यदि किसी व्यक्ति को त्वचा संबंधी संवेदनशीलता या एलर्जी की समस्या है, तो रुद्राक्ष धारण करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित हो सकता है। आस्था, व्यापार और संरक्षण के बीच संतुलन की चुनौती नेपाल में रुद्राक्ष आज केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के निर्यात उद्योग का हिस्सा बन चुका है। बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग किसानों के लिए आय के नए अवसर लेकर आई है, लेकिन इसके साथ प्राकृतिक गुणवत्ता, पारंपरिक खेती और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने की चुनौती भी सामने खड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुणवत्ता नियंत्रण, वैज्ञानिक निगरानी और टिकाऊ खेती के उपायों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अल्पकालिक लाभ की दौड़ इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक विरासत को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकती है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Japan Mango
जापान के बाद नेपाल ने भी भारतीय आम पर रोक लगाई, ज्यादा कीटनाशक मिलने का दावा

काठमांडू, एजेंसियां। जापान के बाद अब नेपाल ने भारत से आम मंगाने पर रोक लगा दी है। नेपाल के अधिकारियों का कहना है कि जांच में कुछ खेपों में तय सीमा से ज्यादा कीटनाशक मिले। नेपाल सरकार के मुताबिक, यह फैसला खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन कराने के लिए लिया गया है। सरकार ने साफ किया कि इसका मकसद भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को प्रभावित करना नहीं है। रोक लगने से पहले करीब 15.8 मीट्रिक टन भारतीय आम नेपाल पहुंच चुके थे। इनकी कीमत लगभग 10 लाख नेपाली रुपये बताई गई है। जापान ने सफाई कारणों से लगाई रोक यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पिछले महीने जापान ने भी भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाई थी। हालांकि जापान ने यह कदम कीटनाशकों की वजह से नहीं, बल्कि जांच और सफाई से जुड़े नियमों में कमी मिलने पर उठाया था। जापान के फैसले से अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी भारतीय आम की मशहूर किस्मों का निर्यात प्रभावित हुआ था। करीब 20 साल में पहली बार जापान ने भारतीय आमों पर ऐसी रोक लगाई थी।

Unknown जून 9, 2026 0
Nepalese Gorkha soldiers parade during launch of Britain's new King's Gurkha Artillery regiment.
गोरखा भर्ती पर भारत-नेपाल गतिरोध के बीच ब्रिटेन ने बनाई नई सैन्य यूनिट, अगले 3 वर्षों में होंगे 400 सैनिक शामिल

  भारत और नेपाल के बीच गोरखा सैनिकों की भर्ती को लेकर जारी गतिरोध के बीच ब्रिटेन ने नेपाली गोरखाओं के लिए एक नई सैन्य यूनिट का गठन किया है। ब्रिटिश सेना ने ‘किंग्स गोरखा आर्टिलरी’ नामक नई रेजिमेंट की शुरुआत की है, जिसमें आने वाले तीन वर्षों के दौरान सैकड़ों नेपाली युवाओं की भर्ती की जाएगी। ब्रिटिश सेना में बनी नई गोरखा आर्टिलरी यूनिट ब्रिटिश सेना की रॉयल आर्टिलरी शाखा के अंतर्गत गठित ‘किंग्स गोरखा आर्टिलरी’ को आधुनिक युद्ध प्रणालियों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। ब्रिटिश सरकार के अनुसार, वर्ष 2029 तक इस यूनिट में 500 से अधिक सैनिक शामिल हो सकते हैं, जबकि शुरुआती चरण में लगभग 400 सैनिकों की भर्ती की जाएगी। यह यूनिट अप्रैल 2025 में स्थापित की गई थी और हाल ही में इसकी पहली औपचारिक सैन्य परेड आयोजित की गई। आधुनिक हथियार प्रणालियों पर मिलेगा प्रशिक्षण नई यूनिट के सैनिकों को ब्रिटिश सेना की उन्नत आर्टिलरी प्रणालियों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें आर्चर सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी सिस्टम, लाइट गन और रिमोट-कंट्रोल्ड हॉवित्जर 155 सिस्टम जैसे आधुनिक हथियार शामिल हैं। ब्रिटिश सेना का कहना है कि यह यूनिट भविष्य के सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। किंग चार्ल्स ने नेपाली भाषा में किया अभिवादन नई रेजिमेंट के समारोह में ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय ने नेपाली भाषा में सैनिकों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा, “आजुर दिन राम्रो छ” अर्थात “आज का दिन अच्छा है।” ब्रिटिश शाही परिवार ने इसे ब्रिटिश सेना की पहली समर्पित गोरखा आर्टिलरी यूनिट और हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य पहलों में से एक बताया। भारत में क्यों रुकी हुई है गोरखा भर्ती? दूसरी ओर भारतीय सेना में नेपाली गोरखा सैनिकों की नई भर्ती पिछले कुछ वर्षों से बंद है। शुरुआत में कोविड-19 महामारी के कारण भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। बाद में भारत की अग्निपथ योजना को लेकर नेपाल ने आपत्ति जताई। नेपाल का कहना है कि चार वर्षीय अग्निवीर मॉडल उन पारंपरिक भर्ती शर्तों से अलग है, जिनके तहत नेपाली नागरिक दशकों से भारतीय सेना में भर्ती होते रहे हैं। अग्निपथ योजना बना मुख्य विवाद नेपाल सरकार ने अभी तक अग्निपथ योजना के तहत अपने नागरिकों की भर्ती को मंजूरी नहीं दी है। इसी वजह से भारत और नेपाल के बीच गोरखा भर्ती का मुद्दा लंबित है। दोनों देशों के बीच इस विषय पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है। दो शताब्दियों पुराना है गोरखाओं का सैन्य इतिहास गोरखा सैनिकों की बहादुरी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। उनका सैन्य इतिहास 19वीं सदी की शुरुआत से जुड़ा हुआ है, जब एंग्लो-नेपाल युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने गोरखा सैनिकों की भर्ती शुरू की थी। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद गोरखा रेजिमेंटों का विभाजन भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ। वर्तमान में भारतीय सेना और ब्रिटिश सेना दोनों में नेपाली मूल के गोरखा सैनिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भविष्य पर बनी हुई है अनिश्चितता विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत और नेपाल के बीच भर्ती संबंधी मुद्दों का समाधान जल्द नहीं निकलता, तो भारतीय सेना की गोरखा इकाइयों में नई भर्ती को लेकर चुनौतियां बढ़ सकती हैं। वहीं ब्रिटेन लगातार गोरखा सैनिकों की भूमिका का विस्तार कर रहा है और उन्हें आधुनिक सैन्य संरचना में अधिक महत्व दे रहा है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
Nepal government committee reviewing political leaders’ assets under anti-corruption investigation panel
नेपाल में भ्रष्टाचार पर सख्ती: पीएम बालेंद्र शाह ने संपत्ति जांच के लिए पैनल बनाया

नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ नई सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री Balendra Shah ने पूर्व और वर्तमान नेताओं व अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय पैनल गठित किया है। रिटायर्ड जज करेंगे पैनल की अगुवाई सरकार द्वारा बनाए गए इस पांच सदस्यीय पैनल की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज Rajendra Kumar Bhandari करेंगे। पैनल का मुख्य काम नेताओं और सरकारी अधिकारियों की संपत्तियों व परिसंपत्तियों की जांच करना होगा। निष्पक्ष जांच का दावा कैबिनेट प्रवक्ता Sasmit Pokharel ने बताया कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होगी और कानूनी मानकों ठोस सबूतों के आधार पर की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई सरकार ने स्पष्ट किया है कि पैनल अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें संबंधित एजेंसियों को सौंपेगा, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।  हालांकि, अभी तक जांच पूरी करने की समयसीमा तय नहीं की गई है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह का यह कदम नेपाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा माना जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच रिपोर्ट के बाद सरकार किस तरह की ठोस कार्रवाई करती है। 20.नेपाल में ‘सफेदपोश’ भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार: 2006 से अब तक नेताओं की संपत्ति की होगी न्यायिक जांच नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री Balendra Shah की सरकार ने एक व्यापक न्यायिक आयोग गठित किया है। यह आयोग 2006 में राजतंत्र समाप्त होने के बाद से लेकर वित्तीय वर्ष 2025-26 तक सार्वजनिक पदों पर रहे नेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की जांच करेगा। किन-किन पर होगी जांच? इस जांच के दायरे को बेहद व्यापक रखा गया है। इसमें शामिल हैं: पूर्व राजा Gyanendra Shah पूर्व राष्ट्रपति Ram Baran Yadav, Bidya Devi Bhandari वर्तमान राष्ट्रपति Ram Chandra Poudel पूर्व प्रधानमंत्री जैसे Pushpa Kamal Dahal, K. P. Sharma Oli, Sher Bahadur Deuba, Baburam Bhattarai, Madhav Kumar Nepal, Jhala Nath Khanal अंतरिम सरकारों के प्रमुख और वरिष्ठ नौकरशाह यहां तक कि दिवंगत नेताओं–जैसे गिरिजा प्रसाद कोइराला और सुशील कोइराला–की संपत्तियों की भी जांच की जाएगी, जिससे उनके परिवार और राजनीतिक उत्तराधिकारियों पर भी असर पड़ सकता है। अपने ही सहयोगी भी जांच के दायरे में सरकार ने इस आयोग को पूरी तरह स्वतंत्र और व्यापक बनाया है। वर्तमान स्पीकर और कुछ मौजूदा मंत्री यहां तक कि सत्तारूढ़ दल के नेता Rabi Lamichhane भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। कौन कर रहा है जांच की अगुवाई? इस पांच सदस्यीय आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज Rajendra Kumar Bhandari कर रहे हैं। कैबिनेट प्रवक्ता Sasmit Pokharel के अनुसार, जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी कानूनी मानकों और सबूतों के आधार पर की जाएगी युवा आंदोलन के बाद बड़ा फैसला यह कदम मार्च 2025 के चुनाव में भारी जीत के बाद उठाया गया है, जो देश में हुए बड़े युवा-नेतृत्व वाले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद संभव हुआ। नेपाल में यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक वर्ग की संपत्ति की जांच हो रही है। यह कदम देश में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है–अब नजर इस पर रहेगी कि आयोग की रिपोर्ट के बाद क्या ठोस कार्रवाई होती है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0