Nishikant Dubey

Dharmendra Pradhan Nishikant Dubey
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर निशिकांत दुबे का बयान, बोले- बच्चों को आंदोलन नहीं, पढ़ाई पर देना चाहिए ध्यान

देवघर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय बताया। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को आंदोलनों में शामिल करने के बजाय उनकी पढ़ाई पर ध्यान दें, ताकि वे भविष्य में आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बन सकें।   'शिक्षा से ही मिली पहचान'   निशिकांत दुबे ने कहा कि वह स्वयं गांव के एक स्कूल से पढ़कर देश के सांसद बने हैं और आज भी नियमित रूप से अध्ययन करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही व्यक्ति को आगे बढ़ाती है और युवाओं को अपना भविष्य बनाने पर ध्यान देना चाहिए।   धर्मेंद्र प्रधान के काम की सराहना   सांसद ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उनके अनुसार, उन्होंने किसी दबाव में इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि छात्रों के बीच बने भ्रम को दूर करने और उनकी भावनाओं का सम्मान करने के लिए यह फैसला लिया।   उन्होंने यह भी कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में नीट परीक्षा को पहले से अधिक पारदर्शी और बेहतर तरीके से आयोजित कराया गया। कभी-कभी अभिभावकों को भी बच्चों की भावनाओं के आगे झुकना पड़ता है और इसी भावना के तहत यह निर्णय लिया गया।   JPSC मामले में झारखंड सरकार पर हमला   निशिकांत दुबे ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े मामले में राज्य सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि धांधली के कारण आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते को हटाया गया, लेकिन अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।   दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग   पोड़ैयाहाट में डीएसओ की गिरफ्तारी और मामले में भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित संलिप्तता के सवाल पर उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने ऐसे दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
Nishikant Dubey
देवघर : निशिकांत दुबे की पहल रंग लाई, खत्म हुई सफाई कर्मचारियों की हड़ताल

देवघर। पिछले छह दिनों से ठप पड़ी देवघर नगर निगम की सफाई व्यवस्था अब जल्द ही पटरी पर लौटने वाली है। पीएफ (भविष्य निधि) के बकाया भुगतान की मांग को लेकर 11 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। सांसद निशिकांत दुबे की पहल, जिला प्रशासन और नगर निगम के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने काम पर लौटने का फैसला लिया। नगर निगम का दावा है कि अगले एक से दो दिनों में शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।   हड़ताल के दौरान बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर, प्रमुख सड़कों और बाजारों में कचरे का ढेर लग गया था। इससे स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सांसद निशिकांत दुबे ने सफाई कर्मचारियों के प्रतिनिधि संजय मंडल से बातचीत की और उनकी मांगों के समाधान का भरोसा दिलाया।   सफाई कर्मचारियों के नेता संजय मंडल ने बताया  सफाई कर्मचारियों के नेता संजय मंडल ने बताया कि जिला प्रशासन, सांसद, मेयर और डिप्टी मेयर ने पीएफ की बकाया राशि का जल्द भुगतान कराने का आश्वासन दिया है। इसी भरोसे के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म करने और तत्काल काम पर लौटने का निर्णय लिया।   सांसद निशिकांत दुबे ने कहा  सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि बार-बार होने वाली हड़ताल से शहर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाएं प्रभावित होती हैं। उन्होंने घोषणा की कि सफाई कर्मचारियों के कल्याण कोष के लिए उनकी ओर से हर वर्ष 25 लाख रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही ऐसी स्थायी व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे भविष्य में कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने की नौबत न आए।   नगर निगम के मेयर रवि राउत ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि शहर की स्वच्छता सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा जताया कि कर्मचारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ सफाई अभियान शुरू करेंगे और जल्द ही देवघर को फिर से स्वच्छ और व्यवस्थित बनाया जाएगा।

abhishek singh जून 16, 2026 0
Nishikant Dubey apologizing on social media for his controversial remarks on Biju Patnaik.
निशिकांत दुबे ने मांगी माफी, बोले- बीजू पटनायक महान नेता, बयान को गलत समझा गया

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक पर दिए अपने विवादित बयान को लेकर माफी मांग ली है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि उनके बयान से यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे बिना शर्त क्षमा चाहते हैं। दुबे ने लिखा कि “बीजू बाबू हमारे लिए हमेशा एक बड़े कद के स्टेट्समैन रहे हैं और रहेंगे”। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बयान उनकी निजी राय थी, जिसे गलत तरीके से समझा गया। क्या था विवाद? दरअसल, 27 मार्च को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि: 1962 के चीन युद्ध में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अमेरिका और CIA की मदद ली थी और बीजू पटनायक को अमेरिका, CIA और नेहरू के बीच कड़ी बताया था इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। अब क्या कहा दुबे ने? माफी मांगते हुए दुबे ने कहा: उनके बयान को गलत संदर्भ में जोड़ा गया नेहरू पर की गई टिप्पणी को बीजू पटनायक से जोड़ना सही नहीं है विपक्ष का कड़ा विरोध दुबे के बयान पर बीजू जनता दल (BJD) ने तीखी प्रतिक्रिया दी: राज्यसभा में BJD सांसदों ने विरोध करते हुए वॉकआउट किया सांसद सस्मित पात्रा ने इसे “पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत” बताया वहीं, ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी बयान की आलोचना करते हुए इसे आपत्तिजनक बताया। PM मोदी ने की बीजू पटनायक की सराहना विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्कल दिवस के मौके पर बीजू पटनायक को याद करते हुए उन्हें: देश निर्माण के लिए समर्पित नेता और साहस का प्रतीक बताया। कौन थे बीजू पटनायक? ओडिशा के दो बार मुख्यमंत्री (1961-63, 1990-95) स्वतंत्रता सेनानी और कुशल पायलट 1947 में इंडोनेशिया मिशन के लिए प्रसिद्ध द्वितीय विश्व युद्ध में भी अहम भूमिका

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Political leaders reacting to Nishikant Dubey’s controversial statement on Biju Patnaik sparking protests in Odisha
निशिकांत दुबे के बयान पर सियासी बवाल: बीजू पटनायक को लेकर टिप्पणी से ओडिशा में मचा घमासान

भुवनेश्वर, 31 मार्च 2026: ओडिशा की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। विवाद की वजह बना है Nishikant Dubey का एक बयान, जिसमें उन्होंने दिग्गज नेता Biju Patnaik को लेकर टिप्पणी की। इस बयान के बाद न सिर्फ विपक्ष, बल्कि उनकी अपनी पार्टी के नेताओं ने भी नाराजगी जताई है। क्या कहा था निशिकांत दुबे ने? बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि 1960 के दशक में चीन के साथ युद्ध के दौरान बीजू पटनायक, पूर्व प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru और अमेरिकी खुफिया एजेंसी के बीच एक कड़ी के रूप में काम कर रहे थे। इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और इसे बीजू पटनायक की छवि पर सवाल उठाने वाला माना गया। नवीन पटनायक का तीखा हमला बीजू पटनायक के बेटे और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री Naveen Patnaik ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणी न केवल अपमानजनक है, बल्कि तथ्यों से परे भी है। नवीन पटनायक ने यहां तक कह दिया कि ऐसा बयान देने वाले को “मानसिक जांच” की जरूरत है। सफाई में क्या बोले निशिकांत दुबे? विवाद बढ़ता देख निशिकांत दुबे ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इशारा बीजू पटनायक की ओर नहीं, बल्कि नेहरू-गांधी परिवार की ओर था। उन्होंने कहा कि बीजू पटनायक उनके लिए भी सम्माननीय हैं और उनके योगदान पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने ओडिशा की जनता से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक रूप न दिया जाए। बीजेपी ने बनाई दूरी इस विवाद के बाद बीजेपी के कई नेताओं ने भी दुबे के बयान से खुद को अलग कर लिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता Baijayant Panda ने बीजू पटनायक को महान देशभक्त बताते हुए कहा कि उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। बीजेडी का विरोध और प्रदर्शन Biju Janata Dal ने इस मुद्दे को लेकर विरोध तेज कर दिया है। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भुवनेश्वर में प्रदर्शन किया और निशिकांत दुबे से बिना शर्त माफी की मांग की। राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया गया, जिससे यह विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। क्यों बढ़ा विवाद? बीजू पटनायक ओडिशा ही नहीं, बल्कि देश के एक सम्मानित और प्रभावशाली नेता रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ किसी भी विवादित टिप्पणी को जनता और राजनीतिक दल गंभीरता से लेते हैं। यही वजह है कि यह मामला तेजी से तूल पकड़ गया और अब तक शांत नहीं हुआ है।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0