Nutrition advice

yogurt consumption
दही खाने का सही तरीका जानते हैं? एक छोटी गलती बिगाड़ सकती है सेहत

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के मौसम में दही को सबसे पौष्टिक और लाभकारी खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। यह न सिर्फ शरीर को ठंडक पहुंचाता है, बल्कि पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी नियमित रूप से दही को आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं। हालांकि, दही का पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही समय और सही तरीके से खाया जाए। गलत तरीके से सेवन करने पर यह फायदे की बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है।   पोषक तत्वों से भरपूर है दही दही में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन बी-12 और प्रोबायोटिक्स जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। प्रोबायोटिक्स आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं, जिससे पाचन बेहतर रहता है। इसके अलावा दही शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और गर्मी के प्रभाव को कम करने में मदद करता है। कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने में भी सहायक होती है।   दही खाने का सही तरीका विशेषज्ञों के अनुसार दही का सेवन दिन के समय, खासकर दोपहर के भोजन के साथ करना सबसे अच्छा माना जाता है। इससे पाचन तंत्र सक्रिय रहता है और दही के पोषक तत्वों का बेहतर लाभ मिलता है। दही हमेशा ताजा और अच्छी तरह जमा हुआ होना चाहिए। ताजे दही में भुना जीरा, काला नमक या थोड़ा सा पुदीना मिलाकर खाने से इसका स्वाद बढ़ता है और पाचन भी बेहतर होता है। गर्मियों में लस्सी, रायता या साधारण दही भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है।   इन गलतियों से बचना जरूरी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक मात्रा में दही खाना भी सही नहीं है। जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर कुछ लोगों को पेट भारी लगना, गैस या अन्य पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा बासी या खराब दही का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। लंबे समय तक रखा हुआ दही बैक्टीरिया संक्रमण का कारण बन सकता है। जिन लोगों को दूध या दही से एलर्जी है या कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।   संतुलित सेवन से मिलेगा अधिक लाभ गर्मी में दही स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसका सही समय, सही मात्रा और ताजा गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। संतुलित तरीके से सेवन करने पर दही शरीर को ठंडक, बेहतर पाचन और मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली जैसे कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकता है।

Unknown जून 3, 2026 0
Food safety tips to prevent food poisoning during summer including hygiene and proper storage practices
गर्मियों में फूड पॉइजनिंग से बचना है तो खाने को लंबे समय तक स्टोर करने से बचें, जानिए एक्सपर्ट्स की सलाह

गर्मियों के मौसम में पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। पेट दर्द, उल्टी, दस्त, कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसी शिकायतें इस मौसम में आम हो जाती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण फूड पॉइजनिंग है, जो दूषित भोजन और पानी के सेवन से होती है। गर्म मौसम बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्म जीवों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। यही वजह है कि गर्मियों में भोजन को सुरक्षित तरीके से स्टोर करना और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है। गर्मियों में क्यों बढ़ जाते हैं फूड पॉइजनिंग के मामले? विशेषज्ञों के अनुसार जब भोजन लंबे समय तक सामान्य तापमान पर रखा रहता है, तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ने लगते हैं। साल्मोनेला (Salmonella), ई.कोलाई (E. coli), नोरोवायरस और हेपेटाइटिस-ए जैसे संक्रमण पैदा करने वाले जीव भोजन और पानी को दूषित कर सकते हैं। ऐसा भोजन खाने के बाद व्यक्ति को उल्टी, दस्त, पेट में मरोड़, बुखार और कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। फूड पॉइजनिंग के प्रमुख कारण दूषित भोजन खराब या संक्रमित भोजन फूड पॉइजनिंग का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। भोजन में मौजूद बैक्टीरिया पेट में पहुंचकर संक्रमण पैदा कर सकते हैं। दूषित पानी गंदा या संक्रमित पानी भी कई प्रकार के बैक्टीरिया और वायरस शरीर में पहुंचाता है, जिससे पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। गलत तरीके से भोजन स्टोर करना अगर पका हुआ खाना लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा जाए या सही तरीके से रेफ्रिजरेट न किया जाए, तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से विकसित हो सकते हैं। कच्चे दूध का सेवन बिना उबाला गया दूध कई प्रकार के हानिकारक बैक्टीरिया का स्रोत हो सकता है, जो फूड पॉइजनिंग का कारण बनते हैं। फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय फलों और सब्जियों को अच्छी तरह धोएं खाने से पहले सभी फलों और सब्जियों को साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है। इससे उन पर मौजूद धूल, गंदगी और बैक्टीरिया हट जाते हैं। खाना बनाने से पहले हाथ साफ करें भोजन तैयार करने से पहले कम से कम 20 से 30 सेकंड तक साबुन से हाथ धोना चाहिए। इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम होता है। खाने को ज्यादा समय तक स्टोर न करें हर खाद्य पदार्थ की एक निश्चित शेल्फ लाइफ होती है। लंबे समय तक रखा हुआ भोजन खराब हो सकता है और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। पाश्चराइज्ड या उबला हुआ दूध ही पिएं कच्चे दूध के बजाय उबले हुए या पाश्चराइज्ड दूध का सेवन करना सुरक्षित माना जाता है। बाहर के खुले भोजन से बचें खुले में रखे खाद्य पदार्थों में धूल, प्रदूषण और बैक्टीरिया आसानी से पहुंच सकते हैं। इसलिए सड़क किनारे या खुले भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों को रखें खास सुरक्षित विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग फूड पॉइजनिंग से अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए उन्हें हमेशा ताजा, स्वच्छ और सही तरीके से तैयार किया गया भोजन ही देना चाहिए। गर्मियों में थोड़ी सी सावधानी और स्वच्छता का पालन करके फूड पॉइजनिंग जैसी समस्या से आसानी से बचा जा सकता है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Healthy high-fiber foods including fruits, seeds, beans and whole grains arranged for nutrition guide
रोजाना फाइबर बढ़ाने के 7 आसान तरीके, डॉक्टरों ने बताए सेहतमंद सुझाव

आजकल “फाइबर” सिर्फ पोषण से जुड़ा शब्द नहीं रह गया है, बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर को स्वस्थ रखने और कई गंभीर बीमारियों से बचाने में पर्याप्त फाइबर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बावजूद ज्यादातर लोग अपनी रोजाना की जरूरत के अनुसार फाइबर का सेवन नहीं कर पा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त फाइबर लेने से: पाचन तंत्र बेहतर रहता है ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद मिलती है दिल स्वस्थ रहता है लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा कम हो सकता है US Food and Drug Administration के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना लगभग 28 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। लेकिन कई शोध बताते हैं कि अधिकतर लोग इस लक्ष्य से काफी पीछे हैं। आइए जानते हैं रोजाना फाइबर बढ़ाने के 7 आसान और असरदार तरीके। 1. फलों और सब्जियों का छिलका न हटाएं विशेषज्ञों का कहना है कि कई फलों और सब्जियों के छिलकों में अंदरूनी हिस्से से ज्यादा फाइबर होता है। उदाहरण के तौर पर, अगर सेब को छिलके सहित खाया जाए तो लगभग 2 ग्राम अतिरिक्त फाइबर मिलता है। जहां संभव हो, पूरे फल खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। 2. दाल और बीन्स को भोजन में शामिल करें मसूर दाल, राजमा, चना और दूसरी दालें फाइबर का बेहतरीन स्रोत मानी जाती हैं। इन्हें: सलाद सूप चावल पास्ता जैसे भोजन में मिलाकर आसानी से खाया जा सकता है। इससे खाना ज्यादा पौष्टिक और पेट भरने वाला बनता है। 3. बीज और मेवे का सेवन बढ़ाएं Chia seed, अलसी के बीज और दूसरे पौष्टिक बीज फाइबर बढ़ाने का आसान तरीका हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक: चिया सीड्स में लगभग 10 ग्राम फाइबर अलसी में करीब 8 ग्राम फाइबर पाया जाता है। इन्हें दही, दलिया, सलाद या स्मूदी में मिलाकर खाया जा सकता है। 4. मिठाई के साथ फल खाएं अगर आपको मीठा पसंद है तो मिठाई के साथ ताजे फल खाना बेहतर विकल्प हो सकता है। कुछ ज्यादा फाइबर वाले फल: नाशपाती सेब रसभरी ये शरीर को विटामिन और खनिज भी प्रदान करते हैं। 5. ज्यादा फाइबर वाले स्नैक्स चुनें तले-भुने और प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह ऐसे विकल्प चुनें जिनमें प्राकृतिक फाइबर ज्यादा हो, जैसे: भुना चना पॉपकॉर्न मेवे बीज उदाहरण के तौर पर, बिना ज्यादा तेल वाला पॉपकॉर्न फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। 6. “पकाएं और ठंडा करें” तरीका अपनाएं विशेषज्ञों के अनुसार आलू, चावल, पास्ता और कुछ दालों को पकाकर ठंडा करने से उनमें “रेजिस्टेंट स्टार्च” बनता है। यह तरीका: ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद करता है कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक हो सकता है पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है लंबे समय तक पेट भरा रखता है 7. जूस की बजाय पूरा फल खाएं फलों के रस की तुलना में पूरा फल ज्यादा फायदेमंद माना जाता है क्योंकि उसमें फाइबर सुरक्षित रहता है। पूरा फल: पाचन को धीमा करता है ज्यादा देर तक पेट भरा रखता है अचानक शुगर बढ़ने की संभावना कम करता है इसीलिए विशेषज्ञ जूस की जगह पूरे फल खाने की सलाह देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-छोटे बदलाव करके भी रोजाना फाइबर का सेवन काफी बढ़ाया जा सकता है। संतुलित आहार के साथ फाइबर से भरपूर चीजों को शामिल करना लंबे समय तक अच्छी सेहत बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है।  

surbhi मई 25, 2026 0
Assortment of cooling foods like coconut water, cucumber, watermelon and buttermilk for summer heat relief
Heatwave Alert: गर्मी और थकान से बचाएंगे ये 8 ‘कूलिंग फूड्स’, एक्सपर्ट्स ने बताया सही तरीका

तेज गर्मी के बीच शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है–पसीना ज्यादा आता है, पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से कम होते हैं और थकान महसूस होती है। ऐसे में सही खानपान बेहद जरूरी हो जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ खास ‘कूलिंग फूड्स’ शरीर के तापमान को संतुलित रखने, हाइड्रेशन बनाए रखने और पाचन सुधारने में अहम भूमिका निभाते हैं। कूलिंग फूड्स क्यों हैं जरूरी? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के दौरान शरीर में थर्मोरेगुलेशन (तापमान नियंत्रण) की प्रक्रिया सक्रिय रहती है। ऐसे में पानी, पोटैशियम, मैग्नीशियम और एंटी-इन्फ्लेमेटरी तत्वों से भरपूर फूड्स शरीर को ठंडा रखने के साथ ऊर्जा भी बनाए रखते हैं।   ये 8 फूड्स गर्मी में देंगे राहत 1. Coconut Water नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक, जो तुरंत हाइड्रेशन देता है और थकान कम करता है। 2. Buttermilk (छाछ) पाचन को बेहतर बनाता है, शरीर को ठंडा रखता है और ब्लोटिंग कम करता है। 3. Cucumber (खीरा) हाई वॉटर कंटेंट के कारण शरीर को हाइड्रेट रखता है और स्किन को भी फायदा देता है। 4. Black Raisins (भिगोए हुए किशमिश) ऊर्जा बढ़ाते हैं, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। 5. Chia Seeds / Sabja Seeds शरीर में लंबे समय तक पानी बनाए रखते हैं और एसिडिटी कम करते हैं। 6. Fennel Tea (सौंफ की चाय) पाचन सुधारती है और शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करती है। 7. Gulkand पारंपरिक ठंडा फूड, जो एसिडिटी और हीट को बैलेंस करता है। 8. Watermelon और Muskmelon हाई वॉटर कंटेंट वाले ये फल शरीर को तुरंत ठंडक और ऊर्जा देते हैं। क्या न करें? एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि बहुत ज्यादा ठंडे पेय या आइसक्रीम तुरंत राहत तो देते हैं, लेकिन पाचन को बिगाड़ सकते हैं। असली कूलिंग फूड्स वो होते हैं जो शरीर को अंदर से संतुलित करें। ध्यान रखें हर व्यक्ति का पाचन अलग होता है, इसलिए फूड्स का चयन अपनी बॉडी के अनुसार करें। जरूरत हो तो हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह लें।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Military activity near the Strait of Hormuz amid escalating US-Iran tensions and reported retaliatory strikes.
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अपाचे हेलीकॉप्टर घटना के बाद अमेरिका का ईरान पर हमला, तेहरान ने दी कड़ी चेतावनी

Deepshikha जून 10, 2026 0