ओडिशा के Puri में आयोजित भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान गुरुवार को भारी भीड़ और लगातार बारिश के बीच दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई। वहीं, 'पहंडी' अनुष्ठान में देरी होने के कारण भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ श्री गुंडिचा मंदिर तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में शुक्रवार को श्रद्धालुओं को एक बार फिर रथ खींचने का अवसर मिलेगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि आज तीनों रथों को श्री गुंडिचा मंदिर तक पहुंचाया जाए। दो श्रद्धालुओं की गई जान मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान सात श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें 60 वर्ष से अधिक आयु के एक श्रद्धालु की इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं, 35 वर्ष से अधिक उम्र के एक अन्य श्रद्धालु की हार्ट अटैक से जान चली गई। दोनों मामलों में मौत के कारणों की जांच की जा रही है। बारिश और उमस से कई श्रद्धालु हुए बीमार लगातार बारिश, उमस और भारी भीड़ के कारण कई श्रद्धालुओं को थकान, घुटन, शरीर में पानी की कमी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हुईं। अस्पताल में इलाज के बाद अधिकांश लोगों की हालत में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई। 8 से 9 लाख श्रद्धालु पहुंचे पुरी मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, इस वर्ष देश-विदेश से करीब 8 से 9 लाख श्रद्धालु रथ यात्रा में शामिल हुए। प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों, सेवादारों और स्वयंसेवकों ने मिलकर भीड़ को नियंत्रित किया, जिससे आयोजन के दौरान किसी बड़े व्यवधान की स्थिति नहीं बनी। सरकार ने स्पष्ट किया कि आयोजन के दौरान भगदड़ या भीड़ प्रबंधन पूरी तरह विफल होने जैसी कोई घटना नहीं हुई। सभी आवश्यक सेवाएं पूरे समय सुचारु रूप से संचालित होती रहीं। 'बड़ा डंडा' मार्ग पर उमड़ी भारी भीड़ फायर सर्विस के महानिरीक्षक उमाशंकर दाश ने बताया कि 'बड़ा डंडा' मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। इसी मार्ग से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ श्री गुंडिचा मंदिर तक ले जाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि भीड़ के दौरान दम घुटने और तबीयत बिगड़ने वाले करीब 100 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्थायी अस्पतालों और एम्बुलेंस के जरिए उपचार उपलब्ध कराया गया। 'पहंडी' में देरी से बदला कार्यक्रम मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी ने बताया कि अन्य धार्मिक अनुष्ठान समय पर हुए, लेकिन 'पहंडी' प्रक्रिया में एक घंटे से अधिक की देरी हुई। भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा मुख्य द्वार पर करीब 40 मिनट तक आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे पूरे कार्यक्रम का समय प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि शुक्रवार सुबह साढ़े नौ बजे से रथ खींचने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी। तीनों देवता शुक्रवार रात भी अपने-अपने रथों पर ही विराजमान रहेंगे, जबकि श्री गुंडिचा मंदिर में प्रवेश का पारंपरिक जुलूस शनिवार को आयोजित किया जाएगा।
भुवनेश्वर: ओडिशा की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व आईएएस अधिकारी Sujatha Raut Karthikeyan ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर बीजू जनता दल (BJD) की सदस्यता ग्रहण कर ली। वह पूर्व मुख्यमंत्री Naveen Patnaik की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुईं। सामाजिक कल्याण और विशेष रूप से महिला सशक्तीकरण से जुड़े मिशन शक्ति कार्यक्रम में अहम भूमिका निभाने वाली सुजाता राउत ने 13 मार्च 2025 को भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया था। राजनीतिक पृष्ठभूमि और पार्टी में शामिल होना सुजाता राउत कार्तिकेयन, जो 2000 बैच की आईएएस अधिकारी रह चुकी हैं, लंबे समय तक ओडिशा सरकार में महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्यरत रहीं। उन्होंने विशेष रूप से महिला सशक्तीकरण से जुड़े कार्यक्रमों को विस्तार देने में अहम योगदान दिया। बीजू जनता दल में उनके शामिल होने की घोषणा पार्टी मुख्यालय शंख भवन में आयोजित बैठक के बाद की गई। नवीन पटनायक का बयान पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सुजाता राउत का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि वह एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी रही हैं और उन्होंने राज्य में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुजाता अपनी नई राजनीतिक भूमिका में सहज होकर जनता, विशेषकर महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए काम करेंगी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी चुनावों में बीजू जनता दल का नेतृत्व स्वयं वही करेंगे और नेतृत्व परिवर्तन की सभी अटकलों को खारिज किया। सुजाता राउत का बयान पार्टी में शामिल होने के बाद सुजाता राउत ने कहा कि वह ओडिशा की जनता की सेवा को अपनी प्राथमिकता बनाए रखेंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें बीते 24 वर्षों में नवीन पटनायक के नेतृत्व में काम करने का अवसर मिला और अब एक नई भूमिका में जनता की सेवा करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि वह पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ राज्य के विकास और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए कार्य करेंगी। पार्टी के भीतर प्रतिक्रियाएं सूत्रों के अनुसार, बीजेडी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने उनके प्रवेश पर आपत्ति भी जताई थी। उनका कहना था कि 2024 के चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर संगठन के भीतर पहले से ही असंतोष है, और ऐसे में यह कदम राजनीतिक बहस को और बढ़ा सकता है। पार्टी नेतृत्व ने उनके शामिल होने को संगठनात्मक मजबूती और प्रशासनिक अनुभव के तौर पर देखा है।
नई दिल्ली: भारत की सामरिक क्षमताओं को नई मजबूती देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने सोमवार (15 जून) को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल परीक्षण किया। इस सफलता के साथ भारत की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता और अधिक मजबूत हो गई है। यह मिसाइल सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के ठिकानों, सैन्य अड्डों और रणनीतिक लक्ष्यों को अत्यधिक सटीकता के साथ निशाना बनाने में सक्षम है। DRDO के अनुसार, परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपने सभी निर्धारित मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में तैनात विभिन्न ट्रैकिंग उपकरणों, रडार और टेलीमेट्री प्रणालियों से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से इसकी पुष्टि हुई है कि मिसाइल ने निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदर्शन किया। भारत की स्ट्राइक क्षमता को मिलेगी नई धार LRLACM का सफल परीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब भारत अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने और लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर दे रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल भारतीय सशस्त्र बलों को दुश्मन के संवेदनशील ठिकानों पर बिना सीमा पार किए, दूर से ही सटीक हमला करने की क्षमता प्रदान करेगी। इस मिसाइल के शामिल होने से भारत की Long Range Precision Strike Capability में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और संभावित खतरों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence Capability) भी मजबूत होगी। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित रक्षा मंत्रालय के अनुसार, LRLACM पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल है। इसकी सभी प्रमुख उप-प्रणालियों का विकास DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग भागीदारों के सहयोग से किया गया है। इस परियोजना में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADE), बेंगलुरु ने नोडल प्रयोगशाला के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा देश के कई सार्वजनिक और निजी रक्षा उद्योगों ने भी इसके विकास में योगदान दिया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह सफलता 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल को नई मजबूती देने वाली उपलब्धि है। क्या है LRLACM की खासियत? LRLACM को लंबी दूरी तक कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर सटीक हमला करने के लिए विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं— लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता। कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता, जिससे रडार से बचना आसान होता है। दुश्मन के सैन्य अड्डों, कमांड सेंटर, एयरबेस और रणनीतिक ढांचों को निशाना बनाने में सक्षम। स्वदेशी मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणाली से लैस। विभिन्न मौसम परिस्थितियों में संचालन की क्षमता। भारतीय उद्योगों की भागीदारी के साथ पूरी तरह स्वदेशी विकास। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने LRLACM के सफल परीक्षण पर DRDO के वैज्ञानिकों और उद्योग भागीदारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की रक्षा क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मिसाइल परीक्षण के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। BMD प्रणाली की सफलता के बाद एक और बड़ी उपलब्धि इससे पहले 10 और 11 जून को भारत ने अपनी बहुस्तरीय Ballistic Missile Defence (BMD) System प्रणाली के तीन सफल परीक्षण किए थे। DRDO द्वारा विकसित इस प्रणाली ने वायुमंडल के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर लक्ष्य मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया था। इन सफल परीक्षणों के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक और अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल खतरों से निपटने की क्षमता मौजूद है। आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति की ओर बड़ा कदम रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, LRLACM का सफल परीक्षण केवल एक मिसाइल परीक्षण नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक शक्ति का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में यह मिसाइल भारतीय सशस्त्र बलों की लॉन्ग रेंज प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाएगी और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में भारत की स्थिति को और अधिक मजबूत करेगी।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने किया ‘फ्री एंड यूनिवर्सल एजुकेशन’ का ऐलान ओडिशा सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राज्य के छात्रों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने घोषणा की है कि अब राज्य में किंडरगार्टन (KG) से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) तक की शिक्षा पूरी तरह मुफ्त होगी। इस फैसले के साथ ओडिशा देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जहां उच्च शिक्षा तक निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था लागू की जा रही है। बीजेपी सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर किए गए इस ऐलान को राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस योजना से 10 लाख से अधिक छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नहीं देनी होगी फीस नई व्यवस्था के तहत सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने वाले छात्रों को अब किसी प्रकार की शैक्षणिक फीस नहीं देनी होगी। राज्य में पहले से ही कक्षा 10 तक शिक्षा निशुल्क थी, लेकिन अब इस दायरे को बढ़ाकर स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर तक कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह निर्णय बेहद लाभकारी साबित होगा। कई छात्र वित्तीय कठिनाइयों के कारण उच्च शिक्षा बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं, लेकिन अब उन्हें बेहतर अवसर मिल सकेंगे। राज्य सरकार पर आएगा करीब 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में फीस पहले से अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन पूरी तरह शुल्क समाप्त करने से राज्य सरकार पर हर साल लगभग 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। हालांकि सरकार का मानना है कि शिक्षा पर किया गया यह निवेश राज्य के भविष्य को मजबूत करेगा और युवाओं को अधिक अवसर प्रदान करेगा। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए होगी शिक्षकों की बड़ी भर्ती मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर शिक्षकों की नियुक्ति का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में 45,000 से अधिक नए शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों के दौरान राज्य सरकार पहले ही 26,000 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति कर चुकी है। नई भर्तियों से स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए बनेंगे चार नए विश्वविद्यालय राज्य में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार ने चार नए विश्वविद्यालय स्थापित करने की भी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन विश्वविद्यालयों के लिए बजट में आवश्यक प्रावधान किए जा चुके हैं और जल्द ही परियोजनाओं पर काम शुरू होगा। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े। विकास परियोजनाओं पर भी सरकार का जोर अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री ने राज्य में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तटीय राजमार्ग, उत्तर और दक्षिण ओडिशा को जोड़ने वाले दो एक्सप्रेसवे तथा भुवनेश्वर-कटक-पुरी-पारादीप आर्थिक क्षेत्र जैसी परियोजनाएं रोजगार और आर्थिक विकास को गति देंगी। विपक्ष के आरोपों पर भी दिया जवाब कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अपराध के मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सजा की दर बढ़ने का भी दावा किया। साथ ही उन्होंने पिछली सरकार पर भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने पिछले दो वर्षों में कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सतर्कता जांच और कार्रवाई की है। ओडिशा सरकार का यह फैसला शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो यह राज्य में उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने और सामाजिक-आर्थिक असमानता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
रांची। हेमंत सोरेन से शनिवार को रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में ओडिशा के मयूरभंज और सुंदरगढ़ जिलों से आए एक प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का स्वागत और अभिनंदन करते हुए अपने क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न सामाजिक, विकासात्मक और जनहित के मुद्दों को उनके समक्ष रखा। झारखंड और ओडिशा बैठक में झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन तथा दोनों राज्यों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने क्षेत्र की जनता की समस्याओं और अपेक्षाओं से जुड़े कई सुझाव भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखे। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार जनहित और क्षेत्रीय विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए मुद्दों और सुझावों पर सकारात्मक एवं गंभीरता से विचार किया जाएगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास और वहां रहने वाले लोगों की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई इस मुलाकात के दौरान भविष्य में भी संवाद और सहयोग को मजबूत बनाए रखने पर सहमति बनी। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सकारात्मक रुख की सराहना करते हुए क्षेत्रीय विकास के लिए निरंतर सहयोग की उम्मीद जताई।
ओडिशा के लाखों छात्रों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। Board of Secondary Education Odisha (BSE Odisha) आज यानी 2 मई 2026 को कक्षा 10वीं (मैट्रिक) परीक्षा का परिणाम शाम 4 बजे जारी करेगा। परीक्षा में शामिल हुए छात्र लंबे समय से अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे, जो अब आधिकारिक वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। कहां देखें रिजल्ट? रिजल्ट जारी होते ही छात्र निम्नलिखित आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर अपना स्कोरकार्ड देख सकते हैं: bseodisha.ac.in orissaresults.nic.in इसके अलावा छात्र DigiLocker के जरिए भी अपनी डिजिटल मार्कशीट एक्सेस कर सकते हैं। ऐसे करें ऑनलाइन रिजल्ट चेक रिजल्ट देखने के लिए छात्रों को कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करने होंगे: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं “BSE Odisha 10th Result 2026” लिंक पर क्लिक करें रोल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा भविष्य के लिए डाउनलोड या प्रिंट जरूर लें DigiLocker से ऐसे पाएं डिजिटल मार्कशीट अगर वेबसाइट स्लो हो जाए या ओपन न हो, तो छात्र DigiLocker का विकल्प चुन सकते हैं: DigiLocker ऐप या वेबसाइट खोलें मोबाइल नंबर या आधार के जरिए लॉगिन करें नए यूजर Sign Up करके रजिस्टर करें “Education” या “Boards” सेक्शन में जाएं BSE Odisha चुनें और आवश्यक विवरण भरें सबमिट करते ही डिजिटल मार्कशीट स्क्रीन पर आ जाएगी पास प्रतिशत और टॉपर्स पर भी रहेगी नजर रिजल्ट के साथ ही इस साल का पास प्रतिशत, टॉपर्स की सूची और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े भी जारी किए जाएंगे। इससे छात्रों को अपने प्रदर्शन का व्यापक अंदाजा मिलेगा।
ओडिशा के रायगढ़ा जिला में जमीन अधिग्रहण और सड़क निर्माण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गंभीर हिंसा में बदल गया है। काशीपुर ब्लॉक के सुंगेर पंचायत स्थित शगाबाड़ी गांव में आदिवासी ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई झड़प में 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। इनमें कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। दरअसल, यह विवाद उस सड़क परियोजना को लेकर है, जिसे Vedanta Aluminium से जुड़े माइनिंग क्षेत्र सिजीमाली से गांव को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि इस परियोजना को सरकार से मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन स्थानीय आदिवासी समुदाय इसका लगातार विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि इस परियोजना से उन्हें अपनी जमीन से बेदखल होना पड़ेगा, साथ ही पर्यावरण और उनकी आजीविका पर भी गंभीर असर पड़ेगा। विवाद उस समय और भड़क गया जब जिला कलेक्टर कुलकर्णी आशुतोष सी का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे ग्रामीणों को जमीन खाली करने और दस्तावेज दिखाने के लिए कहते नजर आए। इस दौरान उनके कथित सख्त लहजे ने ग्रामीणों के बीच असंतोष और भय को और बढ़ा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने उनकी सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। हालात उस समय बेकाबू हो गए जब विरोध प्रदर्शन तेज होने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पहले से तनावपूर्ण माहौल में बातचीत की कोशिश नाकाम रही और देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसक हो गया। ग्रामीणों की ओर से पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिसके जवाब में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव बढ़ गया। इस हिंसा में 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। घायलों में एसडीपीओ गिरिधर साहू और थाना प्रभारी देब मलिक जैसे अधिकारी भी शामिल हैं। करीब सात पुलिसकर्मियों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि अन्य का इलाज स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। कलेक्टर और एसपी स्वयं मौके पर मौजूद रहकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं। यह घटना एक बार फिर देश के आदिवासी इलाकों में विकास परियोजनाओं और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के बीच बढ़ते टकराव को उजागर करती है। जहां एक ओर सरकार विकास और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना चाहती है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय समुदाय अपनी जमीन, पहचान और आजीविका को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
भुवनेश्वर, एजेंसियां। ओडिशा के कटक स्थित SCB Medical College and Hospital में सोमवार तड़के भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। अस्पताल के ट्रॉमा केयर विभाग के ICU में लगी आग में अब तक 10 मरीजों की मौत हो गई, जबकि बचाव कार्य के दौरान 11 अस्पताल कर्मचारी झुलस गए।अधिकारियों के अनुसार आग सोमवार सुबह करीब 2:30 से 3:00 बजे के बीच लगी। देखते ही देखते आग ने ICU और आसपास के वार्डों को अपनी चपेट में ले लिया। उस समय ICU में कई गंभीर मरीजों का इलाज चल रहा था, जिससे अफरा-तफरी मच गई। ट्रॉमा ICU से भड़की आग प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग ट्रॉमा केयर विभाग के ICU से भड़की थी। आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान अस्पताल के कर्मचारियों, पुलिस और मरीजों के परिजनों ने भी राहत और बचाव कार्य में मदद की। 23 मरीजों को तुरंत किया गया शिफ्ट आग लगने के बाद अस्पताल में भर्ती 23 मरीजों को तत्काल दूसरे वार्डों में शिफ्ट किया गया। बचाव अभियान के दौरान 11 अस्पताल कर्मचारी झुलस गए, जिन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। मौके पर पहुंचे मुख्यमंत्री हादसे की जानकारी मिलते ही ओडिशा के मुख्यमंत्री Mohan Charan Majhi और स्वास्थ्य मंत्री Mukesh Mahaling अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि आग लगने की शुरुआती वजह शॉर्ट-सर्किट मानी जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार सात गंभीर मरीजों की मौत दूसरे वार्ड में शिफ्टिंग के दौरान हुई, जबकि तीन अन्य मरीजों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये मुआवजा मुख्यमंत्री ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि घायल मरीजों के इलाज में किसी तरह की कमी न हो। फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।