नई दिल्ली: भारत की सामरिक क्षमताओं को नई मजबूती देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने सोमवार (15 जून) को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल परीक्षण किया। इस सफलता के साथ भारत की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता और अधिक मजबूत हो गई है। यह मिसाइल सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के ठिकानों, सैन्य अड्डों और रणनीतिक लक्ष्यों को अत्यधिक सटीकता के साथ निशाना बनाने में सक्षम है।
DRDO के अनुसार, परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपने सभी निर्धारित मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में तैनात विभिन्न ट्रैकिंग उपकरणों, रडार और टेलीमेट्री प्रणालियों से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से इसकी पुष्टि हुई है कि मिसाइल ने निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदर्शन किया।
LRLACM का सफल परीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब भारत अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने और लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर दे रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल भारतीय सशस्त्र बलों को दुश्मन के संवेदनशील ठिकानों पर बिना सीमा पार किए, दूर से ही सटीक हमला करने की क्षमता प्रदान करेगी।
इस मिसाइल के शामिल होने से भारत की Long Range Precision Strike Capability में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और संभावित खतरों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence Capability) भी मजबूत होगी।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, LRLACM पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल है। इसकी सभी प्रमुख उप-प्रणालियों का विकास DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग भागीदारों के सहयोग से किया गया है।
इस परियोजना में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADE), बेंगलुरु ने नोडल प्रयोगशाला के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा देश के कई सार्वजनिक और निजी रक्षा उद्योगों ने भी इसके विकास में योगदान दिया है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह सफलता 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल को नई मजबूती देने वाली उपलब्धि है।
LRLACM को लंबी दूरी तक कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर सटीक हमला करने के लिए विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं—
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने LRLACM के सफल परीक्षण पर DRDO के वैज्ञानिकों और उद्योग भागीदारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की रक्षा क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मिसाइल परीक्षण के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
इससे पहले 10 और 11 जून को भारत ने अपनी बहुस्तरीय Ballistic Missile Defence (BMD) System प्रणाली के तीन सफल परीक्षण किए थे। DRDO द्वारा विकसित इस प्रणाली ने वायुमंडल के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर लक्ष्य मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया था।
इन सफल परीक्षणों के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक और अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल खतरों से निपटने की क्षमता मौजूद है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, LRLACM का सफल परीक्षण केवल एक मिसाइल परीक्षण नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक शक्ति का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में यह मिसाइल भारतीय सशस्त्र बलों की लॉन्ग रेंज प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाएगी और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में भारत की स्थिति को और अधिक मजबूत करेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने पर बनी सहमति का भारत ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उम्मीद जताई कि इस पहल से पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और कई देशों में लोगों की जान भी गई है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति, स्थिरता, व्यापार और आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि शेष विवादित मुद्दों पर बातचीत के माध्यम से एक टिकाऊ और व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ना आवश्यक है। 19 जून को हो सकते हैं औपचारिक हस्ताक्षर मध्यस्थ देशों और अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर आगे अलग दौर की बातचीत होगी। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की घोषणा की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते पर सहमति की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जलडमरूमध्य को तत्काल प्रभाव से खोला जाएगा। अमेरिका पहले भी संकेत दे चुका था कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पुनः खुलने के साथ ईरान पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है, ताकि वह तेल निर्यात बढ़ाकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सके। ईरान ने कहा- औपचारिक हस्ताक्षर के बाद ही होगा अमल ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने समझौते पर सहमति की पुष्टि करते हुए कहा कि तेहरान औपचारिक हस्ताक्षर से पहले समझौते को लागू नहीं करेगा। उनके अनुसार, कतर की मध्यस्थता में 14 घंटे से अधिक चली बातचीत के बाद दोनों पक्ष इस सहमति तक पहुंचे। ईरानी सरकारी मीडिया ने इस घटनाक्रम को अमेरिका के साथ युद्ध समाप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
नई दिल्ली: भारतीय ध्वज वाला LNG जहाज ‘दिशा’ 62,370 टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लेकर सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। यह जहाज तीन महीने से अधिक समय बाद युद्ध प्रभावित इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र से सुरक्षित निकलने वाला पहला बड़ा जहाज माना जा रहा है। जहाज के सुरक्षित पार होने को भारत की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। दहेज बंदरगाह पर 18 जून को पहुंचने की संभावना पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि जहाज ‘दिशा’ 62,370 टन LNG लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है और इसके 18 जून के आसपास दहेज बंदरगाह पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि यह जहाज भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड (SCI) के नेतृत्व वाले समूह द्वारा प्रबंधित किया जा रहा है। तीन महीने बाद पहली सुरक्षित निकासी जानकारी के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में लंबे समय से जारी तनाव के बीच यह पहला बड़ा जहाज है जो इस मार्ग से सुरक्षित बाहर निकल पाया है। इससे पहले इस क्षेत्र में सुरक्षा जोखिमों के कारण समुद्री यातायात प्रभावित हो रहा था। नाविकों की सुरक्षा पर लगातार निगरानी नौवहन महानिदेशालय ने बताया कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों और पोत परिवहन कंपनियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, समुद्री मार्गों पर स्थिति की निगरानी के लिए एक नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय है। हजारों कॉल और ईमेल का निपटारा अधिकारियों ने बताया कि नियंत्रण कक्ष में पिछले 96 घंटों के दौरान 12,737 कॉल और 28,299 से अधिक ईमेल का निपटारा किया गया है। इस दौरान नाविकों और उनके परिवारों से 406 कॉल और 784 ईमेल प्राप्त हुए। 3,500 से अधिक नाविकों की सुरक्षित वापसी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 3,587 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा चुकी है। इसमें पिछले 96 घंटों में 50 नाविकों की वापसी भी शामिल है। बंदरगाहों पर परिचालन सामान्य मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि देशभर में बंदरगाहों का संचालन सामान्य रूप से जारी है और कहीं भी जाम या व्यवधान की स्थिति की सूचना नहीं है। ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम कदम विशेषज्ञों का मानना है कि LNG जहाज ‘दिशा’ की सुरक्षित वापसी भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कठिन भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद समुद्री व्यापारिक गतिविधियां धीरे-धीरे स्थिर हो रही हैं।
दिनांक - 16 जून 2026 दिन - मंगलवार विक्रम संवत 2083 शक संवत -1948 अयन - उत्तरायण ऋतु - ग्रीष्म ॠतु मास - ज्येष्ठ पक्ष - शुक्ल तिथि - द्वितीया रात्रि 12:52 तक तत्पश्चात तृतीया नक्षत्र - आर्द्रा शाम 04:12 तक तत्पश्चात पुनर्वसु योग - वृद्धि रात्रि 12:35 तक तत्पश्चात ध्रुव राहुकाल - शाम 04:01 से शाम 05:41 तक सूर्योदय - 05:08 सूर्यास्त - 06:20 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे व्रत पर्व विवरण- चंद्र-दर्शन (रात्रि 07:14 से रात्रि 08:46 तक) विशेष- *द्वितीया को बृहती (छोटा बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)