DRDO

Family-friendly cars with advanced child safety features, airbags, ISOFIX mounts, and high crash protection ratings.
बच्चों की सुरक्षा के लिए बेस्ट हैं ये 5 कारें, जानें कीमत, सेफ्टी फीचर्स और क्यों हैं फैमिली के लिए बेहतर विकल्प

नई दिल्ली: नई कार खरीदते समय ज्यादातर परिवार माइलेज और कीमत के साथ-साथ सुरक्षा को भी सबसे बड़ी प्राथमिकता देते हैं। खासकर अगर घर में छोटे बच्चे हों, तो मजबूत बॉडी, चाइल्ड सेफ्टी फीचर्स और बेहतर क्रैश टेस्ट रेटिंग वाली कार चुनना बेहद जरूरी हो जाता है। भारतीय बाजार में कई ऐसी कारें उपलब्ध हैं, जिन्हें बच्चों और परिवार की सुरक्षा के लिहाज से बेहतर माना जाता है। इनमें टाटा मोटर्स, स्कोडा और वॉक्सवैगन जैसी कंपनियों के मॉडल शामिल हैं। आइए जानते हैं ऐसी 5 कारों के बारे में जो एडवांस सेफ्टी फीचर्स और बेहतर क्रैश टेस्ट प्रदर्शन के लिए जानी जाती हैं। 1. Tata Safari टाटा सफारी फैमिली SUV सेगमेंट की लोकप्रिय कारों में से एक है। यह मजबूत बॉडी स्ट्रक्चर और आधुनिक सुरक्षा तकनीकों के साथ आती है। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹13.39 लाख मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 7 एयरबैग इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP) ADAS (लेवल-2) फीचर्स इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक ऑटो होल्ड इमरजेंसी और ब्रेकडाउन कॉल ISOFIX चाइल्ड सीट सपोर्ट 2. Tata Harrier अगर आपकी फैमिली बड़ी है और आप प्रीमियम SUV खरीदना चाहते हैं, तो टाटा हैरियर एक मजबूत विकल्प हो सकती है। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹12.99 लाख मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 7 एयरबैग एडवांस ESP ADAS टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) OMEGARC प्लेटफॉर्म इमरजेंसी कॉलिंग सिस्टम 3. Skoda Kushaq स्कोडा कुशाक कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट की लोकप्रिय कार है, जिसमें परिवार की सुरक्षा के लिए कई आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹10.69 लाख इंजन विकल्प: 1.0 लीटर टर्बो पेट्रोल 1.5 लीटर टर्बो पेट्रोल मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) ABS के साथ EBD ISOFIX चाइल्ड सीट माउंट मल्टी-कोलिजन ब्रेक TPMS 4. Volkswagen Virtus अगर आप सेडान पसंद करते हैं, तो Volkswagen Virtus सुरक्षा के मामले में मजबूत विकल्प मानी जाती है। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹10.70 लाख मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) ISOFIX चाइल्ड सीट एंकरेज हिल होल्ड कंट्रोल मल्टी-कोलिजन ब्रेक पार्क डिस्टेंस कंट्रोल 5. Skoda Slavia स्कोडा स्लाविया भी फैमिली सेडान सेगमेंट में सुरक्षा के लिहाज से अच्छी मानी जाती है। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹9.99 लाख इंजन विकल्प: 1.0 लीटर टर्बो पेट्रोल 1.5 लीटर टर्बो पेट्रोल मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग ABS के साथ EBD सभी सीटों पर 3-पॉइंट सीट बेल्ट ट्रैक्शन कंट्रोल हिल होल्ड कंट्रोल मल्टी-कोलिजन ब्रेक रियर पार्किंग कैमरा ISOFIX चाइल्ड सीट माउंट बच्चों की सुरक्षा के लिए कार खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान? कार खरीदते समय केवल एयरबैग की संख्या ही नहीं, बल्कि इन बातों पर भी ध्यान दें: ISOFIX चाइल्ड सीट माउंट की उपलब्धता इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) ABS और EBD मजबूत क्रैश टेस्ट रेटिंग 3-पॉइंट सीट बेल्ट ADAS जैसे एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस फीचर्स (यदि उपलब्ध हों) अगर आपकी प्राथमिकता परिवार और बच्चों की सुरक्षा है, तो बेहतर क्रैश टेस्ट रेटिंग, मजबूत बॉडी स्ट्रक्चर और आधुनिक सेफ्टी फीचर्स वाली कार चुनना लंबे समय में अधिक सुरक्षित और फायदेमंद साबित हो सकता है।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
A DRDO-developed high-altitude surveillance airship designed for deployment over Ladakh to provide round-the-clock monitoring of India's northern borders.
लद्दाख में हाई-टेक एयरशिप तैनात करेगा भारत, 24x7 निगरानी से सीमा सुरक्षा होगी और मजबूत

नई दिल्ली: भारत अपनी उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित हाई-एल्टीट्यूड एयरशिप को जल्द ही लद्दाख में तैनात किया जाएगा। यह अत्याधुनिक प्रणाली सीमावर्ती क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी रखने और सेना को रियल टाइम खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगी। 20 किलोमीटर की ऊंचाई से रखेगा नजर जानकारी के अनुसार, यह एयरशिप लगभग 20 किलोमीटर (करीब 66,000 फीट) की ऊंचाई तक संचालित हो सकेगा। इतनी ऊंचाई से यह सीमावर्ती इलाकों में होने वाली हर गतिविधि पर लगातार नजर रखेगा और किसी भी संदिग्ध हलचल की तत्काल जानकारी सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचाएगा। आधुनिक सेंसर और रडार से लैस एयरशिप में अत्याधुनिक कैमरे, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, रडार और अन्य निगरानी उपकरण लगाए जा रहे हैं। ये उपकरण दिन और रात, दोनों परिस्थितियों में लंबी दूरी तक निगरानी करने में सक्षम होंगे। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ, सैन्य गतिविधियों और अन्य सुरक्षा चुनौतियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा। DRDO ने किया विकसित इस परियोजना का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) कर रहा है। इसे विशेष रूप से ऊंचाई वाले दुर्गम और कठिन इलाकों में प्रभावी निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है, जहां पारंपरिक निगरानी प्रणालियों को संचालन में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अंतिम चरण में है परीक्षण रक्षा सूत्रों के मुताबिक, हाई-एल्टीट्यूड एयरशिप का परीक्षण अंतिम चरण में है। परीक्षण सफल होने के बाद इसे सबसे पहले लद्दाख में तैनात किया जाएगा। भविष्य में आवश्यकता के अनुसार अन्य संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में भी इसकी तैनाती की जा सकती है। सीमा सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से भारतीय सेना की निगरानी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। लगातार निगरानी और रियल टाइम अलर्ट मिलने से घुसपैठ की कोशिशों को समय रहते विफल किया जा सकेगा और किसी भी आपात स्थिति में सेना की प्रतिक्रिया पहले से अधिक तेज और प्रभावी होगी। वैश्विक तकनीक की दिशा में भारत का कदम दुनिया के कई देश पहले से ही उन्नत हवाई निगरानी प्रणालियों का उपयोग कर रहे हैं। अमेरिका लंबे समय से निगरानी एयरशिप, ड्रोन और उपग्रह आधारित नेटवर्क का इस्तेमाल करता रहा है, जबकि चीन ने तिब्बत और सीमावर्ती क्षेत्रों में अपने निगरानी ढांचे को मजबूत किया है। रूस के पास भी सीमा सुरक्षा के लिए उन्नत हवाई निगरानी प्रणाली मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह हाई-एल्टीट्यूड एयरशिप देश की रक्षा तैयारियों को नई तकनीकी क्षमता देगा और सीमाओं की सुरक्षा को अधिक आधुनिक, प्रभावी और भरोसेमंद बनाएगा।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Indian and Indonesian leaders during the BrahMos missile defence agreement announcement.
भारत-इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल समझौता, रक्षा सहयोग को मिली नई मजबूती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा क्षेत्र में बड़ा समझौता हुआ है। दोनों देशों ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की आपूर्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कदम को भारत के रक्षा निर्यात और दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी की तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में संपन्न हुआ। इंडोनेशिया खरीदेगा Astra मिसाइल भी समझौते के तहत इंडोनेशिया भारत में विकसित Astra एयर-टू-एयर मिसाइल का भी आयात करेगा। यह मिसाइल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की गई है। Astra एक Beyond Visual Range (BVR) मिसाइल है, जिसे लंबी दूरी से दुश्मन के अत्यधिक गतिशील लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। ब्रह्मोस की अतिरिक्त बैटरियां भी मिल सकती हैं रिपोर्ट के अनुसार, भारत भविष्य में इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त बैटरियां भी उपलब्ध करा सकता है। माना जा रहा है कि हालिया सैन्य अभियानों में ब्रह्मोस और Astra जैसी स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों के प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी विश्वसनीयता और मांग बढ़ी है। समुद्री सुरक्षा सहयोग पर भी बनी सहमति दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा और समुद्री संरक्षा (Maritime Safety and Security) को लेकर भी एक व्यापक सहयोग ढांचा तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ता विश्वास रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को नई मजबूती दे रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनाई है। स्वास्थ्य और औद्योगिक सहयोग भी होगा मजबूत प्रधानमंत्री ने कहा कि नए समझौतों के बाद भारत की उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती दवाएं इंडोनेशिया के नागरिकों तक अधिक आसानी से पहुंच सकेंगी। साथ ही, भारत इंडोनेशिया के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण में भी सहयोग करेगा। क्रिटिकल मिनरल्स पर भी हुआ समझौता भारत और इंडोनेशिया ने स्टील सप्लाई चेन से जुड़े महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और तकनीकों पर भी समझौता किया है। इसका उद्देश्य वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। चुनाव तकनीक में भी सहयोग की संभावना सूत्रों के मुताबिक, भारत इंडोनेशिया के लिए वहां की आवश्यकताओं के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) विकसित करने में भी सहयोग कर सकता है। इसे भारत की चुनाव प्रबंधन तकनीक पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विश्वास का संकेत माना जा रहा है।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi departs for Indonesia on a two-day official visit to hold bilateral talks and strengthen strategic, defence and economic ties.
PM मोदी इंडोनेशिया दौरे पर रवाना, राष्ट्रपति प्रबोवो से होगी मुलाकात; ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस डील पर लग सकती है मुहर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर इंडोनेशिया रवाना हो गए। इस दौरे के दौरान वह इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को लेकर चर्चा होने की उम्मीद है। इस यात्रा का सबसे अहम एजेंडा भारत और इंडोनेशिया के बीच करीब ₹2,500 करोड़ के ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम के संभावित रक्षा समझौते को माना जा रहा है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया के प्रसिद्ध प्रम्बानन हिंदू मंदिर का भी दौरा करेंगे। ब्रह्मोस मिसाइल सौदे पर रहेगी नजर सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की बैठक में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम की खरीद को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। यदि यह समझौता होता है तो फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा विदेशी देश बन जाएगा। यह सौदा भारत के रक्षा निर्यात को नई मजबूती देने के साथ इंडोनेशिया की समुद्री सुरक्षा क्षमता को भी बढ़ाएगा। ब्रह्मोस मिसाइल का विकास भारत के डीआरडीओ (DRDO) और रूस की एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा किया गया है। इसे दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल किया जाता है। रणनीतिक सहयोग पर होगी चर्चा द्विपक्षीय बैठक में दोनों देश कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे, जिनमें शामिल हैं— रक्षा सहयोग समुद्री सुरक्षा व्यापार एवं निवेश डिजिटल अर्थव्यवस्था कनेक्टिविटी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी बैठक के दौरान कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने की भी संभावना है। मोदी का तीसरा इंडोनेशिया दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले मई 2018 और सितंबर 2023 में इंडोनेशिया का दौरा कर चुके हैं। 2018 की यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने अपने संबंधों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया था। उस समय रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समेत 15 से अधिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी थी। वहीं 2023 में प्रधानमंत्री मोदी जकार्ता में आयोजित आसियान-भारत और ईस्ट एशिया समिट में शामिल हुए थे। साबंग पोर्ट पर भी रहेगा फोकस इस यात्रा में इंडोनेशिया के साबंग पोर्ट को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के निकट स्थित यह बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार के पास होने के कारण रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत और इंडोनेशिया पहले ही साबंग पोर्ट के विकास, समुद्री संपर्क, लॉजिस्टिक सहयोग और नौसैनिक सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जता चुके हैं। प्रम्बानन मंदिर का करेंगे दर्शन प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान मध्य जावा स्थित प्रम्बानन मंदिर भी जाएंगे। यह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है और भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है। करीब 240 मंदिरों वाले इस परिसर में भगवान शिव का मंदिर सबसे ऊंचा और प्रमुख है। यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल प्रम्बानन मंदिर भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। हालांकि इंडोनेशिया दुनिया का सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश है, फिर भी वहां की सांस्कृतिक विरासत पर हिंदू और बौद्ध सभ्यताओं का गहरा प्रभाव आज भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Delhi Police investigates a bomb threat email case targeting key Indian security and strategic institutions, with officials conducting technical analysis and questioning a suspect.
ISRO-DRDO समेत कई बड़े संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकी, दिल्ली पुलिस ने गाजियाबाद के संदिग्ध से की पूछताछ

नई दिल्ली: देश की कई प्रमुख सुरक्षा और रणनीतिक संस्थाओं को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले ईमेल मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इस मामले में पुलिस ने गाजियाबाद निवासी एक संदिग्ध से पूछताछ की है। शुरुआती जांच में सभी धमकियां फर्जी पाई गई हैं, हालांकि पुलिस ईमेल भेजने के उद्देश्य और पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच कर रही है। 29 जून को मिला था धमकी भरा ईमेल 29 जून को विभिन्न सरकारी और सुरक्षा एजेंसियों को एक धमकी भरा ईमेल भेजा गया था। इसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), नागरिक उड्डयन मंत्रालय और दिल्ली-न्यूयॉर्क एयर इंडिया फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। ईमेल मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। संबंधित सभी कार्यालयों और परिसरों की तत्काल जांच कराई गई, लेकिन कहीं भी कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। तकनीकी जांच के बाद गाजियाबाद पहुंची पुलिस धमकी भरे ईमेल की तकनीकी जांच के आधार पर दिल्ली पुलिस गाजियाबाद के संयोग नगर स्थित बैंक कॉलोनी पहुंची। यहां 36 वर्षीय निशांत त्यागीसे पूछताछ की गई। पुलिस ने संदिग्ध के घर की तलाशी भी ली, लेकिन वहां से कोई विस्फोटक या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया? पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि संदिग्ध वर्ष 2008 से एक गंभीर बीमारी से पीड़ित है और कई प्रतिष्ठित अस्पतालों में उसका इलाज हो चुका है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि धमकी भरा ईमेल किस उद्देश्य से भेजा गया था और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका है या नहीं। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ISRO मुख्यालय में मच गया था हड़कंप धमकी भरे ईमेल के बाद सबसे अधिक सतर्कता ISRO मुख्यालय में बरती गई। ईमेल मिलते ही अधिकारियों ने तत्काल इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू कर परिसर खाली कराया और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। बम निरोधक दस्ता, सुरक्षा एजेंसियां और जांच टीमों ने पूरे परिसर की गहन तलाशी ली, लेकिन जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। जांच जारी दिल्ली पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अब ईमेल की तकनीकी जांच, डिजिटल ट्रेल और संदिग्ध की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
DRDO successfully tests India's indigenous Long Range Land Attack Cruise Missile from Dr APJ Abdul Kalam Island in Odisha.
LRLACM मिसाइल से बढ़ी भारत की लॉन्ग रेंज स्ट्राइक पावर, अब सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे दुश्मनों पर भी सटीक वार

  नई दिल्ली: भारत की सामरिक क्षमताओं को नई मजबूती देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने सोमवार (15 जून) को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल परीक्षण किया। इस सफलता के साथ भारत की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता और अधिक मजबूत हो गई है। यह मिसाइल सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के ठिकानों, सैन्य अड्डों और रणनीतिक लक्ष्यों को अत्यधिक सटीकता के साथ निशाना बनाने में सक्षम है। DRDO के अनुसार, परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपने सभी निर्धारित मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में तैनात विभिन्न ट्रैकिंग उपकरणों, रडार और टेलीमेट्री प्रणालियों से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से इसकी पुष्टि हुई है कि मिसाइल ने निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदर्शन किया। भारत की स्ट्राइक क्षमता को मिलेगी नई धार LRLACM का सफल परीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब भारत अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने और लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर दे रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल भारतीय सशस्त्र बलों को दुश्मन के संवेदनशील ठिकानों पर बिना सीमा पार किए, दूर से ही सटीक हमला करने की क्षमता प्रदान करेगी। इस मिसाइल के शामिल होने से भारत की Long Range Precision Strike Capability में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और संभावित खतरों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence Capability) भी मजबूत होगी। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित रक्षा मंत्रालय के अनुसार, LRLACM पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल है। इसकी सभी प्रमुख उप-प्रणालियों का विकास DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग भागीदारों के सहयोग से किया गया है। इस परियोजना में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADE), बेंगलुरु ने नोडल प्रयोगशाला के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा देश के कई सार्वजनिक और निजी रक्षा उद्योगों ने भी इसके विकास में योगदान दिया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह सफलता 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल को नई मजबूती देने वाली उपलब्धि है। क्या है LRLACM की खासियत? LRLACM को लंबी दूरी तक कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर सटीक हमला करने के लिए विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं— लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता। कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता, जिससे रडार से बचना आसान होता है। दुश्मन के सैन्य अड्डों, कमांड सेंटर, एयरबेस और रणनीतिक ढांचों को निशाना बनाने में सक्षम। स्वदेशी मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणाली से लैस। विभिन्न मौसम परिस्थितियों में संचालन की क्षमता। भारतीय उद्योगों की भागीदारी के साथ पूरी तरह स्वदेशी विकास। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने LRLACM के सफल परीक्षण पर DRDO के वैज्ञानिकों और उद्योग भागीदारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की रक्षा क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मिसाइल परीक्षण के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। BMD प्रणाली की सफलता के बाद एक और बड़ी उपलब्धि इससे पहले 10 और 11 जून को भारत ने अपनी बहुस्तरीय Ballistic Missile Defence (BMD) System प्रणाली के तीन सफल परीक्षण किए थे। DRDO द्वारा विकसित इस प्रणाली ने वायुमंडल के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर लक्ष्य मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया था। इन सफल परीक्षणों के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक और अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल खतरों से निपटने की क्षमता मौजूद है। आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति की ओर बड़ा कदम रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, LRLACM का सफल परीक्षण केवल एक मिसाइल परीक्षण नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक शक्ति का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में यह मिसाइल भारतीय सशस्त्र बलों की लॉन्ग रेंज प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाएगी और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में भारत की स्थिति को और अधिक मजबूत करेगी।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
DRDO missile interceptor launch during successful ballistic missile defense and anti-ship missile tests in India.
भारत की मिसाइल सुरक्षा को बड़ी मजबूती, DRDO ने लगातार तीन सफल परीक्षण कर रचा नया कीर्तिमान

बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और एंटी-शिप मिसाइल क्षमता का सफल प्रदर्शन भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने लगातार तीन सफल उड़ान परीक्षणों के जरिए देश की बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली और नई नौसैनिक मिसाइल तकनीक का प्रदर्शन किया है। इस सफलता को भारत की सामरिक सुरक्षा के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि इन परीक्षणों ने विभिन्न प्रकार के दुश्मन खतरों से निपटने की भारत की क्षमता को साबित किया है। दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने की क्षमता DRDO द्वारा किए गए परीक्षणों में बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली का सफल प्रदर्शन किया गया। इस दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक ट्रैक कर उन्हें नष्ट किया। यह प्रणाली विभिन्न ऊंचाइयों और दूरी पर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को पहचानने, उनका पीछा करने और उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करने में सक्षम है। इस तरह की रक्षा प्रणाली किसी भी संभावित हमले के खिलाफ कई स्तरों पर सुरक्षा प्रदान करती है। रक्षा मंत्री ने कहा कि इन सफल परीक्षणों के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) तक को रोकने की क्षमता वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली मौजूद है। आधुनिक युद्धों में बढ़ेगा भारत का सुरक्षा कवच आज के दौर में लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें किसी भी देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानी जाती हैं। ऐसे में एक प्रभावी मिसाइल शील्ड सैन्य ठिकानों, रणनीतिक संस्थानों और महत्वपूर्ण नागरिक क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती है। इन परीक्षणों के दौरान स्वदेशी सेंसर, अत्याधुनिक रडार, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क और इंटरसेप्टर सिस्टम की दक्षता भी सफलतापूर्वक परखी गई। यह भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पहली बार सफल हुआ NASM-MR मिसाइल का परीक्षण मिसाइल रक्षा प्रणाली के अलावा DRDO ने नौसेना के लिए विकसित नई मध्यम दूरी की एंटी-शिप मिसाइल (NASM-MR) का भी पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। यह मिसाइल समुद्र में दुश्मन के युद्धपोतों और अन्य नौसैनिक लक्ष्यों पर दूर से सटीक हमला करने में सक्षम होगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय नौसेना की मारक क्षमता और समुद्री सुरक्षा दोनों में बड़ा इजाफा होगा। 'मिशन सुदर्शन चक्र' के तहत तैयार हो रही नई सुरक्षा व्यवस्था रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद स्थित DRDO की रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान "मिशन सुदर्शन चक्र" का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह परियोजना प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा घोषित दीर्घकालिक रक्षा रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत देश के लिए तीन-स्तरीय मिसाइल सुरक्षा कवच विकसित किया जा रहा है, जो सैन्य ठिकानों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और नागरिक क्षेत्रों को सुरक्षा प्रदान करेगा। आत्मनिर्भर भारत को मिला नया बल इन सफल परीक्षणों ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। अब अगला कदम इन प्रणालियों को बड़े पैमाने पर उत्पादन और सशस्त्र बलों में तैनाती के लिए तैयार करना होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि DRDO की यह उपलब्धि भारत की रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाई पर ले जाएगी और देश की सामरिक शक्ति को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाएगी।  

surbhi जून 13, 2026 0
DRDO JOBS
DRDO ISSA में पेड इंटर्नशिप का मौका, BTech-MTech और MSc छात्रों के लिए आवेदन शुरू

नई दिल्ली,एजेंसियां।  रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट फॉर सिस्टम्स स्टडीज एंड एनालिसिस (ISSA) लैब ने छात्रों के लिए पेड इंटर्नशिप का शानदार अवसर जारी किया है। इस योजना के तहत कुल 25 पदों पर चयन किया जाएगा, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।   20 जून तक कर सकते हैं आवेदन इच्छुक उम्मीदवार 20 जून 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों की इंटर्नशिप 3 अगस्त 2026 से शुरू होगी। आवेदन प्रक्रिया ईमेल के माध्यम से पूरी की जाएगी। उम्मीदवारों को सभी जरूरी दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में भेजने होंगे।   कौन कर सकता है आवेदन? इस इंटर्नशिप के लिए अंतिम वर्ष के छात्र और पोस्टग्रेजुएट उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। पात्रता के तहत BTech/BE (फाइनल ईयर), MSc और MTech के छात्र शामिल हैं। उम्मीदवारों ने किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से प्रथम श्रेणी (First Division) में अध्ययन किया होना चाहिए। पात्र विषयों में कंप्यूटर साइंस, IT, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, गणित, एप्लाइड मैथमेटिक्स, ऑपरेशनल रिसर्च और स्टैटिस्टिक्स जैसे विषय शामिल हैं।   बिना परीक्षा मेरिट पर होगा चयन DRDO ISSA की इस इंटर्नशिप में किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा नहीं होगी। चयन पूरी तरह शैक्षणिक मेरिट और शॉर्टलिस्टिंग के आधार पर किया जाएगा। यह अवसर उन छात्रों के लिए खास माना जा रहा है जो रक्षा क्षेत्र में रिसर्च और डेटा एनालिसिस का अनुभव प्राप्त करना चाहते हैं।   30,000 रुपये तक मिलेगा स्टाइपेंड इंटर्नशिप की अवधि 6 महीने होगी। चयनित छात्रों को हर महीने 5,000 रुपये स्टाइपेंड मिलेगा, यानी कुल 30,000 रुपये की राशि दी जाएगी। भुगतान दो चरणों में किया जाएगा पहले तीन महीने बाद 15,000 रुपये और अंत में शेष 15,000 रुपये।   महत्वपूर्ण तिथियां   आवेदन शुरू: 8 जून 2026 अंतिम तिथि: 20 जून 2026 चयन सूचना: जुलाई 2026 का दूसरा/तीसरा सप्ताह इंटर्नशिप शुरुआत: 3 अगस्त 2026   छात्रों के लिए बड़ा अवसर DRDO ISSA की यह इंटर्नशिप तकनीकी छात्रों के लिए रक्षा अनुसंधान क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का महत्वपूर्ण अवसर है। इसमें काम करने वाले छात्रों को सिस्टम स्टडीज, डेटा एनालिसिस और रिसर्च वर्क का वास्तविक अनुभव मिलेगा, जो उनके करियर को मजबूत बना सकता है।

abhishek singh जून 10, 2026 0
Indian Army tank equipped with TRAWL system clearing mines during military operation
भारत ने 975 करोड़ का रक्षा सौदा किया, सेना की ताकत बढ़ाने के लिए TRAWL सिस्टम खरीदेगा

  सेना की क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम भारत ने अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने 975 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत भारतीय सेना के लिए TRAWL सिस्टम खरीदे जाएंगे। यह समझौता 21 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में हुआ, जहां रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इस डील को अंतिम रूप दिया गया। T-72 और T-90 टैंकों में लगेगा सिस्टम इस सौदे के तहत TRAWL सिस्टम को भारतीय सेना के T-72 और T-90 टैंकों में लगाया जाएगा। इस उपकरण की आपूर्ति Bharat Earth Movers Limited और Electro Pneumatics and Hydraulics (India) Private Limited द्वारा की जाएगी। माइनफील्ड में सुरक्षित रास्ता बनाएगा TRAWL TRAWL सिस्टम को Defence Research and Development Organisation द्वारा विकसित किया गया है। यह तकनीक युद्ध के दौरान माइनफील्ड को पार करने में मदद करती है। इसकी मदद से टैंक और अन्य बख्तरबंद वाहन बारूदी सुरंगों वाले इलाकों में सुरक्षित रास्ता बना सकते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां एंटी-टैंक माइंस लगी होती हैं, यह सिस्टम बेहद कारगर साबित होगा। ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगा बढ़ावा यह सौदा “Buy (Indian–Indigenously Designed, Developed and Manufactured)” श्रेणी के तहत किया गया है, जो सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देता है। इससे देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और घरेलू कंपनियों को नए अवसर मिलेंगे। रोजगार और MSME सेक्टर को फायदा इस परियोजना से न सिर्फ सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि देश के MSME सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। TRAWL सिस्टम के निर्माण में कई छोटे और मध्यम उद्योग शामिल होंगे, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।  

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
राष्ट्रीय

PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0