नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना अपनी मानवरहित युद्ध क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सितंबर के तीसरे सप्ताह में राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जहां देश में विकसित अत्याधुनिक अनमैन्ड सिस्टम और ड्रोन तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में वन-वे अटैक ड्रोन, लंबी दूरी के लोइटरिंग म्यूनिशन, स्वार्म ड्रोन और कार्गो यूएवी समेत कई प्रणालियों को वायुसेना के सामने प्रदर्शित किए जाने की संभावना है। पोखरण का यह कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि फायरिंग रेंज पाकिस्तान सीमा से करीब 270 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में यहां स्वदेशी ड्रोन और मानवरहित प्रणालियों का परीक्षण और प्रदर्शन भारत की बदलती युद्ध रणनीति और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम संकेत माना जा रहा है। स्वदेशी मानवरहित तकनीक पर वायुसेना का बढ़ता फोकस आधुनिक युद्ध में ड्रोन अब केवल निगरानी तक सीमित नहीं रह गए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में हुए संघर्षों ने दिखाया है कि कम लागत वाले ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और स्वार्म तकनीक युद्ध के मैदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भारतीय वायुसेना भी इसी बदलते युद्ध परिदृश्य को देखते हुए लंबी दूरी तक काम करने वाले मानवरहित सिस्टम में रुचि दिखा रही है। कार्यक्रम में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों और स्टार्टअप्स को अपने स्वदेशी उत्पादों की क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। 1,000 किलोमीटर से अधिक रेंज वाले ड्रोन पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, वायुसेना ऐसे ड्रोन सिस्टम को देखने में रुचि रखती है जिनकी ऑपरेशनल रेंज 1,000 किलोमीटर से अधिक हो और जो ऑपरेटर को वास्तविक समय में वीडियो फीड उपलब्ध करा सकें। इसके अलावा 300 किलोमीटर से अधिक रेंज वाले स्वार्म ड्रोन सिस्टम भी चर्चा के केंद्र में हैं। स्वार्म ड्रोन तकनीक में बड़ी संख्या में ड्रोन को समन्वित तरीके से संचालित किया जा सकता है, जिससे निगरानी और सैन्य अभियानों में नई क्षमताएं विकसित हो सकती हैं। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के खिलाफ भी तैयारी आधुनिक युद्ध में जैमर और स्पूफिंग सिस्टम बड़ी चुनौती बन चुके हैं। ऐसे में वायुसेना ऐसे मानवरहित प्लेटफॉर्म की तलाश कर रही है जो इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़े खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम हों। यानी भविष्य की ड्रोन क्षमता सिर्फ हमला करने तक सीमित नहीं होगी। निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और लक्ष्य की पहचान जैसी भूमिकाओं में भी इन प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ सकता है। लॉजिस्टिक्स में भी काम आएंगे कार्गो यूएवी पोखरण में केवल लड़ाकू ड्रोन ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स के लिए इस्तेमाल होने वाले मानवरहित हवाई वाहनों का भी प्रदर्शन होने की संभावना है। ऐसे यूएवी दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सैनिकों तक जरूरी सामान पहुंचाने, मेडिकल सप्लाई ले जाने और जरूरत पड़ने पर घायल सैनिकों को निकालने जैसे मिशनों में उपयोगी साबित हो सकते हैं। पाकिस्तान सीमा के करीब परीक्षण क्यों अहम? पोखरण की भौगोलिक स्थिति इस कार्यक्रम को रणनीतिक रूप से खास बनाती है। पाकिस्तान सीमा के अपेक्षाकृत करीब होने के कारण यहां प्रदर्शित तकनीकों का परीक्षण भारतीय परिस्थितियों और संभावित ऑपरेशनल जरूरतों के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, केवल किसी सिस्टम के प्रदर्शन या परीक्षण को किसी विशेष सैन्य कार्रवाई की तैयारी के रूप में देखना उचित नहीं होगा। यह कार्यक्रम व्यापक रूप से भारतीय वायुसेना की भविष्य की मानवरहित और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को परखने तथा उद्योग से तकनीकी समाधान हासिल करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। भारत के लिए बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमता का संकेत ड्रोन और यूएवी के क्षेत्र में घरेलू कंपनियों और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है। यदि इन प्रणालियों को परीक्षणों के बाद वायुसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप चुना जाता है, तो इससे घरेलू रक्षा उद्योग को भी बड़ा प्रोत्साहन मिल सकता है। पोखरण में होने वाला यह कार्यक्रम इसलिए सिर्फ ड्रोन प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। यह संकेत देता है कि भारतीय वायुसेना भविष्य के युद्धक्षेत्र में लंबी दूरी, स्वार्म तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और मानवरहित लॉजिस्टिक्स जैसी क्षमताओं को कितनी गंभीरता से देख रही है।
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण लड़ाकू विमानों में शामिल Su-30MKI को आने वाले वर्षों में और अधिक आधुनिक तथा स्वदेशी तकनीक से लैस करने की तैयारी तेज हो गई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड अपने नासिक स्थित संयंत्र में Su-30MKI के निर्माण को फिर से गति देने जा रहा है। योजना के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में पहला नया विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे जाने की संभावना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नासिक संयंत्र में वर्ष 2029 तक कुल 12 नए Su-30MKI लड़ाकू विमान तैयार किए जाने की योजना है। इन विमानों में इस्तेमाल होने वाले करीब 50 प्रतिशत कलपुर्जे और उपकरण भारत में निर्मित होने की योजना है। इससे Su-30MKI कार्यक्रम में घरेलू रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। 12 नए Su-30MKI के लिए करीब 11 हजार करोड़ रुपये का करार भारतीय वायुसेना ने दुर्घटनाओं में खोए 12 Su-30MKI विमानों की भरपाई के लिए नए विमान हासिल करने का फैसला किया था। इसके लिए दिसंबर 2024 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ करीब 11,000 करोड़ रुपये का करार किया गया। इस समझौते के तहत नासिक संयंत्र में 12 नए Su-30MKI तैयार किए जाने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन विमानों में लगाए जाने वाले करीब आधे कलपुर्जों का निर्माण भारत में किया जाएगा। पहले विमान की आपूर्ति वर्ष 2027-28 में होने की संभावना है, जबकि 12 विमानों की पूरी खेप वर्ष 2029 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। पुराने Su-30MKI बेड़े का भी होगा बड़ा आधुनिकीकरण HAL की योजना सिर्फ नए लड़ाकू विमान बनाने तक सीमित नहीं है। भारतीय वायुसेना के मौजूदा Su-30MKI बेड़े को भी बड़े स्तर पर उन्नत करने की तैयारी है। इस आधुनिकीकरण कार्यक्रम पर करीब 60,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कार्यक्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ की भूमिका भी होगी। इसके अलावा भारतीय निजी कंपनियों से भी कई उपकरण और प्रणालियां हासिल की जाएंगी। इस अपग्रेड कार्यक्रम का उद्देश्य Su-30MKI की निगरानी, लक्ष्य पहचान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और हथियार प्रणाली से जुड़ी क्षमताओं को आधुनिक बनाना है। दो चरणों में होगा अपग्रेडेशन Su-30MKI के आधुनिकीकरण का काम दो प्रमुख चरणों में किए जाने की योजना है। पहले चरण में विमानों में आधुनिक एवियोनिक्स और नए रडार लगाए जाएंगे। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली को भी मजबूत किया जाएगा। नई प्रणाली विमान की ओर आने वाले खतरों की पहचान करने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें बाधित करने में मदद करेगी। विमानों में अत्याधुनिक इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक प्रणाली भी लगाए जाने की योजना है। इससे विमान बिना पारंपरिक रडार पर पूरी तरह निर्भर हुए हवाई लक्ष्यों की पहचान और निगरानी करने में सक्षम होगा। दूसरे चरण में फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम समेत अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों को आधुनिक बनाया जाएगा। इससे पुराने हो रहे Su-30MKI विमानों की परिचालन क्षमता और सेवा अवधि को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। डीआरडीओ और निजी क्षेत्र की भी होगी भूमिका इस आधुनिकीकरण कार्यक्रम में स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा। डीआरडीओ के साथ-साथ भारतीय निजी कंपनियों को भी उपकरण और प्रणालियों की आपूर्ति में शामिल किए जाने की योजना है। इससे न केवल Su-30MKI को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में घरेलू कंपनियों की भूमिका भी बढ़ेगी। लंबे समय में इसका असर देश की रक्षा आपूर्ति श्रृंखला और आत्मनिर्भरता पर पड़ सकता है। Su-30MKI की क्या है खासियत? Su-30MKI एक भारी और लंबी दूरी तक प्रभावी ढंग से काम करने वाला बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है। इसका अधिकतम टेकऑफ वजन करीब 38,800 किलोग्राम बताया जाता है। विमान में लगभग 9,640 किलोग्राम ईंधन और करीब 8,000 किलोग्राम तक हथियार ले जाने की क्षमता बताई जाती है। इसकी भारी हथियार क्षमता के कारण इसे विभिन्न प्रकार के हवाई और जमीनी अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह ब्रह्मोस जैसी भारी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को ले जाने में भी सक्षम है। भारतीय वायुसेना के बेड़े में Su-30MKI की संख्या और भूमिका को देखते हुए इसका आधुनिकीकरण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम Su-30MKI का नया निर्माण और पुराने बेड़े का व्यापक आधुनिकीकरण भारत की रक्षा उत्पादन नीति के लिए भी महत्वपूर्ण है। नए विमानों में 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल की योजना और अपग्रेड कार्यक्रम में भारतीय कंपनियों की भागीदारी से घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में यदि स्वदेशी रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, एवियोनिक्स और फ्लाइट कंट्रोल तकनीक को सफलतापूर्वक Su-30MKI में शामिल किया जाता है, तो यह विमान भारतीय वायुसेना के लिए और अधिक सक्षम प्लेटफॉर्म बन सकता है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नासिक संयंत्र से पहला नया Su-30MKI निर्धारित समय के अनुसार कब भारतीय वायुसेना को मिलता है और आधुनिकीकरण कार्यक्रम को किस गति से आगे बढ़ाया जाता है।
नई दिल्ली: पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल (रिटायर्ड) अनिल चौहान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 10 मई 2025 की घटनाओं का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने जिस तेजी से भारत से सीजफायर की गुहार लगाई, वह उसकी सैन्य स्थिति के तेजी से कमजोर होने का संकेत था। उनके अनुसार, भारतीय सेना ने तब तक अपने सैन्य अभियान का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं किया था, लेकिन पाकिस्तान बातचीत के लिए मजबूर हो गया। द प्रिंट के एक कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल चौहान ने कहा कि 9 मई तक पाकिस्तान की ओर से भारत को 48 घंटे में सबक सिखाने जैसे दावे किए जा रहे थे। लेकिन 10 मई की सुबह हालात पूरी तरह बदल गए और पाकिस्तान ने भारत से संपर्क कर बातचीत की इच्छा जताई। "हमारे प्लान का आधा भी पूरा नहीं हुआ था" जनरल अनिल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से सीजफायर का प्रस्ताव उनके लिए भी अप्रत्याशित था। उन्होंने कहा, "10 मई की सबसे बड़ी हैरानी यह थी कि पाकिस्तान ने खुद फोन कर बातचीत की इच्छा जताई। उस समय तक हमने अपने सैन्य अभियान का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं किया था।" उनके मुताबिक, पाकिस्तान ने लगभग आठ घंटे के भीतर ही बातचीत का रास्ता चुन लिया, जबकि भारतीय सेना अपने अगले चरण की कार्रवाई की तैयारी कर चुकी थी। भारत ने तुरंत सीजफायर क्यों नहीं माना? पूर्व CDS के अनुसार, भारत चाहता था कि सीजफायर से पहले उसके सभी रणनीतिक सैन्य उद्देश्य पूरे हो जाएं। भारतीय सशस्त्र बलों की योजना थी कि पाकिस्तान के ऐसे सभी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाए, जहां से भविष्य में भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना हो। इसलिए भारत ने पाकिस्तान के प्रस्ताव के बावजूद कुछ समय तक सैन्य अभियान जारी रखा। पाकिस्तान क्यों हुआ मजबूर? जनरल चौहान ने बताया कि 10 मई की सुबह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के सरगोधा और नूर खान एयरबेस समेत कई महत्वपूर्ण एयरबेस पर सटीक हमले किए। इन हमलों के कारण: पाकिस्तान के कई एयरबेस गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। एयरस्ट्रिप प्रभावित होने से लड़ाकू विमानों का संचालन मुश्किल हो गया। पाकिस्तानी वायुसेना की परिचालन क्षमता पर बड़ा असर पड़ा। पाकिस्तान को यह एहसास हो गया कि यदि भारतीय कार्रवाई जारी रही तो उसकी सैन्य स्थिति और कमजोर हो जाएगी। जनरल चौहान के अनुसार, पाकिस्तान की सेना को यह भ्रम था कि उसने रातभर भारत को भारी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन भारतीय वायुसेना की कार्रवाई ने पूरे समीकरण बदल दिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को लगा कि अब बातचीत ही सबसे बेहतर विकल्प है, क्योंकि सैन्य स्थिति उसके नियंत्रण से बाहर जाती दिख रही थी। डीजीएमओ हॉटलाइन के जरिए हुआ संपर्क पूर्व CDS ने बताया कि पाकिस्तान ने डीजीएमओ (Director General of Military Operations) हॉटलाइन के माध्यम से भारत से संपर्क किया। उनके अनुसार, जब यह बातचीत शुरू हुई, तब भी भारतीय सैन्य कार्रवाई पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी और भारतीय सेना अपने अभियान पर आगे बढ़ रही थी। ऑपरेशन सिंदूर क्यों शुरू किया गया? भारत ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के जवाब में 6-7 मई 2025 की रात ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस आतंकी हमले में: 26 लोगों की हत्या की गई थी। मृतकों में 25 पर्यटक शामिल थे। आतंकियों ने कथित तौर पर धर्म पूछकर लोगों को निशाना बनाया। जांच में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) की भूमिका सामने आई। इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। जब पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, तब भारत ने जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया। पूर्व CDS के अनुसार, इसी दौरान पाकिस्तान की वायुसेना को भारी दबाव का सामना करना पड़ा और अंततः उसने सीजफायर की पहल की।
Admiral Nakhimov News: यूक्रेन युद्ध के बीच रूस अपनी नौसैनिक ताकत को और मजबूत करने की तैयारी में है। रूसी नौसेना ने पुष्टि की है कि परमाणु ऊर्जा से संचालित एडमिरल नाखिमोव (Admiral Nakhimov) युद्धपोत को 2026 में फिर से सेवा में शामिल किया जाएगा। इस अत्याधुनिक युद्धपोत पर तीन Ka-31 एयरबॉर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) हेलिकॉप्टर तैनात किए जाने की योजना है। इन्हें आमतौर पर 'उड़ता रडार' (Flying Radar) भी कहा जाता है। S-400 को मिलेगी लंबी दूरी तक निगरानी की क्षमता मिलिट्री वॉच मैगजीन की रिपोर्ट के अनुसार, Ka-31 हेलिकॉप्टरों की तैनाती से युद्धपोत की हवाई निगरानी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। ये हेलिकॉप्टर लंबी दूरी तक दुश्मन के लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल और अन्य हवाई खतरों का पता लगाने में सक्षम हैं। इससे जहाज पर मौजूद S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को समय रहते लक्ष्य की जानकारी मिलेगी और वह अधिक प्रभावी ढंग से जवाबी कार्रवाई कर सकेगा। दुनिया के सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में शामिल एडमिरल नाखिमोव को दुनिया के सबसे बड़े और सबसे अधिक हथियारों से लैस युद्धपोतों में गिना जाता है। यह परमाणु ऊर्जा से संचालित होने के कारण बिना बार-बार ईंधन भरे लंबी दूरी तक अभियान चला सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्धपोत पर: 96 वर्टिकल लॉन्च सेल में S-400 आधारित एयर डिफेंस मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं। 80 से अधिक क्रूज मिसाइलें ले जाने की क्षमता है। इनमें जिरकॉन (Zircon) हाइपरसोनिक मिसाइल भी शामिल है, जो अत्यधिक गति से लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम मानी जाती है। Ka-31 हेलिकॉप्टर कैसे करेंगे मदद? Ka-31 दुनिया के चुनिंदा नौसैनिक एयरबॉर्न अर्ली वार्निंग हेलिकॉप्टरों में शामिल है। इसमें लगा फोल्डिंग रडार सिस्टम हवा में उड़ते हुए लंबी दूरी तक निगरानी कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक यह हेलिकॉप्टर: लड़ाकू विमान और क्रूज मिसाइलों को करीब 150 किलोमीटर की दूरी से ट्रैक कर सकता है। बड़े विमानों की पहचान इससे भी अधिक दूरी से करने में सक्षम है। रडार से जुटाई गई जानकारी सीधे युद्धपोत के कमांड सेंटर या MiG-31 जैसे लड़ाकू विमानों तक भेजी जा सकती है। इससे संभावित खतरे की पहले ही पहचान हो जाएगी, जिससे S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और जिरकॉन हाइपरसोनिक मिसाइलों को लक्ष्य पर तेज और अधिक सटीक कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। रूस की नौसैनिक क्षमता होगी और मजबूत विशेषज्ञों का मानना है कि Ka-31 हेलिकॉप्टरों की तैनाती के बाद एडमिरल नाखिमोव केवल भारी हथियारों वाला युद्धपोत ही नहीं रहेगा, बल्कि समुद्र में एक अत्याधुनिक हवाई निगरानी और मिसाइल रक्षा प्लेटफॉर्म के रूप में भी काम करेगा। इससे रूस की नौसैनिक क्षमता और लंबी दूरी तक समुद्री अभियानों की ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।
नई दिल्ली/कारवार, एजेंसियां। भारतीय नौसेना ने स्वदेशी युद्धपोत INS मालवन को आधिकारिक तौर पर अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर आयोजित समारोह में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह की मौजूदगी में इस पोत को कमीशन किया गया। INS मालवन माहे श्रेणी की एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट श्रृंखला का दूसरा युद्धपोत है, जिसे तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया गया है। 'आत्मनिर्भर भारत' का मजबूत उदाहरण INS मालवन का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है और इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण एवं तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। यह युद्धपोत रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अत्याधुनिक रडार, सोनार, टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट सिस्टम से लैस यह पोत भारतीय नौसेना की आधुनिक युद्ध क्षमता को और मजबूत करेगा। हिंद महासागर में बढ़ती चुनौतियों से निपटने में मिलेगी मदद हाल के वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की पनडुब्बियों की गतिविधियां बढ़ी हैं। ऐसे में INS मालवन की तैनाती भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमता को नई ताकत देगी। यह युद्धपोत तटीय इलाकों में निगरानी, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और रणनीतिक अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। शिवाजी महाराज की समुद्री विरासत से जुड़ा नाम इस युद्धपोत का नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन के नाम पर रखा गया है, जो छत्रपति शिवाजी महाराज की समृद्ध समुद्री विरासत से जुड़ा रहा है। युद्धपोत के प्रतीक चिन्ह (क्रेस्ट) में भी शिवाजी महाराज की वीरता और समुद्री शक्ति को दर्शाने वाले तत्व शामिल किए गए हैं। भारतीय नौसेना की ताकत में एक और बड़ा इजाफा रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि INS मालवन के शामिल होने से भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह पोत भविष्य में हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री रणनीति को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
भारतीय वायुसेना का एक विशेष दल बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘एक्स पिच ब्लैक 2026’ में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन से रवाना हुआ यह दल अब ऑस्ट्रेलिया के डार्विन स्थित रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (RAAF) बेस पर आयोजित अभ्यास में भाग ले रहा है। यह सैन्य अभ्यास 7 अगस्त तक चलेगा, जिसमें 19 देशों की वायु सेनाएं शामिल हैं। राफेल समेत कई आधुनिक विमान दिखाएंगे दम इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना अपने अत्याधुनिक लड़ाकू और रणनीतिक विमानों के साथ हिस्सा ले रही है। इनमें शामिल हैं: राफेल लड़ाकू विमान – आधुनिक हथियारों और उन्नत तकनीक से लैस भारत के प्रमुख फाइटर जेट। सी-17 ग्लोबमास्टर-III – भारी सैन्य उपकरण और सैनिकों के रणनीतिक परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाला विमान। आईएल-78 एयर टैंकर – हवा में उड़ान के दौरान लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने की क्षमता वाला विशेष विमान। इनके साथ भारतीय दल में अनुभवी पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन और सैन्य रणनीतिक विशेषज्ञ भी शामिल हैं। इंडो-पैसिफिक में बढ़ेगा रक्षा सहयोग ‘एक्स पिच ब्लैक’ दुनिया के सबसे बड़े और जटिल बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यासों में गिना जाता है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों की वायु सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना, संयुक्त सैन्य अभियानों का अभ्यास करना और आधुनिक युद्ध तकनीकों का आदान-प्रदान करना है। साथ ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है। कलाईकुंडा एयरबेस की अहम भूमिका इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में पश्चिम बंगाल का कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारतीय दल इसी सामरिक एयरबेस से उड़ान भरकर ऑस्ट्रेलिया पहुंचा है। कलाईकुंडा भारतीय वायुसेना के प्रमुख रणनीतिक ठिकानों में शामिल है और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों के संचालन के लिए जाना जाता है। चौथी बार ‘पिच ब्लैक’ में भारत की भागीदारी भारतीय वायुसेना इससे पहले 2018, 2022 और 2024 में भी ‘एक्स पिच ब्लैक’ युद्धाभ्यास का हिस्सा रह चुकी है। वर्ष 2026 में लगातार चौथी बार इस अभ्यास में शामिल होकर भारत अपनी बढ़ती सैन्य क्षमता, वैश्विक साझेदारी और परिचालन दक्षता का प्रदर्शन कर रहा है। भारतीय वायुसेना की यह भागीदारी न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सैन्य ताकत को प्रदर्शित करेगी, बल्कि मित्र देशों के साथ सामरिक सहयोग को भी नई मजबूती देगी।
नई दिल्ली: नई कार खरीदते समय ज्यादातर परिवार माइलेज और कीमत के साथ-साथ सुरक्षा को भी सबसे बड़ी प्राथमिकता देते हैं। खासकर अगर घर में छोटे बच्चे हों, तो मजबूत बॉडी, चाइल्ड सेफ्टी फीचर्स और बेहतर क्रैश टेस्ट रेटिंग वाली कार चुनना बेहद जरूरी हो जाता है। भारतीय बाजार में कई ऐसी कारें उपलब्ध हैं, जिन्हें बच्चों और परिवार की सुरक्षा के लिहाज से बेहतर माना जाता है। इनमें टाटा मोटर्स, स्कोडा और वॉक्सवैगन जैसी कंपनियों के मॉडल शामिल हैं। आइए जानते हैं ऐसी 5 कारों के बारे में जो एडवांस सेफ्टी फीचर्स और बेहतर क्रैश टेस्ट प्रदर्शन के लिए जानी जाती हैं। 1. Tata Safari टाटा सफारी फैमिली SUV सेगमेंट की लोकप्रिय कारों में से एक है। यह मजबूत बॉडी स्ट्रक्चर और आधुनिक सुरक्षा तकनीकों के साथ आती है। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹13.39 लाख मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 7 एयरबैग इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP) ADAS (लेवल-2) फीचर्स इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक ऑटो होल्ड इमरजेंसी और ब्रेकडाउन कॉल ISOFIX चाइल्ड सीट सपोर्ट 2. Tata Harrier अगर आपकी फैमिली बड़ी है और आप प्रीमियम SUV खरीदना चाहते हैं, तो टाटा हैरियर एक मजबूत विकल्प हो सकती है। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹12.99 लाख मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 7 एयरबैग एडवांस ESP ADAS टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) OMEGARC प्लेटफॉर्म इमरजेंसी कॉलिंग सिस्टम 3. Skoda Kushaq स्कोडा कुशाक कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट की लोकप्रिय कार है, जिसमें परिवार की सुरक्षा के लिए कई आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹10.69 लाख इंजन विकल्प: 1.0 लीटर टर्बो पेट्रोल 1.5 लीटर टर्बो पेट्रोल मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) ABS के साथ EBD ISOFIX चाइल्ड सीट माउंट मल्टी-कोलिजन ब्रेक TPMS 4. Volkswagen Virtus अगर आप सेडान पसंद करते हैं, तो Volkswagen Virtus सुरक्षा के मामले में मजबूत विकल्प मानी जाती है। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹10.70 लाख मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) ISOFIX चाइल्ड सीट एंकरेज हिल होल्ड कंट्रोल मल्टी-कोलिजन ब्रेक पार्क डिस्टेंस कंट्रोल 5. Skoda Slavia स्कोडा स्लाविया भी फैमिली सेडान सेगमेंट में सुरक्षा के लिहाज से अच्छी मानी जाती है। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹9.99 लाख इंजन विकल्प: 1.0 लीटर टर्बो पेट्रोल 1.5 लीटर टर्बो पेट्रोल मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग ABS के साथ EBD सभी सीटों पर 3-पॉइंट सीट बेल्ट ट्रैक्शन कंट्रोल हिल होल्ड कंट्रोल मल्टी-कोलिजन ब्रेक रियर पार्किंग कैमरा ISOFIX चाइल्ड सीट माउंट बच्चों की सुरक्षा के लिए कार खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान? कार खरीदते समय केवल एयरबैग की संख्या ही नहीं, बल्कि इन बातों पर भी ध्यान दें: ISOFIX चाइल्ड सीट माउंट की उपलब्धता इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) ABS और EBD मजबूत क्रैश टेस्ट रेटिंग 3-पॉइंट सीट बेल्ट ADAS जैसे एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस फीचर्स (यदि उपलब्ध हों) अगर आपकी प्राथमिकता परिवार और बच्चों की सुरक्षा है, तो बेहतर क्रैश टेस्ट रेटिंग, मजबूत बॉडी स्ट्रक्चर और आधुनिक सेफ्टी फीचर्स वाली कार चुनना लंबे समय में अधिक सुरक्षित और फायदेमंद साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: भारत अपनी उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित हाई-एल्टीट्यूड एयरशिप को जल्द ही लद्दाख में तैनात किया जाएगा। यह अत्याधुनिक प्रणाली सीमावर्ती क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी रखने और सेना को रियल टाइम खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगी। 20 किलोमीटर की ऊंचाई से रखेगा नजर जानकारी के अनुसार, यह एयरशिप लगभग 20 किलोमीटर (करीब 66,000 फीट) की ऊंचाई तक संचालित हो सकेगा। इतनी ऊंचाई से यह सीमावर्ती इलाकों में होने वाली हर गतिविधि पर लगातार नजर रखेगा और किसी भी संदिग्ध हलचल की तत्काल जानकारी सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचाएगा। आधुनिक सेंसर और रडार से लैस एयरशिप में अत्याधुनिक कैमरे, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, रडार और अन्य निगरानी उपकरण लगाए जा रहे हैं। ये उपकरण दिन और रात, दोनों परिस्थितियों में लंबी दूरी तक निगरानी करने में सक्षम होंगे। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ, सैन्य गतिविधियों और अन्य सुरक्षा चुनौतियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा। DRDO ने किया विकसित इस परियोजना का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) कर रहा है। इसे विशेष रूप से ऊंचाई वाले दुर्गम और कठिन इलाकों में प्रभावी निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है, जहां पारंपरिक निगरानी प्रणालियों को संचालन में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अंतिम चरण में है परीक्षण रक्षा सूत्रों के मुताबिक, हाई-एल्टीट्यूड एयरशिप का परीक्षण अंतिम चरण में है। परीक्षण सफल होने के बाद इसे सबसे पहले लद्दाख में तैनात किया जाएगा। भविष्य में आवश्यकता के अनुसार अन्य संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में भी इसकी तैनाती की जा सकती है। सीमा सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से भारतीय सेना की निगरानी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। लगातार निगरानी और रियल टाइम अलर्ट मिलने से घुसपैठ की कोशिशों को समय रहते विफल किया जा सकेगा और किसी भी आपात स्थिति में सेना की प्रतिक्रिया पहले से अधिक तेज और प्रभावी होगी। वैश्विक तकनीक की दिशा में भारत का कदम दुनिया के कई देश पहले से ही उन्नत हवाई निगरानी प्रणालियों का उपयोग कर रहे हैं। अमेरिका लंबे समय से निगरानी एयरशिप, ड्रोन और उपग्रह आधारित नेटवर्क का इस्तेमाल करता रहा है, जबकि चीन ने तिब्बत और सीमावर्ती क्षेत्रों में अपने निगरानी ढांचे को मजबूत किया है। रूस के पास भी सीमा सुरक्षा के लिए उन्नत हवाई निगरानी प्रणाली मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह हाई-एल्टीट्यूड एयरशिप देश की रक्षा तैयारियों को नई तकनीकी क्षमता देगा और सीमाओं की सुरक्षा को अधिक आधुनिक, प्रभावी और भरोसेमंद बनाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा क्षेत्र में बड़ा समझौता हुआ है। दोनों देशों ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की आपूर्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कदम को भारत के रक्षा निर्यात और दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी की तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में संपन्न हुआ। इंडोनेशिया खरीदेगा Astra मिसाइल भी समझौते के तहत इंडोनेशिया भारत में विकसित Astra एयर-टू-एयर मिसाइल का भी आयात करेगा। यह मिसाइल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की गई है। Astra एक Beyond Visual Range (BVR) मिसाइल है, जिसे लंबी दूरी से दुश्मन के अत्यधिक गतिशील लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। ब्रह्मोस की अतिरिक्त बैटरियां भी मिल सकती हैं रिपोर्ट के अनुसार, भारत भविष्य में इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त बैटरियां भी उपलब्ध करा सकता है। माना जा रहा है कि हालिया सैन्य अभियानों में ब्रह्मोस और Astra जैसी स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों के प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी विश्वसनीयता और मांग बढ़ी है। समुद्री सुरक्षा सहयोग पर भी बनी सहमति दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा और समुद्री संरक्षा (Maritime Safety and Security) को लेकर भी एक व्यापक सहयोग ढांचा तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ता विश्वास रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को नई मजबूती दे रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनाई है। स्वास्थ्य और औद्योगिक सहयोग भी होगा मजबूत प्रधानमंत्री ने कहा कि नए समझौतों के बाद भारत की उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती दवाएं इंडोनेशिया के नागरिकों तक अधिक आसानी से पहुंच सकेंगी। साथ ही, भारत इंडोनेशिया के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण में भी सहयोग करेगा। क्रिटिकल मिनरल्स पर भी हुआ समझौता भारत और इंडोनेशिया ने स्टील सप्लाई चेन से जुड़े महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और तकनीकों पर भी समझौता किया है। इसका उद्देश्य वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। चुनाव तकनीक में भी सहयोग की संभावना सूत्रों के मुताबिक, भारत इंडोनेशिया के लिए वहां की आवश्यकताओं के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) विकसित करने में भी सहयोग कर सकता है। इसे भारत की चुनाव प्रबंधन तकनीक पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विश्वास का संकेत माना जा रहा है।
नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद (Defence Acquisition Council-DAC) की बैठक में करीब ₹52 हजार करोड़ के अत्याधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दे दी गई। इन प्रस्तावों को एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (AoN) प्रदान किया गया है, जिसके बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना की निगरानी, मारक क्षमता और रक्षा तंत्र पहले से अधिक मजबूत होगा। इन हथियारों की खरीद को मिली मंजूरी DAC ने कई अहम रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी है, जिनमें शामिल हैं— आकाश तरंग (AKASH TARANG) एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम मैन-पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS) टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन सिस्टम क्या होता है AoN? रक्षा खरीद प्रक्रिया में Acceptance of Necessity (AoN) पहला आधिकारिक चरण होता है। इसका अर्थ है कि सरकार ने संबंधित सैन्य उपकरण की आवश्यकता को मंजूरी दे दी है। इसके बाद टेंडर, तकनीकी मूल्यांकन और खरीद अनुबंध जैसी प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। भारतीय सेना को मिलेगी नई तकनीकी ताकत रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आकाश तरंग प्रणाली दुश्मन के ड्रोन और मानव रहित हवाई वाहनों (UAV) का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम होगी। वहीं MPATGM पैदल सैनिकों को दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने की क्षमता देगा। MRSAM मध्यम दूरी से आने वाले लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और मिसाइल जैसे हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगा। V-SHORADS कम दूरी की हवाई सुरक्षा को मजबूत करेगा, जबकि टैंकों के लिए स्वीकृत एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम एंटी-टैंक मिसाइलों से बेहतर सुरक्षा देगा। इसके अलावा जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन कम लागत में अधिक प्रभावी हमले और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। नौसेना के लिए भी कई आधुनिक प्रणालियां मंजूर भारतीय नौसेना के लिए भी कई नई रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी मिली है। इनमें शामिल हैं— मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (MIGM) नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम (NSUAS) इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी (LBTF) रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये प्रणालियां समुद्री निगरानी, युद्ध क्षमता और नौसैनिक प्लेटफॉर्म के आधुनिकीकरण को नई मजबूती देंगी। वायुसेना को मिलेगा हाई-एल्टीट्यूड सर्विलांस सिस्टम भारतीय वायुसेना के लिए फिक्स्ड विंग हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (FW-HAPS) की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। यह प्रणाली इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस (ISR), दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसे मिशनों में वायुसेना की क्षमता बढ़ाएगी। नई सैन्य नेतृत्व टीम की पहली DAC बैठक यह रक्षा खरीद परिषद की पहली बैठक थी, जिसमें नए सैन्य नेतृत्व ने भाग लिया। बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणी, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और हाल ही में पदभार संभालने वाले थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ मौजूद रहे। रक्षा बजट में पहले ही हुआ है बड़ा इजाफा केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹7.85 लाख करोड़ का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक है। इसमें ₹2.19 लाख करोड़ पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिनका उपयोग लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, पनडुब्बियां, मिसाइल, तोप, स्मार्ट हथियार और विभिन्न मानव रहित प्रणालियों की खरीद पर किया जाएगा.
नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय सेना की एक अहम नियुक्ति पर खुशी और गर्व व्यक्त किया है। उन्होंने अपने बहनोई लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर को भारतीय सेना की दक्षिणी कमान (सदर्न कमांड) का नया जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) नियुक्त किए जाने पर बधाई दी। थरूर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह उनके परिवार के साथ-साथ पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर, शशि थरूर की दिवंगत पत्नी सुनंदा पुष्कर के भाई हैं। थरूर ने बताया कि उन्होंने फोन पर राजेश पुष्कर से बातचीत कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में राजेश पुष्कर के साथ एक पुरानी तस्वीर और एक वीडियो भी साझा किया। 1 जुलाई से संभालेंगे दक्षिणी कमान की कमान शशि थरूर ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर 1 जुलाई से भारतीय सेना की दक्षिणी कमान का नेतृत्व संभालेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की छह ऑपरेशनल कमांड में दक्षिणी कमान क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ी है और देश के कई महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक क्षेत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाती है। 'उनकी सैन्य क्षमता पर पूरा भरोसा' थरूर ने कहा कि राजेश पुष्कर का सैन्य अनुभव, उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड और वर्दी के प्रति समर्पण उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए पूरी तरह उपयुक्त बनाता है। उन्होंने लिखा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि वह इस पद की जिम्मेदारियों का निर्वहन सर्वोच्च पेशेवर क्षमता और सम्मान के साथ करेंगे। उन्होंने कहा कि एक सक्षम और समर्पित सैन्य अधिकारी का इतनी महत्वपूर्ण कमान संभालना न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे देश के लिए भरोसे और गर्व की बात है। पिपिंग सेरेमनी की तस्वीर भी की साझा अपने पोस्ट में शशि थरूर ने एक तस्वीर साझा की, जिसे उन्होंने उस समय की बताया जब राजेश पुष्कर को मेजर जनरल के पद पर पदोन्नत किया गया था। इस पिपिंग सेरेमनी में थरूर और राजेश पुष्कर की पत्नी अनु भी मौजूद थीं। ऑपरेशन सिंदूर का वीडियो भी किया साझा थरूर द्वारा साझा किए गए वीडियो में लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए दिखाई देते हैं। वीडियो में वह अभियान को भारतीय सेना की महत्वपूर्ण सफलता बताते हैं और कहते हैं कि सेना भविष्य में भी किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। देशवासियों से मांगा समर्थन पोस्ट के अंत में शशि थरूर ने देशवासियों से अपील की कि वे भी लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दें। उन्होंने लिखा कि वह देश की सुरक्षा और सेवा की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। पोस्ट का समापन उन्होंने "जय हिंद!" के साथ किया।
पाकिस्तान की नई हैंगोर क्लास पनडुब्बी (PNS Hangor) एक बार फिर बंगाल की खाड़ी को लेकर चर्चा में है। पाकिस्तान नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के हालिया बयानों ने संकेत दिए हैं कि इस पनडुब्बी का इस्तेमाल केवल अरब सागर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में बंगाल की खाड़ी में भी पाकिस्तान अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश करेगा। चीन में निर्मित पाकिस्तान की पहली हैंगोर क्लास पनडुब्बी पिछले सप्ताह कराची पहुंची। इसके बाद पाकिस्तान नौसेना के अधिकारियों ने इसे ‘गेम चेंजर’ करार दिया और कहा कि इस नई क्षमता से पाकिस्तान दूरस्थ समुद्री क्षेत्रों, विशेषकर बंगाल की खाड़ी, में भी अपनी मौजूदगी बनाए रखने में सक्षम होगा। श्रीलंका में पाकिस्तानी अधिकारी ने क्या कहा? कोलंबो स्थित समाचार पोर्टल ‘द मॉर्निंग’ के अनुसार, पनडुब्बी के एस्कॉर्ट बेड़े का नेतृत्व कर रहे पाकिस्तानी कमोडोर उमर फारूक ने कहा कि हैंगोर क्लास पनडुब्बियों के शामिल होने से पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में भी अपनी उपस्थिति बनाए रखने में सक्षम होगा। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान कुल आठ हैंगोर क्लास पनडुब्बियों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना पर काम कर रहा है। बंगाल की खाड़ी क्यों है रणनीतिक रूप से अहम? 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद से बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियां लगभग नगण्य रही हैं। दूसरी ओर यह क्षेत्र भारत की समुद्री रणनीति का महत्वपूर्ण केंद्र है। भारतीय नौसेना की पूर्वी कमान का मुख्यालय विशाखापट्टनम में स्थित है। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत को इस क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त प्रदान करते हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और इंडो-पैसिफिक रणनीति का बड़ा हिस्सा भी इसी समुद्री क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। क्या है PNS हैंगोर का इतिहास? ‘हैंगोर’ नाम भारतीय नौसैनिक इतिहास में विशेष महत्व रखता है। 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी पनडुब्बी पीएनएस हैंगोर ने भारतीय युद्धपोत आईएनएस खुकरी को निशाना बनाकर डुबो दिया था। इस हमले में 176 भारतीय नौसैनिक शहीद हुए थे, जिनमें कप्तान महेंद्र नाथ मुल्ला भी शामिल थे, जिन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। इस घटना के बावजूद पाकिस्तान 1971 का युद्ध हार गया और बांग्लादेश का जन्म हुआ। अब पाकिस्तान ने अपनी नई पनडुब्बी परियोजना के लिए फिर से ‘हैंगोर’ नाम चुना है। क्या है हैंगोर क्लास पनडुब्बियों की खासियत? हैंगोर क्लास पनडुब्बियां पाकिस्तान की सबसे बड़ी नौसैनिक आधुनिकीकरण परियोजना का हिस्सा हैं। इनमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक होने की बात कही जाती है, जिससे ये पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती हैं और उन्हें बार-बार सतह पर आकर बैटरी चार्ज करने की आवश्यकता नहीं होती। इस तकनीक के कारण इन पनडुब्बियों को ट्रैक करना और उनकी गतिविधियों का पता लगाना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है। बांग्लादेश से बढ़ती नजदीकियां भी बढ़ा रहीं चिंता 2024 में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के संबंधों में तेजी से सुधार देखने को मिला है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें शुरू हुई हैं, व्यापार में वृद्धि हुई है और रक्षा सहयोग को लेकर भी बातचीत तेज हुई है। नवंबर 2025 में पाकिस्तानी युद्धपोत पीएनएस सैफ की चट्टोग्राम यात्रा 1971 के बाद पहली ऐसी घटना थी, जब कोई पाकिस्तानी युद्धपोत बांग्लादेश पहुंचा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, खुफिया साझेदारी और संयुक्त सैन्य अभ्यासों को संस्थागत रूप देने पर भी चर्चा चल रही है। अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि बांग्लादेश पाकिस्तान को अपने बंदरगाहों या सैन्य सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति देगा। भारत की चिंता कितनी बढ़ी? विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की नई पनडुब्बियां तत्काल तौर पर बंगाल की खाड़ी में शक्ति संतुलन बदलने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन वे भारत के लिए एक अतिरिक्त सामरिक चुनौती जरूर पैदा कर सकती हैं। भारतीय नौसेना पिछले पांच दशकों में काफी मजबूत हुई है। भारत के पास परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियां, दो विमानवाहक पोत और लंबी दूरी की समुद्री निगरानी क्षमताएं मौजूद हैं। भारत अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है। इसके बावजूद पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक क्षमताएं और बांग्लादेश के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियां भारत के लिए एक नए रणनीतिक समीकरण को जन्म दे सकती हैं। इसी वजह से भारत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आसपास अपनी समुद्री और निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
मॉस्को: रूस का रणनीतिक बॉम्बर विमान Tu-22M3 सोमवार को साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, विमान अचानक नियंत्रण खोकर जमीन की ओर तेजी से गिरा, जिससे घटनास्थल पर धुएं का बड़ा गुबार उठ गया। विमान में सवार चारों क्रू मेंबर समय रहते इजेक्ट करने में सफल रहे और उनकी जान बच गई। चारों क्रू मेंबर सुरक्षित, अस्पताल में भर्ती रूसी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि विमान में मौजूद चारों पायलट पैराशूट के जरिए सुरक्षित बाहर निकल गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि दुर्घटना में जमीन पर किसी प्रकार का नुकसान या हताहत नहीं हुआ है। कामेंका गांव के पास हुआ हादसा इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर इगोर कोबजेव के मुताबिक, यह हादसा कामेंका गांव के नजदीक हुआ। प्रारंभिक जांच में विमान के इंजन में खराबी को दुर्घटना की संभावित वजह माना जा रहा है। अधिकारियों ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। क्या है Tu-22M3 बॉम्बर की खासियत? Tu-22M3 रूस के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बॉम्बर विमानों में से एक है। सोवियत काल में विकसित इस विमान को NATO ने 'Backfire' कोडनेम दिया है। यह सुपरसोनिक बॉम्बर लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता रखता है और रूस ने इसका इस्तेमाल सीरिया और यूक्रेन में सैन्य अभियानों के दौरान भी किया है। Tu-22M3 आधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है और यह Kh-22 क्रूज मिसाइलों के अलावा हवा से लॉन्च होने वाली हाइपरसोनिक किंझाल (Kinzhal) मिसाइलों को भी ले जाने में सक्षम है। इसकी वजह से इसे रूस की रणनीतिक हवाई शक्ति का अहम हिस्सा माना जाता है। जांच के बाद सामने आएगी दुर्घटना की असली वजह शुरुआती जांच में इंजन फेल होने की आशंका जताई गई है, लेकिन रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सकेगी।
नई दिल्ली: भारत की सामरिक क्षमताओं को नई मजबूती देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने सोमवार (15 जून) को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल परीक्षण किया। इस सफलता के साथ भारत की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता और अधिक मजबूत हो गई है। यह मिसाइल सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के ठिकानों, सैन्य अड्डों और रणनीतिक लक्ष्यों को अत्यधिक सटीकता के साथ निशाना बनाने में सक्षम है। DRDO के अनुसार, परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपने सभी निर्धारित मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में तैनात विभिन्न ट्रैकिंग उपकरणों, रडार और टेलीमेट्री प्रणालियों से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से इसकी पुष्टि हुई है कि मिसाइल ने निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदर्शन किया। भारत की स्ट्राइक क्षमता को मिलेगी नई धार LRLACM का सफल परीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब भारत अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने और लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर दे रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल भारतीय सशस्त्र बलों को दुश्मन के संवेदनशील ठिकानों पर बिना सीमा पार किए, दूर से ही सटीक हमला करने की क्षमता प्रदान करेगी। इस मिसाइल के शामिल होने से भारत की Long Range Precision Strike Capability में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और संभावित खतरों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence Capability) भी मजबूत होगी। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित रक्षा मंत्रालय के अनुसार, LRLACM पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल है। इसकी सभी प्रमुख उप-प्रणालियों का विकास DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग भागीदारों के सहयोग से किया गया है। इस परियोजना में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADE), बेंगलुरु ने नोडल प्रयोगशाला के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा देश के कई सार्वजनिक और निजी रक्षा उद्योगों ने भी इसके विकास में योगदान दिया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह सफलता 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल को नई मजबूती देने वाली उपलब्धि है। क्या है LRLACM की खासियत? LRLACM को लंबी दूरी तक कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर सटीक हमला करने के लिए विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं— लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता। कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता, जिससे रडार से बचना आसान होता है। दुश्मन के सैन्य अड्डों, कमांड सेंटर, एयरबेस और रणनीतिक ढांचों को निशाना बनाने में सक्षम। स्वदेशी मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणाली से लैस। विभिन्न मौसम परिस्थितियों में संचालन की क्षमता। भारतीय उद्योगों की भागीदारी के साथ पूरी तरह स्वदेशी विकास। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने LRLACM के सफल परीक्षण पर DRDO के वैज्ञानिकों और उद्योग भागीदारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की रक्षा क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मिसाइल परीक्षण के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। BMD प्रणाली की सफलता के बाद एक और बड़ी उपलब्धि इससे पहले 10 और 11 जून को भारत ने अपनी बहुस्तरीय Ballistic Missile Defence (BMD) System प्रणाली के तीन सफल परीक्षण किए थे। DRDO द्वारा विकसित इस प्रणाली ने वायुमंडल के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर लक्ष्य मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया था। इन सफल परीक्षणों के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक और अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल खतरों से निपटने की क्षमता मौजूद है। आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति की ओर बड़ा कदम रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, LRLACM का सफल परीक्षण केवल एक मिसाइल परीक्षण नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक शक्ति का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में यह मिसाइल भारतीय सशस्त्र बलों की लॉन्ग रेंज प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाएगी और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में भारत की स्थिति को और अधिक मजबूत करेगी।
एयरबेस के भीतर हुआ हादसा, जांच शुरू असम के जोरहाट स्थित भारतीय वायुसेना (IAF) के एयरबेस पर शुक्रवार को एक सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान एयरबेस के भीतर सुरक्षित लैंडिंग के बाद अचानक आग की चपेट में आ गया, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के तुरंत बाद एयरबेस की आपातकालीन और अग्निशमन टीमों को मौके पर भेजा गया। आग पर काबू पाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। पायलट और क्रू की स्थिति पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार फिलहाल भारतीय वायुसेना की ओर से विमान के प्रकार, हादसे के कारण और पायलट या अन्य क्रू सदस्यों की स्थिति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, विमान रनवे पर उतरने के बाद किसी तकनीकी गड़बड़ी का शिकार हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई। हालांकि दुर्घटना की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। वायुसेना ने शुरू की जांच हादसे के बाद भारतीय वायुसेना ने घटना की जांच शुरू कर दी है। तकनीकी विशेषज्ञ विमान के ब्लैक बॉक्स और अन्य उपकरणों की जांच कर रहे हैं ताकि दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा सके। जोरहाट एयरबेस भारतीय वायुसेना का एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र है और पूर्वोत्तर क्षेत्र में रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जाता है। अधिकृत जानकारी आने के बाद ही नुकसान और हादसे की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।
भारतीय सेना अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता को और मजबूत करने के लिए 300 अतिरिक्त K-9 वज्र-टी स्वचालित हॉवित्जर तोपों की खरीद की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित सौदे की अनुमानित लागत लगभग 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को जल्द ही रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। यदि इस परियोजना को स्वीकृति मिलती है, तो यह भारतीय सेना के हालिया वर्षों के सबसे बड़े तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में शामिल होगी। नई तोपों की तैनाती पाकिस्तान और चीन से लगने वाली सीमाओं पर की जाएगी, जिससे दोनों मोर्चों पर सेना की फायरपावर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। एलएंडटी को मिल सकता है निर्माण का जिम्मा रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर इसका निर्माण कार्य लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को मिल सकता है। कंपनी दक्षिण कोरिया की रक्षा निर्माता कंपनी हनव्हा एयरोस्पेस के सहयोग से भारत में K-9 वज्र-टी का निर्माण करती है। नई खरीद के बाद भारतीय सेना के लिए ऑर्डर की गई K-9 वज्र तोपों की कुल संख्या 500 से अधिक हो जाएगी। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इससे पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर सेना की परिचालन क्षमता और युद्धक तैयारी को मजबूती मिलेगी। बदलती सुरक्षा चुनौतियों पर सेना का फोकस हाल के वर्षों में भारतीय सेना ने लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने वाली प्रणालियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में मोबाइल और तेज प्रतिक्रिया देने वाली तोप प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभाती हैं। इसी रणनीति के तहत सेना ऐसी प्रणालियों को प्राथमिकता दे रही है, जो विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में प्रभावी फायर सपोर्ट उपलब्ध करा सकें। क्या है K-9 वज्र की खासियत? K-9 वज्र-टी एक 155 मिमी/52 कैलिबर ट्रैक्ड स्वचालित हॉवित्जर तोप प्रणाली है। यह 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य पर सटीक प्रहार करने में सक्षम है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी "शूट एंड स्कूट" क्षमता है। यानी यह लक्ष्य पर गोले दागने के तुरंत बाद अपनी स्थिति बदल सकती है, जिससे दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बचाव आसान हो जाता है। इसके अलावा यह बख्तरबंद सुरक्षा से लैस है और रेगिस्तानी इलाकों से लेकर ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों तक प्रभावी ढंग से संचालन कर सकती है। यही कारण है कि इसे आधुनिक युद्ध प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। 2017 में हुआ था पहला सौदा भारत ने K-9 वज्र तोपों के लिए पहला बड़ा अनुबंध वर्ष 2017 में किया था। उस समय 100 तोपों की खरीद के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये का समझौता हुआ था। इनकी आपूर्ति निर्धारित समय से पहले वर्ष 2021 में पूरी कर ली गई थी। बाद में इन तोपों को मुख्य रूप से पाकिस्तान सीमा से लगे रेगिस्तानी क्षेत्रों में तैनात किया गया, जहां इनके प्रदर्शन को सकारात्मक माना गया। 2023 में मिला दूसरा ऑर्डर K-9 वज्र की परिचालन सफलता को देखते हुए दिसंबर 2023 में भारतीय सेना ने 100 अतिरिक्त तोपों की खरीद को मंजूरी दी थी। इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 7,600 करोड़ रुपये थी। इस निर्णय ने स्पष्ट संकेत दिया कि सेना भविष्य की युद्ध रणनीति में इस प्रणाली को महत्वपूर्ण भूमिका देती है। लद्दाख में भी सफल रहे परीक्षण हाल ही में K-9 वज्र के संशोधित शीतकालीन संस्करण का परीक्षण लद्दाख के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किया गया। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, बेहद कम तापमान और कठिन परिस्थितियों में भी इस प्रणाली का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। परीक्षण के सफल परिणामों के बाद उत्तरी सीमाओं पर अतिरिक्त K-9 वज्र इकाइयों की तैनाती की योजना को और बल मिला है। तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा प्रस्तावित खरीद भारतीय सेना के व्यापक तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। सेना समानांतर रूप से एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS), धनुष तोप और उन्नत पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम जैसी परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इन आधुनिक प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय सेना भविष्य के किसी भी संघर्ष में तेजी से, सटीक और लगातार फायरपावर उपलब्ध कराने में पहले से अधिक सक्षम होगी।
नई दिल्ली: एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल करने के बाद ज्यादातर उम्मीदवार निजी क्षेत्र की नौकरियों की ओर रुख करते हैं, लेकिन सरकारी क्षेत्र में भी MBA प्रोफेशनल्स के लिए कई शानदार अवसर मौजूद हैं। बैंकिंग, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSUs), प्रशासनिक सेवाएं और बीमा क्षेत्र ऐसे विकल्प हैं, जहां न सिर्फ आकर्षक वेतन मिलता है बल्कि नौकरी की स्थिरता और कई अतिरिक्त सुविधाएं भी प्राप्त होती हैं। आइए जानते हैं MBA के बाद सरकारी क्षेत्र में उपलब्ध चार प्रमुख करियर विकल्पों के बारे में। 1. बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर MBA ग्रेजुएट्स के लिए बैंकिंग क्षेत्र सबसे लोकप्रिय विकल्पों में गिना जाता है। RBI Grade B Officer रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) में ग्रेड बी अधिकारी का पद बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है। यहां वित्तीय प्रबंधन और नीतिगत कार्यों से जुड़ी जिम्मेदारियां मिलती हैं। अनुमानित शुरुआती वेतन (भत्तों सहित): लगभग ₹1.5 लाख प्रतिमाह अधिक जानकारी: RBI की आधिकारिक वेबसाइट सरकारी बैंकों में PO और SO पद सरकारी बैंकों में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) और स्पेशलिस्ट ऑफिसर (SO) के पदों पर MBA उम्मीदवारों को अवसर मिलते हैं। SEBI और IRDAI जैसे संस्थान वित्तीय रणनीति, निवेश और नियामकीय कार्यों से जुड़े पदों पर भी MBA प्रोफेशनल्स की मांग रहती है। 2. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSUs) देश की प्रमुख सरकारी कंपनियां MBA उम्मीदवारों की भर्ती करती हैं। प्रमुख कंपनियां: ONGC NTPC BHEL GAIL इन संस्थानों में मैनेजमेंट ट्रेनी, HR, मार्केटिंग और ऑपरेशंस जैसे पदों पर नियुक्तियां होती हैं। अनुमानित वार्षिक पैकेज: ₹12 लाख से ₹25 लाख तक 3. UPSC और प्रशासनिक सेवाएं MBA ग्रेजुएट्स संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं में भी हिस्सा ले सकते हैं। सिविल सेवा (IAS, IPS, IRS) MBA डिग्री धारक IAS, IPS और IRS जैसे प्रतिष्ठित पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। अनुमानित वेतन (भत्तों सहित): ₹80,000 से ₹1 लाख प्रतिमाह Indian Economic Service (IES) आर्थिक नीति और वित्तीय मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण पदों के लिए भी MBA उम्मीदवार अवसर प्राप्त कर सकते हैं। 4. बीमा क्षेत्र में सरकारी नौकरियां LIC और अन्य सरकारी बीमा कंपनियों में MBA प्रोफेशनल्स की अच्छी मांग रहती है। इन संस्थानों में: रिस्क मैनेजमेंट प्रशासन मैनेजमेंट ऑपरेशनल रोल्स जैसे पदों पर भर्ती की जाती है। अनुमानित शुरुआती वेतन: ₹1 लाख से ₹1.25 लाख प्रतिमाह MBA के बाद सरकारी नौकरी क्यों है अच्छा विकल्प? आकर्षक वेतन नौकरी की सुरक्षा पेंशन और अन्य भत्ते करियर में स्थिरता बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस MBA के बाद सरकारी क्षेत्र में करियर बनाने वाले उम्मीदवारों के लिए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। सही तैयारी और उचित परीक्षा चयन के माध्यम से एक सफल और स्थायी करियर बनाया जा सकता है।
नासिक: महाराष्ट्र के नासिक स्थित कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल में पासिंग आउट परेड के बाद एक भावुक और यादगार पल देखने को मिला। भारतीय सेना के कैप्टन भारत भारद्वाज ने पायलट के रूप में अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अपनी मंगेतर को सबके सामने शादी के लिए प्रपोज किया। इस खास मौके का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जहां कई लोगों ने इस पल को प्यार और समर्पण की खूबसूरत मिसाल बताया, वहीं कुछ लोगों ने सेना की वर्दी और पासिंग आउट परेड जैसे औपचारिक कार्यक्रम के दौरान ऐसा करने को लेकर अनुशासन संबंधी सवाल भी उठाए। पासिंग आउट परेड के बाद किया प्रपोज समाचार एजेंसी ANI द्वारा जारी वीडियो में कैप्टन भारत भारद्वाज अपनी वर्दी में घुटनों के बल बैठकर अपनी मंगेतर को प्रपोज करते दिखाई दे रहे हैं। उनकी मंगेतर साड़ी में मौजूद थीं और दोनों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आ रही थी। प्रपोजल स्वीकार किए जाने के बाद साथी अधिकारियों और दोस्तों ने दोनों को बधाई दी। यह पूरा दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी यादगार बन गया। "इस दिन को और खास बनाना चाहता था" ANI से बातचीत में कैप्टन भारत भारद्वाज ने बताया कि पायलट और इंस्ट्रक्टर बनने का दिन उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन था। उन्होंने कहा, "आज हमारी वर्षों की मेहनत सफल हुई है। मेरे परिवार, खासकर मेरी मां और नाना-नानी के लिए भी यह बेहद खास अवसर था। मैं इस दिन को और यादगार बनाना चाहता था।" कैप्टन भारत ने बताया कि वह और उनकी मंगेतर पिछले पांच वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं। उनके अनुसार, शादी का प्रस्ताव रखने के लिए इससे बेहतर अवसर उन्हें नहीं लगा। सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या सैन्य समारोह के तुरंत बाद इस तरह का निजी आयोजन उचित था। वहीं कई लोगों ने इसे एक व्यक्तिगत और भावनात्मक क्षण बताते हुए समर्थन किया। बहस का केंद्र यह रहा कि क्या ऐसे अवसर पर व्यक्तिगत भावनाओं का सार्वजनिक प्रदर्शन सैन्य परंपराओं और अनुशासन के अनुरूप है या नहीं। सेना के पूर्व अधिकारियों ने किया समर्थन कई पूर्व सैन्य अधिकारियों और रक्षा विशेषज्ञों ने कैप्टन भारत का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी की पेशेवर क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा पर कोई सवाल नहीं है, तो ऐसे मानवीय और सकारात्मक क्षणों को अनावश्यक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। पूर्व सेना अधिकारी K. J. S. Dhillon ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि युवाओं के जीवन के ऐसे खूबसूरत पलों की सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्यार और अपनापन व्यक्त करने के ऐसे अवसरों पर अनावश्यक आलोचना से बचना चाहिए। यादगार पल बना वायरल वीडियो कैप्टन भारत भारद्वाज का यह प्रपोजल वीडियो अब सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। कई लोग इसे देश सेवा और निजी जीवन के बीच संतुलन का खूबसूरत उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे सैन्य परंपराओं के संदर्भ में देख रहे हैं। फिलहाल यह वीडियो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और इंटरनेट पर लाखों बार देखा जा चुका है।
भारत ने अपनी वायु शक्ति को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए फ्रांस को औपचारिक अनुरोध पत्र (Letter of Request) भेज दिया है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की यह डील भारत के इतिहास के सबसे बड़े सैन्य विमान अधिग्रहण कार्यक्रमों में से एक मानी जा रही है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय के अधिग्रहण विंग ने पिछले सप्ताह फ्रांसीसी सरकार को प्रस्ताव भेजा है। अब अगले दो से तीन महीनों के भीतर फ्रांस की ओर से जवाब मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी होने के बाद अगले एक साल के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। 'मेक इन इंडिया' को मिलेगा बड़ा बढ़ावा इस परियोजना की सबसे अहम विशेषता यह है कि 114 में से 94 राफेल विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन एक भारतीय साझेदार के साथ मिलकर इन विमानों का उत्पादन करेगी। अगर यह योजना तय रूप में लागू होती है, तो यह पहली बार होगा जब राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण फ्रांस के बाहर किया जाएगा। इससे भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र और 'मेक इन इंडिया' अभियान को बड़ा बल मिलने की उम्मीद है। मोदी की फ्रांस यात्रा में हो सकती है अहम चर्चा सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून के मध्य तक फ्रांस का दौरा कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान राफेल सौदा दोनों देशों के बीच प्रमुख चर्चा का विषय रहेगा। भारतीय वायु सेना लंबे समय से लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी का सामना कर रही है। ऐसे में उन्नत 4.5 पीढ़ी के राफेल विमानों की बड़ी संख्या में खरीद को वायु सेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 176 तक पहुंच जाएगी राफेल विमानों की संख्या भारतीय वायु सेना और नौसेना पहले ही कुल 62 राफेल विमानों का ऑर्डर दे चुकी हैं। प्रस्तावित 114 नए विमानों के शामिल होने के बाद देश के पास राफेल विमानों की संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने 31 अतिरिक्त राफेल मरीन विमानों में भी रुचि दिखाई है। यदि यह खरीद भी आगे बढ़ती है, तो भविष्य में भारत के पास राफेल विमानों की कुल संख्या 200 के पार पहुंच सकती है। 2028 से शुरू हो सकती है डिलीवरी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारतीय नौसेना के लिए राफेल मरीन विमानों की डिलीवरी वर्ष 2028 से शुरू होने की संभावना है। इसके बाद वायु सेना के लिए भी विमानों की आपूर्ति शुरू होगी। अनुमान है कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने के लगभग साढ़े तीन साल बाद भारतीय वायु सेना को नए राफेल विमान मिलने शुरू हो जाएंगे। इस बीच, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह फ्रांस के दौरे पर हैं। उनके डसॉल्ट एविएशन की उत्पादन इकाइयों का दौरा करने की भी संभावना है, जहां राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण किया जाता है।
भारतीय नौसेना के 27वें प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि देश की सुरक्षा और समुद्री हितों की रक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य के बीच नौसेना की युद्धक क्षमता को मजबूत बनाए रखने और तकनीकी आधुनिकीकरण को गति देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। एडमिरल स्वामीनाथन ने 31 मई को सेवानिवृत्त हुए एडमिरल Dinesh Kumar Tripathi का स्थान लिया। इससे पहले वह भारतीय नौसेना की पश्चिमी कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में सेवाएं दे रहे थे। चार दशक का समृद्ध नौसैनिक अनुभव 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त करने वाले एडमिरल स्वामीनाथन कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के विशेषज्ञ माने जाते हैं। लगभग चार दशक लंबे करियर में उन्होंने आईएनएस विद्युत, आईएनएस विनाश, आईएनएस कुलिश और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य समेत कई महत्वपूर्ण युद्धपोतों की कमान संभाली है। नौसेना के आधुनिकीकरण पर रहेगा जोर पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना का नेतृत्व करना उनके लिए अत्यंत गौरव और जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण लगातार जटिल, चुनौतीपूर्ण और अप्रत्याशित होता जा रहा है, ऐसे में नौसेना को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाना समय की आवश्यकता है। युद्धक क्षमता बनाए रखना प्राथमिक लक्ष्य एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना होगी कि भारतीय नौसेना हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा करने में सक्षम रहे। उन्होंने कहा कि नौसेना अपनी परिचालन तैयारियों और युद्धक क्षमता को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। पुणे स्थित रक्षा कंपनी Nibe Limited ने अपने अत्याधुनिक ‘वायु अस्त्र-1’ लोइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण राजस्थान के Pokhran और उत्तराखंड के Joshimath के मलारी क्षेत्र में किया गया। कंपनी के अनुसार, ‘वायु अस्त्र-1’ ने रेगिस्तानी और अत्यधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी ऑपरेशनल क्षमता साबित की है। यह ड्रोन 100 किलोमीटर दूर तक सटीक हमला करने में सक्षम है और रात के अंधेरे में भी लक्ष्य को पहचानकर निशाना साध सकता है। 100 किलोमीटर दूर लक्ष्य पर सटीक हमला निबे लिमिटेड ने बताया कि ‘वायु अस्त्र-1’ ने अपने परीक्षण के दौरान 100 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को एक ही प्रयास में सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। कंपनी के मुताबिक, इसकी संभावित सीईपी (Circular Error Probable) एक मीटर से भी कम रही, जो इसे बेहद सटीक हथियार बनाती है। ड्रोन में “अटैक एबॉर्ट” और “री-अटैक” जैसी आधुनिक क्षमताएं भी दी गई हैं। यानी मिशन के दौरान लक्ष्य बदलने या दोबारा हमला करने का विकल्प भी मौजूद है। 14 हजार फीट ऊंचाई पर भी शानदार प्रदर्शन उत्तराखंड के मलारी क्षेत्र में हुए परीक्षण के दौरान ‘वायु अस्त्र-1’ को 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर उड़ाया गया। कंपनी का दावा है कि ड्रोन ने 90 मिनट से ज्यादा समय तक उड़ान भरते हुए सफलतापूर्वक मिशन पूरा किया। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम तापमान और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच यह प्रदर्शन भारतीय सेना के लिए काफी अहम माना जा रहा है, खासकर सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और सटीक हमलों के लिए। रात में भी टैंक को बना सकता है निशाना कंपनी के अनुसार, यह लोइटरिंग म्यूनिशन बख्तरबंद वाहनों और टैंकों पर रात में भी हमला करने में सक्षम है। परीक्षण के दौरान ड्रोन ने इन्फ्रारेड (IR) कैमरे की मदद से लक्ष्य को ट्रैक किया और दो मीटर के भीतर सटीक हमला किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षमता आधुनिक युद्ध में भारतीय सेना को बड़ी बढ़त दे सकती है। क्या है ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’? लोइटरिंग म्यूनिशन को आम भाषा में “सुसाइड ड्रोन” या “आत्मघाती ड्रोन” कहा जाता है। यह ड्रोन कुछ समय तक हवा में मंडराता रहता है और जैसे ही लक्ष्य मिलता है, सीधे उस पर हमला कर देता है। ‘वायु अस्त्र-1’ इजरायली तकनीक आधारित लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम से प्रेरित बताया जा रहा है। इसे दुश्मन के ठिकानों, टैंकों और रणनीतिक लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है। बिना सरकारी खर्च के हुआ परीक्षण कंपनी ने बताया कि यह परीक्षण “नो-कॉस्ट, नो-कमिटमेंट” (NCNC) मॉडल के तहत किया गया। रक्षा मंत्रालय की खरीद प्रक्रिया में इस मॉडल का मतलब होता है कि सरकार परीक्षण के लिए कोई भुगतान नहीं करती और उत्पाद खरीदने की बाध्यता भी नहीं होती। अगर परीक्षण सफल साबित होते हैं और सेना संतुष्ट होती है, तभी आगे खरीद प्रक्रिया शुरू की जाती है। कंट्रोल ट्रांसफर तकनीक का भी प्रदर्शन निबे लिमिटेड ने बताया कि परीक्षण के दौरान ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन (GCS) से 70 किलोमीटर दूर स्थित फॉरवर्ड कंट्रोल यूनिट को नियंत्रण सौंपने की क्षमता का भी सफल प्रदर्शन किया गया। यह तकनीक लंबी दूरी के युद्ध अभियानों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे ड्रोन को अलग-अलग स्थानों से नियंत्रित किया जा सकता है। रिकवरी क्षमता भी दिखाई कंपनी के अनुसार, मिशन पूरा होने के बाद इस सिस्टम ने रिकवरी क्षमता भी प्रदर्शित की। यानी जरूरत पड़ने पर इसे अगली उड़ानों के लिए दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम का भी सफल परीक्षण इससे पहले 20 मई को निबे लिमिटेड ने अपने ‘सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम’ के सफल परीक्षण की घोषणा की थी। ओडिशा के Chandipur स्थित अंतरिम परीक्षण रेंज (ITR) में हुए परीक्षणों में सिस्टम ने सभी मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। कंपनी को जनवरी 2026 में भारतीय सेना की इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट विंडो के तहत इस सिस्टम के विकास और आपूर्ति का बड़ा ऑर्डर मिला था। इस परियोजना के तहत 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर रेंज वाले विशेष रॉकेट भी विकसित किए जा रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।