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Best Government Career Options After MBA

MBA के बाद सरकारी नौकरी में बना सकते हैं शानदार करियर, जानिए 4 बेहतरीन विकल्प और संभावित सैलरी

surbhi जून 10, 2026 0
MBA graduates exploring government job opportunities in banking, PSUs, civil services, and insurance sectors.
Top Government Jobs After MBA in India

नई दिल्ली: एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल करने के बाद ज्यादातर उम्मीदवार निजी क्षेत्र की नौकरियों की ओर रुख करते हैं, लेकिन सरकारी क्षेत्र में भी MBA प्रोफेशनल्स के लिए कई शानदार अवसर मौजूद हैं। बैंकिंग, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSUs), प्रशासनिक सेवाएं और बीमा क्षेत्र ऐसे विकल्प हैं, जहां न सिर्फ आकर्षक वेतन मिलता है बल्कि नौकरी की स्थिरता और कई अतिरिक्त सुविधाएं भी प्राप्त होती हैं।

आइए जानते हैं MBA के बाद सरकारी क्षेत्र में उपलब्ध चार प्रमुख करियर विकल्पों के बारे में।

1. बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर

MBA ग्रेजुएट्स के लिए बैंकिंग क्षेत्र सबसे लोकप्रिय विकल्पों में गिना जाता है।

RBI Grade B Officer

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) में ग्रेड बी अधिकारी का पद बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है। यहां वित्तीय प्रबंधन और नीतिगत कार्यों से जुड़ी जिम्मेदारियां मिलती हैं।

  • अनुमानित शुरुआती वेतन (भत्तों सहित): लगभग ₹1.5 लाख प्रतिमाह
  • अधिक जानकारी: RBI की आधिकारिक वेबसाइट

सरकारी बैंकों में PO और SO पद

सरकारी बैंकों में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) और स्पेशलिस्ट ऑफिसर (SO) के पदों पर MBA उम्मीदवारों को अवसर मिलते हैं।

SEBI और IRDAI जैसे संस्थान

वित्तीय रणनीति, निवेश और नियामकीय कार्यों से जुड़े पदों पर भी MBA प्रोफेशनल्स की मांग रहती है।

2. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSUs)

देश की प्रमुख सरकारी कंपनियां MBA उम्मीदवारों की भर्ती करती हैं।

प्रमुख कंपनियां:

  • ONGC
  • NTPC
  • BHEL
  • GAIL

इन संस्थानों में मैनेजमेंट ट्रेनी, HR, मार्केटिंग और ऑपरेशंस जैसे पदों पर नियुक्तियां होती हैं।

  • अनुमानित वार्षिक पैकेज: ₹12 लाख से ₹25 लाख तक

3. UPSC और प्रशासनिक सेवाएं

MBA ग्रेजुएट्स संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं में भी हिस्सा ले सकते हैं।

सिविल सेवा (IAS, IPS, IRS)

MBA डिग्री धारक IAS, IPS और IRS जैसे प्रतिष्ठित पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

  • अनुमानित वेतन (भत्तों सहित): ₹80,000 से ₹1 लाख प्रतिमाह

Indian Economic Service (IES)

आर्थिक नीति और वित्तीय मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण पदों के लिए भी MBA उम्मीदवार अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

4. बीमा क्षेत्र में सरकारी नौकरियां

LIC और अन्य सरकारी बीमा कंपनियों में MBA प्रोफेशनल्स की अच्छी मांग रहती है।

इन संस्थानों में:

  • रिस्क मैनेजमेंट
  • प्रशासन
  • मैनेजमेंट
  • ऑपरेशनल रोल्स

जैसे पदों पर भर्ती की जाती है।

  • अनुमानित शुरुआती वेतन: ₹1 लाख से ₹1.25 लाख प्रतिमाह

MBA के बाद सरकारी नौकरी क्यों है अच्छा विकल्प?

  • आकर्षक वेतन
  • नौकरी की सुरक्षा
  • पेंशन और अन्य भत्ते
  • करियर में स्थिरता
  • बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस

MBA के बाद सरकारी क्षेत्र में करियर बनाने वाले उम्मीदवारों के लिए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। सही तैयारी और उचित परीक्षा चयन के माध्यम से एक सफल और स्थायी करियर बनाया जा सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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संसद में शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति को लेकर बीजेपी और कांग्रेस में बहस
बीजेपी-कांग्रेस में शिक्षा मंत्री को लेकर विवाद तेज, प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर संसद में घमासान

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।   कांग्रेस ने प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर उठाए सवाल   कांग्रेस नेताओं ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दिए जाने पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय के लिए सरकार को ऐसे व्यक्ति को चुनना चाहिए जिसकी छवि और रिकॉर्ड पर कोई विवाद न हो।   कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने लोकसभा में प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति को लेकर सरकार पर निशाना साधा और कई पुराने बयानों व विवादों का हवाला दिया।   बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को बताया बेबुनियाद   बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष बिना तथ्यों के व्यक्तिगत आरोप लगा रहा है। बीजेपी नेताओं ने प्रह्लाद जोशी का बचाव करते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक विरोध के लिए गलत बयानबाजी करने का आरोप लगाया।   पेपर लीक और परीक्षा सुधार बना मुख्य मुद्दा   संसद में एंटी-पेपर लीक कानून पर चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्रालय और परीक्षा व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। विपक्ष ने कहा कि केवल कानून बनाने से छात्रों की समस्याएं खत्म नहीं होंगी, जबकि सरकार ने इसे परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने वाला कदम बताया।   संसद में बढ़ा राजनीतिक तनाव   शिक्षा मंत्री के मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। लोकसभा की कार्यवाही के दौरान दोनों पक्षों के नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए, जिससे सदन का माहौल कई बार गर्म हो गया।  

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दिल्ली विश्वविद्यालय एनसीवेब बीए-बीकॉम एडमिशन 2026 की पहली कटऑफ और दाखिले की प्रक्रिया
DU NCWEB Admission 2026: बीए-बीकॉम की पहली कटऑफ आज जारी, 28 जुलाई से शुरू होंगे दाखिले

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के नॉन-कॉलेजिएट वूमेंस एजुकेशन बोर्ड (NCWEB) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बीए और बीकॉम प्रोग्राम की पहली कटऑफ सूची सोमवार को जारी की जाएगी। कटऑफ जारी होने के बाद 28 जुलाई सुबह 10 बजे से छात्राएं दाखिले की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगी।   NCWEB में 21,500 छात्राओं ने किया आवेदन   डीयू एनसीवेब की निदेशक प्रो. गीता भट्ट के अनुसार, इस वर्ष बीए और बीकॉम प्रोग्राम में दाखिले के लिए कुल 21,500 आवेदन प्राप्त हुए हैं। दोनों पाठ्यक्रमों में कुल 15,200 सीटें उपलब्ध हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार करीब चार हजार अधिक आवेदन आए हैं।   28 से 30 जुलाई तक होंगे दाखिले   पहली कटऑफ के आधार पर दाखिले की प्रक्रिया 28 जुलाई सुबह 10 बजे से शुरू होगी। छात्राएं 30 जुलाई रात 11:59 बजे तक अपनी सीट सुनिश्चित कर सकेंगी। वहीं, कॉलेजों को दाखिले से जुड़ी सभी औपचारिकताएं 31 जुलाई शाम पांच बजे तक पूरी करनी होंगी। फीस जमा करने की अंतिम तिथि 1 अगस्त शाम पांच बजे निर्धारित की गई है।   पांच कटऑफ जारी करेगा NCWEB   एनसीवेब में दाखिले के लिए कुल पांच कटऑफ जारी की जाएंगी। यदि सीटें खाली रहती हैं तो स्पेशल कटऑफ जारी की जा सकती है। इसके बाद भी सीट बचने पर स्पेशल ड्राइव के माध्यम से दाखिले किए जाएंगे। प्रवेश प्रक्रिया 13 सितंबर 2026 तक चलेगी।   DU UG Admission के दूसरे राउंड का संशोधित कार्यक्रम जारी   दिल्ली विश्वविद्यालय ने स्नातक (UG) दाखिले के लिए कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (CSAS) के दूसरे राउंड का संशोधित शेड्यूल भी जारी कर दिया है। दूसरे राउंड में आवंटित सीटों को स्वीकार करने की अंतिम तिथि 27 जुलाई रात 11:59 बजे तक है।   कॉलेजों द्वारा ऑनलाइन आवेदन का सत्यापन और स्वीकृति 28 जुलाई रात 11:59 बजे तक की जाएगी, जबकि उम्मीदवार 29 जुलाई रात 11:59 बजे तक दाखिला शुल्क जमा कर सकेंगे।   DU UG में अब तक 88,584 सीटों का हुआ आवंटन   विश्वविद्यालय के अनुसार, स्नातक पाठ्यक्रमों की 71,624 सीटों के लिए दो राउंड में अब तक कुल 88,584 सीटों का आवंटन किया जा चुका है। बड़ी संख्या में छात्र दाखिले की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।   IPU में योग थेरेपी कोर्स के लिए काउंसलिंग 30 जुलाई से   वहीं, गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (IPU) में पोस्ट ग्रेजुएट योगा थेरेपी प्रोग्राम में प्रवेश के लिए पहली ऑफलाइन काउंसलिंग 30 जुलाई से शुरू होगी। काउंसलिंग का आयोजन द्वारका स्थित विश्वविद्यालय परिसर में किया जाएगा।   दस्तावेज सत्यापन के बाद मिलेगा प्रवेश   आईपीयू योग थेरेपी काउंसलिंग में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद मेरिट के आधार पर सीटों का आवंटन किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने उम्मीदवारों को फोटो, आवेदन फॉर्म और अन्य जरूरी दस्तावेजों के साथ कुलसचिव के नाम ₹96,000 का बैंक ड्राफ्ट लाने के निर्देश दिए हैं।   आवंटित सीट पर लिया गया दाखिला 6 अगस्त तक रद्द कराया जा सकेगा। उम्मीदवार अधिक जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट देख सकते हैं।  

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Student comparing DCA and ADCA computer courses with career options, skills, salary, and job opportunities.
DCA vs ADCA: कौन सा कंप्यूटर कोर्स दिलाएगा बेहतर नौकरी? जानें दोनों में अंतर, करियर, सैलरी और कौन-सा कोर्स चुनें

आज के डिजिटल दौर में कंप्यूटर स्किल्स लगभग हर नौकरी के लिए जरूरी हो गई हैं। चाहे सरकारी नौकरी हो, प्राइवेट सेक्टर या फिर अपना बिजनेस, कंप्यूटर की जानकारी अब एक अहम योग्यता मानी जाती है। ऐसे में 12वीं या ग्रेजुएशन के बाद छात्र अक्सर DCA (Diploma in Computer Applications) और ADCA (Advanced Diploma in Computer Applications) जैसे कोर्स चुनते हैं। लेकिन कई छात्रों के मन में सवाल होता है कि DCA और ADCA में क्या अंतर है, कौन-सा कोर्स ज्यादा फायदेमंद है और किससे बेहतर नौकरी मिल सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं। क्या है DCA (Diploma in Computer Applications)? DCA एक बेसिक कंप्यूटर डिप्लोमा कोर्स है। यह उन छात्रों के लिए उपयुक्त माना जाता है जो कम समय में कंप्यूटर की मूलभूत जानकारी हासिल करना चाहते हैं। कोर्स अवधि: 6 महीने योग्यता: 10वीं या 12वीं पास (संस्थान के अनुसार) कहां से करें: सरकारी एवं निजी संस्थानों से DCA में क्या पढ़ाया जाता है? कंप्यूटर फंडामेंटल MS Word MS Excel PowerPoint इंटरनेट और ई-मेल हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग बेसिक ऑपरेटिंग सिस्टम DCA के बाद करियर विकल्प डेटा एंट्री ऑपरेटर कंप्यूटर ऑपरेटर ऑफिस असिस्टेंट टाइपिस्ट रिसेप्शनिस्ट क्या है ADCA (Advanced Diploma in Computer Applications)? ADCA, DCA का एडवांस संस्करण माना जाता है। इसमें बेसिक कंप्यूटर स्किल्स के साथ प्रोफेशनल और टेक्निकल विषय भी शामिल होते हैं, जिससे छात्रों को अधिक व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण मिलता है। कोर्स अवधि: 1 वर्ष योग्यता: 10वीं/12वीं पास (संस्थान के अनुसार) ADCA में क्या पढ़ाया जाता है? DCA के सभी विषय Tally Prime with GST Photoshop CorelDRAW DTP (Desktop Publishing) बेसिक प्रोग्रामिंग डेटाबेस मैनेजमेंट एडवांस कंप्यूटर एप्लिकेशन ADCA के बाद करियर विकल्प कंप्यूटर ऑपरेटर अकाउंटेंट टैली ऑपरेटर ग्राफिक डिजाइनर ऑफिस एग्जीक्यूटिव आईटी सपोर्ट एग्जीक्यूटिव वेब डेवलपमेंट (बेसिक स्तर) DCA और ADCA में क्या अंतर है? आधार DCA ADCA कोर्स अवधि 6 महीने 1 वर्ष स्तर बेसिक एडवांस सिलेबस कंप्यूटर की बुनियादी जानकारी बेसिक + अकाउंटिंग + डिजाइनिंग + प्रोग्रामिंग स्किल्स ऑफिस वर्क आईटी और प्रोफेशनल स्किल्स नौकरी के अवसर सीमित अधिक और विविध शुरुआती वेतन अपेक्षाकृत कम अपेक्षाकृत बेहतर कौन-सा कोर्स बेहतर है? यह आपके करियर लक्ष्य पर निर्भर करता है। यदि आपका उद्देश्य: कम समय में कंप्यूटर सीखना है। बेसिक ऑफिस जॉब करना चाहते हैं। केवल कंप्यूटर की शुरुआती जानकारी चाहिए। तो DCA आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं अगर आप— आईटी सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं। अकाउंटिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग या कंप्यूटर एप्लिकेशन में विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं। बेहतर जॉब और ज्यादा सैलरी की संभावना चाहते हैं। तो ADCA अधिक उपयोगी विकल्प माना जाता है। कितनी मिल सकती है सैलरी? दोनों कोर्स के बाद मिलने वाला वेतन आपकी स्किल्स, अनुभव, शहर और कंपनी पर निर्भर करता है। DCA: शुरुआती स्तर पर अपेक्षाकृत कम वेतन वाली नौकरियां मिल सकती हैं। ADCA: अतिरिक्त तकनीकी स्किल्स होने के कारण बेहतर वेतन और अधिक करियर विकल्प मिलने की संभावना रहती है। एडमिशन के लिए योग्यता अधिकांश संस्थानों में: 10वीं या 12वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। कुछ संस्थान ग्रेजुएट छात्रों के लिए भी ये कोर्स उपलब्ध कराते हैं। एडमिशन लेने से पहले संस्थान की मान्यता, सिलेबस, फैकल्टी, प्लेसमेंट रिकॉर्ड और फीस की जानकारी जरूर जांच लें।  

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