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Rescue teams respond after a 5.9 magnitude earthquake strikes Indonesia’s Flores following a deadly 7.7 quake
53 मौतों के बाद फिर कांपी इंडोनेशिया की धरती, फ्लोरेस में 5.9 तीव्रता का भूकंप; आफ्टरशॉक्स से दहशत

फ्लोरेस: इंडोनेशिया के भूकंप प्रभावित फ्लोरेस क्षेत्र में सोमवार को एक बार फिर धरती कांप उठी। रिक्टर स्केल पर 5.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह झटका ऐसे समय आया है जब इलाका अभी 15 अगस्त को आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप से उबर भी नहीं पाया है। उस भूकंप में अब तक 53 लोगों की मौत की खबर है। लगातार आ रहे झटकों ने स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। कई इलाकों में लोग घरों के भीतर जाने से डर रहे हैं और खुले स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। करीब 10 किलोमीटर की गहराई में आया भूकंप जर्मनी के भूविज्ञान अनुसंधान केंद्र यानी GFZ के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को आया 5.9 तीव्रता का भूकंप जमीन के करीब 10 किलोमीटर नीचे था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मुख्य झटके के बाद भी क्षेत्र में कई छोटे भूकंपीय झटके महसूस किए गए। कम गहराई पर आने वाले भूकंप कई बार सतह पर अधिक तेज महसूस हो सकते हैं। ऐसे में पहले से प्रभावित इलाकों में क्षतिग्रस्त इमारतों और कमजोर ढांचों को लेकर खतरा और बढ़ जाता है। 15 अगस्त के 7.7 तीव्रता के भूकंप ने मचाई थी तबाही फ्लोरेस क्षेत्र में 15 अगस्त को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। रविवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 53 हो गई थी। भूकंप का केंद्र पूर्वी नूसा तेंगारा प्रांत में एंडे से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में बताया गया था और इसकी गहराई भी लगभग 10 किलोमीटर थी। मुख्य भूकंप के बाद लगातार आफ्टरशॉक्स दर्ज किए जा रहे हैं। इनमें 6 से अधिक तीव्रता वाले झटके भी शामिल बताए गए हैं। इससे पहले से प्रभावित लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। राहत और बचाव अभियान के सामने नई चुनौती भूकंप से प्रभावित कई इलाकों में सड़क और संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। इसके कारण राहत एवं बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। रेस्क्यू टीमें क्षतिग्रस्त इमारतों का निरीक्षण कर रही हैं और जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास जारी है। सबसे बड़ी चुनौती उन इमारतों को लेकर है जो पहले ही 7.7 तीव्रता के भूकंप से कमजोर हो चुकी हैं। नए झटकों के कारण इनके और क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है। लगातार झटकों ने बढ़ाई लोगों की चिंता फ्लोरेस में लगातार महसूस हो रहे भूकंप के झटकों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राहत कार्यों के बीच आफ्टरशॉक्स ने प्रशासन और बचाव दलों के सामने भी अतिरिक्त चुनौती खड़ी कर दी है।  

surbhi अगस्त 17, 2026 0
Kanwar devotee Golu Kumar shot dead by motorcycle-borne attackers during Shravan pilgrimage in Muzaffarpur
मुजफ्फरपुर में कांवर लेकर निकले श्रद्धालु की गोली मारकर हत्या, श्रावणी मेले के बीच सुरक्षा पर उठे सवाल

मुजफ्फरपुर: श्रावणी मेले के बीच बिहार के मुजफ्फरपुर से सामने आई हत्या की घटना ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाबा गरीबनाथ धाम में जल चढ़ाने के लिए कांवर लेकर निकले युवक गोलू कुमार की बाइक सवार अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात मुजफ्फरपुर के पारू थाना क्षेत्र के गोसाईं टोला के पास हुई। गोलीबारी के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कांवर लेकर निकला था गोलू जानकारी के मुताबिक, गोसाईं टोला निवासी रविंद्र कुमार सिंह का बेटा गोलू कुमार बाबा गरीबनाथ धाम में जलाभिषेक करने के लिए कांवर लेकर निकला था। वह गोसाईं टोला के पास पहुंचा ही था कि बाइक सवार दो अज्ञात अपराधियों ने उसे घेर लिया। बताया जा रहा है कि अपराधियों ने गोलू को निशाना बनाकर फायरिंग की। गोली लगने के बाद वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित पुलिस ने घायल गोलू को इलाज के लिए सरैया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। हालांकि डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं घटना को लेकर स्थानीय लोगों और कांवरियों में भी आक्रोश है। पुराने विवाद के एंगल से जांच मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा के मुताबिक, पुलिस की शुरुआती जांच में युवक के किसी पुराने विवाद का एंगल सामने आया है। पुलिस के अनुसार, घटना से पहले सुबह किसी बात को लेकर गोलू का विवाद हुआ था और उसे धमकी दिए जाने की जानकारी भी मिली है। पुलिस इसी एंगल को ध्यान में रखते हुए हत्या के कारणों की जांच कर रही है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हत्या के पीछे वास्तविक वजह क्या थी और वारदात में शामिल दोनों अपराधी कौन हैं। पुलिस आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच कर रही है। श्रावणी मेले के बीच हत्या से सुरक्षा पर सवाल श्रावणी मेले के दौरान मुजफ्फरपुर और बाबा गरीबनाथ धाम जाने वाले रास्तों पर बड़ी संख्या में कांवरिया और श्रद्धालु मौजूद रहते हैं। ऐसे समय में एक श्रद्धालु की बीच रास्ते गोली मारकर हत्या किए जाने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। धार्मिक यात्राओं के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस बल की तैनाती और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाती है। इसके बावजूद ऐसी वारदात सामने आने से सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि पुलिस की शुरुआती जांच में व्यक्तिगत विवाद का संकेत मिला है, लेकिन घटना ने यह सवाल जरूर सामने रखा है कि कांवरियों की आवाजाही वाले मार्गों पर सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है या नहीं। फिलहाल पुलिस हत्या के कारणों की जांच और आरोपियों की तलाश में जुटी है। मामले में आगे होने वाली गिरफ्तारी और जांच से ही वारदात की पूरी तस्वीर सामने आएगी।  

surbhi अगस्त 17, 2026 0
Lakhisarai Ashok Dham temple where seven women died after an electric shock during Sawan prayers
लखीसराय के अशोक धाम में करंट का कहर, 7 महिलाओं की मौत; कई श्रद्धालु घायल, चार मृतकों की पहचान

लखीसराय: बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर बड़ा हादसा हो गया। पूजा और जलाभिषेक के लिए जुटी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच करंट की चपेट में आने से 7 महिलाओं की मौत हो गई। हादसे में कई श्रद्धालु घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद मंदिर परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। राहत और बचाव कार्य शुरू करते हुए घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन की ओर से मृतकों की पहचान और घायलों की स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है। सात में चार मृतकों की पहचान हादसे में जान गंवाने वाली सात महिलाओं में फिलहाल चार की पहचान हो सकी है। इनमें मधुबाला देवी, पति निरंजन कुमार सिंह, निवासी बड़हिया; मनमाला देवी, पति निरंजन कुमार, निवासी बड़हिया; रिंकू देवी, पति नीरज यादव, निवासी सफिया सराय, मुंगेर; और हेमलता देवी, पति सुरेंद्र यादव, निवासी प्रतापपुर, हलसी, लखीसराय शामिल हैं। अन्य मृत महिलाओं की पहचान की प्रक्रिया जारी है। पुलिस और प्रशासन परिजनों से संपर्क कर पहचान सुनिश्चित करने में जुटे हैं। ये श्रद्धालु हुए घायल हादसे में घायल श्रद्धालुओं में मौसम कुमारी, पिता ललन राम, निवासी लक्ष्मीपुर; मुस्कान कुमारी, पिता ललन राम, निवासी विद्यापीठ चौक; ममता देवी, पति धारो यादव, निवासी चननिया, लखीसराय; विमला देवी, पति विनोद राम, निवासी मोकामा; रीना कुमारी, पति राजेश सिंह, निवासी बभंगामा, लखीसराय; शिवानी कुमारी, पिता रामेश्वर राम, निवासी फरीदाबाद, लखीसराय और कबीला देवी, जो बाढ़ की रहने वाली बताई जा रही हैं, शामिल हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। प्रशासन अस्पतालों से लगातार घायलों की स्थिति की जानकारी ले रहा है। भारी भीड़ के बीच अचानक हुआ हादसा सावन की सोमवारी के चलते अशोक धाम मंदिर में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इसी दौरान करंट की चपेट में आने की घटना हुई, जिसके बाद मंदिर परिसर में अफरातफरी मच गई। श्रद्धालु अपने परिजनों और परिचितों को तलाशते नजर आए। घटना के बाद बिजली आपूर्ति और करंट के स्रोत की जांच शुरू कर दी गई है। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, बिजली व्यवस्था में क्या खामी थी और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं, इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है। मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल अशोक धाम लखीसराय का प्रमुख धार्मिक स्थल है और सावन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़भाड़ वाले मंदिर परिसर में करंट लगने से हुई मौतों ने सुरक्षा और बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घायलों का बेहतर इलाज, मृतकों की पहचान और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।  

surbhi अगस्त 17, 2026 0
ED summons LB Singh’s wife and four others in coal scam case for questioning in Ranchi
कोयला घोटाला: एलबी सिंह की पत्नी समेत 5 लोगों को ED का समन, अलग-अलग तारीखों पर होगी पूछताछ

रांची: कोयला घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है. एजेंसी ने कोयला कारोबारी एलबी सिंह की पत्नी आरती सिंह समेत पांच लोगों को समन जारी किया है. सभी को पूछताछ के लिए रांची स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है. एजेंसी इनसे वित्तीय लेन-देन और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर जानकारी हासिल करेगी. समन पाने वालों में आरती सिंह, उनके भाई विश्वविजय सिंह और साले रंजीत कुमार सिंह शामिल हैं. इनके अलावा कारोबारी अनिल गोयल से जुड़े शब्बीर आलम और महेंद्र सिंह को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है. अलग-अलग तारीखों पर ईडी के सामने पेश होंगे ईडी ने सभी लोगों को अलग-अलग तारीखों पर कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है. विश्वविजय सिंह को 14 अगस्त, जबकि रंजीत कुमार सिंह को 17 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया गया है. वहीं, आरती सिंह को 20 अगस्त को ईडी के रांची कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है. शब्बीर आलम और महेंद्र सिंह को भी अगले सप्ताह पूछताछ के लिए बुलाया गया है. वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही ईडी कोयला घोटाला मामले में ईडी की जांच मुख्य रूप से कथित वित्तीय लेन-देन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका पर केंद्रित है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मामले से जुड़े पैसों का लेन-देन किन लोगों के बीच हुआ और इसमें किसकी क्या भूमिका रही. इसी जांच के तहत अब एलबी सिंह के परिवार से जुड़े लोगों और कारोबारी अनिल गोयल से जुड़े व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है. ईडी के समन के बाद आने वाले दिनों में मामले में पूछताछ का सिलसिला और आगे बढ़ने की संभावना है. पांच लोगों से पूछताछ से क्या सामने आयेगा? ईडी की पूछताछ में संबंधित लोगों के वित्तीय लेन-देन, कारोबारी संबंधों और कोयला कारोबार से जुड़े दस्तावेजों के बारे में जानकारी ली जा सकती है. हालांकि, पूछताछ पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जांच में एजेंसी को क्या जानकारी या दस्तावेज हासिल हुए हैं. फिलहाल पांचों लोगों को तय तारीखों पर ईडी के रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में उपस्थित होना है.  

kalpana अगस्त 14, 2026 0
Imran Khan death rumor sparks panic in Pakistan as military denies reports and journalist clarifies unverified claim
इमरान खान की जेल में मौत की खबर से मचा हड़कंप, पाकिस्तानी सेना ने किया खारिज; पत्रकार ने भी दी सफाई

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान की जेल में मौत होने की खबर ने बुधवार को पाकिस्तान समेत भारत में भी हलचल पैदा कर दी। एक पत्रकार की रिपोर्ट में दावा किया गया कि जेल में हिरासत के दौरान इमरान खान की मौत हो गई है। हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे गलत और अफवाह बताया है। विवाद बढ़ने के बाद रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले पत्रकार वजाहत सईद खान ने भी अपनी रिपोर्ट को लेकर सफाई दी। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके सूत्रों ने इमरान खान की मौत की पुष्टि नहीं की थी। उनके मुताबिक, सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने इमरान खान की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जरूर जताई थी, लेकिन उनके पास उनकी मौत का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं था। तीन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का हवाला वजाहत सईद खान के मुताबिक, पाकिस्तान सेना के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने इमरान खान की हालत और उनके भविष्य को लेकर चिंता जताई थी। अधिकारियों की बातचीत से ऐसी आशंका जरूर सामने आई थी कि स्थिति गंभीर हो सकती है। लेकिन पत्रकार के अनुसार, इन अधिकारियों ने इमरान खान की मौत की पुष्टि नहीं की थी। बाद में वजाहत ने स्पष्ट किया कि उनकी रिपोर्ट का उद्देश्य सेना पर यह दबाव बनाना था कि वह इमरान खान के जीवित होने का स्पष्ट प्रमाण सामने रखे। इस सफाई के बाद मौत की खबर को लेकर फैली अटकलों पर फिलहाल विराम लगा है। पाकिस्तानी सेना ने क्या कहा? मामला सामने आने के बाद पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने इमरान खान की मौत की खबरों को खारिज कर दिया। सेना ने पत्रकार की रिपोर्ट को गलत बताया और इमरान खान की मौत से जुड़े दावों को खारिज किया। इसके बाद वजाहत सईद खान ने भी कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि ISPR ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी। इस घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिस रिपोर्ट ने इमरान खान की मौत को लेकर सवाल खड़े किए थे, उसके लेखक ने बाद में स्वयं यह स्पष्ट किया कि उनके पास मौत की पुष्टि करने वाला कोई सबूत नहीं था। इमरान खान की जेल में स्थिति पर फिर उठे सवाल मौत की खबर भले ही खारिज कर दी गई हो, लेकिन इस पूरे विवाद ने इमरान खान की जेल में स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। इमरान खान लंबे समय से जेल में बंद हैं और उनके समर्थक लगातार उनकी रिहाई की मांग करते रहे हैं। उनकी हिरासत और स्वास्थ्य को लेकर समय-समय पर तरह-तरह के दावे और राजनीतिक आरोप सामने आते रहे हैं। ऐसे माहौल में किसी वरिष्ठ राजनीतिक नेता की मौत की अपुष्ट खबर का तेजी से फैलना पाकिस्तान के राजनीतिक और सूचना तंत्र की संवेदनशीलता को भी दिखाता है। कई मामलों में फंसे हैं पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की राजनीतिक मुश्किलें अप्रैल 2022 में उनकी सरकार गिरने के बाद तेज हुईं। इसके बाद उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए। मई 2023 में उनकी गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में व्यापक राजनीतिक तनाव देखने को मिला। अगस्त 2023 में उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया गया और तब से अलग-अलग मामलों के कारण उनकी जेल से रिहाई नहीं हो सकी। कुछ मामलों में उन्हें राहत मिली, लेकिन अन्य मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी रही। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल वह अल-कादिर ट्रस्ट मामले में 14 साल की सजा काट रहे हैं। अफवाह ने क्यों पकड़ा जोर? इमरान खान पाकिस्तान के सबसे प्रभावशाली और विवादित राजनीतिक नेताओं में से एक हैं। लंबे समय से जेल में रहने और उनकी स्थिति को लेकर सीमित सार्वजनिक जानकारी के बीच सोशल मीडिया पर किसी भी अपुष्ट दावे के तेजी से फैलने की संभावना ज्यादा रहती है। इस मामले में भी एक पत्रकार की रिपोर्ट के बाद मौत की खबर तेजी से चर्चा में आ गई। लेकिन सेना के खंडन और पत्रकार की बाद की सफाई ने स्पष्ट कर दिया कि मौत की पुष्टि करने वाला विश्वसनीय प्रमाण सामने नहीं आया था। इसलिए फिलहाल इमरान खान की मौत की खबर को अफवाह और अपुष्ट दावा ही माना जाना चाहिए। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री की स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी को लेकर पारदर्शिता कितनी है। आने वाले दिनों में इमरान खान की स्थिति पर कोई आधिकारिक और विश्वसनीय जानकारी सामने आती है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।  

surbhi अगस्त 13, 2026 0
Bus falls from hillside onto road in Chamba, killing seven people and injuring eleven in tragic accident
चंबा में दर्दनाक बस हादसा: पहाड़ी से सड़क पर गिरी बस, 7 लोगों की मौत, 11 घायल

चंबा, हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में शनिवार सुबह एक भीषण बस हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। तीसा-बैरागढ़ मार्ग पर चालुज मोड़ के पास एक बस अचानक पहाड़ी से नीचे सड़क पर जा गिरी। हादसा इतना गंभीर था कि बस के चालक और परिचालक समेत 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 लोग घायल बताए जा रहे हैं। दुर्घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस-प्रशासन को सूचना दी। घायलों को कड़ी मशक्कत के बाद दुर्घटनाग्रस्त बस से बाहर निकाला गया और उपचार के लिए सिविल अस्पताल तीसा भेजा गया। तीसा-बैरागढ़ रोड पर चालुज मोड़ के पास हादसा प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बस बैरागढ़ से चंबा की ओर जा रही थी। इसी दौरान चालुज मोड़ के पास वह अचानक अनियंत्रित होकर पहाड़ी से नीचे सड़क पर जा गिरी। दुर्घटनाग्रस्त बस शर्मा बस कंपनी की बताई जा रही है। बस का नंबर HP73A-2101 है। हादसे के समय बस में करीब 15 से 20 लोग सवार होने की जानकारी सामने आई है। दुर्घटना के बाद बस की स्थिति देखकर हादसे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। तस्वीरों में बस के चारों पहिए ऊपर की ओर दिखाई दे रहे हैं, जबकि उसकी छत सड़क से लगी हुई थी। 7 लोगों की मौत, चालक और परिचालक भी शामिल प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में चार पुरुषों और तीन महिलाओं की मौत हुई है। मृतकों में बस चालक रूप सिंह और परिचालक तेज सिंह भी शामिल हैं। मृतकों की पहचान जगदेव शर्मा (50), देस राज (35), तेज सिंह (39), जगदेई (24), हरदेई (43), नीलम (34) और रूप सिंह (35) के रूप में हुई है। 11 लोग घायल हादसे में घायल हुए 11 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। घायलों में बच्चे भी शामिल हैं। घायलों की पहचान कर्ण सिंह उर्फ साहिल (18), सुष्मिता (32), प्रियंका (5), हर्षु (4), पानो देवी (41), काव्या (11), धन्नी (40), धर्मों देवी (62), अप्रित मंगल (11), नेहा (10) और विजय कुमार (34) के रूप में बताई गई है। घायलों को अस्पताल में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन की ओर से घायलों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। पुलिस ने शुरू की जांच हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग, पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। राहत और बचाव अभियान चलाकर बस में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। तीसा थाना के एडिशनल एसएचओ अनुभव शर्मा ने हादसे की पुष्टि की है। दुर्घटना आखिर किस वजह से हुई, इसका अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल चंबा जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाएं अक्सर गंभीर रूप ले लेती हैं। तीखे मोड़, संकरी सड़कें, ढलान और मौसम संबंधी परिस्थितियां वाहन चालकों के लिए चुनौती पैदा करती हैं। ऐसे में इस हादसे के बाद एक बार फिर पहाड़ी मार्गों पर सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा, सड़क की स्थिति और यातायात नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान राहत एवं बचाव कार्य और घायलों के इलाज पर है। हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।  

surbhi अगस्त 8, 2026 0
Chief Minister Hemant Soren paying tribute to martyr Nirmal Mahto in Jamshedpur
77वां वन महोत्सव: सिर्फ पौधारोपण के ठेके से नहीं, संवेदनशीलता से बचेगा पर्यावरण- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों से सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहने, बल्कि प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने की अपील की है. उन्होंने कहा कि केवल पौधारोपण के ठेके देने से पर्यावरण की स्थिति नहीं बदलेगी. इसके लिए हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी. तेजी से बढ़ती आबादी और प्रकृति के साथ लगातार हो रही छेड़छाड़ का असर अब झारखंड में भी दिखाई दे रहा है. मुख्यमंत्री शुक्रवार को खेलगांव परिसर में आयोजित 77वें वन महोत्सव के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने पौधारोपण कर अभियान की शुरुआत की और वन विभाग के साथ मिलकर पर्यावरण एवं वन संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया. कार्यक्रम में करीब दो हजार लोग मौजूद थे. हर व्यक्ति अपने घर के आसपास लगाए एक पौधा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से अपने-अपने घर के आसपास कम से कम एक पौधा लगाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक विभाग या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है. जब तक आम लोग इसमें अपनी भागीदारी नहीं निभायेंगे, तब तक बड़े स्तर पर बदलाव संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण में हो रहा बदलाव केवल झारखंड की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की चुनौती बन चुका है. जलवायु और पर्यावरण में बदलाव का असर हर जगह देखने को मिल रहा है. ऐसे में स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे प्रयासों के जरिये प्रकृति को बचाने की दिशा में काम करना जरूरी है. प्रकृति से छेड़छाड़ का असर झारखंड में भी मुख्यमंत्री ने कहा कि इंसानों ने विकास के नाम पर जंगलों और प्राकृतिक क्षेत्रों में लगातार हस्तक्षेप किया है. इसका असर अब मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष के रूप में भी देखने को मिल रहा है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इंसान हाथियों के प्राकृतिक आवास तक पहुंच गया है. जंगल और पेड़ काटकर नये शहर और बस्तियां बसायी जा रही हैं. ऐसे में हाथियों का इंसानी इलाकों में आना और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ना स्वाभाविक है. सीएम ने यह भी कहा कि केवल सुंदर दिखने वाले पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है. कुछ ऐसे पौधे भी लगाये जा रहे हैं, जो स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए उपयोगी नहीं हैं. इसलिए झारखंड में अब ऐसे पौधों को प्राथमिकता दी जायेगी, जो स्थानीय पर्यावरण और जैव विविधता के लिए उपयोगी हों. एक पौधा लगाने पर शहरों में मिलेगी पांच यूनिट मुफ्त बिजली मुख्यमंत्री ने बताया कि शहरों में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पौधारोपण को प्रोत्साहित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शहरों में एक पौधा लगाने पर पांच यूनिट बिजली मुफ्त देने की व्यवस्था की जा रही है. इसका उद्देश्य लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है. केवल पौधे लगा देने से पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं होगा. वन, पर्यावरण और वन्यजीवन जीवन का अभिन्न हिस्सा वन विभाग के सचिव अबु बक्कर सिद्दीख ने कहा कि वन, पर्यावरण और वन्यजीवन मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं. इनके बिना स्वस्थ समाज की कल्पना नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि पर्यावरण और वन्यजीवों का संरक्षण केवल नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व भी है. पीसीसीएफ हॉफ संजीव कुमार ने कहा कि पर्यावरण में हो रहे बदलाव से पूरी दुनिया प्रभावित है. अगर इस वैश्विक चुनौती से निपटना है, तो स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने होंगे. छोटे स्तर पर किये गये प्रयास ही आगे चलकर बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं. ओपन सफारी को दिखाई हरी झंडी वन महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी सह गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने ओपन सफारी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. कार्यक्रम में वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे. पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वालों का सम्मान कार्यक्रम के दौरान वन एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया. सम्मानित होने वालों में पी बर्नादित कुजूर, टिकैत चंद्र प्रधान, बुद्धदेव चालक, पौथी राम हांसदा, रमेश नायक, तारकेश्वर मुंडा, निरोज टेटे, लक्ष्मण मुरमू, कृष्णा सिंह, मिथिलेश कुमार, खुर्शीद आलम, गुड्डल सिंह, मनोज राणा, सुरेंद्र पासवान, सोनी देवी, राजीव रंजन प्रसाद, मुनेश्वर मेहता, मो जुनैल अंसारी, राजू कोरबा और नासिर खान समेत अन्य लोग शामिल रहे. कार्यक्रम में पीसीसीएफ विश्वनाथ साह, एटी मिश्रा, एपीसीसीएफ वेंकटेश्वरलू, डीएफओ श्रीकांत वर्मा समेत वन विभाग के कई अधिकारी उपस्थित थे.  

kalpana अगस्त 8, 2026 0
Chief Minister Hemant Soren paying tribute to martyr Nirmal Mahto in Jamshedpur
आज जमशेदपुर आएंगे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, शहीद निर्मल महतो को देंगे श्रद्धांजलि; सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जमशेदपुर: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शनिवार, 8 अगस्त को जमशेदपुर पहुंचेंगे. अपने करीब डेढ़ घंटे के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री उलियान स्थित शहीद निर्मल महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. इसके बाद वे आमसभा को भी संबोधित करेंगे. मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद कर दिया है. मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. डीसी और एसएसपी स्वयं सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. सोनारी हवाई अड्डे से लेकर उलियान और फिर परिसदन तक मुख्यमंत्री के कारकेड के पूरे रूट पर पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गयी है. प्रमुख चौक-चौराहों के अलावा संवेदनशील स्थानों पर भी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गयी है. दोपहर 1 बजे सोनारी एयरपोर्ट पहुंचेंगे सीएम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोपहर करीब 1 बजे हेलीकॉप्टर से सोनारी हवाई अड्डा पहुंचेंगे. एयरपोर्ट पर आवश्यक औपचारिकताओं के बाद वे सड़क मार्ग से सीधे उलियान के लिए रवाना होंगे. करीब 1:10 बजे मुख्यमंत्री उलियान स्थित शहीद निर्मल महतो के समाधि स्थल पहुंचेंगे. उलियान में मुख्यमंत्री शहीद निर्मल महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे और समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देंगे. इसके बाद आयोजित आमसभा को संबोधित करेंगे. कार्यक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर भी तैयारियां की गयी हैं. शहीद निर्मल महतो को श्रद्धांजलि देंगे हेमंत सोरेन उलियान स्थित शहीद निर्मल महतो का समाधि स्थल झारखंड की राजनीति और आंदोलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है. मुख्यमंत्री का यहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करना कार्यक्रम का मुख्य हिस्सा होगा. आमसभा में मुख्यमंत्री के संबोधन पर भी लोगों की नजर रहेगी. मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है. पुलिस अधिकारियों को भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और मुख्यमंत्री के सुरक्षित आवागमन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये हैं. सोनारी से उलियान तक सुरक्षा का विशेष इंतजाम मुख्यमंत्री के कारकेड के रूट पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस पूरी तरह अलर्ट है. सोनारी एयरपोर्ट से उलियान और उलियान से परिसदन तक जगह-जगह पुलिसकर्मियों और दंडाधिकारियों की तैनाती की गयी है. प्रमुख चौक-चौराहों पर अतिरिक्त बल लगाया गया है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मुख्यमंत्री के आवागमन के दौरान यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और आम लोगों को भी अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े. कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर वरिष्ठ अधिकारी लगातार नजर रखेंगे. परिसदन में भी रुकेंगे मुख्यमंत्री उलियान में कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर करीब 2 बजे समाधि स्थल से रवाना होंगे. इसके बाद करीब 2:10 बजे वे जमशेदपुर परिसदन (सर्किट हाउस) पहुंचेंगे. यहां कुछ समय रुकने के बाद दोपहर 2:25 बजे सोनारी एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे. करीब 2:30 बजे मुख्यमंत्री सोनारी हवाई अड्डा पहुंचेंगे और इसके कुछ मिनट बाद यानी 2:35 बजे हेलीकॉप्टर से रांची के लिए रवाना हो जायेंगे. इस तरह मुख्यमंत्री का जमशेदपुर दौरा करीब डेढ़ घंटे का रहेगा. मुख्यमंत्री का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम दोपहर 1:00 बजे: हेलीकॉप्टर से सोनारी हवाई अड्डा, जमशेदपुर आगमन 1:05 बजे: सोनारी एयरपोर्ट से सड़क मार्ग से उलियान के लिए प्रस्थान 1:10 बजे: उलियान स्थित शहीद निर्मल महतो समाधि स्थल पहुंचेंगे इसके बाद: शहीद निर्मल महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि इसके बाद: आमसभा को संबोधित करेंगे 2:00 बजे: उलियान समाधि स्थल से प्रस्थान 2:10 बजे: परिसदन (सर्किट हाउस) पहुंचेंगे 2:25 बजे: परिसदन से सोनारी एयरपोर्ट के लिए रवाना 2:30 बजे: सोनारी हवाई अड्डा पहुंचेंगे 2:35 बजे: हेलीकॉप्टर से रांची के लिए रवाना मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा से लेकर यातायात तक सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. प्रशासन का पूरा जोर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने पर है.  

kalpana अगस्त 8, 2026 0
Security personnel deployed in Ranchi ahead of the Assembly March over JPSC-JSSC paper leak protests.
विधानसभा मार्च को लेकर रांची में हाई अलर्ट, 6 IPS समेत 1000 जवान तैनात; तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरा, हर गतिविधि पर रहेगी नजर

रांची: कथित पेपर लीक मामले को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच झारखंड की राजधानी रांची में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दी गई है। विधानसभा के मानसून सत्र और आगामी विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। शुक्रवार (8 अगस्त) को आइसा (AISA) की ओर से प्रस्तावित विधानसभा मार्च और 10 अगस्त को आंदोलनरत छात्रों के विधानसभा घेराव के ऐलान के बाद राजधानी में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू रांची पुलिस ने विधानसभा परिसर और उससे जुड़े सभी संवेदनशील इलाकों में तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। सुरक्षा की कमान सीनियर एसपी राकेश रंजन के नेतृत्व में संभाली जा रही है। पूरे रूट और विधानसभा परिसर की निगरानी के लिए जिले के चार आईपीएस अधिकारियों के साथ दो अतिरिक्त आईपीएस अधिकारियों की भी तैनाती की गई है। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था में 15 डीएसपी, 30 इंस्पेक्टर, 100 दारोगा और करीब 1000 पुलिसकर्मियों को लगाया गया है। पुलिस बल की तैनाती बिरसा चौक, जगन्नाथपुर मंदिर, विधानसभा परिसर और मार्च के पूरे रूट पर रहेगी, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। आज निकलेगा आइसा का विधानसभा मार्च आइसा की ओर से शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे बिरसा चौक से विधानसभा मार्च निकाला जाएगा। वहीं, आंदोलनरत छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। इसे लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी है। पुलिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हो और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। सीसीटीवी और ड्रोन से होगी निगरानी विधानसभा परिसर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर 24 घंटे नजर रखी जाएगी। पुलिस कंट्रोल रूम से पूरे इलाके की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल, क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT), एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक संसाधनों को भी अलर्ट पर रखा गया है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी तुरंत मौके पर भेजा जाएगा। यातायात व्यवस्था पर भी रहेगा विशेष ध्यान विधानसभा मार्च के दौरान राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है। इसे देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने वैकल्पिक रूट की भी तैयारी की है। आम लोगों से अपील की गई है कि वे पुलिस और प्रशासन की ओर से जारी ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें और आवश्यक होने पर वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें। पुलिस बोली- कानून व्यवस्था से समझौता नहीं पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना सभी का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था भंग करने या हिंसा फैलाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे घटनाक्रम पर वरिष्ठ अधिकारियों की लगातार नजर रहेगी और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि विधानसभा सत्र और प्रस्तावित आंदोलनों को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो और आम नागरिकों की सुरक्षा व यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो। झारखंड सरकार ने JSLPS की नई HR पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। इसके तहत 1300 नए पदों का सृजन होगा। कर्मचारियों को 30 लाख का दुर्घटना बीमा, 20 लाख का मेडिक्लेम, शिक्षा भत्ता और अन्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा।  

kalpana अगस्त 7, 2026 0
JPSC scam investigation sees major action as 19 accused individuals are arrested by authorities.
पटना में सफाईकर्मियों की हड़ताल खत्म, सीधे खाते में मिलेगा वेतन और पहली बार बोनस का लाभ

पटना: राजधानी पटना में पिछले छह दिनों से जारी नगर निगम सफाईकर्मियों की हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। नगर विकास एवं आवास विभाग, पटना नगर निगम और सफाईकर्मी संघर्ष समिति के बीच हुई वार्ता के बाद कई महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनी। समझौते के बाद नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा और सफाईकर्मी प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। इस बैठक में पटना नगर निगम के नगर आयुक्त यशपाल मीणा भी मौजूद रहे। हड़ताल खत्म होने से शहर की सफाई व्यवस्था फिर से पटरी पर लौटने की उम्मीद है। पिछले कई दिनों से राजधानी के विभिन्न इलाकों में कूड़े के ढेर लगने से लोगों को बदबू, गंदगी और संक्रमण का खतरा झेलना पड़ रहा था। अब सीधे बैंक खाते में आएगा वेतन, पहली बार मिलेगा बोनस समझौते के तहत सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया कि आउटसोर्सिंग और ठेका एजेंसियों के माध्यम से काम करने वाले सफाईकर्मियों का वेतन अब सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और कर्मचारियों को समय पर भुगतान मिल सकेगा। इसके साथ ही पहली बार सफाईकर्मियों को बोनस देने का भी निर्णय लिया गया है। ठेका एजेंसियों को उनका निर्धारित कमीशन मिलता रहेगा, लेकिन कर्मचारियों के वेतन भुगतान में किसी प्रकार की देरी या कटौती नहीं होगी। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत यदि काम के दौरान सफाई वाहन खराब हो जाता है तो उस अवधि के लिए चालकों के वेतन में कटौती नहीं की जाएगी। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी। दैनिक कर्मियों को मिलेंगी स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं पटना नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने बताया कि राज्य सरकार नगर निकायों में कार्यरत सफाईकर्मियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दैनिक कर्मियों को भविष्य में अवकाश, ग्रेच्युटी, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन तथा अन्य सेवा लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी, ताकि उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान सुविधाएं मिल सकें। 3816 कर्मचारियों के स्थायीकरण से बढ़ेगा वित्तीय भार नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति ने 3816 दैनिक सफाईकर्मियों के स्थायीकरण की मांग को मंजूरी देकर विभाग को भेजने की अनुशंसा की है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो प्रत्येक कर्मचारी का प्रस्तावित मासिक वेतन 35,800 रुपये होगा। वर्तमान में इन कर्मचारियों पर प्रतिमाह लगभग 6.04 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि स्थायीकरण के बाद यह खर्च बढ़कर 13.66 करोड़ रुपये प्रति माह हो जाएगा। इससे नगर निगम पर हर महीने लगभग 7.61 करोड़ रुपये और सालाना करीब 163.94 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। किस अंचल में कितने कर्मचारी कार्यरत पटना नगर निगम के आठ अंचलों और कार्यालयों में कुल 3816 दैनिक सफाईकर्मी कार्यरत हैं। नूतन राजधानी अंचल – 941 कर्मचारी पाटलिपुत्र अंचल – 700 अजीमाबाद – 585 बांकीपुर – 513 कंकड़बाग – 426 पटना सिटी – 405 जलापूर्ति अंचल – 199 मुख्यालय – 47 कर्मचारी अन्य मांगों पर बनेगी समिति नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि कई मांगों पर सहमति बन गई है, जबकि अन्य लंबित मांगों पर विचार के लिए एक समिति गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि एसीपी और एमएससीपी योजना के लाभ पर लगी रोक हटाने के लिए विभाग स्तर पर पत्राचार किया जाएगा। जैसे ही यह रोक हटेगी, पात्र कर्मचारियों को योजना का लाभ दिया जाएगा। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था बहाल करने के लिए कर्मचारियों का काम पर लौटना बेहद आवश्यक था और समझौते से राजधानी को बड़ी राहत मिलेगी। शहर को मिली राहत हड़ताल के दौरान पटना के कई इलाकों में कूड़े के ढेर जमा हो गए थे, जिससे आम लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही थी। नगर निगम पर सफाई व्यवस्था बहाल करने का दबाव भी बढ़ गया था। अब हड़ताल समाप्त होने के बाद उम्मीद है कि शहर की सफाई व्यवस्था जल्द सामान्य हो जाएगी और लोगों को राहत मिलेगी।  

surbhi अगस्त 6, 2026 0
Former CDS Anil Chauhan reveals details about Operation Sindoor and Pakistan seeking ceasefire after military pressure.
'हमारे प्लान का आधा भी पूरा नहीं हुआ था': पूर्व CDS अनिल चौहान का बड़ा खुलासा, जानिए क्यों पाकिस्तान ने 8 घंटे में मांगा सीजफायर

नई दिल्ली: पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल (रिटायर्ड) अनिल चौहान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 10 मई 2025 की घटनाओं का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने जिस तेजी से भारत से सीजफायर की गुहार लगाई, वह उसकी सैन्य स्थिति के तेजी से कमजोर होने का संकेत था। उनके अनुसार, भारतीय सेना ने तब तक अपने सैन्य अभियान का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं किया था, लेकिन पाकिस्तान बातचीत के लिए मजबूर हो गया। द प्रिंट के एक कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल चौहान ने कहा कि 9 मई तक पाकिस्तान की ओर से भारत को 48 घंटे में सबक सिखाने जैसे दावे किए जा रहे थे। लेकिन 10 मई की सुबह हालात पूरी तरह बदल गए और पाकिस्तान ने भारत से संपर्क कर बातचीत की इच्छा जताई। "हमारे प्लान का आधा भी पूरा नहीं हुआ था" जनरल अनिल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से सीजफायर का प्रस्ताव उनके लिए भी अप्रत्याशित था। उन्होंने कहा, "10 मई की सबसे बड़ी हैरानी यह थी कि पाकिस्तान ने खुद फोन कर बातचीत की इच्छा जताई। उस समय तक हमने अपने सैन्य अभियान का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं किया था।" उनके मुताबिक, पाकिस्तान ने लगभग आठ घंटे के भीतर ही बातचीत का रास्ता चुन लिया, जबकि भारतीय सेना अपने अगले चरण की कार्रवाई की तैयारी कर चुकी थी। भारत ने तुरंत सीजफायर क्यों नहीं माना? पूर्व CDS के अनुसार, भारत चाहता था कि सीजफायर से पहले उसके सभी रणनीतिक सैन्य उद्देश्य पूरे हो जाएं। भारतीय सशस्त्र बलों की योजना थी कि पाकिस्तान के ऐसे सभी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाए, जहां से भविष्य में भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना हो। इसलिए भारत ने पाकिस्तान के प्रस्ताव के बावजूद कुछ समय तक सैन्य अभियान जारी रखा। पाकिस्तान क्यों हुआ मजबूर? जनरल चौहान ने बताया कि 10 मई की सुबह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के सरगोधा और नूर खान एयरबेस समेत कई महत्वपूर्ण एयरबेस पर सटीक हमले किए। इन हमलों के कारण: पाकिस्तान के कई एयरबेस गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। एयरस्ट्रिप प्रभावित होने से लड़ाकू विमानों का संचालन मुश्किल हो गया। पाकिस्तानी वायुसेना की परिचालन क्षमता पर बड़ा असर पड़ा। पाकिस्तान को यह एहसास हो गया कि यदि भारतीय कार्रवाई जारी रही तो उसकी सैन्य स्थिति और कमजोर हो जाएगी। जनरल चौहान के अनुसार, पाकिस्तान की सेना को यह भ्रम था कि उसने रातभर भारत को भारी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन भारतीय वायुसेना की कार्रवाई ने पूरे समीकरण बदल दिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को लगा कि अब बातचीत ही सबसे बेहतर विकल्प है, क्योंकि सैन्य स्थिति उसके नियंत्रण से बाहर जाती दिख रही थी। डीजीएमओ हॉटलाइन के जरिए हुआ संपर्क पूर्व CDS ने बताया कि पाकिस्तान ने डीजीएमओ (Director General of Military Operations) हॉटलाइन के माध्यम से भारत से संपर्क किया। उनके अनुसार, जब यह बातचीत शुरू हुई, तब भी भारतीय सैन्य कार्रवाई पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी और भारतीय सेना अपने अभियान पर आगे बढ़ रही थी। ऑपरेशन सिंदूर क्यों शुरू किया गया? भारत ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के जवाब में 6-7 मई 2025 की रात ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस आतंकी हमले में: 26 लोगों की हत्या की गई थी। मृतकों में 25 पर्यटक शामिल थे। आतंकियों ने कथित तौर पर धर्म पूछकर लोगों को निशाना बनाया। जांच में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) की भूमिका सामने आई। इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। जब पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, तब भारत ने जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया। पूर्व CDS के अनुसार, इसी दौरान पाकिस्तान की वायुसेना को भारी दबाव का सामना करना पड़ा और अंततः उसने सीजफायर की पहल की।  

surbhi अगस्त 6, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran, emphasizing diplomacy while calling nuclear weapons America's red line.
ईरान पर युद्ध नहीं, समझौता चाहते हैं ट्रंप; परमाणु हथियार को बताया अमेरिका की 'रेड लाइन'

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उनकी प्राथमिकता युद्ध नहीं, बल्कि समझौता है। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। ट्रंप ने इसे अमेरिका की "रेड लाइन" बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 'युद्ध नहीं, लोगों की जान बचाना चाहता हूं' लास वेगास में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान का विकल्प मौजूद था, लेकिन उन्होंने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य लोगों की जान बचाना है और यदि बातचीत से समाधान निकल सकता है तो वही बेहतर रास्ता है। 'द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े हमले की तैयारी थी' ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ एक बेहद बड़े सैन्य ऑपरेशन की योजना तैयार थी। उनके अनुसार, यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक हो सकता था। उन्होंने कहा कि बातचीत की पहल होने के बाद इस अभियान को रोक दिया गया और अब दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी है। परमाणु हथियार पर नहीं होगा समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोहराया कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि यही अमेरिका की सबसे स्पष्ट नीति है और इस मुद्दे पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। ट्रंप का कहना है कि उनका प्रशासन ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी है कूटनीतिक प्रयास ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और इसके सामान्य रूप से खुलने का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई के अनुसार, दोनों देशों के बीच समझौते का मसौदा लगभग तैयार है। यदि प्रक्रिया में कोई बाहरी बाधा नहीं आती, तो जल्द ही संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जानकारी दी जाएगी। वैश्विक नजरें मध्य पूर्व पर मध्य पूर्व में जारी तनाव, ईरान-अमेरिका संबंध और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चल रही बातचीत पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में होने वाले किसी भी समझौते का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।  

surbhi अगस्त 6, 2026 0
Massive fire and thick smoke rise over Dubai's Jebel Ali industrial area after multiple explosions amid Middle East tensions.
दुबई में 20 मिनट में सात धमाकों से मचा हड़कंप, सऊदी तेल टैंकर पर मिसाइल हमले का दावा; होर्मुज स्ट्रेट पर समझौते की उम्मीद

दुबई: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दुबई स्थित जेबेल अली औद्योगिक क्षेत्र में मंगलवार देर रात करीब 20 मिनट के भीतर सात जोरदार धमाकों के बाद भीषण आग लग गई। विस्फोटों के बाद पूरे इलाके में काले धुएं का घना गुबार छा गया। हालांकि, यूएई प्रशासन ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि घटना किसी हमले का नतीजा थी या औद्योगिक दुर्घटना। फिलहाल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि भी नहीं हुई है। जेबेल अली क्यों है रणनीतिक रूप से अहम? जेबेल अली दुबई का सबसे बड़ा औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब माना जाता है। यहां दुनिया के सबसे बड़े मानव निर्मित बंदरगाहों में से एक मौजूद है। इसके अलावा फ्री ट्रेड जोन, ईंधन भंडारण केंद्र और अंतरराष्ट्रीय माल परिवहन की महत्वपूर्ण सुविधाएं भी यहीं स्थित हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में हुई घटना ने सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। कार शोरूम हादसे में भारतीय युवक की मौत इसी बीच, दुबई के शेख जायद रोड स्थित एक कार शोरूम में गैस सिलेंडर फटने से केरल के 27 वर्षीय शिजिन पॉल की मौत हो गई। हादसे में पांच अन्य लोग घायल हुए हैं। शिजिन करीब आठ महीने पहले नौकरी के लिए दुबई पहुंचे थे और सोशल मीडिया मैनेजर के रूप में कार्यरत थे। यह घटना खाड़ी देशों में भारतीय कामगारों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े करती है। सऊदी तेल टैंकर पर मिसाइल हमले का दावा यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह के पास एक सऊदी तेल टैंकर पर मिसाइल हमला किया। हूती समूह के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने हमले की जिम्मेदारी ली, हालांकि उन्होंने हमले के समय और नुकसान का कोई विस्तृत विवरण नहीं दिया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। अमेरिकी मिसाइल भंडार पर भी रिपोर्ट मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका अपनी THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली के लगभग 80 प्रतिशत इंटरसेप्टर और पैट्रियट सिस्टम के करीब आधे इंटरसेप्टर इस्तेमाल कर चुका है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो क्षेत्र में लंबे सैन्य अभियान चलाने की अमेरिकी क्षमता और रणनीति पर असर पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर जारी बातचीत इस बीच, वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सामान्य रूप से खोलने के लिए ईरान और ओमान के बीच बातचीत जारी है। दोनों देश जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उम्मीद जताई है कि इस मुद्दे पर जल्द समझौता हो सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा समुद्री मार्गों के साथ एक नए सुरक्षित कॉरिडोर के प्रस्ताव पर भी चर्चा चल रही है।  

surbhi अगस्त 6, 2026 0
Huge flames and thick black smoke rise from a chemical plant in São Paulo, Brazil, after a massive fire and multiple explosions.
ब्राजील के साओ पाउलो में केमिकल प्लांट में भीषण आग, कई धमाकों से दहशत; 150 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

ब्राजील के साओ पाउलो राज्य में स्थित एक केमिकल प्लांट में भीषण आग लगने के बाद कई जोरदार धमाके हुए, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी विकराल थी कि आसमान में सैकड़ों फीट तक घना काला धुआं और आग की ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं। एहतियात के तौर पर आसपास के इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकाला गया और करीब 150 लोगों का रेस्क्यू किया गया। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, आग ग्रेटर साओ पाउलो के इटाक्वाक्वेसेटुबा (Itaquaquecetuba) स्थित क्वेमा क्विमिका (Quema Quimica) नामक रासायनिक संयंत्र में स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3 बजे लगी। कई धमाकों से दहशत, घर छोड़कर भागे लोग आग लगने के कुछ ही देर बाद प्लांट में लगातार कई धमाके हुए, जिससे आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई। कई परिवार एहतियातन अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में फैक्ट्री से उठती आग की विशाल लपटें और 100 फीट से अधिक ऊंचाई तक उठता काला धुआं साफ दिखाई दे रहा है। अधिकारियों ने भी घटनास्थल पर कई विस्फोट होने की पुष्टि की है। 30 दमकल गाड़ियां और 60 से ज्यादा फायरफाइटर मौके पर आग पर काबू पाने के लिए 30 दमकल गाड़ियों और 60 से अधिक दमकलकर्मियों को मौके पर तैनात किया गया है। फायर ब्रिगेड लगातार आग बुझाने और उसे आसपास की औद्योगिक इकाइयों तक फैलने से रोकने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। सॉल्वेंट टैंक बन रहे आग की बड़ी वजह स्थानीय मीडिया के अनुसार, जिस प्लांट में आग लगी है वहां सॉल्वेंट स्टोर करने के लिए 24 बड़े टैंक मौजूद हैं। प्रत्येक टैंक की क्षमता लगभग 31 क्यूबिक मीटर बताई गई है। इन टैंकों में मौजूद अत्यधिक ज्वलनशील रसायनों के कारण आग तेजी से फैलती गई और लगातार धमाके होते रहे। एक वायरल वीडियो में धमाके की वजह से मैनहोल का ढक्कन हवा में उछलता दिखाई देता है। बताया गया है कि इस विस्फोट की चपेट में आने से वहां से गुजर रहा एक व्यक्ति गिर पड़ा, हालांकि उसकी स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। आसपास की बिजली आपूर्ति बंद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी है, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। क्या बनाती है यह कंपनी? आग से प्रभावित कंपनी Quema Quimica सॉल्वेंट्स और पॉलिएस्टर रेजिन के उत्पादन और विपणन का काम करती है। चूंकि प्लांट में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील रसायन मौजूद हैं, इसलिए आग बुझाने का अभियान काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। फिलहाल दमकल विभाग की टीमें लगातार आग पर काबू पाने में जुटी हैं और घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आग पूरी तरह बुझने के बाद ही नुकसान और संभावित कारणों का विस्तृत आकलन किया जाएगा।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
5.8 magnitude earthquake strikes Aomori Prefecture in northern Japan
जापान में फिर आया 5.8 तीव्रता का भूकंप, आओमोरी प्रांत में महसूस हुए झटके; सुनामी का खतरा नहीं

Japan Earthquake: जापान में एक बार फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। शनिवार सुबह उत्तरी जापान के आओमोरी (Aomori) प्रांत के पास 5.8 तीव्रता का भूकंप आया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई और फिलहाल किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। आओमोरी के तट के पास आया भूकंप जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार, भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 11:48 बजे आया। इसका केंद्र आओमोरी के प्रशांत तट से लगभग 80 किलोमीटर की गहराई में था। जापानी 7-पॉइंट भूकंप तीव्रता पैमाने पर इसकी तीव्रता लेवल-4 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र 41.3 डिग्री उत्तर अक्षांश और 142.0 डिग्री पूर्व देशांतर पर स्थित था। सुनामी की चेतावनी जारी नहीं जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इस भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। कुछ दिन पहले आए भीषण भूकंप में 35 लोगों की हुई थी मौत इससे पहले कुमामोटो प्रांत में आए 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। अधिकारियों के मुताबिक, उस आपदा में 35 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन अभी भी कुछ मौतों के वास्तविक कारणों की जांच कर रहा है। प्रभावित इलाकों में अब भी मुश्किल हालात कुमामोटो के यात्सुशिरो और उकी शहरों में भूकंप के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हो सके हैं। कई प्रमुख सड़कों में बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में ट्रैफिक सिग्नल बंद हैं और ईंधन की कमी के कारण पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हुई हैं। कई लोग ईंधन का इंतजार करते हुए अपनी गाड़ियों में रात बिताने को मजबूर हैं। राहत शिविरों में रह रहे सैकड़ों परिवार उकी शहर के ओगावा क्षेत्र में एक नागरिक केंद्र को अस्थायी राहत शिविर में बदला गया है, जहां 500 से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं। राहत शिविरों में भोजन, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन और बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं। जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है और यहां लगातार भूकंपीय गतिविधियां दर्ज होती रहती हैं। फिलहाल नए भूकंप के बाद प्रशासन स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Rescue teams search for trapped workers after a deadly coal mine explosion in Balochistan, Pakistan.
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में कोयला खदान में बड़ा विस्फोट, 32 मजदूरों की मौत; मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये मुआवजा

Pakistan Coal Mine Blast: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक कोयला खदान में हुए भीषण विस्फोट में 32 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य खनिकों के अब भी खदान में फंसे होने की आशंका है। अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा संभवतः मीथेन गैस विस्फोट के कारण हुआ। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। मीथेन गैस विस्फोट बना हादसे की वजह पीटीआई के मुताबिक, यह दुर्घटना बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा के बाहरी इलाके स्थित एक कोयला खदान में हुई। सरकारी खान निरीक्षक गनी बलोच ने बताया कि प्रारंभिक जांच में विस्फोट की वजह मीथेन गैस मानी जा रही है। उन्होंने कहा कि मीथेन गैस में विस्फोट के बाद खदान के भीतर ऑक्सीजन का स्तर लगभग शून्य हो जाता है, जिससे जीवित बचने की संभावना बेहद कम हो जाती है। 10 मजदूर अब भी लापता अधिकारियों के अनुसार, हादसे के बाद पहले सात शव निकाले गए, जबकि बाद में राहत टीमों ने 25 अन्य शव बरामद किए। अब भी करीब 10 खनिकों के फंसे होने की आशंका है, जिसके चलते मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। बचाव दल कठिन परिस्थितियों में खदान के भीतर लगातार तलाश अभियान चला रहे हैं। बचाव अभियान जारी प्रांतीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (PDMA) ने बताया कि राहत एवं बचाव अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी फंसे मजदूरों का पता नहीं चल जाता। अधिकारियों ने कहा कि खदान के अंदर गैस की मौजूदगी के कारण बचाव कार्य बेहद सावधानी से किया जा रहा है। मृतकों के परिजनों को मिलेगा मुआवजा बलूचिस्तान के खदान एवं खनिज मंत्री शोएब नोशेरवानी ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि प्रांतीय सरकार मृतकों के प्रत्येक परिवार को 5-5 लाख पाकिस्तानी रुपये की आर्थिक सहायता देगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन प्रभावित परिवारों की हरसंभव मदद करेगा और हादसे के कारणों की विस्तृत जांच भी कराई जाएगी। खदानों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल इस दर्दनाक हादसे के बाद पाकिस्तान में कोयला खदानों की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि गैस निगरानी, वेंटिलेशन और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन नहीं होने के कारण इस तरह की दुर्घटनाएं बार-बार सामने आती रही हैं। फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Security personnel conduct a search operation after a terror attack in Jammu and Kashmir's Kulgam district.
जम्मू-कश्मीर में 10 दिन में दूसरा आतंकी हमला, तीन की मौत; सुरक्षा व्यवस्था और सख्त

Jammu Kashmir Terror Attack: जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा अलर्ट के बावजूद पिछले 10 दिनों के भीतर दो आतंकी हमलों ने एक बार फिर घाटी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इन दोनों हमलों में एक पुलिसकर्मी और छत्तीसगढ़ के दो गैर-स्थानीय मजदूरों समेत तीन लोगों की मौत हो चुकी है। ताजा हमला शुक्रवार (31 जुलाई) को कुलगाम जिले में हुआ, जबकि इससे पहले 22 जुलाई को अनंतनाग में आतंकियों ने एक पुलिसकर्मी की हत्या कर दी थी। कुलगाम में गैर-स्थानीय मजदूरों को बनाया निशाना शुक्रवार को कुलगाम जिले में आतंकियों ने छत्तीसगढ़ के दो गैर-स्थानीय मजदूरों पर गोलीबारी कर दी। शुरुआती जानकारी में एक मजदूर की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया था। अधिकारियों के अनुसार, घायल मजदूर बोपिंदर को पहले गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) अनंतनाग ले जाया गया। बाद में उसकी गंभीर हालत को देखते हुए एसकेआईएमएस, सौरा रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। दोनों मजदूरों की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच बताई गई है और वे छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे। 22 जुलाई को अनंतनाग में हुई थी पुलिसकर्मी की हत्या इससे करीब 10 दिन पहले अनंतनाग में आतंकियों ने हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद यह घाटी में पुलिस बल को निशाना बनाकर किया गया पहला बड़ा हमला माना गया। पहलगाम हमले के बाद बढ़ी थी सुरक्षा अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। इसके बावजूद हाल के दो हमलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कुलगाम हमले के बाद पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। हमलावरों की तलाश के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। पहले भी गैर-स्थानीय मजदूर बने थे निशाना गैर-स्थानीय मजदूरों पर हमले की यह पहली घटना नहीं है। फरवरी 2024 में श्रीनगर के शहीद गंज इलाके में आतंकियों ने पंजाब के दो मजदूरों अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे हमलों का उद्देश्य घाटी में डर का माहौल पैदा करना और बाहरी श्रमिकों को निशाना बनाना है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां दोनों हालिया आतंकी घटनाओं की जांच कर रही हैं और हमलावरों की पहचान कर उन्हें पकड़ने के लिए अभियान जारी है।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Rescue teams search through the debris after a four-storey residential building collapsed in Bhiwandi, Maharashtra
Bhiwandi Building Collapse: भिवंडी में चार मंजिला इमारत गिरी, 6 की मौत; कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका

Bhiwandi Building Collapse: महाराष्ट्र के भिवंडी में गुरुवार देर रात बड़ा हादसा हो गया, जब एक चार मंजिला रिहायशी इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. इस हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है. एनडीआरएफ, ठाणे डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (TDRF), फायर ब्रिगेड, पुलिस और नगर निगम की टीमें युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं. रात 11:30 बजे अचानक ढही इमारत अधिकारियों के अनुसार, 48 कमरों वाली यह इमारत रात करीब 11:30 बजे ढह गई. स्थानीय लोगों ने बताया कि रात करीब 9 बजे से ही इमारत में दरारें पड़ने लगी थीं और तेज आवाजें सुनाई दे रही थीं. सूचना मिलने पर नगर निगम और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और कई परिवारों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. हालांकि, इसी दौरान इमारत का बी-विंग अचानक गिर गया. बताया जा रहा है कि कुछ लोग बाहर निकल रहे थे, जबकि मरम्मत कार्य में लगे मजदूर अंदर ही फंस गए. पहले ही खतरनाक घोषित हो चुकी थी इमारत भिवंडी-निजामपुर नगर निगम के सहायक आयुक्त अरविंद घोगरे ने बताया कि इस इमारत को पहले ही जर्जर और खतरनाक घोषित किया जा चुका था. इसके बावजूद यहां मरम्मत का कार्य जारी था. शुरुआती जांच में सामने आया है कि मरम्मत का काम आवश्यक अनुमति के बिना कराया जा रहा था. आशंका है कि हादसे में जान गंवाने वाले अधिकांश लोग मरम्मत कार्य से जुड़े मजदूर हैं. मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है. NDRF और फायर ब्रिगेड का रेस्क्यू अभियान जारी हादसे के बाद एनडीआरएफ, टीडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीमें मौके पर पहुंचीं. बचाव अभियान में डॉग स्क्वॉड, चार फायर इंजन, दो एम्बुलेंस और भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. प्रशासन का कहना है कि मलबे में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित निकालने तक राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी रहेगा.  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
Rescue teams search through collapsed buildings after a powerful 7.1-magnitude earthquake in Japan's Kumamoto Prefecture
Japan Earthquake: जापान में 7.1 तीव्रता के भूकंप से 18 की मौत, मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी

Japan Earthquake: जापान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचा दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, कुमामोतो प्रांत में अब तक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 62 लोग घायल हुए हैं। घायलों में छह की हालत गंभीर बताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी भूकंप के बाद सेना, दमकल विभाग और आपदा राहत दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। कई मकान पूरी तरह ढह गए हैं, जबकि कई इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने बताया कि अभी भी कुछ लोगों के लापता होने की आशंका है और उनकी तलाश जारी है। हजारों घरों में बिजली-पानी ठप भूकंप के कारण करीब 34,900 घरों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है, जबकि लगभग 15,000 घरों में पानी की सप्लाई बंद है। हालात को देखते हुए 8,800 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जो फिलहाल 400 से ज्यादा राहत शिविरों में रह रहे हैं। प्रशासन प्रभावित इलाकों में भोजन, पानी और अन्य जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने में जुटा है। मॉल और फैक्ट्री हादसे में बढ़ा नुकसान कुमामोतो के काशिमा शहर स्थित एयॉन मॉल में इमारत को भारी नुकसान पहुंचा, जहां चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और तीन लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। वहीं यत्सुशिरो में स्थित निप्पॉन पेपर इंडस्ट्रीज की फैक्ट्री की चिमनी गिरने से पांच कर्मचारियों की मौत हो गई। सात कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि चार अन्य के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। प्रधानमंत्री ने बचाव अभियान तेज करने के दिए निर्देश जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि कई लोग अब भी मलबे में फंसे हैं और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण है। उन्होंने राहत एवं बचाव एजेंसियों को अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। सरकार प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचा रही है। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए लोगों से गर्म मौसम के बीच स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की अपील की। 2016 के भूकंप की यादें फिर हुईं ताजा भूकंप के बाद बुलेट ट्रेन सेवाओं को एहतियातन अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है, जबकि आसो कुमामोतो हवाई अड्डे से सीमित उड़ान सेवाएं दोबारा शुरू कर दी गई हैं। गौरतलब है कि 2016 में भी कुमामोतो प्रांत विनाशकारी भूकंप की चपेट में आया था, जिसमें 50 से अधिक लोगों की जान गई थी। ताजा भूकंप ने एक बार फिर जापान की भूकंपीय संवेदनशीलता और आपदा प्रबंधन की बड़ी चुनौती को सामने ला दिया है।  

kalpana जुलाई 30, 2026 0
Security personnel patrolling Nepal's Sunsari district after communal violence as curfew remains in force near the India-Nepal border
Parliament Session: लोकसभा-राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा जारी, प्रियंका बोलीं- RSS इतिहास नहीं बदल सकता

संसद के मानसून सत्र का गुरुवार (30 जुलाई) का दिन भी हंगामे के नाम रहा। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने छात्र आंदोलन, CJP प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चंदा मामले और एंटी पेपर लीक बिल समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। वहीं सरकार ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। प्रियंका गांधी का RSS और सरकार पर हमला कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि वर्दी बदलने या नई शिक्षा नीति के जरिए इतिहास नहीं बदला जा सकता। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई सत्य और अहिंसा के आधार पर लड़ी गई थी और उसमें RSS की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने कहा कि देश की आत्मा को कोई नहीं बदल सकता। अमित शाह से जवाब की मांग CJP प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया। प्रियंका गांधी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सदन में आकर इस पूरे मामले पर जवाब देना चाहिए। जेपी नड्डा का विपक्ष पर पलटवार राज्यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वह लगातार संसद की कार्यवाही बाधित कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष बहस से बच रहा है। एंटी पेपर लीक बिल पर TMC का हमला तृणमूल कांग्रेस सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि केवल सजा और जुर्माना बढ़ाने से पेपर लीक नहीं रुकेंगे। उन्होंने मांग की कि परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय की जाए और दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई हो। राज्यसभा में आज पेश होगा एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा से पारित होने के बाद एंटी पेपर लीक बिल 2026 आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा। सरकार का दावा है कि नए कानून से पेपर लीक माफिया और परीक्षा में धांधली करने वालों पर कड़ी कार्रवाई संभव होगी। राम मंदिर चंदा मामले पर चर्चा की मांग कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने राज्यसभा में कथित राम मंदिर चंदा मामले पर तत्काल चर्चा कराने के लिए नोटिस दिया और सरकार से जवाब मांगा। राहुल गांधी के बयान पर कांग्रेस का बचाव कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि राहुल गांधी ने सरकार की "दुखती रग" पर हाथ रखा है, इसलिए बीजेपी बौखलाई हुई है। वहीं मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए।  

kalpana जुलाई 30, 2026 0
Security personnel patrolling Nepal's Sunsari district after communal violence as curfew remains in force near the India-Nepal border
नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा: भारत सीमा से सटे सुनसरी में कर्फ्यू बढ़ा, पुलिस फायरिंग में 1 की मौत

Nepal Communal Violence: भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले में सांप्रदायिक तनाव के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। दो धार्मिक समुदायों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए फायरिंग की। इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि सुरक्षाकर्मियों समेत 12 से अधिक लोग घायल हुए हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू बढ़ा दिया है। कैसे भड़की हिंसा? पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुनसरी जिले के कप्तानगंज इलाके में दो धार्मिक समुदायों के जुलूस और उत्सव के दौरान विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच झड़प होने लगी। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोली चलाई। स्थानीय मीडिया काठमांडू पोस्ट के अनुसार, फायरिंग में ओम प्रकाश मेहता नामक व्यक्ति की मौत हुई है। कई लोग घायल हिंसा और पुलिस कार्रवाई में सुरक्षाकर्मियों सहित 12 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। प्रधानमंत्री ने जताया दुख नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस की गोली से किसी नागरिक की मौत होना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने मृतक के परिजनों को न्याय और मुआवजा देने का भरोसा दिलाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि घटना की जांच शुरू कर दी गई है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। शांति बनाए रखने की अपील प्रधानमंत्री ने लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी अफवाह, उकसावे या भड़काऊ संदेश पर ध्यान न दें और सामाजिक सौहार्द बनाए रखें। सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और स्थिति सामान्य करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी सुनसरी जिले में सोमवार से लागू कर्फ्यू को अब अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से बिना अनुमति घरों से बाहर नहीं निकलने की अपील की गई है। भारत-नेपाल सीमा से सटे इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी और कड़ी कर दी गई है।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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