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US President Donald Trump shares controversial AI-generated images targeting former President Barack Obama and Italian Prime Minister Giorgia Meloni, sparking political backlash online.
ट्रंप का नया सोशल मीडिया विवाद: ओबामा की AI तस्वीर पर लिखा 'अल्हम्दुलिल्लाह', इटली की पीएम मेलोनी पर भी शेयर किया मीम

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में घिर गए हैं। ट्रंप ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार एक तस्वीर साझा की, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा को विवादित तरीके से दिखाया गया है। तस्वीर में अरबी शब्द "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा गया है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं, ट्रंप ने NATO शिखर सम्मेलन से पहले इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया, जिससे नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ओबामा की AI तस्वीर पर विवाद ट्रंप द्वारा साझा की गई AI-जनरेटेड तस्वीर में बराक ओबामा और मिशेल ओबामा को राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान की सीढ़ियों पर मुस्कुराते और हाथ हिलाते हुए दिखाया गया है। तस्वीर में विमान पर "Yes We Can", "Obama", "BLM" (Black Lives Matter) जैसे शब्दों के साथ अरबी भाषा में "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा हुआ दिखाई देता है। इस पोस्ट को लेकर कई लोगों ने ट्रंप पर नस्लीय और सांप्रदायिक संकेतों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की AI तस्वीरें राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं और सार्वजनिक संवाद की गरिमा को प्रभावित करती हैं। पहले भी विवादों में रह चुके हैं ट्रंप यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ओबामा को लेकर विवादित पोस्ट साझा किया हो। इससे पहले भी वह सोशल मीडिया पर AI और एडिटेड तस्वीरों के जरिए पूर्व राष्ट्रपति और उनके परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कर चुके हैं। ट्रंप पर पहले भी ओबामा के जन्मस्थान को लेकर झूठे दावे फैलाने और नस्लीय टिप्पणी करने के आरोप लगते रहे हैं। उनकी कई पोस्टों की दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों के नेताओं ने आलोचना की थी। मेलोनी पर भी शेयर किया मीम ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया। इस पोस्ट में हाल ही में फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन की तस्वीर के साथ लिखा था— "Restraining Order Needed" (रोक लगाने वाले आदेश की जरूरत है)। हालांकि पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसे मेलोनी पर तंज के रूप में देखा गया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे इटली की प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने वाला पोस्ट बताया। G7 बैठक के बाद बढ़ा विवाद ट्रंप ने इससे पहले दावा किया था कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए विशेष आग्रह किया था। मेलोनी ने इस दावे को सार्वजनिक रूप से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह झूठ बताया था। अब नए मीम के बाद दोनों नेताओं के बीच कथित तनातनी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। AI पोस्ट को लेकर बढ़ रही चिंता हाल के महीनों में ट्रंप लगातार AI से तैयार तस्वीरों और मीम्स का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए कर रहे हैं। उनके समर्थक इन्हें व्यंग्य बताते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह की पोस्ट भ्रामक जानकारी, राजनीतिक ध्रुवीकरण और सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती हैं। ट्रंप के ताजा पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है, हालांकि इस पर व्हाइट हाउस या बराक ओबामा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Emergency responders work at the site of missile and drone strikes in Kyiv after a large-scale Russian attack ahead of the NATO Summit.
NATO समिट से पहले रूस का कीव पर बड़ा मिसाइल हमला, कई धमाकों से दहली यूक्रेन की राजधानी

कीव: तुर्की में मंगलवार से शुरू होने वाले NATO शिखर सम्मेलन से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़ा मिसाइल और ड्रोन हमला किया। सोमवार तड़के हुए इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि कई इलाकों में आग लगने और भारी नुकसान की खबर है। यह एक सप्ताह से भी कम समय में कीव पर दूसरा बड़ा हमला है। ऐसे समय में यह हमला हुआ है जब NATO समिट में रूस-यूक्रेन युद्ध सबसे प्रमुख मुद्दा रहने की उम्मीद है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसमें शामिल होने वाले हैं। बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से किया गया हमला यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने राजधानी कीव पर एक साथ बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन दागे। तड़के सुबह शहर में कई तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जबकि हमले से कुछ देर पहले पूरे शहर में एयर रेड सायरन बजने लगे थे। कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि शहर के कम से कम दो जिलों में मिसाइलों के मलबे गिरने और आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं। जेलेंस्की ने पहले ही दी थी चेतावनी यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने एक दिन पहले ही बड़े रूसी हमले की आशंका जताई थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि रूस एक और बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस NATO शिखर सम्मेलन से पहले अधिक से अधिक तबाही मचाकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक यह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की रणनीति का हिस्सा है। पिछले सप्ताह भी हुआ था घातक हमला यह हमला पिछले गुरुवार को कीव पर हुए बड़े रूसी हमले के कुछ ही दिनों बाद हुआ है। उस हमले में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई थी और इसे युद्ध शुरू होने के बाद राजधानी पर सबसे घातक हमलों में से एक माना गया था। लगातार हो रहे हमलों ने राजधानी की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। NATO समिट में युद्ध रहेगा मुख्य मुद्दा तुर्की में मंगलवार से शुरू हो रहे NATO शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध प्रमुख एजेंडा रहेगा। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता यूक्रेन को सैन्य सहायता, यूरोप की सुरक्षा और रूस पर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। इस बीच रूस पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर रहा है। वहीं यूक्रेन भी रूस के भीतर तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले बढ़ा रहा है। ट्रंप-पुतिन की हालिया बातचीत भी चर्चा में NATO समिट से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 4 जुलाई को लगभग 90 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई थी। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की थी। हालांकि, ताजा रूसी हमले के बाद युद्ध को लेकर तनाव और बढ़ गया है तथा NATO देशों की आगे की रणनीति पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Monsoon 2026
देशभर में मॉनसून ने पकड़ी रफ्तार, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली, एजेंसियां। जून महीने में कमजोर रहने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने 11 जुलाई तक दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके साथ ही तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है।   उत्तर भारत से लेकर पश्चिमी तट तक बारिश का असर आईएमडी के मुताबिक, अगले तीन दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर अरब सागर, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ेगा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जून में मॉनसून ट्रफ के हिमालय की तलहटी की ओर खिसकने से बारिश में कमी आई थी, लेकिन अब इसके दोबारा सक्रिय होने से बारिश का दौर तेज होगा। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में भारी बारिश के कारण अलकनंदा नदी चेतावनी स्तर के करीब पहुंच गई है।   मध्य, पूर्वी और दक्षिण भारत में भी भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़, पश्चिम और पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भी अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश की संभावना जताई है। वहीं, कोंकण-गोवा, गुजरात, मध्य महाराष्ट्र और सौराष्ट्र-कच्छ में 6 और 7 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। केरल, तटीय कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में भी भारी बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।   मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का मिजाज अधिक अनिश्चित होता जा रहा है। कम समय में अत्यधिक बारिश से बाढ़ और लंबे समय तक बारिश की कमी से सूखे जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने और खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Protesters gather at Parliament Square in London during the Kashmir Million March, demanding human rights and the release of political activists in Pakistan-occupied Kashmir.
पाकिस्तान के खिलाफ लंदन में एकजुट हुए कश्मीरी, बलोच और पश्तून, PoK में मानवाधिकार उल्लंघन का लगाया आरोप

लंदन: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK), बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के विरोध में यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन में रविवार को हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों के साथ-साथ बलोच और पश्तून समुदाय के लोगों ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की सेना पर आम नागरिकों के अधिकारों के दमन और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई के आरोप लगाए। लंदन कश्मीर मिलियन मार्च में उमड़ी भीड़ जानकारी के अनुसार, लंदन में आयोजित "कश्मीर मिलियन मार्च" संसद परिसर (Parliament Square) से शुरू होकर पाकिस्तान हाई कमीशन तक निकाला गया। आयोजकों का दावा है कि मार्च में करीब 50 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाई और गिरफ्तार राजनीतिक कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आजादी के समर्थन में नारे लगाए और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख शौकत नवाज मीर समेत अन्य नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध किया। बलोच और पश्तून समुदाय ने भी जताई एकजुटता इस मार्च में बलोच और पश्तून समुदाय के लोगों ने भी भाग लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना उनके क्षेत्रों में भी नागरिकों के अधिकारों का हनन कर रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा—तीनों क्षेत्रों में आम लोगों को दमन और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान सेना पर गंभीर आरोप प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के एक राजनीतिक कार्यकर्ता महमूद कश्मीरी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना ने टट्टापानी, सेंहसा और कोटली जैसे इलाकों में आम लोगों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में रहने वाले कश्मीरी अब इन घटनाओं के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना था कि पाकिस्तान को अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करना चाहिए और क्षेत्र के लोगों को उनके अधिकार देने चाहिए। गिरफ्तार नेताओं की रिहाई की मांग प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक नेताओं की गिरफ्तारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने मांग की कि सभी गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा किया जाए। इसके साथ ही प्रदर्शन में शामिल लोगों ने हिरासत में लिए गए युवाओं के शव उनके परिजनों को सौंपने और गिरफ्तार नागरिकों की रिहाई की भी मांग की। PoK में जारी है विरोध प्रदर्शन लंदन में हुआ यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पिछले कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत हुई है और इसके बाद अनेक राजनीतिक नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिसके विरोध में विदेशों में रहने वाले कश्मीरी, बलोच और पश्तून समुदाय भी अब खुलकर आवाज उठा रहे हैं.  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Millions of mourners gather in Tehran as the funeral procession of former Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei begins under tight security.
ईरान में अली खामेनेई की अंतिम यात्रा का सबसे बड़ा दिन आज, करोड़ों लोगों की भीड़ के बीच 1989 जैसी भगदड़ का खतरा

तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा का सबसे अहम चरण सोमवार से शुरू हो गया है। राजधानी तेहरान में लाखों नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के जुटने की संभावना जताई गई है। प्रशासन का अनुमान है कि अंतिम यात्रा में एक करोड़ से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। इसी वजह से सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दी गई है, ताकि 1989 में देश के पहले सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के दौरान हुई भगदड़ जैसी घटना दोबारा न हो। सुबह से शुरू हुई अंतिम यात्रा दो दिनों तक तेहरान की ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में अंतिम दर्शन के लिए रखे गए अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को सोमवार सुबह करीब 6 बजे अंतिम यात्रा के लिए रवाना किया गया। आयोजकों के अनुसार यह यात्रा पूरे शहर में 10 से 12 घंटे तक चलेगी। पिछले दो दिनों से हजारों लोग मस्जिद पहुंचकर खामेनेई और उनके परिवार के अन्य दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। सोमवार को सबसे बड़ी भीड़ उमड़ने की संभावना के चलते पूरे तेहरान में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। 1989 जैसी त्रासदी दोहराने से बचने की तैयारी ईरानी प्रशासन इस बार विशेष सतर्कता बरत रहा है। वर्ष 1989 में ईरान के पहले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार में करीब एक करोड़ लोग पहुंचे थे। उस दौरान भीड़ बेकाबू हो गई थी, जिसमें 10 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 10 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इतना ही नहीं, भीड़ शव वाहन तक पहुंच गई थी, जिससे कफन फट गया और पार्थिव शरीर जमीन पर गिर गया था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद लेनी पड़ी थी। कंक्रीट बैरियर और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था इस बार ऐसी किसी भी स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने अंतिम दर्शन स्थल पर ताबूत और श्रद्धालुओं के बीच बड़े-बड़े कंक्रीट बैरियर लगाए थे। अंतिम यात्रा के दौरान भी सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा घेरे बनाए गए हैं और लोगों की आवाजाही को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा है। कई शहरों में होंगे श्रद्धांजलि कार्यक्रम तेहरान में मुख्य अंतिम यात्रा के बाद मंगलवार को धार्मिक शहर क़ोम में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके बाद बुधवार को इराक के पवित्र शहर नजफ़ और कर्बला में भी विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। अंतिम चरण में गुरुवार को अली खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मोजतबा खामेनेई अब भी सार्वजनिक रूप से नहीं आए रविवार को अली खामेनेई के तीन बेटे पहली बार अंतिम संस्कार कार्यक्रम में दिखाई दिए, लेकिन उनके उत्तराधिकारी बनाए गए मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। सूत्रों के अनुसार, 28 फरवरी को हुए हवाई हमलों में मोजतबा भी घायल हुए थे। हालांकि उनकी चोटों की गंभीरता को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। युद्ध के बाद एकजुटता दिखाने का प्रयास अली खामेनेई की अंतिम यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे ईरान की राष्ट्रीय एकजुटता और राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। अमेरिका और इजरायल के साथ हालिया संघर्ष के बाद ईरानी नेतृत्व इस आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि देश अब भी एकजुट और मजबूत है।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
India's Ministry of External Affairs (MEA) issues a public warning against fake social media accounts posing as ministry advisers and offering paid policy training.
विदेश मंत्रालय के नाम पर सोशल मीडिया पर ठगी, MEA ने जारी की चेतावनी; फर्जी सलाहकारों के झांसे में न आने की अपील

नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विदेश मंत्रालय (MEA) के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को ठगने का मामला सामने आया है। कुछ फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट खुद को विदेश मंत्रालय का सलाहकार बताकर व्यापार, प्रवासन (Migration) और अन्य नीतिगत मामलों में विशेषज्ञ होने का दावा कर रहे हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विदेश मंत्रालय ने आम जनता के लिए आधिकारिक चेतावनी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने फर्जी दावों से किया किनारा विदेश मंत्रालय के आधिकारिक फैक्ट-चेक X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर जारी बयान में कहा गया कि मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट साझा कर रहे हैं, जिनसे यह आभास होता है कि वे व्यापार, माइग्रेशन और अन्य नीतिगत विषयों पर विदेश मंत्रालय को सलाह दे रहे हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी व्यक्ति या संस्था का विदेश मंत्रालय से कोई संबंध नहीं है और उनके दावे पूरी तरह भ्रामक हैं। पैसे लेकर ट्रेनिंग और सलाह देने का झांसा विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ये फर्जी अकाउंट केवल झूठे दावे ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि मंत्रालय के साथ काम करने का तरीका सिखाने और नीतिगत मामलों में मार्गदर्शन देने के नाम पर लोगों से पैसे भी वसूल रहे हैं। बताया गया कि कुछ लोग सशुल्क (Paid) ट्रेनिंग सेशन, वेबिनार और सलाहकारी कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। MEA ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील विदेश मंत्रालय ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित ऐसे किसी भी भ्रामक पोस्ट, विज्ञापन या दावे पर भरोसा न करें। मंत्रालय ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को विदेश मंत्रालय का सलाहकार बताकर पैसे मांगता है या किसी ट्रेनिंग कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शुल्क लेता है, तो उससे सावधान रहें। ऐसे करें खुद का बचाव विदेश मंत्रालय ने लोगों को सलाह दी है कि— केवल विदेश मंत्रालय के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट और वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी पर ही भरोसा करें। किसी भी व्यक्ति के मंत्रालय से जुड़े होने के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले सशुल्क सलाहकार या ट्रेनिंग कार्यक्रमों से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या फर्जी अकाउंट की जानकारी संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और साइबर अपराध पोर्टल पर दें। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से इस तरह की निजी सलाहकार सेवाएं या सशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित नहीं करता है। लोगों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और किसी भी फर्जी दावे के झांसे में आकर आर्थिक नुकसान न उठाएं।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
A McDonald's restaurant in Venezuela's La Guaira province serves as a temporary field hospital after a devastating earthquake overwhelmed local healthcare facilities.
वेनेजुएला भूकंप: मैकडॉनल्ड्स बना अस्पताल, फूड काउंटर पर बंट रहीं दवाएं; तबाही के बीच जिंदगी बचाने की जंग

काराकास: वेनेजुएला के ला गुआरा प्रांत में आए विनाशकारी भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य अभूतपूर्व परिस्थितियों में चल रहा है। अस्पतालों के क्षतिग्रस्त होने और मरीजों की भारी संख्या के कारण अब मैकडॉनल्ड्स के रेस्टोरेंट, बस टर्मिनल और अन्य सार्वजनिक स्थान अस्थायी अस्पतालों में बदल दिए गए हैं। 7.2 और 7.5 तीव्रता के लगातार आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, 2,600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,600 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मैकडॉनल्ड्स बना फील्ड हॉस्पिटल ला गुआरा के काराबालेदा इलाके में स्थित एक मैकडॉनल्ड्स रेस्टोरेंट अब फील्ड हॉस्पिटल के रूप में काम कर रहा है। जहां कभी बर्गर और फ्रेंच फ्राइज परोसे जाते थे, वहां अब मरीजों का इलाज किया जा रहा है। रेस्टोरेंट की छत से आईवी फ्लूइड की बोतलें लटकाई गई हैं और फूड काउंटर पर दवाइयां तथा मेडिकल सामग्री रखी गई है। वहीं, भोजन के रूप में लोगों को दान में मिली अरेपास (वेनेजुएला की पारंपरिक रोटी) और सैंडविच वितरित किए जा रहे हैं। 33 वर्षीय वालंटियर सर्जन कार्लीज फिगुएरा ने बताया कि यहां 30 से अधिक डॉक्टर लगातार घायलों का इलाज कर रहे हैं। उनके अनुसार, अधिकांश मरीज हाई ब्लड प्रेशर, घबराहट, डायरिया और अन्य आपात स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। बस टर्मिनल में चल रहा इलाज कैटिया ला मार बस टर्मिनल को भी अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में बदल दिया गया है, जहां अब तक करीब 4,000 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। यहां निजी सहयोग से जुटाए गए मेडिकल उपकरणों के सहारे डॉक्टर लगातार इलाज में जुटे हैं। 16 घंटे मलबे में फंसा रहा 13 वर्षीय बच्चा 13 वर्षीय इवरसन मदीना भूकंप के बाद अपने घर के मलबे में करीब 16 घंटे तक फंसा रहा। उसे गंभीर चोटों के साथ बाहर निकाला गया। इवरसन ने बताया, "मुझे लगा था कि मैं कभी बाहर नहीं निकल पाऊंगा। जब दमकलकर्मी पहुंचे, तब उम्मीद जगी।" इस हादसे में उसने अपनी दादी और एक रिश्तेदार को अपनी आंखों के सामने खो दिया। डॉक्टरों ने सुनाई भयावह तस्वीर डॉक्टर मारिया जोस पिनो, जिन्होंने स्वयं इस भूकंप का सामना किया, बताती हैं कि सड़कों पर हर तरफ तबाही का मंजर था। उनके अनुसार, "सड़कों पर शव पड़े थे, मुर्दाघरों में जगह नहीं बची थी और कई शवों का अंतिम संस्कार तक समय पर नहीं हो पा रहा था।" पैर में चोट होने के बावजूद वह लगातार राहत कार्य में जुटी हुई हैं। महामारी का खतरा बढ़ा भूकंप में 150 से अधिक बहुमंजिला इमारतें पूरी तरह ढह चुकी हैं। हजारों लोग राहत शिविरों और अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि भीड़भाड़ वाले शिविरों में अब संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। डॉ. एंटोनियो ओलाइज़ोला के अनुसार, राहत शिविरों में डायरिया, पेचिश, पेट संक्रमण और उल्टी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उनका कहना है कि अब भूकंप के बाद महामारी को रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। राहत अभियान जारी स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्यकर्मी और स्वयंसेवी संगठन लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। हालांकि भारी तबाही और सीमित संसाधनों के कारण प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं पर भारी दबाव बना हुआ है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu responds to reports alleging plans to target Iranian negotiators during US-Iran peace talks.
ईरानी वार्ताकारों की हत्या की साजिश वाली रिपोर्ट पर इजराइल का खंडन, बोला- 'यह पूरी तरह फेक न्यूज'

तेल अवीव: इजराइल ने अमेरिकी मीडिया में प्रकाशित उस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दौरान ईरान के वरिष्ठ वार्ताकारों को निशाना बनाने की योजना बनाई जा रही थी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस रिपोर्ट को "पूरी तरह झूठा" और "फेक न्यूज" करार दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि रिपोर्ट का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। रिपोर्ट में क्या कहा गया था? अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने कुछ वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया था कि इजराइल कथित तौर पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ को निशाना बनाने की योजना बना सकता था। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेता ईरान की ओर से युद्धविराम और शांति वार्ता में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। अमेरिका की चिंता का दावा रिपोर्ट में कहा गया था कि अप्रैल में चल रही वार्ताओं के दौरान अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि यदि ईरानी वार्ताकारों पर हमला हुआ तो शांति प्रक्रिया पूरी तरह पटरी से उतर सकती है और क्षेत्र में संघर्ष दोबारा तेज हो सकता है। इसी कारण अमेरिका ने कथित तौर पर क्षेत्र के कुछ देशों के माध्यम से ईरान को संभावित खतरे के प्रति सतर्क करने का प्रयास किया था। संघर्ष और खुफिया सहयोग को लेकर भी दावा रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि 28 फरवरी को शुरू हुए सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई थी तथा इस अभियान में अमेरिकी खुफिया जानकारी का उपयोग किया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ट्रंप-नेतन्याहू संबंधों का भी जिक्र रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिका और इजराइल के करीबी संबंधों के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जून 2026 के दौरान लेबनान और ईरान से जुड़े मुद्दों पर कई मौकों पर प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सार्वजनिक आलोचना की थी। इसके आधार पर रिपोर्ट में संकेत दिया गया कि क्षेत्रीय तनाव और शांति वार्ता को लेकर दोनों सहयोगी देशों के बीच कुछ मतभेद उभर सकते हैं। इजराइल ने किया स्पष्ट इनकार इजराइली सरकार ने इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि रिपोर्ट में प्रकाशित जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत है और इसका वास्तविक घटनाओं से कोई संबंध नहीं है। फिलहाल इस मामले पर अमेरिका या ईरान की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
US President Donald Trump speaks at a US Independence Day event as Iran begins funeral ceremonies for former Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei in Tehran.
खामेनेई के अंतिम संस्कार पर ट्रंप का तंज, बोले- 'हम अच्छे हैं, इसलिए ईरान को एक हफ्ते का समय दिया'

वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की शुरुआत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर तीखा हमला बोला। अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने "इंसानियत" दिखाते हुए ईरान को अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह का समय दिया। ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव चर्चा में आ गया है। क्या बोले ट्रंप? अमेरिका की आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर माउंट रशमोर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, "हमने ईरान को पूरी तरह झुका दिया। वे समझौता करना चाहते हैं। हमने इंसानियत दिखाते हुए उन्हें खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए एक हफ्ते की मोहलत दी, क्योंकि हम अच्छे हैं।" हालांकि ट्रंप ने अपने इस दावे के समर्थन में कोई अतिरिक्त जानकारी या आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया। तेहरान में शुरू हुए अंतिम संस्कार कार्यक्रम इस बीच, अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम शनिवार (4 जुलाई) से शुरू हो गए हैं। उनका पार्थिव शरीर तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। सड़कों पर उमड़े हजारों लोग राजधानी तेहरान में सुबह से ही बड़ी संख्या में शोकाकुल लोग ग्रैंड मोसल्ला की ओर बढ़ते दिखाई दिए। कई लोगों ने काले कपड़े पहन रखे थे और उनके हाथों में झंडे तथा बैनर थे। शहर के प्रमुख मार्गों पर खामेनेई की तस्वीरों वाले बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं। शिया परंपरा के अनुसार कई श्रद्धालु छाती पीटकर शोक व्यक्त करते नजर आए। 9 जुलाई को होगा सुपुर्द-ए-खाक ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार की विभिन्न रस्में कई दिनों तक चलेंगी। इसके बाद 9 जुलाई को अयातुल्ला अली खामेनेई को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। ट्रंप के ताजा बयान पर ईरान की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Pakistan Coast Guard camp in Jiwani, Gwadar, after the claimed BLA suicide attack in Balochistan.
ग्वादर के जिवानी में आत्मघाती हमले का दावा, BLA बोला- 30 से ज्यादा पाकिस्तानी जवान मारे गए

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले के जिवानी क्षेत्र में स्थित पाकिस्तान कोस्ट गार्ड के एक कैंप पर कथित आत्मघाती हमले का दावा किया गया है। प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने कहा है कि उसके आत्मघाती हमलावर ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें 30 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई अन्य घायल हुए। हालांकि, पाकिस्तान सरकार, सेना या किसी आधिकारिक एजेंसी ने अब तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है। BLA ने क्या दावा किया? BLA के प्रवक्ता जीयंद बलोच के नाम से जारी बयान में कहा गया है कि संगठन की मजीद ब्रिगेड ने ग्वादर जिले के जिवानी के पनवान इलाके में स्थित पाकिस्तान कोस्ट गार्ड कैंप को निशाना बनाया। संगठन का दावा है कि आत्मघाती हमलावर पहले सुरक्षा कैंप के भीतर प्रवेश करने में सफल रहे और इसके बाद विस्फोट किया, जिससे भारी नुकसान हुआ। जिवानी क्यों है महत्वपूर्ण? जिवानी, ग्वादर जिले का एक रणनीतिक तटीय क्षेत्र है। यह अरब सागर के किनारे स्थित होने के कारण पाकिस्तान की समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों के लिहाज से अहम माना जाता है। वायरल वीडियो पर नहीं हुई पुष्टि हमले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @Bahotblch नाम के अकाउंट से साझा किया गया है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो हमले का है। हालांकि, इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसकी सत्यता स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं की जा सकी है। पाकिस्तान की ओर से नहीं आया बयान हमले के दावे के बावजूद पाकिस्तान सरकार, सेना या सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। इसलिए हताहतों की संख्या और घटना के वास्तविक स्वरूप की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Maatrubhumi
सलमान खान फिल्म्स का बयान- फिल्म अभी सेंसर बोर्ड को भेजी ही नहीं गई, रिलीज डेट पर भी जारी है काम

मुंबई, एजेंसियां। सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही सेंसर बोर्ड (CBFC) से जुड़े विवाद की खबरों पर आखिरकार मेकर्स ने चुप्पी तोड़ दी है। हाल के दिनों में दावा किया जा रहा था कि फिल्म का सर्टिफिकेशन रोक दिया गया है और यह केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) में अटक गई है। इन खबरों के बाद फिल्म की रिलीज को लेकर प्रशंसकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई थी।   इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए सलमान खान फिल्म्स (SKF) ने आधिकारिक बयान जारी किया। प्रोडक्शन हाउस ने स्पष्ट किया कि फिल्म को अभी तक सर्टिफिकेशन के लिए CBFC के पास भेजा ही नहीं गया है। ऐसे में सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म रोकने या सर्टिफिकेट देने से इनकार करने जैसी खबरें पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं।   आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जारी बयान में कहा  सलमान खान फिल्म्स ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जारी बयान में कहा कि फिल्म को लेकर प्रसारित की जा रही अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें। मेकर्स ने मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की कि किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि अवश्य करें। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म से जुड़ी हर आधिकारिक जानकारी केवल सलमान खान फिल्म्स के अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही साझा की जाएगी।   क्या है मामला ? गौरतलब है कि निर्देशक अपूर्व लाखिया की इस फिल्म का शुरुआती नाम 'बैटल ऑफ गलवान' था। फिल्म 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए संघर्ष से प्रेरित बताई जाती है। बाद में कहानी के व्यापक भावनात्मक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इसका नाम बदलकर 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' कर दिया गया।   फिल्म में सलमान खान के साथ चित्रांगदा सिंह, अभिलाष चौधरी और अंकुर भाटिया अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। पहले इसकी रिलीज अप्रैल 2026 में प्रस्तावित थी, लेकिन इसे आगे बढ़ा दिया गया। फिलहाल निर्माता नई रिलीज डेट तय करने में जुटे हैं। ऐसे में मेकर्स ने साफ कर दिया है कि सेंसर बोर्ड से जुड़े विवाद की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और फिल्म की आधिकारिक प्रक्रिया अभी शुरू ही नहीं हुई है।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Rescue teams work at the site where a passenger bus plunged into a deep ravine in Pakistan's Khyber Pakhtunkhwa province, killing dozens of people.
पाकिस्तान में दर्दनाक सड़क हादसा: खैबर पख्तूनख्वा में बस खाई में गिरी, महिलाओं-बच्चों समेत 40 की मौत

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसे में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब यात्रियों से भरी एक बस गहरी खाई में जा गिरी। दुर्घटना में कई अन्य लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में आठ यात्रियों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। दुर्गम मोड़ पर अनियंत्रित होकर खाई में गिरी बस प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बस बलूचिस्तान के शेरानी जिले से होते हुए पेशावर जा रही थी। जैसे ही वाहन डेरा इस्माइल खान जिले में पहुंचा, पहाड़ी क्षेत्र के एक खतरनाक मोड़ पर चालक बस से नियंत्रण खो बैठा और बस गहरी खाई में जा गिरी। अधिकारियों का मानना है कि ब्रेक फेल होने की वजह से यह हादसा हुआ, हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। हादसे की जांच शुरू प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा के पहाड़ी इलाकों में खराब सड़कें, दुर्गम भूभाग, प्रतिकूल मौसम और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण अक्सर गंभीर सड़क हादसे होते रहते हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि दुर्घटना तकनीकी खराबी के कारण हुई या चालक की लापरवाही भी इसकी वजह बनी। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने जताया शोक पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। राष्ट्रपति ने संबंधित अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज और हर संभव चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ रहे सड़क हादसे खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के पहाड़ी इलाकों में सड़क दुर्घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खराब सड़क ढांचा, पुराने वाहन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ऐसे हादसों की प्रमुख वजह हैं। हालिया दुर्घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Police investigate a house in Agra after a missing man's body was allegedly found buried beneath the bathroom floor during a murder probe.
आगरा में सनसनी: पति की हत्या कर बाथरूम के फर्श के नीचे दफनाया शव, 45 दिन तक गुमशुदगी का ड्रामा करती रही पत्नी

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। एक महिला पर अपने पति की हत्या कर शव को घर के बाथरूम के फर्श के नीचे दफनाने का आरोप लगा है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी महिला ने खुद ही पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। पुलिस ने जांच के दौरान बाथरूम का फर्श खुदवाया, जहां से शव बरामद हुआ। गुमशुदगी की शिकायत ने खोला हत्या का राज पुलिस के मुताबिक, 45 वर्षीय सुरेंद्र शर्मा के लापता होने की शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस को पत्नी रूबी शर्मा के बयानों पर संदेह हुआ। पूछताछ में विरोधाभास मिलने पर पुलिस ने घर की तलाशी ली और बाथरूम का फर्श खुदवाया, जहां सुरेंद्र का शव दबा मिला। शव दबाकर ऊपर डाल दिया था कंक्रीट सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) अमीषा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रूबी शर्मा ने कथित तौर पर पति की हत्या करने के बाद शव को बाथरूम के फर्श के नीचे दबा दिया और ऊपर से कंक्रीट डालकर सबूत मिटाने की कोशिश की। पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या के पीछे की वजह जानने के लिए उससे पूछताछ की जा रही है। शराब और घरेलू विवाद की बात सामने आई प्रारंभिक जांच और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, महिला ने पूछताछ में बताया कि पति की शराब की लत और आए दिन होने वाले घरेलू विवादों से परेशान होकर उसने करीब डेढ़ महीने पहले हत्या की थी। पुलिस अभी इस दावे की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। पड़ोसियों को पहले से था शक स्थानीय निवासी गौरव दीक्षित ने बताया कि सुरेंद्र शर्मा और उनकी पत्नी के बीच अक्सर झगड़े होते थे। सुरेंद्र मूल रूप से राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले थे और पिछले नौ वर्षों से आगरा की रेणुका धाम कॉलोनी में परिवार के साथ रह रहे थे। पड़ोसियों के मुताबिक, जब सुरेंद्र कई दिनों तक दिखाई नहीं दिए तो उन्होंने रूबी शर्मा से कई बार उनके बारे में पूछा, लेकिन वह हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर बात टाल देती थी। इसी वजह से आसपास के लोगों को शक होने लगा था। पुलिस कर रही है मामले की विस्तृत जांच पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर हत्या के कारणों और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आएगी।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Security personnel outside Kashi Vishwanath Temple after an accidental firearm discharge near Gate No. 4, where three people sustained minor injuries.
काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर-4 पर चली गोली, कार्बाइन गिरने से हुआ हादसा; तीन लोग घायल

वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर-4 के पास शनिवार सुबह अचानक गोली चलने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात एक पीएसी जवान की कार्बाइन हाथ से छूटकर सड़क पर गिर गई, जिसके बाद उससे अचानक फायर हो गया। यह घटना शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे की बताई जा रही है। गोली चलने की आवाज सुनते ही मंदिर परिसर और आसपास मौजूद श्रद्धालुओं में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई। तीन लोग हुए घायल प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, गोली के छर्रे लगने से तीन लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। राहत की बात यह है कि घटना में किसी की जान नहीं गई। हादसे के कारणों की जांच शुरू पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह मामला कार्बाइन के अचानक गिरने के बाद अनजाने में फायर होने का प्रतीत हो रहा है। घटना की वास्तविक वजह जानने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य घटना के तुरंत बाद सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य कर दी गई है और श्रद्धालुओं के दर्शन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद घटना के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Haidarnagar Police Station
पलामू में पुलिस को खुली चुनौती, हैदरनगर थाने से हत्या का आरोपी फरार

पलामू। झारखंड के पलामू जिले में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है। हैदरनगर थाना से आठ वर्षीय मासूम की हत्या और एक दंपती पर जानलेवा हमले के मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी चितरंजन पासवान शुक्रवार तड़के पुलिस हिरासत से फरार हो गया। आरोपी के फरार होने की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और उसे पकड़ने के लिए जिलेभर में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया।   हत्या और जानलेवा हमले का है आरोपी पुलिस के अनुसार, फरार आरोपी चितरंजन पासवान हैदरनगर थाना क्षेत्र के बिंदु बीघा गांव का निवासी है। उस पर एक आठ वर्षीय बच्चे की बेरहमी से हत्या करने और एक दंपती को गंभीर रूप से घायल करने का आरोप है। घटना के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर थाना हाजत में रखा था। हालांकि, शुक्रवार सुबह वह पुलिसकर्मियों को चकमा देकर हिरासत से भाग निकलने में सफल हो गया।   आरोपी की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया। पुलिस उसके संभावित ठिकानों, रिश्तेदारों और परिचितों के घरों पर लगातार छापेमारी कर रही है। साथ ही आसपास के थाना क्षेत्रों को भी अलर्ट कर दिया गया है, ताकि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके।   पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल थाने से हत्या जैसे गंभीर मामले के आरोपी का फरार हो जाना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाही पर सवाल खड़े कर रहा है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय और नाराजगी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पुलिस हिरासत से ही आरोपी भाग सकता है, तो आम लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।   फिलहाल पुलिस आरोपी की तलाश में लगातार अभियान चला रही है। वहीं, यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी किन परिस्थितियों में थाने से फरार हुआ और इस मामले में कहीं पुलिसकर्मियों की लापरवाही या किसी की मिलीभगत तो नहीं थी।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Ram Mandir Donation
राम मंदिर चंदा विवाद पर दिग्विजय सिंह का हमला, बोले- ‘महाकाल मंदिर में भी हो रही चंदा चोरी’

भोपाल, एजेंसियां। राम मंदिर चढ़ावा और चंदा संग्रह से जुड़े विवाद को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा और मंदिर प्रबंधन पर तीखा हमला बोला है। भोपाल में महिला कांग्रेस द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन और ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ कार्यक्रम में शामिल हुए दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि चंदे में गड़बड़ी हुई है और इसे "आस्था के साथ धोखा" बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने भी राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था और अब इस मामले में अयोध्या की अदालत में मुकदमा दायर करेंगे।   'आस्था के साथ हुई चोरी, कोर्ट जाऊंगा' दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके वकील ने उन्हें कानूनी कार्रवाई करने की सलाह दी है, क्योंकि उन्होंने भी मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि यह केवल धन की नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था की चोरी का मामला है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने घरों और मंदिरों के बाहर "चंदा चोरों से सावधान" जैसे बैनर लगाएं।   महाकाल मंदिर और बीजेपी पर लगाए आरोप पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में भी चंदे की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के कार्यकाल में महाकाल मंदिर की जमीन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी संस्था को आवंटित की गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वहां व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है और मंदिर परिसर से जुड़े विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस संबंध में मंदिर प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक शिकायत सामने नहीं आई है।   राम मंदिर आंदोलन और ट्रस्ट पर भी उठाए सवाल दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर आंदोलन के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिर निर्माण के नाम पर वर्षों से चंदा जुटाया गया, लेकिन उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद और राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज पर भी सवाल उठाए तथा कहा कि वह इस पूरे मामले को कानूनी रूप से चुनौती देंगे।   हालांकि, दिग्विजय सिंह के इन आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी या संबंधित मंदिर ट्रस्ट की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और विवाद आगे और तेज होने की संभावना है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Gold Price
Gold Price: सोना-चांदी की चमक बरकरार, कीमतों में फिर जोरदार उछाल

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में सोना और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी का दौर जारी है। सोमवार, 20 अप्रैल को भी दोनों कीमती धातुओं के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम पर ₹347 बढ़कर ₹1,52,002 पहुंच गई, जबकि चांदी ₹1,214 महंगी होकर ₹2,51,000 प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई। लगातार बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के साथ-साथ आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों की भी चिंता बढ़ा दी है।   इस साल रिकॉर्ड तेजी, हजारों रुपये महंगे हुए सोना-चांदी आईबीजेए के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में करीब ₹19,000 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, चांदी लगभग ₹21,000 प्रति किलो महंगी हो चुकी है। इस दौरान दोनों धातुओं ने रिकॉर्ड स्तर भी छुआ। 29 जनवरी को चांदी की कीमत ₹3.86 लाख प्रति किलो तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग को इस तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।   बड़े शहरों में भी ऊंचे दाम, खरीदारी से पहले बरतें सावधानी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, भोपाल और लखनऊ सहित देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1.55 लाख से ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने के बढ़ते दामों के बीच ग्राहकों को खरीदारी करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। केवल BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदें और खरीदारी से पहले विश्वसनीय स्रोतों से ताजा कीमत की पुष्टि अवश्य करें। इससे नकली आभूषण या गलत मूल्य वसूले जाने जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
International rescue teams pull security guard Hernán Alberto Gil Flores from the rubble of a collapsed shopping mall in La Guaira, Venezuela, eight days after a devastating earthquake.
वेनेजुएला भूकंप: 8 दिन तक मलबे में जिंदगी की जंग, सिक्योरिटी गार्ड को अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू टीम ने जिंदा निकाला

काराकास: वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के आठ दिन बाद एक ऐसा रेस्क्यू ऑपरेशन सफल हुआ, जिसे राहतकर्मी किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। ला गुएरा स्थित एक शॉपिंग मॉल के मलबे में दबे सिक्योरिटी गार्ड हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस को करीब 70 घंटे तक चले जटिल अभियान के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस अभियान में आठ देशों के बचावकर्मियों और विशेषज्ञों ने मिलकर हिस्सा लिया। 29 फीट मलबे के नीचे फंसे थे गार्ड सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस ला गुएरा के गैलेरियास प्लाया ग्रांडे शॉपिंग मॉल में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में कार्यरत थे। भूकंप के दौरान पार्किंग क्षेत्र का एक हिस्सा ढह गया, जिससे वह करीब 29 फीट गहरे मलबे के नीचे दब गए। रविवार को राहत एजेंसियों को सूचना मिली कि मलबे के नीचे किसी व्यक्ति के जीवित होने की संभावना है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बचाव दलों ने संयुक्त अभियान शुरू किया। रडार और साउंड डिटेक्शन से मिली जिंदगी की उम्मीद कोस्टा रिका रेड क्रॉस के अनुसार, रेस्क्यू टीमों ने रडार, सोनार और साउंड डिटेक्शन उपकरणों की मदद से मलबे के नीचे जीवन के संकेतों की पुष्टि की। इसके बाद विशेषज्ञों ने बेहद सावधानी से मलबे के बीच सुरक्षित रास्ता बनाया। बचाव अभियान के दौरान राहतकर्मी एक छोटे से छेद के जरिए गिल तक भोजन, पानी, दवाइयां और आवश्यक लाइफ सपोर्ट सामग्री पहुंचाते रहे। 70 घंटे तक चला चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन चिली फायर ब्रिगेड सहित कई देशों की टीमों ने लगातार तीन दिनों तक अभियान चलाया। मलबा लगातार खिसकने का खतरा बना हुआ था, जिससे ऑपरेशन और भी कठिन हो गया। रेस्क्यू के दौरान जारी एक वीडियो में मलबे के बीच से गिल की उंगलियां हिलती हुई दिखाई दीं। बाद में उनका सिर और कंधा मलबे से बाहर निकालने में सफलता मिली और उन्हें सुरक्षित एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में स्थिर है हालत वेनेजुएला रेड क्रॉस के पैरामेडिक लुइस रोड्रिगेज के मुताबिक, जब गिल को अस्पताल ले जाया गया, तब वह पूरी तरह होश में थे और उनकी हालत स्थिर थी। फिलहाल उनका इलाज जारी है। पत्नी ने कहा- वह एक हीरो की तरह डटे रहे गिल की पत्नी गुसविमार गोंजालेस ने कहा कि उन्हें लगा था कि उनके पति अब जीवित नहीं होंगे। लेकिन उनके सुरक्षित बाहर आने की खबर ने पूरे परिवार को नई उम्मीद दी। उन्होंने कहा, "उन्होंने एक हीरो की तरह हार नहीं मानी और आखिरकार जिंदगी की इस लड़ाई को जीत लिया।" संयुक्त राष्ट्र ने बताया 'चमत्कार' संयुक्त राष्ट्र की आपदा मूल्यांकन एवं समन्वय टीम (UNDAC) के सदस्य सेबेस्टियन मोकोरक्वेर ने कहा कि आठ दिन तक मलबे में जीवित रहना असाधारण घटना है। उन्होंने कहा कि इतनी लंबी अवधि तक सीमित संसाधनों के बीच किसी व्यक्ति का जीवित बचना वास्तव में चमत्कार जैसा है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मिली सफलता इस रेस्क्यू अभियान में वेनेजुएला के अलावा चिली, कोस्टा रिका और अन्य देशों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। राहत एजेंसियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय समन्वय और लगातार प्रयासों की बदौलत यह अभियान सफल हो सका। वेनेजुएला में भूकंप के बाद राहत एवं बचाव कार्य अभी भी जारी है और कई प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने का काम लगातार किया जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
UP Murder Case
उत्तर प्रदेश: बर्थडे पार्टी के बहाने बुलाया, फिर दोस्तों ने चाकू से गोदकर की हत्या

गाजियाबाद, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में दोस्ती को शर्मसार कर देने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र के न्यू शांति नगर में एक युवक की उसके ही दोस्तों ने जन्मदिन की पार्टी के बहाने बुलाकर चाकू से गोदकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान मोहित शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस ने मामले मे आरोपियों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।   मृतक के परिजनों के अनुसार मृतक के परिजनों के अनुसार, मोहित का कुछ समय पहले अपने दोस्तों के साथ किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था, लेकिन आरोपी मन ही मन रंजिश पाल बैठे थे। परिवार का आरोप है कि मोहित की हत्या की साजिश पहले से रची गई थी। पहले उसे खाटू श्याम और फिर हरिद्वार घुमाने ले जाया गया। लौटने के दो दिन बाद जन्मदिन मनाने के बहाने उसे एक दोस्त के घर बुलाया गया, जहां पहले शराब पिलाई गई और फिर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर उसकी हत्या कर दी गई।   मोहित के भाई का आरोप  मोहित के भाई का आरोप है कि छह दोस्तों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया। उनका कहना है कि कुछ आरोपियों ने मोहित को पकड़ रखा था, जबकि अन्य ने उसकी छाती पर कई बार चाकू से हमला किया। शरीर पर मिले गहरे घाव इस बात की ओर इशारा करते हैं कि हत्या बेहद बेरहमी से की गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल मोहित को एमएमजी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।   एसीपी वेव सिटी प्रियाश्री पाल ने बताया एसीपी वेव सिटी प्रियाश्री पाल ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि पार्टी के दौरान नशे की हालत में फिर से विवाद और गाली-गलौज हुई, जिसके बाद चाकू से हमला किया गया। पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। सभी संदिग्ध आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और मामले की हर पहलू से जांच जारी है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
TMC Dispute
चुनाव आयोग ने टीएमसी विवाद पर दोनों गुटों से जवाब मांगा, 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक देना होगा जवाब

नई दिल्ली, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में नेतृत्व और चुनाव चिन्ह को लेकर बढ़े विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को नोटिस जारी कर अपना-अपना पक्ष रखने को कहा है। आयोग ने ममता बनर्जी गुट और बागी गुट से 6 जुलाई 2026 को शाम 5:30 बजे तक दावे, प्रति-दावे और संबंधित दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए हैं।   दोनों गुटों से मांगे गए दावे और दस्तावेज   चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से पार्टी के संगठनात्मक चुनाव, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं , पार्टी के संविधान और 'जुड़वां फूल'  चुनाव चिन्ह पर अपने दावे के समर्थन में सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। आयोग दोनों पक्षों की ओर से दाखिल किए जाने वाले रिकॉर्ड का परीक्षण करेगा।   चुनाव चिन्ह पर बना है मुख्य विवाद   बागी गुट का दावा है कि उसे पार्टी के अधिकांश विधायकों और पदाधिकारियों का समर्थन प्राप्त है, इसलिए वही असली टीएमसी है। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट पार्टी के संविधान और संगठनात्मक ढांचे के आधार पर खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बता रहा है।   6 जुलाई के बाद होगी अगली कार्रवाई   निर्धारित समय सीमा तक दोनों पक्षों के जवाब मिलने के बाद चुनाव आयोग दस्तावेजों की समीक्षा करेगा। आवश्यकता पड़ने पर आयोग अगली सुनवाई की तारीख तय करेगा और इसके बाद पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिन्ह को लेकर आगे का निर्णय लिया जाएगा।   राजनीतिक हलकों की नजर आयोग के फैसले पर   टीएमसी से जुड़े इस विवाद पर पूरे देश की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग का फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीति और पार्टी के भविष्य पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Government Notice
सरकार ने WhatsApp के बाद Telegram और Signal को भी यूजरनेम फीचर पर भेजा नोटिस

नई दिल्ली,एजेंसियां। केंद्र सरकार ने डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी को लेकर अपनी सख्ती बढ़ाते हुए WhatsApp के बाद अब Telegram और Signal को भी उनके यूजरनेम (Username) फीचर के संबंध में नोटिस जारी किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने दोनों प्लेटफॉर्म से इस फीचर से जुड़े सुरक्षा उपायों और संभावित जोखिमों पर विस्तृत जानकारी मांगी है।   यूजरनेम फीचर पर सरकार की बढ़ी चिंता   सरकार का कहना है कि यूजरनेम आधारित मैसेजिंग में मोबाइल नंबर छिपा रहता है, जिससे फर्जी पहचान , ऑनलाइन ठगी, फिशिंग और अन्य साइबर अपराधों का खतरा बढ़ सकता है। इसी कारण कंपनियों से पूछा गया है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए उन्होंने क्या सुरक्षा इंतजाम किए हैं।   WhatsApp को पहले ही दिया जा चुका है निर्देश   इससे पहले केंद्र सरकार ने Meta को निर्देश दिया था कि भारत में WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर का रोलआउट फिलहाल रोका जाए। साथ ही कंपनी से तीन दिनों के भीतर इस फीचर और इसके सुरक्षा उपायों पर विस्तृत जवाब मांगा गया था।   Telegram और Signal से भी मांगी गई रिपोर्ट   सरकारी सूत्रों के अनुसार, Telegram और Signal से भी पूछा गया है कि उनके प्लेटफॉर्म पर लंबे समय से मौजूद यूजरनेम फीचर का दुरुपयोग रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू हैं। दोनों कंपनियों को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।   डिजिटल सुरक्षा पर सरकार की नजर   विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही बढ़ाने और साइबर अपराधों पर रोक लगाने की दिशा में सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। अब सभी की नजर कंपनियों की प्रतिक्रिया और सरकार के अगले कदम पर बनी हुई है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0