राष्ट्रीय

3 Injured in Accidental Firing Near Kashi Vishwanath Temple

काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर-4 पर चली गोली, कार्बाइन गिरने से हुआ हादसा; तीन लोग घायल

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Security personnel outside Kashi Vishwanath Temple after an accidental firearm discharge near Gate No. 4, where three people sustained minor injuries.
Accidental Firing Near Kashi Vishwanath Temple Gate No. 4 Injures Three

वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर-4 के पास शनिवार सुबह अचानक गोली चलने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात एक पीएसी जवान की कार्बाइन हाथ से छूटकर सड़क पर गिर गई, जिसके बाद उससे अचानक फायर हो गया।

यह घटना शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे की बताई जा रही है। गोली चलने की आवाज सुनते ही मंदिर परिसर और आसपास मौजूद श्रद्धालुओं में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई।

तीन लोग हुए घायल

प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, गोली के छर्रे लगने से तीन लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। राहत की बात यह है कि घटना में किसी की जान नहीं गई।

हादसे के कारणों की जांच शुरू

पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह मामला कार्बाइन के अचानक गिरने के बाद अनजाने में फायर होने का प्रतीत हो रहा है। घटना की वास्तविक वजह जानने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है।

मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य

घटना के तुरंत बाद सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य कर दी गई है और श्रद्धालुओं के दर्शन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद घटना के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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CM योगी का बड़ा फैसला: पत्रकारों को मिलेगा ₹5 लाख तक मुफ्त इलाज, आवेदन होगा ऑनलाइन

लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश सरकार ने पत्रकारों के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ हासिल करना और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार पत्रकारों के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने जा रही है। इसके माध्यम से आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन, लंबित मामलों का निस्तारण और आवेदन की निगरानी पहले से अधिक सरल और पारदर्शी होगी।   सूचना निदेशक विशाल सिंह ने बताया  सूचना निदेशक विशाल सिंह ने बताया कि जिन पत्रकारों ने पहले ही आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन किया है, वे अब beneficiary.nha.gov.in पोर्टल पर जाकर अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देख सकते हैं। यदि आवेदन में किसी प्रकार की त्रुटि या जानकारी में संशोधन की आवश्यकता है, तो संबंधित जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से संपर्क कर सुधार कराया जा सकता है। इसके बाद कार्ड जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।   सरकार उन पत्रकारों के लिए भी नई व्यवस्था ला रही है, जिनका अब तक आवेदन नहीं हो सका है या किसी कारण से कार्ड जारी नहीं हुआ है। जल्द शुरू होने वाले विशेष ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पत्रकार अपने जिले के जिला सूचना अधिकारी की सहायता से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पोर्टल शुरू होने की जानकारी सभी जिलों को उपलब्ध करा दी जाएगी।   आयुष्मान भारत योजना आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार मिलता है। सरकार का मानना है कि आवेदन प्रक्रिया सरल होने से अधिक से अधिक पात्र पत्रकार इस योजना से जुड़ सकेंगे और जरूरत के समय बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। विपरीत परिस्थितियों में काम करने वाले पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए यह पहल आर्थिक सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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भारत के इनपुट पर स्पेन में गिरफ्तार हुआ गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों, NIA का ₹10 लाख का इनामी अपराधी जल्द लाया जा सकता है भारत

चंडीगढ़: भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता मिली है। स्पेन की सुरक्षा एजेंसियों ने पंजाब पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के इनपुट पर कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों को मैड्रिड से हिरासत में लिया है। लंबे समय से फरार गोल्डी ढिल्लों पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। सूत्रों के मुताबिक, विदेश में बैठकर भारत में आपराधिक नेटवर्क संचालित करने वाले गोल्डी ढिल्लों की गिरफ्तारी के बाद अब उसे भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। चंडीगढ़ हत्याकांड का बताया जा रहा मास्टरमाइंड जांच एजेंसियों के अनुसार, गोल्डी ढिल्लों 13 जून 2026 को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल हॉल के कैशियर जानकी दास की हत्या की साजिश का मुख्य आरोपी है। बताया जा रहा है कि उसने विदेश में बैठकर इस वारदात की पूरी साजिश रची थी। इसके अलावा वह पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली-एनसीआर और अन्य राज्यों में रंगदारी, टारगेट किलिंग और संगठित अपराध का नेटवर्क संचालित कर रहा था। भारत लाने की तैयारी शुरू स्पेन में हिरासत के बाद अब भारतीय एजेंसियां गोल्डी ढिल्लों के प्रत्यर्पण (Extradition) की प्रक्रिया तेज कर सकती हैं। चंडीगढ़ पुलिस भी उसे प्रोडक्शन वारंट पर लेकर जानकी दास हत्याकांड में पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, पंजाब पुलिस लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए समन्वय कर रही थी। 2022 में भारत छोड़कर हुआ था फरार गोल्डी ढिल्लों मूल रूप से पंजाब के राजपुरा का रहने वाला है। शुरुआती दौर में उसके खिलाफ मारपीट, धमकी और आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हुए थे। बाद में वह रंगदारी, अवैध हथियारों और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में सक्रिय हो गया। बताया जाता है कि वर्ष 2022 में वह भारत छोड़कर विदेश भाग गया था। इसके बाद उसने विदेश से ही पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर सहित कई राज्यों में अपना नेटवर्क मजबूत किया और कारोबारियों से रंगदारी वसूलने लगा। कनाडा की घटनाओं से भी जुड़ा नाम जांच एजेंसियों के मुताबिक, कनाडा में हुई कई फायरिंग की घटनाओं में भी गोल्डी ढिल्लों का नाम सामने आया था। उसके कुछ सहयोगियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनसे पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली थीं। लॉरेंस बिश्नोई गैंग से रहा है संबंध सूत्रों के अनुसार, गोल्डी ढिल्लों पहले लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ था। हालांकि बाद में दोनों के बीच विवाद बढ़ने के बाद उसने अलग गैंग बनाकर अपना आपराधिक नेटवर्क खड़ा कर लिया। फिलहाल उसके खिलाफ पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर सहित कई राज्यों में हत्या, रंगदारी, अवैध हथियार और संगठित अपराध से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। अब स्पेन में हुई कार्रवाई के बाद भारतीय एजेंसियां उसके प्रत्यर्पण और आगे की कानूनी कार्रवाई पर काम कर रही हैं।  

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बंगाल में जारी रहेंगी ममता सरकार की योजनाएं, लाभार्थियों का होगा सत्यापन

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में शुरू की गई प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने का फैसला किया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए लाभार्थियों की व्यापक जांच कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य फर्जीवाड़े पर रोक लगाकर योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।   वोटर लिस्ट और डोर-टू-डोर सत्यापन से होगी जांच सरकारी अधिकारियों के अनुसार सभी लाभार्थियों के रिकॉर्ड का मिलान अंतिम मतदाता सूची से किया जाएगा। जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हट चुके हैं या जो अपात्र पाए जाएंगे, उन्हें योजनाओं की सूची से बाहर किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर घर-घर जाकर भी सत्यापन किया जाएगा, ताकि सरकारी सहायता केवल वास्तविक और जरूरतमंद लाभार्थियों तक पहुंचे। नवंबर 2025 में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान करीब 80 लाख संदिग्ध नाम हटाए गए थे, जिनके आधार पर अब कल्याणकारी योजनाओं की भी समीक्षा की जाएगी।   वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने क्या कहा ? राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने अपने पहले बजट भाषण में संकेत दिया था कि सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं जारी रहेंगी, लेकिन उनमें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सुधार किए जाएंगे। इसी क्रम में सरकार ने जनकल्याण शिविरों में प्राप्त नए आवेदनों की जांच शुरू कर दी है। सत्यापन पूरा होने तक वृद्धावस्था और विधवा पेंशन जैसी कुछ योजनाओं के वितरण को अस्थायी रूप से रोका गया है, जबकि कन्याश्री और रूपश्री जैसी योजनाओं की भी कड़ी निगरानी की जा रही है।   वहीं, सरकार ने तृणमूल कांग्रेस की महत्वाकांक्षी 'कृषक बंधु' योजना को बंद कर दिया है। अधिकारियों का दावा है कि इस योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और फर्जी लाभार्थी शामिल थे। इसके स्थान पर भाजपा सरकार नई योजना के तहत प्रत्येक पात्र किसान को सालाना 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता देगी। कृषि विभाग का अनुमान है कि सख्त सत्यापन के बाद मौजूदा लाभार्थियों में से 40 प्रतिशत से अधिक अपात्र नाम हटाए जा सकते हैं।

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