Varanasi News

Kashi Vishwanath Temple
योगी के निर्देश का असर: काशी विश्वनाथ मंदिर में 'काशी द्वार' से अब पूरे दिन दर्शन, स्थानीय श्रद्धालुओं को बड़ी राहत

वाराणसी, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने वाराणसी के स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सुविधा शुरू कर दी है। अब स्थानीय निवासी 'काशी द्वार' (गेट नंबर 4B) से सुबह 4:15 बजे से रात 10:45 बजे तक पूरे दिन बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें केवल वैध पहचान पत्र दिखाना होगा।   मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बदली व्यवस्था   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने वाराणसी दौरे के दौरान मंदिर प्रशासन को स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए अलग और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने 'काशी द्वार' से प्रवेश के समय में बड़ा बदलाव करते हुए इसे पूरे दिन के लिए खोलने का फैसला लिया।   पहले सिर्फ दो घंटे मिलती थी सुविधा   'काशी द्वार' की शुरुआत वर्ष 2024 में स्थानीय श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए की गई थी। पहले वाराणसी के निवासी इस द्वार से केवल सुबह 4:00 बजे से 5:00 बजे और शाम 4:00 बजे से 5:00 बजे तक ही मंदिर में प्रवेश कर सकते थे। नई व्यवस्था के बाद अब यह सुविधा पूरे दिन उपलब्ध रहेगी।   वैध पहचान पत्र दिखाना होगा जरूरी   मंदिर प्रशासन के अनुसार, 'काशी द्वार' की सुविधा केवल वाराणसी के स्थानीय निवासियों के लिए होगी। श्रद्धालुओं को प्रवेश के समय आधार कार्ड, वोटर आईडी या अन्य मान्य पहचान पत्र दिखाना होगा। सत्यापन के बाद उन्हें अलग मार्ग से मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।   भीड़ प्रबंधन होगा और बेहतर   मंदिर प्रशासन का मानना है कि नई व्यवस्था से स्थानीय श्रद्धालुओं को लंबी कतारों से राहत मिलेगी। साथ ही, बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही अलग-अलग होने से भीड़ प्रबंधन भी अधिक प्रभावी होगा, खासकर सावन जैसे व्यस्त धार्मिक अवसरों पर।   बड़े पर्वों पर लागू नहीं होगी सुविधा   प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि महाशिवरात्रि, सावन के प्रमुख सोमवार और अन्य बड़े धार्मिक पर्वों पर अत्यधिक भीड़ को देखते हुए 'काशी द्वार' से पूरे दिन प्रवेश की यह सुविधा लागू नहीं रहेगी। ऐसे अवसरों पर दर्शन व्यवस्था प्रशासन के विशेष प्रबंध के अनुसार संचालित की जाएगी।

anjali kumari जुलाई 9, 2026 0
Restaurant-style Kathal Biryani served with basmati rice, aromatic spices, fresh herbs, and yogurt in a traditional bowl.
चिकन-मटन को भी दे सकती है टक्कर! घर पर बनाएं मसालेदार कटहल बिरयानी, जानें आसान रेसिपी और प्रति सर्विंग कैलोरी

Kathal Biryani Recipe: खुशबूदार बासमती चावल, दम वाले मसालों और कच्चे कटहल से तैयार करें रेस्टोरेंट स्टाइल कटहल बिरयानी। जानें जरूरी सामग्री, बनाने की आसान विधि, कुकिंग टिप्स और प्रति सर्विंग अनुमानित कैलोरी। अगर आप वेजिटेरियन हैं और हर बार एक जैसी वेज बिरयानी खाकर बोर हो चुके हैं, तो इस बार घर पर कटहल बिरयानी जरूर ट्राई करें। कटहल की खास बनावट और दम पर पके मसालों का स्वाद इसे बेहद लाजवाब बनाता है। यही वजह है कि इसे कई लोग "वेजिटेरियन मटन" भी कहते हैं। सही तरीके से बनाई गई कटहल बिरयानी स्वाद में इतनी शानदार होती है कि नॉनवेज पसंद करने वालों को भी पसंद आ सकती है। आवश्यक सामग्री 500 ग्राम कच्चा कटहल 2 कप बासमती चावल 2 बड़े प्याज 2 टमाटर 1 बड़ा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट ½ कप दही 2–3 हरी मिर्च तेज पत्ता, दालचीनी, लौंग, इलायची और जीरा हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और बिरयानी मसाला 2–3 बड़े चम्मच घी या तेल केसर वाला दूध (वैकल्पिक) फ्राई प्याज, बादाम, काजू हरा धनिया, पुदीना और नमक अनुमानित कैलोरी: लगभग 380–450 kcal प्रति सर्विंग बनाने की आसान विधि सबसे पहले कच्चे कटहल को छोटे टुकड़ों में काटकर हल्का उबाल लें या नमक के साथ हल्का फ्राई कर लें। दूसरी ओर बासमती चावल को 30 मिनट भिगोकर केवल 70 प्रतिशत तक पकाएं। अब कढ़ाई में घी या तेल गर्म करें और जीरा, तेज पत्ता, लौंग, इलायची तथा दालचीनी का तड़का लगाएं। प्याज को सुनहरा होने तक भूनें, फिर अदरक-लहसुन पेस्ट और टमाटर डालकर अच्छी तरह पकाएं। इसके बाद हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और बिरयानी मसाला मिलाएं। अब तैयार कटहल और दही डालकर 8–10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं ताकि मसालों का स्वाद अच्छी तरह मिल जाए। भारी तले वाले बर्तन में कटहल मसाले और आधे पके चावल की 2–3 परतें लगाएं। हर परत पर केसर वाला दूध, थोड़ा घी, फ्राई प्याज और ड्राई फ्रूट्स डालें। बर्तन को अच्छी तरह ढककर 15–20 मिनट तक धीमी आंच पर दम दें। दम पूरा होने के बाद बिरयानी को हल्के हाथ से मिलाएं और रायता, सलाद या पुदीने की चटनी के साथ गरमा-गरम सर्व करें। स्वाद बढ़ाने के टिप्स हमेशा कच्चे कटहल का इस्तेमाल करें। कटहल को पहले उबालने या हल्का फ्राई करने से स्वाद बेहतर आता है। चावल केवल 70 प्रतिशत तक ही पकाएं। दम पर पकाने से बिरयानी का फ्लेवर कई गुना बढ़ जाता है। केसर वाला दूध और फ्राई प्याज रेस्टोरेंट जैसा स्वाद देते हैं। क्यों करें ट्राई? कटहल फाइबर, विटामिन C और कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। इसकी अनोखी बनावट और मसालों का स्वाद इसे सामान्य वेज बिरयानी से अलग बनाता है। अगर आप स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन चाहते हैं, तो यह रेसिपी आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है।  

anmol जुलाई 9, 2026 0
Security personnel outside Kashi Vishwanath Temple after an accidental firearm discharge near Gate No. 4, where three people sustained minor injuries.
काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर-4 पर चली गोली, कार्बाइन गिरने से हुआ हादसा; तीन लोग घायल

वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर-4 के पास शनिवार सुबह अचानक गोली चलने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात एक पीएसी जवान की कार्बाइन हाथ से छूटकर सड़क पर गिर गई, जिसके बाद उससे अचानक फायर हो गया। यह घटना शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे की बताई जा रही है। गोली चलने की आवाज सुनते ही मंदिर परिसर और आसपास मौजूद श्रद्धालुओं में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई। तीन लोग हुए घायल प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, गोली के छर्रे लगने से तीन लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। राहत की बात यह है कि घटना में किसी की जान नहीं गई। हादसे के कारणों की जांच शुरू पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह मामला कार्बाइन के अचानक गिरने के बाद अनजाने में फायर होने का प्रतीत हो रहा है। घटना की वास्तविक वजह जानने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य घटना के तुरंत बाद सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य कर दी गई है और श्रद्धालुओं के दर्शन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद घटना के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Meat and fish shops in Varanasi set to be relocated outside city limits under municipal plan.
वाराणसी में शहर से बाहर शिफ्ट होंगी मांस-मछली की दुकानें, नगर निगम ने तैयार किया रोडमैप

  वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मांस और मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की तैयारी शुरू हो गई है। नगर निगम ने शहर को अधिक व्यवस्थित, स्वच्छ और सुगम बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है। इस निर्णय के तहत शहर के भीतर संचालित सभी मीट और फिश मार्केट को चरणबद्ध तरीके से बाहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाएगा। नगर निगम की बैठक में लिया गया फैसला वाराणसी नगर निगम की बैठक शनिवार को मैदागिन स्थित टाउन हॉल में महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में शहर के विकास और शहरी प्रबंधन से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें मांस और मछली बाजारों को शहर के बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव प्रमुख रहा। नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि इस योजना को लागू करने के लिए प्रशासन ने प्रारंभिक स्तर पर पांच स्थानों की पहचान कर ली है। इन क्षेत्रों में बनेंगे नए मीट मार्केट नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार, पहले चरण में जिन स्थानों को चिन्हित किया गया है, उनमें शामिल हैं— रामनगर शुजाबाद गणेशपुर अवलेशपुर शिवपुर प्रशासन का कहना है कि ये सभी क्षेत्र शहर की बाहरी सीमा के निकट हैं, जिससे आम नागरिकों को खरीदारी में अधिक परेशानी नहीं होगी। शहर में हैं करीब 400 दुकानें नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी शहर में वर्तमान में लगभग 350 से 400 मांस और मछली की दुकानें संचालित हो रही हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन दुकानों को निर्धारित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। एक साल पहले उठा था प्रस्ताव नगर निगम के पार्षद गुलशन अली ने बैठक के दौरान कहा कि मांस और मछली की दुकानों को शहर के बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव लगभग एक वर्ष पहले भी लाया गया था, लेकिन अब तक उस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी थी। उन्होंने यह भी कहा कि श्रावण माह के दौरान मांस की दुकानों के बंद रहने से इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की आय प्रभावित होती है, इसलिए प्रशासन को व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखना चाहिए। प्रशासन ने जल्द कार्रवाई का दिया भरोसा नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने सदन को आश्वस्त किया कि नई मीट मार्केट के लिए भूमि चिन्हित की जा चुकी है और प्रस्ताव को जल्द लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम शहर के बेहतर प्रबंधन और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है। फैसले से नाराज हैं दुकानदार नगर निगम के इस निर्णय का कई व्यापारियों ने विरोध किया है। दुकानदारों का कहना है कि शहर से बाहर दुकानें स्थानांतरित होने पर उनके कारोबार पर असर पड़ सकता है। व्यापारियों का तर्क है कि ग्राहकों को मांस और मछली खरीदने के लिए शहर से बाहर जाना पड़ेगा, जिससे समय और परिवहन खर्च दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि कोई ऐसा व्यावहारिक समाधान निकाला जाए, जिससे व्यापार और उपभोक्ताओं दोनों की सुविधा बनी रहे। शहर के विकास और व्यापारिक हितों के बीच संतुलन की चुनौती नगर निगम का मानना है कि यह कदम शहर की स्वच्छता, यातायात व्यवस्था और शहरी सौंदर्यीकरण के लिए आवश्यक है। वहीं दूसरी ओर व्यापारियों और स्थानीय निवासियों की चिंताओं को देखते हुए प्रशासन के सामने विकास और आजीविका के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी होगी।  

Deepshikha जून 8, 2026 0
Trucks loaded with goods at a transport hub as freight charges rise due to higher fuel prices
पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर: 1 जून से बढ़ेगा माल भाड़ा, रोजमर्रा की चीजें हो सकती हैं महंगी

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। ईंधन लागत में बढ़ोतरी के बाद वाराणसी के ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने माल ढुलाई दरों में वृद्धि करने का फैसला लिया है। इस निर्णय के बाद खाद्य और दैनिक उपयोग की कई वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। 1 जून से माल भाड़े में 20 फीसदी बढ़ोतरी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी रविंद्र सिंह ने बताया कि डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण माल ढुलाई की लागत लगातार बढ़ रही है। इसी मुद्दे पर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें सर्वसम्मति से माल भाड़े में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि यह नई दरें 1 जून से लागू होंगी। इसका असर देश के विभिन्न हिस्सों से वाराणसी की मंडियों तक आने वाले ट्रांसपोर्ट वाहनों पर पड़ेगा। व्यापारियों ने जताई महंगाई बढ़ने की आशंका व्यापारियों का मानना है कि माल ढुलाई खर्च बढ़ने का सीधा असर वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। उनका कहना है कि यदि परिवहन लागत बढ़ती है तो कारोबारियों को अतिरिक्त खर्च उपभोक्ताओं तक पहुंचाना पड़ सकता है। व्यापारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में कई जरूरी वस्तुओं के दाम 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। चीनी, दाल, तेल और सूखे मेवे हो सकते हैं महंगे व्यापारियों ने बताया कि जिन वस्तुओं की आपूर्ति दूसरे राज्यों से होती है, उन पर सबसे अधिक असर पड़ सकता है। इनमें चीनी, दाल, सरसों, खाद्य तेल, बादाम और अन्य किराना उत्पाद शामिल हैं। माल ढुलाई महंगी होने से इन वस्तुओं की खरीद लागत बढ़ेगी, जिसका असर खुदरा बाजार में भी देखने को मिल सकता है। पूर्वांचल की बड़ी मंडी है विशेश्वरगंज वाराणसी की विशेश्वरगंज मंडी पूर्वांचल की प्रमुख थोक मंडियों में गिनी जाती है। यहां देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी मात्रा में कृषि और खाद्य उत्पाद पहुंचते हैं। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाला सामान इसी मंडी के जरिए पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक पहुंचता है। ऐसे में माल भाड़े में वृद्धि का प्रभाव व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है। आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि परिवहन लागत बढ़ने पर सप्लाई चेन का खर्च भी बढ़ जाता है। यदि माल भाड़े में 20 प्रतिशत तक वृद्धि लागू होती है, तो आने वाले हफ्तों में रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं का मासिक बजट प्रभावित हो सकता है।  

surbhi मई 30, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0