L&T

Indian stock market rallies as Sensex jumps 800 points and IT stocks lead early trading gains
Stock Market Opening: शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 800 अंक उछला; IT शेयरों में फिर आया जोश

Share Market Opening, 29 July 2026: भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को कारोबार की शुरुआत मजबूत तेजी के साथ की। पिछले सत्र की मामूली कमजोरी के बाद आज शुरुआती कारोबार में खरीदारी का जोर दिखाई दिया। सेंसेक्स करीब 800 अंक उछल गया, जबकि निफ्टी 24,200 के स्तर के पार पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा मजबूती IT शेयरों में देखने को मिली। सुबह करीब 9:40 बजे BSE Sensex 777.71 अंक यानी 1.01% की बढ़त के साथ 77,543.63 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 218.85 अंक यानी 0.91% चढ़कर 24,204.20 पर पहुंच गया। घरेलू बाजार को वैश्विक संकेतों के साथ-साथ सेक्टरल खरीदारी से भी सपोर्ट मिला। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बाजार के लिए एक अहम जोखिम बनी हुई है। IT शेयरों में जोरदार खरीदारी शुरुआती कारोबार में IT सेक्टर निवेशकों के पसंदीदा क्षेत्रों में रहा। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 24 शेयर बढ़त के साथ खुले। Infosys सबसे मजबूत शेयरों में रहा और शुरुआती कारोबार में इसमें करीब 3.5% की तेजी दिखी। इसके अलावा L&T, HUL, TCS, Tech Mahindra, Bharti Airtel और Bajaj Finance जैसे शेयरों में भी खरीदारी रही। करीब 9:30 बजे प्रमुख शेयरों की स्थिति: Infosys: +3.23% L&T: +2.90% HUL: +2.58% Bharti Airtel: +1.61% TCS: +1.54% HDFC Bank: +1.50% HCL Tech: +1.34% Tech Mahindra: +1.21% ITC: +1.12% M&M: +1.06% Bajaj Finance: +0.95% वहीं BEL, Indigo, Asian Paints, Power Grid, Trent और Titan जैसे कुछ शेयर दबाव में रहे। Nifty में भी खरीदारी का जोर Nifty 50 में Infosys, L&T और Eternal शुरुआती कारोबार में प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में रहे। ब्रॉडर मार्केट में भी सकारात्मक माहौल दिखा। Nifty Midcap करीब 0.54% और Nifty Smallcap करीब 0.66% ऊपर कारोबार कर रहे थे। सेक्टर की बात करें तो Nifty IT और Nifty Chemical ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि Nifty Realty और Nifty Oil & Gas कमजोर नजर आए। रुपये में भी शुरुआती मजबूती शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 पैसे मजबूत होकर 95.70 के स्तर पर खुला। हालांकि, मुद्रा बाजार और शेयर बाजार दोनों पर वैश्विक घटनाक्रमों का असर बना रह सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल चिंता का विषय बाजार की तेजी के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच Brent crude की कीमत में करीब 5% की तेजी आई और यह लगभग $88 प्रति बैरल तक पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने से भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है। इसलिए बाजार की आगे की दिशा में तेल की कीमतें भी अहम भूमिका निभा सकती हैं। निवेशकों की नजर अब आगे के संकेतों पर बुधवार की शुरुआती तेजी से बाजार में सकारात्मक माहौल जरूर बना है, लेकिन वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। IT शेयरों में मजबूत खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया है। अब देखना होगा कि शुरुआती तेजी कारोबार के दौरान कायम रहती है या बाजार ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का सामना करता है।  

surbhi जुलाई 29, 2026 0
Indian Army K-9 Vajra self-propelled howitzer during field deployment and artillery firing exercise.
भारतीय सेना का बड़ा आधुनिकीकरण अभियान, 23,000 करोड़ रुपये में 300 अतिरिक्त K-9 वज्र तोपें खरीदने की तैयारी

  भारतीय सेना अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता को और मजबूत करने के लिए 300 अतिरिक्त K-9 वज्र-टी स्वचालित हॉवित्जर तोपों की खरीद की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित सौदे की अनुमानित लागत लगभग 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को जल्द ही रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। यदि इस परियोजना को स्वीकृति मिलती है, तो यह भारतीय सेना के हालिया वर्षों के सबसे बड़े तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में शामिल होगी। नई तोपों की तैनाती पाकिस्तान और चीन से लगने वाली सीमाओं पर की जाएगी, जिससे दोनों मोर्चों पर सेना की फायरपावर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। एलएंडटी को मिल सकता है निर्माण का जिम्मा रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर इसका निर्माण कार्य लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को मिल सकता है। कंपनी दक्षिण कोरिया की रक्षा निर्माता कंपनी हनव्हा एयरोस्पेस के सहयोग से भारत में K-9 वज्र-टी का निर्माण करती है। नई खरीद के बाद भारतीय सेना के लिए ऑर्डर की गई K-9 वज्र तोपों की कुल संख्या 500 से अधिक हो जाएगी। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इससे पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर सेना की परिचालन क्षमता और युद्धक तैयारी को मजबूती मिलेगी। बदलती सुरक्षा चुनौतियों पर सेना का फोकस हाल के वर्षों में भारतीय सेना ने लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने वाली प्रणालियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में मोबाइल और तेज प्रतिक्रिया देने वाली तोप प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभाती हैं। इसी रणनीति के तहत सेना ऐसी प्रणालियों को प्राथमिकता दे रही है, जो विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में प्रभावी फायर सपोर्ट उपलब्ध करा सकें। क्या है K-9 वज्र की खासियत? K-9 वज्र-टी एक 155 मिमी/52 कैलिबर ट्रैक्ड स्वचालित हॉवित्जर तोप प्रणाली है। यह 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य पर सटीक प्रहार करने में सक्षम है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी "शूट एंड स्कूट" क्षमता है। यानी यह लक्ष्य पर गोले दागने के तुरंत बाद अपनी स्थिति बदल सकती है, जिससे दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बचाव आसान हो जाता है। इसके अलावा यह बख्तरबंद सुरक्षा से लैस है और रेगिस्तानी इलाकों से लेकर ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों तक प्रभावी ढंग से संचालन कर सकती है। यही कारण है कि इसे आधुनिक युद्ध प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। 2017 में हुआ था पहला सौदा भारत ने K-9 वज्र तोपों के लिए पहला बड़ा अनुबंध वर्ष 2017 में किया था। उस समय 100 तोपों की खरीद के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये का समझौता हुआ था। इनकी आपूर्ति निर्धारित समय से पहले वर्ष 2021 में पूरी कर ली गई थी। बाद में इन तोपों को मुख्य रूप से पाकिस्तान सीमा से लगे रेगिस्तानी क्षेत्रों में तैनात किया गया, जहां इनके प्रदर्शन को सकारात्मक माना गया। 2023 में मिला दूसरा ऑर्डर K-9 वज्र की परिचालन सफलता को देखते हुए दिसंबर 2023 में भारतीय सेना ने 100 अतिरिक्त तोपों की खरीद को मंजूरी दी थी। इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 7,600 करोड़ रुपये थी। इस निर्णय ने स्पष्ट संकेत दिया कि सेना भविष्य की युद्ध रणनीति में इस प्रणाली को महत्वपूर्ण भूमिका देती है। लद्दाख में भी सफल रहे परीक्षण हाल ही में K-9 वज्र के संशोधित शीतकालीन संस्करण का परीक्षण लद्दाख के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किया गया। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, बेहद कम तापमान और कठिन परिस्थितियों में भी इस प्रणाली का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। परीक्षण के सफल परिणामों के बाद उत्तरी सीमाओं पर अतिरिक्त K-9 वज्र इकाइयों की तैनाती की योजना को और बल मिला है। तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा प्रस्तावित खरीद भारतीय सेना के व्यापक तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। सेना समानांतर रूप से एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS), धनुष तोप और उन्नत पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम जैसी परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इन आधुनिक प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय सेना भविष्य के किसी भी संघर्ष में तेजी से, सटीक और लगातार फायरपावर उपलब्ध कराने में पहले से अधिक सक्षम होगी।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
MBA graduates exploring government job opportunities in banking, PSUs, civil services, and insurance sectors.
MBA के बाद सरकारी नौकरी में बना सकते हैं शानदार करियर, जानिए 4 बेहतरीन विकल्प और संभावित सैलरी

नई दिल्ली: एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल करने के बाद ज्यादातर उम्मीदवार निजी क्षेत्र की नौकरियों की ओर रुख करते हैं, लेकिन सरकारी क्षेत्र में भी MBA प्रोफेशनल्स के लिए कई शानदार अवसर मौजूद हैं। बैंकिंग, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSUs), प्रशासनिक सेवाएं और बीमा क्षेत्र ऐसे विकल्प हैं, जहां न सिर्फ आकर्षक वेतन मिलता है बल्कि नौकरी की स्थिरता और कई अतिरिक्त सुविधाएं भी प्राप्त होती हैं। आइए जानते हैं MBA के बाद सरकारी क्षेत्र में उपलब्ध चार प्रमुख करियर विकल्पों के बारे में। 1. बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर MBA ग्रेजुएट्स के लिए बैंकिंग क्षेत्र सबसे लोकप्रिय विकल्पों में गिना जाता है। RBI Grade B Officer रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) में ग्रेड बी अधिकारी का पद बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है। यहां वित्तीय प्रबंधन और नीतिगत कार्यों से जुड़ी जिम्मेदारियां मिलती हैं। अनुमानित शुरुआती वेतन (भत्तों सहित): लगभग ₹1.5 लाख प्रतिमाह अधिक जानकारी: RBI की आधिकारिक वेबसाइट सरकारी बैंकों में PO और SO पद सरकारी बैंकों में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) और स्पेशलिस्ट ऑफिसर (SO) के पदों पर MBA उम्मीदवारों को अवसर मिलते हैं। SEBI और IRDAI जैसे संस्थान वित्तीय रणनीति, निवेश और नियामकीय कार्यों से जुड़े पदों पर भी MBA प्रोफेशनल्स की मांग रहती है। 2. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSUs) देश की प्रमुख सरकारी कंपनियां MBA उम्मीदवारों की भर्ती करती हैं। प्रमुख कंपनियां: ONGC NTPC BHEL GAIL इन संस्थानों में मैनेजमेंट ट्रेनी, HR, मार्केटिंग और ऑपरेशंस जैसे पदों पर नियुक्तियां होती हैं। अनुमानित वार्षिक पैकेज: ₹12 लाख से ₹25 लाख तक 3. UPSC और प्रशासनिक सेवाएं MBA ग्रेजुएट्स संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं में भी हिस्सा ले सकते हैं। सिविल सेवा (IAS, IPS, IRS) MBA डिग्री धारक IAS, IPS और IRS जैसे प्रतिष्ठित पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। अनुमानित वेतन (भत्तों सहित): ₹80,000 से ₹1 लाख प्रतिमाह Indian Economic Service (IES) आर्थिक नीति और वित्तीय मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण पदों के लिए भी MBA उम्मीदवार अवसर प्राप्त कर सकते हैं। 4. बीमा क्षेत्र में सरकारी नौकरियां LIC और अन्य सरकारी बीमा कंपनियों में MBA प्रोफेशनल्स की अच्छी मांग रहती है। इन संस्थानों में: रिस्क मैनेजमेंट प्रशासन मैनेजमेंट ऑपरेशनल रोल्स जैसे पदों पर भर्ती की जाती है। अनुमानित शुरुआती वेतन: ₹1 लाख से ₹1.25 लाख प्रतिमाह MBA के बाद सरकारी नौकरी क्यों है अच्छा विकल्प? आकर्षक वेतन नौकरी की सुरक्षा पेंशन और अन्य भत्ते करियर में स्थिरता बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस MBA के बाद सरकारी क्षेत्र में करियर बनाने वाले उम्मीदवारों के लिए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। सही तैयारी और उचित परीक्षा चयन के माध्यम से एक सफल और स्थायी करियर बनाया जा सकता है।  

surbhi जून 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
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PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0