Yamaha Electric Scooter: टू-व्हीलर निर्माता Yamaha ने जापान में अपने नए इलेक्ट्रिक स्कूटर का डिजाइन पेटेंट फाइल किया है। हालांकि कंपनी ने अभी तक इस मॉडल की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि इसे भारत सहित कई वैश्विक बाजारों के लिए विकसित किया जा रहा है। यदि यह भारतीय बाजार में लॉन्च होता है, तो यह कंपनी के इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो का अहम मॉडल बन सकता है। स्पोर्टी और प्रीमियम डिजाइन पेटेंट इमेज के अनुसार Yamaha का नया इलेक्ट्रिक स्कूटर स्पोर्टी और मॉडर्न डिजाइन के साथ आएगा। इसमें शार्प बॉडी लाइन्स और एंगुलर स्टाइलिंग देखने को मिलती है। फ्रंट में डुअल हेडलैंप सेटअप और V-शेप LED DRL दिए गए हैं, जो स्कूटर को आकर्षक लुक देते हैं। इसके अलावा लंबी सिंगल सीट और फ्लैट फ्लोरबोर्ड रोजमर्रा के इस्तेमाल को अधिक आरामदायक बना सकते हैं। मिल सकते हैं ये स्मार्ट फीचर्स पेटेंट तस्वीरों से संकेत मिलता है कि स्कूटर में कई आधुनिक फीचर्स दिए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं: डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर Keyless Start (बिना चाबी स्टार्ट) Smartphone Connectivity USB Charging Port फ्रंट स्टोरेज स्पेस 12-इंच अलॉय व्हील आगे और पीछे डिस्क ब्रेक सस्पेंशन के लिए फ्रंट में टेलीस्कोपिक फोर्क और रियर में ट्विन शॉक एब्जॉर्बर मिलने की संभावना है। रिमूवेबल बैटरी और बेल्ट ड्राइव सिस्टम इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में सीट के नीचे Removable Battery Pack दिए जाने की उम्मीद है। इसका फायदा यह होगा कि बैटरी को आसानी से निकालकर घर या ऑफिस में चार्ज किया जा सकेगा। पेटेंट इमेज से यह भी पता चलता है कि इसमें मिड-माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर और बेल्ट ड्राइव सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे पावर पिछले पहिए तक पहुंचेगी। 125cc स्कूटर जैसी परफॉर्मेंस की उम्मीद हालांकि Yamaha ने अभी मोटर की क्षमता या बैटरी स्पेसिफिकेशन का खुलासा नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इसकी परफॉर्मेंस 125cc पेट्रोल स्कूटर के बराबर हो सकती है। ऐसे में यह शहर में रोजाना आने-जाने वाले ग्राहकों के लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। भारत में कब होगा लॉन्च? फिलहाल Yamaha ने इस इलेक्ट्रिक स्कूटर की भारत में लॉन्च डेट या कीमत का खुलासा नहीं किया है। अभी केवल डिजाइन पेटेंट सामने आया है। आधिकारिक घोषणा के बाद ही इसके स्पेसिफिकेशन, रेंज, बैटरी क्षमता और लॉन्च टाइमलाइन की पुष्टि होगी। किन स्कूटर्स से होगा मुकाबला? भारत में लॉन्च होने पर Yamaha के इस इलेक्ट्रिक स्कूटर का मुकाबला इन मॉडलों से हो सकता है: Ola S1 Pro TVS iQube Ather Rizta Ather 450X Bajaj Chetak Honda Activa e
नई दिल्ली: इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदते समय लोग अक्सर रेंज, बैटरी और चार्जिंग पर ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन रोजमर्रा के इस्तेमाल में सबसे अहम चीज स्टोरेज स्पेस होती है। ऑफिस बैग, बच्चों का सामान या घर का राशन रखने के लिए अधिक जगह की जरूरत पड़ती है। ऐसे में रिवर इंडी इलेक्ट्रिक स्कूटर अपनी बड़ी स्टोरेज क्षमता और प्रैक्टिकल डिजाइन के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कंपनी इसे ‘स्कूटर्स की एसयूवी’ कहती है और इसकी सबसे बड़ी वजह इसका विशाल स्टोरेज स्पेस है। 55 लीटर स्टोरेज इसकी सबसे बड़ी ताकत रिवर इंडी में कुल 55 लीटर का लॉक करने योग्य स्टोरेज मिलता है। इसमें 43 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज और 12 लीटर का फ्रंट ग्लव बॉक्स दिया गया है। इसमें फुल-फेस हेलमेट के साथ अन्य जरूरी सामान भी आसानी से रखा जा सकता है। फ्रंट ग्लव बॉक्स में मोबाइल, दस्तावेज और छोटी दैनिक उपयोग की चीजें रखी जा सकती हैं। यही वजह है कि यह स्कूटर परिवार और रोजमर्रा के उपयोग के लिए बेहद सुविधाजनक माना जा रहा है। मजबूत डिजाइन और अलग पहचान रिवर इंडी का डिजाइन पारंपरिक स्कूटरों से अलग है। इसका मजबूत और बॉक्सी लुक इसे सड़क पर अलग पहचान देता है। स्कूटर में चौड़ा फ्लोरबोर्ड, आरामदायक राइडिंग पोजिशन, ट्विन एलईडी हेडलैंप, इंटीग्रेटेड क्रैश गार्ड और 14 इंच के बड़े पहिए दिए गए हैं। यह मॉडल मानसून ब्लू, समर रेड, स्प्रिंग येलो, स्टॉर्म ग्रे और विंटर व्हाइट जैसे रंगों में उपलब्ध है। दमदार बैटरी और 160 किलोमीटर तक की रेंज रिवर इंडी में 4 किलोवाट-घंटा बैटरी पैक और मिड-माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो लगभग 9 बीएचपी की शक्ति पैदा करती है। कंपनी के अनुसार, यह स्कूटर एक बार फुल चार्ज होने पर 160 किलोमीटर तक की प्रमाणित रेंज प्रदान कर सकता है। 750 वॉट फास्ट चार्जर की मदद से बैटरी को 0 से 80 प्रतिशत तक लगभग 5 घंटे में चार्ज किया जा सकता है, जबकि सामान्य चार्जर से इसमें करीब 8 घंटे का समय लगता है। प्रदर्शन में भी नहीं है पीछे यह इलेक्ट्रिक स्कूटर 0 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार केवल 3.7 सेकेंड में पकड़ सकता है। इसकी अधिकतम गति 90 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसके अलावा इसमें अलग-अलग राइडिंग मोड्स भी दिए गए हैं, जिससे उपयोगकर्ता अपनी जरूरत के अनुसार बेहतर प्रदर्शन या अधिक ऊर्जा बचत का विकल्प चुन सकते हैं। कीमत और मुकाबला भारतीय बाजार में रिवर इंडी की एक्स-शोरूम कीमत लगभग 1.50 लाख रुपये है। इसका मुकाबला एथर रिज्टा, बजाज चेतक, ओला एस1 प्रो और टीवीएस आईक्यूब जैसे लोकप्रिय इलेक्ट्रिक स्कूटर्स से है। हालांकि स्टोरेज और उपयोगिता के मामले में रिवर इंडी अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहा है। अगर आप ऐसा इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना चाहते हैं, जो शानदार रेंज और स्पीड के साथ रोजमर्रा की जरूरतों को भी बेहतर तरीके से पूरा कर सके, तो रिवर इंडी एक मजबूत विकल्प साबित हो सकता है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए Ola Electric ने नई Ola S1 X+ 5.2 kWh को भारत में लॉन्च कर दिया है। यह स्कूटर दमदार परफॉर्मेंस, लंबी रेंज और एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ मिड-प्राइस सेगमेंट में एक मजबूत दावेदार बनकर उभरी है। कंपनी ने इसकी शुरुआती कीमत ₹1,29,999 (एक्स-शोरूम) रखी है, जो 15 अप्रैल 2026 के बाद बढ़ सकती है। 4680 Bharat Cell: Ola की बड़ी टेक्नोलॉजी पहल इस स्कूटर की सबसे खास बात है इसका इन-हाउस विकसित 4680 Bharat Cell बैटरी सिस्टम। Ola Electric का दावा है कि यह तकनीक: ज्यादा लंबी रेंज देती है बैटरी एफिशिएंसी बढ़ाती है EV को आम लोगों के लिए ज्यादा सुलभ बनाती है यह कदम भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परफॉर्मेंस में नहीं कोई समझौता Ola S1 X+ 5.2 kWh को पावर देने के लिए 11 kW का मिड-ड्राइव मोटर दिया गया है, जो शानदार स्पीड और स्मूद राइडिंग अनुभव देता है। मुख्य फीचर्स: टॉप स्पीड: 125 किमी/घंटा रेंज: 320 किमी (सिंगल चार्ज) ब्रेकिंग सिस्टम: Brake-by-Wire + फ्रंट डिस्क ब्रेक इन स्पेसिफिकेशंस के साथ यह स्कूटर अपने सेगमेंट में सबसे पावरफुल विकल्पों में शामिल हो जाती है। Ola के पोर्टफोलियो को मिला नया बूस्ट नई S1 X+ 5.2 kWh के साथ Ola Electric ने अपने प्रोडक्ट लाइनअप को और मजबूत कर दिया है। कंपनी पहले से: S1 Pro+ और S1 Pro जैसे प्रीमियम मॉडल S1 X सीरीज के मास मार्केट स्कूटर्स और Roadster बाइक रेंज ऑफर कर रही है। इस नए मॉडल के आने से मिड-रेंज सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है। EV मार्केट में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है और Ola की यह नई पेशकश ग्राहकों को ज्यादा विकल्प देगी। लंबी रेंज, हाई स्पीड और एडवांस फीचर्स के साथ यह स्कूटर खासतौर पर उन यूजर्स को आकर्षित कर सकती है, जो पेट्रोल वाहनों से EV की ओर शिफ्ट करना चाहते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।