Om Birla

Clash between TMC and BJP workers
कोलकाता एयरपोर्ट पर बवाल:TMC-BJP कार्यकर्ताओं में मारपीट

TMC के 3 बैंक अकाउंट फ्रीज, इनमें ₹440 करोड़ कोलकाता, एजेंसियां। कोलकाता एयरपोर्ट पर शुक्रवार रात भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान एक महिला बेहोश हो गई। TMC कार्यकर्ता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंचे थे, जो दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर लौट रहे थे। अभिषेक के एक समर्थक ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े कुछ लोग एयरपोर्ट पर आए और TMC कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी करने लगे। समर्थक का दावा है कि उनके हाथों में अंडे थे और बाद में उन्होंने हथियार भी निकाले। उन्होंने सवाल उठाया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी और सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद हथियार अंदर कैसे पहुंचे। 31 मई को भी अभिषेक के साथ मारपीट हुई थी इससे पहले भी 31 मई को पश्चिम बंगाल के सोनारपुर दक्षिण में अभिषेक से मारपीट हुई थी। यहां वे चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ित टीएमसी कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे थे। TMC के 3 बैंक एकाउंट फ्रीज वहीं, शुक्रवार देर रात TMC के HDFC बैंक के 3 अकाउंट्स 50200059108322, 50200063079047, 50200063079034 को फ्रीज किया गया। इनमें कुल मिलाकर लगभग ₹440 करोड़ जमा हैं।

abhishek singh जून 20, 2026 0
MODI Amit Shah
बंगाल-महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु पर भाजपा की नजर

850 सीटों वाली संसद की तैयारी, दो-तिहाई बहुमत के लिए ब्लूप्रिंट तैयार, 44 सांसदों की जरूरत मुंबई, एजेंसियां। मानसून सत्र से पहले लोकसभा में संख्या बल बढ़ाने की राजनीतिक कवायद तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के बाद अब तमिलनाडु में DMK को अगला लक्ष्य माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मकसद दो-तिहाई बहुमत जुटाकर परिसीमन (850 सीटें करने), महिला आरक्षण के क्रियान्वयन और 'वन नेशन, वन इलेक्शन' जैसे बड़े संवैधानिक बदलावों का रास्ता आसान करना है। बताया जा रहा है कि पिछले सत्र में परिसीमन समेत अहम बिलों पर जरूरी समर्थन नहीं मिलने के बाद सरकार ने संख्या बल बढ़ाने की रणनीति बनाई है। चर्चा है कि TMC और शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पाला बदल सकते हैं। लोकसभा में NDA की संख्या बढ़ सकती है इससे लोकसभा में NDA की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत के लिए अभी और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। पार्टी के रणनीतिकार का कहना है कि अगर सरकार दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गई, तो संसद का विशेष सत्र बुलाकर भी परिसीमन बिल पारित कराया जा सकता है। उद्धव गुट की शिवसेना ने बैठक में सभी सांसदों को बुलाया शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी कर गुरुवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। पार्टी की ओर से 16 जून को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि विभिन्न संगठनात्मक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए यह महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। बैठक गुरुवार सुबह 11 बजे संसद भवन स्थित संसदीय दल के कार्यालय में होगी। 6 सांसदों ने बगावत कर दी है यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब यूबीटी के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, छह सांसदों ने बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजी। हालांकि, अभी स्पीकर या बागी गुट की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। स्पीकर को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजने की चर्चा   यूबीटी के बागी सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल शामिल हैं। संजय ने बुधवार सुबह ही पार्टी छोड़ने की खबरों को खारिज किया था।  संजय राउत ने बागियों को गाली दी इस बीच दिल्ली में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों को गाली दी। राउत ने कहा- ये साले #$% के। ये बेईमान लोग हैं। बेईमानी उनके खून में हैं। राउत ने बाद में सफाई देते हुए कहा- मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं। राउत की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (UBT) के 9 में से सिर्फ 3 सांसद, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत मौजूद रहे। राउत ने कहा कि बाकी सांसदों को खुद सामने आकर अटकलों का खंडन करना चाहिए। शिवसेना में दूसरी टूट शिवसेना में चार साल में यह दूसरी बड़ी टूट है। जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना का अलग गुट बनाया था।

abhishek singh जून 18, 2026 0
TMC rebel MPs submit memorandum to Lok Sabha Speaker Om Birla seeking recognition as a separate group and merger with NCPI.
TMC में घमासान: बागी सांसदों के दावों पर फैसला लेने से पहले दोनों पक्षों को सुनेंगे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

  तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी सियासी संकट के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बागी सांसदों और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट, दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही कोई फैसला लेंगे। सूत्रों के अनुसार, टीएमसी से अलग हुए 20 सांसदों ने खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने और नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का दावा करते हुए लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। बागी सांसदों ने किया एनसीपीआई में विलय का दावा बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे गए ज्ञापन पर 20 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। उन्होंने दावा किया कि सांसदों ने एनसीपीआई में विलय का फैसला किया है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने का निर्णय लिया है। टीएमसी का आरोप- केवल दो घंटे पहले दी गई मुलाकात की सूचना ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने आरोप लगाया कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की सूचना केवल दो घंटे पहले दी गई। टीएमसी सूत्रों के मुताबिक, सोमवार दोपहर करीब दो बजे लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से ई-मेल भेजकर शाम चार बजे मुलाकात के लिए कहा गया था। उस समय अभिषेक बनर्जी कोलकाता स्थित ईडी कार्यालय में पूछताछ में सहयोग कर रहे थे। कीर्ति आजाद ने स्पीकर कार्यालय को दी जानकारी सूत्रों के अनुसार, टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय को सूचित किया कि अभिषेक बनर्जी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में शामिल हैं और निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हो पाएंगे। बाद में आजाद ने स्वयं स्पीकर से मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया। कानूनी राय ले सकते हैं लोकसभा अध्यक्ष संसद से जुड़े सूत्रों का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष इस पूरे मामले पर केंद्रीय विधि मंत्रालय और संवैधानिक विशेषज्ञों की राय ले सकते हैं। इस मुद्दे पर कोई भी निर्णय संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले लिया जा सकता है, जो आमतौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है। संविधान विशेषज्ञों ने उठाए सवाल लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पीडीटी आचारी का कहना है कि संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार किसी राजनीतिक दल का विलय केवल राजनीतिक संगठन स्तर पर हो सकता है। सांसद या विधायक अपने स्तर पर किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकते। वहीं, निर्वाचन आयोग के एक पूर्व अधिकारी ने टीएमसी के बागी सांसदों द्वारा एनसीपीआई में विलय की योजना को "असामान्य और कानूनी रूप से जटिल" बताया है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति का स्पष्ट उल्लेख न तो दलबदल विरोधी कानून में है और न ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में मिलता है। क्या है एनसीपीआई? नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) ने जनवरी 2023 में खुद को एक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत कराया था। निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, इसका मुख्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के संकराईल में स्थित है और राष्ट्रीय राजनीति में इसकी मौजूदगी अब तक सीमित रही है। क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला? अगर बागी सांसदों को अलग समूह के रूप में मान्यता मिलती है, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति और लोकसभा में टीएमसी की स्थिति पर बड़ा असर डाल सकता है। वहीं, स्पीकर का फैसला दलबदल विरोधी कानून की व्याख्या और संसदीय परंपराओं के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
OM Birla
टीएमसी के बागी सांसदों पर जल्द फैसला नहीं, कानूनी राय के बाद निर्णय लेंगे ओम बिरला

नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों के एनसीपीआई में प्रस्तावित विलय और उन्हें अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने की मांग पर तत्काल कोई फैसला नहीं करेंगे। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय ने टीएमसी के संबंधित सांसदों को बैठक के लिए बुलाया है, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।   मानसून सत्र से पहले आएगा निर्णय लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक, इस मामले पर अंतिम फैसला संसद के मानसून सत्र से पहले लिया जाएगा, जिसकी शुरुआत जुलाई के तीसरे सप्ताह में होने की संभावना है। निर्णय लेने से पहले केंद्रीय विधि मंत्रालय से लिखित कानूनी राय मांगी जाएगी। मंत्रालय वरिष्ठ विधि अधिकारियों से परामर्श के बाद अपनी राय देगा, ताकि यदि भविष्य में इस फैसले को अदालत में चुनौती दी जाए तो वह न्यायिक जांच की कसौटी पर टिक सके।   संवैधानिक प्रावधानों पर विशेषज्ञों की आपत्ति संवैधानिक विशेषज्ञों ने प्रस्तावित विलय की वैधता पर सवाल उठाए हैं। लोकसभा के पूर्व महासचिव और संवैधानिक मामलों के जानकार पीडीटी आचारी का कहना है कि संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा-4 के अनुसार केवल कोई राजनीतिक दल ही दूसरे दल में विलय कर सकता है। केवल सांसद या विधायक अपने स्तर पर किसी अन्य दल में विलय नहीं कर सकते। उनके अनुसार, दल के आधिकारिक निर्णय के बाद ही सांसदों या विधायकों की सहमति का प्रावधान लागू होता है।   कानूनी रूप से नया और जटिल मामला निर्वाचन आयोग के एक पूर्व अधिकारी ने भी इस प्रस्तावित विलय को कानूनी दृष्टि से एक नया और जटिल मामला बताया है। उनका कहना है कि ऐसी व्यवस्था का स्पष्ट उल्लेख न तो दलबदल विरोधी कानून में है और न ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में। ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय कानूनी राय और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर ही तय होगा।

abhishek singh जून 16, 2026 0
TMC MP Kakoli Ghosh Dastidar speaks amid claims of MPs backing the NDA in Parliament.
टीएमसी में सियासी हलचल तेज, काकोली घोष दस्तीदार का दावा- 20 सांसदों ने NDA को समर्थन देने का लिया फैसला

  नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में एक बार फिर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने का फैसला किया है। इस दावे के बाद पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को कहा कि इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भी सौंपा गया है। उन्होंने दावा किया कि यह निर्णय कई सांसदों के बीच विस्तृत चर्चा और सहमति के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा, “हमने लोकसभा अध्यक्ष को अपने निर्णय से अवगत करा दिया है। यह फैसला सांसदों के बीच विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।” दावे से बढ़ी राजनीतिक हलचल काकोली घोष दस्तीदार के अनुसार, इस फैसले के समर्थन में करीब 20 सांसद हैं। टीएमसी के लोकसभा में कुल 28 सांसद हैं, ऐसे में यह दावा पार्टी के भीतर संभावित बड़े बदलाव की ओर संकेत करता है। लोकसभा सचिवालय की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में दावे की वास्तविक स्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बनी हुई है। पार्टी नेतृत्व की चुप्पी ने बढ़ाई अटकलें काकोली घोष दस्तीदार के बयान के बाद भी तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी तथा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेतृत्व की चुप्पी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अटकलों को और बढ़ा दिया है। पहले भी सामने आ चुके हैं असंतोष के संकेत पिछले कुछ समय से तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष और मतभेदों की खबरें सामने आती रही हैं। कई नेताओं द्वारा संगठनात्मक मुद्दों और नेतृत्व शैली को लेकर अलग-अलग मंचों पर अपनी राय रखी गई थी। ऐसे में काकोली घोष दस्तीदार का यह दावा पार्टी के भीतर चल रही हलचलों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। विपक्षी राजनीति पर पड़ सकता है असर यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ व्यापक राजनीतिक एकजुटता बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि टीएमसी के भीतर बड़े स्तर पर कोई राजनीतिक पुनर्संरचना होती है, तो इसका असर राष्ट्रीय राजनीति और विपक्षी गठबंधन की रणनीतियों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व और लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर हैं, जहां से इस पूरे मामले पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
Parliament protest after Women Reservation Bill fails in Lok Sabha
महिला आरक्षण बिल पर सियासी संग्राम: BJP-NDA का देशव्यापी प्रदर्शन ऐलान, विपक्ष पर ‘महिला विरोधी’ होने का आरोप

  लोकसभा में बिल गिरने के बाद भाजपा का पलटवार, कल से देशभर में आंदोलन शुरू महिला आरक्षण बिल संसद में पास न होने के बाद अब देश की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों ने विपक्ष के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोलते हुए देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। यह फैसला उस समय लिया गया जब संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया और गिर गया। हर जिले में प्रदर्शन की तैयारी पार्टी सूत्रों के मुताबिक, BJP ने अपने सभी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे देश के हर जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करें। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनता के बीच यह संदेश पहुंचाना है कि विपक्ष ने महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के ऐतिहासिक मौके को रोक दिया। महिला मोर्चा संभालेगा मोर्चा इस आंदोलन में BJP महिला मोर्चा की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है। पार्टी की महिला नेता और कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर अभियान चलाकर महिलाओं के बीच जागरूकता फैलाएंगी। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक, हर माध्यम से इस मुद्दे को उठाने की रणनीति बनाई गई है। चुनावी राज्यों में बनेगा बड़ा मुद्दा भाजपा इस मुद्दे को आगामी चुनावों में भी जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में इसे प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा। पार्टी इसे महिलाओं के सशक्तिकरण से जोड़ते हुए विपक्ष के खिलाफ माहौल बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। वोटिंग में क्या हुआ था? लोकसभा में हुए मतदान में बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट दिया, जबकि 230 सांसद इसके खिलाफ रहे। संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण यह विधेयक पास नहीं हो सका। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण बिल पारित नहीं हुआ। सरकार का दावा बनाम विपक्ष का रुख BJP और NDA का कहना है कि यह बिल महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम था। वहीं, विपक्ष इसे विवादित मुद्दों से जोड़कर पेश करने का आरोप लगा रहा है। अब यह मुद्दा संसद से निकलकर सड़कों तक पहुंच चुका है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल और गरमा सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Indian Parliament session in progress amid debate on LPG shortage and suspended MPs return
संसद LIVE: निलंबित सांसदों की वापसी संभव, LPG किल्लत और अन्य मुद्दों पर गरमाएगा सदन

संसद के मौजूदा सत्र में आज का दिन अहम रहने वाला है। सोमवार को हुई सर्वदलीय बैठक के बाद संकेत मिल रहे हैं कि सदन की कार्यवाही अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रह सकती है। ओम बिरला की अध्यक्षता में हुई बैठक में आठ निलंबित सांसदों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बन गई है, जिसे आज सदन में प्रस्ताव के जरिए लागू किया जा सकता है।   निलंबित सांसदों की वापसी पर सहमति सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष की ओर से प्रस्ताव लाकर आठ सांसदों का निलंबन रद्द किया जाएगा। इससे बीते दिनों से जारी गतिरोध खत्म होने और संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने की उम्मीद है।   LPG किल्लत पर सरकार को घेरने की तैयारी हालांकि, शांति के संकेतों के बीच विपक्ष आज भी LPG की किल्लत के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति में है। आम जनता से जुड़े इस मुद्दे को लेकर सदन में तीखी बहस होने के आसार हैं।   देवेगौड़ा ने जताई चिंता इसी बीच, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर संसद के भीतर हो रहे ‘व्यवधान’ और बाहर विपक्षी प्रदर्शनों पर चिंता जताई है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया।   अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की मांग संजय सिंह ने राज्यसभा में मिडिल ईस्ट संकट के भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, व्यापार और प्रवासी भारतीयों पर प्रभाव को लेकर चर्चा की मांग उठाई है। इस मुद्दे पर विपक्ष की अन्य पार्टियां भी समर्थन में हैं। कुल मिलाकर, संसद का आज का दिन राजनीतिक बहस, सहमति और टकराव - तीनों का मिश्रण साबित हो सकता है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Opposition prepares no-confidence motion against India’s Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar.
विपक्ष का नया निशाना CEC: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

  नई दिल्ली: संसद में सियासी टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। लोकसभा अध्यक्ष Om Birla के खिलाफ प्रस्ताव की चर्चा के बाद अब विपक्ष ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को भी निशाने पर ले लिया है। जानकारी के अनुसार विपक्षी दल उन्हें हटाने के प्रस्ताव की तैयारी में जुट गए हैं और इसके लिए सांसदों के हस्ताक्षर जुटाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस सप्ताह ही लोकसभा और राज्यसभा के सचिवालयों में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से संबंधित नोटिस जमा कराया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार होगा जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए औपचारिक नोटिस दिया जाएगा।   TMC की अगुवाई में तैयार हो रहा प्रस्ताव मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस पहल की अगुवाई All India Trinamool Congress कर रही है। प्रस्ताव पर विपक्षी गठबंधन INDIA Alliance से जुड़े दलों के अलावा Aam Aadmi Party के सांसदों ने भी हस्ताक्षर किए हैं। सूत्रों के अनुसार नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त पर करीब आधा दर्जन आरोप लगाए गए हैं। इनमें कथित पक्षपातपूर्ण रवैया और मतदाता सूची से नाम हटाने जैसे गंभीर आरोप शामिल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि गुरुवार तक यह नोटिस संसद सचिवालय में जमा किया जा सकता है।   आवश्यक संख्या से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर बुधवार रात तक लोकसभा के लिए करीब 120 सांसदों और राज्यसभा के लिए लगभग 60 सांसदों के हस्ताक्षर जुटाए जा चुके थे। नियमों के अनुसार लोकसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को लेकर विपक्षी दलों की नाराजगी पिछले कुछ महीनों से बढ़ती रही है। तृणमूल कांग्रेस पहले से ही उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही थी। इसी बीच कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने भी ‘वोट चोरी’ अभियान के जरिए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।   स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव के बाद नया राजनीतिक मोर्चा हाल ही में विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को हटाने के प्रस्ताव का भी समर्थन किया था। हालांकि बजट सत्र के दौरान यह प्रस्ताव वॉइस वोट से खारिज हो गया। इसके बाद विपक्ष ने दोनों सदनों के सांसदों के हस्ताक्षर जुटाकर अपनी राजनीतिक एकजुटता का प्रदर्शन किया है।   मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल और सख्त है। यह प्रक्रिया लगभग उसी तरह होती है जैसे Supreme Court of India के न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है। कानून के अनुसार यह कार्रवाई केवल ‘कदाचार’ या ‘अक्षमता’ के आधार पर ही संभव है। 1968 के जजेस (इंक्वायरी) एक्ट के तहत यदि नोटिस स्वीकार हो जाता है, तो लोकसभा स्पीकर या राज्यसभा के सभापति तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करते हैं। यह समिति आरोपों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करती है। इसके बाद दोनों सदनों में इस पर चर्चा होती है। प्रस्ताव पारित करने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत आवश्यक होता है-जिसमें सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत शामिल होता है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Union Home Minister Amit Shah speaking in Lok Sabha during debate on no-confidence motion against Speaker
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
Lok Sabha session amid uproar as opposition moves no-confidence motion against Speaker Om Birla
लोकसभा में हंगामे के बीच स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस, विपक्ष ने मिडिल ईस्ट संकट पर चर्चा की मांग उठाई

  संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में तीखी राजनीतिक हलचल देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष को लेकर विपक्ष ने सदन में तत्काल चर्चा की मांग की, जिससे सदन का माहौल गरमा गया। इसी बीच लोकसभा अध्यक्ष Om Birla के खिलाफ विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भी सियासी टकराव तेज हो गया। सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने मिडिल ईस्ट संकट पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग रखी। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भारत की सुरक्षा, कूटनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए इस मुद्दे पर संसद में गंभीर चर्चा जरूरी है।   अविश्वास प्रस्ताव को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार बिहार के किशनगंज से सांसद Mohammad Jawed ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव को सदन में रखने के लिए आवश्यक 50 सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे स्वीकार कर लिया गया और उस पर चर्चा कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि लोकसभा अध्यक्ष ने सदन के संचालन में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है और विपक्ष को पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष तरीके से चलनी चाहिए और सभी दलों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए।   ‘दुखी हैं, लेकिन मजबूर’ – गौरव गोगोई बहस के दौरान कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना किसी भी विपक्षी दल के लिए आसान निर्णय नहीं होता। उन्होंने कहा कि यह कदम “दुख के साथ” उठाया गया है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में विपक्ष खुद को मजबूर महसूस कर रहा है। गोगोई ने आरोप लगाया कि सदन के संचालन में संतुलन बनाए रखना अध्यक्ष की जिम्मेदारी होती है, लेकिन हाल के दिनों में विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है।   हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित इससे पहले सोमवार को भी लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा किया था। लगातार शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी और अंततः दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। जब दोपहर तीन बजे सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो पीठासीन सभापति Jagadambika Pal ने कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद को स्पीकर के खिलाफ अपना प्रस्ताव रखने के लिए कहा। हालांकि उस दौरान भी विपक्षी सदस्य पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी करते रहे और कई सांसद आसन के समीप पहुंच गए।   संसद में बढ़ा सियासी तापमान इस पूरे घटनाक्रम के चलते लोकसभा का माहौल काफी गरमाया हुआ नजर आया। एक ओर विपक्ष अंतरराष्ट्रीय संकट जैसे गंभीर मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ने राजनीतिक टकराव को और तीखा कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सदन में इस प्रस्ताव पर बहस और मतदान की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और सरकार तथा विपक्ष के बीच जारी टकराव का क्या परिणाम निकलता है।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
Lok Sabha Speaker Om Birla during parliamentary session as MPs debate removal motion in Parliament
लोकसभा में आज हो सकता है हंगामा: ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर फैसला

  संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार, 9 मार्च से शुरू हो रहा है और इसके पहले ही दिन लोकसभा में हंगामे के आसार बन गए हैं। विपक्षी दलों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने से संबंधित प्रस्ताव पर आज सदन में विचार किया जा सकता है। इस प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है। लोकसभा के नियमों के अनुसार, पीठासीन अधिकारी द्वारा बुलाए जाने पर कम से कम 50 सांसदों को इस प्रस्ताव के समर्थन में खड़ा होना होगा। यदि 50 सदस्य समर्थन में खड़े होते हैं, तो प्रस्ताव को सदन के विचार के लिए स्वीकार कर लिया जाएगा। इसके बाद इस पर चर्चा और मतदान कराया जाएगा। हालांकि यदि 50 सांसद समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो प्रस्ताव पेश ही नहीं किया जा सकेगा।   कांग्रेस के सांसद देंगे प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए कांग्रेस के तीन सांसद-मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि-सदन की अनुमति मांगेंगे। इन सांसदों को प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन जुटाना होगा। यदि आवश्यक समर्थन मिल जाता है तो प्रस्ताव पर चर्चा होगी और इसके बाद मतदान कराया जाएगा।   सदन में मौजूद रह सकते हैं ओम बिरला संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला नोटिस पर विचार के दौरान सदन में उपस्थित रह सकते हैं। वे प्रस्ताव पर अपना पक्ष भी रख सकते हैं और मतदान में हिस्सा भी ले सकते हैं। हालांकि जब इस विषय पर चर्चा होगी, उस दौरान वे सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करेंगे।   भाजपा और कांग्रेस ने जारी किया व्हिप इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। लोकसभा में वर्तमान संख्या बल को देखते हुए माना जा रहा है कि सरकार के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए यह संभावना कम मानी जा रही है कि प्रस्ताव आगे बढ़ पाएगा।   तृणमूल कांग्रेस (TMC) का समर्थन तृणमूल कांग्रेस ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करने का संकेत दिया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस लोकसभा के कई विपक्षी सदस्यों द्वारा लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव के साथ खड़ी है।   कहां बैठ सकते हैं ओम बिरला? बताया जा रहा है कि यदि प्रस्ताव पर चर्चा होती है तो ओम बिरला सदन में सत्तापक्ष की प्रमुख पंक्तियों में बैठ सकते हैं। हालांकि इस स्थिति को लेकर नियम पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत ऐसे समय में हो रही है जब विपक्ष सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। ऐसे में पहले ही दिन लोकसभा में तीखी बहस और हंगामे की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Sapna Jain Gogi Gang
राष्ट्रीय

दिल्ली में 50 लाख की रंगदारी की साजिश का खुलासा, कारोबारी की पत्नी निकली मास्टरमाइंड

abhishek singh जून 30, 2026 0