opposition alliance

AAP leaders address a press conference in Goa as the party explores a possible opposition alliance ahead of the 2027 Assembly elections.
गोवा में AAP-कांग्रेस गठबंधन के संकेत, 2027 चुनाव से पहले भाजपा को घेरने की रणनीति

पणजी: दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस पर लगातार हमलावर रहने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) अब गोवा में उसी कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है। 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने संकेत दिए हैं कि भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए विपक्षी एकजुटता जरूरी है। गठबंधन पर अंतिम फैसला गोवा इकाई ही करेगी। केजरीवाल ने राज्य नेतृत्व को दी जिम्मेदारी गोवा दौरे पर पहुंचे AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गठबंधन के सवाल पर कहा कि इस संबंध में राज्य नेतृत्व निर्णय लेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष वाल्मिकी नाइक और उनकी टीम जो फैसला करेगी, पार्टी उसका पूरा समर्थन करेगी। केजरीवाल ने कहा कि गठबंधन से जुड़े सभी सवालों का जवाब गोवा इकाई ही देगी, क्योंकि स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों को वही बेहतर तरीके से समझती है। गठबंधन वार्ता के लिए बनी तीन सदस्यीय समिति AAP ने संभावित चुनावी गठबंधन पर बातचीत के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसमें प्रदेश अध्यक्ष वाल्मिकी नाइक, कार्यकारी अध्यक्ष गर्सन गोम्स और संगठन सचिव प्रशांत नाइक शामिल हैं। यह समिति कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के साथ प्री-पोल गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा करेगी। पार्टी का कहना है कि उसकी लड़ाई किसी एक दल से नहीं, बल्कि भाजपा की नीतियों और विचारधारा के खिलाफ है। AAP ने विपक्षी दलों से व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील भी की है। कांग्रेस ने भी छोड़े बातचीत के दरवाजे खुले गोवा प्रदेश कांग्रेस ने भी गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडणकर ने कहा कि भाजपा को चुनौती देने के लिए विपक्षी वोटों का बिखराव रोकना जरूरी है और इस दिशा में बातचीत की जा सकती है। बदलते राजनीतिक समीकरणों पर नजर दिल्ली, पंजाब और गुजरात में कांग्रेस के खिलाफ आक्रामक राजनीति करने वाली AAP का गोवा में बदला हुआ रुख राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि यदि कांग्रेस और AAP के बीच चुनावी समझौता होता है, तो 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव में विपक्ष भाजपा के सामने अधिक मजबूत चुनौती पेश कर सकता है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Samajwadi Party MP Jaya Bachchan meets TMC chief Mamata Banerjee at her Kalighat residence in Kolkata, with TMC MP Derek O'Brien also present.
जया बच्चन ने कोलकाता में ममता बनर्जी से की मुलाकात, विपक्षी एकजुटता पर फिर शुरू हुई चर्चा

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद राज्य की राजनीति में लगातार हलचल बनी हुई है। इसी बीच समाजवादी पार्टी (सपा) की राज्यसभा सांसद Jaya Bachchan ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee से उनके कालीघाट स्थित आवास पर मुलाकात की। इस बैठक को विपक्षी राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बैठक में तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद Derek O'Brien भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है यह मुलाकात? यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब हाल ही में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता Kiranmoy Nanda ने कोलकाता दौरे के दौरान तृणमूल कांग्रेस की चुनावी हार के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि राज्य की जनता अब ममता बनर्जी को नहीं चाहती। नंदा के इस बयान के बाद विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच रिश्तों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। चुनाव के बाद अखिलेश यादव भी पहुंचे थे कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav भी कोलकाता पहुंचे थे और उन्होंने ममता बनर्जी से उनके आवास पर मुलाकात की थी। उस समय इस मुलाकात को तृणमूल कांग्रेस के प्रति समर्थन और विपक्षी एकजुटता के संकेत के रूप में देखा गया था। अब जया बच्चन की मुलाकात ने एक बार फिर दोनों दलों के बीच राजनीतिक संवाद को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों की राय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं की सार्वजनिक आलोचना के बावजूद शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर संवाद जारी है। ऐसे में यह मुलाकात संकेत देती है कि विपक्षी दल भविष्य की राजनीतिक रणनीति और राष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग बनाए रखने के इच्छुक हैं। कुणाल घोष ने क्या कहा? तृणमूल कांग्रेस के नेता Kunal Ghosh ने बैठक के बाद कहा कि ममता बनर्जी और जया बच्चन के बीच लंबे समय से व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंध हैं। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय मुद्दों और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई तथा राष्ट्रहित के मुद्दों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। बैठक में किसी विशेष राजनीतिक रणनीति या भविष्य के गठबंधन को लेकर दोनों दलों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
Mamata Banerjee
कभी ममता की सबसे बड़ी समर्थक रहीं सयानी घोष, अब बागी खेमे के साथ

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा सियासी उलटफेर सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की तेज-तर्रार और मुखर सांसद सयानी घोष ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावती रुख अपनाकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को देश का भावी प्रधानमंत्री बताने वाली सयानी अब उन सांसदों के समूह के साथ खड़ी नजर आ रही हैं, जिन्होंने टीएमसी से अलग राह पकड़ ली है।   20 बागी सांसदों के साथ नया मोर्चा सूत्रों के अनुसार, जादवपुर से सांसद सयानी घोष उन 20 सांसदों के गुट में शामिल हो गई हैं, जिन्होंने हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद संसद में अलग पहचान बनाने की पहल की है। लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में इस गुट ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर एनडीए को समर्थन देने की पेशकश की है। बताया जा रहा है कि सयानी घोष ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं।   दिल्ली में डेरा, बढ़ी अटकलें राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सयानी घोष फिलहाल कोलकाता के बजाय दिल्ली में मौजूद हैं, जहां बागी सांसदों का जमावड़ा लगा हुआ है। ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सांसद माला रॉय के भी इस खेमे से जुड़ने की खबरों ने टीएमसी की चिंता और बढ़ा दी है।   कभी ममता की कट्टर समर्थक थीं सयानी सयानी घोष हाल तक टीएमसी की युवा इकाई की प्रमुख थीं और पार्टी की सबसे मुखर नेताओं में गिनी जाती थीं। उन्होंने कई मंचों से ममता बनर्जी को राष्ट्रीय राजनीति का मजबूत चेहरा बताते हुए उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना जताई थी। भाजपा और एनडीए की नीतियों की खुलकर आलोचना करने वाली सयानी ने विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी टीएमसी का जोरदार बचाव किया था।   टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक संकट सयानी घोष का यह कदम टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पार्टी के भीतर बढ़ती असंतोष की आवाजें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। बंगाल से लेकर दिल्ली तक इस राजनीतिक घटनाक्रम पर नजरें टिकी हैं और अब सबकी निगाहें ममता बनर्जी की अगली रणनीति पर हैं।

anjali kumari जून 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
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PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0