Personal Finance

Google Pay introduces Gemini AI powered Ask Google Pay for expense tracking budgeting and savings insights
Google Pay में Gemini AI की एंट्री, अब खर्चों से लेकर बजट तक का हिसाब बताएगा ‘Ask Google Pay’

डिजिटल पेमेंट के बाद अब Google Pay यूजर्स के लिए पैसे मैनेज करना भी आसान बनाने की तैयारी में है। गूगल ने भारत में Gemini AI पर आधारित नया फीचर ‘Ask Google Pay’ चुनिंदा यूजर्स के लिए रोल आउट करना शुरू कर दिया है। इस फीचर के जरिए यूजर्स टेक्स्ट या आवाज के माध्यम से अपने खर्चों का विश्लेषण, बजट और बचत से जुड़े सवाल पूछ सकेंगे। खास बात यह है कि ‘Ask Google Pay’ डिफॉल्ट रूप से एक्टिव नहीं रहेगा। यूजर्स को इसे खुद इनेबल करना होगा। यानी जिन लोगों को अपने वित्तीय डेटा के आधार पर AI से मदद चाहिए, वे अपनी पसंद के अनुसार इस फीचर को चालू कर सकेंगे। क्या है ‘Ask Google Pay’? ‘Ask Google Pay’ Gemini AI से powered एक नया असिस्टेंट है, जिसे खास तौर पर यूजर्स के वित्तीय सवालों को आसान भाषा में समझाने के लिए तैयार किया गया है। इसके जरिए यूजर्स अपने खर्च करने के पैटर्न को समझ सकते हैं और पैसे को बेहतर तरीके से मैनेज करने के सुझाव हासिल कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यूजर पूछ सकता है कि पिछले महीने सबसे ज्यादा पैसा कहां खर्च हुआ, पिछले हफ्ते के खर्चों का विश्लेषण किया जाए या खर्च कम करने के लिए कौन से कदम उठाए जा सकते हैं। इसके अलावा फीचर बचत से जुड़े सुझाव, क्रेडिट कार्ड ऑफर्स, SIP और CIBIL स्कोर से संबंधित जानकारी हासिल करने में भी मदद कर सकता है। टेक्स्ट और वॉइस दोनों से पूछ सकेंगे सवाल Google Pay का नया AI फीचर सिर्फ टाइप करके सवाल पूछने तक सीमित नहीं है। यूजर्स टेक्स्ट के साथ वॉइस के जरिए भी सवाल कर सकेंगे। लॉन्च के समय यह फीचर 10 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। इससे अलग-अलग भाषाओं में डिजिटल पेमेंट और व्यक्तिगत वित्त से जुड़ी जानकारी हासिल करना आसान हो सकता है। यूजर एक सवाल पूछने के बाद उससे जुड़ा अगला सवाल भी कर सकता है। यानी बातचीत को आगे बढ़ाते हुए अपने खर्च और वित्तीय जरूरतों को ज्यादा बेहतर तरीके से समझने की कोशिश की जा सकती है। आपके Google Pay डेटा का होगा इस्तेमाल ‘Ask Google Pay’ को ज्यादा व्यक्तिगत और उपयोगी जवाब देने के लिए यूजर के Google Pay ट्रांजैक्शन, सेव किए गए पेमेंट मेथड, Google Account की जानकारी और CIBIL रिपोर्ट से जुड़े डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि Google ने इसे डिफॉल्ट रूप से ऑन नहीं रखा है। यूजर को पहले Google Pay में ‘Personalisation within Google Pay’ सेटिंग को सक्रिय करना होगा। इसका मतलब है कि फीचर एक्टिव करने से पहले यूजर्स को यह समझना जरूरी है कि AI असिस्टेंट को किस तरह के डेटा तक पहुंच मिल सकती है। चैट हिस्ट्री भी देख सकेंगे Google के मुताबिक, यूजर्स ‘Ask Google Pay’ के साथ हुई चैट हिस्ट्री को 42 दिनों तक देख सकेंगे। साथ ही अगर बाद में यूजर पर्सनलाइजेशन बंद करना चाहता है, तो उसके लिए भी विकल्प उपलब्ध रहेगा। इससे यूजर्स को फीचर के इस्तेमाल पर कुछ हद तक नियंत्रण मिलता है। हालांकि, वित्तीय जानकारी से जुड़े किसी भी AI टूल का इस्तेमाल करते समय डेटा और प्राइवेसी सेटिंग्स को ध्यान से समझना महत्वपूर्ण है। ऐसे एक्टिव करें ‘Ask Google Pay’ फीचर उपलब्ध होने पर इसे इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करने होंगे: सबसे पहले Google Pay ऐप खोलें। सेटिंग्स में जाएं। ‘Privacy & Security’ सेटिंग खोलें। इसके बाद ‘Data & Personalisation’ सेक्शन में जाएं। ‘Personalisation within Google Pay’ विकल्प को ऑन करें। अब Google Pay की होम स्क्रीन पर ‘Money’ टैब खोलें। ‘Ask a question’ या वित्त से जुड़े सवाल पूछने वाले सेक्शन पर टैप करें। इसके बाद AI असिस्टेंट से टेक्स्ट या वॉइस के जरिए अपना सवाल पूछ सकते हैं। हालांकि, यह सुविधा फिलहाल सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है और चुनिंदा यूजर्स के लिए चरणबद्ध तरीके से रोल आउट की जा रही है। क्या यह फीचर वास्तव में उपयोगी होगा? Google Pay में Gemini का जुड़ना डिजिटल पेमेंट से आगे बढ़कर व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा सकता है। अगर कोई यूजर नियमित रूप से UPI और Google Pay का इस्तेमाल करता है, तो अपने ही ट्रांजैक्शन डेटा के आधार पर खर्चों को समझने की सुविधा उसके लिए उपयोगी हो सकती है। लेकिन वित्तीय मामलों में AI की सलाह को अंतिम निर्णय मानने के बजाय उसे एक सामान्य जानकारी या शुरुआती मार्गदर्शन के तौर पर देखना बेहतर होगा। खासकर निवेश, SIP, क्रेडिट कार्ड या CIBIL से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने से पहले संबंधित आधिकारिक जानकारी और शर्तों की जांच करना जरूरी है। अब देखना होगा कि Google Pay का ‘Ask Google Pay’ फीचर भारत में यूजर्स के रोजमर्रा के खर्च और बजट मैनेजमेंट को कितना आसान बना पाता है।  

surbhi जुलाई 31, 2026 0
Banks collected ₹7,100 crore in minimum average balance penalties, with HDFC Bank leading the list
Minimum Average Balance Penalty: बैंकों ने ग्राहकों से वसूले ₹7,100 करोड़, HDFC Bank सबसे आगे; जानिए किस बैंक ने कितनी पेनल्टी ली

नई दिल्ली: बैंक खाते में तय मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) नहीं रखना ग्राहकों के लिए महंगा साबित हो रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश के बैंकों ने ग्राहकों से मिनिमम बैलेंस बनाए नहीं रखने के एवज में करीब ₹7,100 करोड़ की पेनल्टी वसूली है। यह रकम वित्त वर्ष 2024-25 में वसूले गए करीब ₹6,800 करोड़ से लगभग ₹300 करोड़ अधिक है। इस वसूली में प्राइवेट बैंक सबसे आगे रहे। आंकड़ों के मुताबिक, कुल MAB पेनल्टी का करीब 70 फीसदी यानी ₹4,948 करोड़ प्राइवेट बैंकों ने वसूला। इनमें HDFC Bank सबसे आगे रहा। HDFC Bank ने वसूले करीब ₹1,800 करोड़ मिनिमम एवरेज बैलेंस नहीं रखने पर पेनल्टी वसूलने वाले बैंकों में HDFC Bank सबसे ऊपर रहा। बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में ग्राहकों से करीब ₹1,800 करोड़ MAB चार्ज के तौर पर वसूले। इसके बाद Axis Bank का स्थान रहा, जिसने करीब ₹1,081 करोड़ वसूले। वहीं ICICI Bank ने ₹353 करोड़, Kotak Mahindra Bank ने ₹290 करोड़ और Yes Bank ने करीब ₹195 करोड़ की पेनल्टी वसूली। इसके अलावा IDBI Bank ने भी MAB चार्ज के रूप में करीब ₹175 करोड़ वसूले। प्राइवेट बैंकों की MAB पेनल्टी HDFC Bank: करीब ₹1,800 करोड़ Axis Bank: करीब ₹1,081 करोड़ ICICI Bank: करीब ₹353 करोड़ Kotak Mahindra Bank: करीब ₹290 करोड़ Yes Bank: करीब ₹195 करोड़ IDBI Bank: करीब ₹175 करोड़ सरकारी बैंकों ने घटाई MAB पेनल्टी की वसूली सरकारी बैंकों की तस्वीर इससे कुछ अलग है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश के 12 सरकारी बैंकों में से 10 ने सेविंग्स अकाउंट में मिनिमम एवरेज बैलेंस नहीं रखने पर पेनल्टी वसूलना बंद कर दिया है। बाकी दो बैंकों ने भी इस व्यवस्था को पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक बनाया है। इसका असर सरकारी बैंकों की कुल MAB वसूली पर भी दिखा। वित्त वर्ष 2025-26 में 12 सरकारी बैंकों ने मिलकर करीब ₹2,137 करोड़ वसूले, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा करीब ₹2,775 करोड़ था। SBI ने करंट अकाउंट से वसूले ₹477 करोड़ State Bank of India यानी SBI ने सेविंग्स अकाउंट पर MAB चार्ज बंद कर रखा है, लेकिन करंट अकाउंट के लिए मिनिमम बैलेंस से जुड़े चार्ज लागू हैं। बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में MAB पेनल्टी के तौर पर करीब ₹477 करोड़ वसूले। इसके बाद Bank of Baroda ने ₹394 करोड़, Indian Bank ने ₹299 करोड़ और Canara Bank ने करीब ₹213 करोड़ वसूले। पिछले कुछ वर्षों में ₹28,000 करोड़ से ज्यादा की वसूली MAB चार्ज से बैंकों की कमाई लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 से सरकारी बैंकों ने MAB चार्ज के तौर पर करीब ₹12,000 करोड़ वसूले हैं। वहीं, प्राइवेट बैंकों के लिए वित्त वर्ष 2022-23 से पहले का समान डेटा उपलब्ध नहीं है। लेकिन वित्त वर्ष 2022-23 के बाद से निजी बैंकों ने ग्राहकों से MAB पेनल्टी के तौर पर करीब ₹16,000 करोड़ वसूले हैं। इस तरह उपलब्ध अवधि में सरकारी और निजी बैंकों की कुल वसूली करीब ₹28,000 करोड़ तक पहुंचती है। पेनल्टी लगाने से पहले ग्राहक को सूचना देना जरूरी सरकार के मुताबिक, यदि किसी ग्राहक के खाते में तय मिनिमम बैलेंस नहीं है, तो Reserve Bank of India ने बैंकों को ग्राहक को इसकी जानकारी देने की सलाह दी है। बैंक SMS, ईमेल, पत्र या अन्य उपयुक्त माध्यमों से ग्राहक को सूचित कर सकते हैं। आम तौर पर ग्राहक को मिनिमम बैलेंस पूरा करने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए। इसके बाद ही संबंधित नियमों के तहत पेनल्टी लगाई जाती है। ग्राहकों के लिए क्या है जरूरी? बैंक खाता खोलते समय ग्राहकों को केवल ब्याज दर या बैंक की सुविधाओं पर ध्यान नहीं देना चाहिए। खाते में मिनिमम बैलेंस की शर्त, नॉन-मेंटेनेंस चार्ज, ATM शुल्क और अन्य बैंकिंग फीस की जानकारी भी पहले से समझ लेना जरूरी है। अगर आपका खाता ऐसे बैंक में है जहां MAB की शर्त लागू है, तो खाते में निर्धारित राशि बनाए रखने की कोशिश करें। इससे अनावश्यक पेनल्टी से बचा जा सकता है।  

surbhi जुलाई 30, 2026 0
NPS PRIDE-Disha dashboard displaying SIP return analysis, NAV history and pension fund comparison
NPS में बड़ा बदलाव: अब SIP का पूरा रिटर्न देख सकेंगे निवेशक, PFRDA ने लॉन्च किया PRIDE-Disha टूल

नई दिल्ली: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े करोड़ों निवेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS PRIDE-Disha (Pension Fund Returns for Informed Decision and Empowerment) नाम से एक नया डिजिटल टूल लॉन्च किया है। इस टूल का उद्देश्य NPS सब्सक्राइबर्स को अलग-अलग पेंशन फंड और निवेश विकल्पों के पिछले प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने रिटायरमेंट निवेश से जुड़े फैसले अधिक समझदारी से ले सकें। अब SIP निवेश का भी मिलेगा वास्तविक रिटर्न अब तक NPS निवेशक केवल 1, 2, 5 या 10 वर्षों के एकमुश्त (Lumpsum) निवेश के आधार पर फंड के प्रदर्शन की तुलना कर सकते थे। लेकिन नए PRIDE-Disha टूल के जरिए अब वे अपने मासिक निवेश यानी SIP के वास्तविक रिटर्न (XIRR) की भी गणना कर सकेंगे। XIRR निवेशकों को यह समझने में मदद करेगा कि यदि उन्होंने नियमित मासिक निवेश किया होता तो समय के साथ उनका निवेश कितना बढ़ सकता था। इससे वास्तविक निवेश प्रदर्शन का अधिक सटीक आकलन संभव होगा। 5,000 दिनों का NAV डेटा होगा उपलब्ध इस नए प्लेटफॉर्म में वर्ष 2008 से अब तक का लगभग 5,000 दिनों का NAV (Net Asset Value) डेटा शामिल किया गया है। निवेशक पुराने रिकॉर्ड के आधार पर विभिन्न पेंशन फंडों के प्रदर्शन की तुलना कर सकेंगे और यह समझ पाएंगे कि लंबे समय में किस फंड ने बेहतर रिटर्न दिया। करीब 4,800 निवेश विकल्पों की तुलना PRIDE-Disha टूल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेशक Active Choice और Auto Choice सहित करीब 4,800 विभिन्न निवेश विकल्पों की तुलना कर सकते हैं। इसके अलावा बार ग्राफ और अन्य विजुअल टूल्स की मदद से अलग-अलग फंडों के प्रदर्शन को आसानी से समझा जा सकता है। भविष्य का अनुमान नहीं देगा यह टूल PFRDA ने 14 जुलाई को जारी अपने सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि PRIDE-Disha केवल ऐतिहासिक आंकड़ों पर आधारित जानकारी उपलब्ध कराता है। यह किसी भी प्रकार से भविष्य के रिटर्न की भविष्यवाणी या गारंटी नहीं देता। इसका उद्देश्य केवल निवेशकों को पुराने प्रदर्शन के आधार पर बेहतर निर्णय लेने में सहायता प्रदान करना है। ऐसे करें इस्तेमाल NPS सब्सक्राइबर्स PFRDA की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध PRIDE-Disha Calculator के माध्यम से इस सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। यहां वे अलग-अलग पेंशन फंड, NAV हिस्ट्री और SIP आधारित XIRR की तुलना कर अपने रिटायरमेंट निवेश की बेहतर योजना बना सकते हैं। क्यों है यह टूल महत्वपूर्ण? रिटायरमेंट प्लानिंग में सही पेंशन फंड का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है। PRIDE-Disha टूल निवेशकों को पारदर्शी डेटा, विस्तृत तुलना और वास्तविक निवेश प्रदर्शन की जानकारी देकर अधिक समझदारी से निर्णय लेने में मदद करेगा। इससे NPS निवेशकों को अपने लंबे समय के वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप बेहतर फंड चुनने का अवसर मिलेगा।  

surbhi जुलाई 16, 2026 0
Professional working on a laptop with salary, career growth, and comfort trap concept highlighted in a modern office.
₹1 लाख महीने की सैलरी: सफलता की निशानी या 'कम्फर्ट ट्रैप'? वायरल पोस्ट ने छेड़ी नई बहस

बहुत से नौकरीपेशा लोगों के लिए हर महीने ₹1 लाख की सैलरी एक बड़ा लक्ष्य होती है। यह आर्थिक स्थिरता, बेहतर जीवनशैली और वर्षों की मेहनत का परिणाम मानी जाती है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पोस्ट ने इस सोच को नई दिशा दे दी है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या ₹1 लाख की मासिक आय लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देने के बजाय उन्हें "कम्फर्ट ट्रैप" में फंसा रही है? सोशल मीडिया पोस्ट ने शुरू की नई चर्चा Nidhi Kushwaha की एक वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट में दावा किया गया है कि ₹1 लाख की मासिक सैलरी लोगों को इतना आरामदायक जीवन दे देती है कि वे अपने करियर में आगे बढ़ने की कोशिश कम कर देते हैं। उनका कहना है कि यह राशि इतनी पर्याप्त होती है कि लोग घर का किराया या ईएमआई चुका सकें, नियमित खर्च पूरे कर सकें, कभी-कभार यात्रा कर सकें और आरामदायक जीवन जी सकें। ऐसे में कई लोग नए अवसर तलाशने या जोखिम लेने से बचने लगते हैं। 'कम्फर्ट' कैसे बन सकता है रुकावट? पोस्ट के अनुसार समस्या सैलरी की राशि नहीं, बल्कि उससे मिलने वाली मानसिक संतुष्टि है। जब व्यक्ति को लगता है कि उसकी आर्थिक स्थिति सुरक्षित है, तो वह अपने कौशल को और बेहतर बनाने, नई जिम्मेदारियां लेने या करियर में बदलाव करने की इच्छा खो सकता है। निधि का मानना है कि कई प्रतिभाशाली लोग अपनी क्षमता की कमी से नहीं, बल्कि आरामदायक स्थिति छोड़ने की अनिच्छा के कारण वर्षों तक एक ही स्तर पर बने रहते हैं। सोशल मीडिया पर बंटी लोगों की राय यह पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इस विषय पर तीखी बहस शुरू हो गई। एक वर्ग ने इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि आर्थिक स्थिरता मिलने के बाद कई लोग अपने करियर में आगे बढ़ने की कोशिश कम कर देते हैं और नए लक्ष्य तय नहीं करते। वहीं दूसरी ओर कई लोगों ने इस सोच का विरोध भी किया। उनका कहना था कि आज के समय में Mumbai, Bengaluru और Gurugram जैसे बड़े शहरों में बढ़ती महंगाई को देखते हुए ₹1 लाख की सैलरी पहले जितनी बड़ी नहीं रही। उनका मानना है कि परिवार, बच्चों की शिक्षा, घर का किराया और अन्य खर्चों के बीच यह आय भी सीमित महसूस हो सकती है। क्या ज्यादा कमाना ही सफलता का पैमाना है? बहस के दौरान कई यूजर्स ने यह भी कहा कि सफलता को केवल अधिक कमाई से नहीं मापा जाना चाहिए। उनके अनुसार आर्थिक सुरक्षा, परिवार के साथ समय, मानसिक शांति और बेहतर जीवन संतुलन भी उतने ही महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी वर्तमान आय से संतुष्ट है और उसका जीवन संतुलित है, तो उसे लगातार अधिक कमाने की दौड़ में शामिल होना जरूरी नहीं है। असली सवाल क्या है? यह पूरी बहस इस बात पर नहीं है कि ₹1 लाख महीने की सैलरी पर्याप्त है या नहीं। असली सवाल यह है कि किसी आर्थिक लक्ष्य तक पहुंचने के बाद व्यक्ति अपने विकास को कैसे देखता है। आर्थिक स्थिरता निश्चित रूप से एक उपलब्धि है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सीखते रहना, नए कौशल विकसित करना और व्यक्तिगत व पेशेवर विकास जारी रखना भी उतना ही जरूरी है। आगे बढ़ने का अर्थ हमेशा अधिक पैसा कमाना नहीं होता, बल्कि अपने जीवन और करियर में लगातार नए लक्ष्य तय करना भी होता है।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
ICICI Prudential Multi-Asset Active Fund of Funds offering diversified exposure to equity, debt, gold, and silver investments.
Mutual Fund NFO: ICICI Prudential ने लॉन्च किया Multi-Asset Active FoF, एक ही फंड में मिलेगा इक्विटी, डेट, गोल्ड और सिल्वर का फायदा

मुंबई: निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो को विविध (Diversified) बनाने का एक नया विकल्प सामने आया है। ICICI Prudential Mutual Fund ने अपना नया ICICI Prudential Multi-Asset Active Fund of Funds (FoF) लॉन्च किया है। यह एक ओपन-एंडेड फंड ऑफ फंड्स (FoF) स्कीम है, जिसका उद्देश्य निवेशकों को एक ही फंड के माध्यम से इक्विटी, डेट, गोल्ड ETF और सिल्वर ETF जैसे अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश का अवसर देना है। यह न्यू फंड ऑफर (NFO) निवेश के लिए खुल चुका है और इसमें 14 जुलाई 2026 तक निवेश किया जा सकता है। क्या है Multi-Asset Active FoF? यह स्कीम सीधे शेयर या बॉन्ड में निवेश नहीं करती, बल्कि ICICI Prudential की विभिन्न एक्टिव इक्विटी स्कीम, डेट स्कीम और गोल्ड/सिल्वर ETF की यूनिट्स में निवेश करती है। इसका उद्देश्य अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश कर जोखिम को संतुलित करना और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना तैयार करना है। बाजार के अनुसार बदलेगा निवेश का अनुपात ICICI Prudential का कहना है कि यह फंड बाजार की मौजूदा परिस्थितियों, वैल्यूएशन और व्यापक आर्थिक (Macro-economic) संकेतकों के आधार पर अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश का अनुपात समय-समय पर बदलता रहेगा। यानी यदि किसी समय इक्विटी आकर्षक लगेगी तो उसका हिस्सा बढ़ाया जा सकता है, जबकि बाजार में जोखिम बढ़ने पर डेट या गोल्ड का आवंटन बढ़ाया जा सकता है। कंपनी ने क्या कहा? ICICI Prudential Asset Management Company के Executive Director और Chief Investment Officer (CIO) एस. नरेन के अनुसार, अलग-अलग आर्थिक और बाजार चक्रों में प्रत्येक एसेट क्लास का प्रदर्शन अलग होता है। ऐसे में अनुशासित एसेट एलोकेशन लंबी अवधि के निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह स्कीम निवेशकों को रिसर्च आधारित रणनीति के माध्यम से इक्विटी, डेट और कीमती धातुओं में संतुलित निवेश का अवसर प्रदान करती है, जिससे बदलते बाजार में पोर्टफोलियो अधिक संतुलित रह सकता है। कैसे काम करेगा एसेट एलोकेशन? यह फंड किसी एक एसेट क्लास पर निर्भर रहने के बजाय उनकी आकर्षकता के आधार पर निवेश का अनुपात तय करेगा। संभावित एसेट एलोकेशन इस प्रकार रहेगा— एक्टिव इक्विटी स्कीम: 30% से 80% एक्टिव डेट स्कीम: 10% से 60% गोल्ड ETF और/या सिल्वर ETF: 10% से 30% निवेशकों को क्या मिलेंगे फायदे? इस स्कीम का उद्देश्य तीन प्रमुख निवेश लक्ष्यों को एक साथ पूरा करना है— इक्विटी के जरिए लंबी अवधि में पूंजी वृद्धि (Wealth Creation) डेट स्कीम के माध्यम से अपेक्षाकृत स्थिर आय और कम उतार-चढ़ाव गोल्ड और सिल्वर ETF के जरिए पोर्टफोलियो में विविधता और महंगाई के प्रभाव से संभावित सुरक्षा इस तरह निवेशकों को एक ही फंड में कई एसेट क्लास का एक्सपोजर मिल सकता है। न्यूनतम निवेश कितना? इस NFO में निवेश की शुरुआत ₹1,000 से की जा सकती है। इसके बाद निवेश ₹1,000 के गुणकों में किया जा सकेगा। निवेशकों के लिए इसमें डायरेक्ट प्लान और रेगुलर प्लान दोनों विकल्प उपलब्ध हैं। फंड मैनेजर और बेंचमार्क इस स्कीम का प्रबंधन अनुभवी फंड मैनेजरों की टीम करेगी, जिसमें शामिल हैं— धर्मेश कक्कड़ मनीष बंथिया अखिल कक्कड़ शर्मिला डी'सिल्वा गौरव चिकने इसका बेंचमार्क निम्नलिखित मिश्रित इंडेक्स पर आधारित होगा— 55% निफ्टी 200 TRI 35% निफ्टी कंपोजिट डेट इंडेक्स 7% घरेलू गोल्ड प्राइस 3% घरेलू सिल्वर प्राइस निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान हालांकि मल्टी-एसेट फंड्स पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अवसर देते हैं, लेकिन किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश अवधि का आकलन करना जरूरी है। यदि आवश्यक हो तो किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना बेहतर रहेगा।  

surbhi जुलाई 2, 2026 0
Investor reviewing mutual fund SIP returns chart showing long-term wealth creation despite market volatility.
Mutual Fund SIP का जादू: बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद 15 साल में मिला 18.5% तक का शानदार रिटर्न

मुंबई: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ महीनों से भारी उतार-चढ़ाव का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद लंबी अवधि के निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित और लंबे समय तक किया गया निवेश बाजार की अस्थिरता के असर को काफी हद तक कम कर देता है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड की कई इक्विटी स्कीमों ने पिछले 15 वर्षों में निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया है। कुछ योजनाओं में सालाना कंपाउंड ग्रोथ रेट (CAGR) 18.5 प्रतिशत तक पहुंचा है। 1. ICICI Prudential Midcap Fund यह फंड मिड-कैप कंपनियों में निवेश करता है, जिनमें भविष्य में बड़े बाजार लीडर बनने की क्षमता होती है। AUM: ₹7,789 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: 18.50% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹48.41 लाख 2. ICICI Prudential Value Fund यह स्कीम वैल्यू इन्वेस्टिंग रणनीति अपनाती है और ऐसी कंपनियों में निवेश करती है जिनकी बाजार कीमत उनकी वास्तविक क्षमता से कम मानी जाती है। AUM: ₹58,954 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: 16.44% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹39.14 लाख 3. ICICI Prudential Multicap Fund यह फंड लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों में संतुलित निवेश करता है। AUM: ₹17,675.80 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: 15.65% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹36.12 लाख 4. ICICI Prudential Large & Mid Cap Fund यह स्कीम बड़ी और उभरती कंपनियों के मिश्रण में निवेश करती है। AUM: ₹30,147 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: 15.36% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹35.08 लाख 5. ICICI Prudential Focused Equity Fund यह फंड सीमित लेकिन मजबूत कंपनियों के पोर्टफोलियो पर आधारित है। AUM: ₹16,147 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: लगभग 15% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹32.81 लाख SIP क्या है? SIP यानी Systematic Investment Plan म्यूचुअल फंड में निवेश करने का एक अनुशासित तरीका है। इसके जरिए निवेशक हर महीने एक निश्चित राशि निवेश कर सकते हैं। यह छोटी रकम से निवेश शुरू करने और लंबे समय में संपत्ति बनाने का प्रभावी माध्यम माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में अस्थायी गिरावट के दौरान भी नियमित SIP जारी रखने से निवेशकों को लंबे समय में बेहतर औसत लागत और कंपाउंडिंग का लाभ मिलता है।  

surbhi जून 17, 2026 0
Urban Indian middle-class family managing rising expenses despite earning a six-figure monthly salary
क्या अब 1 लाख रुपये महीना कमाना भी काफी नहीं? बदलती जिंदगी ने बढ़ाई भारत के मिडिल क्लास की चिंता

कभी सफलता की पहचान थी छह अंकों वाली सैलरी, अब उठ रहे हैं सवाल एक समय था जब हर महीने 1 लाख रुपये या उससे अधिक कमाना आर्थिक सफलता की पहचान माना जाता था। यह अच्छी नौकरी, स्थिर भविष्य और आरामदायक जीवन का प्रतीक समझा जाता था। लेकिन अब तेजी से बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच यह धारणा कमजोर पड़ती नजर आ रही है। हाल ही में बेंगलुरु के एक आईटी प्रोफेशनल के अतिरिक्त आय के लिए टैक्सी चलाने की खबर ने देशभर के लाखों नौकरीपेशा लोगों का ध्यान खींचा। यह घटना केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि शहरी भारत के उस वर्ग की चिंता को दर्शाती है जो अच्छी कमाई के बावजूद आर्थिक सुरक्षा को लेकर असमंजस में है। बढ़ती आय के साथ और तेजी से बढ़ रहे खर्च देश के बड़े शहरों जैसे बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद और पुणे में रहने की लागत पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। सबसे ज्यादा असर इन क्षेत्रों में देखने को मिला है: घरों का किराया और प्रॉपर्टी की कीमतें बच्चों की शिक्षा स्वास्थ्य सेवाएं और मेडिकल खर्च बीमा प्रीमियम वाहन और होम लोन की ईएमआई दैनिक जीवन की बढ़ती लागत नतीजतन, वेतन बढ़ने के बावजूद अधिकांश परिवारों के पास बचत के लिए अपेक्षाकृत कम पैसा बच रहा है। ज्यादा कमाई, लेकिन कम आर्थिक संतोष विशेषज्ञों का मानना है कि आज की पीढ़ी अपने माता-पिता की तुलना में कहीं अधिक कमाई कर रही है, लेकिन आर्थिक रूप से खुद को उतना सुरक्षित महसूस नहीं करती। ईएमआई, स्कूल फीस, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल, स्वास्थ्य बीमा और अन्य जिम्मेदारियों के बाद आय का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। यही वजह है कि अच्छी सैलरी पाने वाले लोग भी भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं। साइड इनकम का बढ़ता ट्रेंड बेंगलुरु के आईटी प्रोफेशनल की तरह अब कई नौकरीपेशा लोग अतिरिक्त कमाई के रास्ते तलाश रहे हैं। आज बड़ी संख्या में लोग: फ्रीलांसिंग कर रहे हैं ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं कंसल्टिंग सेवाएं दे रहे हैं निवेश और ट्रेडिंग कर रहे हैं छोटे व्यवसाय शुरू कर रहे हैं इनमें से अधिकांश लोग आर्थिक संकट में नहीं हैं, बल्कि बढ़ती आकांक्षाओं और खर्चों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या समस्या सैलरी की है या बढ़ती उम्मीदों की? विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि केवल महंगाई ही समस्या नहीं है, बल्कि जीवनशैली की अपेक्षाएं भी काफी बदल गई हैं। आज का शहरी मध्यम वर्ग एक साथ कई लक्ष्य हासिल करना चाहता है: अपना घर खरीदना बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाना बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं लेना नियमित छुट्टियां मनाना नई तकनीक और गैजेट्स खरीदना निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग करना इन सभी जरूरतों को एक ही आय के जरिए पूरा करना पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। सोशल मीडिया ने भी बढ़ाया दबाव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने लोगों की जीवनशैली और सफलता की परिभाषा बदल दी है। लक्जरी घर, विदेश यात्राएं, महंगी कारें और हाई-एंड लाइफस्टाइल अब लगातार लोगों की स्क्रीन पर दिखाई देती हैं। इससे कई बार लोग अपनी तुलना समाज के सबसे संपन्न वर्ग से करने लगते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक असंतोष का एक कारण यह भी है कि सफलता का पैमाना लगातार बदल रहा है। आर्थिक असुरक्षा केवल मानसिक नहीं, वास्तविक भी है आज के शहरी परिवारों के सामने कई वित्तीय जिम्मेदारियां एक साथ मौजूद हैं। उन्हें: घर की लागत संभालनी है बच्चों की उच्च शिक्षा की योजना बनानी है बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनना है रिटायरमेंट फंड तैयार करना है मेडिकल आपात स्थितियों के लिए बचत करनी है इसी वजह से अच्छी आय होने के बावजूद आर्थिक असुरक्षा की भावना बनी रहती है। बदल गया है मिडिल क्लास का सपना मध्यम वर्ग के सपने आज भी वही हैं—स्थिर नौकरी, अपना घर, बच्चों की अच्छी शिक्षा और सुरक्षित रिटायरमेंट। लेकिन इन लक्ष्यों को हासिल करने की लागत पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज आर्थिक सुरक्षा केवल अधिक कमाने से नहीं, बल्कि बेहतर वित्तीय योजना, अनुशासित बचत और समझदारी से निवेश करने से मिलेगी। 1 लाख रुपये महीना आज भी भारत के अधिकांश लोगों के लिए एक बड़ी आय मानी जाती है। लेकिन बड़े शहरों में बढ़ती महंगाई, जीवनशैली के खर्च और वित्तीय जिम्मेदारियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल अच्छी सैलरी ही आर्थिक सुरक्षा की गारंटी दे सकती है? आज के भारत में जवाब शायद "नहीं" है। अब आर्थिक सफलता केवल कमाई पर नहीं, बल्कि उस कमाई को संभालने और बढ़ाने की क्षमता पर भी निर्भर करती है।  

surbhi जून 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 30, 2026 0